दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 08.05.16

 

कथा में बैठने पर दलितों को पीटा, फायरिंग – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/hathras/crime/dalit-beaten-to-sit-in-the-narrative-firing

थाने में दलित युवक की मौत, हंगामा – भाषा न्यूज़

http://www.bhasha.ptinews.com/news/1421023_bhasha

वह अपनी मरी हुई बेटी को अचानक से ढूंढने लगती है – आउट लुक

http://www.outlookhindi.com/country/issues/suddenly-seems-to-find-her-dead-daughter-8072

कुएं के मालिक ने नहीं निकालने दिया पत्नी को पानी, तो मजदूर ने 40 दिन में खोद निकाला कुआं – आज तक

http://aajtak.intoday.in/story/wife-denied-water-dalit-digs-up-a-well-for-her-in-40-days-1-867859.html

आइसा ने आरा में रोकी ट्रेन केंद्र के खिलाफ की नारेबाजी – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/bhojpur/story/796057.html

पढ़ाई में पिछड़े ओबीसी, दलित वर्ग और गांव के बच्चे – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/india-news/students-from-villages-lack-in-education-survey

 

अमर उजाला

कथा में बैठने पर दलितों को पीटा, फायरिंग

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/hathras/crime/dalit-beaten-to-sit-in-the-narrative-firing

हाथरस। हसायन क्षेत्र के गांव छीतीपुर में एक भागवत कथा सुनने पहुंचने पर दलित जाति के लोगों पर एक जाति विशेष के लोगों ने हमला बोल दिया। पहले उन्हें कथा में घेरकर पीटा गया। कथा को बीच में छोड़कर जब ये लोग अपने घरों के लिए चले तो पास के भट्ठे पर इन्हें घेर लिया गया। मारपीट में आठ दलित पक्ष के लोग घायल हुए हैं। इनका उपचार जिला अस्पताल में कराया गया है।

घायलों में हरप्रसाद पुत्र चोबेलाल ने बताया कि वह भागवत कथा में बैठे हुए थे। तभी हसायन से जाति विशेष के कुछ युवक आए और कथा में बैठने पर गाली-गलौज करने लगे। इसका विरोध करने पर उन्होंने मारपीट करना शुरू कर दिया। मारपीट के बाद सभी दलित जाति के लोग इकट्ठे होकर कथा से लौट लिए। इनमें से कुछ लोग पास के भट्ठे पर रहते हैं। जैसे ही ये लोग भट्ठे पर पहुंचे तो आरोपी वहां गाड़ियों में भरकर पहुंच गए और फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद लाठी-डंडों से मारपीट की गई। एसओ हसायन गंगाप्रसाद यादव का कहना है कि मारपीट में घायल लोगों का उपचार कराया गया है। जैसे ही तहरीर मिलेगी, आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

भाषा न्यूज़

थाने में दलित युवक की मौत, हंगामा

http://www.bhasha.ptinews.com/news/1421023_bhasha

 जींद :हरियाणा:, सात मई :भाषा: हरियाणा में जींद जिले के लोहचब गांव निवासी दलित युवक राजकुमार ने सफीदों थाने के शौचालय में संदिग्ध हालत में फांसी लगाकर शुक्रवार को कथित रूप से आत्महत्या कर ली।

इस मामले को लेकर परिजनों ने आज थाने और सामान्य अस्पताल में जमकर हंगामा किया। वे लोग हादसे के वक्त थाने में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर, उन्हें निलंबित करने तथा मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं। परिजनों की मांग है कि मृत युवक के परिवार से किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए।

सामान्य अस्पताल में धरने पर बैठे परिजनों में से एक महिला ने सफीदों मुख्यालय उपाधीक्षक कुलवंत बिश्नोई को पत्थर मारा, पत्थर ना लगने की सूरत में महिला ने दूसरी बार पास पड़ी एक बोतल उनपर फेंकी। इसे लेकर पुलिस और प्रदर्शन कर रहे लोगों में तनाव पैदा हो गया।

पुलिस प्रशासन ने एसडीजेएम विशाल की देखरेख में मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया।

पोस्टमार्टम के बाद एसडीजेएम विशाल ने अस्पताल में ही मृतक के भाई व अन्य लोगों के बयान दर्ज किए।

