दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 09.12.15

जौनपुर: दबंग प्रधान के मार-पीट और धमकी के वजह से एक दलित ने दी जान ! – खोजी न्यूज़

http://khojinews.com/news-details.php?id=1940

दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के दिल गरीब-वंचित समुदाय के बच्चों के लिए नहीं खुले – आउट लुक

http://www.outlookhindi.com/country/issues/delhi-private-schools-are-not-happy-to-admit-children-from-poor-and-marginalized-community-5445

चेन्नै आपदाः राहत की छुआछूत – आउट लुक

http://www.outlookhindi.com/country/investigation/chennai-floods-discrimination-in-relief-5441

छात्रा से दुष्कर्म के दो आरोपी गिरफ्तार राजेश्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/schoolgirl-raped-and-arrested-two-accused-1475925.html

महिला सरपंच ने दी इस्तीफा देने की धमकी – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-HSZ-ITAR-MAT-latest-itarsi-news-042638-3178132-NOR.html

15 दिन में हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो थाने का किया जाएगा घेराव – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-chacharauli-news-020506-3175188-NOR.html

दूसरे दिन भी जारी रहा धरना – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-BIK-MAT-latest-bikaner-news-030004-3176681-NOR.html

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खोजी न्यूज़

जौनपुर: दबंग प्रधान के मार-पीट और धमकी के वजह से एक दलित ने दी जान !

http://khojinews.com/news-details.php?id=1940

खोजी न्यूज़: जनपद जौनपुर के रामनगर ब्लाक के नवापुर ग्राम पंचायत में दबंग रेड कार्ड होल्डर प्रधान संजीव कुमार उर्फ़ संजय के मार-पीट और जान से मारने की धमकी की वजह से एक गरीब दलित की जान चली गयी।

पूरी खबर :

मृतक अजय कुमार गौतम उर्फ़ पप्पू हरिजन की पत्नी रेखा के अनुसार कल रात को दबंग प्रधान संजीव कुमार उर्फ़ संजय ने मृतक अजय कुमार उर्फ़ पप्पू दलित को अपने दोस्त सुनीता सिंह (वर्तमान प्रधान पद प्रत्याशी) के घर बुलाया और आरोप लगाया की तुमने हमें वोट नही दिया है। फिर आरोप लगाने के बाद सुनीता सिंह के घर पर मृतक की जम के लात घूंसों से पिटाई की । पिटाई करने के बाद दबंग प्रधान ने अपनी महिला मित्र के साथ पप्पू हरिजन को जान से मारने की धमकी भी दी । उससे उन्होंने ने बोला की तुम्हे जीने नही देंगे”

उसी तनाव के वजह से पप्पू हरिजन रात भर सो नही पाया और पूरी रात बेचैनी से गुजारी । आज दिन में भी वह उसी तनाव से ग्रस्त था और शाम होते – होते फांसी लगाकर जान दे दिया ।

पुलिस अभी भी हाथ पे हाथ रखर बैठी हुयी है और इस दलित की मौत को साधारण आत्म हत्या की घटना बताकर लीपा-पोती करने के फ़िराक में हैं ।

इस सिलसिले में खोजी न्यूज़ ने थानेदार नेवढ़ियाँ विजय बहादुर सिंह और कप्तान राजू बाबू सिंह जौनपुर से संपर्क साधने की कोशिश किया किन्तु वहां से कुछ भी संतोष जनक जवाब नहीं मिला।

जबकि कानून के हिसाब यदि कोई ब्यक्ति किसी के उकसाने पर आत्म हत्या करता है तो धरा 306 के तहत 10 साल की कैद होती है और यहाँ पुलिस मृतक के पत्नी के घाव पर नमक छिड़क कर इसे साधारण आत्म हत्या बताने की कोशिश में लगी है ।

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दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के दिल गरीब-वंचित समुदाय के बच्चों के लिए नहीं खुले

http://www.outlookhindi.com/country/issues/delhi-private-schools-are-not-happy-to-admit-children-from-poor-and-marginalized-community-5445

