दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 23.11.15

दलित के मुंह में ठूंसा गोबर – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/hisar/hisar-crime-news/dalit-forcely-fed-dung-hindi-news/

बच्ची के साथ 48 घंटे तक करता रहा हैवानियत, अब पीड़िता को समाज करना चाहता है निष्कासित – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/c-181-1764844-ra0203-NOR.html

मंदिर में नहीं जा सकते दलित, पर चढ़ावे से कोई परहेज नहीं – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/indore-dalit-578734

दलित महिला से दुष्कर्म – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-datia-news-024506-3072465-NOR.html

सरूंड में पुलिस सुरक्षा में दलित दूल्हों की निकासी – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-kotputali-news-034643-3069883-NOR.html

हत्या आरोपी बॉबी नहीं आया पुलिस के हाथ – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-gohana-news-022003-3070506-NOR.html

अंबेडकर पार्क में दलित समाज ने सलकारी बाई को किया याद – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-PAW-MAT-latest-palwal-news-020503-3070665-NOR.html

आचरण की कसौटी पर शिक्षक ­­- जनसत्ता

http://www.jansatta.com/politics/education-physical-education-bangluru-news-rape-by-teacher-rape-by-teacher-delhi-news/50640/

Please Watch :

No One Killed The Dalits – Meena Kandasamy |

7th Anuradha Ghandy Memorial Lecture

https://www.youtube.com/watch?v=_jClj177b7k

 An Urgent Appeal:

 Please register your contribution to PMARC for strengthening Democracy, Peace & Social Justice! 

Only our collective effort can make it possible to carry forward our interventions. It is a challenge before each one of us as equal stakeholder of PMARC.

अमर उजाला

दलित के मुंह में ठूंसा गोबर

http://www.amarujala.com/news/city/hisar/hisar-crime-news/dalit-forcely-fed-dung-hindi-news/

हिसार जिले के हांसी क्षेत्र के गांव मुजादपुर में शनिवार रात एक पक्ष के लोगों ने झगड़े के बाद दलित पक्ष के घर में घुसकर एक व्यक्ति में मुंह में जबरदस्ती गोबर ठूंस दिया और दादा-पोती को पीटकर घायल कर दिया !

इस घटना के बाद एक पक्ष ने दलितों के बिटौड़े (उपलों का ढेर) को आग लगा दी। मारपीट में दोनों ही पक्षों के लोगों को चोटें आई है और वे सिविल अस्पताल उपचाराधीन हैं।

acr300-5652205ea386122hsrp15_4470981_c1_CMY_l

रात करीब 1 बजे दलित परिवार की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दूसरे पक्ष के एक युवक को हिरासत में लिया।

जानकारी के अनुसार मुजादपुर निवासी अशोक ने बताया कि गांव के ही एक पक्ष के लोग उनके बिटोड़े हटवाना चाहते हैं। इस मामले में उनकी कृष्णा व उसके बेटे मनोज के साथ कहासुनी हुई थी।

उसका आरोप है कि शनिवार शाम उसके पिता रामधारी घर में ही थे। इसी दौरान मनोज अपने कुछ परिवार के लोगों के साथ आया और डंडों से हमला कर दिया।

इसी दौरान उसने गोबर उठाकर रामधारी के मुंह में ठूंस दिया। बीच-बचाव कर रही अशोक की बेटी ऊषा को भी चोटें आईं हैं।

परिजन रामधारी व ऊषा को मंगाली स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उन्हें हिसार के सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

उधर मनोज ने आरोप लगाया कि रामधारी और अशोक ने उसकी मां कृष्णा को ईंटों से मारकर घायल कर दिया। उन्हें मंगाली अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां से रेफर कर दिया।

कृष्णा का आरोप है कि शनिवार को जब वह गोबर डालने गई तो रामधारी व उसके परिवार के लोगों ने उस पर ईंटों से हमला कर दिया।

उधर अशोक का आरोप है कि घायल रामधारी को दूसरे पक्ष के एक युवक ने अस्पताल में ही आकर धमकाया। उसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया।

इस घटना की जानकारी मिलते ही रविवार को दलित संगठनों के लोग रामधारी से मिलने अस्पताल पहुंचे और पुलिस प्रशासन से दलितों को सुरक्षा देने के साथ ही आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की। 

पुलिस ने दोनों के खिलाफ किया केस दर्ज

हांसी पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस केस दर्ज कर लिया है। रामधारी पक्ष की शिकायत पर मनोज व उसके साथियों पर मारपीट करने सहित एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

तथा दूसरी तरफ कृष्णा की शिकायत पर रामधारी पक्ष पर मारपीट का केस दर्ज किया गया है।

मामले की जांच डीएसपी कर रहे हैं। एक दूसरे के साथ मारपीट हुई है अभी तक ऐसी कोई जातीय विवाद की बात सामने नहीं आई है। पुलिस ने दोनों की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है !

