दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 31.10.15

दबंगों ने दलित महिला को ज़िंदा जलाया – पंजाब केसरी

http://up.punjabkesari.in/up-crime/news/dbangon-dalit-woman-burnt-alive-409564

दलित युवती की गोली मारकर हत्या – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/sultanpur/sultanpur-crime-news/girl-murdered-in-akhandnagar-hindi-news/

दलित युवक की गोली मारकर हत्या – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/pratapgarh/dalit-man-shot-dead-hindi-news-1/

दलितों को पीटा, नहीं दर्ज की रिपोर्ट – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/ballia/dalits-were-beaten-no-recorded-reports-hindi-news/

दलित महिला पर थाने में किया मिर्च स्प्रे, धक्के देकर भगाया – इनेक्स्त लाइव

http://inextlive.jagran.com/the-pepper-spray-on-dalit-station-97607

हरियाणा अंबेडकर संघर्ष समिति दलित अौर पिछड़ों को करेगी एकजुट: दहिया – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HAR-OTH-MAT-latest-barwala-news-043517-2943571-NOR.html

ओडिशा : सुपर-फ्लॉप योजना बन गई मनरेगा – चौथी दुनिया

http://www.chauthiduniya.com/2015/10/super-flop-yojna-ban-gai-mnrega.html

पंजाब केसरी

दबंगों ने दलित महिला को ज़िंदा जलाया

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दक्षिणटोला थानान्तर्गत बैजापुर गांव में एक सप्ताह पूर्व हुए बच्चों के विवाद में एक दलित महिला पुष्पा साहनी (32वर्ष) को चारपाई में बांधकर मिट्टी का तेल छिड़क कर जला दिया गया। परिजनों की मदद से गम्भीर रूप से जली महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां महिला की स्थिति नाजुक बनी हुई है। 

मामला बच्चों के विवाद का है। एक सप्ताह पूर्व पडोसी के बच्चों के साथ पीड़िता के बच्चों का विवाद हो गया था, जिसमें ग्राम प्रधान द्वारा पंचायत बुलाकर सुलह कराने का प्रयास भी किया गया। लेकिन विपक्ष द्वारा सुलह की बात मानने से इन्कार कर दिया गया। आज शुक्रवार को पुनः विवाद में दोपहर 1:00 बजे पुष्पा को उसके घर के सामने चारपाई में बांधकर दबंगों ने मिटटी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। तभी पीड़िता का देवर घर पंहुचा और वहां पीड़िता को जला देखकर सन्न रह गया और आनन-फानन में गम्भीर रूप से झुलसी महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। 

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परिजनों की माने तो ये पूरा मामला ग्राम प्रधान की मिली भगत से हुआ है। दबंगों ने भरी पंचायत में पीड़िता को मारने का एलान किया था। आज दबंगों को मौका मिल ही गया जब पीड़िता घर पर अकेली थी तो उन्होंने पीड़िता को चारपाई में बांध कर आग के हवाले कर दिया, जिसमें पीड़िता बुरी तरह झुलस गयी। पीड़िता के भाई ने बताया की बहन कुछ दिनों पूर्व उसके घर आई थी और इस मामले को बताया था और कहा था की दबंगों ने उसे मारने की धमकी दी है। 

बताते चले की पूरा मामला पीड़िता और उसके पडोसी से बच्चों को लेकर झगडे के बाद हुआ है। आरोपी अम्बिका के 6 या 7 साल के लड़के ने पीड़िता की 5 वर्षीय लड़की के साथ छेड़खानी कर दी थी जिसपर पीड़िता ने लड़के की पिटाई की थी। इसी बात को लेकर दोनों परिवारों में जमकर झगड़ा हुआ और मामला पंचायत तक जा पंहुचा। पंचायत में लड़के के दबंग घरवालों ने सुलह करने से इनकार कर दिया था और पीड़िता को अंजाम भुगतने की धमकी भरी पंचायत में दे डाली। आज पीड़िता को दबंगों ने जला डाला। पीड़िता जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रही है। 

