दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 16.04.16

 

मजदूरी मांगने पर दलितों को पीटा, अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ी – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/india-news/dalits-beaten-in-uttar-pradesh-statue-of-ambedkar-damaged

सत्ता के नशे में चूर अकाली नेता ने दलित महिला से की मारपीट पंजाब केसरी

http://punjab.punjabkesari.in/bathinda/news/drunk-with-power-akali-leader-dalit-woman-assault-463155

पुलिस ने दलित मजदूरों को पांच दिन थाने में रखकर किया टॉर्चर – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/PUN-OTH-MAT-latest-sangrur-news-034503-4850-NOR.html

एकतरफा प्यार में शादीशुदा युवक ने दलित युवती के काटे बाल – प्रदेश 18

http://hindi.pradesh18.com/news/uttar-pradesh/jhansi/jhansi-man-attacks-dalit-woman-cuts-hair-1401513.html

बारव्ही मे दलित महिला को पानी भरने से रोकने का मामला थाने पहुंचा – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-BETU-MAT-latest-betul-news-021003-3555-NOR.html

छेड़छाड़ का विरोध करने पर किशोरी का घर फूंका – लाइव हिन्दुस्तान

http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1-chitrakoot-home-burned-tampering-dalit-girl-reports-dbangi-hand-pumps-526380.html

भारतीय संविधान के शिल्पी बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर नरेन्द्र सिंह तोमर – पल पल इंडिया

http://www.palpalindia.com/2016/04/15/indore-mp-Architect-Indian-Constitution-Babasaheb-Ambedkar-Narendra-Singh-Tomar-Dokbimrav-news-in-hindi-137163.html

पिछले 2 वर्षों में 3,30,64,900 एससी और ओ‍बीसी छात्रों को 7,465 करोड़ रुपए की छात्रवृत्तियां मिलीं – नव संचार समाचार

http://navsancharsamachar.com/पिछले-2-वर्षों-में-33064900-एससी-और/

अंतिम त्रेमास में अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति को छोड़ें कर्मचारी – राजेश्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/planning-department-in-bharatpur-2231426.html

 

अमर उजाला

मजदूरी मांगने पर दलितों को पीटा, अंबेडकर की प्रतिमा तोड़ी

http://www.amarujala.com/india-news/dalits-beaten-in-uttar-pradesh-statue-of-ambedkar-damaged

  • तनाव के चलते गांव में पुलिस-पीएसी तैनात

  • दलितों ने लगाया पथराव और फायरिंग करने का भी आरोप

  • घायल दलितों को अस्पताल भेजा, अधिकारियों ने डाला डेरा

थाना मटसेना के गांव करछुली में दबंगों ने मजदूरी मांगने पर कुछ दबंगों ने दलितों को पीटा और गांव के बाहर लगी अंबेडकर प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके विरोध में दलित एकत्र हुए तो आरोपियों ने फायरिंग कर दी।

टना में चार दलित घायल हुए हैं।

dalits beaten in uttar pradesh, statue of Ambedkar damaged

इसकी सूचना पर जिला मुख्यालय से पुलिस और पीएसी के साथ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया। समाचार लिखे जाने तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव में डेरा डाले हुए थे।

बताया जा रहा है कि गांव के पाली, बंटू गुर्जर और रहीशपाल सिंह ने प्रताप व सुरेश दलित से अपने खेतों में आलू की खोदाई कराई थी। शुक्रवार शाम प्रताप और सुरेश मजदूरी के पैसे मांगने उनके घर गए थे। इसी दौरान पाली, बंटू और उनके अन्य परिवारीजनों ने इनके साथ गाली-गलौच की और इन्हें पीट दिया। इन्होंने इसकी जानकारी अपने घर जाकर दी।

इससे गुस्साए इनके परिवारीजन और अपनी बस्ती के लोग आरोपियों के घर पहुंचे तो उनपर भी पथराव कर दिया गया। फायरिंग भी की गई। गांव के बाहर लगी अंबेडकर प्रतिमा को भी तोड़ दिया। घटना के दौरान गांव के पास स्थित देवी मंदिर पर कुछ श्रद्धालु भजन कीर्तन कर रहे थे। जैसे ही पथराव और फायरिंग की घटना हुई, श्रद्धालु भजन कीर्तन छोड़कर भाग खड़े हुए।

