दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 28.04.16

 

अफसर ने महिला से की फोन पर अश्लील बातें, आडियो हुआ वायरल – लाइव हिन्दुस्तान

http://www.livehindustan.com/news/article/article1-male-officer-vulgar-talk-to-female-employee-audio-got-viral–529850.html

दूषित पानी ने किया बीमार और झोलाछाप ने ली जान – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/auraiya/ll-by-contaminated-water-and-claimed-the-lives-jholachap

हत्या का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार – इनाडू इंडिया

http://hindi.eenaduindia.com/CrimeNews/Crime/2016/04/28040842/Murder-revealing-3-accused-arrested.vpf

दलितों के प्लाॅटों से उखाड़ी नींव, मुआना में तनाव, कोर्ट के आदेश के बाद भी प्लाॅटों में नहीं घुसने दिया – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-jind-news-022003-72332-NOR.html

पीएसयू ने डायरेक्टर के खिलाफ किया प्रदर्शन – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/PUN-OTH-MAT-latest-dharamkot-news-021503-73433-NOR.html

आश्रम स्कूलों में हमारे समय के एकलव्य – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/columns/our-age-eklavya-in-ashram-schools

अनुसूचित जाति वर्ग की बैठक आज – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-sirsa-news-025503-71249-NOR.html

 

लाइव हिन्दुस्तान

अफसर ने महिला से की फोन पर अश्लील बातें, आडियो हुआ वायरल

http://www.livehindustan.com/news/article/article1-male-officer-vulgar-talk-to-female-employee-audio-got-viral–529850.html

संभल जिले के एक जिला स्तरीय वरिष्ठ अफसर पर दलित महिला कर्मचारी ने फोन पर अश्लील बातें कर परेशान करने का आरोप लगाया है। महिला ने जिले के डीएम से लेकर राज्य महिला आयोग तक फरियाद लगाकर अफसर पर कार्रवाई की मांग उठाई है। वहीं इस मामले में अफसर व महिला कर्मी के बीच फोन पर बातचीत की ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है। आडियो क्लिप में अफसर ने महिला कर्मचारी से बेदह आपत्तिजनक बातें कही हैं। इस प्रकरण के संबंध में आला अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।

अफसर ने महिला से की फोन पर अश्लील बातें, आडियो हुआ वायरल रल

जनपद के एक महकमे में अनुबंध पर काम करने वाली दलित महिला कर्मचारी का आरोप है कि अफसर उसका शरीरिक शोषण करने के लिए लंबे समय तब दबाव बनाता रहा है। पीड़ित महिला के पास अफसर से हुई इस बातचीत का आडियो टेप भी है। वायरल हुई आडियो क्लिप में अफसर महिला कर्मचारी से प्यार मुहब्बत की बातें करता सुनाई दे रहा है।

महिला कर्मचारी का कहना है कि अफसर ने उससे कहा कि मेरे घर पर आओ मैं तुम्हारा काम कर दूंगा और तुम मेरा काम कर देना। ऐसा न करने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी अफसर ने दी है। जनपद के अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। महिला ने अपनी फरियाद दिल्ली की एक महिला एनजीओ को भी सुनाई है। वहीं उसने जनपद के डीएम के साथ ही राज्य महिला आयोग को भी फरियाद भेजकर अफसर के शोषण से निजात दिलाने की मांग उठाई है।

…पहली बातचीत….

अफसर…ये जो आप कह रहे हो हम तो आपको चार-पांच महीने से दिल के पास रखे हैं।

महिला कर्मचारी …बताया नहीं ना आपने कभी।

अफसर …अरे बताने का मौका दोगे तभी तो बताएंगे, आज बताया हमने आपको क्यों।

महिला कर्मचारी …जी सर।

अफसर …और कोई आवाज आ रही है क्या तुम्हारे आसपास से।

महिला कर्मचारी …नहीं सर में अकेली हूं यहां पर, आपने कहा था ना सर अकेले में हो तब बात करना।

अफसर …ये कह रहे हैं ना दिल की बातें दिलवाले नजरों से पहचानते हैं, आंखों से देखा जाता है, क्या समझे आप।
वो हमें याद है कोई वहां पर हो रहा था 15 अगस्त का कार्यक्रम, तब भी हमने आपको देखा था, हूं देखा तो अनेक बारे तुम्हें, बोलो तुम देखने ही कहां देती थीं। नजरें नहीं मिलती थीं तुम्हारी हमसे।