सतेंद्र कुमार गुप्ता, एसपी हिसार।

 दैनिक भास्कर

बच्ची के साथ 48 घंटे तक करता रहा हैवानियत, अब पीड़िता को समाज करना चाहता है निष्कासित

http://www.bhaskar.com/news/c-181-1764844-ra0203-NOR.html

 रांची/धनबाद। झारखंड के धनबाद जिला स्थित पुटकी में एक दबंग के डर से पूरा इलाका कांप रहा है। रेप पीड़िता मारे दर्द और अस्मत लुट जाने के एहसास को कोख में दबाए रोती कलपती है पर वह कुछ बोलने से कतराती है। इसकी वजह है कि 13 साल की इस लड़की को दिन दहाड़े सरेआम दबंग उठा ले गए। धनबाद से बोकारो पहुंचाया। दबंग ने 48 घंटे तक उसे रौंदा। अब….सिर्फ सिसकियां हैं। वह किसी से कुछ बोल नहीं सकती।

दबंग के खिलाफ इस मासूम की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। विडंबना यह कि उसके समाज के लोग उसे जाति से निष्कासित करने की बात कह रहे हैं। समाज के लोगों का कहना है कि उनके यहां ऐसा ही रिवाज है। जबकि, ऐसे मौके पर समाज के लोगों को दबंगों का विरोध करना चाहिए।

 नाव से ले गए बोकारो जिला

गुरुवार शाम करीब 4.30 बजे घर के पीछे झाड़ियों में शौच के लिए गई तो वहीं पास के एक बंद निजी स्कूल के पास एक सफेद रंग की मारुति वैन खड़ी थी। उसके पास खड़े मुहल्ले के ही एक युवक ने उसे इशारे से अपने पास बुलाया। वह जब वहां गई तो उसने कहा कि चलो गाड़ी से घूमकर आते हैं। जब उसने इंकार किया तो वैन से तीन और लोग उतरे और जबरन गाड़ी में बिठा लिया। गाड़ी के शीशे बंद थे। उसने काफी शोर मचाया लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इस दौरान एक युवक ने गला दबा कर जान मारने की धमकी देते हुए चुप रहने को कहा। लगभग आधे घंटे के बाद जंगल में गाड़ी रोक कर लड़की को उतरने को कहा।

 20 रुपए देकर कहा-घर चले जाओ

गाड़ी से उतरी तो उसने कहा कि नाव पर बैठकर नदी पार करना है। अगर नाव में किसी को कुछ इशारा भी करोगी तो हमलोग तुम्हें मारकर नदी में डाल देंगे। जंगल पार करने के बाद नदी मिली जो शायद मुनीडीह के पास से गुजरने वाली दामोदर नदी थी। नाव से नदी पार करने के बाद दूसरी ओर करीब आधा घंटा पैदल चलना पड़ा। वह दबंग के दोस्त राजेश का घर था। वहां राजेश के साथ उसकी पत्नी भी थी। राजेश ने अपनी पत्नी के सामने उसे दबंग की बहन बताया, जबकि दोस्त सच्चाई जानता था। वहां गुरुवार और शुक्रवार की रात दबंग ने उसके साथ दुष्कर्म किया। शनिवार की सुबह राजेश की पत्नी के पास एक फोन कॉल आने पर दबंग ने सुबह 8 बजे भाड़े की गाड़ी में बिठाकर केंदुआ में छोड़ दिया। 20 रुपए देकर कहा कि घर चले जाओ, मैं पांच दिन के बाद आकर तुम्हें मुम्बई ले चलूंगा। वहां हमलोग आराम से रहेंगे। वहां से ऑटो पर बैठकर अपने घर लौटी और अपने परिजनों को सारी बात बताई।

