दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 11.05.16

 

‘6 साल से बिक ही रही हूं, कितनी बार बिकी, क्या बताऊं’ – इनाडू इंडिया

http://hindi.eenaduindia.com/CrimeNews/Crime/2016/05/10173512/sold-girl-rescued-in-Sambhal-by-UP-police.vpf

अजमेर में दलित महिला से दुष्कर्म और फिर हत्या – प्रदेश 18

http://hindi.pradesh18.com/news/rajasthan/ajmer/widow-killed-after-rape-in-ajmer-1414976.html

चढ़त में छेड़छाड़ पर जातीय संघर्ष – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/bulandshahr/crime/barat-manipulated-ethnic-conflict

आदिवासी महिला डाककर्मी से छेड़छाड़, मामला दर्ज – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-GUNA-MAT-latest-guna-news-024503-153957-NOR.html

‘महाराज मोय कंट्रोल वाओ नाज नई देत, हर महीना भगा देत हैं’ – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-MAT-latest-narwar-news-035003-152740-NOR.html

मिस हो सकता है गरीबों को एलपीजी देने का टारगेट – प्रातः काल

http://pratahkal.com/?p=18139

दलित उत्पीड़न के खिलाफ भूख हड़ताल 20 को – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/darbhanga/story/797903.html

‘दलित मुसलमानों के घर न जाते हैं, न खाते हैं’ – बी बी सी हिंदी

http://www.bbc.com/hindi/india/2016/05/160510_muslim_caste_suatik_biswas_rd

 

इनाडू इंडिया

‘6 साल से बिक ही रही हूं, कितनी बार बिकी, क्या बताऊं’

http://hindi.eenaduindia.com/CrimeNews/Crime/2016/05/10173512/sold-girl-rescued-in-Sambhal-by-UP-police.vpf

सम्भल। छह साल पहले नौ वर्ष की उम्र में इस दलित बच्ची का उसके स्कूल के बाहर से अपहरण कर हैवानों ने उसके साथ रेप किया और फिर उसके बिकने का सिलसिला शुरू हो गया। संभल, नोएडा व दिल्ली में उसे कई बार बेचा गया। एक-हाथ से दूसरे हाथ बिकते हुए वह वापस संभल जिले के चमरपुरा गांव में भूरा नाम के शख्स के हाथों बेच दी गई। इसका पता जब सम्भल रजपुरा थाना क्षेत्र के देऊपुरा गांव में रहने वाली उसकी मां को लगा तो उसकी मां ने पुलिस को अपनी बेटी के चमरपुरा गांव में होने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस की टीम ने पीड़िता को बरामद कर लिया और उसे खरीदने वाले भूरा को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक जनपद सम्भल रजपुरा थाना क्षेत्र के देऊपुरा से 6 साल पहले एक 9 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची का सतपाल नाम के एक शख्श ने स्कूल के बाहर से अपहरण कर लिया था। वह बच्ची को नोएडा ले गया। वहां सतपाल ने बच्ची के साथ 3 साल तक हैवानियत की। इस दौरान बच्ची की मां और पिता ने कई बार थाने के चक्कर काटे पर किसी ने उनकी कोई मदद नही की। बच्ची की मां और पिता को गांव के लोग ताने देने लगे कि तुमने अपनी बच्ची को बेच दिया है।

यह सदमा बच्ची के पिता सहन नहीं कर सके और सदमे से उनकी मौत हो गई। उधर बच्ची को बेचने का सिलसिला जारी रहा। एक हैवान से दूसरे हैवान तक बिकती हुई और हैवानियत सहती हुई यह बच्ची छह साल में फिर घूम-फिर कर नोएडा से संभल जनपद के गांव चमरपुरा के भूरा को बेच दी गई, जहां से पुलिस ने उसे बरामद कर लिया और भूरा को गिरफ्तार कर लिया। सतपाल और उसके साथियों की तलाश में पुलिस जगह-जगह दबिश दे रही है। पुलिस ने दावा किया है उनकी भी जल्द ही गिरफ़्तारी कर ली जाएगी।

आरोपी 45 वर्षीय भूरे ने बताया कि उसने बच्ची को 15 हज़ार रुपये में ख़रीदा था। पीड़िता ने बताया कि छह वर्ष की उम्र में जब वह स्कूल के बाहर खेल रही थी तो सतपाल उसे उठा ले गया था और वह उसे नोएडा ले गया। जहां उसके साथ हैवानियत की गई और फिर बेच दिया गया।

