दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 05.02.16

 

दलित महिला का दिनदहाड़े अपहरण, दस दिन से परेशान विकलांग पति ने आजमाया ये तरीका – आज तक

http://aajtak.intoday.in/story/dalit-woman-abducted-in-daylight-disabled-husband-tried-this-method-to-awake-police-1-853476.html

दलित से रेप, पंचायत ने 2 हजार में समझौता करने को कहा, दादी बोली-मेरी लड़की बिकाऊ नहीं – जनसत्ता

http://www.jansatta.com/national/meerut-panchyat-tried-to-hush-up-minor-girl-rape-case-with-rupees-2000/66486/

कुर्सी पर बैठीं महि‍ला दलि‍त प्रधान तो प्रिंसिपल ने धुलवा कर कि‍या शुद्धि‍करण – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/UP-KAN-chair-used-by-dalit-pradhan-purified-in-kanpur-dehat-5241178-NOR.html

कार्रवाई तो दूर, तकनीकी विभाग ने संस्थानों को बताए बचने के तरीके – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/PUN-BHAT-MAT-latest-bathinda-news-060231-3553669-NOR.html

अफसरशाही अछूतों की तरह व्यवहार करती थी : पूर्व आईएएस शिवकामी – करंट क्राइम

http://www.currentcrime.com/officialdom-was-treated-like-untouchables-former-ias-shivkami/

 

आज तक

दलित महिला का दिनदहाड़े अपहरण, दस दिन से परेशान विकलांग पति ने आजमाया ये तरीका

http://aajtak.intoday.in/story/dalit-woman-abducted-in-daylight-disabled-husband-tried-this-method-to-awake-police-1-853476.html

यूपी में दलित उत्पीड़न रुकने का नाम नहीं ले रहा है. अपनी पत्नी के अपहरण से परेशान विकलांग पति जब थाने के चक्कर लगा लगा के थक गया तो तंग आकर उसने थानेदार की चौखट पर ही अपनी तहरीर चिपका दी, थानाध्यक्ष लगातार सामने आने से बच रहे थे. मामला आईजी पुलिस के संज्ञान में आया तब जाकर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश हुए.

बांदा से 60 किमी दूर जसपुरा थाने में मूलचंद अपनी पत्नी मलुदिया की तलाश में बीते दस रोज से चक्कर काट रहा है. बावजूद इसके उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही. ग्राम रामपुर की रहने वाली मलुदिया का 24 जनवरी को कुछ हथियारबंद लोग अपहरण कर ले गए. बकौल पति घटना दोपहर को करीब 2 बजे उस समय घटी जब वह मवेशी चराने गयी थी, घटना के पीछे महिला का बीडीसी सदस्य होना बताया जा रहा है. परिजनों को लगता है कि सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया होगा.

तहरीर पर आईजी ने लिया एक्शन

पुलिस के रवैये से तंग आकर मूलचंद ने अपनी तहरीर आखिरकार थाने के नोटिस बोर्ड पर चिपका दी. मामले की जानकारी बांदा एसपी आरपी पाण्डेय के संज्ञान में होने के बाद भी पुलिस ने कोई दिलचस्पी नही दिखाई. थाने में तहरीर चिपकाने की घटना के बाद आईजी पुलिस ने मामले में ताजा आदेश दिया है.

सत्ताधारी दल पर अपहरण का आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जिन लोगों ने घटना को अंजाम दिया उनका संबंध सूबे के सत्ताधारी दल से है इसलिए पुलिस मामले में कार्रवाई करने से बच रही है. हालांकि बांदा दौरे पर आये आईजी जोन आरके चतुर्वेदी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार शाम तक मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

जनसत्ता

दलित से रेप, पंचायत ने 2 हजार में समझौता करने को कहा, दादी बोली-मेरी लड़की बिकाऊ नहीं

http://www.jansatta.com/national/meerut-panchyat-tried-to-hush-up-minor-girl-rape-case-with-rupees-2000/66486/