महिला कर्मचारी…ऐसा पता नहीं था कि आप हमें नोटिस कर रहे हैं।

अफसर …नोटिस कर रहे हैं तभी तो अच्छी तरह से आज मन किया बात कर रहे हैं। बहुत ज्यादा अंदर से यह तो संयोग है आप आ गए। नंबर हमारे पास था नहीं तुम्हारा। दूसरा यह भी तो रहता है। जैसे इतनी देर बात हुई हमारी-तुम्हारी, हमें तसल्ली हुई। जैसे कुछ लोग गलत मानते हैं ना किसी बात को।

कर्मचारी …जी बिल्कुल सर।

अफसर …यू आर वैरी वैरी नाइस।

महिला कर्मचारी…आप इतना कह रहे हैं तो लगने लगा है हमारे अंदर कोई बात है कि आप हमें नोटिस कर रहे हैं।

अफसर …बात नहीं तुम हमें अच्छे लगते हो, समझे। हमसे दोस्ती कर रहे हो या नहीं यह बताओ कमिट करो।

महिला कर्मचारी ….हां,हां सर फाइनल है सर।

अफसर…हां, वही कह रहे हैं दोस्ती हमसे कर लो। और एक बार हमारी आपकी बात जरूर होनी चाहिए, ध्यान रखना, यह ध्यान रखना जैसे कि आपके पास लैंडलाइन है कि नहीं हमारा। जहां हम बैठते हैं सेपरेट है यह हमारा।

महिला कर्मचारी…जी सर।

अफसर ….जी सर न बोलो, जी सर बोलोगे तो दोस्ती कैसे हो पाएगी। यह कह रहे हैं ना कभी नंबर हम मिलाएंगे तुमको तो लैंडलाइन से बात होगी। जैसे जानती हो ना घर में फोन जाए बच्चे-वच्चे, ध्यान जाए तो अदरबाइज होता है ना। एक तो यह है कि हम बहुत पहले से आपको मिस कर रहे हैं। तीन-चार महीने से है ना, मौका ही नहीं लगता था तुम्हारी तरफ नजर करने का। वो एक दिन विदाई हो रही थी ना डीपीआरओ की।

महिला कर्मचारी …सर हमें कोई बुलाने आया है…डीपीआरओ साहब बुला रहे हैं। अफसर …फिर मिलाते हैं तुम्हें ठीक है।

…..दूसरी बातचीत……..

अफसर…आपने कहा ना वहां हमारी व्यवस्था कैसी है। जो लोग व्यवस्था करने वाले बहुत अच्छे हों तो व्यवस्था तो अच्छी होगी अपनेआप क्यों। जब तुम बहुत अच्छे हो तो तुम्हारी व्यवस्था तो अच्छी रहेगी ही क्यों।

महिला कर्मचारी…जी सर, थैंक्यू सर।

अफसर …अरे थैंक्यू क्या, यह कह रहे हैं ना। अरे भई हमसे भी कभी बात कर लिया करो, आपको अदरबाइज न लगे, क्यों। अगर आपको अन्यथा फील ना हो हमें भी अपने नजदीक रखो।

महिला कर्मचारी …जी सर।

अफसर …इस लायक समझ रहे हो कि नहीं हमको।

महिला कर्मचारी …ठीक है सर।

अफसर …अरे सुन तो हमारी। अरे भई आपसे आज बात करके बहुत अच्छा लगा। दिल के उस पार कोई होता है नहीं, कोई दिल के पास आ जाता है। हैलो…।

महिला कर्मचारी…हां मैं सुन रही हूं सर।

अफसर …एक एहसास हुआ ना कोई दिल के करीब आ जाता है।

महिला कर्मचारी…सर इतनी जल्दी दिल के पास।

अफसर …नहीं ठीक कह रहे हैं। एक तो यह ना कि आदमी जब देखता है किसी को तो पहला तो अटैचमेंट देखने से होता है। याद करो एकाद बार मीटिंग में हमने आपको देखा होगा। हूं,हूं बैठक में तो देखते ही सुनो मेन है हमारा बोडी का पार्ट हैं आंखें, आंखें बहुत कुछ बोलती हैं, जैसा तुमने कहा ना के इतनी जल्दी कैसे पहुंच गए दिल के पास। दिल के पास इतनी जल्दी नहीं, यह सब तो बहुत पहले से था ना, क्या समझे अब। दिल की जबान नहीं होती ना, नहीं होती ना।

