दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 15.10.15

ऑपरेशन भूमिहार: दबंगों के डर से दलितों की बस्ती 60 सालों में नहीं कर सकी वोट – ए बी पी न्यूज़

http://abpnews.abplive.in/ind/2015/10/15/article740396.ece/bihar-election–opration-bhumihar

शिक्षक ने शादी का झांसा देकर किशोरी से किया दुराचार – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/pratapgarh/pratapgarh-crime-news/crime-news-hindi-news-499/

गर्ल फ्रेंड से पीछा छुड़ाने के लिए प्रेमी ने रची खौफनाक साजिश – पंजाब केसरी

http://punjab.punjabkesari.in/barnala/news/girlfriend-to-get-rid-of-the-creepy-plot-hatched-by-boyfriend-404566

युवती की शिकायत पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-GUNA-MAT-latest-guna-news-022504-2842917-NOR.html

आरक्षण के समर्थन में सड़क पर उतरा दलित समाज – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-shajapur-news-053542-2847772-NOR.html

तालसर सरपंच एवं दुष्कर्म पीडता का अनषन शुरू – प्रेस नोट

http://www.pressnote.in/Jaisalmer-Barmer-News_290898.html

Please Watch:

Castes in India: Their Mechanism, Genesis and Development by B. R Ambedka

https://www.youtube.com/watch?v=Bt9MLBa11bo

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

ए बी पी न्यूज़

ऑपरेशन भूमिहार: दबंगों के डर से दलितों की बस्ती 60 सालों में नहीं कर सकी वोट

http://abpnews.abplive.in/ind/2015/10/15/article740396.ece/bihar-election–opration-bhumihar

बिहार में पहले चरण का चुनाव हो चुका है. दूसरे चरण का मतदान 16 अक्टूबर को है. 16 तारीख का इंतजार जहानाबाद के उन 10 गांव के दलित और पिछड़ी जातियों के लोग भी कर रहे हैं जिन्हें आज तक दबंगों ने कभी वोट डालने नहीं दिया. वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिये गए लोग क्या इस बार वोट दे पाएंगे?

8pm bhumihar

 बिहार के जहानाबाद जिले का घोषी विधानसभा क्षेत्र

घोषी के 10 गांव ऐसे हैं जहां आज तक दलित और पिछड़ी जातियों के मतदाताओं को वोट देने नहीं दिया गया. एबीपी न्यूज पहुंचा ऐसे तीन गांवों में जहां आजादी के 67 साल बाद भी दबंगों के डर से अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए ये लोग. क्या इस बार ये अपना वोट दे पाएंगे?

अस्सी साल के दो बुज़ुर्ग, दो अलग अलग गांव के वासी, दो अलग व्यक्ति, दोनों मानों एक हकीकत को जीने को मजबूर. दोनों की उम्र भारतीय गणराज्य से भी ज्यादा, मगर दोनों ने एक बार भी वोट नहीं किया. वोट तो छोडिये, इन्हें ये भी नहीं मालूम के बैलट पेपर या EVM कैसा दिखता है? घोषी विधानसभा क्षेत्र जहां के 10 गांव के निवासी पिछले चार दशकों से भी ज्यादा और कुछ मामलों में आजादी से अब तक ये जीवन जीने को श्रापित हैं.

“प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई बार इस बात की दुहाई दी है कि 67 साल से देश में विकास नहीं हुआ. हालांकि के वो ये भूल जाते हैं के इसमें NDA के 6 साल और उनके अपने डेढ़ साल शामिल हैं. मगर हम आपको जो दास्तां बताने जा रहे हैं उसमे ये जानने की कोशिश करेंगे के आज़ादी के 67 साल बाद भी कुछ लोग वोट क्यों नहीं दे पाए हैं ? 67 सालों में 10 गांव सिर्फ 2 किलोमीटर का फासला क्यों तय नहीं कर पाए? किसने रोका और उन्हें महरूम किया उनके बुनियादी अधिकारों से. 