उत्‍तर प्रदेश के मेरठ के लिसाड़ी गांव में पंचायत ने रेप पीडि़ता नाबालिग दलित लड़की को 2 हजार रुपये देकर मामले को दबाने का प्रयास किया। लेकिन पीडि़ता की दादी ने पंचायत के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया और बुधवार को थाने में रिपोर्ट लिखाई। लड़की के माता पिता की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। वह अपनी दादी के साथ गांव में रह रही थी। मामले के बाद लड़की का चाचा उसे अपने साथ हापुड़ ले गया ताकि आरोपी उस पर केस वापस लेने का दबाव न बना सके। पंचायत के प्रस्‍ताव पर लड़की की दादी ने साफ शब्‍दों में कहा कि, ‘मेरी लड़की बिकाऊ नहीं है।’ रेप का आरोपी भी दलित है। दादी ने इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया कि, मुख्‍य आरोपी राजू की भाभी ने लड़की को आठ जनवरी को अपने घर बुलाया था। इसके बाद उसने कमरे को बाहर से बंद कर दिया। वहां उससे रेप किया गया। किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। लड़की ने इस बारे में उसे बताया लेकिन बाद में आरोपयिों के डर के चलते चुप हो गई। लड़की का चाचा उसे स्‍थानीय भाजपा नेता चरण सिंह के पास ले गया। उसने भी समझौता करने की नसीहत दी। बुधवार को उन्‍होंने शिकायत दर्ज कराई। एफआईआर में राजू, उसके भाई की पत्‍नी कोमल और तीन अन्‍य लोगों के नाम हैं। लिसाड़ी गेट थाने के इंचार्ज रविंद्र यादव ने बताया कि, लड़की को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है। मामले की जांच जारी है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

दैनिक भास्कर

कुर्सी पर बैठीं महि‍ला दलि‍त प्रधान तो प्रिंसिपल ने धुलवा कर कि‍या शुद्धि‍करण

http://www.bhaskar.com/news/UP-KAN-chair-used-by-dalit-pradhan-purified-in-kanpur-dehat-5241178-NOR.html

कानपुर. आधुनि‍क कहे जाने वाले आज के समाज में जातीय छूआछूत कैसे बरकरार है इसकी बानगी दि‍खी कानपुर देहात जि‍ले के एक प्राइमरी स्‍कूल में। वहां मि‍ड-डे-मील की शि‍कायत लेकर एक महि‍ला दलि‍त प्रधान गई थीं। वे जब कुर्सी पर बैठने लगीं तो स्‍कूल के प्रिंसि‍पल ने उन्‍हें धमकाया और बैठने से मना कि‍या। जब वे बैठ गईं तो उनके सामने ही प्रिंसि‍पल ने उस कुर्सी को धुलवा कर उसका शुद्धि‍करण करवाया। उस महि‍ला ने जि‍ला प्रशासन से शि‍कायत की है। स्‍थानीय तहसीलदार को इसकी जांच सौंपी गई है।

– वीरसिंहपुर गांव की प्रधान पप्‍पी देवी को स्‍थानीय प्राइमरी स्‍कूल में खराब क्‍वालि‍टी का मि‍ल-डे-मील दि‍ए जाने की शि‍कायत मि‍ली थी।

– वे बुधवार को इसका वि‍रोध दर्ज कराने और प्रिंसि‍पल संतोष शर्मा से बात करने स्‍कूल पहुंचीं।
– आरोप है कि‍ प्रिंसि‍पल ने उन्‍हें धमकाया और कुर्सी पर बैठने से मना कर दि‍या।

– इसके बावजूद वे कुर्सी पर बैठ गईं।

– आरोप है कि‍ प्रिंसि‍पल ने स्‍टूडेंट और चतुर्थ श्रेणी के इंप्‍लॉयी से कुर्सी धोने को कहा।

– इस घटना की जानकारी मिलने पर जब प्रधान के पति‍ शैलेंद्र सिंह वहां पहुंचे तो प्रिंसि‍पल ने उन्‍हें भी धमकी दी।

– पप्‍पी देवी का कहना है कि‍ वे एससी कैटेगरी से हैं। इसलि‍ए प्रिंसि‍पल ने उनके साथ ऐसी हरकत की।
– उनका कहना है कि‍ यह उनके मानवाधि‍कारों का उल्‍लंघन है।

दैनिक भास्कर

कार्रवाई तो दूर, तकनीकी विभाग ने संस्थानों को बताए बचने के तरीके

http://www.bhaskar.com/news/PUN-BHAT-MAT-latest-bathinda-news-060231-3553669-NOR.html

तकनीकीकाॅलेजों के साथ आईटीआई संस्थानों में दलित छात्रों को मिलने वाली पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम में पांच करोड़ रुपए से अधिक का घपला करने वालों पर अभी तक कार्रवाई नहीं की हो सकी है।

इस घपले में पंजाब तकनीकी शिक्षा विभाग के कुछ आला अधिकारियों ने काॅलेज प्रबंधकों को बचाने के लिए ऐसे नियमों का विकल्प दे दिया, जिससे घपला की राशि को रिकवर कर कानूनी कार्रवाई करने का विकल्प खत्म हो गया। यही नहीं, इसमें ऐसी व्यवस्था करने की छूट भी पहले प्रदान कर दी गई कि अगर राशि अभी नहीं दे सकते तो उसे आगे जारी होने वाली सहायता राशि से काट लिया जाएगा। नियमानुसार अगली ग्रांट से राशि काटने की व्यवस्था अंतिम विकल्प होता है।

