दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 17.12.15

 

विजयी प्रत्याशी का ‌दिया साथ, गर्भवती के पेट में मारी लात – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/hapur/hapur-crime-news/suported-to-winning-candidate-kicked-to-pregnant-woman-hindi-news/

दलित ने प्रधानी का चुनाव लड़ा तो दबंगों ने गांव से निकला न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/dalit-family-booted-ut-of-village-for-contesting-village-panchayat-election-1144102.html

निहंग और बेटी को घर में घुसकर पुलिस ने पीटा – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/PUN-OTH-MAT-latest-samana-news-020506-3225014-NOR.html

थाने ले गई थी पुलिस, आधा घंटे बाद सड़क पर मरा मिला – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/bhopal-marder-marder-604385

पेटलावद ब्लास्ट पीड़ितों को पहले नौकरी दी, फिर निकाला – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/jhabua-petlavd-blast-victims-first-hired-then-fired-604182

प्रसूता व नवजात की मौत के दो दिन बाद भी शुरू नहीं हुई जांच – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-HOSH-MAT-latest-hoshangabad-news-035607-3230069-NOR.html

कालबेलिया समाज के लोगों ने प्रदर्शन कर मांगा आवास – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-nanwan-news-053848-3226015-NOR.html

दलित संगठनों ने प्रदर्शन कर मांगा न्याय – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-sirsa-news-030524-3225105-NOR.html

An Urgent Appeal:

Please register your contribution to PMARC for

Strengthening Democracy, Peace & Social Justice!

Only our collective effort can make it possible to carry forward our interventions.

 It is a challenge before each one of us as equal stakeholder of PMARC.

अमर उजाला

विजयी प्रत्याशी का ‌दिया साथ, गर्भवती के पेट में मारी लात

http://www.amarujala.com/news/city/hapur/hapur-crime-news/suported-to-winning-candidate-kicked-to-pregnant-woman-hindi-news/

गांव में विजयी प्रत्याशी का साथ देने पर कुछ लोगों ने एक दलित परिवार के घर में घुसकर तोड़फोड़ की और बचाव में आई गर्भवती महिला के पेट में लात मार दी। 

इससे महिला की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे सीएचसी लेकर गए। वहां पुलिस कार्रवाई के डर से इलाज न करने पर गुस्साए दलित समाज के लोगों ने अस्पताल में ही हंगामा किया। 

बाद मेें महिला को नगर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। श्यामपुर गांव निवासी जोनी ने प्रधानी के चुनाव में विजयी प्रत्याशी का साथ दिया था।

इससे खफा होकर कुछ लोग जोनी से रंजिश रखते हैं। मंगलवार रात दबंग जोनी के घर में घुसे और तोड़फोड़ शुरू कर दी। जोनी ने विरोध किया तो उससे मारपीट की। 

आठ माह की गर्भवती जोनी पत्नी निशा उसे बचाने आई तो दबंगों ने उसके पेट पर लात मार दी। निशा वहीं बेहोश हो गई। घटना से दलितों में आक्रोश हो गया। 

परिजन महिला को सीएचसी लेकर गए। उधर, गांव में पुलिस पहुंची और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। जोनी ने बताया कि निशा का सरकारी डॉक्टरों ने उपचार करने से मना कर दिया, क्योंकि वह पहले पुलिस थाने की पर्ची मांग रहे थे।

इससे गुस्साए दलित समाज के लोगों ने अस्पताल में ही प्रदर्शन कर दिया। बाद में महिला को नगर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

गांव श्यामपुर के जोनी की तहरीर मिली है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है।

विनोद कुमार पांडेय, एसओ देहात

 न्यूज़ 18

दलित ने प्रधानी का चुनाव लड़ा तो दबंगों ने गांव से निकला

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/dalit-family-booted-ut-of-village-for-contesting-village-panchayat-election-1144102.html

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद अब चुनाव हारे दबंगों ने गरीबों और मजलूमों पर अत्याचार शुरू कर दिया है. बांदा में एक दलित परिवार के साथ गांव के कुछ दबंगो ने मार-पीट कर महज इसलिए गांव से बाहर निकल दिया क्योंकि उस परिवार के एक सदस्य ने दबंगों के विरुद्ध प्रधान पद के प्रत्याशी का आवेदन किया था

यह परिवार दबंगों के खौफ से अपने के मकान में ताला डालकर दर-दर भटक रहे हैं. मामला जनपद के बिसंडा थाना क्षेत्र के तेंदुरा गांव का है, जहां एक दलित परिवार को सामान्य सीट से प्रधान पद का चुनाव लड़ना बहुत मंहगा पड़ा. उसे गांव के एक दबंग व्यक्ति ने मार-पीट कर गांव से निकाल दिया है.