घोषी विधानसभा क्षेत्र पर जगदीश शर्मा के परिवार का कब्ज़ा रहा है. वो जगदीश शर्मा जो चारा घोटाले में दोषी पाए गए . वे जगदीश शर्मा जो 2009 से 2014 के बीच जहानाबाद से सांसद भी थे. जिनके बेटे राहुल कुमार अब घोषी से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं और वे इस बार NDA के उम्मीदवार हैं. जीतन राम मांझी के हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा की तरफ से. कुछ लोग जगदीश शर्मा को मौसम विज्ञानी भी कहते हैं. क्योंकि ये अक्सर सत्ता के करीब रहते हैं और यही वजह है कि इनकी विधानसभा के तहत 10 गांवों के लोगों के प्रजातांत्रिक अधिकारों के साथ जो होता रहा उसे सबने नज़रंदाज़ किया. 

हमारी कहानी का आग़ाज़ होता है अल्लालपुर के शिवमंदिर के बाहर बैठे कुछ बुजुर्गों और कुछ युवाओं के साथ. इनमे उम्र का एक लम्बा फासला, मगर सबकी किस्मत एक.

तो अगर इन लोगों को दुसरे गांव के लोग वोट डालने नहीं देते, तो फिर उनके गांव में इसका इंतज़ाम क्यों नहीं किया जाता ? हमने थोडा आगे सफ़र किया तो पाया के यहां एक स्कूल है और इनकी वोटिंग का इंतज़ाम इन्ही के गांव में बाकायदा किया जा सकता है, मगर हैरत है 67 सालों से चली आ रही इस समस्या पर ध्यान किसी का नहीं गया ?

स्कूल के बाहार मुलाक़ात अस्सी साल के बुज़ुर्ग से हुई. आंखों में मानों 80 सावन के दर्द का बोझ, एक उम्मीद जो हरसाल बिखरती चली गयी.

क्या अस्सी साल के बुज़ुर्ग की हसरत इस साल भी अधूरी रह जाएगी? गांव में दाखिल होते ही हमें बच्चे दिखाई दिए  ताश खेलते हुए . इस बात से बेखबर के हालत नहीं बदले तो इनकी भी किस्मत में यही लिखा हुआ है.

अल्लालपुर के गांव की महिलाओं से जब हमने बात की तो मानो सारा गुबार निकल पड़ा. कहती हैं जब मर्दों को वोट नहीं देने दिया जाता तो हमारी क्या बिसात ?

अल्लापुर जैसे गांवों का बुरा सपना यहां ख़तम नहीं होता. इसके बाद जो हमने देखा, उस पर तो विश्वास करना भी मुश्किल था. मगर सबूत आपके सामने है. लिहाजा इससे बचना कैसा ? यहां हमने बिजली के खम्बे देखे मगर तारें नदारद.

परतें धीरे धीरे खुलती जा रही थीं और हर परत से खुलने वाली तस्वीर पहले से ज्यादा बदनुमा. अल्लालपुर से हम बढ़े एक और गांव पाखर बीघा की ओर . हमारी गाडी यहां की धुल से सनी सड़कों पर रूकी तो इस यादव बहुल गांव में भी तस्वीर हैरान करने वाली. यहां हमारी मुलाक़ात एक और अस्सी साल के बुज़ुर्ग से हुई और उनका ग़म भी वही.

यहां मालूम हुआ के हिंसा सिर्फ पोलिंग बूथ पर नहीं, कुछ मामलों में, वोट देने वालों के घर में घुसकर उनको मारा जाता था. और हैरत की बात ये की यह एक यादव बहुल गांव है. और अगर अब भी आपको इस खबर ने नहीं झकझोरा है तो अब हम आपको जो बताने वाले हैं वो अविश्वसनीय मगर सत्य की दास्तां है. घोषी थाणे में हम मिले दो चौकीदारों से. कहने को पुलिस में , मगर इन्हें भी वोट नहीं देने दिया गया.

