दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 16.05.16

रामगढ़ में दलित युवती को पीटा, पेड़ से लटकाया और आग से दागा – लाइव हिन्दुस्तान

http://www.livehindustan.com/news/jharkhand/article1-dalit-young-girl-punished-for-talking-on-mobile-533791.html

दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारा – प्रेस नोट

http://www.pressnote.in/Banswara-News_312427.html

आरक्षण समाप्त करना दलित विरोधी मानसिकता – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/vaishali/story/800444.html

भाजपा पार्षद के बेटे ने दुकानदार को पीटा – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/bhind-marpeet-740826

बिना अनुमति रैली करने पर खदेड़ा – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/saharanpur/repulsed-the-rally-without-permission

दलित हैं तो साधु होने के बावजूद दलित ही रहेंगे – हस्तक्षेप

http://www.hastakshep.com/uncategorized/2016/05/13/amit-shahs-sahbhoj-and-cum-bath-with-dalit-sadhus#.VzlL8miKRdi

लाइव हिन्दुस्तान

रामगढ़ में दलित युवती को पीटा, पेड़ से लटकाया और आग से दागा

http://www.livehindustan.com/news/jharkhand/article1-dalit-young-girl-punished-for-talking-on-mobile-533791.html

रामगढ़ जिले के रजरप्पा क्षेत्र के बोंगई, कोरियांटांड़ में एक दलित युवती को मोबाइल फोन पर बात करने की जो सजा मिली, उसे सुनकर दिल दहल जाएगा। पेड़ पर लटकी युवती के शरीर को भीड़ दाग रही थी। पीड़िता सबसे बख्श देने की गुहार करती रही पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। युवती के माता-पिता बचाने गए तो ग्रामीणों ने उनको भी पीटा। घटना के बाद से युवती की मां गायब है।

घटना के समय युवती का भाई घर पर नहीं था। रविवार को जब वह घर लौटा तो बहन और पिता के साथ रजरप्पा थाने पहुंचा। युवती ने थाना प्रभारी को पूरी कहानी बताई। उसने गांव के ही रथू गंझू, रघु गंझू, अमृतलाल गंझू, लगनू गंझू, जिबू गंझू, बिसू गंझू आदि पर मारपीट करने और जलाकर जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करायी।

 मोबाइल से बात करने की तालिबानी सजा

युवती को मोबाइल से बात करते देख उसके चचेरे भाइयों ने गांव के युवकों के सहयोग से उसे पकड़ लिया। युवकों ने मोबाइल पर बात कर रहे व्यक्ति के बारे में पूछा, लेकिन युवती ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। इसके बाद युवकों ने युवती को पीटना शुरू कर दिया। भुक्तभोगी परिवार अत्यंत गरीब है। युवती पास के ही एक ईंट-भट्ठे पर काम करती है।

प्रेस नोट

दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारा

http://www.pressnote.in/Banswara-News_312427.html

किशनगढ़बास । सांथलका में दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारकर मारपीट करने एवं हथियारों की नोक पर दूल्हे की रुपयों की माला लूट लेने का आरोप लगाया है। घटना की थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। गांव साथलका निवासी गणपतराम ने पुलिस में रिपोर्ट दी कि 12 मई को उसकी पुत्री पिंकी की शादी पूरण जाति मेघवाल निवासी सम्मन का बास (नौंगांवा) के साथ तय थी। 12 मई को बारात सांथलका के अब्दुल के फार्म पर रोकी गई। इसी दाैरान कांकरा निवासी वीरपाल ने दूल्हे को जबरन घोड़ी से उतारा।

ट्रैक्टर में करीब 10-12 आदमियों के साथ आया। उनके हाथों में लाठी, फरसी, बंदूक आदि हथियार थे। सभी ने एक राय होकर निकासी के आगे ट्रैक्टर लगा दिया एवं बारात रोक दी डीजे भी बंद करा दिया जातिसूचक शब्द बोले और दूल्हे को जबरन घोड़ी से उतार दिया। जब इन लोगों को मना किया तो इन लोगों ने बारातियों के साथ मारपीट कर दी एवं दूल्हे के गले से 51 हजार रुपए के नोटों की माला भी लूट ली। साथ ही धमकी दी कि दूल्हे को पैदल-पैदल बिना बाजे के अपने घर ले जाओ।

