दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 01.01.16

 

एमपी में एक बार फिर जेल की दीवार फांदकर कैदी फरार न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/prisoner-run-away-from-jail-in-ambah-1207259.html

इस्लाम कबूल करने वाले IAS बोले- मैं दलित हूं, इसलिए मेरा प्रमोशन नहीं – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-JAI-HMU-ias-umrao-salodia-accept-islam-interview-5210866-PHO.html

महिला शिक्षाकर्मी पर हमला – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/mhila-sicgakrmi-par-hmla-617026

बैगाओं को पानी, बिजली नसीब नहीं – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/mungeli-baigaion-ko-pani-bijali-nashib-nahi-617047

न्यूज़ 18

एमपी में एक बार फिर जेल की दीवार फांदकर कैदी फरार

http://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/prisoner-run-away-from-jail-in-ambah-1207259.html

मुरैना जिले की अम्बाह उप जेल से रात्रि में एक कैदी रस्सी की सहायता से ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गया. प्रहरियों सहित जेल प्रशासन को इसकी सूचना सुबह उस समय लगी, जब दीवार पर रस्सी लटकी हुई दिखी.

जानकारी के मुताबिक, अंबाह उपजेल में हत्या के प्रयास के मामले में सात साल की सजा काट रहा कैदी विजय तोमर फरार हो गया. जेलर ने तत्काल इसकी सूचना अम्बाह थाना पुलिस और एसपी विनीत खन्ना को दी.

एमपी में एक बार फिर जेल की दीवार फांदकर कैदी फरार

एसपी के निर्देश पर आरोपी विजय तोमर के गांव देवहंस के पुरा में पुलिस ने पहारा लगा दिया है. देवहंस के पुरा में ही आरोपी ने गांव के दलित की हत्या और हत्या के प्रयास की वारदातों को अंजाम दिया था.

एसपी ने बताया कि, अपराधी विजय तोमर के विरुद्ध जेल से फरार होने का एक और मामला अम्बाह थाना में दर्ज कर लिया गया है. वहीं, उसकी तलाश के लिए पुलिस पार्टियां बनाकर संभावित ठिकानों के लिए रवाना कर दी गईं हैं.

दैनिक भास्कर

इस्लाम कबूल करने वाले IAS बोले- मैं दलित हूं, इसलिए मेरा प्रमोशन नहीं

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-JAI-HMU-ias-umrao-salodia-accept-islam-interview-5210866-PHO.html

जयपुर. नए साल की पूर्व संध्या पर गुरुवार को चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ। अतिरिक्त मुख्य सचिव और रोडवेज चेयरमैन उमराव सालोदिया ने मुख्य सचिव नहीं बनाए जाने से नाराज होकर इस्लाम धर्म कबूल लिया, साथ में वीआरएस के लिए आवेदन भी कर दिया।

इस घटनाक्रम से न केवल ब्यूरोक्रेसी, बल्कि सरकार व सियासत में भूचाल आ गया। यह पहला मौका है जब किसी आईएएस अफसर ने इस तरह धर्म बदला है। प्रेस क्लब में मीडिया से मुखातिब सालोदिया ने मुख्यमंत्री राजे और प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- इन दोनों को ही पक्षपात के मामले में अवगत कराया गया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस ने मामले को लेकर भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। गौरतलब है कि मंगलवार को ही सरकार ने मुख्य सचिव सीएस राजन का कार्यकाल तीन माह बढ़ाया है।

 मैं दलित हूं, इसलिए मेरा प्रमोशन नहीं : सालोदिया

सवाल : क्या प्रमोशन के लिए नाराजगी का यह कदम सही है?

जवाब : भाजपा सरकार में लगातार भेदभाव हो रहा था। क्याेंकि मैं दलित हूं, इसलिए प्रमोशन नहीं हुआ। जहां तक वीआरएस का सवाल है, जहां न्याय नहीं वहां नौकरी का क्या मतलब।

सवाल : क्या प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में जातिगत भेदभाव है?

जवाब : वैसे सभी अफसरों से मेरे रिश्ते ठीक हैं, लेकिन मैंने व्यक्तिगत तौर पर काफी कुछ महसूस किया।

सवाल : इस्लाम स्वीकारने में आपके परिवार की सहमति है?

जवाब : मैंने आज ही कलमा पढ़कर इस्लाम धर्म स्वीकार किया है। मेरी जेब में इस समय भी इस्लाम धर्म की टोपी है। मैंने परिवार से पूछा ही नहीं? घर वाले हिंदू धर्म में रहना चाहें तो रह सकते है? यह मेरा व्यक्तिगत फैसला है?

