दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 22.11.15

ये दलित की शवयात्रा है, सवर्णों की गली से नहीं गुजर सकती – नई दुनिया 

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/indore-the-funeral-of-the-underdog-not-the-passing-lane-of-the-upper-castes-578044

झांसी: नामांकन में जाने से किया था इनकार, दबंगों ने दलित परिवार को पीटा दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/UP-dalits-again-tortured-in-bundelkhand-wrist-broken-of-two-men-5174900-PHO.html

विधानसभा सचिव के खिलाफ आदिवासी महिला ने लगाया प्रताड़ना का आरोप, थाने में शिकायत नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/raipur-tribal-woman-accused-him-of-harassment-against-the-assembly-secretary-police-complaint-577866

दलित युवक की हत्या, शव रखकर लगाया जाम अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/sonipat/sonipat-crime-news/road-jam-on-killing-hindi-news/

दलित को पीटने के विरोध में लगाया जाम अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/mainpuri/mainpuri-crime-news/banging-against-dalits-imposed-jam-hindi-news/

सफाई व्यवस्था चरमराई, गंदगी से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ा न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/haryana/poor-sanitation-threatens-public-health-1042786.html

डीग | खोहपुलिस ने दलित उत्पीड़न के मामले में वीरेंद्र दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-deeg-news-030046-3065138-NOR.html

आयोग में दलित समाज के गो सेवक को सदस्य नहीं बनाने पर रोष दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-SONI-MAT-latest-sonipat-news-032024-3065190-NOR.html

Please Watch:

Caste System And Dalit || Inequality In India

https://www.youtube.com/watch?v=mn9sFBlLG6U

An Appeal: Please contribution to PMARC for strengthen Democracy, Peace & Social Justice !

नई दुनिया  

ये दलित की शवयात्रा है, सवर्णों की गली से नहीं गुजर सकती

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/indore-the-funeral-of-the-underdog-not-the-passing-lane-of-the-upper-castes-578044

पीथमपुर से 15 किलोमीटर दूर बसा सुलावड़ गांव। आबादी 3500 से ज्यादा। यहां सबकुछ सामान्य सा नजर आता है। 2008 की एक घटना के बाद से आवाजें दब गई हैं और परंपराओं के नाम पर चली आ रही कुरीतियां अब रिवाजों में बदल गई है… इसलिए जो सता रहे हैं उन्हें भी नहीं और जो सताए जा रहे हैं उन्हें भी कोई शिकायत नहीं। आला अफसर से लेकर जन प्रतिनिधियों से भी पूछेंगे तो उन्हें भी यहां सब सामान्य नजर आता है। मगर … यहां सबकुछ सामान्य नहीं है। पढ़िए नईदुनिया की रपट।

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किस्सा शुरू करते हैं एक महीने पहले हुई दलित मांगीलाल के यहां भाभी की मौत से। परंपराओं के अनुसार यह परिवार उम्रदराज भाभी की अंतिम यात्रा धूमधाम से गांव की गलियों से निकालना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। क्योंकि यहां दलितों के मुर्दों को सवर्णों के गलियारों से गुजरने की अनुमति नहीं है। ये तो हुई मातम की बात। यही नहीं दलितों को सबके बीच खुशी जाहिर करने का भी अधिकार नहीं है।

देव उठते ही गांव के राकेश के घर बेटे की शादी है। शहनाइयों की गूंज के साथ मालवा की परंपरा के अनुसार बाना गांव से निकलना है, लेकिन उस रास्ते से तो नहीं निकल पाएगा, जहां सवर्णों के आंगन हैं। यह बात यहांं कोई खुलकर नहीं बोलेगा, क्योंकि सबको 2008 में 80 साल के कुवरा पूनम की मौत की अंतिम यात्रा अच्छी तरह से याद है।

