दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 07.10.15

दलित लड़की से विवाह रचाने पर बेटे को मार डाला – समाचार जगत

http://www.samacharjagat.com/detail/20722/07-10-2015/man-kills-son-due-to-marriage-with-Dalit-girl

सुरक्षा देकर दर्शन कराने की मांग पर अड़े दलित – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/national-dalit-demands-security-for-goes-in-temple-495703

गौ मूत्र को पवित्र मान पी जाते हैं, लेकिन दलितों के हाथ का छुआ हुआ पानी नहीं पी सकते ! बीइंग दलित

http://www.beingdalit.com/2015/10/they-drink-cow-urine-but-cant-drink-water-touched-by-dalit.html#.VhSo3Cb3My4

बलात्कार के आरोपी की गिरफतारी की मांग – प्रेस नोट

http://www.pressnote.in/Jaisalmer-Barmer-News_289958.html

दलित महिला से गैंगरेप के बाद गुस्‍साए लोगों ने बनाया पुलिसकर्मियों को बंधक न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/bihar/angry-mob-hostage-policeman-after-gangrape-with-dalit-women-in-samastipur-846587.html

दो दलित युवकों की हत्या के मामले में सभी तीन आरोपी गिरफ्तार न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/uttarakhand/all-three-accused-arrested-in-the-murder-of-two-dalit-youths-851512.html

दलित-आदिवासी संघर्षों के लिए समर्पित थे एस.आर.संकरन – आउट लुक हिंदी

http://www.outlookhindi.com/art-and-culture/diary/sr-sankaran-was-devoted-for-cause-of-dalits-tribal-and-marginalised-4454#undefined

Please Watch:

How These ‪#‎Chennai Schoolchildren Help Get Beggars Off Streets

Read: http://goo.gl/9bOEmD

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

समाचार जगत

दलित लड़की से विवाह रचाने पर बेटे को मार डाला

http://www.samacharjagat.com/detail/20722/07-10-2015/man-kills-son-due-to-marriage-with-Dalit-girl

 फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक व्यक्ति ने अपने बेटे के साथ मिलकर अपने ही पुत्र की दलित लड़की से विवाह रचाने के कारण मंगलवार को पीट-पीटकर हत्या कर दी।

पुलिस के अनुसार खखरेरू क्षेत्र के सैदपुर घुरही निवासी अखिलेश सिंह के 35 वर्षीय बेटे धीरेन्द्र सिंह की शादी 10 वर्ष पूर्व पड़ोसी गांव जयरामपुर में हुई थी और उसके दो बच्चे थे।

एक वर्ष पूर्व धीरेन्द्र सिंह ने एक दलित लड़की से मंदिर में विवाह रचा लिया था। मंगलवार को अखिलेश सिंह और उसके छोटे बेटे जितेन्द्र सिंह ने धीरेन्द्र सिंह को पीट-पीट कर मार डाला। घटना के बाद हत्या के आरोपी पिता-पुत्र फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। 

 नई दुनिया

सुरक्षा देकर दर्शन कराने की मांग पर अड़े दलित

http://naidunia.jagran.com/national-dalit-demands-security-for-goes-in-temple-495703

 देहरादून। दलित समाज के लोगों को मंदिर में प्रवेश से रोकने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मंगलवार दोपहर गबेला के ग्राम प्रधान जीत राम ने प्रशासन को भेजे पत्र में दलितों के प्रवेश पर सहमति जता दी है, साथ ही ग्रामीणों ने बताया कि अब देवता ने भी दर्शन के लिए रास्ता छोड़ दिया है। दलित समाज के लोग मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।

बावजूद इसके धरने पर बैठे दलित समुदाय के लोग इस बात पर अड़े हैं कि प्रशासन सुरक्षा मुहैया करा उन्हें दर्शन कराए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दर्शन नहीं कराए गए तो बुधवार से भूख हड़ताल की जाएगी। एसडीएम अशोक पांडेय ने बताया कि तहसीलदार डीडी वर्मा धरने पर बैठे लोगों से बातचीत कर रहे हैं।

गौरतलब है कि सोमवार को स्वयंसेवी संस्था आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के नेतृत्व में परिवर्तन यात्रा के तहत दलित समुदाय के लोग गबेला गांव में कुकुर्शी देवता के दर्शनों के लिए पहुंचे थे। मंदिर में पहले से एकत्र ग्रामीणों ने उनका रास्ता रोक लिया था। इस पर दलित समुदाय के लोग मंदिर के बाहर ही धरने पर बैठे गए थे।

