दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 17.10.15

किशोरी के साथ युवक ने किया दुष्कर्म – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/rohatas/story/563504.html

दुष्कर्म का प्रयास करने के आरोप में मिली चार साल की कैद – राजेश्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/a-four-year-prison-term-was-on-charges-of-attempting-to-rape-1386475.html

जातिगत भेदभाव में जकड़ी सिनेमाई बिरादरी – सरिता

http://www.sarita.in/article/castism-cinema

धोखाधड़ी का आरोपी गिरफ्तार – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/CHH-OTH-MAT-latest-ambikapur-news-020013-2857150-NOR.html

कलेक्टर की चेतावनी बेअसर, आरजीपीऔर माखनलाल विवि ने नहीं दी जानकारी – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/lll-hh-513823

भ्रमण कर लोगों को दी कानून संबंधी जानकारी – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-balotra-news-023504-2858007-NOR.html

Please Watch:

Why This Kolkata Durga Puja is The First of Its Kind in The World

http://goo.gl/TQX7G1

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

प्रभात खबर

किशोरी के साथ युवक ने किया दुष्कर्म

http://www.prabhatkhabar.com/news/rohatas/story/563504.html

सूर्यपुरा (रोहतास) : थाना क्षेत्र के चवतिरयां गांव में गुरुवार की देर शाम शौच करने गयी महा दलित नाबालिग किशोरी के साथ एक दबंग युवक के द्वारा दुष्कर्म करने का मामला प्रकाश में आया है. 

थानाध्यक्ष म हेश प्रसाद साह ने बताया कि चवरियां गांव की रहने वाली 15 वर्षीय महा दलित नाबालिग किशोरी गुरुवार की देर शाम शौच करने  धर से बाहर गयी थी कि अकेला पा कर दबंग युवक नंद कुमार सिंह उर्फ भूलन ने उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया. 

इस मामले को ले पीडि़ता की आशा देवी ने स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी है. वहीं मामले को ले पीडि़ता के साथ ग्रामीणों ने आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की. पुलिस द्वारा मामले की छानबीन की जा रही है.

राजेश्थान पत्रिका

दुष्कर्म का प्रयास करने के आरोप में मिली चार साल की कैद

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/a-four-year-prison-term-was-on-charges-of-attempting-to-rape-1386475.html

विशिष्ट न्यायाधीश एससी-एसटी सेल अरुण कुमार अग्रवाल ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए दुष्कर्म करने का प्रयास करने के आरोपित को चार साल के कारावास एवं 5 हजार रुपए के जुर्माने की सजा से दंडित किया है।

विशेष लोक अभियोजक नरेश शर्मा ने बताया कि 12 अगस्त 2014 को गांव दिघी राजाखेड़ा की एक महिला ने महिला पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह रात्रि को दो ननदों के साथ छत पर सो रही थी।

रात्रि करीब 3 बजे प्रदीप पुत्र सुल्तान सिंह निवासी दिघी छत पर आया और दुष्कर्म करने का प्रयास किया। जाग होने पर आरोपित भाग गया।

न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आरोपित प्रदीप को चार साल के कारावास एवं 5 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।

सरिता

जातिगत भेदभाव में जकड़ी सिनेमाई बिरादरी

http://www.sarita.in/article/castism-cinema

कांस फिल्म समारोह में पुरस्कृत की गई हिंदी फिल्म  ‘मसान’ का नायक दीपक चौधरी नीची जाति का है जो अपने खानदानी पेशे को आगे बढ़ाते हुए काशी के बनारस के एक घाट में मुर्दों को जलाने का काम करता है. दीपक कसबे की लड़की शालू गुप्ता की ओर आकर्षित होता है और 1-2 मुलाकातों में ही प्रेमप्रसंग बन जाता है. एक दफा दीपक अपनी मित्रमंडली के बीच अपने प्रेम के किस्से चटकारे ले ले कर सुना रहा होता है, तभी एक मित्र बनारसी लहजे में टोकता है,  ‘‘गुरु, प्यारव्यार तो बहुत हो गया पर लौंडिया अपर कास्ट की है और तुम नीची जाति के. समझ रहे हो न? उस को अपने बारे में बता तो दिए हो न? बाद में दिक्कत हो जाएगी, पहले बताए दे रहे हैं.’’ इतना सुनते ही दीपक का चेहरा मुरझा जाता है और खुद को नीच जाति का स्वीकृत करते हुए वह कहता है कि अबे, अब की बार मिलेंगे तो बता देंगे.