 उठाई जहमत तो पत्थर और लाठी खाई

14 दिसंबर 2008 को 80 साल के दलित कुवरा पूनम की मौत हो गई। अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए कई रिश्तेदार और समाज जन पहुंचे। बेटों ने अंतिम यात्रा के लिए बैंड-बाजे बुलवाए। सभी ने तय किया कि यात्रा गांव के मुख्य रोड से होकर निकाली जाए। जैसे ही यात्रा गांव के भीतर पहुंची, तभी पथराव हुआ और सवर्णों ने जमकर लाठियां भांजी। आखिर में सवर्ण भारी पड़े और दलितों को यात्रा पलटाकर गांव के बाहरी गंदे रास्ते से ले जाना पड़ी। बेटे देवी सिंह, आत्मा राम और देवजी ने पुलिस और कलेक्टर से भी शिकायतें की, लेकिन सवर्णों ने उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया, जिससे परेशान होकर दलितों को समझौता करना पड़ा।

देवी सिंह आज भी समाज, प्रशासन और सवर्णों से यह जानना चाहता है कि आखिर उसने पिता की अंतिम यात्रा गांव की मेन रोड से निकालकर क्या गलती की थी।

तब से आज तक यही परंपरा चली आ रही है। अब कोई यहां कुछ नहीं बोलता। बीते साल रामकिशन के घर बेटे की शादी थी। लड़की वाले घर कपड़े चढ़ाने आए थे। उन्होंने गांव के मेन रोड से ढोल बाजे के साथ त्योहारी का सामान चढ़ाने की तैयारी की, लेकिन सवर्णों ने पहुंचकर धमकाया और गांव के बाहर का रास्ता बता दिया।

गांव का धुलजी दो साल पहले अपने परिवार की एक बरात को गांव के मंदिर से दर्शन करवाते हुए दूसरे गांव ले जाना चाहता था, लेकिन उसे रोक दिया गया। जमकर हंगामा हुआ। 15 दिन के लिए उसके पीने का पानी बंद कर दिया।

सवर्ण हो या दलित दोनों ही वर्गों के कुछ लोग अब इस परंपरा को बदल देना चाहते हैं, लेकिन उनकी सोच पर अमल करने वाले अभी तक खुलकर आगे नहीं आ पाए हैं। इसीलिए हर किसी के पास एक ही जवाब है, पुरखों की बनाई परपंरा है हम निभा रहे हैं।

 हम भी बनवा रहे अपना श्मशान

यहां दलितों के मुर्दों को ले जाने का रास्ता गांव के बाहर से है। वह भी काफी जर्जर है। बारिश मंें वहां से गुजरना मुश्किल होता है। हमें सवर्णों के श्मशान में भी जगह नहीं दी जाती। हमने कुछ मदद ली है। अब पास में हमारा श्मशान बनाया जा रहा है। लोगोें ने कई बार इस बारे में शिकायत भी की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। 

 डॉ. असकरन (दलित) जनपद पंचायत सदस्य

डरते नहीं, लेकिन मजबूर हैं

आज तक मैंने सवर्णों की बात नहीं मानी, क्योंकि खुद सक्षम हूं। कई बार विरोध भी किया, लेकिन सवर्णों की एकजुटता के आगे एक न चली। उनके पिता की अंतिम यात्रा भले ही गांव के कच्चे रास्ते से निकाली गई, लेकिन अपनी यात्रा गांव से ही निकालना चाहते हैं। भले ही भगवान फौजी किसी से नहीं डरते, लेकिन व्यवस्था को बदलने में उनके साथ समाज के लोग आगे नहीं आए। – भगवान, रिटायर्ड फौजी

 पुरखे सवर्णों के पास बैठ कर मर गए

ग्रामीण सजन बाई, शैताई बाई और नादान बाई भी इस व्यवस्था के खिलाफ हैं और आक्रोशित भी। वे बोलीं कि हमारे पुरखे सवर्णों के पास ही बैठते थे और वहीं मर गए। हम अब ऐसी जिंदगी नहीं जी सकते।

