दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 10.10.15

प्रीति मामले के पीड़ित अजीत ने किया मुआवजे का दावा, कहा झूठे केस में बरबाद हो गया कैरियर – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/story/554348.html

तीन गांवों के लोगों को बसाना भूल गई सरकार – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/HIM-OTH-MAT-latest-kullu-news-020505-2810377-NOR.html

धान की सूखी फसल ने ले ली दलित किसान की जान – हिन्दुस्तान

http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1-story-498667.html

दलित समाज आज भी सम्मान से वंचित – दैनिक भास्कर 

http://www.bhaskar.com/news/MP-UJJ-MAT-latest-ujjain-news-061038-2816622-NOR.html

दलितों का पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-BARM-MAT-latest-barmer-news-045547-2816190-NOR.html

कांशीराम ने दलितों का उत्‍थान किया – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/chandauli/dalits-uplifted-by-kanshiram-hindi-news/

दनकौर, नोएडा की पुलिस द्वारा दलित उत्पीड़न की शर्मनाक घटना के खिलाफ धरना – हस्तक्षेप

http://www.hastakshep.com/hindi-news/from-states/uttar-pradesh/2015/10/10/dankaur-noida-dalit-oppression-by-the-police-picket

Please Watch:

Vincent Manoharan –

The Untouchables of India

https://www.youtube.com/watch?v=zYuHEoXA1aU

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

प्रभात खबर

प्रीति मामले के पीड़ित अजीत ने किया मुआवजे का दावा, कहा झूठे केस में बरबाद हो गया कैरियर

http://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/story/554348.html

रांची: जीवित लड़की की हत्या के आरोप में अजीत पांच माह तक जेल में पड़ा रहा. इस दौरान आइटीबीपी में उसका चयन कांस्टेबल के लिए हो चुका था. जेल में होने की वजह से उसका मेडिकल नहीं हो सका. अंतत: आइटीबीपी की नौकरी भी हाथ से चली गयी. 

जेल जाने के पूर्व वह प्राइवेट जॉब करता था और परिवार चलाता था. उसकी नौकरी भी चली गयी. अब वह निर्दोष साबित हो चुका है, लेकिन कहीं नौकरी नहीं मिल रही है. शर्म से वह मुहल्ले में भी नहीं निकलता है. इस तरह दलित परिवार से आने वाले अजीत का कैरियर चौपट हो गया. अब अजीत ने सरकार पर मुआवजा व नौकरी का दावा ठोंका है. पिछले दिनों सीएम के जनता दरबार में भी उसने नौकरी की गुहार लगायी. प्रधानमंत्री, हाइकोर्ट के मुख्य न्यायधीश, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व डीजीपी से भी वह गुहार लगा चुका है.

जब हत्या ही नहीं हुई, तो सजा क्यूं: अजीत के अनुसार सेना में जाकर वह देश सेवा करना चाहता था. इसी वजह से उसने आइटीबीपी की बहाली में हिस्सा लिया था, जिसमें उसका  चयन भी हो गया था. लड़की की हत्या हुई ही नहीं थी, लेकिन उसकी हत्या के आरोप में उसके साथ अभियमन्यु व अमरजीत को जेल भेज दिया गया. उसका कहना है: अाखिर यह किसका दोष है, एक दलित का कैरियर चौपट करने का गुनाहगार कौन है. अब वह परिवार का भरण-पोषण कैसे करेगा.  

क्या है मामला

15.2.2014 को चुटिया से प्रीति नामक लड़की गायब हो गयी थी. इससे संबंधित सनहा चुटिया थाने में प्रीति के पिता सुरेश सिंह ने दर्ज करायी थी. उसी दिन बुंडू में एक अज्ञात युवती की अधजली लाश मिली थी. इस मामले में 17.2.2014 को अजीत को पेंटालून मॉल में बुला कर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उसकी पिटाई की गयी थी. यहां तक की बिजली के झटके भी दिये गये थे. उस पर दबाव डाला जा रहा था कि वह कबूले कि उसने प्रीति की हत्या की है. पुलिस ने जबरन उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर भी करवाया. 19.2.2014 को उसे जेल भेज दिया गया. 