बहरहाल, अगले घटनाक्रम में शालू तीर्थयात्रा से लौटते समय बस दुर्घटना में मर जाती है और दीपक को उस की लाश जलानी पड़ती है. इस तरह तथाकथित ऊंची जाति की लड़की का निम्न जाति के लड़के से फिर से मिलन नहीं हो पाता. याद आता है फिल्म  ‘शोले’ का प्रकरण. इस फिल्म का एक अनोखी और सामाजिक सरोकारी चश्मे से विश्लेषण यह भी है कि नायक जय (अमिताभ बच्चन) पिछड़ी जाति से है और उच्च वर्ण के ठाकुर की विधवा से प्रेम करने लगता है. मामला एकतरफा नहीं है. विधवा की भी इस प्रेम को मूक सहमति है. लेकिन फिल्म के निर्मातानिर्देशक में शायद समाज के जातिगत ढांचे को तोड़ने की न तो हिम्मत थी और न ही नीयत. इसलिए इन्हें मिलाने के बजाय संकीर्ण रास्ता निकाला गया और जय को मरवा दिया जाता है. अलगअलग समाज और समयकाल में रिलीज हुईं फिल्म  ‘मसान’ और  ‘शोले’ के एकजैसे दिखते प्रकरणों में जिस तरह 2 असमान जाति के लोगों को मिलाने के साहसी कदम के बजाय, नाटकीय मौत का दृश्य रचा गया है वह फिल्म इंडस्ट्री की मानसिक संकीर्णता और वहां फैली जातिगत सड़ांध की ओर इशारा करते हैं. वहां भी हिंदू धर्म के ज्यादातर पाखंड, पूजापाठ और अंधविश्वास के साथ जातिगत भेदभाव की भावना पल रही है. हर दौर में फिल्मी बिरादरी का परंपरागत रूढि़वादी तबका दलित और पिछड़े समाज को ले कर नाकभौं सिकोड़ता रहा है.

 ऊंची जातियों का दबदबा

सामाजिक सरोकारों को ले कर भारत में ढेरों फिल्में बनीं पर उन में सदियों से प्रचलित वर्ण एवं जाति व्यवस्था का चित्रण नहीं के बराबर हुआ है. सवर्ण हिंदू समाज ने पिछड़ों और दलितों को कभी अपने बराबर का मनुष्य नहीं माना. हिंदी सिनेमा का नजरिया भी दलितों के प्रति कुछ खास भिन्न नहीं है. शायद यही वजह है कि पिछले साल 300 से ज्यादा फिल्में प्रदर्शित हुईं लेकिन पिछड़े व दलित तबके के नायकों की कहानी इक्कादुक्का फिल्मों में थी, बाकी सारी फिल्मों के लीड किरदार सवर्ण, कपूर, शर्मा और चतुर्वेदी बने दिखे. किसी भी नायक का नाम न तो पासवान था, न भागवत और न ही कुशवाहा.

एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 2 वर्षों में रिलीज 400 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में मात्र 6 फिल्में थीं जिन में शीर्ष भूमिका में पिछड़े वर्ग की जाति के नायक को दिखाया गया. यह भेदभाव सिर्फ परदे तक ही सीमित नहीं है. बौलीवुड में बिरादरी का खेल भी होता है. 2013 की फिल्मों में 4 लीड अभिनेता क्रिश्चियन, 1 जैन, 3 सिख, 5 मुसलिम और बाकी 65 ऊंची जातियों से ताल्लुक रखते थे. ये आंकडे़ फिल्मों में जातिगत भेदभाव को साफ जाहिर करते हैं. देश के अन्य संस्थानों की तरह यहां भी ऊंचे पदों पर उच्च जाति के लोगों का कब्जा है और निम्न व पिछड़े तबके या तो फिल्म स्टूडियो में चपरासी का काम कर रहे हैं या फिर स्टंटमैन व स्पौटबौय की हैसियत से आगे नहीं बढ़ पाते.

हाशिए पर जनक

1913 में जब ल्युमिअर ब्रदर्स ने बाहर से आयातित रीलें भारत में दिखाईं तो इन फिल्मों को ले कर समाज, संस्कृति के ठेकेदार बड़े खिलाफ थे. तब सिनेमा को स्वीकारने के लिए उच्च जाति का कोई नुमाइंदा नहीं आया. इसे वेश्यागीरी  सरीखा काम माना जाता था. ऐसे में दादा साहब फाल्के की हरिश्चंद्र तारामती में तारामती के किरदार के लिए कोई उच्च जाति की अभिनेत्री नहीं मिली. ऐसे समय में सिनेमा की बागडोर दलित, मुसलिम और एंग्लोइंडियन परिवारों के स्त्रीपुरुष कलाकारों ने संभाली. सिनेमा जैसे माध्यम को दलित, पिछड़े तबके ने अपने खूनपसीने से सींचा और इस सिनेमाई पौधे के फल देने लायक होते ही, इस का विरोध करने वालों को इस में अचानक से कलासंस्कृति के नजारे दिखने लगे, और वे इस में घुसपैठ करने लगे. और उस तबके को हाशिए पर खड़ा कर दिया जिस ने इस माध्यम को खड़ा किया था. आज कोई उस अभिनेत्री का नाम  नहीं जानता जिसे मात्र डालडा के विज्ञापन में काम करने के चलते सोसायटी से यह कह कर निकाल दिया गया था कि यहां शरीफ रहते हैं.

 कपूर, बजाज और सिंघानिया

फिल्म बजरंगी भाईजान में सलमान के किरदार का नाम पवन चतुर्वेदी है जो एक दृश्य में बाल कलाकार के गोरी होने के चलते उसे उच्च जाति से जोड़ते हुए कहता है कि गोरी है, ब्राह्मण होगी. यह अकेला संवाद हिंदी फिल्मों में जातिगत भेदभाव, संभ्रांत वर्ग की दलितों और पिछड़ों के प्रति नस्लीय विचारधारा को उजागर करने के लिए काफी है. अकसर फिल्मों के नायकों की जाति उच्च वर्ण की होती है. कभी हीरो खुद को आदित्य बजाज बताता है तो कभी राहुल सिंहानिया, कभी सचिन गुप्ता तो कभी मनोहर लाला. जिन के नामों में जाति का उल्लेख नहीं होता उस का चरित्रचित्रण पूरा सवर्ण हिंदू मर्द जैसा ही होता है. कुछ फिल्मों में अगर कोई दलित या पिछड़ा चरित्र होगा भी, तो दलित पात्र हमेशा पीडि़त, शोषित और न्याय की गुहार के लिए दरदर भटकता दिखेगा. उस का कल्याण भी किसी सवर्ण के ही हाथों होता है. शायद इसलिए दक्षिण के एक डौक्यूमैंट्री फिल्मकार ने अपनी फिल्म का टाइटल ‘डोंट बी अवर फादर्स’ रखा. असल जीवन में भी सवर्ण कलाकारों का ही दबदबा है. पिछड़ों के नाम पर सीमा बिस्वास, रघुवीर, राजपाल यादव, राजकुमार यादव व कैलाश खेर जैसे नाम हैं. मुसलिमों में भी खानों का ही दबदबा है. समकालीन हिंदी सिनेमा में किसी बड़े दलित अभिनेताअभिनेत्री का नाम याद नहीं आता.