 मंदिर में गए तो बाहर फेंक दिया

छह महीने पूर्व ग्रामीण घनश्याम मालवी राम मंदिर में पूजा करने गया, तभी दो सवर्ण युवकों ने जमकर पीटा और उसे बाहर फेंक दिया। घनश्याम ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर, टीआई तक को खत लिखे, लेकिन आज तक किसी का भी जवाब नहीं आया। घनश्याम का कहना है कि उसने सवर्णों से पूछ लिया कि हम हरिजन आखिर भगवान को माने या अल्लाह को।

 बात दूरी की नहीं, मानसिकता की है

ग्रामीण मुकेश और अजय का कहना है कि सुलवाड़ गांव में दलितों का मोहल्ला अलग है। यहां से श्मशान जाने के दो रास्ते हैं। पहले मेन रोड से है, जो पक्का और साफ-सुथरा है। इस रोड पर सवर्णों के घर और मंंदिर हैं। दूसरा रास्ता कच्चा, टूटा-फूटा है। यह बारिश में बदहाल हो जाता है। दलित चाहते हैं कि उनकी अंतिम यात्राएं, बरातें गांव से निकलें, लेकिन यह होने नहीं दिया जाता। बात दूरी की नहीं, बल्कि मानसिकता की है। आखिर हम लोग सवर्णों के गलियारोें से क्यों नहीं निकल सकते।

 कहां-कहां नहीं की शिकायत

कई लोगों ने इस व्यवस्था के खिलाफ थाने, पंचायत, जिला पंचायत, कलेक्टर कार्यालय तक मौखिक शिकायत की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पाई। वे भी प्रशासन की अनदेखी से नाराज हैं।

 आखिर कब होगा सुधार

हम सालों से इस अत्याचार को सहन करते आ रहे हैं। आखिर कब तक इसे झेलेंगे। हम युवाओं ने अपना पुश्तैनी धंधा ही बंद कर दिया। अब हम पीथमपुर की फैक्टरियों में काम करते हैं। फिर भी हमें हीनता से देखा जाता है। 

 मुकेश कुमार, (दलित) ग्रामीण

सरपंच जगदीश भाभर से सीधी बात

सवाल:- आपके गांव में दलितों और सवर्णों के मुर्दों को निकालने के लिए अलग-अलग रास्ते क्यों है?

जवाब:- यह परंपरा तो पहले से है। सवर्ण गांव से और दलित बाहर के रास्ते से ही निकलते हैं।

सवाल:- दलितों को आखिर गांव के बाहरी रास्तों से उत्सव और अंतिम यात्रा निकालने की व्यवस्था क्यों है?

जवाब:- ये पुराने जमाने के लोगों का सिस्टम है । सवर्णों ने इन्हें निकलने से मना कर रखा है।

सवाल:- आप जिम्मेदार हैं। लोगों ने वोट दिए हैं। फिर आप क्यों नहीं आगे आते हैं?

जवाब:- मैं तो तैयार रहता हूं, लेकिन मेरी भी मजबूरी है। गांव के सवर्ण धर्मेंद्र जवरे से आप बात कर सकते हैं। वे इसमें अच्छा बता सकते हैं।

 पूर्व सरपंच और युवा सवर्ण नेता धर्मेंद्र जवरे से सीधी बात

सवाल:- गांव में दलितों के मुर्दों की यात्रा, लोगों की बरात हो या अन्य उत्सव उसके जुलूस गांव से ले जाने की अनुमति क्यों नहीं है?

जवाब:- यह हमारे गांव की पुरानी परंपरा है। मैं इसे तोड़ नहीं सकता।

सवाल:- दलितों को आपके गांव के मंदिरों में जाने की भी अनुमति नहीं है। ऐसा क्यों?