महिला कर्मचारी…हां सर, हां सर।

अफसर …दिल के पास तो जबान होती नहीं है और जबान के पास दिल नहीं होता। तो आपको बहुत दिनों से हमको याद आ रहा है, 15 अगस्त कब था कार्यक्रम, 15 अगस्त या दो अक्टूबर का था। 15 अगस्त में भी तो हुआ होगा, कहां बैठकर बरामदे में हो रहा होगा।

महिला कर्मचारी…सर, मीटिंग हाल में वो स्वच्छकार वाला कार्यक्रम।

अफसर …नहीं, नहीं। दो अक्टूबर वाला कार्यक्रम। तब से हम तुम्हें देख रहे हैं। तुमने कहा ना एकाएक दिल के पास। तबसे आपको हम देख रहे हैं। क्या समझा आपने। हूं।

महिला कर्मचारी…सर, आपने बताया नहीं ना कभी।

अफसर…अरे बताने का मौका कहां मिला जनाब। जैसे किसी से चाहत होती है तभी तो आदमी बात करता है। हमने कभी तुम्हें रोका नहीं कि तुम रुको, ऐसे किसी दूसरे से नंबर लेते तो बात गलत होती। अच्छा एक चीज का ख्याल रखना, हमारी, आपकी बात होगी कभी, नंबर जो हमारा फीड करना……….के बजाए किसी लेडीज के नाम से फीड कर लेना। सलाह दे रहे हैं। महिला कर्मचारी …ठीक है।

अमर उजाला

दूषित पानी ने किया बीमार और झोलाछाप ने ली जान

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/auraiya/ll-by-contaminated-water-and-claimed-the-lives-jholachap

क्षेत्र के नौगवां गांव में कुएं का दूषित पानी पीने से फैले डायरिया की चपेट में आने से दो दर्जन से अधिक बच्चे, महिलाएं और पुरुष बीमार हैं। मंगलवार रात डायरिया से युवती की मौत हो जाने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। लेकिन किशोरी की मौत के लिए बीमारी से ज्यादा झोलाछाप जिम्मेदार है। बुधवार को सीएमओ के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने गांव में बीमार लोगों को दवाएं बांटी। कई लोगों की स्लाइडें भी बनाई हैं। सीएमओ ने प्रधान को गांव के कुओं की सफाई कराने के निर्देश दिए हैं। लेखपाल रमाकांत अवस्थी ने मौके पर पहुंच जांच रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी है।

युवती लाली की मौत के बोर में लोगों ने बताया कि सोमवार सुबह जब लाली को उल्टी-दस्त शुरू हुए तो परिजन उसे कंचौसी के एक झोलाझाप के पास ले गए। डाक्टर के गलत इलाज से लाली की हालत बिगड़ती चली गई। स्थानीय लोगों की माने तो मंगलवार सुबह से लाली की आवाज भी बंद हो गई। लेकिन झोलाछाप ने उसका इलाज जारी रखा। देर रात लाली की मौत हो गई। सहार स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. संजय बाजपेयी ने बताया कि चार मरीजों को ओवरडोज दिए जाने के कारण हालत बिगड़ी है। जिसमें उनके शारीरिक सिस्टम ने काम करना ही बंद कर दिया है। एक ही मौत हो चुकी है। इलाज करने वाले झोलाछाप के खिलाफ  कार्रवाई होगी।

यह है डायरिया की चपेट में

इधर गांव में डायरिया की चपेट में आने वालों में बिट्टी देवी (65) पत्नी तुलसीराम, राजाबेटी (50) पत्नी अशर्फीलाल, खेतन (50), मोहिनी (9) पुत्री कप्तान सिंह, अंजली (7), रागनी (5) पुत्रियां कप्तान सिंह, प्रांशी पुत्री सुमन देवी (35), पप्पू (3) पुत्र गेंदालाल, विमला देवी (35) पत्नी गेंदालाल, गोविंद (8) पुत्र इंद्रपाल, रामलखन(52) पुत्र गुलजारी, सोहन पुत्र ब्रजेंद्र कुमार, सुदामा प्रसाद (42) पुत्र सरमन लाल, गौरव (14) पुत्र श्याम कु मार, राहत (2) पुत्र राजेश, प्रियंका (13) पुत्री राधेकृष्ण, लक्ष्मी (05) पुत्री सुरेंद्र आदि डायरिया से पीड़ित है। वहीं मंगलवार की देर रात डायरिया की चपेट में आने से लाली (18) की मौत हो चुकी है।

