दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 03.02.16

 

दलित प्रधान बैठी तो कुर्सी को पानी से धुलवाया – लाइव हिंदुस्तान

http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1-social-discrimination-public-school-headmaster-dalit-pradhan-515134.html

कक्षा 3 की दलित नाबालिग छात्रा के साथ टीचर ने किया दुष्कर्म न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/rajasthan/minor-girl-raped-by-teacher-in-churu-1358539.html

दबंगों ने ढहा दिया दलित महिला प्रधान का मकान – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/sultanpur/sultanpur-crime-news/women-pradhan-s-house-ransacked-hindi-news/

सरोज बैरवा की चाह, घोड़ी पर चढ़ निकले भैया की बिन्दोली ! – हस्तक्षेप

http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/2016/02/03/सरोज-बैरवा#.VrGpaaj9V_k

दलित पेंथर की मुरैना इकाई ने छात्राओं के साथ भेदभाव को लेकर सौंपा ज्ञापन – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-MUR-MAT-latest-morena-news-033625-3536424-NOR.html

दलित और आदिवासी विरोधी राजस्व संहिता वापस ली जाए – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/lalitpur/congress-leader-hindi-news-1/

 

लाइव हिंदुस्तान

दलित प्रधान बैठी तो कुर्सी को पानी से धुलवाया

http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1-social-discrimination-public-school-headmaster-dalit-pradhan-515134.html

सामाजिक भेदभाव दूर करने की सरकारी दावों की पोल खोलती एक घटना गजनेर के गांव विरसिंहपुर में हुई। यहां सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक ने उस कुर्सी को पानी से रगड़ कर धुलवाया, जिस पर कुछ देर पहले दलित बिरादरी की महिला ग्राम प्रधान बैठ गई थीं। मामला प्रशासन तक पहुंचा है।

विरसिंहपुर में दलित बिरादरी के शैलेंद्र कुमार की पत्नी पप्पी हाल में प्रधान बनी हैं। जन प्रतिनिधि होने के नाते मंगलवार को वह गांव के स्कूल गई थीं। बच्चों से मिड डे मील के बारे में पूछा। कुछ बच्चों ने स्कूल में जातीय भेदभाव की बात कही। इस पर उन्होंने प्रधानाध्यापक संतोष कुमार शर्मा से बात की। प्रधान का आरोप है कि संतोष ने उनके साथ भी गलत व्यवहार किया। कई लोग साथ में होने के कारण उन्होंने बैठने को कुर्सी तो दी मगर उनके स्कूल से लौटते ही कुर्सी को पानी से रगड़ कर धुलवा डाला। कई बच्चों को पानी लाने के काम पर लगाया और कुछ से कुर्सी की सफाई कराई। प्रधान ने यह भी आरोप लगाया कि लौट कर आने और कुर्सी धुलवाने का विरोध करने पर हेडमास्टर ने उनका हाथ पकड़कर मरोड़ दिया।

पति शैलेंद्र को जानकारी दी तो गांव के तमाम लोग इकट्ठा हुए और फिर माती मुख्यालय पहुंचे। यहां एडीएम का अर्जी देकर पूरे मामले से अवगत कराया। साथ ही हेडमास्टर के खिलाफ कार्रवाई करने और ग्राम प्रधान को सुरक्षा दिए जाने की मांग की।

सारे आरोप बेबुनियादः हेडमास्टर

इस मामले में हेडमास्टर संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि उन पर लगे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। न कुर्सी धुलवाई और न ही जातीय भावना के आधार पर काम किया। ग्राम प्रधान और उनके सगे-संबंधी मिड डे मील में प्रयुक्त हो रही सामग्री के बारे में पूछताछ करने अक्सर स्कूल आ जाते हैं। इससे शिक्षण कार्य बाधित होता है। इस लिहाज से उन्हें सहयोग करने को कहा गया था। मंगलवार को ग्राम प्रधान और उनके समर्थकों ने खुद स्कूल आकर अभद्रता की। उन्होंने चौकी पुलिस को इसकी जानकारी दी है।

पांच दर्जन बच्चे और अकेले मास्साब

प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल में उनके अलावा एक शिक्षिका की तैनाती है, जो करीब एक महीने से अवकाश पर हैं। 66 बच्चे पंजीकृत हैं। उनकी पढ़ाई और मिड डे मील का जिम्मा वह अकेले उठा रहे।

न्यूज़ 18

कक्षा 3 की दलित नाबालिग छात्रा के साथ टीचर ने किया दुष्कर्म

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चूरू जिले की सरदारशहर तहसील के नाहरसरा गांव के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक ने ही शिक्षा के मंदिर में ही नाबालिक दलित छात्रा के साथ घिनौना कृत्य किया है.