जवाब:- ये सब गांव के लोगों ने तय कर रखा है। हम इसमें कुछ नहीं बोल सकते। बस हम उन परंपराओं और मर्यादाओं का पालन कर रहे हैं।

 मैं इस परंपरा के खिलाफ हूं

गांव में बहुत ही घटिया सोच और रूढ़िवादिता है, जिसमें दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है। मैं ऐसी परंपरा के खिलाफ हूं। मैं दलितों को सम्मान देता हूं। उनके कार्यक्रमों में मदद करता हूं। बने सिंह जवरे (सवर्ण)

 मैं जांच कराऊंगा

अभी तक मेरी जानकारी में यह मामला नहीं आया है। अब मैं इसे गंभीरता से लेकर जांच कराता हूं। लोग खुलकर मेरे सामने भी आ सकते हैं। यदि ऐसी कुरीतियां और सामाजिक बुराई चल रही हंै, तो हम किसी को भी नहीं बख्शेंगे। एस चौहान, एसडीएम धार

 इस कुरीति के खिलाफ हूं

मैं इस कुरीति के खिलाफ हूं। मेरे संसदीय क्षेत्र में ऐसा काम हो रहा है। मुझे पता नहीं, लेकिन में जल्द ही इस रूढ़िवादिता को खत्म करूंगी। – सावित्री ठाकुर, सांसद, धार

 ये तो बहुत गलत है

यदि ऐसा हो रहा है तो बहुत ही गलत है। लोग सामने नहीं आते हैं। फिर भी मैं जांच कराऊंगी। ऐसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जयश्री कियावत, कलेक्टर, धार

 हो सकता है, बहुत गलत है

हो सकता है। ऐसी कुरीति वहां चल रही हो। मैं इसे आज ही दिखवा लेता हूं। कोई असामाजिक परम्परा इलाके में नहीं चल सकती। संतोष दूधी, टीआई बगदून थाना (पीथमपुर)

दैनिक भास्कर

झांसी: नामांकन में जाने से किया था इनकार, दबंगों ने दलित परिवार को पीटा

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 झांसी. बुंदेलखंड में दलितों पर अत्याचार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हमीरपुर में मंदिर जाने को लेकर हत्या और चित्रकूट में मंदिर जाने पर दलित परिवार के साथ मारपीट की घटना के बाद अब ललितपुर में एक परिवार दबंगों का निशाना बना है। पंचायत चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी के नामांकन में शामिल होने से मना करने पर दलित परिवार को घर में घुसकर जमकर पीटा गया। दो गर्भवती महिलाओं पर हमले के साथ ही घर के पुरुषों पर भी लाठी डंडे बरसाए गए। इससे दो के हाथ टूट गए। ललितपुर कोतवाली पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

 यहां हुई घटना

ललितपुर जिले के कोतवाली के तहत आने वाले बिरधा चौकी के पास कुमरौल गांव है। यहां कुछ दलित परिवार रहते हैं। फिलहाल यहां प्रधान पद के चुनाव का माहौल है। नामांकन हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक दबंग भी प्रधानी का चुनाव लड़ रहा है। उसने शनिवार को नामांकन किया। इसमें दलित परिवार को भी आने को कहा गया, लेकिन परिवार ने शामिल होने से इनकार दिया। इससे गुस्साए यादव जाति के प्रत्याशी के समर्थकों ने दलित परिवार के घर रात में हमला कर दिया। बताया तो ये भी जा रहा है कि हमलावरों के साथ कई दलित भी थे।

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 परिवार के पांच लोग हुए घायल

दलित परिवार में दो गर्भवती महिलाएं भी हैं। इन पर हमले के साथ ही पुरुषों को लाठी-डंडों से पीटा। पिटाई से दो लोगों के हाथ टूटे। कुल पांच लोग घायल हुए। घटना के बाद दलित बिरधा चौकी पहुंचे, लेकिन यहां कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद ये कोतवाली आए। जहां से उन्हें रात में ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