परिजनों का कहना है कि पुलिस ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ इसमें लापरवाही का मामला दर्ज किया है, और जब तक पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज नहीं होता वे शव नहीं ले जाएंगे।

पुलिस का कहना है कि राजकुमार को पुलिस ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। देर शाम उससे पूछताछ हो रही थी, तभी उसने शौच की कही। लेकिन वापस नहीं लौटा। पुलिस ने बहुत देर तक दरवाजा खटखटाया लेकिन दरवाजा नहीं खुलने पर उसे तोड़ा गया। अंदर राजकुमार ने खुद को फांसी लगा लिया था।

मृतक के भाईयों ओमप्रकाश व बलबीर ने एसडीजेएम विशाल के सामने दिए गए अपने ब्यानों में कहा कि पुलिसकर्मियों ने शुक्रवार की रात उनके घर आकर राजकुमार की गिरफ्तारी की सूचना दी। दोनों जब अपने सरपंच हरनारायण को लेकर जमानत कराने थाने पहुंचे तो उन्होंने देखा कि राजकुमार थाने के शौचालय में फांसी से लटका हुआ है और उसके घुटने जमीन पर टिके हुए हैं।

दोनों ने पुलिस पर राजकुमार की हत्या करने का आरोप लगाया है।

राजकुमार की मां तारा देवी ने बताया कि राजकुमार के परिवार में पांच बेटियां और दो बेटे हैं। उन्होंने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके बेटे की हत्या कर दी है।

पुलिस मामले में आगे कार्रवाई कर रही है।

आउट लुक

वह अपनी मरी हुई बेटी को अचानक से ढूंढने लगती है

http://www.outlookhindi.com/country/issues/suddenly-seems-to-find-her-dead-daughter-8072

भारत में महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न कोई नई बात नहीं है लेकिन जब ऐसी रिपोर्ट केरल जैसे सबसे अधिक साक्षर राज्य से हो तो थोड़ा हैरान करती है। बीते तीन-चार वर्षों से केरल में महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामले तेजी से बढ़े हैं। यही नहीं महिलाओं द्वारा आत्महत्या की घटनाएं भी सबसे अधिक केरल में दर्ज की जा रही हैं। हाल ही में केरल के पेरूम्बवूर में 30 वर्षीय दलित महिला के साथ कथित बलात्कार एवं हत्या के सिलसिले में राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच करने गई टीम की रिपोर्ट ऐसा बताती है।

दलित लड़की के साथ बलात्कार कर बेरहमी से उसे कत्ल करने की घटना दिल्ली में हुए निर्भया बलात्कार घटना जैसी है। मामला राजनीतिक तौर पर भी तूल पकड़ रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग की तीन सदस्यीय टीम ने राज्य का दौरा कर जो तथ्य रखे हैं वे ऐसे मामलों में सरकारों का पुराना रवैया दोहरा रहे हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन ललिता कुमारमंगलम का कहना है कि वे इस मामले में हो रही जांच से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। राज्य में चुनाव होने की वजह से इस मामले में जांच ठंडी पड़ी हुई है। बलात्कार पीड़िता की मां की हालत बेहद खराब है। उसे कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं दिया गया है। वह सोए हुए एक दम से उठक अपनी बेटी को ढूंढने लगती हैं। कुमारमंगलम का कहना है कि राज्य सरकार की विसरा लैब खराब है जिस वजह से जांच के लिए उसका विसरा किसी दूसरी लैब में भेजा गया है। महिला आयोग की टीम ने पाया कि जिस जगह लड़की के साथ बलात्कार किया गया वहां सुबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। हर किसी को वहां आने-जाने दिया गया। यहां तक की जांच में लड़की के पड़ोसियों तक ने पुलिस से कोई बात नहीं की।

महिला आयोग ने अपनी जांच के आधार पर मांग की है कि वे राज्य चुनाव आयोग से कहेंगे कि राज्य में काबिल पुलिसकर्मियों को इस मामले की जांच में लगाया जाए। चुनाव आयोग से इसलिए कहा जाएगा क्योंकि राज्य में चुनाव होने की वजह से वीआईपी आवाजाई बहुत हो रही है। पुलिस का कहना है कि वे इन सब में व्यस्त हैं।