इस मामले की जानकारी होने पर सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय जिला अस्पताल पहुंच कर पीड़िता का बयान लिया। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया की अभी मामले में एफआईआर होना है इस पर फिलहाल कोई टिप्पड़ी नहीं करेंगे। एफआईआर के बाद ही विधि सम्मत कार्यवाही की जायेगी। 

अमर उजाला

दलित युवती की गोली मारकर हत्या

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खेत गई दलित युवती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसका शव ट्यूबवेल के छप्पर के नीचे पाया गया। शव के पास ही .32 बोर के दो खोखे और कुछ आपत्तिजनक सामान मिला है जिससे उसके साथ रेप की आशंका भी जताई जा रही है। हत्या की सूचना के बाद पुलिस के अधिकारियों ने फॉरेंसिक टीम के साथ घटना स्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है।

अखंडनगर थाना क्षेत्र के गांव की 20 वर्षीय युवती शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे घर से खेत जाने के लिए निकली थी। करीब डेढ़ घंटे तक जब वह घर नहीं पहुंची तो परिवारीजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। तलाश के दौरान घर से करीब सात सौ मीटर दूर स्थित युवती के ट्यूबवेल के छप्पर के नीचे उसका शव मिला। देखते ही देखते घटना स्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

युवती के सीने में एक गोली और सिर में एक गोली मारी गई थी। घटना स्थल पर ही .32 बोर का दो खोखा और कुछ आपत्तिजनक सामान पड़ा था। ग्रामीणों की सूचना के बाद एएसपी प्रद्युम्न सिंह, एसओ एफआर खां फॉरेंसिक टीम के साथ वहां पहुंच गए। फॉरेंसिक टीम के प्रभारी संदीप यादव ने स्पॉट से नमूने लिए। एसओ ने बताया कि मृतका के पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मोबाइल ट्रेस कर रही है।

अमर उजाला

दलित युवक की गोली मारकर हत्या

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जामताली। रानीगंज थाना क्षेत्र के जरियारी में बाइक सवारों ने एक दलित युवक को घर से बुलाने के बाद गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। इससे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। तनाव को देखते हुए पुलिस तैनात कर दी गई है।

रानीगंज थाना क्षेत्र के जरियारी निवासी टिड्डी उर्फ राजाराम (26) शुक्रवार शाम अपने भाई के तिलक कार्यक्रम के बाद मेहमानों को खाना खिला रहा था। इसी बीच दो बाइक सवार उसके घर से चंद कदम दूर रुके। ग्रामीणों के मुताबिक एक बच्चे से बाइक सवार युवकों ने राजाराम को बुलवाया। वह बिना कुछ सोचे समझे उस ओर चल पड़ा। बाइक सवार युवकों के करीब वह पहुंचा तो पीछे बैठे युवक ने तमंचा निकालकर उसे गोली मार दी। गोली उसके पेट में लगी और वह चीखते हुए घर की ओर भागा। इसी बीच हमलावर वहां से भाग निकले। रास्ते में ही राजाराम गिर गया और तड़पने लगा। फायर की आवाज सुनकर गांव के लोगों संग परिवार के लोग भी दौड़े। राजाराम को लहूलुहान देख परिजन रोने बिलखने लगे।

उसे वाहन से जिला अस्पताल ले जाने लगे। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी सांस थम गई। यह देख परिजन शव लेकर घर लौट गए। एसओ लल्लन सिंह यादव दलबल के साथ पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। एसओ ने बताया कि मृतक का पिता सीताराम दो लोगों का नाम ले रहा है। तहरीर का इंतजार किया जा रहा है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। वैसे चर्चा रही कि राजाराम ने कुछ दिन पहले मजदूरी से इनकार कर दिया था। इसी बात को लेकर कुछ लोग उससे खार खाए थे।

अमर उजाला

दलितों को पीटा, नहीं दर्ज की रिपोर्ट

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सहतवार कसबा के दक्षिण टोला मोहल्ले में सवर्णों द्वारा दलितों को पिटने का मामला प्रकाश में आया है। उस पर पुलिस ने भी उनका मेडिकल कराने के पर पीडि़तों को ही पीटा।

इस घटना के विरोध में पीडि़त परिवार के सदस्यों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। इस मामले में न्याय के लिए उन्होंने एसपी को ज्ञापन सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई।