नई दुनिया

विधानसभा सचिव के खिलाफ आदिवासी महिला ने लगाया प्रताड़ना का आरोप, थाने में शिकायत

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रायपुर। विधानसभा के प्रमुख सचिव देवेंद्र वर्मा के खिलाफ एक आदिवासी महिला के सनसनीखेज आरोप से हड़कंप मच गया है। कांशीराम नगर की रहने वाली एक आदिवासी महिला ने वित्त विभाग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे के साथ शनिवार को श्री वर्मा के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना की शिकायत अनुसूचित जाति जनजाति थाने में की। महिला का कहना है कि वह अपने पति के स्थान पर नौकरी मांगने के लिए विधानसभा प्रमुख सचिव के पास गई थी। उन्होंने उससे कहा कि नौकरी फ्री में नहीं मिलती, इसके लिए कुछ समझौता करना पड़ेगा। उसने जब समझौते की जानकारी ली तब उनकी अशोभनीय मांग सामने आई।

आदिवासी महिला ने शिकायत में कहा है कि उसके पति विधानसभा सचिवालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे। 2012 में एक सड़क दुर्घटना के बाद वे नौकरी करने में अक्षम हो गए। बाद में बिना किसी सूचना के उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। उनकी जगह नौकरी के लिए वे प्रमुख सचिव श्री वर्मा से मिलने गई थीं। उन्होंने उन्हें सेवा में लेने से मना कर दिया। पुलिस में दी गई महिला की शिकायत में लिखा है कि आदिवासी महिला ने विधानसभा अध्यक्ष के निवास कार्यालय में पहुंचकर उनसे भी नौकरी की मांग की, विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें नौकरी पर रखने का आश्वासन दिया था।

महिला के मुताबिक 2001 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ने एक महिला कर्मचारी की जगह उनके पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति दी थी, लेकिन उसके मामले में कोई विचार नहीं किया गया। उसके दो छोटे बच्चे हैं एवं पति बीमार हैं। नौकरी मांगने पर अशोभनीय व्यवहार से आघात पहुंचा है, ऐसी स्थिति में संबंधित अफसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर न्याय दिलाई जानी चाहिए। प्रताड़ना की शिकायत एसपी से लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तक करते हुए न्याय की मांग की गई है। अनुसूचित जाति जनजाति पुलिस का कहना है कि आदिवासी महिला, वित्त विभाग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे व अन्य लोगों के साथ थाना आई थी। उसकी शिकायत ले ली गई है। शिकायत पर अब पूछताछ होगी।

श्री वर्मा ने नईदुनिया को बताया कि मेरी आदिवासी महिला से अभी तक सीधी बात नहीं हुई है। विधानसभा अध्यक्ष के यहां कुछ दिनों पहले उनकी बात हुई थी। महिला अपने पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति मांग रही थी। उन्हें दैनिक वेतनभोगी के तौर पर रखने की बात कही गई, पर वह यह बात सुनकर काफी नाराज हुई। इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक से भी की गई। महिला का पति मेडिकल तौर पर अनफिट हैं और महिला वहां नियमित नौकरी मांग रही है।

अमर उजाला

दलित युवक की हत्या, शव रखकर लगाया जाम

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ककरोई रोड स्थित गढ़ी घसीटा में शुक्रवार देर शाम एक युवक द्वारा चाकू मारने पर घायल हुए चार लोगों में से एक दलित युवक ने देर शाम रोहतक पीजीआई में दम तोड़ दिया। शव सोनीपत पहुंचा तो परिजनों ने दोपहर बाद 3 बजे के करीब ककरोई चौक पर जाम लगा दिया। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी लगभग 3 घंटे तक जाम नहीं खोला। परिजन जब शव को उठाकर गीता भवन चौक लगे तो पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग करते हुए रोकने की कोशिश की। इस दौरान धक्कामुक्की भी हुई, लेकिन परिजन लोगों की मदद से शव को गीता भवन चौक लाने में कामयाब रहे। इसके बाद शव रखकर गीता भवन चौक पर जाम लगा दिया गया। लगभग एक घंटे बाद मौके पर पहुंचीं कैबिनेट मंत्री ने जब मुआवजा और नौकरी का आश्वासन दिया तब जाकर जाम खुला। 