और यह दास्तां सिर्फ इन दो गांवों या इन चौकीदारों तक सीमित नहीं . ABP न्यूज ने पाया कि कम से दस गांवों की यही दशा है और यह तो सिर्फ एक विधानसभा सीट घोषी का यह हाल है. ABP को स्थानीय सूत्रों से कुछ चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं. हमारे सामने फेहरिस्त थी उन तमाम गांवों की और उनमे बसने वाली जातियों की जिन्हें वोट नहीं देने दिया गया.

1.पत्लापुर पोखर से पासवान

  1. होरिल बाघिचा से यादव और विन्द
  2. वाजितपुर से यादव और बढई
  3. मीरा पैठ से रवानी और चंद्रवंशी
  4. डैडी से मुसहर
  5. बना बीघा से भुइया रविदास और रवानी
  6. सोनवा से मुसहर
  7. नगवा से यादव और पासवान
  8. कुर्रे से पासवान और रविदास
  9. चिर्री से रविदास मुसहर और यादव

अब आप यह जानना चाहेंगे के आखिर उस गांव का वो पोलिंग बूथ कैसा है जहां इन सबका वोट पड़ता है . धुरियारी गांव दरसल पाखर बीघा गांव से चंद कदमों की दूरी पर है.

मामला संगीन था, लिहाजा हम पहुंचे जहानाबाद के DM मनोज कुमार सिंह के पास जो प्रधानमंत्री मोदी की अगली रैली की तैयारी में मशगूल थे. हमने पुछा उनसे कि पोलिंग बूथ इन लोगों के अपने गांव में क्यों नहीं मुहैया कराया जाता है?

DM मनोज कुमार सिंह ने कहा ‘देखिये पोलिंग बूथ कहां हो या कैसे हों. वह सबसे मंत्रणा करके बनाया जाता है, मगर मैं आपको आश्वासन देता हूं कि मेरी निगाह हर गांव के हर घर पर है . और उन्हें वोट देने से कोई नहीं रोक सकता है.’

यह तस्वीर वाकई हताश कर देने वाली है. क्योंकि आज़ादी के 67 साल बाद भी कोई वोट न दे पाए तो हम क्या करें? क्योंकि न सिर्फ हमें अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए बल्कि यह भी देखना होगा के दुसरे इसका इस्तेमाल कर पायें.

अमर उजाला

शिक्षक ने शादी का झांसा देकर किशोरी से किया दुराचार

http://www.amarujala.com/news/city/pratapgarh/pratapgarh-crime-news/crime-news-hindi-news-499/

एक शिक्षक ने किशोरी को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुराचार किया। पीड़िता ने इस मामले में एसपी से फरियाद करते हुए कार्रवाई की मांग की है। इलाके के एक युवक की बतौर सहायक अध्यापक कुंडा इलाके के प्राथमिक विद्यालय पर तैनाती है।

क्षेत्र के एक गांव की दलित किशोरी का आरोप है कि उसने शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बना लिया। किशोरी गर्भवती हो गई तो उसने शिक्षक पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। शादी के नाम पर शिक्षक उससे दूर भागने लगा। पीड़िता ने मामले की शिकायत लेकर कुंडा पुलिस को घटना की तहरीर दी, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। अब उसने एसपी से शिकायत की है। एसपी ने मामले की जांच के लिए कोतवाली पुलिस को निर्देश दिया है।

पंजाब केसरी

गर्ल फ्रेंड से पीछा छुड़ाने के लिए प्रेमी ने रची खौफनाक साजिश

http://punjab.punjabkesari.in/barnala/news/girlfriend-to-get-rid-of-the-creepy-plot-hatched-by-boyfriend-404566

