दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 04.10.15

भूमि विवाद में शिक्षक को मारी गोली – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/sultanpur/sultanpur-hindi-news/teacher-shot-due-to-land-dispute-hindi-news/

दलित छात्र के थाली छूने से इस कदर नाराज हुए शिक्षक, पीट-पीटकर पहुंचाया अस्पताल न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/rajasthan/teacher-beaten-dalit-student-in-jodhpur-rajasthan-834951.html

आबादी के निकट बने गैस गोदाम को लेकर हंगामा – इनेक्स्ट लाइव

http://inextlive.jagran.com/protest-against-gas-godown-in-sardhana-94913

पांच साल में 243 एट्रोसिटी के मामले में सिर्फ 2 को सजा – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/raigarh-in-the-case-of-attrositi-only-2-convictions-492211

गैंगरेप के आरोपियों को अरेस्ट करने की मांग, सड़क पर उतरे दस हजार आदिवासी – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news-ht/c-268-535354-pt0171-NOR.html

विचारकों ने की अंतर्जातीय विवाह की वकालत – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/banda/banda-hindi-news/of-thinkers-advocated-intermarriage-hindi-news/

आरक्षण विरोधियों को लताड़,दलित का हक़ आरक्षण – पंजाब केसरी

http://punjab.punjabkesari.in/hoshiarpur/news/article-401296

Please Watch:

 ” Dlits & Media: Concerns and Lacuna”s 

https://www.youtube.com/watch?v=BwK8YOoa66Y

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

अमर उजाला

भूमि विवाद में शिक्षक को मारी गोली

http://www.amarujala.com/news/city/sultanpur/sultanpur-hindi-news/teacher-shot-due-to-land-dispute-hindi-news/

भूमि विवाद में शनिवार की सुबह साइकिल से विद्यालय जा रहे एक निजी स्कूल के शिक्षक को तीन युवकों ने गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर शिक्षक को बचाने पहुंचे पिता की हमलावरों ने पिटाई कर दी। शिक्षक पर जानलेवा हमले से नाराज ग्रामीणों ने लखनऊ-बलिया राजमार्ग पर स्थित सूरापुर चौक पर जाम लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

करीब एक घंटे बाद राजमार्ग से न हटने पर पुलिस ने हलका बल प्रयोग किया। शिक्षक को सीएचसी में भर्ती किया गया है। पुलिस ने तीन युवकों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। मामला पोखरदहा गांव से जुड़ा है। कादीपुर कोतवाली क्षेत्र के पोखरदहा गांव निवासी दलित चंद्रशेखर (30) पुत्र हरीराम क्षेत्र के करपीरामपुर में स्थित एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक हैं। चंद्रशेखर को गांव में आवासीय पट्टा मिला है। इसे लेकर चंद्रशेखर का गांव के ही सूरज सिंह से विवाद चल रहा है।

एक अक्तूबर को चंद्रशेखर के परिवार की महिलाएं पट्टे की जमीन के पास उपले पाथ रही थीं, जिसे सूरज सिंह ने मना किया था। शनिवार सुबह चंद्रशेखर स्कूल जाने के लिए साइकिल से निकला था। गांव के बाहर पहुंचते ही सूरज सिंह आदि ने उसे रोक लिया और पीटना शुरू कर दिया। मारपीट के दौरान ही किसी ने चंद्रशेखर को तमंचे से गोली मार दी। गोली चंद्रशेखर के सीने को बगल से छीलते हुए निकल गई।

गोली की आवाज सुनकर चंद्रशेखर के पिता हरीराम वहां पहुंचे। हमलावरों ने हरीराम की पिटाई कर दी। पिता-पुत्र पर हमले की सूचना पाते ही तमाम लोग एकत्र होकर सूरापुर चौक पहुंच गए। ग्रामीणों ने हाईवे जामकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस के अधिकारियों ने ग्रामीणों को काफी समझाया, लेकिन वे शांत नहीं हुए। हाईवे खुलवाने के लिए पुलिस ने हलका बल प्रयोग करते हुए लोगों को हाईवे से खदेड़ दिया।

एएसपी प्रद्युम्न सिंह ने घटना स्थल का निरीक्षण किया है। पुलिस ने पीड़ित शिक्षक चंद्रशेखर की तहरीर पर सूरज सिंह, अंकित उर्फ सोनू सिंह और राजन सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

न्यूज़ 18

दलित छात्र के थाली छूने से इस कदर नाराज हुए शिक्षक, पीट-पीटकर पहुंचाया अस्पताल

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जोधपुर में एक दलित छात्र के खाने की थाली को छूने से एक शिक्षक इस कदर नाराज हो गए की उसे पीट-पीटकर अस्पताल पहुंचा दिया.

भारत देश को आजाद हुए वैसे तो 68 साल हो चुके है, लेकिन अाज भी यह देश जाति-पाति और छुआछूत की बंदिशों से आजाद नही हो पाया है. जोधपुर जिले के ओसियां तहसील क्षेत्र में एक ऐसा ही मामला देखने को मिला. जब एक दलित छात्र को केवल इसलिए शिक्षक के गुस्‍से का  सामना करना पड़ा क्‍यूंकि उसने खाने की थाली छू लिया था. इसके बाद तो उस शिक्षक ने उस छात्र को इस कदर पीटा की उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा.

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शिक्षक का गुस्सा इतने पर भी नहीं थमा और शिकायत लेकर पहुंचे छात्र के पिता के साथ भी टीचर ने मारपीट की. फिलहाल शिक्षक की मार से घायल हुए छात्र को जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में इलाज चल रहा है. छात्र के पिता मानाराम मेघवाल ने बताया कि उसका पुत्र ओसियां तहसील के बेरड़ों का बास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चौथी कक्षा में पढ़ता है.