अंबेडकर प्रतिमा तोड़ने की सूचना पर बसपा नेता भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ही पुलिस को सूचना दी। सूचना पर सीओ सदर के साथ मटसेना, बसईमोहम्मदपुर और मक्खनपुर थाने का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने किसी तरह से स्थिति को नियंत्रित किया।

दलितों ने आरोप लगाया कि वह थाना मटसेना पहुंचे लेकिन वहां पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। वह एसपी से मिलने चल दिए तो रास्ते में सीओ उन्हें मिल गए और वापस अपने साथ थाने ले गए।

पथराव के दौरान टूटी प्रतिमा

‘दोनों पक्षों के बीच रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। तभी मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया था। प्रतिमा पथराव के दौरान क्षतिग्रस्त हुई है। उसको तोड़ा नहीं गया। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मामला दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’

-श्री भगवान, सीओ सदर

पंजाब केसरी

सत्ता के नशे में चूर अकाली नेता ने दलित महिला से की मारपीट

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भटिंडा (बलविंद्र): गांव जोधपुरा रोमाणा में कुछ अकाली वर्करों ने गांव की दलित महिला अकाली सरपंच और उसके परिवार से मारपीट की, जिसमें 6 लोगों को नामजद किया गया है।  थाना कोटफत्ता में दर्ज शिकायत के अनुसार कुछ समय पहले सरपंच बबीता राणा ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई थी कि गांव के एक अकाली वर्कर सुरिंद्र सिंह व अन्यों ने उससे चैकों पर धोखे से हस्ताक्षर करवा लिए थे।

पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया था, जबकि दूसरे पक्ष ने उसको पैसों का आपसी लेन-देन बताया था। मामले को लेकर अभी तक दोनों पक्षों में विवाद चल रहा है।गत दिवस सुरिंद्र सिंह, काका सिंह, बगीचा सिंह, बिट्टू सिंह, जुगना सिंह, हरप्रीत सिंह निवासी जोधपुर रोमाना ने जबरदस्ती उसके घर में घुसकर मारपीट कर जान से मारने की धमकियां दीं। जब सरपंच बबीता के पति राज कुमार, 2 पुत्रों और बहू ने उसको छुड़वाने की कोशिश की तो हमलावर उनकी भी मारपीट कर फरार हो गए।

थाना कोटफत्ता के जांच अधिकारी हरमनजीत सिंह ने बताया कि  आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दैनिक भास्कर

पुलिस ने दलित मजदूरों को पांच दिन थाने में रखकर किया टॉर्चर

http://www.bhaskar.com/news/PUN-OTH-MAT-latest-sangrur-news-034503-4850-NOR.html

अमरगढ़पुलिस थाने में दो दलित मजदूरों की बेरहमी से पिटाई करने का मामला सामने आया है। मजदूरों को पांच दिन थाने में रखकर टॉर्चर किया गया शरीर पर बिजली का करंट लगाया। अब पुलिस दबाव डाल रही है कि हेल्पलाइन 181 पर की गई शिकायत वापस ली जाए। पुलिस की मारपीट का शिकार हुए गांव मानां के दलित मजदूरों को यहां सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेकसूर लड़कों को नाजायज हिरासत में रखकर बेरहमी से पीटा है। उधर, पुलिस थाना अमरगढ़ के मुखी ने मारपीट के आरोपों को सिरे से नकार दिया।

गांव मानां के बलवीर सिंह तेजा सिंह ने बताया कि उनके लड़के मनदीप सिंह परबत सिंह मजदूरी करते हैं। अमरगढ़ में काम पर लगे हुए थे। 9 अप्रैल को अमरगढ़ थाने से फोन आया कि एक व्यक्ति का कुत्ता चोरी हो गया है, जिसने थाने में शिकायत की है। पुलिस ने दोनों लड़कों को थाने पेश करने की हिदायत दी। वह गांव के सरपंच सहित दोनों लड़कों को साथ लेकर 9 अप्रैल को ही थाने चले गए। थाना इंचार्ज ने कहा कि इन पर चार लाख की डकैती का शक है। बलवीर सिंह तेजा सिंह ने बताया कि दोनों को थाने बैठा लिया गया उन्हें वापस भेज दिया गया। उन्होंने 12 अप्रैल को पुलिस हेल्पलाइन 181 पर रिपोर्ट की कि उनके लड़कों को नाजायज पुलिस हिरासत में रखा हुआ है। इसके अलावा एसएसपी के ध्यान में पूरा मामला लाया गया। जिसके बाद 13 अप्रैल की शाम को दोनों लड़कों को थाने से छोड़ दिया गया।

इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डा. नेहा का कहना है कि पेट की चमड़ी में खून इकट्ठा हो गया है। जिस कारण दर्द है।

आरोप नकारे 

इससंबंधी पुलिस थाना अमरगढ़ के मुखी संजीव गोयल ने मारपीट के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि दोनों नौजवानों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसके बाद दोनों को छोड़ दिया गया था।

बिजली का करंट लगाया 

उन्होंनेआरोप लगाया कि पुलिस थाने में दोनों लड़कों के शरीर पर बिजली का करंट लगाया गया बेरहमी से पीटा किया। दोनों लड़कों को शुक्रवार को यहां सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। दोनों के पेट में दर्द है खून की गांठ बन गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस दबाव डाल रही है कि हेल्पलाइन 181 पर की गई शिकायत वापस ली जाए। उन्होंने पंजाब सरकार एसएसपी से मांग की कि पुलिस थाना अमरगढ़ के मुखी के खिलाफ नाजायज हिरासत में रखकर मारपीट करने के आरोप में कार्रवाई की जाए झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सिविल अस्पताल में दाखिल मजदूर। 

प्रदेश 18

एकतरफा प्यार में शादीशुदा युवक ने दलित युवती के काटे बाल

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एक तरफा प्यार में पागल युवक को जब दलित युवती से इनकार मिला तो यह बात उसे नगवार गुजरी. मनसूबे में असफल युवक ने उसके बाल काट दिए. घटना झांसी के सकरार थाना इलाके की है. पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है.

अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण दिनेश सिंह ने बताया कि सकरार थानान्तर्गत ग्राम मगरपुर में रहने वाली एक दलित युवती अपनी बुआ की लड़की के साथ कपड़े सिलवाने जा रही थी. इसी दौरान गांव के रहने वाले नरेन्द्र दुबे बुरी नीयत से उसे पकड़ लिया और घर के अन्दर घसीट कर ले गया. जहां उसके साथ जबरन छेड़खानी की। युवती ने विरोध करते हुए शोर मचाया. इस पर मनसूबे में असफल नरेन्द्र ने उसके बाल काट दिए और उसके सिर कैंची से हमला करते हुए घायल कर दिया. पीड़िता के परिजनों ने इसकी शिकायत थाने की पुलिस से की. जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

एसपी ग्रामीण ने बताया कि जब इसकी जानकारी एसएसपी मनोज तिवारी को हुई तो टीमें गठित की. टीमें गठित होने के बाद पुलिस ने आरोपी युवक नरेन्द्र को घर से गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए युवक को थाने लाया गया. जहां पूछताछ कर उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जा रहा है.

एसपी ग्रामीण के अनुसार नरेन्द्र एक शातिर अपराधी है. उसके खिलाफ इससे पहले सकरार थाना और ग्वालियर में भी मामले दर्ज हैं. नरेन्द्र दुबे ने पूछताछ में बताया कि वह युवती से प्यार करता था. कई बार उसने युवती से शादी करने के लिए इजहार किया. लेकिन वह तैयार नहीं थी. इसी दौरान युवती की शादी दूसरी जगह तय हो गयी. यह जानकारी होने पर उसने युवती को बदनाम करने की ठानी.

युवती जब उसके घर के पास से निकल रही थी इसी दौरान उसने उसे घसीटकर मकान के अन्दर कर लिया और फिर उसके साथ जबरन छेड़खानी की. युवती ने शोर मचाते हुये विरोध किया. जिस कारण उसने युवती के बाल काट डाले और कैंची से हमला किया.