लड़की जिंदा होकर आ गयी

14.6.14 को लापता लड़की प्रीति कुमारी रिम्स में पायी गयी. 18.6.14 को प्रीति ने कोर्ट में बयान दिया कि वह अपनी मरजी से कहीं चली गयी थी. अपने जीवित रहने के बारे में उसे अपने पिता सुरेश सिंह को भी बताया था. पुलिस द्वारा अपनी भूल स्वीकार करते हुए दोबारा अंतिम प्रपत्र 19.6.14 को कोर्ट में दिया गया. इसके बावजूद उसकी रिहाई 26.7.14 को हुई.  अजीत ने कहा कि उसने पुलिस और लड़की के पिता के खिलाफ चुटिया थाने में 13.10.14 को प्राथमिकी भी दर्ज करायी है. वहीं हाइकोर्ट में मानहानि का केस भी किया है, जो अभी विचाराधीन है.

दैनिक भास्कर

तीन गांवों के लोगों को बसाना भूल गई सरकार

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देशके सात राज्यों को रोशन करने के लिए सरकार और भारत सरकार के उपक्रम निर्माता कंपनी एनएचपीसी ने सैंज घाटी के तीन दलित गांवों को उजाड़ तो दिया लेकिन उन्हें बसाना भूल गया और अब उन परिवारों को अपने हक हकूकों को पाने के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।

 सरकार प्रशासन भले ही दलितों के हितों की जितनी भी बात करे लेकिन धरातल पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। कुल्लू जिला के सैंज घाटी की ही बात करें तो एनएचपीसी की जल विद्युत परियोजना चरण दो और तीन के सताए लोग कहते हैं कि उनकी कोई नहीं सुन रहा है।

एनएचपीसी की जल विद्युत परियोजना निर्माण के लिए वर्ष 2003 से लोगों का उजड़ना शुरू हुआ था जिसमें दलितों के तीन गांव सोती, शलाह और छानीनाला शामिल थे। इन गांवों में करीब 50 घर थे और सौ के करीब परिवार उजड़े थे। जो अभी तक भी ठीक से नहीं बस पाए हैं और अपना बसेरा या तो किराए के कमरे में बनाए रखा है कुछ ने सरकारी भूमि पर ठिकाना बना लिया।

घरोंके साथ 107 बीघा जमीन भी गंवाईः तीनगांवों के उजड़े लोगों की मानें तो उन्होंने परियोजना के लिए अपने पुश्तैणी घर तो गंवाए ही परंतु जो गांव के लोगों के पास 107 बीघा जमीन थी उसे भी गंवा दिया। 80 हजार रुपए बीघा भूमि के हिसाब से मुआवजा दिया गया। इतने कम पैसे से तो वे जमीन खरीद पाए और ही कहीं रहने के लिए घर बना पाए। जाहिर है कि उन्हें परिवार को ठहरने और लालन पालन करने के लिए या तो किराए का कमरा लेना पड़ा या फिर सरकारी भूमि पर कुटिया बनाकर जीवन का गुजर बसर करना पड़ रहा है। 

स्थायीनौकरी की उम्मीद थीः प्रभावितएवं विस्थापित परिवार संघ के अध्यक्ष दीवान चंद का कहना है कि जब उनके घर और जमीन परियोजना के लिए एक्वायर किए गए तो उस समय उचित मुआवजा देने के साथ साथ हर परिवार से एक-एक सदस्य को परियोजना में स्थायी नौकरी देने के सब्जबाग दिखाए थे। लेकिन जमीन घर लेने के बाद अब परियोजना प्रबंधन स्थायी नौकरी नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि तीन गांव दलित परिवारों के थे लेकिन गांव उजाड़ दिए गए उसके बाद कहां इन गांव के लोगों को स्थापित करना था इसको लेकर सरकार और प्रबंधन ने कोई सुध नहीं ली। 

अब आन्दोलन ही सहारा 

दीवानका कहना है कि परियोजना प्रबंधन से प्रशासन और सरकार के मुख्यिा तक वे गुहार लगा चुके हैं लेकिन सही मायने में उनकी सुनवाई कहीं भी नहीं हो पा रही है। लिहाजा, अब उनके पास एक ही रास्ता अांदोलन का बचता है जबकि इससे पहले भी आंदोलन किए जा चुके हैं जिन्हें हर बार कुचलने का प्रयास किया जाता रहा है। फिर ये गांव तो दलितों के थे जाहिर है कि सरकार भी दलितों की हितैषी होने का मात्र ढोंग करती दिखाई दे रही है।

