दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 17.04.16

 

दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या, शव थ्रेसर में डाला – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/firozabad/beating-murder-of-a-dalit-youth-put-the-body-in-thresher

लढ़िया इलाके में दलित बच्ची से रेप अमर उजाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/aligarh/ladiya-area-dalit-child-rape

दलितों के मामलों का निपटारा दो महीने में होगा समय लाइव

http://ftp.samaylive.com/nation-news-in-hindi/348806/cases-will-be-disposed-of-dalits-in-two-months.html

पांच हजार किसानों को मुफ्त मिलेगा अरहर व तिल का हाईब्रिड बीज दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-MUR-MAT-latest-morena-news-034003-8479-NOR.html

 

अमर उजाला

दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या, शव थ्रेसर में डाला

http://www.amarujala.com/uttar-pradesh/firozabad/beating-murder-of-a-dalit-youth-put-the-body-in-thresher

शुक्रवार शाम थाना मटसेना के गांव करछुली में मजदूरी मांगने वाले दलित की पिटाई, फायरिंग और अंबेडकर प्रतिमा क्षतिग्रस्त करने का मामला शांत नहीं पड़ा था कि इसी रात गांव दौकेली में गेहूं निकासी के दौरान थ्रेसर की स्पीड बढ़ाने को लेकर दबंगों ने दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को थ्रेसर में डाल दिया। देर रात पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। थ्रेसर को खुलवाकर शव बाहर निकाला। घटना के बाद से गांव में तनाव है।

Beating murder of a Dalit youth, put the body in thresher
शुक्रवार रात एक बजे मटसेना थाना क्षेत्र के गांव दौकेली के कई खेतों में थ्रेसर से गेहूं की छंटाई का कार्य चल रहा था। बृजलाल कुशवाहा गेहूं निकलवानेे के लिए गांव के ही योगेंद्र प्रताप सिंह पुत्र मथुरा प्रसाद को ट्रैक्टर और थ्रेसर सहित खेतों पर लाया था। योगेंद्र प्रताप ने थ्रेसर से गेहूं की छंटाई शुरू की तो बृजलाल के परिवारीजनों ने थ्रेसर की स्पीड बढ़ाने को कहा। योगेंद्र ने मना किया तो विवाद हो गया। गुस्से में आकर बृजलाल के परिवार के लोगों ने योगेंद्र की लाठी-डंडों से पिटाई कर हत्या कर दी और शव को थ्रेसर में डाल दिया। घटना से ग्रामीणों में सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंचे योगेंद्र के परिवारीजनों ने पुलिस को हत्या की जानकारी दी। इसके बाद एसपी सिटी संजीव वाजपेयी के साथ कई थानों की पुलिस पहुंच गई और थ्रेसर खुलवाकर शव को निकलवाया। बताते हैं कि थ्रेसर में योगेंद्र के शव के टुकड़े फंस गए थे। कुछ लोगों का कहना था कि युवक को पीट कर थ्रेसर में डाला इससे उसकी मौत हुई। बेटे के शव के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे मथुरा प्रसाद का आरोप है कि मटसेना पुलिस समझौते के लिए दबाव बनाती रही। दस घंटे बाद भी पुलिस ने तहरीर नहीं ली। बसपा नेताओं ने आक्रोश जताया लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

अमर उजाला

लढ़िया इलाके में दलित बच्ची से रेप

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महानगर के सासनी गेट के लढ़िया इलाके में शनिवार देर रात एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने टॉफी दिलाने के बहाने आठ साल की दलित बच्ची के साथ रेप किया। हैवानियत से बच्ची की हालत बिगड़ गई और बेहोश हो गई। आनन-फानन परिजन बच्ची को मेडिकल कॉलेज ले गए। इधर, मोहल्ले के लोगों ने आरोपी को दबोच लिया। लेकिन पुलिस के देर से पहुंचने पर पब्लिक भड़क गई। पुलिस जैसे ही आरोपी को लेकर थाने पहुंची तो पब्लिक ने थाना घेर लिया।

