दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 08.10.15

SSP आवास के बाहर मदद के लिए तड़पता रहा दलित, किसी ने नहीं ली सुध – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/UP-dalit-beaten-by-miscreants-in-jhansi-latest-news-5134924-PHO.html

ग्रेटर नोएडा में महिलाओं ने किया अर्धनग्न प्रदर्शन न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/women-strip-off-to-protest-police-action-in-greater-noida-856001.html

प्रेमी के घर के बाहर प्रेमिका का धरना – इनेक्स्ट लाइव

http://inextlive.jagran.com/lover-protest-out-side-her-boy-friend-house-in-firozabad-95347

दलित बस्ती में 100 परिवारों को मिलेगी जल संकट से निजात – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-sheour-news-043052-2798734-NOR.html

भूख हड़ताल पर बैठे दलित दर्शनार्थी गिरफ्तार – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/national-dalit-leader-kunwar-sitting-on-hunger-strike-arrested-501979

राज्य की महिलाएं, बच्चे कुपोषण के शिकार : किंडो – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/ranchi/story/551401.html

कचरा-कचरा जिंदगी तहलका

http://tehelkahindi.com/lives-around-dumping-yards/

Please Watch:

I’m Dalit, how are you?

https://www.youtube.com/watch?v=WBxy1R0jitM

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

दैनिक भास्कर

SSP आवास के बाहर मदद के लिए तड़पता रहा दलित, किसी ने नहीं ली सुध

http://www.bhaskar.com/news/UP-dalit-beaten-by-miscreants-in-jhansi-latest-news-5134924-PHO.html

 झांसी (उत्तर प्रदेश). यहां के मोंठ इलाके में दबंगों ने खेत से जानवरों को भगाने पर एक दलित की लाठी-डंडों से पिटाई कर दी। इस बाबत पीड़िता की पत्नी ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहीं से भी मदद नहीं मिलने पर वह घायल पति को लेकर एसएसपी आवास के बाहर बैठ गई, लेकिन हैरानी की बात ये है कि एक घंटे तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली।

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 क्या है मामला?

झांसी से करीब 35 किमी दूर स्थित मोंठ इलाके के गढ़ूका गांव में दलित आशाराम अहिरवार रहता है। वह अपने खेत में काम कर रहा था। इसी दौरान गांव के ही कुछ दबंगों ने खेत में जानवर छोड़ दिए। इसका विरोध करने पर दबंग गाली-गलौच करने लगे। आशाराम ने इसकी शिकायत पुलिस से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 दलित होकर शिकायत करने पर मिलेगी यही सजा

पीड़ित की पत्नी सुमित्रा अहिरवार के मुताबिक, पुलिस से शिकायत करने पर दबंग आगबबूला हो गए। उन्होंने घर में घुसकर उसके पति को लाठी-डंडों से जमकर पीटा। यही नहीं, दबंगों ने कहा, ‘दलित होकर शिकायत करने पर यही सजा मिलेगी।’

 एक घंटे तक किसी ने नहीं ली सुध

सुमित्रा किसी तरह से पति को लेकर एसएसपी आवास के बाहर पहुंची। इस दौरान घायल बुरी तरह से कराहता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। इसके बाद नवाबाद स्टेशन की पुलिस वहां पहुंची और अपनी जीप पर लादकर दलित को अस्पताल ले गई। यहां उसका इलाज चल रहा है।

न्यूज़ 18

ग्रेटर नोएडा में महिलाओं ने किया अर्धनग्न प्रदर्शन

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ग्रेटर नोएडा के दनकौर कस्बे में एक बेहद शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई जब लूट का केस दर्ज होने को लेकर महिलाओं ने निर्वस्त्र विरोध प्रदर्शन किया. इतना ही नहीं विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी पुलिस कर्मियों से हाथापाई भी हुई, जिसमे उनके कपड़े भी फटे.

लेकिन पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पूरी कार्रवाई बिना महिला पुलिस के की गई. आखिर ऐसी क्या जल्दबाजी थी की बिना महिला पुलिस के ही वह परिवार के मुखिया को गिरफ्तार करने पर आमादा थी. इस बीच पुलिस ने दलित परिवार पर बड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है.

घटना के बाद कई वीडियो सोशल नेटवर्क पर वायरल हो गए जिसमें दलित परिवार की निर्वस्त्र महिलाओं से थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मी धक्का-मुक्की करते नजर आ रहे हैं. परिवार के मुखिया को पकड़ने के प्रयास में महिलाओं को भी सड़क पर घसीटा गया.