पीड़ित परिवार कई दिनों से अधिकारियों के पास चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे अब तक न्याय नहीं मिला. पीड़ित दलित रामप्रताप ने हाल ही में संपन्न हुए प्रधानी के चुनाव में अपने गांव से प्रधान पद पर अनारक्षित सीट से अपनी पत्नी कमला देवी को प्रत्याशी बनाया था. इसी पद पर गांव के एक दबंग सजायाफ्ता राजू मिश्रा की रिश्तेदार भी चुनाव लड़ रही थीं. मतदान होने तक उस पर चुनाव न लडऩे का दबाव बनाया गया था, लेकिन जब वह नहीं माना तो मतदान के बाद आधी रात को यह दबंग एक अन्य बंदूकधारी अपने सहयोगी के साथ रामप्रताप का दरवाजा तोड़कर पूरे परिवार को बंदूक के कुंदे से पीटा और बाहर निकल दिया. जिसके बाद पीड़ित परिवार घर पर ताला बंद कर दर-दर की ठोकरें खाता हुआ इस समय एक गांव के जंगल में शरण लिए हुए है.

पीड़ित परिवार का कहना है की वे लोग बिसण्डा थाने भी गए लेकिन पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की जिसके बाद से ये परिवार अभी भी बहुत दहशत में है. इन्हें चिंता लगी रहती है कि कहीं दबंग यहां भी न पहुंच जाएं. पीड़ित परिवार की फरियाद जब पुलिस ने भी नहीं सुनी तो ये परिवार अपना दुखड़ा लेकर बसपा विधायक दल के उपनेता और नरैनी क्षेत्र के विधायक गयाचरण दिनकर के पास गया. जिन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की. लेकिन इसके बाद भी आरोपियों के विरुद्ध अभी तक कोई कार्यवाई नहीं हुई है.

वहीं इस मामले में पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है. पुलिस ने न तो अभी तक आरोपी से कोई पूछताछ की है और न ही उसके विरुद्ध कोई मामला दर्ज किया है. जब पुलिस अधीक्षक आरपी पाण्डेय से इस बारे में बात की तब उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की जाएगी और पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया करायी जाएगी. लेकिन सवाल यह उठता है कि अभी तक पुलिस क्या कर रही थी.

दैनिक भास्कर

निहंग और बेटी को घर में घुसकर पुलिस ने पीटा

http://www.bhaskar.com/news/PUN-OTH-MAT-latest-samana-news-020506-3225014-NOR.html

गांवमरोड़ी में एक निहंग और उसकी बेटी को घर में घुसकर पीटने का आरोप पुलिस पर लगा है। पिटाई में निहंग धन्ना सिंह और उसकी नाबालिग बेटी नसीब कौर को चोट लगी हैं। उन दोनों को अस्पताल में दाखिल कराया गया। बताया जा रहा है कि नाबालिग दलित परिवार की है।

मंगलवार को हुए हादसे की सूचना के बाद शिअद मान के जिला प्रधान और समर्थक ने उनको अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के बाहर उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और आरोपी पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन करने वालों ने बताया कि धन्ना सिंह के खिलाफ पुलिस को गांव के कुछ लोगों ने शिकायत दी थी। उनका कहना था कि धन्ना तेज आवाज में स्पीकर चलाता है। इसके बाद पुलिस उनके घर पहुंची और धन्ना को पीटने लगी। पिता को पिटते देख बेटी ने उनको बचाने की कोशिश की तो मुलाजिमों ने उसे भी पीट दिया। शिअद-मान के जिला प्रधान राजिंदर सिंह फतेहगढ़ छन्ना, सरोप सिंह संघा, कुलदीप सिंह, अमरजीत सिंह मरोड़ी, हरदीप सिंह अस्मानपुर, हरदीप सिंह सहजपुरा, अमरीक सिंह पहाड़पुर, गुरध्यान सिंह धनेठा ने कहा कि पीड़ित को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष होगा।