भवानीगढ़ (कांसल): गांव बखोपीर से 2-3 अक्तूबर की रात को घर से गायब दलित वर्ग की नाबालिग लड़की का शव नहर में से मिला है।  गांव बखोपीर की महिला ने पुलिस को बताया था कि अज्ञात व्यक्ति उसकी 16-17 वर्ष की  लड़की को विवाह का झांसा देकर घर से भगा कर ले गया है।  लड़की की तलाश में जुटी पुलिस ने इस मामले में कुछ व्यक्तियों को हिरासत में लिया।  तब जाकर लड़की के घर से गायब होने की गुत्थी सुलझ गई।

जानकारी के अनुसार घर से गायब नाबालिग लड़की के सुखचैन सिंह चैनी निवासी गांव दप्फतरीवाला थाना घग्गा से प्रेम संबंध थे। लड़की ने अपने उक्त प्रेमी को उसके साथ विवाह करवाने के लिए कहा पर वह इसके लिए राजी नहीं था। उक्त व्यक्ति ने लड़की से अपना पीछा छुड़वाने के लिए यह साजिश रची।

विवाह करवाने के लिए रजामंद होने का नाटक कर वह लड़की को घर से भगाकर ले गया । उसने उसकी नहर में धक्का देकर हत्या कर दी। पुलिस ने गत देर शाम लड़की का शव एक नहर में से बरामद किया और लड़की का पोस्टमार्टम करवाने के  उपरांत लड़की का शव परिजनों को सौंप दिया। 

दैनिक भास्कर

युवती की शिकायत पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज

http://www.bhaskar.com/news/MP-GUNA-MAT-latest-guna-news-022504-2842917-NOR.html

गुना। | आरोन थाना क्षेत्र में एक युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ ज्यादती का मामला दर्ज किया है। ग्राम खजूरी निवासी आरोपी प्रहलाद सिंह रघुवंशी पर बुरी नियत से हाथ पकड़ा। आरोपी पर दलित युवती से छेड़छाड़ करने पर हरिजन एक्ट की धारा में अपराध दर्ज किया है। 

दैनिक भास्कर

आरक्षण के समर्थन में सड़क पर उतरा दलित समाज

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-shajapur-news-053542-2847772-NOR.html

आरक्षण पर विचार करने की जरूरत बताते हुए आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत करने वाले संघ प्रमुख मोहन भागवत को लेकर दलित समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। आरक्षण हटाने के विरोध में बुधवार को शाजापुर बस स्टैंड पर आयोजित सभा के दौरान दलित समाज के लोगों ने सीधे संघ प्रमुख पर निशाना साधा। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि आरक्षण मोहन भागवत के बाप की जागीर नहीं है जो उसके कहने पर हटा दिया जाए। समाजजनों ने सीधे चेतावनी दी कि यदि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दलितों को दिलाए गए संवैधानिक अधिकार को छीनने की कोशिश की गई तो देश के करोड़ों दलित व पिछड़े लोग सड़कों पर उतर आएंगे।

आरक्षण बचाओ समिति के तत्वावधान में दोपहर करीब 12 धोबी चौराहे से रैली शुरू हुई। इसमें करीब डेढ़ से दो हजार समाजजन शामिल हुए। पैदल व वाहन रैली के रूप में समाजजन िवभिन्न मार्गों से होकर बस स्टैंड पहुंचे। यहां सभा को संबोधित करते हुए दलित नेता राजेश सौराष्ट्रीय ने आरक्षण के मुद्दे को उठाने वाले संघ प्रमुख मोहन भागवत को चेतावनी दी। उन्होंने कहा आरक्षण का लाभ सही मायने में तो अब तक दलितों को मिला ही नहीं है। इसे समाप्त करने की बात तो दूर, अब एेसी अफवाह भी मत फैलाना। अजाक्स शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रांताध्यक्ष रामप्रसाद परमार, अजाक्स जिलाध्यक्ष रमेशचंद्र बगाना, जपं विधायक प्रतिनिधि संतोष बराड़ा, युवा कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता नरेश कप्तान, राजेश पारछे, राधेश्याम मालवीय आदि ने संबोधित किया। सभा के बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार एस.एल. शाक्य को सौंपा। संचालन अंबाराम राजाेरिया ने किया। आभार उमाकांत धारिया ने माना।