सहतवार कसबा के दक्षिण टोला निवासी उमाशंकर रावत ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए पत्र में बताया है कि वे दलित हैं। बीते 26 अक्तूबर की रात में करीब दस बजे वे पूजा चढ़ाकर खाना खा रहे थे। 

इसी दौरान सवर्ण जाति के लोगों ने उनपर हमला बोल दिया। उन्होंने मारने-पीटने के साथ मुर्गा-दारू के लिए पैसे मांगे। उन्होंने धमकी दी कि अगर पैसा और दारूउन्हें नहीं मिला तो तुम लोगों को इसी तरह से पीटा जाएगा। इस दौरान घर की लड़कियों से भी दुर्व्यवहार किया गया।

इतना ही नहीं जब वे मामले की शिकायत करने पुलिस के पास गए तो पुलिस ने मेडिकल कराने के नाम पर उनकी पिटाई की। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि वह आरोपियों को बचाने में जुटी हुई है। इस दौरान दिलीप कुमार, सूरज रावत, संजीत रावत सहित कई लोगों ने धरना दिया। 

इनेक्स्त लाइव

दलित महिला पर थाने में किया मिर्च स्प्रे, धक्के देकर भगाया

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हरियाणा में दलित परिवार के बच्चों को जिंदा जलाने का मामला अभी ज्यादा पुराना नहीं पड़ा था कि मऊआइमा थाने से भी शुक्रवार को दलित उत्पीड़न की खबर आ गई। बेटी के किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज कराने गई महिला के साथ एसओ मऊआइमा विजय प्रताप सिंह ने न सिर्फ बदसलूकी की बल्कि आरोप है कि कमरे में बंद कर मिर्च स्प्रे करवा दिया। महिला ने बदसलूकी का पूरा वाकया अपने सेलफोन के कैमरे में कैद कर लिया और इसे मीडिया में जारी कर दिया। मामला डीजीपी जगमोहन यादव के पास पहुंचा तो उन्होंने जांच बैठा दी। मामला हाईलाइट होने के बाद किडनैपिंग की एफआईआर दर्ज कर ली गई.

25 अक्टूबर को गायब हो गई थी युवती

धरौता गांव की युवती 25 अक्टूबर को गायब हो गई थी। आरोप है कि युवती की मां व पिता उसी दिन थाने पहुंचे थे तहरीर लेकर। रिपोर्ट न दर्ज होने पर वह अगले दिन सीओ सोरांव के पास पहुंचे। वहां से एफआईआर दर्ज कराने के लिए लेटर फारवर्ड कर दिया गया। जब अगले दिन मां- पिता थाने पर पहुंचे तो उनको भगा दिया गया। गुरुवार को युवती की मां व पिता पूरी प्लानिंग के साथ थाने पर पहुंचे। महिला ने एसओ के कमरे में जाने से पहले सेलफोन का कैमरा ऑन कर दिया। जैसे ही वह एसओ के कमरे में पहुंची और एफआईआर दर्ज कराने की बात की, वह भड़क गए। उनका कहना था कि जब रिपोर्ट मिल जाएगी तो मामला दर्ज किया जाएगा। वह किस रिपोर्ट की बात कर रहे थे, यह स्पष्ट नहीं हो सका। इसके बाद अचानक एसओ ताव में उठते हैं और महिला को धक्का मारकर अपने कमरे से बाहर कर देते हैं। वीडियो में कई और चेहरे भी दिखाई दिए हैं। महिला अपनी बात कहते सुनाई दे रही थी। करीब डेढ़ मिनट के बाद कैमरा बंद हो जाता है। आरोप है इसके बाद महिला को कमरे में बंद कर दंगाईयों से निपटने वाला मिर्च स्प्रे छिड़क दिया गया। इससे उसकी आंखें लाल हो गई। शुक्रवार को महिला एसएसपी ऑफिस पहुंची और वीडियो ऑफिसर्स को दिखाया। इसी बीच शाम को आईटीबीपी के प्रोग्राम में शामिल होने पहुंचे डीजीपी जगमोहन यादव तक मामला पहुंचा तो उन्होंने जांच बैठा दी.