अस्पताल में दाखिल नाबालिग नसीब कौर। 

शिकायत से बचने को लगा रहा अारोप: चौकी इंचार्ज 

^मवीकला पुलिस चौकी इंचार्ज लखविंदर सिंह ने कहा कि मुलाजिमों ने किसी के साथ कोई मारपीट नहीं की है। धन्ना के खिलाफ कई शिकायत आई थीं। जिस वजह से उसे थाने बुलाया गया। कंप्लेंट से बचने के लिए वह झूठे आरोप लगा रहा है, जिससे पुलिस चुप रहे। 

समाना के सिविल अस्पताल में बुधवार को पुलिस की कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी करते शिअद मान के वर्कर। उन्होंने कहा कि पीड़ित को इंसाफ दिलाया जाएगा। 

नई दुनिया

थाने ले गई थी पुलिस, आधा घंटे बाद सड़क पर मरा मिला

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भोपाल(नप्र)। रातीबड़ इलाके में एक आदिवासी व्यक्ति का शव संदिग्ध परिस्थितियों में सड़क किनारे पड़ा मिला। घटना के आधा घंटा पहले ही पुलिस उसे मारपीट के मामले में थाने ले गई थी। परिजनों ने पुलिस की पिटाई से मौत होने का आरोप लगाया है।

रातीबड़ पुलिस के मुताबिक 40 वर्षीय शंभू गौंड पुत्र पंचम गौंड नीलबड़ स्थित बरखेड़ा नाथू में रहता था और मजदूरी करता था। उसके साथ भाई शिवशरण और मां जमना बाई भी रहती है। बुधवार को उसके पड़ोस में रहने वाली अनीता नाम की महिला ने थाने में शिकायत की थी। उसमें बताया था कि दोपहर करीब 12 बजे खाना खाते समय शंभू ने उससे व उसके पति के साथ मारपीट की थी। सूत्र बताते हैं कि शिकायत के आधार पर शाम करीब 6 बजे पुलिस एसआई नंदराम चौधरी, एएसआई देवेंद्र नरवरिया शंभू को साथ लेकर गए थे। लेकिन आधा घंटा बाद शंभू के परिजनों को उसके नीलबड़ चौराहा के पास पड़े होने की सूचना मिली। मां जमनाबाई का आरोप है कि पुलिस की मारपीट से शंभू की मौत हुई। सीएसपी आरडी भारद्वाज का कहना है कि परिजनों से बातचीत की जा रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पीएम रिपोर्ट से ही मौत की वजह का पता चल सकेगा।

नई दुनिया

पेटलावद ब्लास्ट पीड़ितों को पहले नौकरी दी, फिर निकाला

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पेटलावद (झाबुआ)। 12 सितंबर को ब्लास्ट में मारे गए लोगों के परिजन न्याय नहीं मिलने के आरोप लगा रहे हैं। आरोप है कि जिन परिजन को नौकरी दी गई थी, उन्हें फिर से घर भेज दिया गया है। 

पेटलावद क्षेत्र के कुछ गांवों के लोग ब्लास्ट में मारे गए थे। इनमें से कुछ के परिजनों को स्कूलों और हॉस्टलों में रसोईयन की नौकरी दी गई थी। ये महिलाएं दो महीनों से नौकरी कर रही थीं, लेकिन चार दिन पहले इन्हें काम से जाने का कह दिया गया। कहा गया कि उनके संबंध में अभी कोई ऑर्डर नहीं आए हैं। जब ऑर्डर आ जाएंगे, तब काम पर बुला लिया जाएगा। ऐसे में मृतकों के ये परिजन अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उन्हें प्रशासन के इस रवैये से काफी निराशा है। 

इन्हें निकाला काम से

-ग्राम खोरिया की गुड्डीबाई मईड़ा के पति विक्रम की मौत ब्लास्ट में हो गई थी। गुड्डीबाई को पेटलावद छात्रावास में रसोईयन की नौकरी दी गई, लेकिन चार दिन पहले उन्हें घर लौटा दिया गया। उनसे कहा गया कि पहले आदेश लेकर आओ, फिर नौकरी पर रखेंगे। दो महीने तक किए गए काम का पैसा भी नहीं मिला। 