 खौफ ऐसा कि कहीं जुबान नहीं खोल सकती है

दबंग का दहशत : कोई दबंग से पंगा नहीं लेना चाहता। कहते हैं कि वे बहुत बुरे लोग हैं। इसके बाद भी कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बात दैनिक भास्कर तक पहुंचाई। सच्चाई का पता लगाने भास्कर की टीम पुटकी थाना क्षेत्र में पड़नेवाले लोयाबाद कोक प्लांट के समीप पहुंची। जहां दलित परिवार से आने वाली पीड़िता कच्चे घर के एक सीलन भरे कमरे में सिसकती मिली। हालांकि, वहां तक पहुंचने के लिए भी कई माध्यमों का इस्तेमाल करना पड़ा। कई तरह के बहाने करने पड़े। पीड़िता दबंगों के डर से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थी। आखिर उसके परिजनों ने लड़ाई लड़ने की बात कही तो उसने सारी बातें बताई।

 कौन है दबंग?

पीड़िता के मुताबिक पुटकी निवासी कारा नामक युवक ही दबंग है। वह खुद को ट्रक ड्राइवर बताता है। नवादा जिले का रहनेवाला बताया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार आरोपी युवक आपराधिक चरित्र का है। इलाके में उसका दबदबा है। वह पहले भी तीन-चार लड़कियों के साथ इसी तरह जबरन दुष्कर्म को अंजाम दे चुका है।

 नई दुनिया

मंदिर में नहीं जा सकते दलित, पर चढ़ावे से कोई परहेज नहीं

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/indore-dalit-578734

21वीं सदी के इंदौर के पास एक गांव में सवर्णों और दलितों की शव यात्राओं के लिए अलग-अलग रास्ते। इंदौर के देपालपुर के दौलताबाद गांव का एक राम मंदिर भी इसी तरह के भेदभाव से ग्रस्त है। दलित लोग मंदिर में नहीं आ सकते…। यह बात तो पुरानी हो चली है। इतने समय में समाज काफी बदला, लेकिन लोगों की मानसिकता नहीं। राम मंदिर में दलितों के जाने पर तो रोक है, लेकिन उनकी दक्षिणा से परहेज नहीं है। नईदुनिया ने गांव पहुंचकर उस मंदिर में पूजा व्यवस्था देखी। पेश है रपट

यह देपालपुर विधानसभा के दौलताबाद गांव का राम मंदिर है। इस मंदिर के साइड में लकड़ी का एक गेट लगा हुआ है, जहां से सिर्फ सवर्णों को जाने की इजाजत है। दलित सिर्फ दूर से भगवान के दर्शन कर सकता है। यदि वह दान-दक्षिणा चढ़ाना चाहता है तो सामने लगी जाली से चढ़ा सकता है। कुछ साल पहले ही गांव के अंबाराम के यहां ब्याह हुआ। बहू-बेटे ने मंदिर में मत्था टेकना चाहा, लेकिन उसे पीट दिया गया। तब से दलितों के लिए यह मंदिर बंद हो गया।

बेटमा से देपालपुर की तरफ जाने वाले 7 किलोमीटर दूरी पर बसा यह गांव राजपूत और धाकड़ बहुल है। यहां दलितों के दो अलग-अलग मोहल्ले हैं। दोनों में कोई विकास नहीं है। प्रशासन आज तक इनके घरों में शौचालय तक का निर्माण नहीं करा पाया। सवर्ण बहुल गांव होने से दलितों की रोजी-रोटी भी इन्हीं के काम धंधों पर टिकी है। इसलिए भी कोई इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाता। हालांकि अब कुछ ग्रामीण सुरेश, भगवान, मांगीलाल और अन्य आगे आना चाहते हैं और आवाज भी उठाने लगे हैं।

 राम आखिर सवर्णों के ही क्यों ?

हमारे इलाकों में दलितों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। हमें राम मंदिर में जाने ही नहीं दिया जाता, जबकि सवर्णों के लिए यहां जाने के लिए खुली छूट है। राम सिर्फ सवर्णों के लिए ही बने हैं क्या? मैंने कई बार कई जगह शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। विधायक भी इस ओर पहल नहीं करते। दौलताबाद और सेजवानी दोनों गावों में ऐसे हालात हैं। –पोप सिंह मालवीय, जनपद सदस्य और प्रदेश सचिव, श्री बलाई समाज संगठन के प्रदेश सचिव

 आखिर कब तक सहेंगे हम

हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है। हम कब तक ऐसा सहेंगे। आखिर हम भी इंसान है। – हीरा सिंह चौहान पूर्व पार्षद

