दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 18.05.16

दलित किशोरी से दुष्कर्म, आरोपी ने दी थी जान से मारने की धमकी – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/india-news/dalit-girl-raped-accused-threatened-to-kill

दलित युवती का पहले गैंगरेप किया, फिर गैंगस्टर बता मार डाला – भोपाल समाचार

http://www.bhopalsamachar.com/2016/05/blog-post_120.html

अगवा कर दलित महिला से गैंगरेप – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/hapur/crime/woman-abducted-by-the-gang-rape

छात्रा से रेप और कत्ल में पुलिस ने पांच संदिग्धों को उठाया – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/allahabad/crime/rape-and-murder-of-a-student-in-police-picked-up-five-suspects

34 में 11 हैंडपंप बंद, पानी की समस्या से जूझ रहे वनांचलवासी – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/kawardha-drinking-water-problem-741996

पानी की कमी ने ली 5 जानें तो कुछ ऐसे मच गया था कोहराम – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/c-85-1217812-pa0363-NOR.html

कहां जाएं आदिवासी, इधर कुंआ…उधर खाई – प्रदेश 18

http://hindi.pradesh18.com/news/chhattisgarh/surguja/chhattisgarh-tribes-are-upset-with-security-forces-and-naxal-1418716.html

बड़े झाड़ के जंगल पर रसूखदारों का कब्जा – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/mahasmund-worth-cultivating-land-741978

बिजली के लिए घेरा महाप्रबंधक कार्यालय – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/sheopur-bijli-ki-khabar-741909

आदिवासी छात्रों ने निकाला जुलूस, पुतला फूंका – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/story/801185.html

अमर उजाला

दलित किशोरी से दुष्कर्म, आरोपी ने दी थी जान से मारने की धमकी

http://www.amarujala.com/india-news/dalit-girl-raped-accused-threatened-to-kill

मैनपुरी के बरनाहल थाना क्षेत्र के एक गांव में दलित किशोरी के साथ 18 दिन पूर्व गांव के ही युवक ने दुष्कर्म किया।

बाद में पीड़िता और उसके परिवार को उनके ही घर में नजरबंद कर दिया। मंगलवार को हिम्मत कर पीड़िता परिवार के साथ थाने पहुंची और पुलिस को घटना की जानकारी देकर रिपोर्ट दर्ज कराई। थाना पुलिस अब आरोपी की तलाश कर रही है।

एक गांव निवासी व्यक्ति की 14 वर्षीय पुत्री के साथ घर के सामने रहने वाले युवक श्यामवीर ने दुष्कर्म किया। घटना 29 अप्रैल की है, जब किशोरी शाम सात बजे खेत पर शौच के लिए जा रही थी, तभी श्यामवीर ने उसे पकड़ लिया और दुष्कर्म किया।

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बाद में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने जब इसकी जानकारी परिवारीजनों को दी तो आरोपी ने उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया। धमकाकर उन्हें घर में ही नजरबंद कर दिया। मंगलवार को पीड़िता परिवारीजनों के साथ किसी तरह थाना बरनाहल पहुंची। तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। 

दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। किशोरी का मेडिकल कराया गया है। आरोपी को पुलिस जल्द गिरफ्तार कर लेगी।

– बरनाहल थानाध्यक्ष

भोपाल समाचार

 दलित युवती का पहले गैंगरेप किया, फिर गैंगस्टर बता मार डाला

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यह कहानी गैर जिम्मेदार मीडिया का एक और उदाहरण है. बीते एक-दो महीनों के दौरान फर्रूखाबाद और आस-पास के जिलों में एक लेडी डॉन की कहानी खूब छापी गई. पुलिस के लिए वह लेडी डॉन थी. एक पिता के लिए अभागी बेटी. पुलिस रिकार्ड में गैंगस्टर थी, लेकिन हकीकत में रेप विक्टिम. मीडिया ने पुलिस की कहानी पर आंख बंद कर उसे लेडी डॉन घोषित करवाने में अपना पूरा योगदान दिया. 

नौ मई को लेडी डॉन मर गई. पुलिस कहती है, वह भागने की कोशिश कर रही थी, मां कहती है न्याय के लिए भटक रही थी. जवान बेटी की मौत पर मां-बाप ने सवाल उठाया, कहा- बेटी की मौत नहीं हुई, हत्या की गई है. इसके बाद पुलिस ने मामले को मर्डर केस में दर्ज किया.