-ग्राम नाहरपुरा के कमलेश मेड़ा की पत्नी सीमा को भी दो माह नौकरी कराने के बाद निकाल दिया गया। उनसे कहा गया कि आदेश आने पर नौकरी पर रखा जाएगा। कमलेश के पिता धारजी बहू सीमा और उसके छोटी बेटी को पाल-पोस रहे हैं। धारजी अपंग हैं। बेटे की मौत पर मुआवजे में मिले 5 लाख में से एक लाख स्र्पए निकालकर क्रियाकर्म किया और मकान बनाने के लिए सरिया व ईंटें खरीदी। उन्हें अब तक मकान निर्माण के लिए पैसे नहीं मिले। 

-ग्राम नाहरपुरा के अमरसिंह की भी मौत हो गई थी। उसकी पत्नी ममता को दो महीने नौकरी पर रखने के बाद निकाल दिया गया। चार छोटे बच्चों को पालना भारी पड़ रहा है। मकान बनाने के लिए भी पैसे नहीं मिले। माता-पिता को वृद्धावस्था पेंशन देने के निर्देश मुख्यमंत्री ने घर आकर दिए थे, लेकिन तीन महीने में एक बार भी पेंशन नहीं मिली। 

इन्हें अब तक काम नहीं मिला

-ग्राम खोरिया की संतोष पति रमेश कटारा को आज तक नौकरी नहीं दी गई। वह नौकरी के इंतजार में है। छोटे बच्चों का पेट पालने के लिए कोई रास्ता नहीं है।  

…और भी हैं परेशान

-ब्लास्ट में पास के सेठिया रेस्टोरेंट के मुकेश सेठिया की मौत हो गई। होटल का लाखों का सामान नष्ट हो गया। मुकेश की पत्नी संतोषबाई पर परिवार को पालने की जवाबदारी आ गई, लेकिन नुकसानी के नाम पर कुछ नहीं मिला। वो फिर से रेस्टोरेंट शुरू करना चाहती हैं। 

शिकायत है तो निराकरण करेंगे

पेंशन के सभी प्रकरण बना दिए गए हैं। इंदिरा आवास के तहत मकान भी स्वीकृत किए गए हैं। अगर किसी को कोई शिकायत है तो उसका निराकरण किया जाएगा। रसोईयन से संबंधित काम आदिवासी विकास विभाग का है। 

-वीरेंद्रसिंह रावत, सीईओ, जनपद पंचायत, पेटलावद

अभी आदेश जारी नहीं

अभी उन्हें उन जगहों से हटाया जरूर गया है, जहां वो अभी काम कर रही थीं। दरअसल प्रशासन की कोशिश है कि उन्हें अपने घरों के पास की जगह काम पर लगाया जाए। सीईओ साहब के अवकाश पर होने से आदेश जारी नहीं हो पाए। 

-शकुंतला डामोर, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग

दैनिक भास्कर

प्रसूता व नवजात की मौत के दो दिन बाद भी शुरू नहीं हुई जांच

http://www.bhaskar.com/news/MP-HOSH-MAT-latest-hoshangabad-news-035607-3230069-NOR.html

जिला अस्पताल में सोमवार की सुबह प्रसव के दौरान सोहागपुर की प्रसूता व उसके नवजात की मौत का मामला विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इसमें रैफर होकर महिला को किसी भी गायनीकोलॉजिस्ट ने नहीं देखा था। इसी तरह एक महिला को हायर सेंटर से निचले सेंटर इटारसी भेजने के मामले की जांच भी नहीं की जा रही है।