 पहले तो और भी कड़े नियम थे

दलितों के खिलाफ ये कुरीतियां सदियों से चली आ रही हैं। अभी भी गांव वाले इसे बंद नहीं करते। पूरा गांव ऐसा भेदभाव करता है। मैं, क्या कहूं। पहले तो और भी कड़े नियम थे। अब तो हमने कई प्रथाएं बंद कर दी हैं। वैसे मंदिर में दलितों का जाना गांव वालों ने बंद कर रखा है। उनकी मर्जी से ही यह खुल पाएगा। मैं अकेला भी कुछ नहीं कर सकता। दिनेश धाकड़, पूर्व सरपंच और धाकड़ समाज युुवा नेता

 मंदिर छोटा है, इसलिए दलित नहीं जा पाते

(पंडित राजेंद्र शर्मा से सीधी बात)

सवालः- आपके मंदिर में दलितों को दर्शन क्यों नहीं देते?

पंडितः- मंदिर छोटा है, इसलिए वे अंदर नहीं आ पाते।

सवालः- गांव के लोगों का कहना है कि यह कुरीति है और आप इससे आगे क्यों नहीं आते?

पंडितः- मैं, किसी से भेदभाव नहीं करता, जो गांव के लोग हैं, वे इसे जानें। आज नहीं तो कल इस कुरीति को खत्म होना चाहिए, लेकिन लोगों को आगे आना चाहिए।

सवाल :- आप मंदिर में गेट क्यों बंद रखते हैं, दलित दर्शन नहीं कर सकते क्या?

पंडितः- बेशक करें, मैं अभी बड़ा मंदिर बनवाऊंगा, तब सबको दर्शन का मौका मिला करेगा। वैसे गांव के दूसरे सभी मंदिरों में दलितों का आना-जाना है।

 जांच के लिए टीम भेजूंगा

ऐसे भेदभाव करने वालों को हम नहीं बख्शेंगे। ऐसे लोगों के खिलाफ हम त्वरित कार्रवाई करेंगे। मैं कल ही जांच के लिए एक टीम भेजूंगा। – आशीष सिंह, सीईओ, जिला पंचायत

ऐसी कुरीतियां शर्मसार करने वाली हैं। मैं दौलताबाद का निरीक्षण करवाऊंगा और कड़ी कार्रवाई भी करवाऊंगा। एसी ऊंच-नीच इस जमाने में नहीं होना चाहिए। – डी. कल्याण चक्रवर्ती, एसपी पश्चिम-देहात

 दैनिक भास्कर

दलित महिला से दुष्कर्म

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-datia-news-024506-3072465-NOR.html

दतिया |बड़ौनी थाना क्षेत्र के ग्राम नीवरी में माता मंदिर के पास से निकली नहर के पास शौच के लिए गई एक महिला के साथ युवक ने दुष्कर्म कर दिया। महिला के रिपोर्ट करने जाने पर आरोपी ने रास्ता रोककर जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश प्रारंभ कर दी है। बड़ौनी थाना प्रभारी जीएस गुर्जर ने बताया कि शनिवार दोपहर तीन बजे ग्राम नीवरी निवासी 42 वर्षीय दलित महिला नीवरी माता मंदिर के पास नहर में नहाने गई थी। इसी दौरान महिला शौच के लिए झाड़ियाें में चली गई तभी बबलू मुसलमान निवासी रेलवे फाटक दतिया ने महिला को पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हरिजन एक्ट व दुष्कर्म का मामला दर्ज कर लिया है। 

 दैनिक भास्कर

सरूंड में पुलिस सुरक्षा में दलित दूल्हों की निकासी

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-kotputali-news-034643-3069883-NOR.html

ग्रामसरूंड में दलित दूल्हों के घोड़ी पर बैठने के दौरान संभावित अप्रत्याशित घटनाओं को दरकिनार करते हुए ग्रामीणों ने रविवार को एक नई मिसाल पेश की। जिनसे दलित समाज को डर था, उन्होंने ही निकासी समाराेह के दौरान शिरकत करते हुए बड़े उत्साह के साथ शादी की रस्म अदा कराई।