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इस देश की पुलिस किस तरह से हवा में अपराधी पैदा करती है और कैसे अपराधियों को सफेदपोश बना देती है, मीरा की कहानी इसका मुफीद उदाहरण है. फिलहाल इस मामले में एक बसपा नेता समेत सात लोगों को नामजद किया गया है. इसमें एक इंस्पेक्टर सहित पांच पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. अब जाकर इस मामले की जांच शुरू हुई है. एक और बात यह पीड़िता दलित थी, लेकिन इसकी हत्या पर भी दलितों के हिमायती चुप हैं?

आखिर कौन थी लेडी डॉन मीरा

पुलिस जिसे लेडी डॉन कहती थी वह फर्रुखाबाद के मलिकपुर गांव की रहने वाली मीरा जाटव थी. उम्र करीब 26 साल. फर्रुखाबाद के कमालगंज में एक ईंट भट्ठा है. बसपा नेता महेंद्र कटियार इसके मालिक हैं. मीरा के पिता रामदास जाटव इसी भट्ठे पर काम करते थे. 

मीरा भी अपने माता-पिता के काम में यदा-कदा हाथ बंटाती थी. पिता का आरोप है, एक दिसंबर 2014 को महेंद्र के बेेटे गुरदीप ने अपने एक दोस्त के साथ मीरा को अगवा कर उसका बलात्कार किया. दो दिन तक उन्होंने उसे बंधक बनाए रखा. बार-बार उसके साथ बलात्कार किया. किसी तरह वह बलात्कारियों के चंगुल से बच कर भाग निकली.

सुनिए मीरा की कहानी, बाप की जुबानी

मीरा के पिता का कहना है कि मीरा, गुरदीप के चंगुल से निकल कर छिपते-छिपाते वह कमालगंज थाने पहुंची. वहां उसने थानेदार को आपबीती सुनाई लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी. पुलिस वाले बोले, पहले अपने पिता को बुलाओ, तब देखेंगे. इस बीच गुरदीप थाने पहुंच गया.

आरोपी का रसूख और पुलिस की मिलीभगत के कारण मीरा के खिलाफ केस दर्ज हो गया. मीरा के ऊपर पेशेवर चोर होने का आरोप लगा दिया गया. गुरदीप ने बयान दिया कि मीरा उसके घर से दो फोन, एक पिस्टल और पर्स चुराकर भागी है. न कोई जांच, न पड़ताल. मीरा एक घंटे के अंदर जेल के भीतर डाल दी गई.

तीन माह बाद मिली बेल

मीरा तीन माह जेल में रही. मार्च में उसे बेल मिली. लेकिन, कुछ घंटे में ही गुरदीप की शिकायत पर पुलिस ने उसे फिर अरेस्ट कर लिया. इस बार मुकदमा दर्ज हुआ गैंगस्टर एक्ट के तहत. एक बलात्कार पीड़िता संगठित अपराध की आरोपी बन गई. पुलिस की जड़ों में घुसे भ्रष्टाचार ने एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी को लेडी डॉन बना दिया. कमालगंज थाने के इतिहास में मीरा पहली युवती बनी जिस पर गैंगस्टर लगा.

और फिर गिरफ्तारियों का सिलसिला

गैंगस्टर मीरा पैरवी के बाद जेल से छूटी. वकीलों की मदद से 14 जुलाई 2015 को कोर्ट के आदेश पर गुरदीप पर रेप का केस दर्ज हुआ लेकिन, ठोस सबूतों के अभाव में मामला खत्म हो गया. इसके बाद ब्लैकमेलिंग और धमकी के जुर्म में मीरा को तीसरी बार गिरफ्तार कर लिया गया. यह वो कहानी है जो मीरा के पिता रामदास ने हमें बताई.

आइए अब जानते हैं पुलिस की कहानी

बकौल पुलिस मीरा ने 2012 में जरायम की दुनिया में कदम रखा. कन्नौज में उसने एक वकील की रिवॉल्वर लूटी. पुलिस ने इसे बरामद भी किया. वह लुटेरों के गैंग की सरगना बन गई. इस दौरान उसने एक बैंक अफसर को ब्लैकमेल किया. इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हुई.

बड़े साहब से मिलना नागवार गुजरा

इधर, गिरफ्तारी दर गिरफ्तारी से परेशान मीरा ने सोशल एक्टिविस्ट संजीबा से बात की. संजीबा ने सलाह दी कि बड़े पुलिस अफसरों से मिलो तब कुछ बात बनेगी. इसी 29 अप्रैल को मीरा कानपुर डीआईजी (रेंज) नीलभजा चौधरी से मिली. 