सोहागपुर के मरकाढाना निवासी भाईजी आदिवासी अपनी प|ी सविताबाई का प्रसव कराने शनिवार को सोहागपुर अस्पताल पहुंचे थे। हाइरिस्क प्रसव होने से सविता को जिला अस्पताल रैफर किया गया। रविवार की रात 12 बजे उसे होशंगाबाद लाया गया। सोमवार सुबह 9 बजे सविता ने बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद 10 बजे उसने दम तोड़ दिया। नवजात का भी उसके पहले दम निकल चुका था। प्रसव डॉ. वंदना मौरे ने कराया। उनका कहना था बच्ची मृत पैदा हुई। मामले में महिला को एक बार भी किसी गायनीकोलॉजिस्ट ने नहीं देखा। डॉ. वंदना मौरे के मुताबिक उसकी हालात सामान्य थी। पुलिस ने मर्ग कायम किया था। प्रसूता की मौत को विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया। इसी तरह रविवार को होशंगाबाद निवासी रानी सराठे को प्रसव के लिए भर्ती कराया। लेकिन दिनभर सीजर के लिए इंतजार कराने के बाद रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात 1 बजे सीजर करने वाले डॉक्टर की अनुपस्थिति बताकर इटारसी रैफर कर दिया। बाद में एक निजी अस्पताल में प्रसव हुआ। इसके पहले दिन में भी कई महिलाओं को परेशान होना पड़ा। गंभीर मामला सामने के बाद भी विभाग ने कार्रवाई तो दूर जांच तक शुरू नहीं की है। सिविल सर्जन डॉ. रविकांत शर्मा का कहना है प्रसूता की मौत के मामले में डॉक्टर ने ही प्रसव कराया। पोस्टमार्टम कराया है। जांच रिपोर्ट बाद में आएगी। सीजर के लिए डॉ. मलय जैसवाल को आना था, लेकिन वे निजी समस्याओं के चलते नहीं आए। हमने इटारसी के लिए एंबुलेंस उपलब्ध करा दी थी। 

काम चलाऊ प्रभार है 

सीएमएचओ डॉ. मरावी अवकाश पर हैं। मेरे पास काम चलाऊ प्रभार है। गुरुवार को डॉ. मरावी आ जाएंगे। उनसे बात कीजिए। डॉ. जीसी सोनी,प्रभारी, सीएमएचओ होशंगाबाद  

दैनिक भास्कर

कालबेलिया समाज के लोगों ने प्रदर्शन कर मांगा आवास

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-nanwan-news-053848-3226015-NOR.html

भारतीयविमुक्त एवं घुमंतु जनजाति वेलफेयर संघ के प्रदेशाध्यक्ष हीरालाल कालबेलिया के नेतृत्व में कालबेलियां समाज के लोगों ने तहसील कार्यालय में प्रदर्शन किया और राज्यपाल के नाम तहसीलदार को ज्ञापन दिया। ज्ञापन चारागाह भूमि से अावास तोड़कर बेघर किए कालबेलियां जाति के लोगों के लिए आवास निर्माण के लिए भूमि आवंटित करने, सर्दी से बचाव के लिए आवास की व्यवस्था करने खाने-पीने की व्यवस्था करने की मांग की। 

इनके साथ कालबेलिया समाज के संभागीय अध्यक्ष मोहनलाल कालबेलिया, विहिप के जिला सहमंत्री बालकृष्ण गुर्जर, दलित अधिकार नेटवर्क संभागीय अध्यक्ष रमा छाबडिया, विमुक्त एवं घुमंतु जनजाति वेलफेयर संघ प्रदेश सचिव पूनम नाथ सपेरा भी साथ थे। ज्ञापन देने के बाद कालबेलिया जाति के लोग तहसील कार्यालय में धरने पर बैठ गए। इसके बाद तहसीलदार के प्रस्तावित भूमि देखने के लिए चल गए। ज्ञापन में लिखा कि दलित, घुमंतु जाति के 20-25 वर्षों से नगर रोड पर अपने झोंपड़े पक्के मकान बनाकर रह रहे थे, लेकिन 24 नवंबर को प्रशासन ने इनके मकान झोंपडिय़ां तोड़कर बेघर कर दिया। तब से खुले आसमान के नीचे रह रहे है। 

पढ़ाईचौपट हो रही, सर्दी से हो रहे बीमार

जबकिइन लोगों के पास राशनकार्ड, पहचान पत्र, बिजली कनेक्शन, आधार कार्ड भी है। इन परिवारों के 20-25 बच्चे खुले में रह रहे है। इनकी पढ़ाई चौपट हो रही तथा तेज सर्दी के कारण बीमार हो रहे है। इनके अतिक्रमण तो हटा दिए, लेकिन प्रशासन ने सैकड़ों बीघा भूमि पर से अतिक्रमण नहीं हटाया। इनके घर गिराने से खाने-पीने का सामान मलबे में दब गया। पशु परिवार संकट में गुजर रहे है। खाने-पीने की व्यवस्था ओढऩे, बिछाने, बिजली की व्यवस्था नहीं होने से सारी रात बैठकर गुजार रहे है। ज्ञापन में इनका पुनर्वास करवाया जावें। उसी भूमि का आवंटन कर पट्टे दिलवाए, बीपीएल की सुविधा दी जावें, इंद्रा आवास में जोडकर मकान बनाकर देने, दो माह का राशन सभी सुविधाएं देने की मांग की है। तहसीलदार शिवजी लाल यादव ने बताया कि चारागाह भूमि से बेघर हुए परिवारों को बसाने के लिए खसरा नंबर 661 में पांच बीघा भूमि आवंटन करने का प्रस्ताव एसडीएम को भेजा है। एडीएम ने कालबेलियां जाति के लोगों के रहने की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए है। इस पर नगर पालिका को इनको रेन बसेरे में रहने की व्यवस्था करने के लिए कहा है। 