आरक्षण नहीं, प्रतिनिधित्व चाहिए- आष्टा से आए दलित नेता जगदीश द्रविड़ ने बताया दलितों के मसीहा डॉ. अांबेडकर ने संविधान में आरक्षण नाम का शब्द ही नहीं जोड़ा था। उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए प्रतिनिधित्व देने की बात कही थी। प्रतिनिधित्व से उनका मतलब हर क्षेत्र में दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का मौका देना था। लेकिन कुछ स्वार्थी लोगों ने इस शब्द को हटाकर आरक्षण शब्द दे दिया और अब उसे भी समाप्त करने की रणनीति बनाने में लगे हैं। लेकिन यह दलितों का मौलिक अधिकार है जिसे कोई नहीं छीन सकता।

पुलिस की सख्ती समझ से परे- रैली को लेकर इस बार पुलिस कुछ ज्यादा ही सख्त दिखाई दी। रैली के पूरे रास्ते भर आगे और पीछे पुलिस बल घूमता रहा। बाद में सभा स्थल पर पूरी तैयारी के साथ बस स्टैंड पर जमा हो गए।

पुलिस ने सभा स्थल को चारों तरफ से घेरे रखा।

सवर्ण लोग सड़कों पर झाडू लगाना शुरू कर देंगे तो हम स्वतः ही आरक्षण छोड़ देंगे

आष्टा के जीवन राय द्रविड़ ने बताया कि संघ प्रमुख भागवत को सिर्फ दलितोें को मिलने वाला आरक्षण ही दिखाई देता है। लेकिन देशभर में फैली जाति व्यवस्था उन्हें दिखाई नहीं देती। यदि आरक्षण समाप्त ही करना है तो सवर्ण से सड़कों पर झाडू और मंदिरों में दलितों से पूजा करना शुरू करा दो। जिस दिन ऐसा हो जाएगा दलित स्वत: ही आरक्षण छोड़ देगा।

रैली और सभा को प्रभावित करना पुलिस का कतई उद्देश्य नहीं था। वैसे पुलिस को सूचना मिली थी कि सभा के बाद कुछ शरारती तत्व पुलिस के खिलाफ आंदोलन कर सकते हैं। पुलिस के खिलाफ आंदोलन करने के दौरान शहर की शांति भंग न हो इसको ध्यान में रखते हुए बल तैनात किया था। वैसे फिलहाल त्योहारी सीजन के चलते जिले में वैसे भी धारा 144 लागू है इसका भी सख्ती के पालन कराया जाना है। राजेंद्र वर्मा, टीआई पुलिस कोतवाली शाजापुर 

एक्स्ट्रा शॉट : हंगामे की आशंका थी

आरक्षण बचाओ रैली के मामले में चार दिन पहले टंकी चौराहे पर लगाए गए एक फ्लेक्स को फाड़ने के मामले में दलित समाज के संतोष बराड़ा जो जपं में भाजपा विधायक अरुण भीमावद के प्रतिनिधि हैं, फ्लेक्स फाड़ने वाले पर कार्रवाई करने की मांग लिए थाने पहुंचे थे। इस दौरान उनकी मौजूद पुलिस अधिकारियों से बहस हो गई और बाद में पुलिस ने बराड़ा की पिटाई की उसे थाने में बंद कर दिया था। इस मामले को लेकर पुलिस को डर था कि सभा के बाद कहीं लोग पुलिस के खिलाफ आंदोलन खड़ा कर दें। क्योंकि सभा के दौरान यदि मौजूद लोगों का गुस्सा पुलिस पर फूट पड़ता तो शहर में हंगामे की स्थिति बन जाती और पुलिस चाहकर भी स्थिति को नहीं संभाल पाती। आगामी त्योहारों के दौरान भी पुलिस को शहर का माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखना चुनौती बन जाता। 