उन्हें सारी बात बतायी कि किस तरह से उसे एक झूठे मामले में तीन बार जेल भेजा जा चुका है. उसकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है. उसे गैंगस्टर घोषित कर दिया जबकि गुरदीप के केस से पहले उसका एक भी क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है.

पुलिस के मुताबिक गुरसहायगंज में लूट के चार और फतेहगढ़ में एक केस गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज है। 

मीरा की डीआईजी रेंज से मुलाकात की भनक कमालगंज थाने की पुलिस को लगी. तो उसके होश उड़ गए. पुलिस ने जाल बिछाकर सदरियापुर गांव में 30 अप्रैल को एक बार फिर से मीरा को गिरफ्तार कर लिया गया. उसके पास से आधा किलो चरस की बरामदगी दिखाई. पुलिस के मुताबिक गुरसहायगंज में लूट के चार और फतेहगढ़ में एक केस गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज है.

30 तारीख को ही कोर्ट में पेश करने के बाद उसे वापस रात में जेल ले जाया जा रहा था. लेकिन, पुलिस के मुताबिक रास्ते में उसने भागने की कोशिश में जीप से छलांग लगा दी, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गई. 

उसे कानपुर के हैलट हॉस्पिटल में उसे भर्ती कराया गया. यहां वह 4 मई को कोमा में चली गई. डॉक्टर्स ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. और अंतत: नौ मई को मीरा की मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके शरीर और सिर पर गंभीर चोटें लगने की बात सामने आई है.

मीरा की मां कहती हैं, ‘पुलिस और आरोपियों की कानपुर डीआईजी से शिकायत करके जब मीरा आ रही थी तब सालिगराम वर्मा, महेंद्र कटियार, गुरदीप, सिपाही नारायणी देवी और अंकेश कटियार उसे अपनी गाड़ी में उठा ले गए. जमकर मारा, पीटा और जब वह घायल हो गई तो कहानी गढ़ ली कि जीप से कूद गई.’

मीरा की मौत मामले में कमालगंज पुलिस ने बसपा नेता, उसके बेटे एवं कमालगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष सालिगराम वर्मा सहित सात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है. इसमें पांच नामजद हैं, जबकि दो अज्ञात. बसपा नेता महेंद्र का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. फिलहाल मामले की जांच शुरू हो गई है.

कहां है दलित राजनीति करने वाले

इस पूरे हत्याकांंड का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि किसी भी दल ने इसे इस आपराधिक कृत्य के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत महसूस नहीं की. सत्ताधारी दल को अगर छोड़ भी दें तो राज्य में बसपा दलितों की सबसे बड़ी पार्टी है उसने भी इसे छूने की जहमत नहीं उठाई. दलितों की आक्रामक राजनीति कर रही भाजपा भी बड़ी आसानी से चुप्पी साधे हुए है. बलात्कार की एक पीड़िता दलित महिला की मौत हो चुकी है, सूबे में दलित चेतना यात्राओं की धूम जारी है, अगले साल विधानसभा चुनाव है.

अमर उजाला

अगवा कर दलित महिला से गैंगरेप

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/hapur/crime/woman-abducted-by-the-gang-rape

बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में एक दलित महिला को अगवा कर गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि जब महिला शिकायत करने के लिए जिला मुख्यालय आ रही थी तो दबंगों ने उसे रोक लिया और 50 हजार रुपये लेकर फैसला करने का दबाव बनाया।

दबंगों ने पुलिस से शिकायत करने पर महिला को जान से मारने की भी धमकी दी है। उधर, पुलिस ने घटना की जानकारी से मना किया है। मिली जानकारी के मुताबिक गांव निवासी एक दलित महिला सोमवार शाम जंगल में लकड़ी बीनने जा रही थी।

इसी दौरान रास्ते से गांव के ही चार दबंगों ने महिला को अगवा कर लिया और गांव के पास से निकल रही नहर पर ले गए। आरोप है कि यहां दबंगों ने उससे गैंगरेप किया। जब महिला ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की।

किसी प्रकार महिला युवकों के चंगुल से छूटकर घर आई और परिजनों को आपबीती बताई। मंगलवार सुबह परिजन महिला के साथ जिला मुख्यालय पर शिकायत करने जा रहे थी तभी गांव के दबंगों ने ग्रामीणों की मदद से परिजनों को गांव के बाहर ही रोक लिया।

दबंगों 50 हजार रुपये लेकर समझौते का दबाव बनाया और शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। इस पर महिला के परिजन डर गए और बिना शिकायत किए ही गांव लौट गए।