दैनिक भास्कर

दलित संगठनों ने प्रदर्शन कर मांगा न्याय

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पहले केस दर्ज करने में की आनाकानी, अब नहीं किए जा रहे ठगी के आरोपी गिरफ्तार 

सिरसा | पहलेकेस दर्ज करने में आनाकानी करने वाली सदर थाना पुलिस अब किसान से 45 लाख रुपये की ठगी करने वाले कंपनी के अधिकारियों को गिरफ्तार करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। पीड़ित किसान द्वारा बार बार थाने में चक्कर लगाए जा रहे हैं, मगर सदर थाना पुलिस उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन अब आरोपियों को गिरफ्तार करने की जहमत नहीं उठा रही। 

किसान शमशेर सिंह ने सदर थाना पुलिस की संदिग्ध कार्यप्रणाली के खिलाफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सीएम विंडो के माध्यम से शिकायत भेजी है। पीड़ित किसान शमशेर सिंह ने सीएम को पत्र लिखकर बताया है कि सदर थाना पुलिस ने चार दिसंबर को केस दर्ज किया था और गिरफ्तारी की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। कंपनी का एमडी आरोपी जगजीत सिंह, मैनेजर अमरीक सिंह, राकेश वर्मा, रजनीश कपूर, बलजीत ने उसके 45 लाख रुपये हड़प लिए हैं। 

जगजीत सिंह पंजाब की बरनाला जेल में बंद है। सभी आरोपियों से धोखाधड़ी से हड़पे रुपयों की बरामदगी की जानी है। सदर सिरसा पुलिस की कार्यप्रणाली बेहद संदिग्ध है जो आरोपियों को गिरफ्तार करने की बजाए उन्हें संरक्षण दे रही है। केस दर्ज होने के बाद से आरोपियों से उसे धमकी मिल रही है। पीडि़त शमशेर सिंह ने सीएम से गुहार लगाई है कि पुलिस को जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करने का आदेश दे। अगर मेरे पर कोई हमला हुआ तो इसके जिम्मेदार उपरोक्त दोषी होंगे। 

गंभीर हैं 

^पुलिसमामले को लेकर गंभीर है। हम इन्वेस्टिगेशन कर रहे हैं। शीघ्र ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लेंगे।” बलवंतजस्सू, एसएचओ, सदर

दलित युवक भीम टांक के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए समाज के लोग। 
यहां बता दें कि गांव सिकंदरपुर निवासी शमशेर सिंह ने वर्ष 2011 में चार साल में रुपया दुगना करने की स्कीम में कंपनी को 45 लाख रुपये जमा करवाए थे। पॉलिसी की समय सीमा पूरी होने पर शमशेर सिंह कंपनी कार्यालय पहुंचा और अपने दोगुणा हो चुके रुपये मांगे। कंपनी के अधिकारी रुपये देने में टालमटोल करने लगे। इसके बाद शमशेर सिंह को पता चला कि कंपनी का एमडी जगजीत सिंह तो लापता हो चुका है। उसे स्वयं के साथ धोखाधड़ी करने का अहसास हुआ। किसान शमशेर सिंह ने जब सदर थाना पुलिस को इसकी शिकायत दी, मगर सदर थाना पुलिस ने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद किसान अदालत पहुंचा। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश सदर थाना पुलिस को दिया। न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए पुलिस ने पंजाब स्थित उक्त कंपनी के एमडी अमृतसर निवासी जगजीत सिंह,अमरीक सिंह, रोपड़ निवासी बलजीत सिंह, मोहाली निवासी रजनीश कपूर एजेंट राकेश वर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश रचने चिट फंड की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोग दर्ज किया था। 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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