छोटा सा पांच साल का बच्चा वापस कबाड़ से भरे घर में दिन भर बैठा रहता है। स्कूल नहीं, क्लास नहीं, कोई संगी-साथी नहीं। वह कुछ दिनों के लिए दिल्ली के पॉश इलाके वसंत विहार के संभ्रात स्कूल दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ा। उसके माता-पिता, जो दलित समुदाय से आते हैं, ने पूरी कोशिश करके, बड़े सपनों के साथ उसे इस स्कूल में दाखिला दिलाया था। इस बच्चे के पिता जो कबाड़ी का काम करते हैं और खटिक समुदाय से आते हैं, ने बताया कि बच्चे का दाखिला 2015-16 के लिए दिल्ली पब्लिक स्कूल में कराया था। इसके लिए हमने आय का प्रमाणपत्र भी दिया था और लॉटरी के जरिए बच्चे को दाखिला मिला था। जून में स्कूल वालों ने बुलाया और बताया कि बच्चे का नाम स्कूल से काट दिया गया है क्योंकि हमने झूठा आय प्रमाणपत्र दिया था। मैंने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी। उल्टा उन्होंने हमें धमकाने की कोशिश की कि अगर हमने शिकायत की तो पुलिस हमें ही गिरफ्तार कर लेगी।

जबकि हकीकत यह है कि बच्चे के पिता कबाड़ी का काम करते हैं और दलित समुदाय से हैं। कानून के मुताबिक उन्हें अपने बच्चे के दाखिले के लिए आय प्रमाणपत्र की जरूरत ही नहीं है।

इस तरह के 20-25 परिवार कल अपनी व्यथा, अपने बच्चों के साथ हो रहे भेदभाव, शिक्षा के अधिकार कानून के खुलेआम उल्लंघन की दास्तान सामने रखने जा रहे हैं। ये सारे परिवार देश की राजधानी दिल्ली के ही है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब (आर्थिक रूप से कमजोर समुदाय) और वंचित (डिसएडवांटेज समूह) समुदाय के बच्चों को निजी स्कूल में दाखिले का जो प्रावधान है, उसके तहत इनके बच्चे निजी स्कूलों में होने चाहिए। दिल्ली में जिन निजी स्कूलों सरकार से रिहायती कीमत पर जमीन मिली, उनके लिए आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चों के लिए 20 फीसद सीटें आरक्षित करने का प्रावधान पहले से था। शिक्षा का अधिकार कानून फोरम की एनी नामाला ने बताया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में प्राइवेट स्कूल गरीब और वंचित समुदाय के बच्चों को दाखिला देने से अप्रत्यक्ष रूप से मना कर रहे हैं। दरअसल, वे गरीब और वंचित समुदाय के बच्चों को अपने स्कूलों में दाखिला ही नहीं देना चाहते, इसलिए सारी कोशिश उन्हें ड्रॉप-आउट कराने की करते हैं। ये स्कूल न तो सही ढंग से इन बच्चों की सीटों को प्रचारित करते हैं और दाखिले के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं।

दिल्ली में प्राइवेट स्कूल खुलेआम इस प्रावधान का उल्लघंन कर रहे हैं।  कानून के तहत तमाम प्राइवेट स्कूलों को यह जानकारी सार्जनिक करनी जरूरी है कि उन्होंने कितने बच्चों को इस प्रावधान के तहत दाखिला दिया। इसमें से 1186 स्कूलों ने जानकारी मुहैया कराई, लेकिन 540 स्कूलों ने किसी भी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया। जिन स्कूलों ने जानकारी दी, उससे पता चलता है कि गरीब औऱ वंचित समुदाय के बच्चों के आवेदन सामान्य श्रेणी के बच्चों से कई गुना ज्याजा आए। इन 1186 सकूलों में इन वर्ग के लिए 22616 सीटें आरक्षित थी, जिसके लिए 2014-15 में उनके पास 16,4575 आवेदन आए, जबकि सामान्य श्रेणी की 81198 सीटों के लिए 253675 आवेदन आए। 

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चेन्नै आपदाः राहत की छुआछूत

http://www.outlookhindi.com/country/investigation/chennai-floods-discrimination-in-relief-5441

किसी भी आपदा में समाज के सबसे हाशिए पर खड़े लोगों तक राहत पहुंची या नहीं, या आपदा से निपटने में दुरूह या गंदे समझे जाने वाले कामों में वंचित समुदाय के अलावा बाकी तबकों की क्या शिरकत रही, ये कुछ पैमाने हैं, जिन का विश्लेषण करके हम समाज के ताने-बाने को अच्छी तरह से समझ सकते हैं। चेन्नै में आई भीषण आपदा, आपदा से बचाव का कार्य, राहत कार्य और अब चल रहे सफाई के काम को क्या इस दृष्टिकोण से परखा जाना चाहिए। जरूर देखा जाना चाहिए और राहत की बात है कि इस दृष्टि से काम करने वाले, आवाज उठाने वाले और अध्ययन करने वाले समूह सक्रिय है। इनसे ये बात उभर कर आ रही है कि चेन्नै में आई तबाही से बड़े पैमाने पर दलितों को नुकसान हुआ और उन्हें उस पैमाने पर राहत नहीं मिली। इसके साथ ही चल रहे राहत और सफाई के कामों में दलित समुदाय को ही बड़ी तादाद में मलबे को हटाने, जोखिम भरी सफाई करने, बंद नाले और सीवर को साफ करने में लगाने का मामला सामने आया है।