बीइंग दलित

गौ मूत्र को पवित्र मान पी जाते हैं, लेकिन दलितों के हाथ का छुआ हुआ पानी नहीं पी सकते !

http://www.beingdalit.com/2015/10/they-drink-cow-urine-but-cant-drink-water-touched-by-dalit.html#.VhSo3Cb3My4

राजस्थान की राजधानी जयपुर के निकटवर्ती इलाके दुदू के फागी कस्बे के चकवाडा गाँव के निवासी बाबूलाल बैरवा लम्बे समय तक विहिप से जुड़े रहे हैं तथा उन्होंने कारसेवा में भी हिस्सेदारी की। संघ की विचारधारा से जुड़ने और वहाँ से मोह भंग होने के बाद वे इन दिनों अम्बेडकर के विचारों से प्रभावित हैं। उनके साथ घटी एक घटना ने उनकी और उन्हीं के जैसे अन्य दलित ग्रामीणों की आँखें खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

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हुआ यह कि बाबूलाल के गाँव चकवाडा के जिस तालाब में गाय, भैंस, बकरी, बिल्ली, कुत्ते, सूअर आदि सब नहाते थे, उसमें यह कारसेवक बाबूलाल बैरवा भी नहाने की हिम्मत कर बैठा, यह सोच कर कि है तो वह भी हिन्दू ही ना, वह भी संघ से जुड़ा हुआ विहिप का कार्यकर्त्ता और राम मंदिर के लिए जान तक देने को तैयार रहा एक समर्पित कारसेवक है। इसी गाँव के लोग तो ले गए थे उसे अयोध्या अपने साथ, वैसे भी सब हिन्दू-हिन्दू तो बराबर ही है, लेकिन बाबूलाल का भ्रम उस दिन टूट गया जिस दिन वह अपने ही गाँव के तालाब में नहाने का अपराध कर बैठा। गाँव के सार्वजनिक तालाब में नहाने के जुर्म में इस दलित कारसेवक पर सवर्ण हिन्दुओं ने 51 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया। 

गाँव वालों के इस अन्यायपूर्ण फैसले के खिलाफ बाबूलाल चिल्लाता रहा कि वह भी तो हिन्दू ही है, कारसेवा में भी जा चुका है, विश्व हिन्दू परिषद् से जुड़ा हुआ है और फिर वह भी तो उसी तालाब में नहाया है जिसमें सब लोग नहाते हैं। इसमें जब जानवर नहा सकते हैं तो वह एक इन्सान हो कर क्यों नहीं नहा सकता है ? लेकिन बाबूलाल बैरवा की पुकार किसी भी हिन्दू संगठन तक नहीं पहुंची।

थक हार कर बाबूलाल न्याय के हेतु जयपुर में दलित अधिकार केंद्र के पी एल मीमरौट से मिला। इसके बाद दलित एवं मानव अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन आगे आये और बाबूलाल को न्याय और संवैधानिक हक अधिकार दिलाने की लड़ाई और तेज तथा व्यापक हुयी। देश भर से आये तकरीबन 500 लोग एक रैली के रूप में चकवाडा के दलितों को सार्वजानिक तालाब पर नहाने का हक दिलाने के लिए सदभावना रैली के रूप में निकले, मगर उन्हें माधोराजपुरा नामक गाँव के पास ही कानून, व्यवस्था और सुरक्षा के नाम पर पुलिस और प्रशासन द्वारा रोक लिया गया। मैं भी इस रैली का हिस्सा था, हिन्दू तालिबान का टेरर क्या होता है, आप इसे उस दिन साक्षात् देख सकते थे। लगभग 40 हज़ार उग्र हिन्दुओं की भीड़ ‘ कल्याण धणी की जय‘ और ‘जय जय श्रीराम‘ के नारे लगाते हुए निहत्थे दलितों की सदभावना रैली की और बढ़ रहे थी। उनके हाथ में लट्ठ और अन्य कई प्रकार के अस्त्र शस्त्र भी थे, उनका एक ही उद्देश्य था दलितों को सबक सिखाना। अब अतिवादियों की भीड़ थी सामने, बीच में पुलिस और एक तरफ मुट्ठी भर दलितों की एक रैली।