कैसे फैला गांव में डायरिया

नौगवां गांव की दलित बस्ती में सालों पुराना एक कुआं है। आधे गांव में करीब 250 लोगों की यह प्यास बुझाता है। गांववासी सुरेंद्र कुमार, नाथूराम, विनोद दोहरे आदि ने बताया कि कई सालों से गांव के कुओं में दवा नहीं डाली गई है। बस्ती में लगे तीन सरकारी हैंडपंपों से पानी उतर गया है। इसके चलते सभी लोग कुएं का पानी पीते हैं। इस दौरान गांववासियों ने कुएं से पानी निकाल उसमें पनप रहे कीड़े भी दिखाएं।

गांव की बस्ती में कुएं का पानी पू्री तरह से दूषित है। पानी में कीडे़ पडे़े हुए है। प्रधान विवेक दुबे को तत्काल कुएं में दवा डालने को कहा है। वहीं गांव में खुले में शौच आदि करने की जानकारी भी मिली है। लोगों को शौचालय का प्रयोग की सलाह दी गई है।

एसबी मिश्रा (सीएमओ, औरैया)

इनाडू इंडिया

 हत्या का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार

http://hindi.eenaduindia.com/CrimeNews/Crime/2016/04/28040842/Murder-revealing-3-accused-arrested.vpf

हरदोई। उत्तरप्रदेश के हरदोई में चार रोज पहले एक 12 साल के दलित बालक की गला दबाकर हत्या करने के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। बालक की हत्या महज बाग़ में लगी अमिया तोड़ने के लिए की गयी थी। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें दो नाबालिग है।

पुलिस की गिरफ्त में आए तीनो आरोपी हरदोई के कोतवाली देहात के खुमारीपुर गांव के रहने वाले है। इनमे एक बबलू उर्फ़ बौना बालिग़ है। जबकि दो नाबालिग है। मृतक सुमित का शव 23 अप्रैल की सुबह गांव से कुछ दूर एक बाग़ की झाड़ियों में पाया गया। हत्यारों ने उसकी गला दबा कर हत्या की थी।  पोस्टमार्टम में दुराचार की पुष्टि नहीं होने और मामला ब्लाईंड मर्डर का था। जिसके बाद पुलिस ने गाव में कई लोगों से जानकारी जुटाई तो पुलिस को गांव के एक नाबालिग लड़के गिरीश द्वारा सुमित को बुलाये जाने की जानकारी मिली थी । जिसके बाद पुलिस ने नाबालिग आरोपी को पकड़ा गया और उससे पूछताछ की गयी तो उसने सुमित की मौत का राज़ खोल दिया।

दरअसल सुमित ने आरोपी के बाग़ से अमिया तोड़ ली थी। इसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ और गिरीश ने अपने दो और साथियों के साथ उसकी पिटाई करनी शुरू कर दी। इसी दौरान गला दबाने से उसकी मौत हो गयी। तो तीनो ने उसके शव को खींचकर बगिया में झाड़ियों में डाल दिया और उसके ऊपर पुवाल डाल कर ढक भी दिया।

दैनिक भास्कर

दलितों के प्लाॅटों से उखाड़ी नींव, मुआना में तनाव, कोर्ट के आदेश के बाद भी प्लाॅटों में नहीं घुसने दिया

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-jind-news-022003-72332-NOR.html

सरकारद्वारा दलितों को दिए गए प्लाॅटों को लेकर गांव मुआना में विवाद बढ़ गया है। सफीदों कोर्ट द्वारा 21 अप्रैल को दिए गए आदेश के बाद कुछ लोग इन प्लाॅटों पर निर्माण कर रहे थे। मंगलवार देर रात कुछ लोगों ने दलितों के प्लॉटों से ईंटों को उखाड़कर मौके पर मौजूद लोगों से मारपीट की।