दैनिक भास्कर

बारव्ही मे दलित महिला को पानी भरने से रोकने का मामला थाने पहुंचा

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बारव्ही गांव के दलित परिवार को सार्वजनिक नल से पानी नहीं भरने का मामले में शुक्रवार को दलित परिवार की आधा दर्जन महिलाओं ने बैतूल अजाक थाने पहुंचकर संबंधित महिला के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की शिकायत की और एएसपी से मुलाकात कर समस्या रखी।

बैतूल आई बारव्ही की महिला ममता इंगले, ललिता, आशा, गीता, अनुसुइया, शकुंतला, सूरजा अंबा इंगले ने बताया गुरुवार को सार्वजनिक नल पर पानी भरने गई थी। इस दौरान गांव की वंदना ठाकरे ने पानी भरने से रोकते हुए दूसरे नल से पानी भरने को बोलने लगी। उन्होंने बताया इसकी शिकायत सरपंच ममता सल्लामे से की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पुलिस ने महिलाओं का आवेदन लेकर जांच शुरू कर दी है। इधर एएसपी सीताराम सरियाम ने परिवार को समझाइश दी और मामले की जांच करवाने का आश्वासन दिया। गांव महिला सरपंच वंदना सल्लाम ने बताया पानी को लेकर हुए विवाद को लेकर दोनों पक्षों को समझाइश दी गई थी। शुक्रवार को ग्राम सभा बुलाई थी, लेकिन एक पक्ष के बैतूल जाने पर ग्रामसभा स्थगित कर दी गई है। शनिवार को दोनों पक्षों से चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया पूर्व में महिला वंदना ठाकरे माफी मांगने का बोल चुकी है।

थाने शिकायत करने पहुंची महिलाएं।

लाइव हिन्दुस्तान

छेड़छाड़ का विरोध करने पर किशोरी का घर फूंका

http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1-chitrakoot-home-burned-tampering-dalit-girl-reports-dbangi-hand-pumps-526380.html

गांव में पानी भरने गई दलित किशोरी के साथ गांव के युवक ने छेड़छाड़ कर दी। किशोरी के विरोध करने पर दबंग गुस्सा गया और गुरुवार रात उसने उसका घर फूंक दिया। इसमें छह पड़ोसियों के घर भी जले हैं।

शुक्रवार को पुलिस तक सूचना पहुंची तो रिपोर्ट दर्ज की गई। एसओ ने बताया कि कुलदीप तिवारी उर्फ रामू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। वारदात मानिकपुर क्षेत्र के गांव निही के मजरा भाटा पुरवा में हुई। बताया गया कि किशोरी हैंडपंप पर गई थी। रास्ते में गांव का कुलदीप उसे मिला और छेड़छाड़ करने लगा। किशोरी ने हल्ला मचाकर उसका विरोध कर दिया। इससे नाराज रामू ने रात में घात लगाकर उसका घर ही फूंक दिया।

आग लगते ही परिवार गुहार लगाते हुए घर से बाहर निकला। गांव वाले भी जुट गए। आग की चपेट में पड़ोसी श्याम लाल, तेजबली, लालू, गमलेश, फुलगेश, दुजुवा के घर भी आकर खाक हो गए। सबकी पूरी गृहस्थी स्वाहा हो गई। आधी रात बाद फायर बिग्रेड की गाड़ी भी गांव पहुंची। घटना के बाद आरोपी गांव से भाग निकला। गांव में तनाव का माहौल है। पीडि़त परिवार को कई लोगों ने हर संभव मदद का भरोसा दिया। कुछ ग्रामीणों ने खाने-पीने का प्रबंध भी किया।

एसओ मनीष जाट ने बताया कि दलित की तहरीर पर घर फूंकने, गाली गलौज, मारपीट आदि में रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी रामू की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं। चूंकि दलित उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ है, इसलिए इसकी जांच सीओ करेंगे।

पल पल इंडिया

भारतीय संविधान के शिल्पी बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर नरेन्द्र सिंह तोमर

http://www.palpalindia.com/2016/04/15/indore-mp-Architect-Indian-Constitution-Babasaheb-Ambedkar-Narendra-Singh-Tomar-Dokbimrav-news-in-hindi-137163.html

इन्दौर, पलपल इंडिया ब्यूरो.भारत में समतामूलक समाज के पक्षधरए विश्व स्तर के विख्यांत विधिवेत्ताम, महान राजनेता, भारतीय संविधान के जनक, दलितों, वंचितों और महिला अधिकारों के समर्थक, मानवतावादी चिंतक, विचारक, दार्शनिक, प्रखर वक्ता, विद्वान और भारत रत्न की उपाधि से अलंकृत बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैलए 1891 को तत्कालीन मध्यज प्रांत ;वर्तमान मध्य प्रदेश के महू जिले में एक दलित परिवार में हुआ था.