मामले में एसओ बाबूगढ़ विजय बहादुर सिंह का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं है। थाने पर कोई शिकायत करने के लिए नहीं आया है। यदि कोई तहरीर लेकर आएगा तो उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

अमर उजाला

 छात्रा से रेप और कत्ल में पुलिस ने पांच संदिग्धों को उठाया

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अल्लापुर में छात्रा का रेप और हत्याकांड के खुलासे के लिए सीओ कर्नलगंज के नेतृत्व में दो टीम गठित की गई है। जिस ढंग से छात्रा का रेप के बाद कत्ल किया गया और उसके शव को ठिकाने लगाया। उससे साफ है कि आरोपी आसपास के ही और वे नशेड़ी है। पुलिस ने इस मामले में इलाके के पांच संदिग्ध स्मैकियों को उठाया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। लेकिन पूछताछ में पुलिस को उनसे हत्यारोपियों के बारे में कुछ सुराग मिल सकता है। हत्याकांड में एक से अधिक आरोपियों के शामिल होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में पुलिस ने घटनास्थल के आसपास उन लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है जो घटना के बाद से फरार चल रहे हैं। दलित छात्रा का रेप के बाद हत्या कर देने की घटना ने शहरियों को दहला दिया है। घटना को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं में भारी आक्रोश है। 

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के  सदस्य मुकुंद तिवारी ने मंगलवार को राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया। ज्ञापन के जरिए  पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये सहायता देने की मांग की। उन्होंने कि दलित गरीब परिवार की छात्रा की बेरहमी से हत्या हुए 48 घंटे होने के बाद भी अभी तक दोषी पुलिस अफसरों की गिरफ्तारी न होना पुलिस के लिए शर्म की बात है। यह पुलिस की घोर लापरवाही है। आइसा ने दुष्कर्म और नृश्ंास हत्या के विरोध में बालसन चौराहे पर प्रदेश सरकार का पुतला फूंका। प्रगतिशील समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील कुशवाहा ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना दी।

शहर कांग्रेस कमेटी के  मीडिया प्रभारी मुकुल दीक्षित ने कहा कि पीड़ित परिवार को मुआवजा मिले। वरिष्ठ पार्षद शिवसेवक सिंह ने किा कि पीड़ित परिवार बेहद गरीब है। जिसके चलते उनके घर में शौचालय नहीं है। प्रशासन से पीड़ित के घर शौचालय बनाने की मांग का ज्ञापन दिया। उन्होंने बताया कि ज्ञापन पर प्रभारी अधिकारी ने नगर आयुक्त को स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शौचालय बनाने और आसरा योजना के तहत घर की मरम्मत का निर्देश दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव हसीब अहमद और श्रीशचंद्र दुबे के  नेतृत्व में एसएसपी कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने थाली पीटकर प्रदर्शन किया।

नई दुनिया

 34 में 11 हैंडपंप बंद, पानी की समस्या से जूझ रहे वनांचलवासी

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चिल्फीघाटी (निप्र)। वनांचल में गर्मी अपने शबाब पर है। ऐसे में पेयजल व निस्तारी की समस्या भी बढ़ गई है। वनांचल के 12 गांवों में 34 हैंडपंप है। इसमें 11 हैंडपंप बंद है, जिसके चलते वनांचलवासी पानी के लिए 2 से 4 किमी की दूरी तय कर रहे है।

क्षेत्र की नदी, नाले, तालाब, स्टापडैम व पोखर सूख चुके है, जिससे मवेशियों को भी भटकना पड़ रहा है। पेयजल के नाम पर सरकार गांव -गांव में हैंडपंप तो खोद रही है, लेकिन वर्तमान में कई हैंडपंप खराब पड़े है। वहीं कई हैंडपंपों से आधे घंटे हैंडल मारने पर पानी निकलता है। वनांचल के पहाड़ी क्षेत्रों में बसे बैगा आदिवासियों को पानी के लिए चना चबाना पड़ रहा है। वनांचल ग्राम खिचराही, कबरीपथरा, सुरतिया, बुढ़ीखम्हार, दुलदुला, माचापानी व तेन्दुपड़ाव जैसे गांवों में एक हैंडपंप के सहारे सैकड़ों लोग पानी पी रहे हैं।