शनिवार को डॉ.अंबेडकर विचार मंच समिति के पदाधिकारियों ने ग्राम सरूंड में दलित दूल्हों को घोड़ी पर नहीं बैठने देने की पुलिस एवं प्रशासन को शिकायत की थी। जैसे ही पुलिस प्रशासन को शिकायत मिली कि प्रशासनिक अमला अलर्ट हो गया। प्रशासनिक अमले ने गांव का दौरा करते हुए ग्रामीणों के साथ बैठक कर सामाजिक समरसता का माहौल बनाने की कोशिश की। उनकी पहल रंग लाई और रविवार को शादी की रस्म शांतिपूर्ण ढंग के साथ निपट गई। दलित दूल्हे विनेश सतीश पुत्रान किशोरीलाल मांडैया की निकासी बड़े ही धूमधाम सामाजिक सौहार्द के बीच निकाली गई। दूसरी ओर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने भी शादी की रस्म के दौरान सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए पूरे दिन गांव सरूंड में ही भारी पुलिस जाब्ते के साथ मॅानीटरिंग करते नजर आए। अंबेडकर विचार मंच समिति के अध्यक्ष छीतरमल वर्मा, दूलीचंद आर्य, ख्यालीराम बुनकर, प्रहलाद चंद आर्य, भगवान सहाय धानका, इंद्राज वाल्मीकि, अमीचंद, बनवारी लाल धोबी सहित विभिन्न समाजों के लोग उपस्थित थे। दूसरी और पूरे समाराेह के दौरान सहायक पुलिस अधीक्षक आदर्श सिद्दू, तहसीलदार प्रभुदयाल शर्मा सहित भारी पुलिस जाब्ता मॉनिटरिंग करते नजर आया। 

श्यामपुरा में भी बरात के साथ चलते रहे जवान

चंदवाजी|श्यामपुरामें दलित परिवार की बरात में व्यवधान डालने की शिकायत पर प्रशासन पुलिस अलर्ट हो गई। पुलिस सुरक्षा के बीच दलित की बरात निकाली गई। श्यामपुरा निवासी मोहनलाल रैगर की पुत्री की शादी देवउठनी एकादशी पर होना तय हुआ था। इसको लेकर मोहनलाल रैगर ने पुलिस में शिकायत की कि उसकी बेटी की शादी की बरात में अन्य जातियों के लोग दुल्हे को घोड़ी पर नहीं बैठने देंगे। उसने आंशका जाहिर कि ये लोग उसकी लड़की की शादी में बाधा उत्पन्न कर सकते है। थाना प्रभारी सुरेंद्रसिंह ने शिकायत दर्ज कर मामले की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी। इसके बाद गांव में आमेर एसडीएम बीरबल सिंह, जमवारामगढ़ डीएसपी नरेंद्र मोहन शर्मा, थानाप्रभारी सुरेंद्र सिंह सहित पुलिस अमला तैनात हो गया। बाद में पुलिस की मौजूदगी में बरात निकाली गई। थानाप्रभारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि श्यामपुरा में दलित व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस मौके पर तैनात हो गई।

कोटपूतली. सरूंडमें पुलिस सुरक्षा में दलित दूल्हे की निकासी निकाली गई।

दैनिक भास्कर

हत्या आरोपी बॉबी नहीं आया पुलिस के हाथ

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-gohana-news-022003-3070506-NOR.html

शहरके ककरोई रोड पर बीच-बचाव कर रहे दलित युवक को चाकू घोंपकर हत्या करने के मामले में हत्या आरोपी बॉबी अभी पुलिस के हाथ नहीं सका है। हालांकि पुलिस लगातार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें बनाई गई हैं। इन टीमों सीआईए, एसआईटी, गोहाना रोड चौकी सिटी थाना शामिल है। पुलिस ने बॉबी का अपराधी रिकार्ड जांचा तो पता चला आरोपी एक बार सट्टेबाजी के आरोप में पकड़ा गया था।

यहथा मामला : सुशील32 पुत्र परमानंद शहर के गढ़ी घसीटा क्षेत्र के रहने वाला था। सुशील शुक्रवार शाम करीब पांच बजे घर से ट्रैक सूट बेटे के लिए दवा खरीदने बाजार गया था। इस दाैरान जब वह कपड़ों की दुकान पर ट्रैक सूट खरीद रहा था तो बॉबी नाम का शख्स नशे में धुत्त होकर वहां पहुंचा। बॉबी ने पास स्थित केमिस्ट को गाली देनी शुरू कर दी। केमिस्ट ने अपना बचाव किया और बॉबी से किनारा कर लिया। लेकिन बॉबी इसके बाद सतबीर के मकान के सामने पहुंचा। वहां उसने सतबीर की बहन चांदकौर से गाली गलौच शुरू कर दी।

