दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 04.12.15

 

राज्यपाल के जाते ही दलित छात्रों को एक साथ खाने से रोका, समुदायों में विवाद दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HIM-SHI-OMC-himachal-5185439-NOR.html

मतदाता भोज” में न शामिल होने पर धमकी मिली ख़ास खबर

http://www.khaskhabar.com/picture-news/news-not-included-in-voters-banquet-threatened-on-1-27455.html

SSP ऑफिस पर महिला ने किया आत्मदाह का प्रयास, बेटी की गुमशुदगी से है परेशान दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/UP-MEER-woman-tried-to-attempt-suicide-at-ssp-office-in-uttar-pradesh-5185340-PHO.html

मंदिर परिसर में दलित परिवार से मारपीट के आरोपी गिरफ्तार अमर उजाला

http://dehradun.amarujala.com/feature/crime-bureau-dun/violence-with-dalit-family-accused-arrested-hindi-news/

अत्याचार रोकने को लेकर एकजुट होकर संघर्ष करने का निर्णय दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-taranagar-news-085210-3142203-NOR.html

आदिवासियों का अपना कानून : मारा है या मरा है, लेकिन मौताणा तो मार ही देगा दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-UDA-OMC-MAT-latest-udaipur-news-090823-3143081-NOR.html

आदिवासी क्रातिकारी टंटया मामा की पाताल पानी स्थित समाधि पर आज मेला पल पल इंडिया

http://www.palpalindia.com/2015/12/04/%E0

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दैनिक भास्कर

राज्यपाल के जाते ही दलित छात्रों को एक साथ खाने से रोका, समुदायों में विवाद

http://www.bhaskar.com/news/HIM-SHI-OMC-himachal-5185439-NOR.html

 कोटला। कोटला गांव में दलित वर्ग के छात्र सवर्ण जातियों के बच्चों के साथ खाना खाने का मामले में विवाद पैदा हो गया। सवर्ण लोगों ने दलित वर्ग से संबंध रखने वाले छात्रों को एक-एक करके बाहर कर दिया। बस इतनी ही देर हुई कि गांव के दोनों वर्ग के लोगाें में संघर्ष शुरू हो गया। 

नौबत गाली गलौच और हाथपाई तक आ गई।

हालांकि मौके पर पुलिस जवान और प्रशासनिक अधिकारी भी थे, लेकिन सब देखते ही रह गए। कोटला के धनी राम, नोक सिंह, रामधन का कहना है कि गांव के कुछ स्वर्ण जातियों के लोगों ने हमारे बच्चों को जलील किया है एक तरफ तो राज्यपाल ने सामूहिक भोज करने को कहा था जिस कारण हमारे बच्चे भी स्वर्ण जाति के बच्चों के साथ सामूहिक भोज करने के लिए बैठे थे, लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें वहां खाना खाने से रोक दिया और वहां से बाहर निकाल दिया। उसके बाद हमारे बच्चों को दूसरी पांत में बैठा दिया। इस संघर्ष से ठीक पहले राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गांव के एक-एक लोगों से बातचीत की और जातपात के भेदभाव को मिटाने की बात समझाई और गांववासी भी उस समय राज्यपाल की बात को मान गए, लेकिन राज्यपाल की गांव से रवानगी होते ही गांव में एकसाथ खाना खाने को लेकर विवाद पनप गया। राज्यपाल ने ग्रामीणों से सामूहिक भोजन करने का आह्वान किया था, लेकिन जब राज्यपाल भोजन करने बैठे तो उनके साथ सिर्फ दलित लोगों को ही बैठा दिया गया और स्वर्ण जाति से सिर्फ एक ही व्यक्ति खाना खाने बैठा। जिस समय यह हंगामा हुआ उस समय पुलिस कर्मी भी खाने खाने बैठे हुए थे और जैसे ही दलितों के बच्चों को वहां से हटाया गया तो पुलिस कर्मियों के साथ बाहर से आए हुए लोग भी हक्के बक्के रहे गए। अपने बच्चों को खाना खाने के स्थल से हटाते देख दलित वर्ग के लोग भड़क उठे और हंगामा मच गया। एसडीएम बंजार अश्वनी कुमार का कहना है कि हमारे ध्यान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है।