यहां के हैंडपंपों ने अब जवाब देना शुरू कर दिया है। ग्राम सिवनीकला में एक हैंडपंप से 150 लोग निस्तारी करते हैं, लेकिन अब हैंडपंप बंद होने से दूसरे गांव जो कि एक किमी दूर है वहां से ग्रामीणों को पानी लाना पड़ रहा है। इसी प्रकार ग्राम दुलदुला में एक हैंडपंप के सहारे दो सौ लोग पानी ले रहे है। यही नहीं स्कूलों में चलाए जा रहे मध्यान भोजन के बाद बच्चों को थाली धोने के लिए एक किमी का सफर करते हैं। जबकि ग्रामीण स्कूल में एक जल स्रोत की मांग कई बार कर चुके है।

नलजल योजना का नहीं मिल रहा लाभ

सरकार गांव-गांव को नल जल योजना से जोड़ने की बात तो कहती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। वनांचल के 5 गांव कुंडपानी, शंभूपीपर, आमापानी, झलमला, बोक्करखार में ही नल जल योजना के तहत 500 मीटर तक पाईप लाईन बिछाया गया था, लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी एक बूंद पानी ग्रामीणों को नहीं मिला है। जबकि जिम्मेदार विभाग इस बात से वाकिब है। वनांचल के बैगा आदिवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। सरकार योजना बनाती तो है लेकिन सही क्रियान्वयन के अभाव में ऐसे योजना वनांचल में दम तोड़ रही है। आजादी के 67 वर्षों के बाद भी क्षेत्र के बैगा आदिवासी झिरिया का गंदा पानी पी रहे हैं। चिल्फीघाटी के वार्ड क्रमांक 1, 2, 4, 9, 10, 13, 19 व 20 में नल जल योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरपंच, सचिव केवल आश्वासन दे रहे है।

मवेशियों को भी नहीं मिल रहा पानी

वनांचल में नदी, नाले व तालाब सूख गए हैं। ऐसे में क्षेत्र के मवेशियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। क्षेत्र के निवासी आए दिन पानी के लिए 4-5 किमी दूर दूसरे गांवों का शरण ले रहे है, जिससे गाय, बैल, बकरी गुम हो जाने का डर बना रहता है। ग्राम मांदीभाटा के ग्रामीणों ने बताया कि गांव में किसी भी प्रकार का जल स्रोत नहीं है, ऐसे में गांव से एक किमी दूर जंगल नदी में जाना पड़ता है। जंगली क्षेत्र होने से महिलाओं को बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। सरकार लाखों रुपए खर्च कर क्षेत्र में जगह-जगह स्टॉपडैम, चेकडैम, वाटरहोल, तालाब तो बनाती है, लेकिन पानी की कमी के चलते ये सभी जल स्रोत सूख चुके ह। ऐसे में जंगली जानवरों को क्या परेशानी होती होगी सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं।

‘हैंडपंप सुधार के लिए कर्मचारी लगे हुए है, जहां कहीं भी शिकायत मिलती है कर्मचारी पहुंचकर सुधार करते हैं।’

-बीएन भोयर, ईई पीएचई विभाग कबीरधाम

दैनिक भास्कर

 पानी की कमी ने ली 5 जानें तो कुछ ऐसे मच गया था कोहराम

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जींद। जींद जिले के गांव निडाना में पानी की किल्लत इतनी भयंकर हो गई कि गांव के पांच युवकों की जान चली गई। दरअसल गांव की दलित बस्ती के पास स्थित कुआं वर्षों से रद्द पड़ा था, जिसे बस्ती के युवाओं ने चालू करने का फैसला लिया। सोमवार सुबह जब कुएं की सफाई की जा रही थी तो इसमें बन चुकी जहरीली गैस की वजह से एक के बाद एक पांच युवक मौत के आगोश में चले गए। 

खाली कुएं को भरकर 6 घंटे में निकाला शवों को…

– गौरतलब है कि गर्मी के दिनों में अक्सर पानी की किल्ल्त पैदा हो जाती है। इसी तरह के हालात गांव निडाना में भी पैदा चले थे।

– यहां रविवार को ही दलित बस्ती के 10-15 युवाओं ने मिलकर पास ही स्थित कुएं को साफ करके चालू करने का फैसला लिया था।

– बरसों से बंद पड़े होने के कारण कुएं में जहरीली गैस बनी हुई थी, सोमवार सुबह जब कुएं को साफ करने के लिए काम शुरू किया तो एक युवक सुबह रस्सी के सहारे कुएं में उतरा। 

– उसने अंदर जाकर कोई जवाब नहीं दिया तो फिर एक युवक उसे बचाने कुएं में गया। इस तरह एक के बाद एक पांच लोग कुएं में उतरते रहे और बेहोश होकर गिरते रहे।

– उन्हें निकालने के लिए बचाव दल मौके पर पहुंचा, वहीं डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस बल भी गांव में मौजूद है। 