हिन्दुस्तान

धान की सूखी फसल ने ले ली दलित किसान की जान

http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1-story-498667.html

धान की सूखी फसल ने एक गरीब किसान की जान ले ली। इस दलित किसान ने फसल से उसने बहुत उम्मीद लगा रखी थी। शुक्रवार सुबह सूखी फसल देख चिंतित घर लौटे किसान को दो घंटे के अंतर पर दो बार सीने में दर्द उठा। दूसरी बार का दर्द जानलेवा बन गया। धान की फसल की बर्बादी पर गोरखपुर और आसपास के जिलों में किसी किसान की मौत की यह पहली घटना है।

खजनी के एसडीएम एनके सिंह ने कहा कि सूचना मिली है। लेखपाल को मौके पर भेजा गया। उसकी रिपोर्ट पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। शाम तक लेखपाल गांव में नहीं पहुंचा था।

क्षेत्र के नगवा भगवानपुर गांव के 45 वर्षीय संगद के पास सवा बीघे खेत है। इतनी खेती से गुजारा नहीं हो सकता इसलिए कभी-कभार मजदूरी भी कर लिया करते थे। गरीब होने के कारण ही उनके 18 और 16 साल के दो बेटे भी पढ़ नहीं पाए। वे घर पर ही रह कर पिता के काम में हाथ बंटाते थे।

संगद की गेहूं की फसल भी चौपट हो गई थी और शासन से कोई मुआवजा नहीं मिला था। धान की फसल से बहुत उम्मीद थी। उन्होंने कर्ज ले कर खाद डालने के साथ ही दो बार सिंचाई भी कराई थी। भाई अंगद और पत्नी ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह खेत पर गए। 11 बजे घर लौटे तो बहुत चिंतित थे। बोले, धान की फसल तो चौपट हो गई। अब घर का खर्च नहीं चल पाएगा। लगता है कमाने के लिए बाहर जाना पड़ेगा। ऐसा कहने के कुछ ही देर बाद सीने में दर्द उठा। फौरन पास के एक डॉक्टर को बुलाया गया। उसकी दवा से दर्द कुछ कम हुआ लेकिन घंटे भर बाद फिर दर्द उठा और उनकी सांस टूट गई। घर वाले दहाड़ मार कर रोने लगे।

गरीब संगद के पास टिन शेड का मकान है। आगे झोंपड़ी है। गांव में उनकी छवि नेक इंसान की थी।

सूखे की चपेट में जिला

कृषि विभाग जिले के सूखे की चपेट में आने की रिपोर्ट भेज चुका है। विभाग के मुताबिक धान की करीब 33 फीसदी फसल सूखे की चपेट में आ चुकी है। लगभग डेढ़ लाख हे. में धान की खेती होती है और 54 हजार हे. फसल सूखे की चपेट में है। शासन या प्रशासन ने इस पर अभी कोई एलान नहीं किया है। समझा जाता है पचायत चुनाव की आचारसंहिता के कारण ही शासन खामोश है।

दैनिक भास्कर 

दलित समाज आज भी सम्मान से वंचित

http://www.bhaskar.com/news/MP-UJJ-MAT-latest-ujjain-news-061038-2816622-NOR.html

उज्जैन | आजादी के 68 वर्ष बाद भी दलित समाज अपने सम्मान से वंचित है। यह बात नगर बैरवा महासभा अध्यक्ष दिलीप मेहरा ने कही। उन्होंने कहा महासभा आरक्षण के खिलाफ मांग करने वालों की निंदा करती है। दलित समाज सम्मान से जी सके, इसलिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी लेकिन राजनैतिक लाभ के लिए कुछ लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। यदि आरक्षण समाप्त कर दिया गया तो दलितों का जीना दुश्वार हो जाएगा। महासभा ने आरक्षण कायम रखने की मांग करते हुए आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाने वालों को सद्बुद्धि देने की कामना की। 

 दैनिक भास्कर

दलितों का पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-BARM-MAT-latest-barmer-news-045547-2816190-NOR.html

दलितअत्याचार निवारण समिति के बैनर तले 5 अक्टूबर से दो सूत्री मांगों को लेकर धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। दुष्कर्म एवं महिला सरपंच के अधिकारों का हनन एवं प्रताड़ना के विरोध में समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट के आगे धरना देकर प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम एडीएम ओ.पी.बिश्नोई को ज्ञापन सौंपा। 