इससे पहले संस्थानों को नोटिस निकालने के साथ उन पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। जब संस्थान राशि लौटाने में आनाकानी करता है तो उसे दी जाने वाली अगली ग्रांट से रिकवरी की जाती है। इसमें बठिंडा में ही 6 प्राइवेट और सरकार आईटीआई के प्रबंधकों पर भी घपलेबाजी का आरोप लगा था। इस मामले में सरकार और तकनीकी विभाग की ओर से काेई कार्रवाई नहीं करने से अब मालवा में प्राइवेट टेक्निकल और डिग्री कॉलेज के साथ आईटीआई संस्थान फिर से दलित छात्रों के फर्जी दाखिले कर रहे हैं।

जिले की छह आईटीआई में ही करोड़ों का हेरफेर

दलितछात्रों को मिलने वाली सरकारी सहायता को हड़पने के लिए कई आईटीआई संस्थान अपने यहां जाली दाखिला दिखा रहे हैं। इस स्कीम को जब आधार कार्ड के साथ जोड़ा गया तो बठिंडा में ही अनेक दलित स्टूडेंट्स ऐसे निकले, जिनके एक ही समय में दो-दो कॉलेजों में दाखिले थे। जिले में 300 स्टूडेंट्स ऐसे भी सामने आए, जिनको एक ही समय पोस्ट मैट्रिक वजीफा और कम गिनती वजीफा भी दिया गया। 27 छात्र ऐसे मिले, जिनका एक ही समय में तीन-तीन कॉलेजों में दाखिला हुआ। इसका पर्दाफाश होते ही कॉलेजों ने इन छात्रों को ड्राॅप आउट सूची में दिखा दिया था लेकिन कॉलेजों ने इनकी 80 फीसदी वजीफा राशि अपनी जेबों में डाल ली। बठिंडा जिले में 20 ऐसे स्टूडेंट्स सामने आए हैं, जिन्होंने एक ही दिन और एक ही समय में दो-दो कॉलेजों में परीक्षा दी है। इस तरह से बठिंडा में छह आईटीआई में ही करोड़ों रुपए का हेरफेर किया गया। 5 करोड़ के घपले की जांच विजिलेंस ने शुरू की थी। डीजीपी विजिलेंस ने इन कॉलेजों की मैनेजमेंट से रिपोर्ट भी तलब की लेकिन तकनीकी शिक्षा विभाग के कोई कार्रवाई नहीं करने के कारण मामला दबा दिया गया।

पैसा रिकवर करने के साथ कार्रवाई भी होगी 

^डिपार्टमेंटके पास शिकायतें आने के बाद जांच की गई थी। एससी-बीसी छात्रों के नाम पर वजीफा राशि हासिल करने वाले संस्थानों से रिकवरी के लिए मुहिम चलाई गई है। विभाग किसी तो बचाने की कोशिश नहीं कर रहा। इन संस्थानों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है। हरिंदरपालसिंह, एडी, तकनीकी शिक्षा विभाग

एससी आयोग ने जिला प्रशासकों से निगरानी करने के लिए कहा 

इसमामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एससी आयोग) के उपाध्यक्ष डॉ. राजकुमार वेरका ने सभी जिला प्रमुखों को हिदायतें जारी की हैं कि वे नए सत्र में आईटीआई संस्थानों के साथ तकनीकी काॅलेजों की कारगुजारी पर नजर रखें। इस मामले में रिपोर्ट तलब की जाए ताकि फर्जी दाखिले को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि पंजाब में पिछले साल इस तरह की शिकायतों के बाद अपना कड़ा विरोध राज्य केंद्र सरकार के सामने जताया था। इस दौरान उन्हें आश्वस्त किया गया था कि इस घपले में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयोग इस मामले में तकनीकी शिक्षा विभाग की कारगुजारी को लेकर संतुष्ट नहीं है।

>संस्थानों को कहा कि वे इस्तेमाल किए गए फंड को वापस करें।

>अगले साल जारी होने वाली राशि में घपले वाली राशि को रिकवर करने का ऑप्शन भी दिया

करंट क्राइम

अफसरशाही अछूतों की तरह व्यवहार करती थी : पूर्व आईएएस शिवकामी

http://www.currentcrime.com/officialdom-was-treated-like-untouchables-former-ias-shivkami/

नई दिल्ली| रोहित वेमूला की आत्महत्या ने दलित अधिकारों और दलितों के साथ होने वाले भेदभाव के मुद्दे पर सबका ध्यान खींचा है। पूर्व आईएएस अधिकारी और लेखिका पी. शिवकामी का कहना है कि उनके समुदाय को न्यूनतम मानवाधिकार से भी मरहूम रखा जाता है। समीक्षकों द्वारा बहुप्रशंसित लेखक और पूर्व नौकरशाह ने बताया कि उन्होंने 2008 में आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि उनके साथ अछूत की तरह व्यवहार किया जाता था।