 अलग-अलग पंक्तियों में बैठकर खाना खाया

मामला ठंडा होने के बाद फिर अलग अलग पंक्तियां बना दी और स्वर्ण जातियों और दलितों ने अलग-अलग पंक्तियों में बैठकर खाना खाया। दोनों जातियों के लोगों के बीच एक दीवार का फासला था। उधर एसपी कुल्लू पदम चंद का कहना है कि हमारे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। पदम चंद का कहना है कि हालांकि मैं भी राज्यपाल के साथ कोटला गांव गया हुआ था, लेकिन हम राज्यपाल के साथ ही गांव से वापस लौट गए थे। उसके बाद गांव में इस तरह की कोई घटना हुई इसकी जानकारी मुझ तक नहीं पहुंच पाई है। उधर, डीसी कुल्लू राकेश कंवर ने बताया कि मेरे ध्यान में इस तरह का कोई मामला नहीं आया है और न ही किसी ने इस तरह के हंगामे की प्रशासन को सूचना दी है।

ख़ास खबर

मतदाता भोज” में न शामिल होने पर धमकी मिली

http://www.khaskhabar.com/picture-news/news-not-included-in-voters-banquet-threatened-on-1-27455.html

बांदा। उत्तर प्रदेश में बांदा जिले की बिसंडा विकासखंड के तहत गांव पंचायत तेन्दुरा में “मतदाता भोज” में शामिल न होने पर निवर्तमान ग्राम प्रधान पर दलित मतदाताओं ने कथित तौर पर धमकाने का आरोप लगाया है। दलितों ने सामूहिक तौर पर जिलाधिकारी से यहां मतदात के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। जिला निर्वाचन विभाग के अनुसार, बिसंडा विकास खंड की तेन्दुरा गांव पंचायत में प्रधान पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है और 26 महिलाएं चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रही हैं, यहां तीसरे चरण में पंच दिसंबर को मतदान होना तय है। 

प्रधान का महत्वपूर्ण पद हासिल करने के लिए उम्मीदवारों के सिपहसलार हर तरह हथकं़डा अपना रहे हैं। गांव के दलित मतदाता राजेंद्र, मुन्नीलाल व छुनुक्का ने आरोप लगाया कि “निवर्तमान ग्राम प्रधान द्वारा अपनी पत्नी के पक्ष में आयोजित “मतदाता भोज” में शामिल न होने पर उन्हें धमकाया गया है। इनका आरोप है कि उनकी बस्ती की बगल से निवर्तमान ग्राम प्रधान के खेत हैं। पक्ष में मतदान न करने पर रास्ता तक बंद करने की धमकी दी गई है।

निवर्तमान ग्राम प्रधान धीरेंद्र सिंह ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि “आरोप लगाने वाले तीनों दलित मतदाता पिछले एक हफ्ते से उनके पक्ष में प्रचार करते आए हैं। कल चुनाव प्रचार के बाद कुछ कार्यकर्ताओं को भोजन कराया जा रहा था, उनकी नाजायज मांग न पूरी करने पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। 

हालांकि इलाकाई पुलिस का कहना है कि दलित मतदाताओं को धमकाने की शिकायत मिली है, मामले की जांच कराई जा रही है, साथ ही अति संवेदशील बूथ में आने वाले इस गांव में पुलिस गस्त तेज कर दी गई है। उधर, दलितों ने जिलाधिकारी से मतदान के समय पर्याप्त पुलिस बल भेज कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

दैनिक भास्कर

SSP ऑफिस पर महिला ने किया आत्मदाह का प्रयास, बेटी की गुमशुदगी से है परेशान

http://www.bhaskar.com/news/UP-MEER-woman-tried-to-attempt-suicide-at-ssp-office-in-uttar-pradesh-5185340-PHO.html

 मुजफ्फरनगर. एसएसपी ऑफिस पर गुरुवार को एक महिला ने आत्‍मदाह का प्रयास किया। इससे मौके पर हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि महिला ने अपनी नाबालिग बेटी की बरामदगी न होने पर ये कदम उठाया। मौके पर मौजूद पुलिस ने पीड़ित महिला से कैरोसिन तेल की कैन छीन ली। वहीं, पीड़ित महिला का कहना है कि चार महीने पहले उसकी बेटी को गांव का ही एक युवक बहला-फुसलाकर ले गया था। कई बार पुलिस से शिकायत करने पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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 बहला-फुसलाकर नाबालिग को ले गया आरोपी