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खबर मिली है कि चेन्नै में 14 जिलों से 3000 सफाई कर्मियों को लाया गया है। इस समय 25,000 सफाई कर्मियों को सफाई के काम में लगाया गया है। 5000 और अधिक अभी सरकार आसपास से लाने की कोशिश में लगी हुई है। सफाई कामगारों को इस जोखिम भरे काम को करने के लिए तमिलनाडु सरकार की तरफ से 2000 रुपये स्पेशल भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा अस्थायी सफाई कर्मियों को रोज 300 रुपये की दिहाड़ी दी जाएगी। राज्य सरकार की इस नोटिस से साफ जाहिर है कि इतनी भीषण विभीषिका के बाद भी मलबा सफाई से लेकर जानलेवा सफाई तक का सारा काम सिर्फ और सिर्फ सफाई कामगार समुदाय, यानी दलित समुदाय  ऊपर डाला जा रहा है। इसे लेकर दलित समुदाय में गहरा आक्रोश है।  सफाई कर्मचारी आंदोलन की दीप्ति सुकुमार का कहना है कि ये खुलेआम छुआछूत और जातिगत भेदभाव का मामला है। राष्ट्रीय आपदा से निपटने में सारा जोखिम दलित समुदाय पर ही क्यों डाला जाता है। सरकारों को उनकी जाने ही क्यों सस्ती नजर आती हैं। जबकि वे ही सबसे ज्यादा किसी भी आपदा से प्रभावित होते हैं। ठीक ऐसा ही सुनामी के समय भी किया गया था।  

इसी तरह से राहत सामग्री के वितरण में भी भेदभाव का मामला सामने आया है। सोशल वायस ग्रुप के जॉन पीटर का कहना है कि कड्डलूर जिले में सैंकड़ों दलित परिवार बिना किसी राहत के असहाय बैठे हैं। उनहें किसी तरह की राहत सामग्री नहीं मिली है। और वह अपने संगठन के जरिए उनकी मदद करने में लगे हुए हैं।

दलितों के साथ राहत सामग्री और राहत पहुंचाने में भेदभाव की बात नेशनल कैम्पेन फॉर दलित ह्यूमन राइट्स और नेशनल दलित वॉच के एक महत्वपूर्ण अध्ययन में भी सामने आई। इस अध्ययन में तमिलनाडु में पहले दौर में यानी 9 नवंबर को आई भीषण बारिश और उससे हुई तबाही के दौरान तटीय जिले कड्डलूर में किए गए राहत कार्य का जातिगत आधार पर विश्लेषण किया गया था। इसमें यह पाया गया कि अधिकांश पीड़ित दलित परिवारों को राहत से वंचित रखा गया, जबकि सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं का हुआ था। इस अध्ययन से पता चला कि इस इलाके में 95 फीसदी जो घर ध्वस्त हुए वे दलितों के थे, लेकिन उन्हें कोई राहत या मुआवजा नहीं मिला। इस अध्ययन में इलाके के 8392 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें से 41 फीसदी ही दलित थे। अध्ययन से सामने आया कि बाढ़ में घायल होने वाले  90 फीसदी दलित थे, 95 फीसदी दलितों के घर टूटे और 86 फीसदी फसलों का नुकसान भी दलितों को हुआ लेकिन सरकार से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसकी वजह दलितों के अनुसार यह थी कि तथाकथित ऊंची जातियों ने उन्हें राहत तक पहुंचने ही नहीं दिया। इस अध्ययन में हाथ-पैर टूटी दलित महिलाओं से बातचीत है, उनके नुकसान का ब्यौरा है।

इस अध्ययन से यह साफ होता है कि तमिलनाडु में दलितों के प्रति गहरी विषता मौजूदा है, जिसे सरकारी संरक्षण प्राप्त है। अध्यापक जयारानी का कहना है कि यही जातिगत सोच इस बार भी राहत कार्य और राहत विपरत में नजर आ रही है।

राजेश्थान पत्रिका

छात्रा से दुष्कर्म के दो आरोपी गिरफ्तार

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/schoolgirl-raped-and-arrested-two-accused-1475925.html