एसओ की सफाई

इस मामले में एसओ विजय प्रताप सिंह का कहना है कि युवती की शादी प्रतापगढ़ के जेठवारा में हुई थी। वहां से वह अपने प्रेमी के साथ भाग गई थी। तब पति ने गुमशुदगी की रिपोर्ट जेठवारा में दर्ज करवाई थी। कुछ दिन बाद वह मायके पहुंची तो उसकी दूसरी शादी की बातचीत होने लगी। महिला ने जो वीडियो पेश किया है, उसमें काटछांट की गई है। युवती के पिता की तहरीर पर पहले ही गांव के उमेश, संजय व दो अन्य के खिलाफ किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मिर्च स्प्रे की बात गलत है। थाने में स्प्रे है ही नहीं.

दैनिक भास्कर

हरियाणा अंबेडकर संघर्ष समिति दलित अौर पिछड़ों को करेगी एकजुट: दहिया

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बरवाला | वर्तमानदौर को देखते हुए दलित पिछड़ों को एकजुट होने की जरूरत है। तभी हमें हमारा हक मिल पाएगा। यह बात हरियाणा अंबेडकर संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनजीत दहिया ने शुक्रवार को बरवाला के वार्ड 10 में समिति के जिला अध्यक्ष बलजिंद्र के निवास स्थान पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। दहिया ने कहा कि संगठन अपने कार्य में लगा हुआ है शीघ्र ही हरियाणा अंबेडकर संघर्ष समिति प्रदेश भर के दलित पिछड़ा वर्ग के लोगों को एकजुट करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन समाजहित की दिशा में भी विशेष भूमिका का निबर्हन करेगा। इसे लेकर जल्द ही प्रदेशभर में समिति ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम के तहत जन जागरण अभियान चलाया जाएगा।

 चौथी दुनिया

ओडिशा : सुपर-फ्लॉप योजना बन गई मनरेगा

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ओडिशा के संबलपुर ज़िले की ग्राम पंचायत मानेसर के गांव सुरुंगा में पिछड़े वर्ग के 47 वर्षीय साहेब अदावर ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रा़ेजगार गारंटी योजना शुरू होते ही जॉब कार्ड बनवा लिया, जिसका नंबर है 23893. लेकिन, वह कभी काम मांगने नहीं गए. इसी गांव के आदिवासी समुदाय के 30 वर्षीय अरुण कुमार पट्टा के कार्ड नंबर 12127 पर 2012 में 14 और 12 दिनों का काम दर्ज है, लेकिन उन्हें खुद नहीं मालूम कि उन्होंने कितने दिन काम किया. बस उन्हें 75 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मज़दूरी मिल गई थी. आदिवासी समुदाय के संजय छूड़िया, अंतर्यामी मांडी, ललित प्रधान, जगबंधु पट्टा, सुवन्ना मांझी, सविता मांझी, श्रीधर भोई, सहस नाग, बुद्धमत प्रधान एवं राजकुमार विस्वाल का आरोप है कि तत्कालीन सरपंच ने उन्हें यह कहते हुए काम नहीं दिया कि मिट्टी खोदने का काम अभी है ही नहीं. यूएनडीपी और भारत सरकार की फेलोशिप के तहत अध्ययन के क्रम में यहां आने पर पता चला कि इस पंचायत में यूं तो 20 गांव हैं, पर राजस्व गांवों की संख्या मात्र नौ है. सुरुंगा गांव संबलपुर-कटक राष्ट्रीय राजमार्ग पर संबलपुर से आठ किलोमीटर पूरब जाकर फिर पांच किलोमीटर उत्तर में पड़ता है. यहां से तालपाली गांव क़रीब सात किलोमीटर है, जो इसी पंचायत में है. सरपंच यहीं रहती हैं. ़खबर है कि यह पंचायत अब संबलपुर नगर निगम के अंतर्गत जाने वाली है, लेकिन 35 वर्षीया आदिवासी सरपंच चंद्रावती मुंडा को ऐसा कोई पत्र प्रशासन से नहीं मिला है. कलक्टर ने एक बैठक में इस बात की सूचना दी थी. हालांकि, बीडीओ पंकज प्रधान पत्र जारी होने की बात कहते हैं.