वे अपने माता.पिता की 14वीं संतान थे. 16 वर्ष की छोटी उम्र में मैट्रिक परीक्षा पास करते ही उनका विवाह रमा बाई नामक किशोरी से कर दिया गया. सैनिक स्कूल  में प्रधानाध्यापक उनके पिता की इक्षा  थी कि उनका बेटा उच्च शिक्षा प्राप्त‍ कर समाज में व्याप्त छुआछूत, जात.पांत और संकीर्णता जैसी कुरीतियों को दूर कर सके. डॉ. भीमराव बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और अध्ययन में उनकी अगाध रूचि थी. 1912 में बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 1913 में वे बड़ौदा के महाराजा से छात्रवृत्ति पाकर उच्च शिक्षा प्राप्त  करने के लिए अमेरिका चले गये. 1913 से 1917 तक अमरीका और इंग्लैंड में रह कर उन्होंने डॉक्टरेट तथा कानून की परीक्षाएं उत्तीार्ण कीं और भारत लौट आये.

महाराजा बड़ौदा ने उन्हें  अपना सचिव नियुक्तं किया, लेकिन वहां छुआछूत और भेदभाव के अपमान को सहन न कर पाने के कारण पद छोड़कर मुम्बई में अध्यापन कार्य में लग गये. इसके बाद बाबासाहेब ने वकालत शुरू की. उन्होंने अस्पृाश्यता के विरूद्ध संघर्ष करने का संकल्प लेते हुए साप्ताहिक पत्रिका मूक नायक का प्रकाशन शुरू किया. इस पत्रिका में दलितों की दशा और कल्याण के बारे में प्रकाशित उनके लेखों का भारतीय दलित वर्ग और शिक्षित समाज पर गहरा असर पड़ा.

बाबा साहेब ने भारत में अस्पृश्य समाज के राजनीतिक अधिकारों और सामाजिक स्वतंत्रता  की पुरजोर वकालत की. दलित वर्ग के एक सम्मेलन के दौरान उनके भाषण से कोल्हारपुर राज्य के स्थानीय शासक शाहू चतुर्थ बेहद प्रभावित हुए और उनका अंबेडकर जी के साथ भोजन करना रूढि़वादी समाज में हलचल का कारण बन गया. बाबा साहेब ने दलित वर्गों के बीच शिक्षा के प्रसार और उनके सामाजिक उत्थान के लिए बहिष्कृत हितकारिणी सभा की भी स्थापना की.

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर एक प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे. उन्हों ने कहा था कि हम  सबसे पहले और अंत में भारतीय हैं. वे हमारे संविधान के प्रमुख शिल्पकार थे. सामाजिक अन्याय, अत्याचार और असमानता के उन्मू्लन के लिए उन्होंने संविधान के मौलिक अधिकारों और राज्य् के नीति निर्देशक सिद्धांतों का बड़ा तोहफा भारत और उसकी जनता को सौंपा ताकि सही अर्थों में सामाजिक लोकतंत्र समरसता और सामाजिक समानता का स्वप्न साकार हो सके. राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में नागरिकों के प्रति देश के सकारात्मक उत्तरदायित्वों को समाहित किया गया.

