दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 14.05.16

आगरा में दलित महिला को जलाया! इनेक्स्ट लाइव

http://inextlive.jagran.com/dalit-woman-put-on-fire-by-landlord-in-agra-119045

बाल्टी से पानी लेने पर दलित को किया अपमानित दी सिविलियंस

http://thecivilian.in/a-bucket-of-water-on-to-the-downtrodden-degraded/

रेप विक्टिम को पुलिस ने बना दिया लेडी डॉन‘ – कैच न्यूज़ हिंदी

http://hindi.catchnews.com/india/rape-victim-converted-as-quot-lady-don-quot-1463150571.html

तालाब सूखा, छिन गया रोजगार अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/lalitpur/pond-drained-was-robbed-of-employment

इनेक्स्ट लाइव

 आगरा में दलित महिला को जलाया!

http://inextlive.jagran.com/dalit-woman-put-on-fire-by-landlord-in-agra-119045

 थाना लोहामंडी के नौबस्ता में एक मकान के विवाद ने इतना तूल पकड़ लिया कि पुलिस की मौजूदगी में एक महिला जिंदा जल गई। उसके जलते ही लोगों में गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने मकान मालिक सहित पुलिस पार्टी पर पथराव कर दिया। पब्लिक के हमले से बचने के लिए पुलिस को दौड़ लगानी पड़ी। मौके पर कई थानों का फोर्स पहुंच गया। भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठी चलानी पड़ी। आरोपी मकान मालिक अधिवक्ता और पूर्व पार्षद है तथा पूर्व एमएलसी का बेटा है।

चल रहा है मकान का विवाद

नौबस्ता निवासी एडवोकेट राजेंद्र कुमार सिंह बाला का पुश्तैनी मकान है। इनके मकान में पिछले कई बर्षो से रामवती पत्‍‌नी डालचंद रह रही है। इनके साथ इनकी बेट बबली पत्‍‌नी

छोटू व छोटी बेटी आशा व दो बेटे मुन्ना व मोती रहते हैं। बबली ने पति को छोड़ दिया है। मुन्ना दिमाग से कमजोर है। मकान मालिक मकान खाली कराना चाहता है। इनका कोर्ट केस चल रहा था। राजेंद्र सिंह के मुताबिक कोर्ट ने इनके हक में फैसला दिया। लिहाजा दस मई को वह पुलिस के साथ आए और मकान खाली करा दिया।

महिला को जिंदा जलाया

पीडि़त पक्ष का कहना था कि दस मई को इनका सामान निकलवा कर बैनारा फैक्ट्री के पास फेंक दिया। परिवार सड़क पर आ गया। बस्ती के लोगों ने शुक्रवार को ताला तोड़कर फिर से परिवार का प्रवेश मकान में करवाया और अपने पास से सामान भी दिया। इस पर फिर से मकान मालिक ने पुलिस को बुलाया। लोगों का आरोप है कि पुलिस ने किराएदार की बेटियों के साथ मारपीट की। पुलिस उनके बाल पकड़कर घसीटती हुई बाहर लाई। प?िलक ने सेकेंड चौकी इंचार्ज पर आरोप लगाया है। मकान मालिक भी अपने गुर्गो के साथ पेट्रोल लेकर आए। आरोप है कि मकान मालिक व उनकी पत्‍‌नी ने रामवती की बेटी बबली पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस उस दौरान देखती रही। घटना से गुस्साई भीड़ ने पत्थर हाथ में उठा लिए और मकान मालिक और पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिस को भी वहां से दौड़ लगानी पड़ी। बाद में सर्किल के फोर्स ने बेकाबू हालातों को नियंत्रण में लिया। लोगों ने जलती हुई महिला पर आग की लपटों को बुझाकर बाहर की तरफ तख्त पर रख दिया। वह एक घंटे तक तड़पती रही। पुलिस ने उसे ले जाने का प्रयास किया तो लोगों ने एक स्वर मना कर दिया। वह मौके पर एसएसपी को बुलाने व आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे। मौके पर एसीएम द्वितीय अरुन कुमार व सीओ कोतवाली मनीषा सिंह पहुंच गई। किसी तरह पब्लिक को समझाकर महिला को हॉस्पिटल भेजा.