सिविल कपड़ों में थानाध्यक्ष वहां पहुंचे और पिस्टल लूटने के प्रयास का आरोप भी लगाया. हालांकि, पुलिस का कहना है कि गलती यही हुई की महिला पुलिसकर्मी वक्त पर नहीं पहुंच सकीं.

इनेक्स्ट लाइव

प्रेमी के घर के बाहर प्रेमिका का धरना

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महिला थाना इंस्पेक्टर ने धरना से उठाई प्रेमिका, आगरा छोड़ा

आगरा में तैनात है शिकोहाबाद का रहने वाला सिपाही

धोखा देने का आरोप, शादी की जिद पर अडिग प्रेमिका

शिकोहाबाद: प्रेम के नाम पर युवती से नजदीकियां बढ़ाने के बाद धोखा देने वाले सिपाही की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। प्रेमिका ने सिपाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आगरा निवासी युवती रविवार को शिकोहाबाद में सस्पैंड सिपाही के घर पर पहुंची तथा घर के बाहर ही धरने पर बैठ गई। यह देख परिजनों के होश उड़ गए। करीब सात घंटे तक वह यहां डेरा डाले रही, बाद में महिला थाना पुलिस उसे अपने साथ आगरा ले गई।

आवास विकास कॉलोनी निवासी धर्मेंद्र यादव पुत्र राजेंद्र सिंह पुलिस विभाग में सिपाही है। वह आगरा के थाना ताजगंज में तैनात है। आरोप है आगरा में उसकी नजदीकियां सदर निवासी दलित जाति की युवती से बढ़ गईं।

सिपाही ने प्रेमिका से शादी करने का वादा भी किया था। बीते दिनों सिपाही की शादी दूसरी जगह किए जाने की खबर पर प्रेमिका विरोध पर आ गई है। 16 सितंबर को एसएसपी आगरा को प्रार्थना पत्र देकर उसने न्याय की गुहार लगाई थी। इस पर एसएसपी ने मामले की जांच कराते हुए आरोपी सिपाही को सस्पेंड कर दिया। इसके बाद भी सिपाही उससे नहीं मिला.

रविवार सुबह करीब आठ बजे प्रेमिका प्रेमी सिपाही के आवास विकास कॉलोनी स्थित आवास पर आ पहुंची। यहां प्रेमी नहीं मिला तो वह घर के बाहर धरने पर बैठ गई। 24 वर्षीय युवती का कहना था वह मर जाएगी, लेकिन यहां से वापस नहीं जाएगी। वह सुबह 8 बजे से दोपहर तीन बजे तक अपने प्रेमी के आवास के बाहर बैठी रही। इसको लेकर परिजनों के होश उड़ गए। बताते हैं महिला थाने की इंस्पेक्टर मिथलेश सेंगर यहां पहुंची और युवती को समझा- बुझाकर अपने साथ आगरा की कहकर ले गईं।

पड़ोसी महिलाओं से हुई तकरार :

आवास विकास कॉलोनी में सिपाही की दीवानी प्रेमिका ने धरना शुरू किया तो पड़ोस की महिलाएं आ गईं। इन महिलाओं ने युवती पर टिप्पणी कर दी, इस पर प्रेमिका आग बबूला हो गई और उसने महिलाओं को खूब खरी खोटी सुनाई। इसके बाद पड़ोस की कोई भी महिला उसके पास नहीं आई।

दैनिक भास्कर

दलित बस्ती में 100 परिवारों को मिलेगी जल संकट से निजात

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श्योपुर| पांडोला की दलित बस्ती में 100 परिवारों को अब जल संकट से निजात मिल जाएगी। ऐसा इसलिए कि यहां विधायक दुर्गालाल विजय की निधि से नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। पांडोला कस्बे में यूं तो नल जल योजना के तहत दो पानी की टंकी बनी है। लेकिन 100 परिवारों वाली दलित बस्ती में जल संकट की समस्या बरकरार है। विधायक दुर्गालाल विजय को पिछले दिनों ग्रामीणों ने यह समस्या बताई थी। विधायक ने इसके बाद अपनी निधि से नई पाइप लाइन बिछाने के लिए पीएचई विभाग को एस्टीमेट तैयार करने के आदेश दिए हैं। जल्द ही यह लाइन लाइन बस्ती में बिछाई जाएगी। इसके बाद दलित बस्ती के लोगों को जल संकट से निजात मिल जाएगी। 