सरपंच बताती हैं कि पंचायत में मिट्टी का काम नहीं है, क्योंकि यहां दोफसली खेती होती है. क्या ग्राम पंचायत की आम सभा में आपने कभी रा़ेजगार सृजन के बारे में चर्चा की? इस सवाल का उनके पास कोई जवाब नहीं था. ओडिशा क्या, पूरे देश में मनरेगा की छवि मिट्टी कटाई-भराई के रूप में सृजित हो चुकी है. हालांकि, इस योजना की दस प्राथमिकताओं में मिट्टी का काम अंतिम स्थान पर है. ज़िला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दक्षिण में इसी ब्लॉक की पंचायत पुटियापल्ली में भी दलित बाहुल्य आबादी है, लेकिन यहां के परसुराम भोई, धीरेंद्र नायक, सुवास प्रधान एवं पिंटू दंता आदि दलित-पिछड़े समुदाय के लोगों को शहर से लेकर गांव तक इतना काम मिल जाता है कि उन्हें मनरेगा में काम मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ती. आप मनरेगा में काम क्यों नहीं करना चाहते? जवाब में वे कहते हैं कि इसमें मज़दूरी का भुगतान कई महीनों बाद होता है, मिट्टी की कटाई ठेके पर होती है, जमीन नाप कर मज़दूरी मिलती है और दिहाड़ी का कोई हिसाब नहीं होता. कुछ लोगों ने कई साल पहले काम किया था, लेकिन भुगतान की दिक्कत के चलते आगे काम मांगना ही छोड़ दिया. यहां पिछड़ी जाति की महिला कोटे से सरपंच बनीं 32 वर्षीया रंजीता साहू मनरेगा में काम न होने का मुख्य कारण मिट्टी की कमी बताती है. उनके मुताबिक, यहां कोई काम भी नहीं है और न कोई काम सृजित करने की कोशिश कभी की गई. पढ़े-लिखे लोग तो काम मांगते नहीं और मज़दूरों को शहर के ही काम से फुर्सत नहीं मिलती.

जॉब कार्ड में काम का विवरण न होने पर वह कहती हैं कि इस तरह का विवरण ब्लॉक के अधिकारी अपने यहां दर्ज कर लेते हैं, कार्ड में दर्ज करना ज़रूरी नहीं है. संबलपुर-भुवनेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जुजुमुरा ब्लॉक के गांवों में मनरेगा की हालत कुछ ज़्यादा दयनीय है. यहां मनरेगा एवं इंदिरा आवास योजना में गड़बड़ी और अनियमितता की चर्चा हर ज़ुबान पर है. इंदिरा आवास का पैसा ले लेना, कुछ बालू-ईंट गिरा देना और फिर सरपंच एवं अफसरों की मिलीभगत से पूरा पैसा गायब कर देना आम है. कई मृत लोगों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाने और भुगतान होने की बात ग्रामीण बताते हैं. आदिवासी मज़दूरों का एक ही रोना है कि ठेकेदार कई महीनों बाद पैसा देता है. जॉब कार्ड तो उनके पास है, लेकिन बैंक की पासबुक ठेकेदार के पास है. यह ठेकेदार अवैध रूप से बीच में आ गया है, जो पैसे की बंदरबांट की योजना बनाता है. जांच करने वाले आते नहीं और ग्राम रा़ेजगार सेवक ग़लत रिपोर्ट दे देता है. कई लोगों द्वारा दूसरे के कार्ड पर काम करने की बात भी सामने आई. इस व्यवस्था में कार्ड धारक को कुछ कमीशन दे दिया जाता है. गांव के चितरंजन प्रधान इन दोनों केंद्रीय योजनाओं में बदलाव की बात कहते हैं.