इसकी सूचना एसडीएम डीएसपी सफीदों को दी गई। एसएचओ नरसिंह गांव में पहुंचे, मामला के गंभीरता को देखते हुए रात भर पुलिस गांव में रही। बुधवार को एसडीएम ने मौके का मुआयना करने के लिए नायब तहसीलदार को भेजा। अब भी गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। वर्ष 1975-76 की मौजूदा सरकार द्वारा गांव के खसरा नंबर 454 में करीब 64 प्लाॅट 3-3 मरले के अलॉट किए गए थे। यह जमीन आवासीय योजना के तहत गांव के कुछ लोगों को अलॉट की गई थी। तभी से ये लोग इन प्लाॅटों को प्रयोग कर रहे थे। पिछले कुछ दिनों से गांव के कुछ लोगों द्वारा उक्त प्लाॅटों को खाली करवाने की कोशिश की जा रही है। जिससे ये विवाद और बढ़ गया। 8 फरवरी को प्लाॅटों से जबरदस्ती मिट्टी हटवाने का कार्य किया गया। जिसकी शिकायत एसडीएम सफीदों को दी गई। जिसके बाद निशानदेही ली गई। उसके बाद भी कार्य ना करने देने से रोषित लोग 29 मार्च को डीसी जींद से मिले। वहीं दूसरी पार्टी ने इस जमीन को तालाब की बताया और कब्जा ना करने देने पर अड़े हैं। फिर दलित वर्ग के लोगों ने सफीदों कोर्ट से गुहार लगाई। जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पीड़ित वर्ग के पक्ष में किसी भी व्यक्ति को काम ना रोकने के आदेश दिए। मंगलवार को किए गए निर्माण को दूसरे पक्ष ने गिरा दिया और लोगों के साथ मारपीट की गई।

पीड़ित वर्ग के धर्मपाल, राजेंद्र, गोपी, सुशील, रामधन, राजेश, प्रकाश आदि ने बताया कि वे इस जमीन पर करीब 40 सालों से काबिज हैं। अब ये लोग चुनावी रंजिश निकालने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इस बार चुनाव में पीड़ित वर्ग ने उक्त लोगों का साथ देकर सरपंच बने मास्टर सुखबीर का साथ दिया। जिससे खफा होकर ये लोग उन्हें परेशान करने में लगे हैं। इस तोड़फोड़ में उन्हें लाखों रुपए का नुकसान और मानसिक रूप से परेशान किया गया है। उन्होंने जातिसूचक गालियां दी गई।

दैनिक भास्कर

पीएसयू ने डायरेक्टर के खिलाफ किया प्रदर्शन

http://www.bhaskar.com/news/PUN-OTH-MAT-latest-dharamkot-news-021503-73433-NOR.html

पंजाबस्टूडेंट्स यूनियन की ओर से प्रदेश कमेटी सदस्य बलतेज सिंह धर्मकोट पर गुरसेवा नर्सिंग कॉलेज के डायरेक्टर जंग बहादर सिंह राए की ओर से हमला करवाने के आरोप में सरकारी आईटीआई में अर्थी फूंक प्रदर्शन किया गया।

पीएसयू के जिलाध्यक्ष सुखजीत सिंह बुक्कनवाला ने बताया कि विद्यार्थी नेता बलजीत सिंह पर हमला राजनीतिक रंजिश का नतीजा है क्योंकि पिछले साल नए शहर के अलग-अलग कॉलेजों में फीस माफी संघर्ष के बाद करीब 20 करोड़ की फीस माफ करवाई थी। इस कारण प्राइवेट कॉलेजों वाले विद्यार्थी नेता से रंजिश रखते हैं। जब गुरसेवा नर्सिंग कॉलेज में दलित अन्य पिछड़ी श्रेणियों के विद्यार्थियों की फीस माफी के लिए संघर्ष चल रहा था तो कॉलेज के डायरेक्टर जंग बहादुर सिंह ने विद्यार्थी नेता से साजिश के तहत मारपीट करवाई। जंग बहादुर सिंह एसजीपीसी का सदस्य शिरोमणि अकाली दल का लीडर है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि अकाली भाजपा सरकार दलित विरोधी इसके जत्थेदार दलितों के दुश्मन है। अगर आरोपियों पर कार्रवाई की और विद्यार्थियों की फीसें माफ की तो तीव्र संघर्ष का रास्ता अपनाते पीएसयू आरपार की लड़ाई का ऐलान करेगी। इस अवसर पर गुरतेज सिंह, जगमोहन खोसा, अर्श आदि उपस्थित थे।

