दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 23.01.16

 

IIT के छात्र ने की किडनी बेचने की कोशिश, दलित होने की वजह से नहीं मिला खरीददार न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/iit-bhu-student-tries-to-sell-kidney-to-repay-loan-but-no-buyer-as-he-is-dalit-1312542.html

रेप का विरोध करने पर दलित महिला पर फेंका तेजाब, हाथ-पैर बांधकर की पिटाई – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/BIH-PAT-HMU-threw-acid-on-dalit-woman-in-bhagalpur-5230006-PHO.html

मोदी विरोधी नारेबाजी करने वाले दलित छात्र को हॉस्टल से निकाला – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/national-dalit-student-who-protested-against-modi-evicted-from-hostel-637588

दलित युवती को गिरफ्तार करने पर पुलिस को फटकार – लाइव हिन्दुस्तान

http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1–dalit-woman-is-arrested-police-reprimand-513662.html

यहां दलितों से होता है तालिबानी सलूक, पानी पीने नहीं देते, खिलाते हैं मलमूत्र – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/UP-10-worst-cases-with-dalits-in-uttar-pradesh-5229845-PHO.html

 

न्यूज़ 18

IIT के छात्र ने की किडनी बेचने की कोशिश, दलित होने की वजह से नहीं मिला खरीददार

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/iit-bhu-student-tries-to-sell-kidney-to-repay-loan-but-no-buyer-as-he-is-dalit-1312542.html

हैदराबाद के दलित स्कॉलर रोहित वेमुला के सुसाइड के बाद देश में छिड़ी जातिवाद की बहस के बीच एक और खबर आ रही है आईआईटी-बीएचयू से, जो सभी को शर्मसार कर देगी.

यहां एक दलित इंजिनियर स्टूडेंट को अपनी जरूरत पूरा करने के लिए सफाईकर्मी बनना पड़ा. सेकंड ईयर माइनिंग के स्टूडेंट महेश बाल्मीकि को एजुकेशन लोन को चुकाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. जब उसने कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी बेचने की पेशकश की तो दलित होने की वजह से एक भी खरीददार नहीं मिला.

IIT के छात्र ने की किडनी बेचने की कोशिश, दलित होने की वजह से नहीं मिला खरीददार

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, बाल्मीकि ने बताया कि उसके ऊपर बहुत दबाव है. उसने बताया, ‘मैंने बैंक से 2.7 लाख रुपए एजुकेशन लोन लिया, लेकिन मेरी लम्बी बीमारी की वजह से काफी पैसा इलाज में खर्च हो गया. इस वजह से कर्ज नहीं चुका पाया.”

इसके बाद महेश ने पैसों के इंतजाम के लिए अलग-अलग विकल्पों की तलाश में जुट गया. इतना ही नहीं, महेश ने अपनी एक किडनी बेचने के लिए खरीददार की तलाश शुरू की. बाद में दोस्तों से पता चला कि किडनी के काले बाजार में सबसे पहले व्यक्ति की जात पूछी जाती है.

महेश ने कहा, ‘मैंने वाराणसी और अलवर में पांच अस्‍पतालों से संपर्क किया, लेकिन सभी ने यह कहकर मना कर दिया कि वह एक दलित है. थक हार कर मुझे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. अब मैं अपने गृह जनपद राजस्थान के अलवर में महज 4000 रूपए की सफाईकर्मी की नौकरी कर रहा हूं.’

19 साल के महेश को उसके टीचर्स ब्राइट स्टूडेंट मानते हैं. हताश और निराश महेश अपने दोस्तों से अक्सर सुसाइड करने की बात भी करता था, जिसके बाद उसके दोस्तों ने इस मामले को मैग्‍सेसे अवॉर्ड विनर प्रो. संदीप पाण्डेय के सामने रखी.

पाण्डेय ने इस मामले को बीएचयू अलुमिनी के समक्ष रखा. आखिरकार महेश का लोन चुका भी दिया गया, लेकिन फिर भी महेश क्लास ज्वाइन नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उसके पिता लकवाग्रस्त हैं और मां घरों में काम करती है.