– बताया जा रहा है कि दो युवकों के शव कुएं में उतरा रहे हैं, जबकि बाकी तीन का सुराग नहीं था। आखिरकार कुएं में पानी भरकर 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी शवों को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया।

 ये हैं कुएं में उतरे युवकों के नाम, दो एक ही परिवार के

कुएं में उतरे युवकों की पहचान 35 वर्षीय महिपाल, 24 वर्षीय दिनेश, 23 वर्षीय संजय, 18 साल के सुखचैन उर्फ टोनी और 17 साल के मोहन के रूप में हुई है। इनमें से दिनेश और मोहन आपस में चाचा-भतीजा थे।

– बताया जा रहा है कि बेहोश हुए मोहन को बचाने के लिए उसका चाचा दिनेश और बाकी सब ऐसे ही कुएं में उतरे थे।

प्रदेश 18

 कहां जाएं आदिवासी, इधर कुंआ…उधर खाई

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कांकेर जिले में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच आम आदिवासी पिसने को मजबूर है. एक ओर जहाँ ग्रामीणों को माओवादी निशाना बना रहे है तो वहीं दूसरी ओर सुरक्षा बलों द्वारा ग्रामीणों को झूठे मामलों में फंसाने के आरोप लग रहे है.

पखांजूर थाना क्षेत्र के संगम गांव के रहने वाले 35 वर्षिय पांडूराम कोरचा और बारकोट निवासी 21 वर्षिय रामलाल ध्रुवा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोप है कि सीमा सुरक्षा बल के जवान हरिकेश प्रसाद की संगम बाजार में अज्ञात नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

इस घटना में दोनों ग्रामीण शामिल थे. पुलिस का दावा है कि पकड़े गए आरोपियों से मोटर साइकिल और हथियार बरामद किए गए हैं. हालांकि परिजन इस दावे पर सवाल उठा रहे है.

उनके मुताबिक पांडूराम कोरचा ग्राम पटेल है और वह अपने खेत में काम कर रहा था तभी हथियारबंद जवान उसे अपने साथ ले गए और तीन दिन तक अवैध हिरासत में रखने के बाद नक्सली बताकर गिरफ्तार कर लिया.

वहीं, रामलाल ध्रुवा अपने घर में सो रहा था आधी रात को पुलिस उसे उठाकर थाने ले आई और तीन दिन बाद नक्सली बताकर गिरफ्तार कर लिया. ग्रामीणों के मुताबिक जिस मोटर साइकिल को आरोपियों से जब्त बताया जा रहा है.

उसे घर से पुलिस उठाकर ले गई है. ग्रामीणों ने पुलिस पर झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाया है. साथ ही जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जांच कराने की गुहार लगाई है.

नई दुनिया

बड़े झाड़ के जंगल पर रसूखदारों का कब्जा

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पिथौरा (निप्र)। शहर के आसपास ग्रामीण अंचल में इन दिनों शासकीय काबिल काश्त भूमि, बड़े झाड़ के जंगल तथा घास भूमि की खरीदी-बिक्री का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। जबकि राज्य शासन इन भूमियों को संरक्षित करने में लगा है। गरीब आदिवासियों को मिले काबिल काश्त भूमि की भी अब बड़े पैमाने पर खरीदी कर रसूखदार कब्जा कर रहे हैं। खरीदी के इस खेल में गरीबों को नाम मात्र का रकम देकर धोखे में रखकर पूरे जमीन अपने नाम कर रहे हैं।

राजस्व निरीक्षक मंडल पिथौरा अंतर्गत पटवारी हल्का नंबर 18 ठाकुररिया खुर्द में कुछ ऐसा ही दिल्ली के एक रसूखदार व्यक्ति ने किया है। 25 एकड़ भूमि हथिया कर फार्म हाउस निर्माण कर अब अनार की खेती प्रारंभ कर दिया है। इसी भूमि से लगे करीब 25 एकड़ भूमि की खरीदी कर फार्म हाउस का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उक्त भूमि के एवज में नाम मात्र की राशि देकर जमीन हथिया ली गई है।

इन्हें मिली थी काबिल काश्त भूमि

ग्राम के अति पिछड़े आदिवासी गणेशराम बरिहा का 5 एकड़, मधु कोंध ढाई एकड़, मानसिंग बरिहा 5 एकड़, अंजोर बरिहा 2 एकड़, मायाराम बरिहा 4 एकड़, यादसिंग नेताम 4 एकड़, डोडका बरिहा 2 एकड़, जगबंधु कोंध 7 एकड़ जमीन काबिल कास्त के रूप में मिली थी। जिसे दिल्ली के रसूखदार ने पिथौरा के एक व्यवसायी से संपर्क कर जमीन खरीदी-बिक्री का काम किया है। करीब 60 एकड़ भूमि में फार्म हाउस निर्माण किया जा रहा है।