प्रभात खबर

आरक्षण समाप्त करना दलित विरोधी मानसिकता

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हाजीपुर : सरकारी सेवाओं में प्रोन्नति समाप्त करना दलित विरोधी मानसिकता का परिचायक है. यह बात अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी संघ के जिला सचिव ललन राम ने कही. प्रोन्नति समाप्त किये जाने के विरोध में संघ के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आंबेडकर विकास मंच के साथ संयुक्त रूप से निकाले गये मशाल जुलूस को संबोधित करते हुए यह बात कही. शहर के आंबेडकर भवन से दोनों संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मशाल जुलूस निकाला,

जो शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए गांधी चौक पर पहुंच सभा में तब्दील हो गया. संघ के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार पासवान की अध्यक्षता में संपन्न सभा को संबोधित करनेवालों में नंदलाल भगत, सुजीत कुमार चौधरी, प्रकाश चौधरी, अमरेंद्र कुमार आजाद, महेंद्र पासवान, महेंद्र भगत, दिलीप रजक, कमलेश पासान, गीता देवी, शीला देवी, रणविजय चौरसिया, जयमंती देवी प्रमुख हैं.

नई दुनिया

भाजपा पार्षद के बेटे ने दुकानदार को पीटा

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भिंड। राज टॉकीज वाली गली में बर्तन की दुकान पर वार्ड 32 से पार्षद के बेटे ने दुकानदार की सरिए से मारपीट कर दी। मारपीट में दुकानदार बुरी तरह से जख्मी हुआ है। घटना के बाद पीड़ित दुकानदार संजय उर्फ संजू जैन ने पार्षद के बेटे दीपक शिवहरे के खिलाफ सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। इसी दौरानर दुकान पर बर्तन खरीद रही महिला अनीता पत्नी कप्तान आदिवासी ने भी पार्षद के बेटे पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है। घटना रविवार दोपहर 2 बजे की है। सिटी कोतवाली पुलिस ने पार्षद के बेटे के खिलाफ कार्रवाई की है।

यह है पूरा मामलाः शहर के राज टॉकीज वाली गली में दोपहर 2 बजे बर्तन की दुकान पर दुकान मालिक संजय जैन अनीता आदिवासी से बर्तनों को लेकर चर्चा कर रहे थे। दरअसल अनीता बर्तनों का फुटकर व्यापार करती हैं और वह संजय की दुकान से बर्तन खरीदकर बेचती हैं। बातचीत के दौरान दीपक शिवहरे हाथ में सरिया लेकर आया और दुकानदार के साथ मारपीट करने लगा। जब अनीता ने विरोध किया तो दीपक ने उसके साथ अभद्रता करते हुए जान से मारने की धमकी दी। मारपीट की घटना में दुकान मालिक संजय जैन घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में एडमिट कराया गया है।

इनका कहना है

दुकानदार की शिकायत पर पार्षद के बेटे दीपक शिवहरे व दो अन्य लोगों के खिलाफ अदम चेक काटा है। मेडीकल रिपोर्ट आने के बाद कायमी की जाएगी।

कमलसिंह, एचसीएम, सिटी कोतवाली

अमर उजाला

बिना अनुमति रैली करने पर खदेड़ा

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सहारनपुर में प्रशासन की परमिशन लिए बिना गांधी पार्क में रैली करने जा रहे दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लाठियां फटकारकर खदेड़ दिया। साथ ही कइयों को हिरासत में भी लिया।

पुलिस की कार्रवाई के बाद नाराज लोग डीएम से मिलने उनके आवास पहुंचे थे, मगर मुलाकात नहीं हो सकी। दलित संगठनों के कार्यकर्ता रविवार की पूर्वाह्न करीब 11 बजे से ही गांधी पार्क पहुंचना शुरू हो गए थे।

इस दौरान पुलिस को पता चला कि गांधी पार्क में रैली के लिए कोई परमिशन नहीं ली गई है। ऐसे में एएसपी सुनीति, नगर कोतवाली प्रभारी संजय पांडेय, कोतवाली सदर बाजार प्रभारी सुशील दुबे, थाना कुतुबशेर प्रभारी शैलेंद्र शर्मा मयफोर्स गांधी पार्क पहुंचे।

उन्होंने अंबाला रोड से गांधी पार्क की ओर एंट्री कर रहे दलित युवकों को रोकने का प्रयास किया मगर वह नहीं रुके। इसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें रोका। इस दौरान पुलिस ने लाठियां भी भांजी, जबकि कइयों को हिरासत में भी लिया।

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पुलिस का कहना है कि गांधी पार्क मैदान में रैली के लिए प्रशासन की ओर से किसी को अनुमति नहीं दी गई थी। इसकी वजह से उन्हें युवकों की भीड़ को वहां से खदेड़ना पड़ा। इतना ही नहीं, गांधी पार्क में रैली न होने देने के बाद बड़ी संख्या में लोग डीएम से मिलने पहुंचे थे, मगर उनकी मुलाकात नहीं हो सकी।