हालात की गंभीरता के मद्देनज़र दलितों ने अपनी रैली को वहीँ समाप्त कर देने का फैसला कर लिया। गुस्साए हिंदुत्ववीरों की हिंसक भीड़ ने पुलिस और प्रशासन पर धावा बोल दिया। वे इस बात से खफा हो गए थे कि प्रशासन के बीच में खड़े हो जाने की वजह से वो लोग दलितों को सबक नहीं सिखा पा रहे थे। इसलिए उनका आसान निशाना जिलाधिकारी से लेकर पुलिस के आई जी और एस पी इत्यादि लोग बन गए। बड़े अधिकारीयों को जानबूझकर निशाना बनाया गया, जिन्होंने भाग कर जान बचायी अंततः लाठी चार्ज और फायरिंग हुयी जिसमे 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। दलितों की समानता रैली और बराबरी की मुहिम अपने मक़ाम तक नहीं पहुंच पाई।

इस घटनाक्रम पर संघ की ओर से दलितों के पक्ष में एक भी शब्द बोलने के बजाय इसे विदेशी लोगों द्वारा हिन्दू समाज को बांटने का षड्यंत्र करार दिया गया। उस दिन दलितों के विरुद्ध जुटी हिंसक भीड़का नेतृत्व संघ परिवार के विभिन्न संगठनों से जुड़े ग्राम स्तरीय कार्यकर्त्ता कर रहे थे। इसका मतलब यह था कि दलितों के आन्दोलन को विफल करने की पूरी साज़िश को संघ का समर्थन प्राप्त था। मनुवादियों ने मानवतावादियों की मुहिम को मात दे दी थी। अंततः बाबूलाल बैरवा को हिन्दू मानना तो बहुत दूर की बात इन्सान ही नहीं माना जा सका, या यूँ समझ लीजिये कि जानवर से भी बदतर मान लिया गया।

संघ परिवार में इंसानों को जानवरों से भी कमतर मानने का रिवाज़ शुरू से ही है। इसका साक्षात् उदाहरण हरियाणा प्रदेश के जज्जर जिले की वह घटना है, जिसमे पुलिस की मौजूदगी में गौहत्या की आशंका में पांच दलितों की निर्मम तरीके से जिंदा जला हत्या की गयी, जबकि ये लोग एक मरी हुयी गाय की खाल ( चमड़ा ) उतार रहे थे, पूरे देश के इंसानियतपसंद लोगों ने इस अमानवीय घटना की कड़े शब्दों में निंदा की, वहीँ विहिप के राष्ट्रीय नेता आचार्य गिरिराज किशोर ने निर्दोष दलितों के इस नरसंहार को उचित ठहराते हुए यहाँ तक कह दिया कि –‘एक गाय की जान पांच दलितों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।’ एक गाय जो कि अंततः है तो एक जानवर ही, वह उनके लिए दलितों (इंसानों ) की जान से ज्यादा कीमती होता है ! 

वे गाय के मूत्र को पवित्र मान कर पी जाते हैं, लेकिन दलितों के हाथ का छुआ हुआ पानी नहीं पी सकते हैं। घर में पाले गए कुत्ते और बिल्लियाँ उनके साथ खाती हैं, साथ में एक ही पलंग पर सोती है और उनकी महँगी महंगी वातानुकूलित गाड़ियों में घूमती है मगर दलितों को साथ बिठाना तो दूर उनकी छाया मात्र से ही उन्हें घिन आती है। यह कैसा धर्म है जहाँ पर गन्दगी फ़ैलाने वाले लोग सम्मान पाते है और सफाई करने वाले लोग नीचे समझे जाते हैं, तमाम निकम्मे जो सिर्फ पोथी पत्रा बांचते हैं या दुकानों पर बैठ कर कम तोलते हैं और दिन भर झूठ पर झूठ बोलते हैं, उन्हें ऊँचा समझा जा कर उच्च वर्ग कहा जाता है, जबकि मेरी नज़र में यह विचार एवं व्यवहार के तल पर ‘ उच्च‘ नहीं ‘तुच्छ‘ वर्ग है जो किसी और की मेहनत पर जिंदा रहते हैं, श्रम को सम्मान नहीं, अकर्मण्यता को आदर देने वाला निकम्मापन ही यहाँ धर्म मान लिया गया है।

