दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 09.05.16

 

अध्यापक ने की छात्रा से छेड़छाड़, अध्यापिका हुई बेहोश पंजाब केसरी

http://punjab.punjabkesari.in/bathinda/news/molestation-case-from-becoming-a-student-the-teacher-unconscious-470819

दलित किशोरी का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार – पी टी आई

http://www.bhasha.ptinews.com/news/1421462_bhasha

14 वर्षों से न्याय की आस में भटक रही दलित वृद्घा – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/raigarh-depressed-old-woman-wandering-around-in-14-years-for-justice-736759

भारत में शिक्षा की बदहाली की तस्वीर-पढ़ाई में पिछड़े ओबीसी, दलित वर्ग और गांव के बच्चे – दी सिविलियंस

http://thecivilian.in/picture-of-the-plight-of-education-in-india-dalit-and-obc-students-backward-village-kid/

दलित पत्नी पानी नहीं, खोदा कुआं – नया इंडिया

http://www.nayaindia.com/mh-news/denied-water-access-dalit-man-digs-own-well-in-maharashtra-village-528588.html

आडियो वायरल मामले में अब जातीय ‘महाभारत’ – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/sambhal/cdo-issue

 

पंजाब केसरी

अध्यापक ने की छात्रा से छेड़छाड़, अध्यापिका हुई बेहोश

http://punjab.punjabkesari.in/bathinda/news/molestation-case-from-becoming-a-student-the-teacher-unconscious-470819

सरकारी हाई स्कूल भैणी के एक अध्यापक पर छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने के लगे आरोपों का मामला गर्मा गया है। इस मामले में छात्रा की मदद कर रही दलित परिवार से संबंधित अध्यापिका राजवंत कौर पर जब कुछ लोगों ने मामले में समझौता करने का दबाव डाला तो वह बेहोश हो गई जिससे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। राजवंत कौर के पति गुरसेवक सिंह ने बताया कि विरोधी पक्ष के लोगों ने उसकी पत्नी को जातिसूचक शब्द कहे। उक्त सब कुछ छेड़छाड़ के आरोपी अध्यापक अमरजीत सिंह की शह पर हुआ है।

अध्यापक ने की छात्रा से छेड़छाड़, अध्यापिका हुई बेहोश

इस संबंध में स्कूल प्रभारी पवित्र कौर ने कहा कि गांव के कुछ लोग पीड़ित लड़की की मां को साथ लेकर लड़की का नाम स्कूल से कटवाने के लिए आए थे जिस दौरान दोनों पक्षों में कुछ बहसबाजी हुई थी जिसके चलते राजवंत कौर बेहोश हो गई थी। किसी ने किसी को जातिसूचक शब्द नहीं बोले। मामले संबंधी जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत करवा दिया गया है।

पी टी आई

दलित किशोरी का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार

http://www.bhasha.ptinews.com/news/1421462_bhasha

जींद :हरियाणा:, आठ मई :भाषा: हरियाणा के जींद जिले के रामराए गेट क्षेत्र से एक युवक ने दलित किशोरी का कथित रूप से अपहरण कर लिया और रातभर उसका यौन शोषण कर उसे मकान के पास छोड़ कर फरार हो गया।

महिला थाना पुलिस ने पीड़िता की मां की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, एससी, एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रामराए गेट क्षेत्र की एक महिला ने महिला थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि छह मई रात उसकी 17 वर्षीय बेटी का जैन नगर निवासी अमृतपाल ने अपहरण कर लिया और उसे अज्ञात स्थान पर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया।

शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी। अगली सुबह आरोपी उसकी बेटी को मकान के निकट छोड़कर फरार हो गया।

महिला थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवा आरोपी अमृतपाल के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नई दुनिया

14 वर्षों से न्याय की आस में भटक रही दलित वृद्घा

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/raigarh-depressed-old-woman-wandering-around-in-14-years-for-justice-736759