शुक्रवार देर शाम ककरोई रोड पर गढ़ी घसीटा निवासी बॉबी द्वारा चाकू मारे जाने पर घायल हुए चार लोगों में से सुशील की देर रात रोहतक पीजीआई में मौत हो गई थी। शनिवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के हवाले किया गया था। शव लेकर सोनीपत पहुंचे परिजनों ने लगभग 3 बजे शव को ककरोई चौक पर रखकर जाम लगा दिया। परिजनों ने सरकार से मुआवजे और नौकरी की मांग के चलते जाम लगाया था। जाम की सूचना पर सीटीएम सुधांशु गौतम और डीएसपी मुकेश जाखड़ पहुंचे और परिजनों को आश्वासन दिया, लेकिन परिजन मंत्री कविता जैन से मुलाकात करने की मांग पर अड़ गए। इसके बाद शव को लगभग 6 बजे गीता भवन चौक पर लाया गया और जाम लगा दिया। लगभग 7 बजे चौक पर कविता जैन पहुंचीं और परिजनों से बातचीत की। लगभग 20 मिनट तक हुई बातचीत के बाद परिजनों को आश्वासन दिया गया कि परिवार को आर्थिक मदद की जाएगी, मृतक की पत्नी को भी योग्यता के हिसाब नौकरी दिलवाई जाएगी और आरोपी युवक को 24 घंटे में गिरफ्तार किया जाएगा। आश्वासन के बाद ही परिजनों 7 बजकर 22 मिनट पर शव उठाया और जाम खोला।

ककरोई चौक पर किया बल प्रयोग

ककरोई चौक पर जब परिजनों ने जाम लगा रखा था तो मौके पर सीटीएम एवं डीएसपी ने मान-मनौव्वल की कोशिश की थी, लेकिन असफल रहे। परिजन मंत्री से मिलने की मांग पर अड़े थे। लगभग 5.30 बजे परिजनों ने शव को उठाकर गीता भवन चौक ले जाने की कोशिश की तो पुलिस ने शव नहीं उठने देने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान परिजनों और पुलिस के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की भी हुई। तीन-चार लोग इस धक्कामुक्की में घायल भी हुए, लगभग 3 मिनट की धक्कामुक्की के बाद परिजन जबरदस्ती शव को उठाकर गीता भवन चौक की ओर जाने में कामयाब हुए।

प्रदेश सरकार मुर्दाबाद के लगे नारे

गीता भवन चौक पर शव रखकर मंत्री से मिलने की मांग पर अड़े परिजनों और अन्य लोगों ने कैबिनेट मंत्री के पहुंचने पर नारेबाजी शुरू कर दी थी और प्रदेश सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। इसके बाद जब परिजनों से बातचीत के दौर में मंत्री ने कम मुआवजे की हामी भरी तो परिजनों ने फिर मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। मंत्री ने सरकारी या डीसी रेट की नौकरी को स्पष्ट नहीं किया। इतना आश्वासन दिया कि मृतक की पत्नी की योग्यता के हिसाब से उसे नौकरी दिलाई जाएगी। 3 बजे से जाम लगाए बैठे सुशील के परिजनों के पास कविता जैन 4 घंटे बाद ही पहुंच पाई थी। क्योंकि कविता जैन, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की मां के निधन के चलते पानीपत गई हुई थीं।