एसपी संभल अतुल सक्सेना ने बताया कि कल एक महिला ने सूचना दी थी कि उसकी बेटी को जिसकी उम्र वर्तमान में लगभग 15 साल है, कोई अज्ञात व्यक्ति छह साल पहले उठा ले गया था और अब वह चमरपुरा में है। इसकी सूचना के बाद थाना अध्यक्ष ने अपनी टीम के साथ छापेमारी कर पीड़िता को बरामद कर लिया और आरोपी भूरा को गिरफ्तार कर लिया।

प्रदेश 18

अजमेर में दलित महिला से दुष्कर्म और फिर हत्या

http://hindi.pradesh18.com/news/rajasthan/ajmer/widow-killed-after-rape-in-ajmer-1414976.html

राजस्थान के अजमेर जिले में सोमवार रात एक दलित महिला के साथ दुष्कर्म जैसा शर्मनाक काम करने के बाद हत्या का मामला सामने आया है.

दुष्कर्म और हत्या का मामला तीर्थ नगरी पुष्कर के निकटवर्ती ग्राम किशनपुरा का है. यहां एक 40 वर्षीय दलित महिला के साथ पहले अज्ञात व्यक्ति ने दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी.

अजमेर में दलित महिला से दुष्कर्म और फिर हत्या

पुष्कर थाना के थानाधिकारी नंदराम भादू के अनुसार मृतक के पुत्र ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है. मृतक के बेटे अनुसार सोमवार रात वो अपनी मां को घर पर छोड़ कर पड़ोस में हो रही शादी में शामिल होने गया था. जब देर रात वापस लौटा तो घर पर अपनी मां को जगाया लेकिन वो बेसुध थी. इसके बाद पड़ोस में रहने वाले परिजनों को मामले की सूचना दी. देर रात हुए इस घटनाक्रम से गांव में मातम का माहौल हो गया.

सुबह पुष्कर पुलिस को मामले की जानकारी दी गई. मामले की गम्भीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण भोला राम, सीओ ग्रामीण ज्ञान प्रकाश नवल और पुष्कर पुलिस ने मौके पर जाकर एफएसएल टीम की मदद से साक्ष्य जुटाए. पुलिस के अनुसार मृतका के शरीर पर काटे जाने के निशान मौजूद है साथ ही पुलिस ने मृतका से दुष्कर्म होने से भी इनकार नहीं किया है.

अमर उजाला

चढ़त में छेड़छाड़ पर जातीय संघर्ष

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/bulandshahr/crime/barat-manipulated-ethnic-conflict

दस्तूरा गांव में सोमवार रात दलित युवती की शादी के दौरान हुई चढ़त में कुछ मनचलों ने छेड़छाड़ कर दी। मामला कहासुनी के बाद शांत हो गया लेकिन मंगलवार दोपहर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

दोनों पक्षों की ओर से जमकर लाठी-डंडे, फरसे और फायरिंग हुई। एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। सूचना पर सीओ सिटी फोर्स के साथ पहुंच गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है।

दस्तूरा गांव के एक पक्ष मूलचंद पुत्र बद्री ने पुलिस को बताया कि सोमवार रात गांव के ही दलित स्व. दलवीर पुत्र धन्ना की बेटी की बारात आई थी। बारात चढ़ते समय कुछ बारातियों ने शराब पीकर गांव की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ कर दी।

जब कुछ बुजुर्गों ने समझाने की कोशिश की तो बारातियों ने मारपीट की। मामला शांत होने के बाद मंगलवार दोपहर दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई।

मूलचंद ने पुलिस को बताया कि मारपीट में मूला पुत्र बद्री, भोले पुत्र रनपाल, राधे पुत्र भूप सिंह, जगदीश पुत्र भूप सिंह, रीना पत्नी हिरी, पिंकी पत्नी टेका और कई लोगों को चोटें आई हैं।

मूलचंद ने गांव के राजेश पुत्र होशियार सिंह, नरेंद्र पुत्र चंद्रपाल, डब्बू पुत्र रामवीर, प्रेमराज पुत्र लक्ष्मन, दीपक पुत्र मनोज कुमार, बिजेंद्र, किरनपाल पुत्र शेरला, सुभाष पुत्र धन्ना, परमजीत पुत्र रामभूल, सुरेश पुत्र बाबू, रामबकस पुत्र मनिराम, चरन पुत्र मुग्गा, नैमपाल पुत्र नेत्रपाल, सोनू पुत्र लक्ष्मन, रवि पुत्र छुटन्ना, पिंटू पुत्र चुन्नू, विजेंद्र पुत्र गोपाल, सोनू पुत्र जिराम के खिलाफ तहरीर दी है।