रायगढ़ (निप्र)। दलित विधवा कौशल्या न्याय पाने दर-दर की ठोकर खाने मजबूर है। ससुर ठंडाराम से बंटवारे में मिली भूमि को देवर ने हड़प कर न सिर्फ एसईसीएल से मुआवजा प्राप्त किया, बल्कि नौकरी भी ले ली। ऐसे में ठंडाराम के बड़े पुत्र स्व. अवधराम की बेवा अपनी तीन संतानों के साथ दर-दर भटकने मजबूर हैं। वहीं न्याया की आस में वह एक बार फिर कलेक्टर व एसईसीएल महाप्रबंधन को शिकायत कर जांच कराने की मांग की है। गौरतलब हो कि दलित बेवा महिला को भूमिहीन बताकर पुनर्वास व मुआवजा से वंचित किया गया है। जिससे वह दर-दर भटकने मजबूर है।

दरअसल ठंडाराम चौहान लात क्षेत्र का कोटवार था, शासन ने ठंडाराम को उसकी सेवा के बदले कोटवारी भूमि प्रदान की थी। यह भूमि 2005-06 में एसईसीएल लात कोल माइंस अधिग्रहण में चली गई। वहीं ससुर ठंडाराम व कौशल्या के पति अवधराम की मृत्यु हो जाने का फायदा उठाते हुए देवर ने पिता के नाम की फौती कटाते हुए पूरी जमीन अपने नाम करा एसईसीएल से न सिर्फ पूरी भूमि का मुआवजा ले लिया व नौकरी भी प्राप्त कर ली। तब से दलित बेवा अपने हक व अधिकार को लेकर लंबी लड़ाई लड़ रही है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल सका है। अब महिला को भूमिहीन बताकर दर-दर भटकने को छोड़ दिया गया है।

दर-दर भटकने की मजबूरी

देवर से पीड़ित होने व शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से दलित बेवा कौशल्या दर-दर भटकने मजबूर है। महिला बीते 14 सालों से लगातार न्याय की गुहार लगा रही है। लेकिन अर्थाभाव से कानूनी लड़ाई लड़ने में अक्षम साबित हो रही है। दलित बेवा महिला की दो पुत्री व एक पुत्र है। मुआवजा राशि व पुनर्वास का लाभ नहीं मिलने से दलित महिला टूट चुकी है।

जीएम व कलेक्टर से न्याय की गुहार

दलित बेवा महिला कलेक्टर व जीएम को शिकायत की कापी सौंपते हुए न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या करने के अलावा दूसरा चारा नहीं होने का उल्लेख किया है। फिलहाल महिला बीते दिवस कलेक्टर व एसईसीएल जीएम से न्याय की गुहार लगाते हुए मामले के जांच की मांग की है। दरअसल बेवा कौशल्या चौहान, ससुर व पति की मृत्यु के बाद असहाय हो गई और देवर ने हिस्से में आई भूमि को न सिर्फ हड़प लिया, बल्कि भाई की पत्नी व बच्चों को रास्ते पर ला खड़ा किया।

कोटवारी भूमि का फर्जीवाड़ा

मामले में न सिर्फ बेवा क ौशल्या को ससुर से मिलने वाली विरासत भूमि व कोटवारी सेवा भूमि का अवैधानिक तरीके से कोल ब्लॉक के लिए अधिग्रहण का मामला है। दरअसल कोटवारी सेवा भूमि को लेने के पहले की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। कोटवारी सेवा भूमि को बेचने के मामले में शासन का पेंच है। ऐसी स्थिति में मामले से पर्दा उठाने की जरूरत है। अब देखना होगा कि कई मामलों को उधेड़ चुकी कलेक्टर इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं।

कलेक्टर से उम्मीद

बेवा महिला ने नईदुनिया को बेबाक बताया कि उसे कलेक्टर से उम्मीद है। ग्रामीणों के कहने पर और महिला कलेक्टर होने से उनके समक्ष गुहार लगाई है। जिले की महिला कलेक्टर ने आते ही कई मामलों से पर्दा उठाने का काम किया है। जिसमें से हाई प्रोफाइल पाखड़ चावल और कुनकुनी आदिवासी जमीन घोटाले से पर्दा उठाने की भूमिका अदा की है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि न्याय की वह फाइल जो सालों से बंद पड़ी है खुल सकेगी।