नर्सिंग कॉलेज के डायरेक्टर के खिलाफ प्रदर्शन करते पीएसयू के सदस्य।

अमर उजाला

आश्रम स्कूलों में हमारे समय के एकलव्य

http://www.amarujala.com/columns/our-age-eklavya-in-ashram-schools

चीजें जितनी बदलती जाती हैं, उतनी वे एक जैसी दिखती रहती हैं। यह एक फ्रेंच मुहावरे का हिंदी में तर्जुमा है, जो अक्सर आदिवासियों की स्थिति को लेकर याद आता है। हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार ने संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी बहुल दस राज्यों में संचालित सरकारी आवासीय विद्यालयों की स्थिति पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी, जिनसे पता चला कि 2010 से 2015 के दौरान ऐसे विद्यालयों में विभिन्न कारणों से 882 विद्यार्थियों की मौत हो गई। इनमें सर्वाधिक मौतें महाराष्ट्र और फिर ओडिशा में हुईं। इस सूची में गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य भी शामिल हैं। अखबार ने ऐसे सरकारी आवासीय विद्यालयों में होने वाली मौतों के साथ ही उनके कारण, यौन अत्याचार की घटनाएं और ऐसे माता-पिता के ब्योरे भी मांगे थे, जिन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है। आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ और उत्तरी राज्य हिमाचल प्रदेश ने आरटीआई के तहत मांगी इन जानकारियों का जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल महाराष्ट्र के चंद्रपूर जिले की जीवती तहसील में चार छात्रों द्वारा 15 अगस्त के दिन की गई आत्महत्या की कोशिश का मामला सुर्खियों में रहा था, जिन्होंने जैसे ही झंडा फहराने की प्रक्रिया शुरू हुई, अपने जेब में रखी जहर की बोतलें अपनी हलक के नीचे उतार दी थीं। जांच में पता चला कि इन छात्रों ने यह कदम स्कूल की बदइंतजामी, अध्यापकों की कमी और खाने की सामग्री की अनुपलब्धता आदि को रेखांकित करने के लिए उठाया था। डेढ़ साल पहले ओडिशा के नयागढ़ जिले के राणापुर ब्लॉक के केन्दुआ में आदिवासी लड़कियों के लिए बने छात्रावास में भोजन के बाद 20 लड़कियां बीमार हो गई थीं, जिनमें से एक की मौत हो गई। ये घटनाएं और जानकारियां इसी परिघटना की व्यापकता को रेखांकित करती है, जो बताती हैं कि देश भर में फैली आश्रमशालाओं में ऐसी घटनाओं का होना अब अपवाद नहीं है। ध्यान रहे कि नवोदय विद्यालय की तर्ज पर बने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में छठी से 12वीं तक के बच्चे पढ़ते हैं। केंद्र सरकार की आदिवासी उपयोजना के तहत संचालित आश्रमशालाओं में ऐसी घटनाओं की बहुतायत देखी गई है। प्रश्न उठता है कि वंचित समुदाय के मेधावी बच्चों के शैक्षिक विकास के लिए बने ऐसे स्कूल मौत के कुएं क्यों बन रहे हैं। इनकी निगरानी करने वाला तंत्र भी उपलब्ध नहीं है।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा प्रकाशित ‘नेशनल फोकस ग्रुप ऑन प्रॉब्लम्स ऑफ शेड्यूल्ड कास्ट ऐंड शेड्यूूल्ड ट्राइब चिल्ड्रन’ शीर्षक रिपोर्ट अध्यापकों एवं अनुसूचित तबके के छात्रों के अंतर्संबंधों पर ठीक रोशन डालती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अध्यापकों के बारे में यह बात देखने में आती है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों एवं छात्राओं से उनकी न्यूनतम अपेक्षाएं होती हैं और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले गरीब बच्चों के प्रति तो उनका व्यवहार बेहद अपमानजनक और उत्पीड़नकारी रहता है। यह अकारण नहीं कि इन तबकों के स्कूल छोड़ने की दर में कमी के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। और संविधान के तमाम वायदों के बावजूद 21वीं सदी में भी शिक्षा हासिल करना अनुसूचित तबके के अधिकतर छात्रों के लिए बाधा दौड़ जैसा ही बना हुआ है।

दैनिक भास्कर

अनुसूचित जाति वर्ग की बैठक आज

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-sirsa-news-025503-71249-NOR.html

सिरसा | हरियाणाप्रदेश खटकी समाज सभा की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग की बैठक गुरुवार को शाम 6 बजे काठ मंडी स्थित चिड़ावां वाली धर्मशाला में होगी। बैठक की अध्यक्षता अनुसूचित जाति अधिकार मंच के उपाध्यक्ष अशोक कुमार एडवोकेट करेंगे। बैठक आयोजक नरेश दाहिमा ने बताया कि बैठक के दौरान दलित वर्ग में आने वाली जातियों वाल्मीकि, धानक, खटीक, बावरिया, बाजीगर, मजहबी सिख, ओड, सपेला और सिगलीगर आदि 42 जातियों को अलग से मिले आरक्षण के बी वर्गीकरण को बहाल करवाने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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