यह बिलकुल झूठ, फरेब पर टिका हुआ गरीब, दलित, आदिवासी और महिला विरोधी धर्म है, रोज महिलाएं घरों में अपमानित होती हैं। उन्हें ज्यादती का शिकार होना पड़ता है, जबरन शादी करनी पड़ती है और रोज बरोज अनिच्छा के बावजूद भी अपने मर्द की कथित मर्दानगी जो कि सिर्फ वीर्यपात तक बनी रहती है, उसे झेलना पड़ता है। उन्हें हर प्रकार से प्रताड़ित, दण्डित और प्रतिबंधित एवं सीमित करने वाला यह धर्म ‘ यत्र नार्यस्तु पुजयन्तु,रमन्ते तत्र देवता‘ के श्लोक बोल कर आत्ममुग्ध होता जाता है। इसे धर्म कहें या कमजोरों का शोषण करने वाली अन्यायकारी व्यवस्था ? इस गैर बराबरी को धर्म कहना वास्तविक धर्म का अपमान करना है।

गैर बराबरी पर टिके इस धर्म के बारे में सोचते सोचते मुझे डॉ. अम्बेडकर का वह कथन बार बार याद आता है जिसमें देश के दलितों को सावधान करते हुए वो कहते हैं कि – ‘भारत कभी भी मजहबी मुल्क नहीं बनना चाहिए, विशेषकर हिन्दू राष्ट्र तो कभी भी नहीं, वरना देश के अनुसूचित जाति व जन जाति के लोग पुनः अछूत बनाये जा कर गुलाम बना दिए जायेंगे। …….अब यह दलितों, आदिवासियों और महिलाओं को तय करना है कि वे आज़ाद रहना चाहते है या वर्ण व्यवस्था के, जाति और लिंग भेद के गुलाम बनने को राज़ी है ? अगर राज़ी है तो मुझे कुछ भी नहीं कहना है।

प्रेस नोट

बलात्कार के आरोपी की गिरफतारी की मांग

http://www.pressnote.in/Jaisalmer-Barmer-News_289958.html

बाडमेर । कलक्टर कार्यालय के बाहर दलित अत्याचार निवारण समिति के बैनर पर मंगलवार को दूसरे दिन भी बेमियादी धरना जारी रहा। समिति के सह संयोजक हरखाराम मेघवाल ने बताया कि ग्राम पंचायत तालसर की दलित सरपंच इंद्रा देवी के अधिकारों पर अतिक्रमण कर भ्रश्ट ग्राम सेवक एवं रोजगार सहायक द्वारा उन्हें पद से हटाने की साजिष रचने, प्रताडत करने जैसी गतिविधियां रची जा रही हैं। निर्वाचन के बाद भी महिला सरपंच को ग्राम पंचायत का रेकर्ड इतने महिनों से नही दिखाया जा रहा हैं। इसी तरह हाथमा गांव मे एक दलित विवाहिता के साथ १५ अगस्त के दिन हुए बलात्कार जैसे संगीन मामले मे भी पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफतार नही किया जा रहा हैं।

पीडता के बयान भी धारा १६४ मे लिये जा चुके हैं। इस तरह दोनों उत्पीडन प्रकरणों मे इंसाफ की मांग को लेकर यह धरना दिया जा रहा हैं। मंगलवार को भी धरने पर महिला सरपंच इन्द्रा देवी के साथ स्वंय बलात्कार पीडता भी बैठी। धरना स्थल पर गडरा प्रधान तेजाराम कोडेचा, इषाखां समेजा, मलूकखां चौहान, अणदाराम भील तालसर, जानपालिया सरपंच सवाईराम पूनड, थानाराम, पेंपोदेवी हाथमा, वगताराम मंसुरिया, नवाराम मंसुरिया, हजारीराम, मांगीलाल मंसुरिया, किषनलाल गर्ग, रामाराम बामणिया, चेतनराम मकवाना, हरीष मंसुरिया, अमराराम वसिये का तला, मारीयत भील वार्डपंच, जमाराम भील, जागीर कोली तालसर, ठाकराराम, त्रिलोकाराम सोमराड, मीराराम मेघवाल, भारथाराम, लाखाराम, बाबूराम, पेमाराम कृश्ण का तला पहुंचे और आंदोलन का समर्थन किया। इसके बाद धरनार्थियों ने सह संयोजक हरखाराम मेघवाल के नेतृत्व मे एक समूह के रूप मे जिला कलक्टर से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा तथा कार्यवाही की मांग की। जिला कलक्टर ने तालसर प्रकरण मे मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देष दिये।

न्यूज़ 18

दलित महिला से गैंगरेप के बाद गुस्‍साए लोगों ने बनाया पुलिसकर्मियों को बंधक

http://hindi.news18.com/news/bihar/angry-mob-hostage-policeman-after-gangrape-with-dalit-women-in-samastipur-846587.html

बिहार के बेगूसराय के मुफस्सिल थानाक्षेत्र में एक दलित महिला के साथ गैंगरेप के वारदात के बाद जमकर हंगामा हुआ. पुलिस कार्रवाई से नाराज लोगों ने पुलिस गश्ती दल को बंधक बना लिया. भीड़ ने इन पुलिसकर्मियों को तभी छोड़ा जब पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया.