इसके अलावा शिक्षक ने छात्रा से बाहर मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दी. यह कृत्य अध्यापक ने शनिवार को स्कूल के स्टाफ रूम में किया.

डरी सहमी 8 साल की नाबालिग छात्रा ने जब मंगलवार को स्कूल जाने से किया इंकार किया तब जाकर माजरा खुला. परिजनों ने जब डरी सहमी बच्ची से बहला फुसलाकर हकीकत जानी तो परिजनों के होश उड़ गए.

दलित गरीब पिता पीड़ित बच्ची को लेकर सरदारशहर थाने पहुंचा और दरिंदे अध्यापक के खिलाफ इस घिनौने कृत्य का मामला दर्ज करवाया है.

पीड़िता के पिता ने बताया कि झाड़ू लगनावे के बहाने से शिक्षक उसे कमरे में ले गया, पहले तो उसके साथ मारपीट की फिर गंदा काम किया. साथ ही शिक्षक ने छात्रा से कहा कि अगर इस मामले में किसी को बताया तो जान से मार डालेंगे. पीड़िता के पिता ने बताया कि वह कक्षा तीन की छात्रा है.

इसके बाद सरदारशहर पुलिस ने पीड़िता का देर शाम चूरू के राजकीय डीबी अस्पताल में मेडिकल करवाया है. अब सरदारशहर पुलिस दरिंदे अध्यापक की तलाश में जुट गई है.

अमर उजाला

दबंगों ने ढहा दिया दलित महिला प्रधान का मकान

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गुन्नौर गांव की दलित महिला प्रधान का पुश्तैनी मकान विपक्षियों ने ढहा दिया। महिला प्रधान ने इसका विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल पर निर्माण कार्य रुकवा दिया। एसपी ने प्रकरण की जांच सीओ मुसाफिरखाना को सौंपी है।

मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के गुन्नौर गांव की दलित विमलेश पत्नी राम शंकर नवनिर्वाचित प्रधान हैं। पंचायत चुनाव से पहले गांव के ही कुछ लोगों ने दलित महिला के ससुर रामसुमेर से उसके पुश्तैनी मकान का बैनामा करा लिया था। महिला को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने एसडीएम मुसाफिरखाना से बैनामे की वैधता की शिकायत की। वह मामला एसडीएम के यहां विचाराधीन है। तब से महिला ग्राम प्रधान अपने बच्चों के साथ उस मकान में रह रही थी।

सोमवार की शाम दलित महिला प्रधान अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ घर में थी। तभी गांव के ही राकेश सिंह, सुरेश सिंह, बृजेश सिंह, अजीत सिंह, अमित सिंह, आशीष सिंह व रवि सिंह फावड़ा और सब्बल लेकर पहुंच गए। विपक्षियों ने महिला प्रधान के पैतृक आवास को खोदकर गिरा दिया। आरोप है कि महिला प्रधान विमलेश ने इसका विरोध किया तो विपक्षियों ने जान से मारने की धमकी दी। पुलिस रात में ही घटनास्थल का निरीक्षण कर वापस लौट गई। मंगलवार की सुबह कोतवाल दीपेंद्र सिंह ने राकेश सिंह को कोतवाली बुलाकर भूखंड पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य न करने की चेतावनी दी।

हस्तक्षेप

सरोज बैरवा की चाह, घोड़ी पर चढ़ निकले भैया की बिन्दोली !

http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/2016/02/03/सरोज-बैरवा#.VrGpaaj9V_k

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा थाना क्षेत्र के भादवों की कोटड़ी गाँव में आज 3 फरवरी की शाम एक दलित दूल्हाचंद्रप्रकाश बैरवा घोड़ी पर चढ़ कर अपनी बारात ले जाना चाहता है, मगर यह बात गाँव के उन मनुवादी तत्वों को बर्दाश्त नहीं है, जो सदियों से इस गाँव के दलितों को परम्पराओं के नाम पर दबाने का काम करते आ रहे हैं। जिन्हें दलितों का खाट पर बैठना तक सहन नहीं है, वे यह कैसे स्वीकार कर लें कि उनके गाँव के दलित युवा घोड़े पर सवार हो जाएँ। हालाँकि सामने आकर कोई भी विरोध नहीं कर रहा है, मगर चौराहों पर खुलेआम चर्चा की जा रही है कि इन चमारों की यह औकात जो गाँव में घोड़ी पर बैठ कर बिन्दोली निकालेंगे। अगर हमारे मोहल्ले में घुस भी गये तो जिंदा नहीं लौटेंगे।

इस प्रकार की चर्चाओं और गाँव के माहौल के मद्देनजर दूल्हे की बहन सरोज बैरवा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय भीलवाड़ा पंहुच कर लिखित रिपोर्ट पेश की कि उसका भाई घोड़ी पर चढ़ कर गाँव में निकलना चाहता है, लेकिन कतिपय जातिवादी तत्व यह नहीं होने देना चाहते हैं, ,इसलिए पुलिस सुरक्षा दी जाये।