वहीं दूसरे पक्ष की ओर से धर्मवीर पुत्र तोली राम, कृपाल पुत्र चरन सिंह, डब्बू पुत्र रामभूल, अजित पुत्र मित्तरपाल, सोनू पुत्र जगवीर, सरजीत पुत्र सूका घायल हो गए।

राजेश पुत्र दलवीर ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि डीजे पर डांस को दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। इसके बाद मंगलवार दोपहर ठाकुर जाति के लोगों ने हमला कर दिया।

दैनिक भास्कर

आदिवासी महिला डाककर्मी से छेड़छाड़, मामला दर्ज

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मुख्य डाकघर में पदस्थ एक आदिवासी महिला डाककर्मी के साथ विभाग के ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने छेड़छाड़ की। विभाग में सुनवाई न होने के बाद महिला कर्मचारी ने अंतत: इस मामले की शिकायत एजेके थाने में दर्ज कराई है। इस मामले में विभाग की आंतरिक जांच रिपोर्ट अधीक्षक के यहां कार्रवाई के इंतजार में पड़ी हुई है।

यह मामला करीब एक माह पुराना है। मुख्य डाकघर में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संतोष शर्मा द्वारा महिला कर्मचारी के घर में जाकर उसके साथ छेड़छाड़ की गई। उक्त आरोपी ने जब यह हरकत की तब महिला अपने घर पर अकेली थी। उसका पति बाहर काम पर गया था, जबकि बच्चे उसके रिश्तेदार के यहां थे। पीड़ित ने किसी तरह अपने आप को आरोपी से बचाया। एजेके डीएसपी बीपी तिवारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

हकीकत : सब डिवीजनल इंस्पेक्टर ने की जांच 

हकीकत यह है कि मामले की जांच विभाग के ही सब डिवीजनल इंस्पेक्टर रविंद्र भार्गव कर रहे हैंै। भास्कर से उन्होंने कहा कि जांच पूरी हो गई है और रिपोर्ट भी अधीक्षक को सौंप दी गई है। बताया जाता है कि इस जांच में कर्मचारी का तबादला करने की अनुशंसा की गई है। सूत्र बताते हैं कि इस मामले में पीड़िता सहित 31 कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं।

अधीक्षक ने कहा: कोई शिकायत नहीं आई 

डाकघर अधीक्षक एसके तिवारी ने कहा कि हमारे पास कोई शिकायत आती तभी तो हम कार्रवाई करते। उन्होंने कहा कि आपको इस संबंध में जो भी जानकारी चाहिए, आप ऑफिस में आकर बात करें। उनसे बार-बार यह सवाल किया गया कि आपने उक्त मामले में कोई कार्रवाई की या नहीं? पर वे यही कहते रहे कि मैं यह कैसे मान लूं कि आप पत्रकार बोल रहे हैं।

इधर लीपापोती में लगा है डाक विभाग 

दैनिक भास्कर

‘महाराज मोय कंट्रोल वाओ नाज नई देत, हर महीना भगा देत हैं’

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महाराज मोय कंट्रोल वाओ नाज नई देत, अब तो वो हर महीना भगा देत हैं । पेट भरवो मुश्किल हो रहो है। यह बात नरवर तहसील के नए बिनेगा कालीपहाड़ी निवासी आदिवासी महिला बिनिया बाई ने मंगलवार को एसडीएम संजीव जैन से जनसुनवाई में कही। जनसुनवाई में दर्जन भर से अधिक आवेदनों पर जनसुनवाई करते हुए एसडीएम श्री जैन ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पंकज करोरिया से पीड़ित आदिवासी महिला को खाद्यान्य दिलवाने सहित जांच के आदेश दिए हैं।