इनका उद्देश्य उस सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को सुनिश्चित करना है, जिसे संविधान में वर्णित मूल अधिकारों द्वारा संरक्षण प्राप्त  है. डॉक्टर आंबेडकर  ने कहा था हम जिन्हें नीति.निर्देशक सिद्धांत कहते हैं, वह सामान्यतः विधायिका और कार्यपालिका के लिए इन निर्देशों के तंत्र का ही दूसरा नाम है कि उन्हें अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किस तरह करना चाहिए. उन्होंने अपने गहन अध्ययन और उच्चाकोटि की तार्किक एवं विश्लेतषणात्माक क्षमता के आधार पर सामाजिक बुराइयों के प्रति आलोचनात्मक चिंतन और सटीक मूल्यांकन प्रस्तुत किया, जो कि आगे आने वाली पीढ़ी के लिए हमेशा मार्गदर्शक तथा प्रेरणा स्रोत के रूप में काम करता रहेगा. उनका मानना था कि सामाजिक परिवर्तन के लिए दलितों और कमजोर वर्गों के बीच शिक्षा की समुचित व्यरवस्था तथा समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का होना बहुत आवश्यिक है.

डॉ. अंबेडकर भारतीय महिलाओं की उन्ननति के लिए बड़े पैमाने पर प्रगतिशील कदम उठाने के पक्षधर थे. हिन्दू कोड बिल जैसे प्रगतिशील कदम के जरिए वे पुरुष प्रधान संस्कृति पर प्रहार करते हुए सभी महिलाओं को पुरुषों के बराबर कानूनी अधिकार देकर गौरवान्वित करना चाहते थे. इस बिल में हिन्दू महिलाओं को विवाहए तलाक आदि में पुरुषों जैसा ही हक दिया गया था. उन्हों ने कहा था कि मै किसी समुदाय की प्रगति महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति से नापता हूं.

बाबासाहेब ने हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द पर बल देते हुए कहा था कि सांप्रदायिक मुद्दे कनाडा जैसे देशों में भी हमेशा से रहे हैं, पर आज भी अगर अंग्रेज और फ्रांसीसी प्रेमभाव से एक साथ रहते हैं तो हिन्दू और मुसलमान एक साथ सौहार्द के साथ क्यों  नहीं रह सकते .

गांधीजी और कांग्रेस के कटु आलोचक होने के बावजूद डॉ. अंबेडकर की प्रतिष्ठा एक अद्वितीय विधिवेत्ता के रूप में थी . यही कारण है कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के नेतृत्व  में सरकार ने उन्हें  देश का प्रथम विधि एवं न्याय मंत्री बनाया 29 अगस्त 1947 को डॉ, अंबेडकर को स्वतंत्र  भारत के नये संविधान की रचना के लिए गठित संविधान मसौदा समिति के अध्यउक्ष पद पर नियुक्त किया गया. बाबासाहेब ने भारतीय संविधान को आकार देने के लिए भले ही पश्चिमी मॉडल का आधार लिया है लेकिन उसकी मूल भावना विशुद्ध रूप से भारतीय है डॉ. अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से नागरिकों को व्यापक स्वतंत्रता की सुरक्षा दी है.

इसमें धार्मिक स्वतंत्रता अस्पृश्यता का अंत, हर तरह के भेदभाव पर रोक, महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के उपाय, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए स्कूलों तथा कॉलेजों में प्रवेश तथा नौकरियों और सिविल सेवाओं में आरक्षण प्रणाली की गारंटी दी गयी ताकि सामाजिक तथा आर्थिक असमानताओं को जड़ से मिटा कर दलित और वंचित वर्ग को हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए जा सकें. 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा संविधान को अंगीकृत किए जाने के बाद डॉ. अंबेडकर ने अपने भाषण में कहा था कि मैं महसूस करता हूं कि भारतीय संविधान साध्य् और लचीला होने के बावजूद इतना मजबूत भी है कि यह देश को शांति और युद्ध दोनों समय जोड़ कर रख सके.

वास्तव में मैं कह सकता हूं कि अगर कभी कुछ गलत हुआ तो इसका कारण यह नहीं होगा कि हमारा संविधान खराब थाए बल्कि इसका उपयोग करने वाले की नीयत में खोट था.श् इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा था कि यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है तो इसे मैं ही सबसे पहले जलाऊंगा.