सतबीर ने जब उसका विरोध किया तो उसने सतबीर को चाकू घोंप दिया। पिता सतबीर की आवाज सुनकर उसका पुत्र सोमबीर मौके पर पहुंचा था, उसे भी बॉबी ने चाकू घोंप दिया। इसके बाद जैसे ही सुशील बचाव के लिए आया। बॉबी ने उसे भी चाकू मार दिया था। सुशील की शनिवार को पीजीआई रोहतक में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। जिसके बाद परिजनों ने शव रोड पर रखकर मुआवजे नौकरी की मांग की थी। कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। 

दैनिक भास्कर

अंबेडकर पार्क में दलित समाज ने सलकारी बाई को किया याद

http://www.bhaskar.com/news/HAR-PAW-MAT-latest-palwal-news-020503-3070665-NOR.html

पलवल | हरियाणादलित साहित्य अकादमी की बैठक रविवार को अंबेडकर पार्क सल्लागढ़ में विनीत कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के बाद दलित समाज की गौरव शहीद वीरांगना सलकारी बाई की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर कोली समाज के प्रधान रंगलाल तंवर ने भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। अधिवक्ता सलाहकार बुधराम नेहरा ने सलकारी बाई के जीवन परिचय को कविता के माध्यम से लोगों के बीच प्रस्तुत किया। अकादमी के अध्यक्ष विनित कुमार ने सलकारी बाई कोली के जीवन परिचय गौरव पूर्ण इतिहास के बारे में लोगों को विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर रूपलाल मेहता, खेमचंद पंवार, विजयपाल, कल्याण, सतीश मंडोतिया, महेंद्र सिंह, कपिल, रवि कुमार, कंगना, मिलन सिंह, उपासना कर्मा आदि थे।

जनसत्ता

आचरण की कसौटी पर शिक्षक

http://www.jansatta.com/politics/education-physical-education-bangluru-news-rape-by-teacher-rape-by-teacher-delhi-news/50640/

बीते सोलह नवंबर को बंगलुरु के परपाना अग्रहारा थाना अंतर्गत स्थित एक निजी स्कूल की चार वर्षीय छात्रा के साथ शारीरिक शिक्षा के उसके शिक्षक के दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया। पुलिस ने मणिपुर के मूल निवासी उक्त आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले इकतीस अक्तूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की भलस्वा डेरी थाना पुलिस ने स्वरूप नगर एक्सटेंशन इलाके से एक ऐसे ट्यूटर को गिरफ्तार किया, जो सात-आठ वर्षीय दो बच्चियों को पिछले कई दिनों से अपनी हवस का शिकार बना रहा था। मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक बच्ची ने पेट दर्द की शिकायत करते हुए ट्यूशन जाने से इनकार कर दिया। बारह अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के इलुरु जिले के वेंकटपुरम गांव स्थित विद्यालय में एक पांच वर्षीय छात्रा को उसकी शिक्षिका ने गर्म तख्ती पर बैठा दिया, जिससे उसकी पीठ और शरीर का निचला हिस्सा जल गया।

उक्त मासूम का कसूर मात्र इतना था कि वह गंदे कपड़े पहन कर विद्यालय आ गई थी। पहली अक्तूबर को राजस्थान के जोधपुर में चौथी कक्षा के दलित जाति के एक छात्र को उसके शिक्षक ने इसलिए बुरी तरह पीटा, क्योंकि उसने स्कूल में मिड-डे मील के दौरान अन्य जातियों के छात्रों की थाली को हाथ लगा दिया था।

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर के श्री ओमर वैश्य विद्यापीठ मनबोधन प्रसाद पब्लिक स्कूल में श्रमदान के नाम पर छात्रों से विद्यालय के निर्माण-कार्य में बेगार कराई गई। आज से छह वर्ष पहले 15 नवंबर, 2009 को जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने एक शिक्षक को एक लाख रुपए मुआवजे की सजा सुनाई, जिसने फैसले से ठीक बारह वर्ष पहले अपने छात्र को पूरे दिन निर्वस्त्र खड़ा रखा था, तब एक उम्मीद बंधी थी कि सम्मानीय शिक्षक समाज के वे सदस्य, जो परिस्थितियोंवश अपने आचरण के विपरीत कदम उठा लेते हैं, कोई सबक लेंगे। उस समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रतिभा रानी ने अपने फैसले में उक्त शिक्षक को निर्देश दिया था कि वह बतौर मुआवजा एक लाख रुपए पीड़ित छात्र को अदा करे। 25 मई, 1997 को दिल्ली के एक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक ने उस तेरह वर्षीय छात्र को विद्यालय के तालाब में नहाते हुए पकड़ा। उन्होंने पहले उसे जमकर पीटा, फिर पूरे समय तक विद्यालय में निर्वस्त्र खड़ा रखा।