पच्चीस वर्षीय सरोज बैरवा जो कि राजनीति विज्ञान में परास्नातक और नर्सिंग की पढाई कर चुकी है, उसने गुलाबपुरा थाने में भी इस आशय की रिपोर्ट दर्ज करायी है।

इस गाँव की आबादी तक़रीबन दो हजार बताई जाती है, जिसमें सर्वाधिक परिवार जाट हैं और दलित समुदाय की बैरवा, मेघवंशी तथा धोबी और वाल्मीकि उपजातियों के 75 परिवार गाँव में निवास करते हैं। 15 परिवार भील आदिवासी भी हैं, ब्राह्मण, सुथार, कुम्हार, और नाथ जोगी परिवार भी इस गाँव में रहते हैं। देश के अन्य गांवों की तरह जाति गत भेदभाव, बहिष्करण और अन्याय उत्पीड़न में यह गाँव भी उतना ही आदर्श गाँव है, जिस तरह देश के शेष गाँव होते हैं। थमे हुए से गाँव, अड़ियल से गाँव, जहाँ बदलाव की कोई बयार नहीं, बदलने को कोई भी तैयार नहीं। दुनिया चाँद पर पंहुच गयी और लोग हवाई जहाज में बैठ कर सफ़र तय करने लगे हैं, मगर गाँवो में आज भी लोगों की मानसिकता वही कबीलाई है, जहाँ शोषक और शोषितों के कबीले जस के तस बरकरार हैं।

दलित बैरवा परिवारों का उत्पीड़न का लम्बा इतिहास

इस गाँव में भी दलित बैरवा परिवारों का उत्पीड़न का लम्बा इतिहास मौजूद है। 1985 में चर्मकार्य छोड़ने की वजह से यहाँ के निवासी उगमलाल बैरवा को गाँव छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया था, उनके रोजमर्रा के कामकाज करने पर भी रोक लगा दी गयी थी और जब उनके परिवार में किसी की मौत हुई तो मुर्दे का अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया गया। थक हार कर उगम लाल बैरवा ने गाँव छोड़ दिया, मगर वह झुका नहीं। अब उसी गाँव का रामसुख बैरवा का परिवार बरसों बाद फिर से उन्हीं लोगों से लोहा ले रहा है, जिनसे कभी उगमलाल ने लिया था।

मंदिर में घुसने की तो हम सोच भी नहीं सकते- सरोज बैरवा

सरोज बैरवा के मुताबिक हमारे गाँव में दलित समुदाय के अन्य लोग जो दबंग लोगों के सामने सिर झुका देते हैं, उनको कोई परेशानी नहीं है, पर हमने संघर्ष करने की ठान रखी है। इस गाँव में हम लोगों की हालत बेहद ख़राब है, जहाँ पूरा गाँव निवृत्त होने जाता है, वहां से हमें पेयजल लेना होता है, मंदिर में घुसने की तो हम सोच भी नहीं सकते हैं। आज तक कोई भी दलित दूल्हा या दुल्हन घोड़ी पर सवार नहीं हो पाया। गाँव जातिवादी रुढ़िवादिता में बुरी तरह जकड़ा हुआ है। हमें स्कूल में सदैव ही चमारी या चमारटे जैसे जातिगत संबोधन ही सुनने को मिले हैं, यहाँ पर पग-पग पर अपमान होता है।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सरोज और उसकी छोटी बहन निरमा ने एक निजी विद्यालय आर जी पब्लिक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया था, जो कि गाँव के बहुसंख्या वाले समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों से सहन नहीं हो पाया, तो उन्होंने अभी पिछले वर्ष मार्च में सरोज के विद्यालय पंहुच कर बच्चों के सामने ही सरेआम पिटाई की और कहा कि चमारन तू ही है हमारे बच्चों को पढ़ाने वाली, और कोई अध्यापिकाएं नहीं बची है क्या ? अंततः उस स्कूल को ही बंद हो जाना पड़ा।

सरोज बैरवा ने इस अपमान को सहने के बजाय दलित अत्याचार निवारण कानून के तहत मुकदमा दर्ज करवाया और जमकर आततायियों का मुकाबला किया, उसे सफलता भी मिली। मुकदमे में चालान हुआ और अनुसूचित जाति न्यायालय में प्रकरण अभी भी चल रहा है। ग्रामीणों ने गाँव की एकता और भाईचारे का वास्ता दे कर उससे समझौता कर लेने के लिए कहा, मगर सरोज और उसका परिवार बिल्कुल भी झुके नहीं।