दी सिविलियंस

 बाल्टी से पानी लेने पर दलित को किया अपमानित

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 गुरुवार को कर्मचारियों का गुस्सा भड़क गया। आक्रोशित कर्मियों ने काम बंद करके सहायक मंडल अभियंता कार्यालय में हंगामी प्रदर्शन किया।

 इस पर सहायक मंडल अभियंता ने अभद्रता करने वाले दो कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि, कर्मचारी दोनों आरोपियों के निलंबन के अलावा उनके स्थानांतरण की मांग पर अड़े रहे।

 इलाहाबाद के एटा पट्टी पोस्ट के ग्राम सकरा निवासी शैलेंद्र कुमार भारती व बिहार के नालंदा क्षेत्र के मुफ्तीपुर निवासी विजय कुमार झांसी यार्ड में गैंग नंबर 23 ए में गैंगमैन के पद पर तैनात हैं। दोनों ने तीन माह पहले ही नौकरी ज्वाइन की है। इसमें शैलेंद्र कुमार का आरोप है कि विगत नौ मई को उसे जाति सूचक शब्दों से भी अपमानित किया गया।

 

 विजय कुमार का आरोप है कि ग्यारह मई की शाम वह काम खत्म करके कार्यालय आया तो भूलवश टूल बाक्स कार्य स्थल पर ही छोड़ आया। इस पर उक्त मुकद्दम ने उसके साथ गाली गलौज की व अपने एक चहेते गैंगमैन से उसे पिटवाया।

 उक्त घटनाक्रम की जानकारी होने पर गुरुवार की सुबह नॉर्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ इंजीनियर शाखा के अध्यक्ष एस के सैनी व सचिव राघवेंद्र तिवारी यार्ड पहुंच गए व पीड़ित गैंगमैनों से घटना की जानकारी ली। इसके बाद गैंग के सभी कर्मचारी एकत्रित हो गए और उन्होंने काम बंद कर दिया।

मुकद्दम व एक अन्य कर्मी निलंबित, जांच के आदेश

बाद में सभी यूनियन नेताओं के साथ सहायक मंडल अभियंता कार्यालय पहुंचे और कार्यालय में प्रदर्शन कर हंगामा शुरू कर दिया। सहायक मंडल अभियंता ने कर्मचारियों की पीड़ा सुनने के बाद मुकद्दम जमील व मारपीट करने वाले गैंगमैन अमित कुमार पाल को निलंबित कर दिया। लेकिन, कर्मचारियों का गुस्सा इस पर भी शांत नहीं हुआ वह दोनों कर्मियों के स्थानांतरण की मांग पर अड़ गए।

 इस मांग को लेकर कर्मचारी दिन भर सहायक मंडल अभियंता कार्यालय में डेरा डाले रहे। बाद में उच्च अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जांच उपरांत दोषी पाए जाने पर दोनों निलंबित कर्मियों का स्थानांतरण कर दिया जाएगा। इसके बाद ही गैंगमैनों का गुस्सा शांत हुआ। यूनियन नेताओं में कालूराम, नीरज दुबे, परशुराम वर्मा, सीताराम आदि शामिल रहे।

 जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने का आरोप

पीड़ित शैलेंद्र कुमार ने मुकद्दम पर जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने का भी आरोप लगाया है। आरोप है कि विगत नौ मई को वह कार्य के दौरान पानी पीने के लिए कार्यालय में रखी बाल्टी के पास पहुंचा। उस समय पानी पिलाने वाला कर्मी किसी काम से गया हुआ था, उसने बाल्टी से पानी लेकर पी लिया।

 यह देखकर सीनियर कर्मी मुकद्दम नाराज हो गया तथा उसने कहा कि दलित होकर बाल्टी को कैसे छू लिया? दूसरी बाल्टी लानी होगी, सौ रुपये जुर्माना जमा करो। इस पर गैंगमैन ने कहा कि अभी उसे वेतन नहीं मिला है। वेतन मिलने पर सौ रुपये जमा कर देगा। इस पर मुकद्दम ने अभद्र भाषा का प्रयोग कर उसे अपमानित किया।