पुलिस ने मंगलवार को दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस उपाधीक्षक  बंशीलाल स्वामी ने बताया कि थाने में सोमवार को मेहाडा जाटूवास निवासी एक दलित छात्रा ने तीन लोगों के खिलाफ घर से उठाकर ले जाने व सामूहिक  दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया था। 

इस मामले में सोमवार को पीडि़ता का मेडिकल बोर्ड से जांच करवा  आरोपियों की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर पुलिस टीम भेजी गई थी। 

मंगलवार को शाम  टीम ने आरोपी रामबास निवासी संदीप कुमावत व गौरीर निवासी भरत सिंह कुमावत को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों से पूछताछ  जारी हैं। 

दैनिक भास्कर

महिला सरपंच ने दी इस्तीफा देने की धमकी

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इटारसी| बोरतलाई गांव की सरपंच रधिया बाई धुर्वे ने सरपंच के अधिकार नहीं मिलने से व्यथित होकर पद से इस्तीफा देने की धमकी दी है। मंगलवार को दलित महिला सरपंच ने एसडीएम को एक ज्ञापन दिया। पंचायत सचिव व रोजगार सहायक खुद पंचायत चला रहे हैं। जातिगत भेदभाव और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पंचायत में अभी तक हुए कार्यों की जांच कराने की मांग की।

दैनिक भास्कर

15 दिन में हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो थाने का किया जाएगा घेराव

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-chacharauli-news-020506-3175188-NOR.html

गनौलीमेंमंगलवार को दलितों की महापंचायत हुई। दलितों ने ऐलान किया कि अगर पुलिस ने 15 दिन के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो वे छछरौली थाने का घेराव करेंगे। महापंचायत में दलित समुदाय के कुछ लोगों पर हुए हमले के बाद पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर कड़ा ऐतराज जताया गया। रविदास मंदिर में हुई महापंचायत में दलितों ने प्रशासन पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया। मामले को लेकर पांच सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया।

बता दें कि गनौली में लगभग 2 माह पहले गांव केे दो समुदाय के लोगों में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था। उस समय दलित समाज के लोगों ने थाने में शिकायत दी थी। उसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाया था। दलित समाज के लोग तो सारा दिन थाने में बैठे रहे लेकिन दूसरा पक्ष नहीं आया था। उस समय डीएसपी ने गांव में आकर जायज कार्रवाई आश्वासन दिया था। दलित नेता संजीव कुमार,भीम राव अंबेडकर युवा मंच के अध्यक्ष डॉ. रामकुमार ने कहा कि गनौली कांड के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने की बजाय उल्टा दलित समाज के ऊपर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इन नेताओं ने कहा कि पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ केस दर्ज कर साबित कर दिया है कि जिनके साथ अन्याय, अत्याचार हुआ है। उनको ही निशाना बनाया गया है। पुलिस ने दलितों द्वारा दर्ज कराए मुकदमे में उचित धाराएं काट दी हैं। उल्टा दलितों के ऊपर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया।

मौके पर राजेश कटारिया, सही राम, ज्ञानचंद, नानक चंद, सतपाल,जयराम समेत महापंचायत में भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे। पांच सदस्यीय कमेटी में प्रधान संजीव कुमार, बलबीर लाल, चमन लाल, सरपंच रामप्रकाश, कुलदीप, संदीप कुमार को शामिल किया गया है। उधर, मामले को लेकर एसएचओ जंगशेर सिंह ने तमाम आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा दलित समाज के खिलाफ नाइंसाफी नहीं की गई। मामले की जांच चल रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

छछरौली| गनौलीमें दलित महापंचायत में संबोधित करते दलित समाज के नेता उपस्थित लोग।

 दैनिक भास्कर

दूसरे दिन भी जारी रहा धरना

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-BIK-MAT-latest-bikaner-news-030004-3176681-NOR.html

बीकानेर | आरोपियोंके खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर नायक समाज क्रांति मंच के बैनर तले कलेक्ट्रेट पर दलित परिवार का धरना दूसरे दिन मंगलवार को जारी रहा। मंच के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र नायक ने कहा कि गांव जयमलसर में चार माह पहले वृद्ध महिला और उसके परिजनों के साथ असामाजिक तत्वों ने मारपीट की थी। आरोपियों के हमले से वृद्ध महिला सोना देवी गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस संबंध में स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत भी कर दी गई है। लेकिन पुलिस प्रशासन की उदासीनता के चलते अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुई आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती तब तक धरना जारी रहेगा। धरने में भंवर लाल हटीला, जितेन्द्र, मनोज, मैक्स नायक, दिनेश, सुखदेव एवं विनोद सिसोदिया सहित कई लोग शामिल थे।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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