सन् 1950 के दशक में अंबेडकर जी बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षित हुए और बौद्ध भिक्षुओं के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए श्रीलंका गये . 1955 में उन्होंने भारतीय बौद्ध महासभा अर्थात बौद्ध सोसायटी ऑफ इंडिया की स्थापना की . 14 अक्तूबर 1956 को नागपुर में अंबेडकर जी ने औपचारिक समारोह में एक बौद्ध भिक्षु से पारंपरिक तरीके से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली .

अपनी अंतिम पांडुलिपि द बुद्ध एंड हिज धम्म  को पूरा करने के तीन दिन बाद 06 दिसम्बबरए 1956 को नई दिल्ली  में नींद के दौरान ही उनका निधन हो गया .

डॉ. अंबेडकर के सामाजिक और राजनीतिक चिंतन तथा सुधारों का आधुनिक भारत पर गहरा प्रभाव परिलक्षित होता है . उन्हेंत व्यक्ति की स्वीतंत्रता में अटूट विश्वास था . वे सामाजिक स्वतंत्रता के भी प्रबल पक्षधर थे. उन्हों ने कहा था कि जब  तक आप व्यसक्तिगत और सामाजिक स्वतंत्रता हासिल नहीं कर लेते कानून आपको जो भी स्व‍तंत्रता देता है वो आपके लिए बेमानी है .

नव संचार समाचार

पिछले 2 वर्षों में 3,30,64,900 एससी और ओ‍बीसी छात्रों को 7,465 करोड़ रुपए की छात्रवृत्तियां मिलीं

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पेसूका —————- एक समावेशी समाज के निर्माण के लिए, जिसमें कि अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग उत्पादक, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा उनके विकास एवं वृद्धि में सहायक विभिन्न योजनाएं लागू की जाती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्‍य इन लक्षित समूहों का आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक सशक्तिकरण करना है।

अनुसूचित जाति के शैक्षिक स‍शक्तिकरण के लिए उपाय———————————– मैट्रिक या माध्यमिक स्तर पर अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए अनुसूचित जाति के छात्रों को सक्षम बनाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक मदद देता है। प्राथमिक स्‍कूलों, उच्‍च माध्‍यमिक स्‍कूलों, कॉलेजों और विश्‍वविद्यालयों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के लड़कों और लड़कियों को होस्‍टल सुविधाओं के लिए भी सहायता दी जाती है।

सरकार विश्‍वविद्यालयों, शोध संस्‍थानों और वैज्ञानिक संस्‍थानों में एम. फिल, पीएच.डी और समतुल्‍य शोध करने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है।  सिर्फ इतना ही नहीं, चुने हुए अनुसूचित जाति के छात्रों को विदेशों में भी मास्टर स्तर के पाठ्यक्रम और पीएचडी की ऊंची पढ़ाई के लिए राष्‍ट्रीय विदेशी छात्रवृत्तियां दी जाती हैं।

2014-15 और 2015-16 के दौरान सामाजिक कल्‍याण और सशक्तिकरण विभाग ने विभिन्‍न योजनाओं के तहत लगभग 7,465 करोड़ की छात्रवृत्तियां दी हैं, जैसेकि – पूर्व मैट्रिक, मैट्रिक के बाद, राष्‍ट्रीय विदेशी, राष्‍ट्रीय फेलोशिप और ईबीसी के लिए डॉ. अंबेडकर मैट्रिक के बाद की छात्रवृत्तियां अनुसूचित जातियों, अन्‍य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों आदि के छात्रों के लिए चलाई जाती हैं। छात्रवृत्तियों से लगभग 3,30,64,900 छात्र को लाभ हुआ है।
आर्थिक सशक्तिकरण के उपाय——————— चालू वित्‍त वर्ष के दौरान अनुसूचित जाति उप योजना (एससीएसपी) के लिए अतिरिक्‍त रूप से राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 38,832 रुपए आवंटित किए गए हैं। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों के आर्थिक विकास की योजनाओं पर जोर देना है।

सरकार ने स्‍टैंडअप इंडिया अभियान के तहत भी 2.5 लाख अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों के लिए आर्थिक सहायता देने का निर्णय किया है।

500 करोड़ रुपये की लागत से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए केंद्र बनाए जा रहे हैं।