एक लाख में 7 एकड़ भूमि हथिया ली

ग्राम ठाकुरदिया से लगे बस्ती केकराखोल के आदिवासी कृषक जगबंधु कोंध की 7 एकड़ भूमि को मात्र एक लाख रुपए देकर हथिया ली गई। जगबंधु के मुताबिक एक एकड़ भूमि को एक लाख रुपए में सौदाकर महासमुंद ले जाकर झांसा देते हुए तीन एकड़ की बिक्री में हस्ताक्षर करवा लिया गया। पिथौरा के ही एक भू-माफिया द्वारा यह खेल खेला जा रहा है। गरीब आदिवासियों की जमीन को झांसे में रखकर हथिया लिया जा रहा है।

काबिल काश्त भूमि की नहीं होती बिक्री

लंबे समय से शासकीय भूमि पर कब्जा कर कृषि करने वाले गरीब आदिवासियों को शासन द्वारा काबिज किसानों को काबिल काश्त भूमि घोषित कर पट्टा दिया गया था। उक्त भूमि की किसी भी स्थिति में बिक्री नहीं हो सकती। इसी भूमि को निशाना बनाकर गरीब आदिवासियों को फंसाकर उनके काबिल काश्त भूमि को अपने परिचित के नाम बैनामा सौदा कर खरीदी की गई है। ताकि किसी तरह के फंसने की नौबत न आए।

शासकीय भूमि पर तान दिया फार्म हाउस

उपरोक्त आदिवासियों के नाम काबिल कास्त भूमि थी इसके अलावा आस-पास के बड़े झाड़ के जंगल, घासभूमि पर भी इन आदिवासियों का कब्जा था। अब काबिल काश्त भूमि को गलत ढंग से झांसा देकर खरीदने के बाद बड़े झाड़ के जंगल, घासभूमि तथा शासकीय वन भूमि पर भी कब्जा कर फार्म हाउस बना दिया गया है। अनार के हजारों नग पौधे रोपित कर दिए गए हैं। पिछले दो वर्षों से बनाए गए इस फार्म हाउस पर किसी भी राजस्व कमियों को झांकने की फुर्सत नहीं मिली।

बिना अनुमति कटवा दिए हजारों पेड़

दो वर्ष पूर्व करीब 25 एकड़ भूमि में लगे विभिन्न प्रजातियों के इमारती व फलदार वृक्षों की बिना अनुमति के हजारों नग पेड़ों को कटवा दिया गया। अब इस फार्म हाउस से लगे करीब 25 एकड़ काबिल काश्त एवं अन्य भूमि की खरीदी कर जेसीबी एवं ट्रैक्टर की मदद से समतल किया जा रहा है। इस भूमि पर लगे पेड़ों की भी बिना अनुमति कटाई कराकर फार्म हाउस का निर्माण किया जा रहा है।

तहसीलदार ने किया मौका निरिक्षण

खबर मिलने के बाद तहसीलदार वीआर महस्के ने हल्का पटवारी को साथ लेकर मौका का निरीक्षण किया। मौके पर पड़े वृक्षों को अवशेष को देखा तथा नक्शा-खसरा मिलान करने पर कई स्थानों को घास भूमि, बड़े झाड़ का जंगल एवं काबिल कास्त भूमि पाया है। पूर्व निर्मित फार्म हाउस तथा नवीन निर्माणाधीन स्थल के संयुक्त सीमांकन एवं चिन्हांकन करने के लिए तीन पटवारियों की समिति गठित कर सीमांकन कराने की बात कही गई है। साथ ही मौके पर पड़े वृक्षों की जब्ती कोटवार के सुपुर्द में दिया गया है।

‘पटवारियों के सीमांकन रिपोर्ट आने के बाद गलत पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।’

-व्हीआर मस्के, तहसीलदार पिथौरा

नई दुनिया

बिजली के लिए घेरा महाप्रबंधक कार्यालय

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/sheopur-bijli-ki-khabar-741909

श्योपुर। केरका-भोजका क्षेत्र के ग्रामीणों ने मंगलवार को बिजली कंपनी के महाप्रबंधक का कार्यालय घेर लिया। ग्रामीणों की नाराजगी इसलिए थी क्योंकि जब से गांव बसा है तब से गांव में बिजली नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार दो साल पहले उन्होंने अपने खर्चे पर खंबे लगाए थे, फिर भी बिजली कंपनी गांव को बिजली नहीं दे पा रही।