कैच न्यूज़ हिंदी

 रेप विक्टिम को पुलिस ने बना दिया लेडी डॉन

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यह कहानी गैर जिम्मेदार मीडिया का एक और उदाहरण है. बीते एक-दो महीनों के दौरान फर्रूखाबाद और आस-पास के जिलों में एक लेडी डॉन की कहानी खूब छापी गई. पुलिस के लिए वह लेडी डॉन थी. एक पिता के लिए अभागी बेटी. पुलिस रिकार्ड में गैंगस्टर थी, लेकिन हकीकत में रेप विक्टिम. मीडिया ने पुलिस की कहानी पर आंख बंद कर उसे लेडी डॉन घोषित करवाने में अपना पूरा योगदान दिया. 

नौ मई को लेडी डॉन मर गई. पुलिस कहती है, वह भागने की कोशिश कर रही थी, मां कहती है न्याय के लिए भटक रही थी. जवान बेटी की मौत पर मां-बाप ने सवाल उठाया, कहा- बेटी की मौत नहीं हुई, हत्या की गई है. इसके बाद पुलिस ने मामले को मर्डर केस में दर्ज किया.

इस देश की पुलिस किस तरह से हवा में अपराधी पैदा करती है और कैसे अपराधियों को सफेदपोश बना देती है, मीरा की कहानी इसका मुफीद उदाहरण है. फिलहाल इस मामले में एक बसपा नेता समेत सात लोगों को नामजद किया गया है. इसमें एक इंस्पेक्टर सहित पांच पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. अब जाकर इस मामले की जांच शुरू हुई है. एक और बात यह पीड़िता दलित थी, लेकिन इसकी हत्या पर भी दलितों के हिमायती चुप हैं?

 आखिर कौन थी लेडी डॉन मीरा

पुलिस जिसे लेडी डॉन कहती थी वह फर्रुखाबाद के मलिकपुर गांव की रहने वाली मीरा जाटव थी. उम्र करीब 26 साल. फर्रुखाबाद के कमालगंज में एक ईंट भट्ठा है. बसपा नेता महेंद्र कटियार इसके मालिक हैं. मीरा के पिता रामदास जाटव इसी भट्ठे पर काम करते थे. 

मीरा भी अपने माता-पिता के काम में यदा-कदा हाथ बंटाती थी. पिता का आरोप है, एक दिसंबर 2014 को महेंद्र के बेेटे गुरदीप ने अपने एक दोस्त के साथ मीरा को अगवा कर उसका बलात्कार किया. दो दिन तक उन्होंने उसे बंधक बनाए रखा. बार-बार उसके साथ बलात्कार किया. किसी तरह वह बलात्कारियों के चंगुल से बच कर भाग निकली.

 सुनिए मीरा की कहानी, बाप की जुबानी

मीरा के पिता का कहना है कि मीरा, गुरदीप के चंगुल से निकल कर छिपते-छिपाते वह कमालगंज थाने पहुंची. वहां उसने थानेदार को आपबीती सुनाई. लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी. पुलिस वाले बोले, पहले अपने पिता को बुलाओ, तब देखेंगे. इस बीच गुरदीप थाने पहुंच गया.

आरोपी का रसूख और पुलिस की मिलीभगत के कारण मीरा के खिलाफ केस दर्ज हो गया. मीरा के ऊपर पेशेवर चोर होने का आरोप लगा दिया गया. गुरदीप ने बयान दिया कि मीरा उसके घर से दो फोन, एक पिस्टल और पर्स चुराकर भागी है. न कोई जांच, न पड़ताल. मीरा एक घंटे के अंदर जेल के भीतर डाल दी गई.

 तीन माह बाद मिली बेल

मीरा तीन माह जेल में रही. मार्च में उसे बेल मिली. लेकिन, कुछ घंटे में ही गुरदीप की शिकायत पर पुलिस ने उसे फिर अरेस्ट कर लिया. इस बार मुकदमा दर्ज हुआ गैंगस्टर एक्ट के तहत. एक बलात्कार पीड़िता संगठित अपराध की आरोपी बन गई. 