गिरफ्तार आरोपी का नाम ढिपला है जो मुरारी सिंह गैंग का सक्रिय सदस्य है. लोगों का कहना है कि पुलिस इस गंभीर मामले को काफी हलके में ले रही है. वहीं, पीड़िता का कहना है कि उसे बंधक बना कर दो लोगों ने गैंगरेप किया. पुलिस इसे रेप के प्रयास का केस बता अपना पल्ला झाड़ रही है.

घटना के बाद इलाके में डरे हुए हैं. लोग पुलिस की कार्रवाई से खासे आक्रोशित हैं. लोगों का कहना है कि पुलिस दुष्कर्म का प्रयास बता कर मामले को ठंड़ा करना चाहती है.

न्यूज़ 18

दो दलित युवकों की हत्या के मामले में सभी तीन आरोपी गिरफ्तार

http://hindi.news18.com/news/uttarakhand/all-three-accused-arrested-in-the-murder-of-two-dalit-youths-851512.html

कोतवाली ज्वालापुर क्षेत्र में शनिवार देर रात हुई दो दलित युवकों की नृशंस हत्या के मामले में आखिरकार पुलिस ने हत्या में शामिल रहे तीनों प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इनकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या ने प्रयुक्त धारदार हथियार भी बरामद कर लिया है.

पुलिस का कहना है की हत्या के पीछे दो साल पुराना क्रिकेट को लेकर हुआ विवाद था. पुलिस का दावा है कि हत्या केवल एक ही युवक ने की है जबकि दो अन्य युवकों ने उसका साथ दिया था. हत्या में शामिल एक युवक नाबालिग है. पुलिस ने तीनों का संबंधित धाराओं में चालान कर दिया है.

ज्वालापुर का शास्त्री नगर इलाका शनिवार रात दो दलित युवकों पंकज और कार्तिक की हत्या और बंटी पर हमले की घटना से दहल गया था, जिसके बाद पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में तनाव के साथ कई बार बवाल हो चुका था. पुलिस पर फरार आरोपियों की गिरफ्तारी करने को लेकर काफी दबाव था.

इस मामले में पुलिस को गुस्साए लोगों ने सोमवार रात तक का अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद पुलिस ने बीती रात मुख्य आरोपी अभिषेक अरुण और एक नाबालिग युवक को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किए गए हथियार को बरामद कर लिया गया है.

जिस तरह से दोनों युवकों की नृशंस हत्या की गई उससे लग रहा था की हत्या के पीछे कोई बड़ा कारण रहा होगा, लेकिन एसएसपी का दावा है की हत्या के पीछे दो साल पुराना क्रिकेट मैच का विवाद रहा है. पहले ये लोग आपस में दोस्त थे, लेकिन विवाद के बाद इनमें रंजिश चल रही थी. घटना वाले दिन भी इनमें विवाद हुआ, जिसके बाद तीन युवकों पर चाकुओं से वार कर दिया गया. एसएसपी का कहना है कि हत्या केवल आशीष ने ही की है.

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद हत्याकांड को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी आशीष मेहता का कहना है की मृतक उसकी दुकान पर उसे मारने आए थे और चाकू भी वो ही लेकर आए थे. उसने कहा कि वो तो बचाव में चाकू छीनकर चलाया था, पर अब उसे अपनी इस करतूत पर पछतावा है.

आरोपी हत्यारों की गिरफ्तारी के बाद अब मृतक युवकों के परिजनों को राहत मिली है. अब वो पुलिस का आभार जता रहे हैं, लेकिन वो इसे क्रिकेट मैच को लेकर हुई हत्या मानने को तैयार नहीं हैं. उनका आरोप है की ये सुनियोजित तरीके से हुई हत्या है.

सरेराह हुए इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा कर पुलिस ने भले ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन जिस तरह इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया उसने सूबे की कानून व्यवस्था को सवालों के घेरे में जरूर ला दिया है. लगता है कि लोगों में पुलिस और कानून का कोई भय ही न रह गया हो. अब देखना ये होगा की सूबे में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने जे लिए एसएसपी क्या ठोस कदम उठाती हैं.