दिलचस्‍प बात यह है कि 10वीं की परीक्षा में महेश 85 फीसदी अंक के साथ पास हुआ था, जबकि 12वीं में पार्ट टाइम सफाईकर्मी का काम करने के बाद भी उसने 70 फीसदी अंक मिले. इसके बाद उसने आईआईटी एंट्रेंस क्‍वालीफाई कर बीएचयू में एडमिशन लिया.

महेश कहते हैं, प्रो संदीप पाण्डेय उनके लिए भगवान हैं, उनकी मदद से उसने सारा लोन चुका दिया और अब उसके ऊपर किसी का भी बकाया नहीं है.

‘रोहित जैसे कई हैं जो नामी संस्थाओं में पढ़ रहे हैं लेकिन कुछ लोगों को सुसाइड करना पड़ जाता है जबकी कुछ संदीप सर जैसे लोगों की वजह से बच जाते हैं.’

दैनिक भास्कर

रेप का विरोध करने पर दलित महिला पर फेंका तेजाब, हाथ-पैर बांधकर की पिटाई

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भागलपुर. बिहार में रेप का विरोध करने पर एक दलित महिला के ऊपर तेज़ाब फेंकने का मामला सामने आया है। महिला के मुताबिक, आरोपियों ने हाथ-पैर बांधकर उसकी पिटाई भी की। फिलहाल, विक्टिम को इलाज के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। आरोपियों के खिलाफ केस फ़ाइल कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला…

मामला कहलगांव सबडिवीजन (भागलपुर) के परशुरामचक गांव का है। महिला ने बताया कि गुरुवार को आरोपी सुबोध उसके घर पहुंचा और उसके साथ ज्यादती करने लगा। विरोध करने पर उसके ऊपर तेजाब डाल दिया। कुछ देर बाद अन्य आरोपी भी महिला के घर पहुंच गए और विक्टिम को खींचकर अपने घर ले आए। यहां उसे को बांधकर पीटा गया। विक्टिम के मुताबिक उसने किसी तरह उसकी जान बची।

एसएसपी ने दिए जांच के आदेश

आरोपियों के चंगुल से भागने के बाद विक्टिम एसएसपी विवेक कुमार के ऑफिस पहुंची और घटना की पूरी जानकारी दी। इसके बाद एसएसपी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अंतीचक थाना को ऑर्डर दे दिया है। उन्होंने विक्टिम को मुआवजा भी दिलाने की भी बात कही।

नई दुनिया

मोदी विरोधी नारेबाजी करने वाले दलित छात्र को हॉस्टल से निकाला

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लखनऊ। अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करने वाले दलित छात्र को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। 31 वर्षीय राज करण निर्मल को यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल से बाहर कर दिया है।

मालूम हो, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के विरोध में राम करण निर्मल के साथ ही अमरेंद्र कुमार आर्य ने मोदी के सामने नारेबाजी की थी। तब सुरक्षाकर्मी इन छात्रों को मुंह बंद करते हुए बाहर ले गए थे।

लखनऊ की अंबेडकर यूनिवर्सिटी में मोदी का छात्रों ने कि‍या विरोध 

हालांकि दोनों छात्रों को कुछ देर बाद पुलिस ने रिहा कर दिया, लेकिन निर्मल उस समय चौंक गए जब उन्हें पता चला कि भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के प्रबंधन उन्हें यूनिवर्सिटी हॉस्टल से बाहर कर दिया है।

निर्मल का कहना है कि उनके साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया गया, जैसे आत्महत्या से पहले रोहित के साथ किया जा रहा था।

बकौल निर्मल, मैंने विरोधस्वरूप अपनी आवाज बुलंद की और इसकी कीमत यह चुकाना पड़ी कि मुझे सिद्धार्थ बॉयज हॉस्टल से बाहर कर दिया गया। मैंने दो दिन के लिए रूम बुक करवाया था, लेकिन रात में ही मुझे निकाल दिया गया।

कोई अफसोस नहीं

वहीं मोदी के सामने ‘मोदी, गो बैक’, ‘मोदी मुरादाबाद’, ‘इकलाब जिंदाबाद’ और ‘फुल अंबेडर जिंदाबाद’ के नारे लगाने वाले दलित छात्रों को कोई अफसोस नहीं है।

एलएलएल ग्रेज्युएट 24 वर्षीय आर्य का कहना है, हमें खुद पर गर्व है। हमने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए जिम्मेदार नागरिकों की तरह अपने कर्तव्य निभाया है।