सिविल लाइन थानाक्षेत्र के मोहल्ला सरवट निवासी पीड़ित महिला ईश्वरजहां ने बताया कि गांव का ही एक युवक विकास चार महीने पहले उसकी 16 वर्षीय बेटी को बहका-फुसलाकर कहीं ले गया था। इसके बाद आरोपी विकास के खिलाफ तहरीर दी गई, लेकिन मामले में अब तक‍ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्‍होंने आगे बताया कि हम दिन-रात पुलिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हमारी लड़की नहीं मिल रही है।

 दो समुदायों का मामला

कहा जा रहा है कि मामला दो समुदायों का होने के कारण पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हालांकि, मुस्लिम लड़की और दलित युवक होने की वजह से इलाके में तनाव बढ़ सकता है। वहीं, लड़की के मामा ने पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर उनकी भांजी बरामद नहीं हुई तो हम गांव के मस्जिद से भी इसका एलान करा देंगे। हमने ही गांववालों को रोका हुआ है। दूसरी ओर, पुलिस अफसरों का कहना है कि लड़की की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। आरोपी विकास और उसके परिजनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अमर उजाला

मंदिर परिसर में दलित परिवार से मारपीट के आरोपी गिरफ्तार

http://dehradun.amarujala.com/feature/crime-bureau-dun/violence-with-dalit-family-accused-arrested-hindi-news/

देहरादून जिले के चकराता विकासखंड के गबेला स्थित कुकुर्शी महाराज मंदिर में प्रवेश करने पर दलित परिवार से मारपीट और जुर्माना वसूलने के आरोपियों को किरकिरी के बाद राजस्व पुलिस ने आखिरकार 15 दिन बाद गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को सुनौड़ा गांव स्थित बोगीछानी से बृहस्पतिवार की सुबह गिरफ्तार किया गया।

राजस्व पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद राजस्व पुलिस ने राहत की सांस ली है।

गौरतलब है कि गत 18 नवंबर को कुकुर्शी मंदिर में दर्शन करने के कारण कुछ लोगों ने दलित टीकम सिंह उसकी पत्नी कविता और ससुर दौलतू के साथ मारपीट की थी। मंदिर में प्रवेश करने पर परिवार से 501 रुपये अर्थदंड भी वसूला गया था। पीड़ित परिवार की तहरीर पर राजस्व पुलिस ने आरोपी टीकम निवासी सुनोड़ा, सेमिया और चैतराम निवासी गबेला के खिलाफ गाली-गलौच, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया था।

दैनिक भास्कर

अत्याचार रोकने को लेकर एकजुट होकर संघर्ष करने का निर्णय

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-taranagar-news-085210-3142203-NOR.html

दलितसमाज के लोगों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर एक बैठक कर समाज पर दिन प्रतिदिन हो रहे अत्याचारों को चिंतनीय बताते हुए इसको रोकने के लिए एकजुट होकर एक संगठन का गठन कर संघर्ष करने का निर्णय लिया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि इस बारे में आगे की रणनीति बनाने के लिए बैठक 13 दिसंबर को शिक्षक भवन में प्रस्तावित है। बैठक में चूरू जिला दलित संघर्ष समिति का गठन किया जाएगा। बैठक को तारानगर पंचायत समिति के प्रधान जयसिंह, पूर्व उप जिला प्रमुख सोहनलाल मेघवाल, पूर्व प्रधान लिखमाराम मेघवाल, जिला परिषद सदस्य मोहनलाल आर्य, पूर्व सरपंच जुगलाल, काशीराम आिद मौजूद थे। 

 दैनिक भास्कर

आदिवासियों का अपना कानून : मारा है या मरा है, लेकिन मौताणा तो मार ही देगा

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-UDA-OMC-MAT-latest-udaipur-news-090823-3143081-NOR.html

पर्यटकोंकी आंख की तारे उदयपुर शहर के इतर इसका आदिवासी इलाका भी है, जहां मौताणा के नाम से प्रचलित प्रथा ने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया। शुरुआत तो सामाजिक न्याय के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन अब ये हिंसक संघर्ष और कई परिवारों को तबाह कर देने वाली कुप्रथा का रूप ले चुकी है। दिलचस्प यह भी है कि किसी व्यक्ति की हत्या हुई है या अन्य कारण से मौत कई बार ये भी मायने नहीं रखता। मायने रखता है कि सामने वाले पक्ष ने कितनी ताकत से चढ़ोतरा किया है। चढ़ोतरा एक तरह से आक्रामक और हिंसक स्थिति होती है, जब दोषी मानकर एक परिवार को मौताणा चुकाने के लिए मजबूर किया जाता है। आदिवासियों की अपनी अदालत लगती है। पंचों ने चाहे बिना आधार ही दोषी मान लिया तो फिर सफाई का मौका नहीं रहता। फाकाकशी की नौबत झेल रही आदिवासी परिवारों को लाखों रुपए का मौताणा चुकाना पड़ता है। मौताणा नहीं चुकाओ तो जान के लाले पड़ जाते हैं और चुकाओ तो सारी जमीन जायदाद दांव पर लगानी पड़ जाती है। ऐसे में कई परिवार या तो डर कर पलायन कर जाते हैं या फिर बर्बाद हो जाते हैं। शराब की लत, अशिक्षा, गरीबी, भ्रष्टाचार, पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता, समाज के बिचौलियों के चलते यह कुप्रथा बढ़ती जा रही है।