बेटे की दवाई लेकर जा रहा था घर

बता दें कि जिस मामले में सुशील की मौत हुई, उसमें उसका कोई लेनादेना ही नहीं था। बॉबी के साथ कहासुनी सतवीर और उसके परिवार की हुई थी। जब बॉबी ने सतवीर, लीलू और सोमवीर पर हमला किया तो पास में ही सुशील भी अपनी बाइक के पास खड़ा था। सुशील मेडिकल स्टोर पर अपने बेटे के लिए दवाई लेने गया था, जोकि सर्दी-जुकाम से पीड़ित था। बॉबी ने सुशील पर भी चाकू से हमला कर दिया। इसी हमले में घायल होने के बाद सुशील की जान गई।

किराए पर रहता था, दो बच्चों का पिता सुशील

मूलरूप से गांव जुआं का रहने वाला सुशील किराए के मकान में ककरोई रोड पर रहता था। अपनी पत्नी, दो बेटों (एक ढाई साल का दूसरा दो माह का) के साथ रहने वाले सुशील की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। वह खुद प्राइवेट नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। बताया जा रहा है कि फिलहाल वह ककरोई रोड पर ही एक जूतों की दुकान पर काम करता था।

अफवाह के चलते, बंद कर दी थी दुकानें

सुशील के परिजन उसका शव गीता भवन चौक पर लाए तो वहां पर पुलिसकर्मी भी भारी संख्या में तैनात हो गए थे। दुकानदारों के बीच अफवाह फैल गई थी कि यहां पर लाठीचार्ज हो सकता है। इसके चलते दुकानदार ने डर के मारे अपनी-अपनी दुकानें बंद कर दी। रात लगभग 9 बजे तक खुलने वाली मार्केट साढ़े 6 बजे तक ही शांत हो गई थी। 

यह है मामला 

गढ़ी घसीटा निवासी सतवीर ने सिटी थाने में शिकायत दी है कि वह शुक्रवार देर शाम घर पर था। उसने बताया कि उसकी बहन चांद कौर घर के बाहर बैठी थी। इसी दौरान गढ़ी घसीटा का ही बॉबी हाथ में चाकू लेकर गली में आ गया। वह लोगों को गालियां दे रहा था और चाकू दिखाकर डरा रहा था। चांद कौर ने बॉबी को गालियां देने से मना किया तो वह झगड़ा करने लगा। बकौल सतबीर इस पर उसने बोबी को समझाया। जब वह वापस आने लगा तो बॉबी ने उस पर, बेटे सोमवीर और रिश्तेदार लीलू पर चाकू से हमला कर दिया। पास में ही खड़े सुशील पर चाकू से हमला कर दिया था। चारों को उपचार के लिए सामान्य अस्पताल में दाखिल करवाया गया था, जहां से उन्हें रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया था।

पीड़ित परिवार को हर संभव मदद की जाएगी। आर्थिक मदद और नौकरी का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए सरकार तक उनकी बात पहुंचाई जाएगी।

-कविता जैन, कैबिनेट मंत्री, हरियाणा सरकार

अमर उजाला

दलित को पीटने के विरोध में लगाया जाम

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बिछवां। थाना क्षेत्र में दलित युवक को कुछ लोगाें ने मारपीट कर घायल कर दिया। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने गांव के बाहर जीटीरोड पर जाम लगा दिया। सूचना पर पहुंची थाना पुलिस के आश्वासन पर ग्रामीणों ने एक घंटे बाद जाम खोला। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरे पक्ष ने भी थाने में तहरीर दी है।

 थाना बिछवां क्षेत्र के ग्राम सुल्तानगंज निवासी बदन सिंह कठेरिया ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें कहा गया कि रात 10:30 बजे वह अपने घर में सो रहा था। तभी चिर्रा निवासी प्रवेश, सौरभ उर्फ सोनू, कुलदीप, रघुवीर, सुखवीर कुछ अज्ञात लोगों के साथ पहुंचे। सौरभ ने उसके सिर में तमंचा की बट मारकर घायल कर दिया। जाति सूचक गालियां देते हुए खेतों की ओर ले गए। चीख पुकार सुनकर पड़ोसी और ग्रामीण आ गए। ग्रामीणों को देख आरोपी चले गए। शनिवार की सुबह आरोपी पुन: उनके घर आए। कार्रवाई न करने की धमकी दी है। इधर, आक्रोशित ग्रामीणों ने जीटीरोड पर गांव के बाहर जाम लगा दिया।