समिति के जिला संयोजक उदाराम मेघवाल ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने समाज की जायज मांगों को पूरा नहीं किया मजबूरन शक्ति प्रदर्शन करना पड़ा। समाज के जन प्रतिनिधियों ने भी आगे आकर सहयोग नहीं किया, उन्हें समय आने पर समाज सबक सिखाएगा।

पूर्व श्रम सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष गफूर अहमद ने कहा कि पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए साथ है। अनुसूचित जाति, जनजाति अल्पसंख्यक की हालत एक जैसी ही है। कमठा मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण बडेरा ने कहा कि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुई तो मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शिकायत की जाएगी। मेघवाल परिषद के जिलाध्यक्ष मूलाराम मेघवाल ने कहा कि सरकार की कार्यशैली सामंतीराज की याद दिलाती है। धनाउ प्रधान भगवती ने कहा कि हम अपमान को नहीं सहेंगे। सोनाराम टाक ने कहा कि हमें गरीबों की मदद करनी होगी। तालसर सरपंच इन्द्रदेवी शिक्षाविद प्रो. एम.आर गढ़वीर ने कहा कि आठ माह तक पंचायत का कार्यभार नहीं देना या रिकार्ड से अवगत नहीं कराना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व पार्षद मोहन लाल सोलंकी ने कहा कि जुल्म का संगठित होकर मुकाबला करना होगा। भील समाज के जिलाध्यक्ष भूराराम भील ने कहा कि हमेशा सही नेतृत्व को ही वोट देना चाहिए। 

सरकार के खिलाफ नारेबाजी प्रदर्शन किया 

धरनार्थियोंने सरकार विरोधी, पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगा प्रदर्शन किया। पंस सदस्य संगीता देवी, आटी सरपंच रणजीत कुमार,डा. राहुल बंबानिया, आरटीआई कार्यकर्ता मंगलाराम बामनोर, शिवकर सरपंच गोरखाराम, लूनाड़ा सरपंच नगाराम पंवार, पूर्व सरपंच पदमाराम रेडाना किशनाराम, मंसूरिया, करनाराम मारूडी, गणेश, मालाराम तंवर, शेराराम पन्नू, रामाराम बामणिया बिरमाराम बालेवा, सियानी सरपंच हरीश सेजू, पूर्व पंस सदस्य गिरधारीराम पन्नू, दानाराम बुरान का तला, कल्याणदास, अमोलखराम, सुगालाराम तामलियार, हीराराम, मीठूराम बामनोर, सुमार खां मलूक चौहान, महमूद खां, हुसैन समेजा, जागीर कोली, देवीचंद तालसर, हमीराराम, हरीश भादू सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे।

हेमराज मेघवाल रामसर, पूर्व सरपंच छुगाराम पंवार, पूर्व जिला परिषद सदस्य रावताराम सांवा, काछूराम गर्ग, नंद किशोर लहुआ, पूर्व पंस सदस्य दानाराम बुरान का तला, वगताराम, बीवीएम अध्यक्ष थानाराम, एडवोकेट नवलकिशोर लीलावत, लोजपा जिलाध्यक्ष हरखाराम मेघवाल ने भी संबोधित किया। 

धरने को संबोधित किया 

बाडमेर. कलक्ट्रेट परिसर के बाहर दो सूत्री मांग को लेकर धरने पर बैैैैठे दलित समुदाय के लोग प्रदर्शन करते हुए

अमर उजाला

कांशीराम ने दलितों का उत्‍थान किया

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बसपा जिला इकाई की ओर से शुक्रवार को कांशीराम की पुण्यतिथि पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किया और उनके संघर्ष व समाज के लिए किए गए योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। 

बसपा नेता सुजीत सिंह पप्पू ने कहा कि कांशीराम ने समाज के दबे-कुचले गरीब व मजदूर वर्ग के उत्थान के लिए कड़ा संघर्ष किया। उन्होंने दलितों व शोषितों को शिक्षित करके समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया है।