मौताणा में ऐसा भी होता है 

शुरू में तय मौताणा राशि को पूरा समाज मिलकर अदा करता था, ऐसा होता तो दोषी माने परिवार को यूं बर्बाद होना पड़ता। छह महीने तक चली भास्कर पड़ताल में सामने आया कि कई परिवार मौताणा की रकम चुकाने के चक्कर में अपनी जमीन ,जेवर मवेशी आदि गंवा चुके हैं और अब वर्षों से मजदूरी कर मौताणा चुका रहे हैं। कई मामलों में समाज 20 से 50 प्रतिशत तक सहयोग भी देता है। किसी की मौत के बदले का हर्जाना मौताणा कहलाता है। मौताणा को सहमत होने पर होने वाला सामूहिक हमला चढ़ोतरा कहलाता है। अप्राकृतिक मौत या मारपीट पर वसूली को कुटाणा कहते हैं।

2004 में संसद में गूंजा था मौताणा

30जून 2004 को गउपीपला में दीपू पारगी की फांसी पर 16 घरों को जला कर लूट लिया था। पुलिस की गोली से एक की मौत पर भीड़ ने डीएसपी की जीप जलाकर एसएचओ को तीर मार दिया था। तीन लाख में समझौता हुआ और सरकार ने दो लाख रुपए दिए थे। तब यह मामला संसद में गूंजा था। 

कोटड़ा के चार थाना क्षेत्र में ही पांच वर्षों 2010 से 2015 के बीच 94 मामले सामने आए। तीन करोड़ रुपए का मौताणा तय हुआ। अन्य थानों को लें तो वर्ष 2013 , 2014 2015 के 40 मामलों में 70 लाख रुपए पर सहमति बनी। कई घरों को लूटा, तबाह किया गया। 

सवा साल लटका रहा शव 

गुजरातसीमा के आंजणी गांव में मौताणा राशि नहीं मिलने पर 35 वर्षीय अजमेरी का शव सवा साल तक आंगनबाड़ी केंद्र में लटका रहा। अजमेरी अपनी बहन से मिलने आया था। 

20साल बाद लौटे 30 परिवार 

झल्लाराथाना क्षेत्र के नाली गांव में 1995 में हत्या के मामले में मौताणा ना चुकाने पर 30 परिवारों को गांव छोड़ना पड़ा था। बीस साल बाद 3 अप्रैल को ये सभी घर लौट सके। 

सांपडसे या कुत्ता काटे 

कउचागांव में महिला को सांप ने डसा लिया। पीहर वालों ने कहा कि सांप ससुराल का ही था। ऐसे ही महादेव नेत्रावला गांव में कुत्ते के काटने पर मालिकों से मौताणा लिया। 

बिजलीगिरी तो भी 

गल्दरमें बाइक से हादसा हुआ तो उसे बिठाने वाले को 80 हजार देने पड़े। खाखड़ में की कउडी की बिजली गिरने से मौत पर पीहर ने मौताणा लिया। कुएं में शव मिला तो मालिक ने मौताणा मांगा। 

भाईसे भी मौताणा की िजद 

नवंबर2005 में ढेडमारिया के भैरूलाल डामोर की बीमारी से मौत हुई। चचेरे भाई से मौताणा लेने के लिए शव 35 दिनों घर में ही रखे रखा। मौताणा लेकर ही माने परिजन। 

बंजर हो गई जमीन 

मांडवाके भाटा का पानी में 50 परिवार 14 साल से भटक रहे। कोर्ट ने भी आजीवन कारावास सुनाया फिर भी दूसरा पक्ष मौताणा राशि की मांग पर अड़ा है। सौ से भी अधिक बीघा जमीन बंजर हो गई है। इन परिवारों के सैकड़ों लोगों को यकीं नहीं कि अपने घर कब लौट पाएंगे। 