 नई दुनिया

भूख हड़ताल पर बैठे दलित दर्शनार्थी गिरफ्तार

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 देहरादून। दलितों को मंदिर में प्रवेश से रोकने के मामले में भूख हड़ताल पर बैठे दलित नेता दौलत कुंवर समेत उनके 15 सहयोगियों को बुधवार देर शाम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

देहरादून के गबेला गांव में कुकुर्शी देवता के मंदिर में बुधवार को टकराव की स्थिति बन गई। सुबह दलित समुदाय के लोगों ने मंदिर से करीब 50 मीटर दूर भूख हड़ताल शुरू कर दी। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। देहरादून के जिलाधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि गबेला गांव में हालात तनावपूर्ण हो चुके थे। बार-बार बातचीत के बावजूद भूख हड़ताल पर बैठे लोग दर्शन को तैयार नहीं हुए। इस पर शांति भंग की आशंका में गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

उन्होंने बताया कि गांव में फिलहाल पुलिस बल तैनात रहेगा। गौरतलब है कि सोमवार को गबेला गांव के कुकुर्शी देवता के दर्शनों के लिए आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के नेतृत्व में परिवर्तन यात्रा निकाली गई थी। यात्रा में शामिल लोगों का कहना था कि उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। मंगलवार को ग्राम प्रधान ने प्रशासन को लिखित तौर पर सहमति दे दी थी कि ये लोग मंदिर में दर्शन कर सकते हैं। बावजूद इसके धरने पर बैठे दलित समुदाय के लोग इस बात पर अड़े रहे कि प्रशासन सुरक्षा मुहैया कराए तभी वे दर्शन करेंगे।

प्रभात खबर

राज्य की महिलाएं, बच्चे कुपोषण के शिकार : किंडो

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रांची: झारखंड बाल श्रम आयोग की अध्यक्ष शांति किंडो ने कहा कि राज्य की महिलाएं और बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. उन्होंने कहा है कि गरीबी और भूख की वजह से महिलाओं और सुदूरवर्ती इलाकों में रहनेवाले बच्चे कुपोषित हो रहे हैं. खास कर आदिवासी और दलित महिलाओं में पोषण की स्थिति ठीक नहीं है.

श्रीमती किंडो बुधवार को न्यूट्रिशन स्टेट्स रिपोर्ट जारी करने के बाद यह बातें कही. उन्होंने कहा कि आदिवासी और दलित महिलाओं को पोषाहार के अधिकार के खिलाफ आवाज उठाना चाहिए. नेशनल कैंपेन ऑन न्यूट्रीशन एंड डिग्निटी नामक संस्था की ओर से जारी रिपोर्ट में राज्य की स्थिति बतायी गयी है. कार्यक्रम में महिला आयोग की अध्यक्ष महुआ माजी ने कहा कि  महिलाओं को सशक्त और शिक्षित करने से ही यह समस्या दूर हो सकती है.

उन्होंने कहा कि नैकडोर संस्था के आंकड़े चौंकानेवाले हैं, जिस पर सरकार को गौर करना चाहिए. कार्यक्रम को संबोधित करते हुुए संस्था के कार्यपालक निदेशक राजेश उपाध्याय ने कहा कि राष्ट्रीय आधार पर चले अभियान में दलितों में नाटे होने की शिकायत 54.5 फीसदी लोगों में मिली. आदिवासियों में नाटेपन की शिकायत 53.7 प्रतिशत मिली है. अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 79.5 फीसदी बच्चियों में खून की कमी पायी गयी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड की स्थिति चौंकाने वाली है. इंडिया स्टेट हंगर इंडेक्स 2009 में झारखंड सिर्फ मध्यप्रदेश से ऊपर है. राज्य की 43 फीसदी महिलाएं बॉडी मास इंडेक्स की सामान्य मानक से नीचे आती हैं. कार्यक्रम में श्वेता गुरिया और अन्य ने भी अपने विचार रखे.

तहलका

कचरा-कचरा जिंदगी

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देश की राजधानी दिल्ली की लगभग चालीस फीसदी आबादी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर है. इस आबादी का एक बड़ा हिस्सा डंपिंग यार्ड यानी कूड़े के आसमानी ढेरों के आसपास रहने को अभिशप्त है. कचरे के ढेर पर बसर कर रहीं इन जिंदगियों की पड़ताल की स्वतंत्र मिश्र ने ‘कुछ साल पहले जब मेरे परिवार के लोगों ने मेरी दीदी के लिए दूल्हा ढूंढना शुरू किया तो बहुत मुश्किलें आ रही थीं. मेरे वालिद किसी के घर रिश्ता लेकर जाते तो लड़के वाले यही कहते थे कि आप भले लोग हैं. लड़की पढ़ी-लिखी और सयानी भी है, लेकिन आप लोगों के मोहल्ले में हम बारात लेकर कैसे आएंगे? आप लोग तो खत्ते (स्थानीय लोग डंपिंग यार्ड को खत्ता कहते हैं) में बसे हुए हैं. खत्ते के आसपास से गुजरना भी मुश्किल है तो फिर वहां बारात सारी रात कैसे रहेगी? निकाह की रस्में कैसे पूरी होंगी? आपके मोहल्ले की आबोहबा में सड़ांध बसी हुई है.’