सवाल : क्या अब अनुसूचित जाति से पूरी तरह कट जाएंगे। क्या घर वापसी हो सकती है?

जवाब : मु़झे कोई स्वीकार करे या न करे। मैं मुस्लिम बन गया हूं। घर वापसी का सवाल ही नहीं उठता।

सवाल : धर्म बदलने और वीआरएस का फैसला लेने से पहले आपने शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए क्या प्रयास किया?

जवाब : मैंने मुख्यमंत्री राजे से समय मांगा। इसका रिकार्ड भी है, पर मुझे समय नहीं दिया। मुख्य सचिव राजन को भी रिप्रजेंटेंशन दिया, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। शेष | पेज 10

सवाल : सरकार से क्या शिकायत थी?

जवाब : दो शिकायतें थी। पहली-रिटायर जिला जज नानगराम शर्मा ने मेरे खिलाफ झूठी शिकायतें की। एसीबी ने एफआर लगा दी। इसके बावजूद शिकायतें जारी रही। मैंने आरटीआई में सूचनाएं मांगी, लेकिन नहीं दी गई।

मजबूर होकर मैंने गांधी नगर थाने में 24 मई 2014 को केस दर्ज कराया। डेढ़ साल में सरकार ने कुछ नहीं किया। एसीएस के साथ ऐसा हो सकता है तो अन्य दलित, आदिवासी के साथ क्या हो रहा होगा? दूसरी, प्रदेश में पहली बार वरिष्ठता के आधार पर अनुसूचित जाति का मुख्य सचिव बनने का मौका मिलता, पर सरकार ने राजन को एक्सटेंशन देकर यह मौका मुझसे छीन लिया।

सवाल : प्रदेश सरकार आपको मुख्यसचिव क्यों नहीं बना रही थी?

जवाब : यह तो सरकार बताए, मैं इतना महसूस कर रहा हूं कि एससी होने से मुझे यह अवसर नहीं दिया गया।

सवाल : भाजपा ही क्यों, कांग्रेस सरकार ने भी आपको किसी बड़े पद पर नहीं लगाया?
जवाब : हर सरकार में मेरी उपेक्षा हुई, पर मैंने कभी शिकायत नहीं की। कांग्रेस सरकार ने 2011 में मुझे तीसरी बार संभागीय आयुक्त बनाया, उस समय कई राज्यों के मेरे बैचमेट मुख्यसचिव बन चुके थे। इसे क्या कहेंगे?

सवाल : आरोप है कि आपने स्थानांतरण के बाद आपने पैसे लेकर बैकडेट में फैसला दिया? उसी मामले में रिटायर जिला जज नानग राम शर्मा ने शिकायत की है।

जवाब : यह आरोप पूरी तरह गलत है। जानबूझ कर मामले को लटकाया जा रहा है, जिससे रिटायरमेंट से पहले मुझे फंसाया जा सकें।

सवाल : इस विद्रोही तेवर के बाद सरकार आपको बर्खास्त करती है तो आप क्या करेंगे?

जवाब : सरकार मुझे बर्खास्त करे। मै तैयार हूं।

सवाल : आगे आपकी क्या योजना है?

जवाब : 31 मार्च के बाद आगे की योजना तय होगी।

तीन व्यवस्थाओं पर जमकर बरसे

  1. ब्यूरोक्रेसी –मैं सबसे सीनियर, अब जूनियर के नीचे काम नहीं कर सकता

सालोदिया ने कहा- देश की आजादी के बाद मैं पहला दलित आईएएस हूं, जिसे वरिष्ठता के आधार पर मुख्य सचिव बनाया जाना था। लेकिन मेरी जगह मुख्य सचिव के पद पर आईएएस सीएस राजन को ही तीन महीने का एक्सटेंशन दे दिया गया। सालोदिया ने वीआरएस अर्जी में कहा- 31 मार्च 2016 के बाद उन्हें अपने जूनियर के नीचे काम करना पड़ेगा, जो वे नहीं करेंगे।

  1. सरकार – पक्षपात होता रहा, राजे ने सुनी नहीं, मोदी ने भी नजरअंदाज किया

उमराव ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम लिखे अपने इस्तीफे में राज्य सरकार पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं। सालोदिया ने कहा-मैंने सीएम से मिलने के लिए कई बार समय मांगा, लेकिन नहीं दिया गया। इसी तरह मेरी मां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को चिट्ठी लिखी, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। हर जगह मेरी उपेक्षा की जाती रही।