बजरंगी, रामनाथ, प्रमोद, मुन्ना, चंद्रशेखर, ओमप्रकाश यादव आदि उपस्थित रहे। दूसरी ओर डिग्घी स्थित बसपा के केंद्रीय कार्यालय पर कार्यक्रम हुआ। बसपा नेता वसीम अहमद ने कहा कि आज हम सभी को देश व समाज के उत्थान के लिए कांशीराम द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने की जरूरत है।

कयामुद्दीन, खुर्शीद प्रधान, तौफिक अहमद, सुरेंद्र सिंह, सुनील कुमार,आदि उपस्थित रहे।

हस्तक्षेप

दनकौर, नोएडा की पुलिस द्वारा दलित उत्पीड़न की शर्मनाक घटना के खिलाफ धरना

http://www.hastakshep.com/hindi-news/from-states/uttar-pradesh/2015/10/10/dankaur-noida-dalit-oppression-by-the-police-picket

लखनऊ। “दलित शोषण मुक्ति मंच” ने दनकौर, नोएडा की पुलिस द्वारा दलित उत्पीड़न की शर्मनाक घटना के खिलाफ आज दिनांक 09/10/15 को शाम को चार बजे जीपीओ पर अम्बेडकर प्रतिमा पर धरना दिया एवं सभा की.

दलित शोषण मुक्ति मंच के कार्यकर्ता प्रेम कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश भर में दलितों के खिलाफ, अल्पसंख्यकों के खिलाफ, महिलाओं के खिलाफ जिस तरह की अमानवीय घटनाओं की बाढ़ सी आई हुयी है, उससे प्रदेश सरकार का और पुलिस का असली सामंती चेहरा खुल कर सामने आ गया है. पीड़ित परिवार की इस घटना की कहानी और पुलिस प्रशासन के द्वारा दी गयी कहानी में ज़मीन-आसमान का अंतर है.

जहाँ एक ओर पीड़ित परिवार का कहना है कि एक लूट की घटना पर वे ऍफ़.आई.आर दर्ज कराने पुलिस स्टेशन गए पर दलित परिवार की रिपोर्ट दर्ज करने से पुलिस ने इनकार कर दिया। पीड़ित परिवार के द्वारा इसके विरोध में प्रदर्शन किये जाने पर पुलिस ने तीन महिलाओं सहित पूरे परिवार को निर्वस्त्र कर पीटा। वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि पीड़ित दलित परिवार स्वयं ही निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन कर रहा था, इसलिए सार्वजनिक स्थल पर अश्लील प्रदर्शन करने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर सबको जेल भेज दिया गया।

जो नेता और पुलिस प्रशासन इस निंदनीय घटना को दलित परिवार का ड्रामा कह रहे हैं, निश्चित ही उनकी मानवीय संवेदना ख़त्म हो गयी है और वे मनुष्य कहलाने का दर्जा खो चुके हैं।

कोई परिवार अगर स्वयं भी भीड़ के सामने निर्वस्त्र हुआ तो कल्पना करिए कि वह किस मानसिक पीड़ा से गुजर रहा होगा। उसकी इस पीड़ा का जिम्मेदार कौन? इस घटना को ड्रामा करार देने वाले वाली पुलिस का ऐसी परिस्थितियों में क्या फ़र्ज़ था ?

उन्होंने आगे कहा कि दनकौर की घटना कोई अपवादिक घटना नहीं है। अभी भूले नहीं होंगे आप हिसार के उन दलितों का मामला जिसमें समाज और प्रशासन के निर्मम रवैये ने उन्हें धर्म परिवर्तन तक करने के लिए मजबूर कर दिया। समाज में व्याप्त सामंतवादी शोषण और असंवेदनशीलता के चलते जब दलित धर्मांतरण करते हैं तो उसे भी भगवा-ब्रिगेड विधर्मियों की साजिश बता कर सामज को तोड़ने की राजनीति करता है.

“दलित शोषण मुक्ति मंच” की ओर से ऐसी अमानवीय घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए पुलिस पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने की और दोषी पुलिस वालों को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की गयी.

सभा को भारत की नौजवान सभा से राधेश्याम, प्रवीण, प्रशांत राज, जनवादी महिला समिति से सीमा राना, अंजू रावत, स्टूडेंट फेडरशन ऑफ़ इंडिया के अनुपम और मेहँदी अब्बास रिज़वी, एस. के. पाण्डेय ने संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन नीतू रावत ने किया.

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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