मुद्रा योजना के तहत 3.22 करोड़ ऋण दिए गए, जिनमें 72.89 लाख ऋण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को दिए गए।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा ऐसी 250 महिलाओं को मोटर ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया गया है, जो सफाई कर्मचारी हैं या जिन पर आश्रित है, इनमें से 60 महिलाओं को रोजगार मिला है।

अनुसूचित जाति का सामाजिक सशक्तिकरण————————– अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचारों की जाँच करने के प्रावधानों को मजबूत करने के लिए, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम (अत्याचार निवारण) में संशोधन किया गया है, और नया अधिनियम 26.1.2016 से लागू किया गया है। नए प्रावधान अनुसूचित जाति के सामाजिक सशक्तिकरण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

संसद ने पिछले साल संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) अधिनियम 2015 पारित किया था, जिसमें हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा और दादर और नगर हवेली के नए समुदायों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल किया गया था और अब उन्‍हें भी वे उन सभी योजनाओं के लाभ मिलेंगे, जो अनुसूचित जाति के सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही हैं।

ये सभी उपाय निश्चित रूप से अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों के शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान देंगे।

राजेश्थान पत्रिका

अंतिम त्रेमास में अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति को छोड़ें कर्मचारी

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/planning-department-in-bharatpur-2231426.html

योजनाओं, कार्यक्रमों पर खर्च करने के लिए दिए जाने वाले बजट के उपयोग को लेकर सालभर तक उदासीन रवैया अपनाने तथा वित्तीय वर्ष के अंतिम त्रेमास में अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति को सरकार ने गम्भीरता से लिया है। आयोजना (परीवीक्षण) विभाग ने एक परिपत्र जारी करते हुए अधिकारियों-कर्मचारियों को इस पृवत्ति को छोडऩे की हिदायत दी है।

मुख्य सचिव सी.एस. राजन ने जारी किए परिपत्र में स्पष्ट किया है कि योजनाओं के वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवंटित राशि का नियमित एवं प्रभावी पर्यवेक्षण जरूरी है। वर्तमान में कई विभागों द्वारा योजना, कार्यक्रमों के वित्तीय मासिक लक्षित प्रावधानों के अनुरूप व्यय नहीं किया जाता है।

साथ ही बजट का अंतिम त्रेमास में अधिक खर्च करने की प्रवृति बनी हुई है जो कि ठीक नहीं है। उन्होंने नवीन मदों की सभी स्वीकृतियां प्रशासनिक विभागों को 30 जून तक जारी करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने सभी विभागाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि वित्तीय/ भौतिक लक्ष्यों के जिलेवार विवरण तैयार कर अधिनस्थ कार्यालयों, संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर आदि को भेजें। इसमें विलम्ब होने पर योजनाओं की क्रियांविति करने में काफी समस्या आती है।

उन्होंने जारी किए निर्देश में स्पष्ट किया है कि योजनांतर्गत कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करने के बजाए विभाग की ओर से वर्ष के अंतिम दिनों में आवंटित राशि के डाइवर्जन/ पी.डी.खाते में हस्तांतरित करने की प्रथा को भी रोकने को कहा है।

प्रभावी मॉनिटरिंग करें

योजनाओं, कार्यक्रमों को लेकर दिए जाने वाले बजट में से खर्च होने वाली राशि को लेकर प्रभावी मॉनिटरिंग करने के निर्देश सभी विभागध्यक्ष को दिए हैं। उन्होंने नए वित्तीय वर्ष में इस व्यवस्था ही सही ढंग से पालना करने को कहा है।

हर माह सूचना देने के निर्देश

उन्होंने बजट में अनुसूचित जाति, जनजाति उप योजनाओं के लिए सम्बंधित विभागों को दिए बजट में से हर माह खर्च होने वाली राशि के बारे में सूचना सामाजिक  न्याय एवं अधिकारिता/जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग को हर माह 7 तारीख तक भेजने के निर्देश दिए हैं।

उपयोगिता प्रमाण पत्र शीघ्र भेजें

केंद्र सरकार से प्राप्त हाने वाली राशि का सही ढंग से उपयोग करने के लिए निर्धारित प्रस्ताव समय पर भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पहले मिल चुकी राशि के उपयोग सम्बंधित प्रमाण पत्र शीघ्र भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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