प्रशासन का नहीं आ सका पक्ष

कलेक्टर अलरमेल मंगई डी के ग्राम सुराज अभियान में व्यस्त होने की वजह से इस मामले में प्रशासन का पक्ष नहीं लिया जा सका है।

महिला कलेक्टर पीड़ितों व दीन दुखियों की जल्दी सुनती हैं, यह सुनकर उनको आवेदन देकर अपनी पीड़ा रखी हूं। उम्मीद है वह इस मामले की जांच करा कर मुझे न्याय दिलाएंगी। एसईसीएल के अधिकारी मकान तोड़ने की धमकी दे रहे हैं।

बेवा कौशल्या चौहान

लात प्रभावित

मामला गंभीर है महिला द्वारा कलेक्टर से गुहार लगाई है, उसे कलेक्टर से काफी उम्मीद हैं। यह सिर्फ हक हिस्से वाली बात नहीं, कोटवारी सेवा भूमि का गलत तरीके से उपयोग व अधिग्रहण का भी मामला है। बेवा और उसके बच्चों को न्याय मिलना चाहिए।

सविता रथ

सामाजिक कार्यकर्ता

पूरे क्षेत्र में 3 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, व्यक्तिगत तौर पर मामले में तुरंत कुछ नहीं बता पाउंगा। शिकायत की जानकारी लेकर यदि जरूरत होगी तो उसकी जांच कराई जाएगी।

उमेश चौधरी

जीएम, एसईसीएल रायगढ़

दी सिविलियंस

भारत में शिक्षा की बदहाली की तस्वीर-पढ़ाई में पिछड़े ओबीसी, दलित वर्ग और गांव के बच्चे

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अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और आधुनिक भारतीय भाषा जैसे विषयों में ग्रामीण स्कूलों के बच्चे शहरी बच्चों से काफी पीछे हैं।

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों की समझ और जानकारी अनसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के मुकाबले बेहतर पाई गई, हालांकि सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों की तुलना में वे पीछे हैं। नेशनल अचीवमेंट सर्वे- 2015 की रिपोर्ट ग्राम्य इलाकों में पढ़ने वालों और दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चों को वंचित स्थिति में मानती है।

एनसीईआरटी के नेशनल अचीवमेंट सर्वे में 7216 स्कूलों के 2,77,416 छात्रों को शामिल किया गया। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बार्ड (सीबीएसई) के साथ-साथ 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वे हुआ।

दसवीं के छात्रों पर किए इस सर्वे में एनसीईआरटी ने अंग्रेजी, विज्ञान, गणित समेत अन्य विषयों में भी गांव के बच्चों, खासकर दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चों को शहरी व सामान्य श्रेणी के बच्चों से आगे नहीं पाया।

हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, नगालैंड और मेघालय के शहरी बच्चे अंग्रेजी में गांव के छात्रों से बहुत आगे हैं। गणित में गुजरात के शहरी बच्चे आगे हैं। इसी तरह विज्ञान में गुजरात, गोवा, मेघालय, त्रिपुरा के शहरी और गांव के बच्चों की जानकारी में काफी अंतर पाया गया। हालांकि असम, केरल और पश्चिम बंगाल में गांवों के बच्चे शहरों से बेहतर हैं।

सामाजिक विज्ञान में जम्मू-कश्मीर, गोवा और गुजरात में शहर और गांव के बच्चों की समझ में बड़ा अंतर है। केवल केरल में सामाजिक ज्ञान में गांवों के बच्चे शहरी बच्चों से बेहतर हैं। आधुनिक भारतीय भाषा में जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, गुजरात, त्रिपुरा, उड़ीसा, मध्य प्रदेश के ग्रामीण बच्चे बहुत ज्यादा पिछड़े हैं। इसी विषय में लक्षदीप के ग्रामीण बच्चे शहरी छात्रों से आगे हैं।

नया इंडिया

दलित पत्नी पानी नहीं, खोदा कुआं

http://www.nayaindia.com/mh-news/denied-water-access-dalit-man-digs-own-well-in-maharashtra-village-528588.html

नागपुर। ऊंची जाति के लोगों द्वारा पानी देने से इंकार करने पर महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित विदर्भ के वासीम जिले के एक गांव में एक दलित मजदूर ने खुद से कुआं खोद डाला।