मारा किसी और ने भुगता इन्होंने 

कोटड़ामें 14 साल पहले हामीरा के घर के बाहर कोई शव फेंक गया। हामीरा के परिवार पर हत्या का आरोप लगा। परिवार को घर छोड़ कर भागना पड़ा। उपजाऊ खेत छोड़कर दूसरों के रहमो करम पर जिंदगी बसर करनी पड़ रही है। हामीरा की तो मौत हो गई तीन बेटे भटक रहे हैं। 

पैसे कम पड़े ताे भागना पड़ा 

जोगीवड़में अप्रैल 2014 परथा 50 देवा गरासिया की हत्या के बाद दूसरे पक्ष को झाल (अंतिम संस्कार की राशि) 90 हजार भरनी थी। इसके लिए 5 बीघा 6 बीघा जमीन गिरवी रखी। बाकी राशि ना देने पर करीब 30 परिवारों को पलायन करना पड़ा है। जेवर मवेशी भी बिक गए। 
जमीन गिरवी रखी, मवेशी बेचे 

2010में सुबरी के दिनेश पुत्र नानीया बोदरिया की हत्या पर सात लाख मौताणा चुकाने के लिए एक पक्ष के झालीया ने 70, परथा ने 40, लक्षण ने 20 झालीया ने 45 हजार रुपए में जमीन गिरवी रखी। पचास मवेशी बेचे। पुलिस जेल भेज चुकी है फिर भी घर छोड़कर भागना पड़ा। 

पुलिस-प्रशासन या तो दूर से नजर रखता है या फिर मध्यस्थ बन जाता है। कुछ डीएसपी और थाना प्रभारियों ने बदलाव की कोशिश जरूर की। 

(ये झाड़ोल, खेरवाड़ा, कानोड़, फलासिया, गोगुंदा, टीडी के मामले हैं।) 

2013 13 13 लाख 55 हजार 

2014 24 39 लाख 23 हजार 

2015 4 4 लाख 35 हजार 

वर्ष मामले मौताणा राशि 

2015 (सितंबर तक) : 6 : 36 लाख 

कुल 94 केस में 3 करोड़ 95 हजार रुपए 

वर्ष मामले मौताणा राशि 

201026 46 लाख 70 हजार 

2011 15 43 लाख 90 हजार 

2012 16 47 लाख 

2013 16 42 लाख 35 हजार 

2014 15 85 लाख

पल पल इंडिया

आदिवासी क्रातिकारी टंटया मामा की पाताल पानी स्थित समाधि पर आज मेला

http://www.palpalindia.com/2015/12/04/%E0

क्रांतिकारी आदिवासी समाज के अराध्य टंटया मामा की जयंती शुक्रवार को श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाई जाएगी। इस मौके पर जिला पंचायत के निर्देशन में मामा की समाधि पर कार्यक्रम के साथ ही मेला भी लगाया जाएगा। जिसमें टंटया मामा से जुड़ी स्मृतियों और उनके बलिदान को भी बताया जाएगा।

आदिवासी क्रातिकारी टंटया  मामा की पाताल पानी स्थित समाधि पर आज मेला लगाया जाएगा। इस मौके पर आस – पास के आदिवासी अंचल से भी बंधु मामा की समाधि पर शीश नवाजने आएंगे। प्रदेश सरकार द्वारा इस मेले औरटंटया मामा की जयंती के लिए तीन लाख रूपए का बजट जारी किया गया है। जिससे लोगों को मामा के जीवन और संघर्ष गाथा के साथ ही अंग्रेजों से लड़ी लड़ाई और देशभक्ति की लौ देखने और समझने का मौका मिले। 

 इस पर भी राजनीति

आदिवासी नायक टंटया मामा की जयंती और समारोह में भी स्थानीय भाजपा की राजनीति और गुटबाजी को लेकर चर्चाएं है। कार्यक्रम के लिए प्रदेश के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा तीन लाख रूपए जारी किए गए। जिससे सारी व्यवस्थाएं होना हैं, लेकिन आदिवासियों और जयंती के बजाए इस राशि को अपने राजनीतिक प्रचार के लिए खर्च करने की सुगबुगाहट है। इस कारण भाजपा का एक गुट भी अंदर ही अंदर नाराज है। बताया जाता है शहर और अंचल में लगाए गए बैनर पोस्टरों को लेकर भी खासी हचलचल है। 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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