जनसुनवाई में ग्राम नए बिनेगा कालीपहाड़ी विस्थापित गांव की महिलाओं ने मड़ीखेड़ा से विस्थापित होने पर मिली भूमि का सीमांकन कराने, विधवाओं को पेंशन न मिलने सहित अनेक समस्याओं को लेकर आवेदन दिया। एकता परिषद के रामप्रकाश शर्मा के साथ आई विस्थापित गांव की महिलाओं ने बताया कि 90 पट्टे 10 वर्ष पूर्व मड़ीखेड़ा से विस्थापित होने के बाद हुए थे जिनका अब तक सीमांकन नहीं हो सका है कब्जे के लिए हितग्राही परेशान होते चले आ रहे हैं।

इस पर एसडीएम श्री जैन ने तहसीलदार व सीईओ नरवर को एक सप्ताह में निराकरण करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में आधा दर्जन ग्रामों में हैड पंप खराब होने की शिकायत मिलने पर पीएचई अधिकारियों को सभी हैंडपंप तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में तहसीलदार यूसी मेहरा, सीईओ महेंद्र जैन, सीएमओ हरिशंकर रावत, बीआरसी आफाक हुसैन खान सहित अन्य विभाग प्रमुख उपस्थित थे।

प्रातः काल

मिस हो सकता है गरीबों को एलपीजी देने का टारगेट

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नई दिल्ली। सरकार के 5 करोड़ गरीब परिवारों को रसोई गैस देने और अगले तीन साल में इसके ग्राहकों का दायरा बढ़ाकर 60 फीसदी से ज्यादा करने के प्लान में दो बाधाएं खड़ी हो गई हैं। पहली बाधा अपर्याप्त वितरण क्षमता है, जबकि दूसरी क्रय शक्ति कम होना। ग्रामीण इलाकों में किचेन को धुंए से मुक्त करने के लिए सरकार की योजना रसोई गैस के 10 करोड़ कंज्यूमर्स को जोडऩे की है, जिनमें आधे से ज्यादा गरीब परिवारों के होंगे। इसे एक ऐसे देश के लिए महत्वाकांक्षी प्लान बताया जा सकता है, जहां 16.5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हासिल करने में दशकों का वक्त लगा।

पहले साल में सरकारी कंपनियों- इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के 3 करोड़ एलपीजी कंज्यूमर्स को जोडऩे की उम्मीद है। सरकारी ऑयल कंपनी के एक एग्जिक्यूटिव ने नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया, यह काफी मुश्किल टारगेट है। पीडब्ल्यूसी में लीडर, ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री दीपक माहूरकर ने बताया, सबसे बड़ी चुनौती इतने नए कंज्यूमर्स (खासतौर पर दूर-दराज के इलाकों में) के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स की होगी।

सरकारी ऑइल कंपनियां फिलहाल अपने 18,000 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिये कंज्यूमर्स की जरूरतें पूरी करते हैं। इन कंपनियों की योजना 10,000 और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स बनाने की है। सरकारी ऑयल कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स का कहना है कि तुरंत में इतने सारे डिस्ट्रीब्यूटर्स को नियुक्त करना आसान नहीं होगा। एक और सरकारी ऑयल कंपनी के एग्जिक्यूटिव ने बताया, असली मुश्किल यहीं से शुरू होगी। हमारे वितरकों के लिए दूर-दराज और आदिवासी इलाकों के गावों तक पहुंचना बड़ी चुनौती होगी, जहां हमारी मौजूदगी नहीं है और जहां से हमारे ज्यादातर नए कंज्यूमर्स आएंगे।

संभावित नए कस्टमर्स की वित्तीय क्षमता भी एक अहम बाधा होगी। इंडियन ऑयल के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (एलपीजी) सतवंत सिंह ने बताया कि जिन गरीब परिवारों को सब्सिडी वाला गैस कनेक्शन मिलेगा, मुमकिन है कि वे इसका इस्तेमाल ज्यादा नहीं कर पाएं। उन्होंने बताया, हमारे अनुभव से ग्रामीण इलाकों के कम इनकम वाले कंज्यूमर्स साल में 4 से ज्यादा सिलेंडर नहीं भरवाते हैं, जबकि हमारी सरकार सब्सिडी वाले 12 सिलेंडर मुहैया कराती है। इसका मतलब यह है कि गरीबों के लिए मुहैया कराए गए इन सिलेंडरों की ब्लैकमार्केटिंग होगी।
दिल्ली में कमर्शल सिलेंडर की कॉस्ट बिना-सब्सिडी वाले सिलेंडर से एक तिहाई ज्यादा पड़ती है। इस सिलेंडरों पर टैक्स राज्यों में अलग-अलग होता है। सिंह के मुताबिक, कीमतों में यह अंतर कंज्यूमर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इनसेंटिव का जरिया बन सकता है और इससे सिलेंडरों की ब्लैकमार्केटिंग तेज हो सकती है। सिंह के मुताबिक, कुछ गरीब परिवारों को फ्रेश सब्सिडी के लिए मौजूदा रेगुलर कनेक्शन छोडऩे के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है, जबकि पहले ही फायदा उठा चुके कुछ लोग फ्रेा सब्सक्रिप्शन की मांग कर सकते हैं।