मालेगांव तालुका के कोलम्बेश्वर गांव के निवासी बापूराव तांजे की पत्नी को ग्रामीणों ने कुआं से पानी निकालने से मना कर दिया। इस सामाजिक भेदभाव का बदला लेने के लिए तांजे ने अपने गांव में ही एक कुआं खोद डाला और अब इलाके की पूरी दलित आबादी की प्यास बुझा रहे हैं। उन्होंने महज 40 दिनों में कुआं खोद डाला और पानी पाकर वह काफी खुश हैं।

विश्वास से लबरेज तांजे ने बताया कि कड़ी मेहनत के बाद जमीन के अंदर प्रचुर पानी पाकर वह खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं।

तांजे ने कहा, ‘मेरे परिवार सहित दूसरे लोगों ने मेरी आलोचना की लेकिन मैं प्रतिबद्ध था।’ इस घटना की खबर तुरंत अधिकारियों तक पहुंच गई जिसके बाद वासीम के जिला प्रशासन ने तहसीलदार क्रांति डोम्बे को गांव में भेजा।
तहसीलदार ने कहा कि तांजे के काम की प्रशंसा करते हुए जिला प्रशासन ने उन्हें ‘प्रतिबद्धता और मजबूत इच्छाशक्ति के व्यक्तित्व’ से सम्मानित किया। यह पूछने पर कि क्या तांजे को सरकारी सहायता मुहैया कराई गई तो डोम्बे ने कहा कि इस तरह का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। बहरहाल सरकार ने दलित व्यक्ति की असाधारण उपलब्धि का संज्ञान लिया है। यह पूछने पर कि क्या मजदूर की पत्नी को जिन लोगों ने कुआं से पानी खींचने नहीं दिया उन लोगों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की गई है तो डोम्बे ने कहा कि उस कुएं की पहचान नहीं हो पाई है न ही उन ग्रामीणों की जिन्होंने महिला को पानी नहीं लेने दिया।

अमर उजाला

आडियो वायरल मामले में अब जातीय ‘महाभारत’

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बहुजन सम्यक संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष/आईआरएस प्रीता हरित ने ब्राह्मणवादी और मनुवादी व्यवस्था पर जमकर प्रहार करते हुए सवाल किया कि आखिर अपमान सिर्फ दलित महिलाओं का ही क्यों होता है। महिला उत्पीड़न का विरोध करने वाली महिलाओं को भी आड़े हाथ लेते हुए अफसोस जाहिर किया।

कहा कि शीघ्र निष्पक्ष जांच हो।  जब तक आरोपी सीडीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके दंडित नहीं किया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। चाहे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े, पीड़िता को न्याय और दोषी को सजा दिलाकर ही रहूंगी।

बहजोई देहात में आईटीआई के पास सीडीओ-जिला समन्वयक आडियो मामले में बहुजन सम्यक संगठन द्वारा बुलाई गई सभा में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीता हरित का फूलमालाओं से स्वागत किया। प्रीता हरित ने कहा कि बाबा साहब एक जाति-धर्म विहीन, भेदभाव रहित समाज चाहते थे। महिला वह किसी भी जाति धर्म की है, ब्राह्मणवाद की शिकार हैं लेकिन सामाजिक अपमान सिर्फ दलित महिलाओं का ही होता है। हैरत की बात है कि महिला के उत्पीड़न के खिलाफ महिलाएं ही खड़ी हो गई, उन महिलाओं को समझना चाहिए कि इसी ब्राह्रमणवाद ने महिलाओं को पशु के साथ गिना है।

रही बात जिला समन्वयक के उत्पीड़न की तो पक्षपात हो सकता है लेकिन कानून व्यवस्था पर मेरा पूरा भरोसा है। कानून की हद में रहकर सभी से दलित उत्पीड़न के खिलाफ व आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। इसमें साथ देने के लिए सभी से हाथ उठवाकर सहमति ली। उन्होंने देश की कई दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर विस्तार से रोशनी डाली।इसमें जसवंत सिंह, ज्ञानप्रकाश, सुशीला रहे।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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