उधर, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से देहरादून रोड स्थित संत रविदास छात्रावास में मंडलीय सम्मेलन में समीति के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरपी सिंह ने सपा सरकार पर दलित अधिकारियों और कर्मचारियों को डिमोट करने का आरोप लगाया।

कहा कि आरक्षण बचाने के लिए संगठन सड़क से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लडे़गा। कोई भी कुर्बानी यदि देनी पड़ी तो वह भी देंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से 117वें संविधान संशोधन बिल को पास करने की मांग की।

अन्यथा की स्थिति में देशव्यापी आंदोलन करने की चेतावनी दी। प्रांतीय महामंत्री अमरनाथ गौतम, प्रांतीय उपाध्यक्ष राकेश गौतम, जिलाध्यक्ष साधूराम , अतर सिंह, राजेश कुमार, कांशीराम, ज्ञानेंद्र गौतम, अमित, विनेश, राजकुमार, बाबूराम रहे। 

संत रविदास छात्रावास में सम्मेलन करने के बाद आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष आरपी सिंह के नेतृत्व में छात्रावास से घंटाघर और कोर्ट रोड को होते हुए कलक्ट्रेट तिराहे तक रैली निकाली। रैली में शामिल लोग सिर पर टोपी और हाथों में तख्तियां लिए हुए थे।

आंशिक जाम लगाने के बाद उन्होंने कलक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। यहां प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया।

हस्तक्षेप

दलित हैं तो साधु होने के बावजूद दलित ही रहेंगे

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हिंदू परंपरा के मुताबिक संन्यास का मतलब है कि पूर्व आश्रम यानी शैशव और यौवन के साथ-साथ ग्राहस्थ्य आश्रमों का त्याग। इसलिए संन्यासी बनने से पहले अपना ही श्राद्धकर्म करने का प्रावधान है। इसीलिए साधु की कोई जाति नहीं होती।

साधु होने का मतलब है जाति वर्ण से मुक्ति। हिंदुत्व के दलित एजेंडे के मुताबिक साधु भी मनुस्मृति अनुशासन से मुक्त नहीं हैं और वे अगर दलित हैं तो साधु होगें तो दलित साधु ही कहलावेंगे।

इस देश में हिंदुत्व का अमृत चखने वालों के लिए मरणपर्यंत जाति का बंधन तोड़ पाना अंसभव है। भारत के राष्ट्रपति बन जाने के बावजूद उनकी कुल पहचान दलित है। उसी तरह जैसे चाहे स्त्री किसी भी चरमोत्कर्ष को छू ले, वह दासी और शूद्र है। बलात्कार और भोग के लिए शिकार देहमात्र, जिंदा मांस का दरिया।

दलित के चरण चिन्ह जहां भी पड़े, उसे गंगाजल से पवित्र करना बाकी हिंदुत्व का पहला कर्तव्य है। वरना हिंदुत्व अपवित्र।

दलित राजनेता हो या दलित पत्रकार, दलित साहित्यकार हो या दलित उद्यमी, दलित कोई भी उपलब्धि हासिल कर लें, आईएएस टाप करलें, अंतरिक्ष पर पहुंचे, संत रविदास की तरह परम संत और विद्वान हो, अपने माध्यम और विधा में सर्वश्रेष्ठ हो , उसकी कुल औकात यही है कि वह आखिरकार दलित है।

सिंहस्थ से यही संदेश मिला है। जहां दलित साधुओं के साथ हिंदुत्व वैदिकी अश्वमेध के सिपाहसालार ने सहस्नान सहभोज करके उन्हें कृतार्थ किया है।

दरअसल नई दिल्ली के जंतर मंतर में जहां देश के पीड़ित नागरिक न्याय की गुहार लाते हुए रोज जमा होते हैं, वहा हिंदी सेना का ट्रंप समर्थक आयोजन से सिंहस्थ का यह दलित स्नान किसी मायने में अलग नहीं है और यह सारा आयोजन फासीवादी राजधर्म का अंध धर्मोन्मादी राष्ट्रवाद है, जो दरअसल फासिस्ट है।

दरअसल टूट रही जाति व्यवस्था को बनाये रखने के लिए अस्पृश्यता, रंगभेद, नस्लभेद और पितृसत्ता के पाये पर खड़े वर्णवर्चस्वी प्रभुत्व को बनाये रखने की इस समरसता से असल संदेश यही है कि न जाति खत्म होगी और न अस्पृश्यता। न रंगभेद खत्म होगा और न नस्ली आततायी आचरण और न पितृसत्ता का अंत है। यही हिंदुत्व की समरसता है।

रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या के बाद देश भर में जाति उन्मूलन के एजेंडे को अभूतपूर्व छात्र युवा समर्थन और विश्वविद्यालयों में थोक बाव से मनुस्मृति दहन से हिंदुत्व के एजेंडे के लिए भारी खतरा पैदा हो गया है और संघ परिवार की राजनीति के लिए अनिवार्य दलित वोट बैंक को बनाये रखने की भारी चुनौती है।

सिंहस्थ मेले के मौके पर मध्य प्रदेश में केसरिया राजधर्म सलवाजुड़ुम राजकाज के तहत लगे हाथों संघ परिवार ने दलितों को रिझाने के लिए साधु संतों की बिरादरी से दलितों को अलग छांट लिया और क्षिप्रा में उनके लिए अलग स्नान का बंदोबस्त कर दिया। आदिवासियों को जल जंगल जमीन की लड़ाई से भटकाने के लिए उन्हें भी हिंदुत्व में समाहित करने का सलवा जुड़ुम है।

खबरों के मुताबिक गुजरात से राष्ट्रीय राजनीति में धूमकेतु बनकर उभरे शहंशाह ने बुधवार को सिंहस्थ कुंभ में पधारकर दलित साधुओं के साथ क्षिप्रा नदीं में अलग से स्नान किया।

जाहिर है कि दलित साधुओं के लिए अलग स्नान की व्यवस्था कुंभ में थी और यह आयोजन समरसता के हिंदुत्व एजेंडे वाले संघ परिवार की ओर से है।

 अब सवाल उठता है कि जब साधु जाति से ऊपर नहीं है तो आम लोगों के साथ अस्पृश्यता और रंगभेदी तंत्र मंत्र यंत्र यथावत रखने की यह समरसता दलितोद्धार का कौन सा तरीका है।

मजे की बात है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने संघ परिवार के इस आयोजन का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह आयोजन साधु संतों को भी जाति के आधार पर बांटने का प्रयास है।

इसके जवाब में संघ परिवार समरसता का अलाप दोहराता रहा और उसका तर्क है कि जाति से ही समाज में भेदभाव खत्म होगा।

बहरहाल ऐन वक्त पर सामाजिक समरसता कार्यक्रम को संत समागम में बदलकर विवाद सुलझाने का उपक्रम भी हुआ।

जाहिर है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के अहम माने जा रहे इस समरसता स्नान कार्यक्रम के तहत शाह हिन्दुओं के धार्मिक मेले सिंहस्थ कुंभ में शामिल होने यहां पहुंचे।

मजहबी सियासत और सियासती मजहब के लिए संघ परिवार हिंदू धर्म की परंपरा और कुंभ मेले जैसे पर्व का ऐसा घनघोर राजनीतिक इस्तेमाल जेएनयू में छात्रों के अनशन और विश्वविद्यालयों में मनुस्मृति शासन के अश्वमेध समय पर कर रहा है तो इसका आशय गहराई से समझना भी जरुरी है।

बहरहाल शंहशाह ने क्षिप्रा नदी के वाल्मीकि घाट पर दलित साधुओं सहित अन्य साधुओं के संग स्नान किया।

इसके बाद शंहशाह ने दलित साधुओं सहित अन्य साधुओं के साथ समरसता भोज कार्यक्रम के तहत भोजन भी ग्रहण किया। अछूतोद्धार का यह हिंदुत्व कार्यक्रम भी नया नहीं है।

बहरहाल क्षिप्रा में स्नान करने के पहले भाजपा प्रमुख शाह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेता वाल्मीकि धाम में आयोजित संत समागम में शामिल हुए।

इसके अलावा इस आयोजन का शुरू में विरोध कर रहे संत अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरी के अलावा जूना अखाड़ा पीठ के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी और वाल्मीकि धाम के पीठाधीश्वर उमेशनाथ भी समागम में मौजूद थे।

शंकराचार्य जयंती से जोड़कर हिंदुत्व के इस दलित एजेंडा की पवित्रता भी अक्षुण्ण रखी है संघ परिवार ने।

इस मौके पर शहंशाह ने कहा, देश में भाजपा ऐसी संस्था है जो देश की संस्कृति को मजबूत करना चाहती है। हम वसुधैव कुटुम्बकम को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह स्नान और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि आज शंकराचार्य जी की जयंती है, जिन्होंने मात्र 32 वर्ष की युवा आयु में ही हिंदू धर्म को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया था।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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