गौरतलब है कि 28 अप्रैल को एर्नाकुलम जिले के पेरूम्बवूर में गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली विधि की इस छात्रा से बलात्कार किया गया और उसपर धारदार हथियार से नृशंस वार किए गए और उसकी हत्या कर दी गई। रात में करीब आठ बजे जब उसकी मां घर पहुंचीं तो उन्हें वह अपने एक कमरे के घर में खून से लथपथ मृत पड़ी मिली। इस वारदात को वर्ष 2012 में दिल्ली में एक चलती बस में एक युवती से हुए सामूहिक नृशंस बलात्कार की घटना से समानता की वजह से ‘केरल का निर्भया’ कांड करार दिया गया है।

केरल राज्य अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और पुलिस से 28 मई तक जांच की प्रगति रिपोर्ट सौंपने को कहा। केरल मानवाधिाकर आयोग ने इस वारदात की जांच अपराध शाखा को सौंपने का आदेश दिया। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जे बी कोशी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को इस संदर्भ में निर्देश जारी किया।

आज तक

कुएं के मालिक ने नहीं निकालने दिया पत्नी को पानी, तो मजदूर ने 40 दिन में खोद निकाला कुआं

http://aajtak.intoday.in/story/wife-denied-water-dalit-digs-up-a-well-for-her-in-40-days-1-867859.html

महाराष्ट्र आजकल सूखे की चपेट में है और यहां लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. वाशिम में भी पानी की भयंकर कमी है लेकिन एक दलित शख्स ने महज 40 दिनों के अंदर अकेले की कुआं खोद डाला है.

नहीं बर्दाश्त हुई पत्नी की बेइज्जती

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक वाशिम के बापूराव तजने ने वो काम अकेले कर दिखाया है, जिसके लिए 4-5 लोगों की जरूरत होती है. दरअसल बापूराव की पत्नी को एक कुएं के मालिक ने पानी निकालने से मना कर दिया था और वो अपनी पत्नी की ये बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाया. उसने तय कर लिया कि जब तक पानी नहीं ढूंढ़ लेता, तब तक खुदाई करता रहेगा . यहां तक कि उसने अपने घरवालों तक की मदद नहीं ली.

गांववालों को मिल रहा है कुएं का पानी

बापूराव वाशिम जिले के कलाम्बेश्वर गांव में एक गरीब मजदूर है. हालांकि उसने इससे पहले कभी कुआं नहीं खोदा था, बावजूद इसके वो रोजाना 6 घंटे खुदाई करता और ये सिलसिला 40 दिनों तक चलता रहा. परिवार वालों को भी उम्मीद नहीं थी कि वो कुआं खोद निकालेगा. गांववालों ने भी बापूराव का मजाक उड़ाया लेकिन कई दिनों की मेहनत के बाद उसे पानी नजर आ गया. अब गांव का पूरा दलित समाज उसके कुएं से पानी निकाल रहा है और उन्हें पानी के लिए दूसरी जाति के लोगों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है.

नहीं सहा गया अपमान

बापूराव ने कहा, ‘मैं कुएं के मालिक का नाम नहीं लेना चाहता क्योंकि मैं गांव में किसी के साथ दुश्मनी नहीं चाहता. लेकिन उन्होंने हमारा अपमान किया क्योंकि हम गरीब और दलित हैं. मार्च में उस दिन मैं घर आकर रोया. मैंने सोच लिया कि पानी के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाऊंगा. मैं मालेगांव गया और वहां से औजार लेकर आया और एक घंटे के अंदर खुदाई शुरू कर दी.’

बापूराव ने बताया कि उसने खुदाई करने से पहले ये नहीं सोचा था कि यहां पानी मिलने की संभावना है या नहीं. उसने कहा, ‘मैंने खुदाई शुरू करने से पहले भगवान से प्रार्थना की. मैं खुश हूं कि मेरी मेहनत रंग लाई है.’