मेरे अब्बू को यह जवाब कम से कम पचास-साठ लड़के वालों से सुनने को मिला. अब्बू के पास उनकी बातों का कोई जवाब नहीं होता. अब्बू और अम्मी पिछले तमाम साल दिन-रात इसी चिंता में घुलते रहे कि कैसे बेटी का निकाह कराया जाए. वे बहुत तनाव में रहते थे. एक वक्त ऐसा भी आया जब अब्बू-अम्मी इस बात के लिए भी राजी हो गए कि बेटी का निकाह हैसियत से कमतर घर में कर दिया जाए, लेकिन अल्लाह का बहुत-बहुत शुक्र है कि कुछ साल पहले मेरी बहन की शादी हो गई. उसे पढ़ा-लिखा, नौकरी वाला, नेकदिल शौहर मिल गया. दिल्ली के ही एक साफ-सुथरे मोहल्ले में उसकी ससुराल है. अब उसकी जिंदगी बदल गई है लेकिन हम तो आज भी खत्ते की बदबू झेलने को मजबूर हैं. यह खत्ता मानो हमारी जिंदगी में नासूर की तरह शामिल हो गया है. ये कहानी दिल्ली के गाजीपुर थाने के घडौली एक्सटेंशन के निवासी मोहम्मद अकरम की है, जहां डंपिंग यार्ड होने की वजह से यहां के रहवासियों को तमाम परेशानियों से हर दिन दो-चार होना पड़ता है. यहीं की मुल्ला कॉलोनी में ई-रिक्शा का वर्कशॉप चलाने वाले रियाजुद्दीन सैफी अपने इलाके की सड़ांध के बारे में कहते हैं, ‘हमारा घर खत्ते के पास तो है ही, खत्ते और हमारे घर के बीच तीन बजबजाते नाले और एक नहर (नाले में ही तब्दील) है, जो हमारी जिंदगी को नरक बनाने के लिए काफी है.’

एक अनुमान के मुताबिक ये एक स्याह सच है कि तरक्की से लैस दिल्ली की लगभग चालीस फीसदी आबादी जानवरों से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर है. इस आबादी का बड़ा हिस्सा डंपिंग यार्ड के आसपास वाले इलाकों में रहता है, जो बहुत गरीब और तरह-तरह की बीमारियों का प्रकोप झेलने को मजबूर है. गाजीपुर स्थित डंपिंग यार्ड पर सुबह के 6:30 बजे पहुंचने पर जो दिखा वह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की नींद उड़ा देने के लिए काफी था. कई महिलाएं कूड़े के पहाड़ से खाना ढूंढ रही थीं, ताकि बच्चों को कुछ खिला सकें. कुछ कूड़े में से पीतल, एल्युमीनियम, प्लास्टिक, ईंट आदि के टुकड़े निकाल रही थीं ताकि सूरज डूबने तक उसे कबाड़ के भाव बेचकर 100-200 रुपये जुटा सके. काम में लगी हुई महिलाओं से कुछ ही कदम की दूरी पर प्लास्टिक के झोपड़ीनुमा घरौंदे में बिछी प्लास्टिक के ऊपर नवजात और कुछ छोटे बच्चे लेटे हुए थे. वहीं 8-10 साल के बच्चे कूड़ा बीनने में मां की मदद कर रहे थे. हाल ही में बाल श्रम कानून में हुए सुधार के बाद 14 साल से कम उम्र के बच्चों का घरेलू काम में हाथ बंटाना अब कोई अपराध नहीं रह गया है, सो पारिवारिक काम के नाम पर अब उनसे कुछ भी करवाया जा सकता है. किसी के चेहरे पर किसी किस्म का अपराधबोध नजर नहीं आ रहा था, अगर उनके चेहरे पर कुछ नजर आ रहा था तो बस बेचारगी और चार पैसे जुटा लेने की जद्दोजहद.