बाद में एसओ ने पब्लिक को समझा बुझा कर शांत किया।

बताया जाता है कि मोहल्ला अनार कली लढ़िया निवासी दलित परिवार की 8 साल की बच्ची देर रात घर के पास ही दुकान पर किसी काम से गई थी। आरोप है कि तभी मोहल्ले का नसीम उसे अपने साथ टॉफी दिलाने के बहाने एकांत में ले गया। जहां उसके साथ दुष्कर्म किया और बच्ची के शोर पर जब लोगों की निगाह गई तो आरोपी भाग निकला। लेकिन बाद में पब्लिक ने नसीम को दबोच लिया। बच्ची को बेहोशी की अवस्था में देख पहले उसे जिला अस्पताल और फिर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। इधर, इलाके के लोगों का आरोप था कि पुलिस सूचना के काफी देर बाद आई। हालांकि पुलिस आरोपी को सासनीगेट थाने ले गई। मगर पीछे-पीछे पब्लिक पहुंच गई। जहां थाने का घेराव कर हंगामा करते हुए आरोपी पर कार्रवाई की मांग की। बाद में एसओ के समझाने पर मामला शांत हुआ। देर रात पुलिस बच्ची के इलाज कराने में जुटी थी।

समय लाइव

दलितों के मामलों का निपटारा दो महीने में होगा

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दलितों पर अत्याचारों और ज्यादतियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने और संबंधित मामलों के लिए विशेष अदालतों का गठन करने के प्रावधान वाला अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति (अत्याचार निरोधक) संशोधन अधिनियम 2016 लागू हुआ.

सरकार ने शुक्रवार देर शाम अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति (अत्याचार निरोधक) संशोधन अधिनियम 1995 के स्थान पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति (अत्याचार निरोधक) संशोधन अधिनियम 2016 लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी. इसके तहत मामले आरोप पत्र दाखिल करने के दो महीने के भीतर अनिवार्य रुप से निपटाए जायेंगे.

इस अधिनियम के तहत दलितों पर अत्याचारों और ज्यादतियों के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा और इसका फैसला आरोप पत्र दाखिल करने के दो महीने के भीतर में करना होगा. ये अदालतें ऐसे मामलों में स्वयं भी संज्ञान ले सकेगीं. दलितों के अत्याचार संबंधी मामलों के लिए विशेष सरकारी वकीलों की नियुक्ति भी की जाएगी.

इस अधिनियम में दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म से पीड़ित दलित महिलाओं को राहत देने के लिए विशेष प्रावधान किये गए हैं. दलितों के लिए राहत राशि की सीमा दोनों श्रेणियों में 75 हजार रुपए – साढे सात लाख रुपए से बढाकर 85 हजार रुपए – सवा आठ लाख रुपए कर दी गयी है.

दलितों के जबरदस्ती मूंछ और सिर मुंड़ाने, जूते चप्पल की माला पहनाने, अपमानजनक व्यवहार करने, सिंचाई सुविधाओं एवं वन क्षेत्रों में पहुंचने नहीं देने, मैला उठाने, मरे हुए पशुओं को उठाने, कब्र खुदवाने, जातिसूचक या अपमानजनक संबोधन से पुकारने, जादू-टोना संबंधी अत्याचार करने, सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार करने, चुनाव लड़ने से रोकने, दलित महिलाओं के आभूषण उतारने, घर छोड़ने के लिए मजबूर करने और यौन प्रताड़ना के मकसद से इशारा करने, छूने और बोलने को भी अत्याचार की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है.

इसके अतिरिक्त दलित लोगों को नुकसान पहुंचाना, अपहरण, डराना धमकाना भी इस अधिनियम के दायरा में होगा. इसके लिए 10 वर्ष तक की कैद का प्रावधान किया गया है. अधिनियम में एक नया अध्याय पीडित एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अधिकार भी जोड़ा गया है. अधिनियम में ‘जानबूझकर लापरवाही’ को सभी स्तरों पर साफ तौर से परिभाषित किया गया है. अधिनियम में कहा गया है कि अदालतें यह मानकर मामले की सुनवाई करेंगी कि दलितों पर अत्याचार करने वाला व्यक्ति उसकी जाति आदि से परिचित है.