दैनिक भास्कर

धोखाधड़ी का आरोपी गिरफ्तार

http://www.bhaskar.com/news/CHH-OTH-MAT-latest-ambikapur-news-020013-2857150-NOR.html

रामानुजगंज क्षेत्र में पत्रकारिता के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने सहित अन्य कई मामलों में शामिल एक युवक को बलरामपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। युवक द्वारा नौकरी लगाने के नाम पर एक बेरोजगार से दो लाख रुपए वसूल किए गए थे। उक्त रकम से खरीदा गया सामान भी पुलिस ने जब्त कर लिया है आरोपी के कुछ साथी भी दो वारदातों में उसके साथ शामिल रहे हैं, जो अभी फरार है।

एसपी सदानंद कुमार ने बताया है कि रामानुजगंज वार्ड क्रमांक 13 निवासी वसीम बारी पिता सफीउल्लाह 37 वर्ष के खिलाफ यह शिकायत आ रही थी कि पत्रकारिता की धौंस दिखाकर लोगों से रुपए वसूलता है। उसके खिलाफ अगस्त में विजयनगर चौकी में जसवंत िसंह निवासी गम्हरिया द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वसीम ने अपने साथी इरफान अंसारी निवासी गम्हरिया के साथ मिलकर जसवंत सिंह से डराधमका कर 10 हजार रुपए की मांग की थी। मामले में दोनों के खिलाफ धारा 341, 294, 384, 385, 506 व एसटी, एससी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था।

इसी प्रकार वसीम ने 2011 में हारून रशीद 26 वर्ष निवासी पोखरी, बरवाडीह, झारखंड से नौकरी लगाने के नाम 2 लाख रुपए वसूल किया था। इसमें भी रामानुजगंज थाने में वसीम के खिलाफ धारा 420 के तहत अपराध दर्ज हुआ था। इसके अतिरिक्त शिवशंकर सिंह के साथ मारपीट करने व जान से मारने की धमकी देने के मामले में रामानुजगंज थाने में वसीम व उसके साथियों के खिलाफ 120 बी, 294, 506, 34 के अपराध दर्ज हुआ था। पुलिस उसे तलाश रही थी। इसी बीच सूचना पर शुक्रवार को पुलिस ने वसीम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वसीम के घर से फ्रीज, टीवी, स्केनर प्रिंटर, बाइक, यूपीएस, दो मोबाइल व अन्य सामान जब्त किया है।

नई दुनिया

कलेक्टर की चेतावनी बेअसर, आरजीपीवी और माखनलाल विवि ने नहीं दी जानकारी

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/lll-hh-513823

एससी, एसटी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति रिपोर्ट सौंपने की मियाद पूरी

भोपाल (नप्र)। कलेक्टर निशांत वरवड़े की चेतावनी भी राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि (आरजीपीवी) औऱ माखनलाल चतुर्वेदी विवि पर बेअसर रही। इन संस्थानों ने अपने यहां पढ़ने वाले एससी-एसटी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति रिपोर्ट नहीं सौंपी जबकि इसके लिए शुक्रवार की समय सीमा तय की गई थी।

दरअसल, प्रदेश भर के कॉलेजों में एससी व एसटी के छात्रों को छात्रवृत्ति बांटने में फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आई थी। इस सिलसिले में हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी लगी है। कोर्ट ने बीते पांच साल में दी गई छात्रवृत्ति की जांच करने के निर्देश आदिम जाति कल्याण विभाग को दिए थे।

जांच में मिले 21 छात्र

आदिम जाति कल्याण विभाग ने जिले में स्थित कॉलेजों में छात्रवृत्ति दस्तावेजों की जांच की। इसमें 21 विद्यार्थियों के दोहरे आवेदन या छात्रवृत्ति लेने के मामले सामने आए। इसके बाद विभाग ने भी 149 कॉलेजों से 20 बिंदुओं के आधार पर जानकारी मांगी थी। यह रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की जाना है।