रैली के बाद बस स्टैंड पर हुई सभा में मौजूद समाजजन। इनसेट संबोधित करते दलित समाज के नेता।

प्रेस नोट

तालसर सरपंच एवं दुष्कर्म पीडता का अनषन शुरू

http://www.pressnote.in/Jaisalmer-Barmer-News_290898.html

बाडमेर । दलित अत्याचार निवारण समिति की बैनर तले दो सूत्री मांगों को लेकर बुधवार से तालसर सरपंच एवं दुष्कर्म पीडता ने क्रमिक अनषन शुरू किया। त्वरित एवं गंभीर कार्यवाही नहीं होने के विरोध में जिला मुख्यालय पर दसवें दिन धरना जारी रहा। दलित अत्याचार निवारण समिति ने जल्दी मांगे नहीं माने जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

दलित अत्याचार निवारण समिति के जिला संयोजक उदाराम मेघवाल की अगुवाई में मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में बताया कि चौहटन डीएसपी ने आरोपी से मिलकर उनकी मदद कर रहे है। इस मामले में बलात्कार के प्रकरण की धारा हटाई गई है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति की महिला सरपंच को अपने विधिक अधिकारों की लडाई के लिए क्रमिक अनषन पर बैठना पडा। पूर्व सरपंच जवानाराम, सुमित्रा देवी, रणवीरसिंह, ग्रामसेवक चेतनराम एवं रोजगार सहायक सूजाराम ने षडयंत्र रचकर सरकारी रिकार्ड में हेराफेरी करने के साथ अनुसूचित जाति की तीसरी संतान के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इस संबंध में महिला सरपंच ने सेडवा पुलिस स्टेषन में मामला दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया। लेकिन पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज नहीं किया। मेघवाल ने बताया कि सरपंच पुलिस अधीक्षक बाडमेर को रिपोर्ट देकर मामला दर्ज करने का निवेदन करेगी। उन्होंने मांगे नहीं माने जाने पर महिला सरपंच द्वारा आमरण अनषन पर बैठने की चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि भाजपा राज में बाडमेर जिले की जिला प्रमुख एवं प्रधानों के साथ उनके अधिकारों को लेकर कुठाराघात हो रहा है।

मेघवाल ने बताया कि वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में दलितों पर होने वाले अत्याचारों का बदला आने वाले चुनावों में दिया जाएगा। उन्होंने मांगे नहीं माने पर आंदोलन को तेज करने की चेतावनी देते हुए बताया कि आने वाले समय में आंदोलन को संभालना मुष्किल हो जाएगा। पुलिस प्रशासन जानबुझकर हमारे अहिंसक आन्दोलन व दलितो को भडकाने पर तुली हुई है। जिससे अम्बेडकर वादी मिशन के लोग किसी भी सूरत मे बरदास्त नही करेंगें। उनके अनुसार आने वाले दिनो में मुख्यमंत्री के बाडमेर जिले के तीन दिवसीय दौरें के दौरान जहां भी मुख्यमंत्री का भ्रमण कार्यक्रम होगा। वहां पर दलित महिलाओ एवं पुरूष काले झण्डे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करेगें। मेघवाल के कहा कि सम्पूएार् राजस्थान में कानून एवं व्यवस्था चरमरागई है। और दबंगों एवं गुण्डेतत्वों ने कानूनव्यवस्था को अपने हाथ मे ले लिया है। पुलिस व प्रशासन मूक दर्शक होकर तमाशा देख रहे है। इस अवसर पर हरखाराम मेघवाल, सामाजिक कार्यकर्ता मंगलाराम, मामाराम तंवर, सवाईराम, अमराराम, रामाराम, टाउराम, मूलाराम, मलकू चौहान, सग्राम तालसर, इन्द्रादेवी, वगताराम, कानाराम, किषन कागा, थानाराम, जोगराजसिंह, विरधाराम, तोगाराम समेत कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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