दैनिक भास्कर

पांच हजार किसानों को मुफ्त मिलेगा अरहर व तिल का हाईब्रिड बीज

http://www.bhaskar.com/news/MP-MUR-MAT-latest-morena-news-034003-8479-NOR.html

डेढ़ लाख से अधिक किसान इस बार खरीफ सीजन में ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरा, अरहर, तिल सहित ग्वार की बोवनी करेंगे। कम अवधि में पकने वाली अरहर व तिल की फसलों के लिए 5000 किसानों को हाईब्रिड बीज व कीटनाशक दवाएं उपलब्ध कराने की तैयारी कृषि विभाग ने की है। इसके साथ ही नई पद्धति से एक हजार किसान बाजरा की बोवनी करेंगे।

इस बार तिल की बोवनी 30 हजार हेक्टेयर में कराने का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले साल 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लि उगाया गया था। चूंकि किसानों को पिछली फसल में तिल के रेट 6500 रुपए से 7000 रुपए क्विंटल के रेट मिले थे इसलिए इस बार 10 से 12 हजार किसान तिल की खेती करने के आगे आए हैं। 65 से 70 दिन में पकने वाली तिल की फसल में एक बीघा खेत में 2.5 से तीन क्विंटल तिल पैदा होता है जिसकी बाजारू कीमत 18 से 20 हजार रुपए होती है। पांच बीघा की पैदावार पर किसान को लगभग एक लाख रुपए की आय होने की संभावना है इसलिए किसान कम अवधि की फसल तिल को उगाने की तैयारी में लग गए हैं । 300 क्विंटल तिल बीज किसानों को ब्लॉक कार्यालयों के माध्यम से बांटा जाएगा।

अरहर की फसल 160 से 180 दिन में पककर होगी तैयार 

आंकड़े एक नजर में 

बाजरा : एक लाख 25 हजार हेक्टेयर में की जाएगी बोवनी

तिल : 30 हजार हेक्टेयर

अरहर : 30 हजार हेक्टेयर

मूंग : 4000 हेक्टेयर

उड़द : 4000 हेक्टेयर

ग्वार : 20 हजार हेक्टेयर

मक्का : 4000 हेक्टेयर

सोयाबीन : 3000 हेक्टेयर

75 फीसदी मिलेगी छूट 

खरीफ सीजन की फसल की बोवनी के लिए किसानों को प्रमाणित व उपचारित बीज उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि विभाग, सूरजधारा व अन्नपूर्णा योजना के तहत अनुसूचित जाति के किसानों का बीज खरीदने पर 75 फीसदी अनुदान देगा। यानी बीज की घोषित रेट पर किसान को एक चौथाई पैसा देना होगा। बीज की व्यवस्था कृषि विश्वविद्यालय से की जा रही है।

तापमान व बारिश पर नजर 

खरीफ सीजन की बोवनी के लिए जिले के एक लाख किसानों की नजर तापमान व बारिश पर फोकस रहेगी। पूर्वानुमान के मुताबिक इस बार अच्छी बारिश होने कर संभावना है। लेकिन किसानों को यह भी डर है कि कहीं बारिश अधिक हो गई तो अतिवृ़ष्टि से फसल खराब भी हो सकती है। दूसरा तापमान भी बोवनी के अनुरूप रहेगा तब जाकर किसानों को लाभ होगा।

कीटनाशक व खरपतवार नियंत्रक दवाएं भी दी जाएंगी 

उप संचालक कृषि विजय चौरसिया के मुताबिक, इस बार 5000 किसानों को खरीफ सीजन की फसलों का हाईब्रिड बीज फ्री उपलब्ध कराया जाएगा।

बीज के अलावा किसानों को कीटनाशक औषधियां व खरपतवार नियंत्रक दवाएं भी प्रदान की जाएंगी। ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि किसानों को मुनाफा हो तथा अन्य किसान इससे प्रेरणा लेकर खेती को लाभ का धंधा बनाएं।

अरहर की बोवनी का बढ़ाया जाएगा क्षेत्र 

कम अवधि में पकने वाली अरहर की विशेष प्रजाति का 1000 क्विंटल हाईब्रिड बीज इस बार किसानों को कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा ।

इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, बीज निगम सहित नाफेड को हाईब्रिड बीज की मांग भेज दी गई है। तुलनात्मक रूप से देखें तो अरहर की फसल 160 से 180 तक में पककर तैयार होती है लेकिन नई व्यवस्था में 25 दिन पहले ही अरहर की फसल पककर तैयार हो जाएगी।

इस साल अरहर के रेट 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल के रहे हैं। जिन किसानों ने पांच बीघा में अरहर उगाई उन्होंने दो लाख रुपए की आय छह महीने में अर्जित कर ली। इसलिए इस बार अरहर की बोवनी का क्षेत्रफल बढ़ाकर 20 से 30 हजार हेक्टेयर कर दिया है।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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