  1. धर्म व समाज – हिंदू धर्म में भेदभाव होता है

सालोदिया ने कहा कि दलित हूं, इसलिए मुझसे भेदभाव किया गया। हिंदू धर्म में जातिगत भेदभाव होता है। मैंने इस्लाम का अध्ययन किया है। इस्लाम में जातिगत भेदभाव नहीं है, सभी समान हैं, इसीलिए मैंने इस्लाम कबूला। अब तक मैं उमराव सालोदिया था, अब मेरा नाम होगा-उमराव खान।

काबिल तो कई होते हैं, सीएस एक ही बनता है : राजन

सवाल : सालोदिया का कदम उचित है?

जवाब : इस्लाम स्वीकार करना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है।

सवाल : सालोदिया आपके मित्र हैं, उनको सीएस बनाने में कोई मदद की?

जवाब : सीएस बनने के काबिल अफसर एक ही समय में कई होते हैं? सब सीएस नहीं बनते। क्या रोडवेज चेयरमैन का पद छोटा पद है?

सवाल : आरोप है, उनका हक छीन आपको एक्सटेंशन मिला?

जवाब : सीएस बनाने का काम अफसर नहीं करते। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री मिलकर सीएस बनाने का फैसला करते हैं।

सालोदिया किसी के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं : राठौड़

सालोदिया के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा- वे किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे बयान देना सेवा नियमों का उल्लंघन है। मुख्यमंत्री राजे सभी जातियों को आगे बढाने की पक्षधर हैं। धर्म परिवर्तन संबंधी फैसला निजी निर्णय है। राठौड़ ने कहा- वे 31 मार्च तक इंतजार करते तो शायद उनके नाम पर विचार हो सकता था।

छह माह शेष हैं सालोदिया के रिटायरमेंट में

1978 बैच के आईएएस अफसर सालोदिया जून 2016 में रिटायर होने वाले हैं। सालोदिया ने दोपहर 12 बजे प्रेस क्लब पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। 20 मिनट में ही वे वीआरएस और धर्म बदलने की बात कह गए।

नई दुनिया

महिला शिक्षाकर्मी पर हमला

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अंबिकापुर(निप्र)। नगर के नवापारा निवासी महिला शिक्षाकर्मी को परेशान करने एवं उससे अपमानजनक व्यवहार करने वाले युवक ने नमनाकला रिंगरोड पर डंडे से वार कर गंभीर रूप से घायल दिया गया। गंभीर रूप से घायल महिला शिक्षाकर्मी को लोगों की मदद से मिशन अस्पताल अंबिकापुर में दाखिल कराया गया। लगभग आठ दिनों तक उपचार कराने के बाद महिला शिक्षाकर्मी को अस्पताल से छुट्टी दी गई है। मामले की सूचना एवं बयान के बाद भी गांधीनगर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध तक दर्ज नहीं किया। उन्होंने इस मामले की लिखित शिकायत आजाक थाने में दर्ज करा आरोपी युवक के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार नगर के इंदिरानगर नवापारा निवासी आदिवासी महिला शिक्षाकर्मी ने आजाक थाना में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर अवगत कराया है कि वह वर्तमान में व्याख्याता पंचायत के पद पर शासकीय हाई स्कूल लक्ष्मणगढ़ उदयपुर में पदस्थ है। वह रोज बस से स्कूल आनाजाना करती है। इस बीच कई बार विजय यादव द्वारा उनके साथ रास्ते में अभद्र व्यवहार किया गया व अश्लील बातें भी की गई। समझाईश देने के बावजूद युवक की हरकतों मे ंकोई बदलाव नहीं आया। शिकायत के मुताबिक घटना दिवस 23 दिसंबर 2015 को महिला शिक्षाकर्मी उदयपुर से बस से शाम लगभग सात बजे बस स्टैंड पहुंची। यहां पार्किंग में रखी स्कूटी लेकर वह घर के लिए निकली थी,उसी दौरान गर्ल्स कालेज के सामने मुख्य सड़क पर युवक ने उनका रास्ता रोक लिया और अभद्र व्यवहार कर अश्लील बातें करने लगा। महिला शिक्षाकर्मी द्वारा रोने व चिल्लाने पर मार्ग से गुजर रहे एक व्यक्ति द्वारा युवक को रोक लिया गया और शिक्षाकर्मी को घर जाने कहा गया। महिला शिक्षाकर्मी स्कूटी से घर के लिए निकली थी। उसी दौरान रिंगरोड में नमनाकला चर्च के पास आरोपी युवक ने पीछे से डंडे से वार कर दिया। इससे वह अनियंत्रित होकर स्कूटी से गिर बेहोश हो गई। जब उसे होश आया तो उसने स्वयं को मिशन अस्पताल अंबिकापुर में पाया।