मंगलवार की सुबह 11 बजे की बिजली कंपनी के महाप्रबंधक कार्यालय पर केरका, भोजका, सारसिल्ला व सावडी गांव के 100 से ज्यादा ग्रामीण इकठ्ठा हो गए। ग्रामीण रामसिंह, श्यामलाल, रामदीन, बनवारी, आदिवासी आदि ने बताया कि चारों गांव में 1200 से ज्यादा घर हैं। इन गांवों को बसे 60 से 70 साल हो गए, लेकिन गांवों में अब तक बिजली का नामोनिशान नहीं हैं। गेहूं पिसवाने के लिए भी पांच किलोमीटर दूर दूसरे गांव में जाना पड़ता है।

वन विभाग ने रोका उजालाःबिजली कंपनी के अनुसार केरका, भोजपा व सारसिल्ला गांव में बिजली लाइनें बिछाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन सावड़ी गांव जंगल से घिरा है। इसलिए वन विभाग यहां तक खंबे लगाने व बिजली लाइन बिछाने में आपत्ति कर रहा है। ग्रामीण श्यामलाल के अनुसार केरका और भोजका गांव के लोगों ने चंदा कर लाखों रुपए जुटाए और उस राशि से गांव तक बिजली के खंभे लगाए। इन खंभों को लगे हुए दो साल से ज्यादा का समय हो गया, लेकिन बिजली कंपनी अब तक तार बिछाकर गांव तक बिजली सप्लाई शुरू नहीं कर पाई है।

प्रभात खबर

आदिवासी छात्रों ने निकाला जुलूस, पुतला फूंका

http://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/story/801185.html

रांची: आदिवासी छात्रावासों को विश्वविद्यालयों को सौंपने के निर्णय का विरोध करते हुए आदिवासी विद्यार्थियों ने राज्यपाल के शिक्षा सलाहकार आनंद भूषण व रांची कॉलेज की प्राचार्या डॉ मंजू सिन्हा का पुतला फूंका़  आदिवासी छात्र संघ (एसीएस) के अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा कि सरकार पठन-पाठन के केंद्रों को सीधे बंद नहीं कर उन्हें धीरे-धीरे समाप्त करना चाहती है़ आदिवासी विरोधी मानसिकता रखनेवाले अफसरों व शिक्षकों को अनुसूचित क्षेत्र से बाहर रखा जाये़.

इससे पूर्व विद्यार्थियों ने आदिवासी छात्र संघ के बैनरतले आदिवासी हॉस्टल से जुलूस निकाला, जो बिहार क्लब चाैक तक गया़  वहां पुतला दहन किया गया़.

डॉ मंजू सिन्हा पर लगाया आदिवासी विरोधी मानसिकता का आरोप : विद्यार्थियों ने कहा कि डॉ मंजू सिन्हा आदिवासी विरोधी मानसिकता की है़ं इस साल उन्होंने 2223 एसटी/ एससी छात्राओं का छात्रवृत्ति फॉर्म अग्रसारित नहीं किया है़  जमशेदपुर में उनके इस तरह के क्रियाकलापों का संज्ञान अनुसूचित जनजाति आयोग ने लिया था़   आदिवासी छात्रावासों का संचालन ट्राइबल सब प्लान के पैसों से होता है, इसलिए इसके परामर्श व सहमति के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता़ हर साल टीएसपी निधि का करोड़ों रुपया केंद्र को लौट जाता है. विवि के विशेष कॉलेज द्वारा अंगीभूत होने की स्थिति में वैसे कॉलेजों के विद्यार्थी, जहां छात्रावास नहीं हैं, इनमें रहकर शिक्षा पाने से वंचित हो जायेंगे़ विश्वविद्यालय स्वयं आर्थिक संकट से जूझ रहा  है.  ऐसे में इन छात्रावासों की स्थिति और दयनीय हो जायेगी़  राज्यपाल व राज्य सरकार इस मुद्दे पर नीतिगत निर्णय ले़ .

जुलूस व प्रदर्शन में कार्तिक उरांव, अनूप टोप्पो, सुमन एक्का, पंकज उरांव, अरविंद टोप्पो, दुर्गेश बेसरा, सुषमा कुजूर, प्रियंका उरांव, सीमा कुजूर, इंदु कुमारी, वीरेंद्र उरांव, अमित उरांव, सुषमा एक्का व अन्य शामिल थे़

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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