परिवार कर रहा है खुदाई में मदद

बापूराव की पत्नी संगीता को भी अहसास हो गया है कि पति को न समझना उसकी गलती थी. संगीता ने कहा, ‘मैंने तब तक उनकी मदद नहीं की, जब तक उन्हें पानी नहीं मिल गया. अब घर के दो बच्चों को छोड़कर पूरा परिवार उनकी मदद कर रहा है क्योंकि वो कुएं को गहरा और चौड़ा कर रहे हैं. ये पहले ही 15 फुट गहरा है और बापूराव उसे 5 फुट और गहरा करना चाहते हैं. ऊपर से ये 6 फुट चौड़ा है, वो उसे 8 फुट चौड़ा करना चाहते हैं. मुझे उम्मीद है कि हमारे पड़ोसी भी इसमें साथ देंगे.’

तारीफ करते नहीं थक रहे पड़ोसी

बापूराव के पड़ोसी भी इस बात से खुश हैं कि उसकी मेहनत के कारण पानी की दिक्कत खत्म होने जा रही है. पहले उन्हें मीलों चलकर पानी लेने जाना पड़ता था लेकिन अब पानी के लिए न ही लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी और न ही दूसरों की जिल्लत सहनी पड़ेगी.

नाना पाटेकर ने की फोन पर बात

अपने काम के लिए बापूराव को धीरे-धीरे पहचान मिल रही है. एक मराठी चैनल ने उनकी मेहनत को टीवी पर भी दिखाया है. फिल्म एक्टर नाना पाटेकर ने उनसे फोन पर बात की और जल्द ही मिलने का वादा भी किया. एक सामाजिक कार्यकर्ता ने उन्हें 5000 रुपये की मदद राशि दी है. इसके अलावा तहसीलदार ने भी बापूराव से मिलकर मदद की पेशकश की है.

प्रभात खबर

आइसा ने आरा में रोकी ट्रेन केंद्र के खिलाफ की नारेबाजी

http://www.prabhatkhabar.com/news/bhojpur/story/796057.html

जेएनयू प्रशासन के फरमान को वापस लेने की मांग की

आरा : जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व महासचिव चिंटू कुमारी, आशुतोष कुमार, रामा नागा सहित तमाम छात्रों पर लगाये गये जुर्माने व निलंबन के खिलाफ आइसा के छात्र सड़क पर उतरे. आरा स्टेशन पहुंच कर डाउन में जानेवाली तूफान एक्सप्रेस को घंटों रोके रखा. इस दौरान छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जम कर नारेबाजी की. जाम स्थल पर ही एक सभा का आयोजन किया गया. सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि पूरे देश को केंद्र सरकार भगवा रंग में रंगना चाहती है.

दलित छात्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है. चुनाव के पूर्व छात्र-युवाओं से मोदी ने बड़े-बड़े वादे किये थे. लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं किया गया.

वक्ताओं ने कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर 10 दिनों से छात्र बैठे हुए हैं, लेकिन उनकी सुननेवाला कोई नहीं है. जेएनयू अपने फरमान को वापस नहीं लेता है, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा. वहीं एक घंटे तक रेल यातायात बाधित रहने के  कारण डाउन में जानेवाली कई ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रही. इससे रेल यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस मौके पर इनौस के प्रदेश अध्यक्ष राजू यादव, जिलाध्यक्ष शब्बीर, राजू राम, रंजन, अभिषेक, निरंजन, उज्ज्वल, संदीप आदि सैकड़ों छात्र शामिल थे.

अमर उजाला

पढ़ाई में पिछड़े ओबीसी, दलित वर्ग और गांव के बच्चे

http://www.amarujala.com/india-news/students-from-villages-lack-in-education-survey

एनसीईआरटी के ताजा सर्वेक्षण की रिपोर्ट गांवों में शिक्षा के बदहाल स्तर की तस्वीर है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और आधुनिक भारतीय भाषा जैसे विषयों में ग्रामीण स्कूलों के बच्चे शहरी बच्चों से काफी पीछे हैं।

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों की समझ और जानकारी अनसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के मुकाबले बेहतर पाई गई, हालांकि सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों की तुलना में वे पीछे हैं। नेशनल अचीवमेंट सर्वे- 2015 की रिपोर्ट ग्राम्य इलाकों में पढ़ने वालों और दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चों को वंचित स्थिति में मानती है।

एनसीईआरटी के नेशनल अचीवमेंट सर्वे में 7216 स्कूलों के 2,77,416 छात्रों को शामिल किया गया। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बार्ड (सीबीएसई) के साथ-साथ 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वे हुआ।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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