अभिभावकों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, मुकदमा चला और 19 मार्च, 2007 को निचली अदालत ने शिक्षक को एक वर्ष की कैद और ढाई हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। शिक्षक ने निचली अदालत के उसी फैसले को चुनौती दी थी। गुरु देवो भव: जैसी मान्यता वाले हमारे देश के शिक्षकों-शिक्षिकाओं को आखिर क्या होता जा रहा है कि वे आए दिन अपने कारनामों से अभिभावकों का विश्वास तार-तार कर रहे हैं। कहीं छात्र-छात्राओं की पिटाई हो रही है, तो कहीं यौन उत्पीड़न। बीते अगस्त माह में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस द्वारा चलाए गए आॅपरेशन सखी के तहत उत्तर-पूर्वी जिले के खजूरी थाना अंतर्गत एक सरकारी विद्यालय की छात्राओं की काउंसलिंग के दौरान शिकायत मिली कि गणित पढ़ाने वाला शिक्षक आते-जाते समय और कक्षा में उन्हें गलत तरीके से छूता है।

जांच में शिकायत सही मिली और उक्त शिक्षक को ‘पॉस्को’ के तहत गिरफ्तार किया गया। इससे पहले पांच अगस्त को दिल्ली पुलिस ने शालीमार बाग के बीटी ब्लॉक स्थित सरकारी विद्यालय के एक शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। उक्त शिक्षक ने अपने आठ वर्षीय छात्र को इसलिए उठा कर पटक दिया, क्योंकि उसने घर जाकर यह राज जाहिर कर दिया था कि उक्त शिक्षक उससे और दूसरे छात्रों से पैर दबवाता है, मालिश कराता है। कानपुर में नौबस्ता स्थित एक विद्यालय में पहली कक्षा की छह वर्षीय छात्रा अविका अपने सहपाठियों से बातचीत कर रही थी। यह देख कर उसकी शिक्षिका ने उसके गाल पर तड़ातड़ कई तमाचे जड़ दिए। कानपुर के ही साकेत नगर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटर कॉलेज में बारहवीं कक्षा के छात्र उत्कर्ष को उसके शिक्षक ने इसलिए बेरहमी से पीटा, क्योंकि गलती से उसका पैर पड़ जाने से सहपाठी का जूता निकल गया।

अप्रैल माह में अकोला (महाराष्ट्र) के जवाहर नवोदय विद्यालय में उनचास छात्राओं के यौन शोषण के आरोप में तीन शिक्षक गिरफ्तार हुए। आरोपी शिक्षक छात्राओं से अश्लील बातें करते और उन्हें जबरन आलिंगन में लेते थे। कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित एक सरकारी विद्यालय की सातवीं कक्षा की तेरह वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म करने वाले शिक्षक को पुलिस ने धर दबोचा। उक्त शिक्षक ने अपनी छात्रा के साथ कई बार दुष्कर्म किया, नतीजतन वह गर्भवती हो गई। सलेम (तमिलनाडु) में एक सहायक प्रोफेसर अपनी छात्रा को घर पर बुला कर उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ। उसने अध्ययन संबंधी दिक्कतें दूर करने के नाम पर उसकी अस्मत लूटी थी। मुजफ्फरनगर के थाना मंसूरपुर अंतर्गत ग्राम खुब्बापुर के प्राइमरी स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा के साथ एक शिक्षक ने छेड़छाड़ सहित अश्लील हरकतें कीं। छात्रा की मां ने जब स्कूल के दूसरे शिक्षकों को इस बारे में बताया, तो आरोपी शिक्षक ने अगले दिन छात्रा को जमकर पीटा। उक्त सभी घटनाएं देश भर के अभिभावकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं हैं, जो अपने बेटे-बेटियों का भविष्य उज्ज्वल बनाने की खातिर उन्हें स्कूल-कॉलेज भेजते हैं, उनके भविष्य और सुरक्षा के प्रति निश्चिंत रहते हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आए दिन ऐसी घटनाएं सुनने-पढ़ने को मिलती रहती हैं। इससे अभिभावकों के दिल हमेशा आशंकित रहते हैं कि कब कौन-सा शिक्षक या शिक्षिका उनके बच्चे के साथ बदसलूकी कर गुजरे। कई बार तो मामूली-सी गलती पर बच्चे को ऐसी सजा दे दी गई कि अभिभावक ने भयवश उसे स्कूल से निकाल लिया। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के एक कानवेंट स्कूल की शिक्षिका ने एलकेजी में पढ़ने वाले छात्र को मूत्र पीने के लिए मजबूर कर दिया। उसका कसूर यह था कि उसने अपनी प्लास्टिक की बोतल में पेशाब कर दिया था। पश्चिम बंगाल के उत्तर चौबीस परगना जिले के गोपाल नगर स्थित एक स्कूल की शिक्षिका ने कथित रूप से पैसे चोरी करने के आरोप में आठवीं कक्षा की छात्रा के कपड़े उतरवा कर सहपाठियों के सामने उसकी तलाशी ली। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के नौगांव स्थित एक विद्यालय की शिक्षिका ने दो चोटियां बांध कर न आने के अपराध में दसवीं कक्षा की तीन छात्राओं के बाल काट दिए।