पुलिस की जड़ों में घुसे भ्रष्टाचार ने एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी को लेडी डॉन बना दिया. कमालगंज थाने के इतिहास में मीरा पहली युवती बनी जिस पर गैंगस्टर लगा.

 …और फिर गिरफ्तारियों का सिलसिला

गैंगस्टर मीरा पैरवी के बाद जेल से छूटी. वकीलों की मदद से 14 जुलाई 2015 को कोर्ट के आदेश पर गुरदीप पर रेप का केस दर्ज हुआ. लेकिन, ठोस सबूतों के अभाव में मामला खत्म हो गया. इसके बाद ब्लैकमेलिंग और धमकी के जुर्म में मीरा को तीसरी बार गिरफ्तार कर लिया गया. यह वो कहानी है जो मीरा के पिता रामदास ने हमें बताई.

 आइए अब जानते हैं पुलिस की कहानी

बकौल पुलिस मीरा ने 2012 में जरायम की दुनिया में कदम रखा. कन्नौज में उसने एक वकील की रिवॉल्वर लूटी. पुलिस ने इसे बरामद भी किया. वह लुटेरों के गैंग की सरगना बन गई. इस दौरान उसने एक बैंक अफसर को ब्लैकमेल किया. इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हुई.

 बड़े साहब से मिलना नागवार गुजरा

इधर, गिरफ्तारी दर गिरफ्तारी से परेशान मीरा ने सोशल एक्टिविस्ट संजीबा से बात की. संजीबा ने सलाह दी कि बड़े पुलिस अफसरों से मिलो तब कुछ बात बनेगी. इसी 29 अप्रैल को मीरा कानपुर डीआईजी (रेंज) नीलभजा चौधरी से मिली. 

उन्हें सारी बात बतायी कि किस तरह से उसे एक झूठे मामले में तीन बार जेल भेजा जा चुका है. उसकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है. उसे गैंगस्टर घोषित कर दिया जबकि गुरदीप के केस से पहले उका एक भी क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है.

पुलिस के मुताबिक गुरसहायगंज में लूट के चार और फतेहगढ़ में एक केस गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज है

मीरा की डीआईजी रेंज से मुलाकात की भनक कमालगंज थाने की पुलिस को लगी. तो उसके होश उड़ गए. पुलिस ने जाल बिछाकर सदरियापुर गांव में 30 अप्रैल को एक बार फिर से मीरा को गिरफ्तार कर लिया गया. उसके पास से आधा किलो चरस की बरामदगी दिखाई. पुलिस के मुताबिक गुरसहायगंज में लूट के चार और फतेहगढ़ में एक केस गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज है.

30 तारीख को ही कोर्ट में पेश करने के बाद उसे वापस रात में जेल ले जाया जा रहा था. लेकिन, पुलिस के मुताबिक रास्ते में उसने भागने की कोशिश में जीप से छलांग लगा दी, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गई.

उसे कानपुर के हैलट हॉस्पिटल में उसे भर्ती कराया गया. यहां वह 4 मई को कोमा में चली गई. डॉक्टर्स ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. और अंतत: नौ मई को मीरा की मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके शरीर और सिर पर गंभीर चोटें लगने की बात सामने आई है.

मीरा की मां कहती हैं, ‘पुलिस और आरोपियों की कानपुर डीआईजी से शिकायत करके जब मीरा आ रही थी तब सालिगराम वर्मा, महेंद्र कटियार, गुरदीप, सिपाही नारायणी देवी और अंकेश कटियार उसे अपनी गाड़ी में उठा ले गए. जमकर मारा, पीटा और जब वह घायल हो गई तो कहानी गढ़ ली कि जीप से कूद गई.’

मीरा की मौत मामले में कमालगंज पुलिस ने बसपा नेता, उसके बेटे एवं कमालगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष सालिगराम वर्मा सहित सात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है. इसमें पांच नामजद हैं, जबकि दो अज्ञात. बसपा नेता महेंद्र का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. फिलहाल मामले की जांच शुरू हो गई है.