लाइव हिन्दुस्तान

दलित युवती को गिरफ्तार करने पर पुलिस को फटकार

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छपरा में वीडियो वायरल होने पर आशा कार्यकत्री द्वारा आत्महत्या करने के बाद परेशानी में फंसी छपार थाने की पुलिस ने एक और कारनामा कर दिया। एक दलित युवती को अपने माता-पिता से झगड़ा करते हुए गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में नवयुवती को पेश करने पर एसडीएम सदर ने छपार थाने के दारोगा को जमकर फटकार लगाई और शांतिभंग का मामला नहीं बनने की बात कहकर युवती को वापस कर दिया।

मामला दो दिन पूर्व का है। छपार क्षेत्र के एक गांव की दलित युवती दूसरे गांव के गुर्जर बिरादरी के युवक से प्रेम-प्र्रसंग के चलते उसके साथ जाने की तैयारी में थी। बताया जाता है कि युवक और युवती दोनों ही बालिग हैं। युवक और युवती के साथ जाने की खबर परिजनों को लग गई। इसी बीच सूचना पर छपार पुलिस भी पहुंच गई। युवक के खिलाफ युवती के परिजनों ने उसे अपहरण करके ले जाने के प्रयास की तहरीर दी, लेकिन छपार पुलिस ने मिलीभगत कर युवक को तो छोड़ दिया और अकेली दलित युवती का शांति भंग की आशंका में चालान कर दिया।

छपार पुलिस ने दर्शाया कि युवती प्रेम-प्रसंग को लेकर अपने माता-पिता से झगड़ रही थी। उसकी गिरफ्तारी जीडी में दर्शा दी और महिला पुलिस के साथ उसे कोर्ट में पेश करने के लिए मुख्यालय भेज दिया। जब नवयुवती को लेकर छपार पुलिस एसडीएम सदर के कोर्ट में पहुंची तो ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर उज्जवल कुमार ने अकेली नवयुवती की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताई। उन्होंने छपार पुलिस को शांति भंग का मामला न बनने की बात कहकर जमकर फटकार लगाई और नवयुवती को कोर्ट में पेश करने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद छपार पुलिस नवयुवती को लेकर थाने लौट गई।

उधर, एक बार शांति भंग की आशंका में गिरफ्तारी करने के बाद पुलिस उसे बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के छोड़ भी नहीं सकती थी। अभियोजन अधिकारी से राय की गई और फजीहत से बचने को युवती के साथ उसके परिजनों को भी 107, 116 में निरोधात्मक कार्रवाई में लिया गया। हालांकि बाद में मजिस्ट्रेट के आदेश बिना पुलिस ने युवती को परिजनों की सुपुर्दगी में दे दिया।

दैनिक भास्कर

यहां दलितों से होता है तालिबानी सलूक, पानी पीने नहीं देते, खिलाते हैं मलमूत्र

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झांसी. हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पीएचडी स्‍टूडेंट रोहित वेमुला के सुसाइड किए जाने का मामला पूरे देश में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इस बीच राहुल गांधी भी मामले को जानने हैदराबाद पहुंचे थे। अब राहुल 23 जनवरी को बुंदेलखंड दौरे पर आ रहे हैं। ऐसे में राहुल का ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है, क्‍योंकि यहां भी दलितों की हालत ठीक नहीं है। साथ ही इस समय पूरा क्षेत्र सूखाग्रस्‍त घोषित हो चुका है। अाज dainikbhaskar.com वो 10 मामले बताने जा रहा है, जो दलितों के साथ होने वाले अत्‍याचार को बयां करते हैं।

पहला मामला: 20 जनवरी 2016

बांदा के गांव बिरौना के बाहर दलितों की बस्ती बहला का पुरवा है। यहां एक स्कूल और पास में सरकारी हैंडपंप है। लेकिन कुछ समय पहले इस पर सवर्ण समुदाय के दबंगों ने ताला जड़ दिया, ताकि दलित उसमें से पानी न ले सकें। कुछ यही हाल नरैनी के गुढ़ा कलां गांव का है।