शिवकामी जो भारतीय प्रशासनिक सेवा में 28 सालों तक रहीं, ने  बताया कि उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला तब किया जब उन्हें महसूस हुआ कि दलितों का राष्ट्र निर्माण में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने अब तक 8 किताबें लिखी हैं और उन्हें भारत की सबसे प्रमुख दलित लेखकों में एक माना जाता है।

उनकी पहली पुस्तक किताब ‘इन द ग्रिप ऑफ चेंज’ ने काफी हलचल मचाई थी। क्योंकि उन्होंने दलित आंदोलन में पैतृक सत्ता का सवाल उठाया था।

शिवकामी जिनकी आखिरी पोस्टिंग आदि द्रविड़ और जनजाति कल्याण विभाग में सचिव पद पर तमिलनाडु में थी, ने बताया, “दलितों के खिलाफ राजनीतिक वर्ग और अफसरशाही मिलकर काम करती है। जब मैं सेवारत थी तो मेरी स्थिति राज्य के मंत्री के बराबर थी। लेकिन मुझे आदिवासियों के बुनियादी अधिकारों के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। मैं उनके कल्याण के लिए काम कर रही थी और मुझे उन्हीं के समुदाय का व्यक्ति बना दिया गया और मेरे साथ छुआछूत की तरह व्यवहार किया गया। मुझे महसूस हुआ कि निचली जातियों के खिलाफ एक अलिखित नियम बना हुआ है।’

उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा हुआ कि आदिवासियों के लिए दी गई राशि को दूसरे कामों में खर्च कर दिया गया। यहां कि आदिवासी बच्चों के लिए एक शिक्षक की नियुक्ति के लिए कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत थी, जिसे कभी प्राथमिकता सूची में रखा ही नहीं गया। जब मैंने इस मामले को उठाया तो मुझ पर समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगा दिया गया।

उन्होंने बताया कि उद्योग, वित्त या गृह मंत्रालय में सचिव का पद प्रमुख माना जाता है। लेकिन पिछले 60 सालों में आज तक किसी दलित को यह पद नहीं दिया गया। यह भेदभाव सभी स्तरों पर मैंने महसूस किया है।

इसके बाद तंत्र से उनका मोहभंग होने पर वे 2009 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गई। उसके एक साल बाद उन्होंने समुगा सामाथुवा पादाई नाम के एक राजनीतिक दल का गठन किया, जिसका उद्देश्य बेजुबानों और वंचितों की आवाज बनना है।

शिवकामी के मुताबिक शिक्षण संस्थानों से लेकर नौकरशाही तक हर जगह दलितों के साथ भेदभाव व्याप्त है। रोहित की आत्महत्या मामले को उठाते हुए शिवकामी कहती हैं कि शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का नाम लेकर दलितों का उत्पीड़न किया जाता है। ऐसी सोच है कि दलित मेधावी नहीं होते, क्योंकि उन्हें आरक्षण हासिल है। दलितों की बेहद खराब तस्वीर बनाई गई है।

रोहित की आत्महत्या ने जहां भारतीय सामाजिक प्रणाली की खाई को उजागर कर रख दिया है। वहीं, शिवकामी महसूस करती है कि महान संस्कृतियां अपनी विफलताओं पर आत्ममंथन करती है। उनकी दलील है कि बिना भाईचारे के कभी राष्ट्र निर्माण नहीं होता। जाति के आधार पर लोगों को बुनियादी अधिकारों से मरहूम रखना हिंसा है।

एक कट्टर दलित स्त्रीवादी शिवकामी को समाजसेवा के लिए सिविल सेवा छोड़ने का कतई अफसोस नहीं है। वे कहती है कि महिलाओं को मुख्यधारा में लाना सबसे आवश्यक है।

वे कहती हैं, “मैं पहले आवाज नहीं उठा सकती थी। लेकिन अब मैं पार्टी के माध्यम से सार्थक काम कर रही हूं और मेरी पार्टी की तमिलनाडु के 10 जिलों में उपस्थिति है।”

एक बराबरी का समाज कैसे स्थापित किया जा सकता है?

उन्होंने बताया, “60 फीसदी भूमिहीन दलित समुदाय से हैं। उन्हें जमीन मुहैया कराना चाहिए और उनसे बराबरी का व्यवहार किया जाना चाहिए। सरकार को सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मजबूत करना चाहिए और निजी क्षेत्र में भी रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए। पुरानी आदतें कभी नहीं छूटती। इसलिए आदमी की सोच को बदलने के लिए हमें लगातार भेदभाव का सामना करने वाले समुदायों के बारे में आवाज उठाते रहना चाहिए।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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