महिला शिक्षाकर्मी के मुताबिक लगभग आठ दिनों तक वह मिशन अस्पताल में भर्ती रही। बीते 30 दिसंबर की शाम उसे अस्पताल से छुट्टी दी गई। महिला शिक्षाकर्मी ने बताया कि हमले के बाद सड़क पर बेहोश हो जाने पर दो लोगों द्वारा 108 संजीवनी एक्सप्रेस से उसे मिशन अस्पताल पहुंचाया गया था। घटना को लेकर गांधीनगर पुलिस को सूचना दी गई एवं पुलिसकर्मियों ने बयान भी लिया,लेकिन कार्रवाई नहीं की। पूरी घटना की शिकायत महिला शिक्षाकर्मी के भाई द्वारा आजाक थाने में किए जाने पर आरोपी युवक द्वारा घायल शिक्षाकर्मी के भाई को ही फोन कर धमकी दिए जाने की शिकायत की गई है। महिला शिक्षाकर्मी ने शिकायत की जांच व नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

बेलगाम पुलिस,जमकर मनमानी-

शिकायत पर तत्काल एफआईआर के आदेश के बावजूद जिले के थानों में न तो एफआईआर की जा रही है और न ही आवेदन ही लिया जा रहा है। जिले के पुलिस थाने बेलगाम हैं और पुलिसकर्मी मनमानी पर उतारू हैं। कई बार एफआईआर नहीं लिखे जाने की शिकायत थाने भी पहुंच रही है,जबकि सूचना पर एफआईआर नहीं लिखने पर सीधे थानेदार या जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ एफआईआर का प्रावधान है। इसके कारण अपनी खाल बचाने पुलिसकर्मी आवेदन तक स्वीकारने तैयार नहीं हैं। यह पीड़ितों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

नई दुनिया

बैगाओं को पानी, बिजली नसीब नहीं

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मुंगेली। जिला मुख्यालय मुंगेली लोरमी ब्लॉक के ग्राम झिरिया से बड़ी संख्या में बैगा आदिवासी पहुंचे। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की बात कहते हुए पानी और बिजली पानी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई।

उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर जमीन पर कब्जा हटाने मांग की। विडंबना है कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगाओं को अपनी समस्या के लिए लंबी दूर कर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय मुंगेली में लोरमी क्षेत्र के 20 बैगा आदिवासी परिवार के लोग बैगा बाहुल्य ग्राम झिरिया में पानी के लिए होने वाली परेशानी से जिला अधिकारी को अवगत कराते हुए बताया कि उन्हें पानी के लिा लंबी दूर तय करना पड़ता है। शासन के द्वारा उन्हें विस्थापित कर सभी सुविधा देने की बात कही गई थी परंतु उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए जुझना पड़ रहा है। उन्होंने प्रमुख मांगों को लेकर कलेक्टेट पहुंच कर ज्ञापन सौंपा। इसमें बुनियादी सुविधा की मांग की।

बेजा कब्जा हटाने की मांग की

इसमें बैगा आदिवासियों में समारु पिता बैसाखु (52), हरिचंद पिता कुमार (32),वीरसिंह पिता पनकू (35), रमू (52), जेठू पिता बैशाखू (40), रामबाई पति अमरसिंग (42), पांचोबाई पति बुधराम (40) ने बताया की 1984-1985 में बैगा परिवार को बसाया गया था। उनके लिए शासन द्वारा जमीन उपलब्ध कराई गई थी साथ ही बिजली, पानी की व्यवस्था करने की बात कही गई थी किंतु उनके जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और सौर ऊर्जा प्रणाली ठप होने से बिजली नहीं है। उन्हें पानी के लिए दूर तक जाना पड़ता है। उन्होंने विसंगतियों को दूर करने की मांग की।

बैगाओं ने मूलभूत सुविधाओं को लेकर ज्ञापन सौंपा है। उनकी मांगों और समस्या को प्राथमिकता के साथ निराकरण करेंगे।

डॉ. संजय अलंग, कलेक्टर

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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