प्रभात खबर

दलित उत्पीड़न के खिलाफ भूख हड़ताल 20 को

http://www.prabhatkhabar.com/news/darbhanga/story/797903.html

दरभंगा  : माकपा आगामी 20 मई को समाहरणालय पर भूख हड़ताल करेगी. साथ ही 20 जून को प्रदर्शन भी होगा. पार्टी के राज्य स्तरीय कन्वेंशन में लिये गये निर्णय के आलोक में यह आंदोलन किया जायेगा. पार्टी के केंद्रीय कमेटी सदस्य विजय कांत ठाकुर से सोमवार को लहेरियासराय गुदरी स्थित पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में यह बात कही. उन्होंने कहा कि कन्वेंशन में अगलगी, जलसंकट तथा कमजोर दलित वर्ग के उत्पीड़न के सवाल को लेकर आंदोलन का फैसला लिया गया. इसी आलोक में यहां इसे अंजाम दिया जायेगा.

श्री ठाकुर ने कहा कि खपरपुरा, कोलहंटा पटोरी, पौरी, इटहर समेत दर्जनों गांव में अगलगी से भारी क्षति हुई है. आपदा प्रबंधन की ओर से आग पर काबू पाने में अधिक विलंब किये जाने से नुकसान ज्यादा हुआ है. सरकारी राहत काफी कम है. राज्य और केंद्रीय सत्ताधारी पार्टी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अपनी असफलता को ढकना चाहती है.

उन्होंने जले फूंस के घर की जगह इंदिरा आवास से मकान, फसल आने तक रोजगार व मुफ्त भोजन, प्रति एकड़ फसल जलने पर 30 हजार रुपये मुआवजा, पुराने कर्जे की माफी, पेजयल, चारा व दवाई की व्यवस्था, जनवितरण से प्रत्येक पीडि़त परिवार को प्रतिमाह 35 किलो राशन उपलब्ध कराने की मांग की. उन्होंने राहत के खर्चे का शत-प्रतिशत सहायता राशि केंद्र सरकार को उपलब्ध कराने की मांग की. राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने, दलित उत्पीड़न में हुई वृद्धि को देखते हुए निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था करने तथा दलितों को न्याय दिलाने के लिए सख्त कानून व व्यवस्था की मांग की.

आठ और महिलाएं बीमार

विषाक्त भोजन. 48 घंटों में 15 महिलाएं भरती 

दरभंगा : शांति कुटीर संस्था में विषाक्त भोजन का ममाला थमने का नाम नहीं ले पा रहा है. इस संस्था में मंगलवार को आठ और महिलाओं को डीएमसीएच में भरती कराया गया है. दो दिनों के भीतर डेढ़ दर्जन महिलाएं भरती हो चुकी है.

चार मरीजों की हुई छुट्टी 

अभी तक उपचार के बाद चार मरीजों को छुट्टी दे दी गयी है. आठ मरीजों का उपचार सीसीडब्ल्यू में चल रहा है. डाक्टर इन मरीजों के उपचार पर विशेष निगरानी रखे हुए हैं. इन सभी मरीजों का इलाज यूनिट इंचार्ज डाॅ जीएन झा के नेतृत्व में चल रहा है.

डीएमसीएच प्रशासन ने जायजा लिया : प्रभारी अस्पताल अधीक्षक डाॅ बालेश्वर सागर ने सीसीडब्ल्यू में पहुंचकर मरीजों के उपचार व्यवस्था का जायजा लिया. मरीजों को कोई भी दवा बाहर से नहीं खरीदना पड़े, इसके लिए कड़ी हिदायत दी गयी है.

नहीं आये फूड इंस्पेक्टर : घटना के 48 घंटे बीत गये. विषाक्त भोजन को लेकर मरीजों की भरती थमने का नाम नहीं ले पा रहा है. लेकिन फूड इंस्पेक्टर की अभी तक नींद नहीं टूटी है. फूड इंस्पेक्टर शांति कुटीर संस्था और डीएमसीएच में पहुंचकर कोई भी खाद्य पदार्थ का नमूना नहीं लिये हैं.