जातिवादी तत्वों की आँख की किरकिरी बनी हुई है सरोज बैरवा

इसके बाद से ही यह हिम्मतवर दलित युवती गाँव के जातिवादी तत्वों की आँख की किरकिरी बनी हुई है, अब जबकि उसकी और उसके भाई की शादी होने जा रही है तो जिन लोगों ने सरोज को पीटा और अपमानित किया था, उन्होंने इस मौके पर इस दलित परिवार का मान मर्दन करने की ठान रखी है। बैरवा परिवार को सन्देश भेजा गया है कि वह अपनी औकात में ही रहे वरना गंभीर नतीजा भुगतना पड़ेगा।

पुलिस सुरक्षा की मांग करने पंहुची सरोज को थाने में कहा गया कि आज तक किसी दलित ने घोड़ी पर बिन्दोली नहीं निकाली तो तुम क्यों निकालना चाहते हो ?सरोज ने जब उन्हें कहा कि यह हमारा हक़ है तब पुलिस ने कहा कि हम सुरक्षा दे देंगे।

बाद में जब यह बात मीडिया में आई तब सरपंच ने सरोज के पिता रामसुख बैरवा को बुला कर कहा कि तुझे कोई दिक्कत थी तो तू पुलिस में जाता, तेरी बेटी से केस क्यों करवाया ?

एक अन्य लम्बरदार ने कहा कि न्यूज़ का खंडन करो, इससे हमारे गाँव की बदनामी हो रही है। सरोज ने साफ कह दिया कि वह ना तो न्यूज़ का खंडन करेगी और ना ही रिपोर्ट वापस लेगी, मेरा भाई हर हाल में घोड़ी पर बैठ कर बारात ले जायेगा, चाहे उसकी जो भी कीमत चुकानी पड़े।

जब हमने पूछा कि अगर इसकी कीमत जान हो तो ? इस बहादुर बैरवा परिवार की बहादुर बेटी सरोज का जवाब था कि चाहे जान भी देनी पड़े तो स्वाभिमान की खातिर वह भी देने को हम तैयार हैं।

दैनिक भास्कर

दलित पेंथर की मुरैना इकाई ने छात्राओं के साथ भेदभाव को लेकर सौंपा ज्ञापन

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मुरैना | दलित पेंथर की मुरैना इकाई ने मंगलवार को राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपकर गर्ल्स मिडिल स्कूल नं. 3 की शिक्षिकाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि दो शिक्षिकाएं दलित वर्ग की छात्राओं के साथ जातिगत भेदभाव करती हैं और बात न मानने पर छात्राओं को स्कूल से भगा दिया जाता है। इस मामले में दोषी शिक्षिकाओं के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन पर जिलाध्यक्ष दीपक बौद्ध, गजेंद्र सिंह, राजेश बौद्ध, नवीन पिप्पल, दिनेश भारती, प्रमोद दिनकर सहित हेमंत सागर के हस्ताक्षर हैं।

अमर उजाला

दलित और आदिवासी विरोधी राजस्व संहिता वापस ली जाए

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ललितपुर। कांग्रेस पार्टी ने नई राजस्व संहिता का विरोध किया है। पार्टी ने दलित और आदिवासी विरोधी राजस्व संहिता को वापस लेने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम एमके त्रिवेदी को सौंपा।

मंगलवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि उप्र जमींदारी विनोश और भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 157 (क) के अंतर्गत अनुसूचित जाति के भूमिधर की जमीनों को गैर अनुसूचित जाति के सदस्यों के खरीदने पर लगे प्रतिबंधों को यथावत रखा जाए। विकास कार्यों के नाम पर अर्जित भूमि के बीच में पड़ने वाली लोक उपयोगिता की श्रेणी बदलने के लिए सरकार को सक्षम बनाया गया है। यह जनविरोधी कदम है, इसे वापस लिया जाए। दलित और गरीब समुदाय के अधिकारों और हितों को देखते हुए पूरी राजस्व संहिता का परीक्षण कराया जाए। इसके बाद ही इसे लागू किया जाए।

इस मौके पर जिलाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कुशवाहा, नगर अध्यक्ष हरीबाबू शर्मा, हरीकिशन बाबा, वीरेंद्र राजा, बिट्टूराजा, अमित प्रिय जैन, अनिल जैन सीमा, रामस्वरूप देवलिया, जयकुमार कुशवाहा, हरचरन कुशवाहा, इंद्रजीत सिंह, प्रेम भैया नामदेव, अमरपाल श्रीवास, आनंद कुशवाहा, अजय श्रीवास्तव, अजय तोमर, बायजू राजा, पावर्ती, अंकित यादव, डा. सुनील खजुरिया, मोंटी शुक्ला, समद खां, मु आसिफ, वैभव, रमेश सहरिया, अमित बुंदेला, लखन सहरिया, सोनू पाठक आदि मौजूद रहे।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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