मध्य मुंबई स्थित एक स्कूल की प्रिंसिपल एवं सहायक शिक्षिका ने तीन छात्रों को न केवल चेन से बांध कर उनकी परेड कराई, बल्कि उन्हें शौचालय साफ करने को मजबूर किया। सूरत (गुजरात) के अडाजण थाना अंतर्गत एलएनबी स्कूल की नौंवीं कक्षा के छात्र हर्ष ने फांसी लगा कर जान देने से पहले अपने सुसाइड नोट में लिखा, पापा, मेरी आखिरी इच्छा है कि आप पीटी वाले सर के गाल पर दस-बीस थप्पड़ मारना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के संतोषगढ़ स्थित एक निजी स्कूल में पाठ याद न करने की सजा के बतौर छात्रों की टाई और छात्राओं की चोटियों में जूते बांध दिए गए। कुछ दिन पहले की बात है, एक छात्र अपने शिक्षक द्वारा यह कहे जाने पर कि तुम चपरासी भी नहीं बन पाओगे, अपनी जान देने पर आमादा हो गया, बिना यह सोचे कि उसे आगे चल कर अपने माता-पिता, भाई-बहन का सहारा बनना है।

कोई शिष्या महज इसलिए फांसी का फंदा अपने गले में डाल कर आत्मा का परमात्मा से मिलन करा देती है, क्योंकि पूरी कक्षा के सामने हुआ अपमान उसे बर्दाश्त नहीं हो पाता। होमवर्क पूरा न होने, पास में मोबाइल मिलने अथवा अनजाने में विद्यालय का कोई नुकसान हो जाने पर जब पूरी कक्षा के सामने किसी छात्र-छात्रा को अपने शिक्षक यानी गुरु के हाथों सजा मिले, तो वह कैसे अपने लक्ष्य यानी चिड़िया की आंख भेदेगा अथवा भेदेगी? सवाल अटपटा है, लेकिन समय रहते इसका जवाब ढूंढ़ना बहुत जरूरी है। माना कि गली-मुहल्लों में स्थित कथित मांटेसरी-पब्लिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं अपनी अल्प आमदनी के चलते अक्सर अनेक दिक्कतों से दो-चार रहते हैं।

उन्हें अपनी काबिलियत का सही मूल्य न मिल पाने की कुंठा वक्त-बेवक्त सताती रहती है। लेकिन इसका मतलब यह तो कतई नहीं है कि नियोक्ता के प्रति उपजा गुस्सा किसी मासूम पर उतारा जाए। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को तो पर्याप्त वेतन और सुविधाएं हासिल हैं, बावजूद इसके वे संवेदनशून्य होते जा रहे हैं। असल चिंता यह है कि शिक्षकों में हिंसा कैसे और क्यों घुसपैठ करती जा रही है? कहीं उनके प्रशिक्षण में तो कोई कमी नहीं रह जाती अथवा बाल मनोविज्ञान न समझ पाने की खीझ उन्हें हिंसक और अमानवीय बनने को मजबूर कर रही है? वजह चाहे जो भी हो, हालात बहुत गंभीर हैं। बच्चों के मन में स्कूल और शिक्षकों के प्रति जो भय घर करता जा रहा है, वह बहुत चिंतनीय है। आज शिक्षकों और शिक्षा के मंदिरों की गरिमा तथा अभिभावकों का विश्वास तार-तार होने से बचाने की सख्त जरूरत है।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s