आउट लुक हिंदी

दलित-आदिवासी संघर्षों के लिए समर्पित थे एस.आर.संकरन

http://www.outlookhindi.com/art-and-culture/diary/sr-sankaran-was-devoted-for-cause-of-dalits-tribal-and-marginalised-4454#undefined

जनपक्षधर नीतियों के निर्माता और वंचित तथा दलितों के आंदोलनों के साथी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्वर्गीय एस.आर. संकरन के अथक प्रयास आज भी किवदंती सरीखे प्रशासनिक हलके और जनता के बीच जिंदा हैं। इन्हें जिंदा रखकर ही संविधान के प्रावधानों को जनता के हित में इस्तेमाल करने का रास्ता खोजा जा सकता है। ये बातें हैदराबाद में काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट संस्था द्वारा आयोजित के कार्यक्रम में उभरकर सामने आई।

सीएसडी ने पांच अक्टूबर को संविधान में सक्रियता, एस.आर. संकरन का जीवन और काम विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें बाल मजदूरी उन्मूलन, दलितों- आदिवासियों के सम्मान और अधिकारों के संघर्षों तथा शांति वार्ताओं में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ अधिकारी संकरन को अलग-अलग पहलुओं से याद किया गया। प्रशासनिक सेवा में संकरन ने जो जनपक्षधरता की मिसाल कायम की, वह आज भी आईएएस कैडर के लिए नजीर के तौर पेश की जाती है, इस बारे में उनके पुराने दिनों के सरकारी टीएल संकर ने बताया। टीएल संकर ने बताया कि किस तरह से जब वे दोनों साथ-साथ पढ़ते थे, तब भी जनसेवा का भाव उनमें प्रबल था। उन्होंने यह भी रखा कि जिन मुद्दों को संकरन ने उठाया, वे आज भी बेहद प्रासंगिकत बने हुए हैं। चाहे वह बाल मजदूरी से जुड़ा मुद्दा हो या फिर मैले से जुड़ा मुद्दा हो।

शिक्षाविद् प्रो. डी. नरसिम्हा रेड्डी ने बताया कि किस तरह से संकरन का जोर दलितों और आदिवासियों को गांव में जमीन दिलाने पर रहा। इसने जमीनी स्तर पर बड़े परिवर्तन भी किए। संकरन को बेहद करीब से जानने वाली महिला अधिकार कार्यकर्ता वसंत कन्नाबिरान ने उनके द्वारा नक्सलियों और सरकार में चलाई गई शांति वार्ता के दौर पर रोशनी डाली। वसंत ने बताया कि शांति वार्ता के जटिल दौर में भी संकरन अपने सिद्धांतों से एक कदम भी पीछे नहीं डिगते थे। उन्हें शांति वार्ता की सफलता पर 100 फीसदी भरोसा था।

अपने जीवन के अंतिम समय तक एसआर. संकरन सफाई कर्मचारी आंदोलन से जुड़े हुए थे। वह इस संस्था के चेयरमैन करीब दो दशक तक रहे। उनकी इस आंदोलनकारी भूमिका के बारे में विस्तार से बताया सफाई कर्मचारी आंदोलन के नेता बेजवाड़ा विल्सन ने। उन्होंने बताया कि संकरन उन विरले लोगों में थे जो गैर-दलित होने के बावजूद, बिना किसी नाम या शोहरत के दिल से दलितों के उद्धार के लिए अपनी पूरी ऊर्जा लगाते हैं। बातचीत के इस दौर में नेल्लोर के प्रो. वी. रामाकृष्णा ने बताया कि किस तरह से आज भी संकरन वहां किवंदिती की तरह मौजूद है। नल्लोर में ही संकरन ने जिलाधिकारी के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

कार्यक्रम के अंत में सीएसडी की निदेशक डॉ. कल्पना कन्नाबिरान ने चिंचु जनजाति पर फिल्माई गई एक डॉक्यूमेंटरी दिखाई-स्कूलिंग इन नामाल्ला। इस अति पिछड़ी जनजाति चिंचु के लिए अलग से स्कूलों-पढ़ाई, आवासीय स्कूलों की व्यवस्था एसआर. संकरन ने ही की थी। यह फिल्म इन बच्चों और समुदाय की स्थिति को सामने लाती है।

 News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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