साहसपुर के पूर्व ओबीसी सरपंच और वर्तमान में सरपंच के पति शिव नारायण साहू मनरेगा के सारे प्रावधान गांव तक आते-आते पलट जाने की बात कहते हैं. मनरेगा में नीचे से रा़ेजगार सृजित करके उसके अनुसार धनराशि की मांग और सरकार की ओर से उतनी ही धनराशि के भुगतान की व्यवस्था है, लेकिन साहू के अनुसार, केंद्र एवं राज्य से जब बीडीओ के ऊपर दबाव पड़ता है कि कुछ काम दिखाना है, तो बीडीओ सरपंच एवं इंजीनियर आदि पर दबाव डालते हैं और अफरातफरी में खानापूर्ति करके पैसों की बंदरबांट हो जाती है. ज़मीन पर कुछ काम नहीं हो पाता. साहू इलाके के लिए ऐसे कई काम बताते हैं, जिनकी प्रकृति मनरेगा से अलग है, जैसे मिट्टी वाली सड़क को अगले चरण में मुरुम और मेटल की बनाना, लेकिन मनरेगा में इसकी अनुमति नहीं है. जुजुमुरा में 1992 से 1995 तक ब्लॉक प्रमुख रहे 78 वर्षीय पंचानन पंडा सारी समस्या की जड़ में लोगों में इच्छाशक्ति न होना मानते हैं. अधिक पैसा आ जाने पर लोग लूट में शामिल हो जाते हैं.

पंडा इसे ठीक करने का उपाय ऊपर से बताते हैं. हालांकि, वह मनेरगा के वर्तमान क़ानून को पूर्ण और अच्छा मानते हैं. वह कहते हैं, भ्रष्टाचार रोकने के लिए शासन स्तर पर सुधार होना चाहिए. हमें सुविधावादिता छोड़कर श्रमवादी बनना पड़ेगा, तभी जाकर व्यवस्था ठीक हो पाएगी. मनरेगा एवं इंदिरा आवास जैसी केंद्रीय योजनाओं की देखरेख के लिए ज़िम्मेदार संबलपुर ज़िला ग्रामीण विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2015-16 में अब तक ज़िले की किसी भी पंचायत से मनरेगा के लिए कोई धनराशि की मांग नहीं आई. इसके पहले के सालों में कुछ मांग है. अधिकारी इसके लिए ग्राम पंचायतों और माओवाद को ज़िम्मेदार मानते हैं. बीडीओ पंकज प्रधान दोफसली खेती को मनरेगा के लिए बाधक मानते हैं. उनका कहना है कि पूरे साल खेतों में फसल खड़ी रहने की वजह से मिट्टी नहीं मिलती. लेकिन, वह इस बात का कोई जवाब नहीं देते कि पंचायतों में रा़ेजगार सृजन के अन्य आयाम क्यों नहीं खोजे जाते? प्रधान यह भी बताते हैं कि उनके ब्लॉक की सभी 12 पंचायतों में ज़मीन सिंचित है, इसलिए काम की कमी नहीं है और मनरेगा की कोई खास ज़रूरत नहीं है.

मनरेगा या इंदिरा आवास योजना में किसी प्रकार की गड़बड़ी को वह ग़लत बताते हैं. संबलपुर ज़िला ग्रामीण विकास प्राधिकरण में परियोजना निदेशक ज्योति लाकड़ा मनरेगा में निचले स्तर पर भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की बात स्वीकारते हैं. उनका कहना है कि कई इलाके माओवाद प्रभावित हैं और वहां माओवादी लेवी वसूल करने के लिए बिना काम किए मज़दूरी उठाने का दबाव डालते हैं, इसलिए भी काम प्रभावित होता है. वैसे कई पंचायतों में सिंचित ज़मीन और दोफसली खेती होने की वजह से काम की कमी नहीं है और लोग काम नहीं मांगते. तीन साल पहले तक सड़क बनाने और मिट्टी के अन्य काम काफी हुए. वे काम पूरे हो गए हैं. वैसे अन्य रा़ेजगार सृजन के बारे में विचार किया जा रहा है. राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता 68 वर्षीय राधाकांत बोहिदार कहते हैं, स्थानीय संसाधनों एवं ज़रूरतों के मुताबिक स्थानीय स्तर पर क़ानून बनाकर और उस पर सख्ती से अमल करके ही स्थिति में सुधार हो सकता है.

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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