दूसरा मामला: 24 नवंबर 2015

हमीरपुर के बिलगांव के निवासी दलित छिम्मा अहिरवार (90) की मंदिर में घुसने पर हत्या कर दी गई। छिम्‍मा तीर्थ यात्रा करने जा रहा था। जाने से पहले वह स्थानीय मंदिर में चला गया और गांव के ही संजय तिवारी ने उसकी कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। बाद में उसी जगह उसके शव को आग लगा दी।

तीसरा मामला: 27 जून 2015

झांसी के भिटौरा गांव में दलित कुंवरलाल और रामपाल को दबंगों ने जमकर पीटा। साथ ही उनके गुप्तांगों पर हमला किया। उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्‍होंने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई थी।

चौथा मामला: 8 जून 2015

रक्सा के ही खैरा गांव में जन्मदिन मनाने और डीजे बजाने पर दलितों को लाठी-डंडों से पीट दिया गया। दलित की गलती सिर्फ इतनी थी कि जब दबंगों ने जन्मदिन के मौके पर डीजे बजाने से मना किया तो उन्‍होंने इसका विरोध कर दिया।

पांचवा मामला: 1 जून 2015

ललितपुर जिले में दलित महिला को गांव के दबंगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए लाठी-डंडों और जूतों से पीट दिया। महिला का कसूर केवल इतना था कि वह रिश्तेदारों के साथ चारपाई पर बैठी थी। लेकिन जब अगड़ी जाति के लोग वहां से गुजरे तो वह चारपाई पर ही बैठी रही।

छठां मामला: मार्च 2015

जालौन के सुरपति गांव में दलित अमर सिंह को बरात के साथ खाना खाने की सजा मिली। दबंगों ने यह कहते हुए अमर की चाकू से नाक काट ली कि दलित होकर साथ में खाना खाने से हमारी नाक कट गर्इ।

सातवां मामला: जुलाई 2015

झांसी के सीपरी बाजार इलाके में काम के बाद मजदूरी मांगने पर दो दलित मजदूरों को बंधक बना लिया गया। बाद में उन्‍हें भैंस के इंजेक्शन लगा दिए गए और करंट भी लगाया गया। इसके अलावा उन्‍हें नग्न करके पीटा गया।

आठवां मामला: 19 सितंबर 2014

रक्सा के ही खैरा गांव में एक दलित युवक सुजान सिंह को मलमूत्र खिलाया गया। इसके पीछे वजह ये थी कि उसने और उसके परिजनों ने सवर्ण जाति के लोगों की जमीन के बगल में प्लॉट खरीद लिया था।आरोपियों ने सुजान के प्राइवेट पार्ट्स पर पेट्रोल छिड़ककर उसकी नाक पर सिगरेट रगड़ दी थी।

नौवां मामला: 30 अप्रैल 2014

झांसी के रक्सा इलाके के रौता ताल में लोकसभा चुनाव की वोटिंग के दिन बुजुर्ग जंगीलाल को मंदिर ले जाकर मूर्ति पर हाथ रखवाकर पूछा गया कि उसने वोट किसे दिया। नहीं बताने पर दलित की मंदिर में ही हत्या कर दी गई थी।

दसवां मामला: मार्च 2013

हमीरपुर के मुस्कुरा गांव में करीब तीन साल पहले दलित रामस्वरुप बाल कटवाने गया। बाल काटने के दौरान जैसे ही नाई को रामस्वरुप के नाई होने का पता चला, उसे आधे-कटे बालों में ही गाली देते हुए भगा दिया।

क्‍या कहना है सपा के एमएलए का?

झांसी के गरौठा से सपा एमएलए दीप नारायण सिंह का कहना है कि अब गांवों में भी जागरुकता आई है। सपा सरकार ने ऐसे मामलों में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। दलितों के साथ अत्‍याचार की घटनाएं होती हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाती है। बांदा के तिंदवारी से एमएलए दलजीत सिंह की मानें तो बुंदेलखंड में लाख कोशिशों के बावजूद छुआछूत जारी है।

औसतन 5 से 6 मामले आते हैं रोज

मीडिया कैंपेनिंग ऑफ दलित ह्यूमन राइट्स के यूपी सेकेटरी राम दुलार कहते हैं कि बुंदेलखंड में रोज दलितों के साथ अत्‍याचार के औसतन 5 से 6 मामले सामने आते हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण ही एससी/एसटी कमीशन ने इलाके को दलितों के लिए संवेदनशील घोषित किया है।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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