 कहां है दलित राजनीति करने वाले

इस पूरे हत्याकांंड का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि किसी भी दल ने इसे इस आपराधिक कृत्य के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत महसूस नहीं की. सत्ताधारी दल को अगर छोड़ भी दें तो राज्य में बसपा दलितों की सबसे बड़ी पार्टी है उसने भी इसे छूने की जहमत नहीं उठाई. दलितों की आक्रामक राजनीति कर रही भाजपा भी बड़ी आसानी से चुप्पी साधे हुए है. बलात्कार की एक पीड़िता दलित महिला की मौत हो चुकी है, सूबे में दलित चेतना यात्राओं की धूम जारी है, अगले साल विधानसभा चुनाव है.

अमर उजाला

 तालाब सूखा, छिन गया रोजगार

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बांसी (ललितपुर)। सूखा की मार से ब्लाक जखौरा के ग्राम हर्षपुर के किसानों का रोजगार छिन गया है। यहां के ग्रामीण प्राचीन तालाब में पैदा होने वाली सिंघाड़े और मुरार की फसल से अपना जीवकोपार्जन करते थे, लेकिन इस बार तालाब में पानी नहीं होने के कारण यह फसल नहीं हो पाईं हैं।  क्षेत्र में पच्चीस वर्ष बाद ऐसा संकट आया है।

जिले में सबसे अधिक 22 मजरों (छोटे गांव) वाले ग्राम हर्षपुर में लगभग तीन हजार सहरिया जाति के लोग रहते हैं। यहां की आबादी लगभग आठ हजार है। यहां के मजरे दूर- दूर बसे हैं। 14.48 एकड़ के रकवा वाले तालाब में बरसात के समय पानी भर जाता है। तालाब की जमीन से डेढ़ सैकड़ा किसान परिवार जुड़े हैं। तालाब की जमीन पर सिंघाड़ा और मुरार की खेती होती है, जिसकी पूरे जिले में बिक्री होती है। लेकिन, इस वर्ष सूखा के कारण करीब 25 वर्ष में पहली बार यह तालाब सूख गया है।

इस कारण यहां के किसानों के सामने रोजी- रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस तालाब में पानी रहने से भूमि तो सिंचित होती ही है, इस तालाब में सिघाड़े व मुरार उगाए जाते हैं, जिससे इन परिवारों की रोजी- रोटी चलती है।

दरअसल, यह तालाब पिछले दस वर्ष से यहां से निकली नहर के पानी से भरता आ रहा है, लेकिन इस वर्ष नहर का पानी तालाब में नहीं भर सका। यदि प्रशासन समय रहते ध्यान देता, तो तालाब में पानी भरा होता और भूमि पर फसल उग रही होती। वहीं, गांव की स्थिति यह है कि मुख्य मजरा चौपार है। यहां की प्यास बुझाने के लिए एक मात्र हैंडपंप का सहारा है। सहरिया बस्ती झरपुरा में तीन सौ आदिवासी परिवार रहते हैं, यहां के कुआं सूख गए हैं।

एकमात्र हैंडपंप के सहारे ग्रामीण अपनी प्यास बुझा रहे हैं। चौपार के पास दलित बस्ती में बना सरकारी कुआं पहली बार सूखा है। अब दलित बस्ती के लोग एक किमी दूर स्थित हैंडपंप पर कतार में खड़े रहकर पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। अनेक मजरों में टैंकर के सहारे पानी आपूर्ति की जा रही है।

आदिवासी मुहल्ला झरपुरा के कुआं सूख गए हैं। एक हैंडपंप ही मुहल्लावासियों का सहारा है, उसका वाटर लेबल भी दिनोंदिन कम होता जा रहा है। – नंदू सहरिया

तालाब सूखने से गांव में जलसंकट अधिक गहरा गया है। सरकार से और टैंकर द्वारा पानी वितरण की मांग की गई है, जल्द ही टैंकर चलेंगे जिससे गांववासियों को राहत मिल सके। – सोहन लाल श्रीवास

क्षेत्र पंचायत सदस्य हर्षपुर

गांव में दो टैंकर चलाकर मजरों में पानी दिया जा रहा है। पेयजल संकट देखते हुए प्रशासन से और हैंडपंप लगाने की मांग की गई है। – अशोक यादव ग्राम प्रधान, हर्षपुर

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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