जाम की जानकारी पर थानाध्यक्ष जीपी गौतम ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाकर एक घंटे बाद जाम खुलवाया। एसओ ने बदन सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। दूसरे पक्ष के उमेश यादव ने थाने में तहरीर दी। इसमें कहा कि चिर्रा निवासी ऋषि यादव रंजिश के चलते उसे झूठे मामले में फंसाना चाहते हैं। इस मामले में उसके परिवारीजनों को गलत ढंग से फंसाया गया है। इसकी निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई की जाए।

न्यूज़ 18

सफाई व्यवस्था चरमराई, गंदगी से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ा

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मेवात जिले के पिनगवां कस्बे की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है. करीब दस दिन पहले कस्बे के दलित समुदाय के दो गुटों में झगड़ा हो गया था. झगड़े में दर्जनभर से अधिक लोगों को चोट आई थी.

उसी दिन से एक गुट के लोगों ने करीब 20 हजार की आबादी वाले पिनगवां कस्बे में सफाई बंद कर दी. सफाई बंद होने से घरों से लेकर गलियों और सड़कों पर कूड़े के ढेर लग गए. बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया. महज चार सफाई कर्मचारी फ़िलहाल काम कर रहे हैं, जो काफी कम हैं.

सफाई कर्मियों ने पंचायत से लेकर पंचायत अधिकारियों से कई बार सफाई कर्मियों की कमी का रोना रोया, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है. अभीतक मामला दर्ज होने से लेकर सुलह के भी कोई प्रयास नहीं हुए हैं, जिससे मसला लंबा खिंचता दिख रहा है.

गंदगी से अब बीमारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है. अगर प्रशासन ने जल्द ही समस्या का समाधान नहीं निकाला तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं.

दैनिक भास्कर

डीग | खोहपुलिस ने दलित उत्पीड़न के मामले में वीरेंद्र

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डीग | खोहपुलिस ने दलित उत्पीड़न के मामले में वीरेंद्र पुत्र रम्मूला गुर्जर निवासी पसोपा को गिरफ्तार किया है। पसोपा थाना खोह निवासी लीले पुत्र कुमरपाल जाटव ने गांव के ही वीरेंद्र जाति गुर्जर के खिलाफ प्रार्थी के साथ मारपीट कर जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने का मामला 22 मई को दर्ज कराया था।

 दैनिक भास्कर

आयोग में दलित समाज के गो सेवक को सदस्य नहीं बनाने पर रोष

http://www.bhaskar.com/news/HAR-SONI-MAT-latest-sonipat-news-032024-3065190-NOR.html

सोनीपत | हरियाणाअंबेडकर संघर्ष समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की एक बैठक विश्वकर्मा कॉलोनी में समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनजीत सिंह दहिया की अध्यक्षता में हुई। इसमें हरियाणा राज्य गो सेवा आयोग के गठित किए जाने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का आभार व्यक्त किया गया, वहीं आयोग में किसी भी दलित गो सेवक को सदस्य बनाने पर नाराजगी भी जताई गई। बैठक में राजेश कश्यप, मीना चोपड़ा, सुरेश ग्रोवर, राजेश गरनावठी, रवि कुमार बागोतिया, दयासिंह राठी, वकीलचंद वर्मा, मनोहर लाल चांदीवाल, कुलदीप मेहरा, भलेराम नरवाल, सतबीर रंगा, महेंद्र दहिया धनासरी, डॉ. गजानंद वर्मा, बलवान, रनरेश गोठवाल, नरेश आदि मौजूद रहे। 

 News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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