ये तो साफ ही है कि डंपिंग यार्ड के आसपास के इलाकों में भू-जल बुरी तरह से प्रदूषित हो जाता है. इस वजह से इन इलाकों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका हमेशा बनी रहती है. नई दिल्ली स्थित विज्ञान और पर्यावरण से जुड़े मसलों पर शोधकार्य करने वाली संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) से जुड़ीं शोधार्थी स्वाति सिंह साम्बयाल बताती हैं, ‘हम लोगों ने लगभग दस डंपिंग यार्ड के आसपास स्थित मोहल्लों में जाकर पानी और हवा के प्रदूषण पर शोध किया, पानी के 15-16 नमूनों की जांच की. इन इलाकों में पानी के प्रदूषण का स्तर बहुत भयावह स्थिति में जा पहुंचा है. पानी में खतरनाक स्तर पर सल्फेट, नाइट्रेट, कैल्शियम, मैगनीशियम पाए गए हैं. डंपिंग यार्ड के आसपास के इलाकों का पानी कठोर जल में तब्दील हो चुका है, जिसे किसी भी सूरत में पीया नहीं जा सकता. इस पानी को नहाने-धोने के लिए इस्तेमाल में लाना त्वचा संबंधी रोगों को आमंत्रित करने जैसा है. प्रदूषित पानी के उपयोग की वजह से इन इलाकों के लोगों को आंत संबंधी बीमारियों से लगातार जूझना पड़ता है. कई बार शरीर में निर्जलीकरण की समस्या से लोगों की हालत खराब हो जाती है.’

गाजीपुर के पास से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के दूसरी ओर वैशाली, वसुंधरा और इंदिरापुरम जैसी पॉश रिहायशी कॉलोनियां बसाई गई हैं. यहां रहने वाले लोगों का जीना मुहाल न हो इसका ख्याल रखते हुए राजमार्ग की तरफ के कूड़े के पहाड़ को ढंक दिया गया है. इन छोटी बस्तियों की ओर खत्ते का मुंह खुला हुआ है जबकि राजमार्ग के दूसरी ओर डंपिंग यार्ड को ढंक दिया गया है, इसके जवाब में गाजीपुर डेयरी फॉर्म के इरशाद भाई तल्ख आवाज में कहते हैं, ‘सरकार और नगर निगम अमीर लोगों के इशारों पर नाचते हैं. उन्हें तो हम गरीब लोगों से हर चुनाव में यार्ड को यहां से हटाए जाने का वायदा करके बस चुनाव जीतना होता है. फिर इस बास में नाक देने कौन आएगा?’ घडौली में बुटीक चलाने वाले सलीम नेताओं की वादाखिलाफी को याद करते हुए कहते हैं, ‘यहां अरविंद केजरीवाल ने खुद सभा की थी और कहा था कि चुनाव जीतने के बाद हम इस डंपिंग यार्ड को खत्म कर देंगे.’ उत्तरी दिल्ली के नगर निगम के एक अधिकारी ने पहले बात करने में आनाकानी की लेकिन भरोसा दिलाने पर इतना ही बोल पाए, ‘कूड़ा कहीं न कहीं तो डाला ही जाएगा. जाहिर है कि गरीब आबादी वाले इलाकों में ऐसा करना सुविधाजनक भी है.’

गाजीपुर में 1986 में डंपिंग यार्ड के बनने से पहले 20 फुट गहरा तालाब हुआ करता था, जिसे एनएच-24 बनाने के क्रम में मिट्टी से पाट दिया गया था. भलस्वा डेयरी के डंपिंग यार्ड वाली जमीन पर 1970 के दशक में गन्ने की खेती होती थी. यार्ड की वजह से भलस्वा झील भी अब बदबू और गंदगी का पर्याय बन चुकी है. प्रसिद्ध पर्यावरणविद अनुपम मिश्र बताते हैं, ‘आजादी मिलने से पहले दिल्ली में 350 से ज्यादा तालाब थे, आज तो तीन तालाब भी नहीं बचे होंगे. अगर कुछ बचे हैं तो उनकी स्थिति नालों जैसी है. नई जीवनशैली की वजह से कूड़ा बढ़ा है. राजधानी दिल्ली के कूड़े का प्रबंधन ही नहीं हो पा रहा है. ऐसे में 100-50 स्मार्ट सिटी बनाएंगे तो उनके लिए पानी का इंतजाम कहां से हो पाएगा और उन शहरों से निकलने वाला कचरा कहां ठिकाने लगाया जाएगा?’

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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