कलेक्टर ने दी थी एफआईआर की चेतावनी

कलेक्टर ने पिछले हफ्ते इस मामले की समीक्षा की थी। इस दौरान बताया गया कि 149 में से 110 कॉलेजों ने तय फॉर्मेट में जानकारी भेज दी थी। कलेक्टर ने एक हफ्ते में जानकारी न देने पर बाकी 39 कॉलेजों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 21 कॉलेजों ने रिपोर्ट भेज दी थी। विभाग ने बचे 18 कॉलेजों को आखिरी मौका देते हुए शुक्रवार तक जानकारी देने के लिए कहा था। इनमें से बीएसएसएस, भाभा इंजीनियरिंग कॉलेज, आईईएस कॉलेज, मल्होत्रा कॉलेज, राधारमण कॉलेज, आरकेडीएफ इंस्टीट्यूट, वीएनएस इंस्टीट्यूट, स्कोप कॉलेज, श्री इंस्टीट्यूट समेत 16 संस्थानों ने रिपोर्ट सौंप दी।

सोमवार तक की मोहलत

आरजीपीवी और माखनलाल चतुर्वेदी विवि ने रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इन्हें सोमवार तक का मौका दिया जा रहा है। वहीं, गलत प्रपत्र में जानकारी भेजने वाले 21 संस्थानों को सुधार के लिए समय दिया जा रहा है।

नरेंद्र अवस्थी, प्रभारी सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग

दैनिक भास्कर

भ्रमण कर लोगों को दी कानून संबंधी जानकारी

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-OTH-MAT-latest-balotra-news-023504-2858007-NOR.html

सचलविधिक सेवा केंद्र एवं मोबाइल वैन के माध्यम से शुक्रवार को एसटी-एससी एवं पीड़ित प्रतिकर के लिए गठित विधिक जागरूकता टीमों की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर आमजन को कानूनी जानकारियां दी गई। पूर्णकालिक सचिव अनिता सिंदल ने बताया कि शहर के कुल 6 स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इनमें पुराना बस स्टैंड, सब्जी मंडी के पास, बीपीएल क्वार्टर में एसटी-एसटी जागरूकता टीम के सदस्य अधिवक्ता नारायणसिंह लालाणा, रूगाराम कड़वासरा, पैरालीगल वॉलेंटियर मूलदान आशिया पंकज सांखला ने लोगों को एसटी-एससी संबंधित कानूनी जानकारियां देते हुए पंपलेट्स वितरित किए। इसी प्रकार पीड़ित प्रतिकर स्कीम के लिए गठित टीम की ओर से सांसी कॉलोनी, जोधपुर रोड दूध डेयरी के पास जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में टीम के सदस्य अधिवक्ता राजेंद्रसिंह कंवरली, नारायणसिंह भाटी, रूगाराम कड़वासरा, सोनिया गौड़, पैरालीगल वॉलेंटियर मूलदान आशिया पंकज सांखला की ओर से आमजन को कानूनी जानकारी के पंपलेट्स वितरित किए गए। यह कार्यक्रम राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष गोविंदप्रसाद गोयल पूर्णकालिक सचिव अनिता सिंदल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

श्रमिकोंको भी बताए उनके अधिकार : किसानट्रैक्टर नया बस स्टैंड पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। पूर्णकालिक सचिव अनिता सिंदल ने बताया कि शिविर में विधिक जागरूकता टीम के सदस्य अधिवक्ता संपत सिंह खारवाल, राजीव सारण, पैरालीगल वॉलेंटियर पंकज सांखला मूलदान आशिया ने भाग लिया। शिविर में लेबरों को दैनिक मजदूरी अधिनियम, लेबरों के कार्यस्थल, प्रतिमाह अवसर स्थानों पर लंच के समय या अवकाश के बारे में जानकारी दी गई।

बालोतरा. कानूनी जानकारी छपे पंपलेट्स बांटते जागरूकता टीम के सदस्य। 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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