चार मरीज खतरे से बाहर, मिली छुट्टी

चार मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गयी है. सभी मरीज खतरे से बाहर हैं. मरीजों के इलाज का यहां पुख्ता इंतजाम है.

डाॅ बालेश्वर सागर, प्रभारी अस्पताल अधीक्षक

ये मरीज हुए भरती

भरती होने वाले आठ महिलाओं में शांति देवी(30), चिंटू देवी (48), आशा देवी (50), मिट्ठू देवी (30), भगवती देवी (50), बबीतादेवी(50), सुमिला कुमारी (30) और सुप्रिया कुमारी (30) शामिल है. इसके पूर्व आठ मई को आधा दर्जन और 9 मई को तीन महिलाओं को इस मामले में भरती कराया गया था. डाॅक्टरों ने सभी को खतरे से बाहर बताया है.

बी बी सी हिंदी

‘दलित मुसलमानों के घर न जाते हैं, न खाते हैं’

http://www.bbc.com/hindi/india/2016/05/160510_muslim_caste_suatik_biswas_rd

भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक और दलितों के सबसे बड़े नेता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने कहा था “छुआछूत गुलामी से भी बदतर है”.

भारत में दलित (जिन्हें पहले अछूत कहा जाता था) सबसे ख़राब स्थितियों में जीते हैं क्योंकि हिंदुओं की जाति व्यवस्था उन्हें समाज में सबसे निचले स्थान पर रखती है.

हालांकि हिंदुओं में छुआछूत के बहुत सारे प्रमाण हैं और इस पर बहुत चर्चा भी हुई है लेकिन भारत के मुसलमानों के बीच छुआछूत पर बमुश्किल ही बात की गई है.

इसकी एक वजह तो यह है कि इस्लाम में जाति नहीं है और यह समानता और समतावाद को बढ़ावा देता है.

भारत के 14 करोड़ मुसलमानों में से ज़्यादातर स्थानीय हैं जिन्होंने धर्मपरिवर्तन किया है. अधिकतर ने हिंदू उच्च-जातियों के उत्पीड़न से बचने के लिए इस्लाम ग्रहण किया.

सामाजिक रूप से पिछड़े मुसलमानों के एक संगठन के प्रतिनिधि एजाज़ अली के अनुसार वर्तमान भारतीय मुसलमान की 75 फ़ीसदी दलित आबादी इन्हीं की है जिन्हें दलित मुसलमान कहा जाता है.

इस विषय पर काम करने वाले राजनीति विज्ञानी डॉक्टर आफ़ताब आलम कहते हैं, “भारत और दक्षिण एशिया में रहने वाले मुसलमानों के लिए जाति और छुआ-छूत जीवन की एक सच्चाई है.”

अध्ययनों से पता चलता है कि “छुआछूत इस समुदाय का सबसे ज़्यादा छुपाया गया रहस्य है. शुद्धता और अशुद्धता का विचार; साफ़ और गंदी जातियां” मुसलमानों के बीच मौजूद हैं.

अली अलवर की एक किताब के अनुसार हिंदुओं में दलितों को अस्पृश्य कहा जाता है तो मुसलमान उन्हें अर्ज़ाल (ओछा) कहते हैं.

डॉक्टर आलम के साल 2009 में किए एक अध्ययन के अनुसार किसी भी प्रमुख मुस्लिम संगठन में एक भी ‘दलित मुसलमान’ नहीं था और इन सब पर ‘उच्च जाति’ के मुसलमानों ही प्रभावी थे.

अब कुछ शोधकर्ताओं के समूह के किए अपनी तरह के पहले बड़े अध्ययन से पता चला है कि भारतीय मुसलमानों के बीच भी छुआछूत का अभिशाप मौजूद है.

प्रशांत के त्रिवेदी, श्रीनिवास गोली, फ़ाहिमुद्दीन और सुरेंद्र कुमार ने अक्टूबर 2014 से अप्रैल 2015 के बीच उत्तर प्रदेश के 14 ज़िलों के 7,000 से ज़्यादा घरों का सर्वेक्षण किया.

उनके अध्ययन के कुछ निष्कर्ष इस प्रकार हैः

  • ‘दलित मुसलमानों’ के एक बड़े हिस्से का कहना है कि उन्हें गैर-दलितों की ओर से शादियों की दावत में निमंत्रण नहीं मिलता. यह संभवतः उनके सामाजिक रूप से अलग-थलग रखे जाने के इतिहास की वजह से है.

  • ‘दलित मुसलमानों’ के एक समूह ने कहा कि उन्हें गैर-दलितों की दावतो में अलग बैठाया जाता है. इसी संख्या के एक और समूह ने कहा कि वह लोग उच्च-जाति के लोगों के खा लेने के बाद ही खाते हैं. बहुत से लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें अलग थाली में खाना दिया जाता है.

  • करीब 8 फ़ीसदी ‘दलित मुसलमानों’ ने कहा कि उनके बच्चों को कक्षा में और खाने के दौरान अलग पंक्तियों में बैठाया जाता है.

  • कम से कम एक तिहाई ने कहा कि उन्हें उच्च जाति के कब्रिस्तानों में अपने मुर्दे नहीं दफ़नाने दिए जाते. वह या तो उन्हें अलग जगह दफ़नाते हैं या फिर मुख्य कब्रिस्तान के एक कोने में.

  • ज़्यादातर मुसलमान एक ही मस्जिद में नमाज़ पढ़ते हैं लेकिन कुछ जगहों पर ‘दलित मुसलमानों’ को महसूस होता है कि मुख्य मस्जिद में उनसे भेदभाव होता है.

  • ‘दलित मुसलमानों’ के एक उल्लेखनीय तबके ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनके समुदाय को छोटे काम करने वाला समझा जाता है.

  • ‘दलित मुसलमानों’ से जब उच्च जाति के हिंदू और मुसलमानों के घरों के अंदर अपने अनुभव साझा करने को कहा गया तो करीब 13 फ़ीसदी ने कहा कि उन्हें उच्च जाति के मुसलमानों के घरों में अलग बर्तनों में खाना/पानी दिया गया. उच्च जाति के हिंदू घरों की तुलना में यह अनुपात करीब 46 फ़ीसदी है.

  • इसी तरह करीब 20 फ़ीसदी प्रतिभागियों को लगा कि उच्च जाति के मुसलमान उनसे दूरी बनाकर रखते हैं और 25 फ़ीसदी ‘दलित मुसलमानों’ के साथ को उच्च जाति के हिंदुओं ने ऐसा बर्ताव किया.

  • जिन गैर-दलित मुसलमानों से बात की गई उनमें से करीब 27 फ़ीसदी की आबादी में कोई ‘दलित मुसलमान’ परिवार नहीं रहता था.

  • 20 फ़ीसदी ने दलित मुसलमानों के साथ किसी तरह की सामाजिक संबंध होने से इनकार किया. और जो लोग ‘दलित मुसलमानों’ के घर जाते भी हैं उनमें से 20 फ़ीसदी उनके घरों में बैठते नहीं और 27 फ़ीसदी उनकी दी खाने की कोई चीज़ ग्रहण नहीं करते.

  • गैर-दलित मुसलमानों से पूछा गया था कि वह जब कोई दलित मुसलमान उनके घर आता है तो क्या होता है. इस पर 20 फ़ीसदी ने कहा कि कोई ‘दलित मुसलमान’ उनके घर नहीं आता. और जिनके घऱ ‘दलित मुसलमान’ आते भी हैं उनमें से कम से कम एक तिहाई ने कहा कि ‘दलित मुसलमानों’ को उन बर्तनों में खाना नहीं दिया जाता जिन्हें वह आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं.

भारत में जाति के आधार पर भेदभाव सभी धार्मिक समुदायों में मौजूद है- सिखों में भी. पारसी ही शायद अपवाद हैं.

प्रशांत के त्रिवेदी कहते हैं, “आमतौर पर माना जाता है कि जाति एक हिंदू अवधारणा है क्योंकि जाति को हिंदुओं के धर्मग्रंथों से ही मान्यता मिलती है. यह औपनिवेशिक काल से सरकारों और विद्वानों की सोच पर प्रभावी रही है.”

अन्य शोधार्थियों के साथ उनका मानना है कि दलित मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदू दलितों की तरह फ़ायदे मिलने चाहिएं.

इससे सबक यह मिलता है कि भारत में भले ही आप जाति छोड़ दें लेकिन जाति आपको नहीं छोड़ती.

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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