स्कूल में मिड डे मील वितरण के दौरान उसके पुत्र दिनेश ने सभी छात्रों को खाद्य सामग्री वितरित करने में काम आने वाली थाली के हाथ लगा दिया. इसकी जानकारी मिलते ही मिड डे मील प्रभारी शिक्षक हेमाराम जाट बेहद नाराज हो गए. उन्होने दिनेश को बुलाकर उसके सात जमकर मारपीट की. घायल दिनेश वहां से भागकर निकट ही स्थित अपने घर पहुंचा और पिता को जानकारी दी. इस पर शिकायत लेकर दिनेश के पिता स्कूल पहुंचा. उसने वहां पहुंच प्रधानाचार्य से संपर्क करना चाहा, लेकिन वे मिले नहीं. इस पर वह शिकायत लेकर हेमाराम के पास पहुंचे.

 छात्र के पिता से भी की मारपीट-

शिकायत करने से नाराज हेमाराम ने दिनेश के पिता मानाराम के साथ मारपीट कर उन्हे वहां से भगा दिया. शिक्षक की मारपीट से घायल छात्र को इलाज के लिए जोधपुर रैफर किया गया. उम्मेद अस्पताल में पीड़ित छात्र के पिता ने बताया कि उसके पुत्र के कई स्थान पर चोट आई हुई है. साथ ही सदमे के कारण वह कुछ बोल भी नहीं पा रहा है. मानाराम ने अपने शरीर पर आई चोट के निशान भी बताए.

 शिक्षक हिरासत में-

इस मामले में ओसियां थाने में मामला दर्ज कराया गया है. जिसके बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक को हिरासत में ले लिया है. फिलहाल आरोपी शिक्षक से पूछताछ जारी है. इससे पहले शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दलित शोषण मुक्ति मंच के लोगों ने प्रदर्शन भी किया था.

 उल्टा चोर कोतवाल को डांटे-

वहीं शिक्षक हेमाराम ने भी पीड़ित छात्र के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. उसका आरोप है कि छात्र थाली में पत्थर लगा रहा था. उसे मना किया गया, लेकिन वह नहीं माना.

इनेक्स्ट लाइव

आबादी के निकट बने गैस गोदाम को लेकर हंगामा

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दौराला रोड पर श्मशान के निकट आबादी में बनाए गए गैस गोदाम को लेकर नगर के लोगों ने हंगामा किया। उन्होंने बड़े हादसे की आशंका जाहिर करते हुए एसडीएम से गैस गोदाम हटवाने की मांग की.

गैस गोदाम हटवाने की मांग

एसडीएम ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। दौराला रोड पर हाल ही में आबादी के निकट भारत गैस का गोदाम बना है। शनिवार को नगर के कई लोगों ने हंगामा करते हुए आबादी के निकट बनाया गया गैस गोदाम हटवाने की मांग की.

आबादी से दो किमी दूरी जरूरीे

हंगामा कर रहे लोगों का कहना था कि दौराला रोड पर श्मशान के निकट भारत गैस के गोदाम का निर्माण हुआ है। नियमानुसार गैस गोदाम आबादी से करीब दो किमी दूर बनाया जाना चाहिए। मगर यह गोदाम गढ़ी खटीकान और जगमोहन नगर के निकट बना दिया गया है। जहां बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग रहते हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका है। सरधना में फायर ब्रिगेड का स्टेशन भी नहीं है। यदि कोई हादसा होता है तो मेरठ से फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पूर्व ही जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने एसडीएम से जांच कराकर गैस गोदाम आबादी से दूर बनवाने की मांग की है। हंगामा करने वालों में सचिन खटीक, दीपक, संजय, अनिल, विनोद, अर¨वद, अजीत, नितिन, सुभाष, अजय, रवि, अजीत आदि शामिल रहे।

नई दुनिया

पांच साल में 243 एट्रोसिटी के मामले में सिर्फ 2 को सजा

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दलित महिलाओं से संबंधित मामले न्यायालय पहुंचते पहुंचते तोड़ देते हैं दम

रायगढ़ (निप्र)। दलित-आदिवासी महिलाओं पर हो रहे अपराध के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज तो कर लेती है, लेकिन मामले अदालत के दहलीज पर दम तोड़ देते हैं। इसके अलावा पुलिस ने किसी भी मामले में आज तक अपील करने की जहमत मोल नहीं ली है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस काम सिर्फ एफआईआर दर्ज करना ही है या सबूत क ो जुटाकर न्याय दिलाना भी है।

जिले में पिछले पांच साल में 243 आदिवासी महिलाएं पुरुषों के अत्याचार की शिकार हो चुकी हैं। अहम बात ये है कि एक तरफ जहां महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर संबंधित मामले न्यायालय पहुंचते पहुंचते बेहद कमजोर पड़ जाते हैं। नतीजतन साल 2010 से लेकर अब तक केवल दो अपराधियों को ही महिलाओं पर अत्याचार करने के आरोप में सजा मिल पाई है। गौरतलब है कि महिलाओं पर अत्याचार के मामले में रायगढ़ जिला अव्वल रहा है। दूसरी ओर महिलाओं से संबंधित अपराध न्यायालय पहुंचने के पश्चात बेहद शिथिल पड़ने के कारण भी अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार साल 2010 में 48 दलित महिलाएं पुरुषों के अत्याचार की शिकार हुई। जिनमें से एक भी अपराधी को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया है। इसी तरह 2015 के आते आते 243 महिलाएं पुरुषों के अत्याचार की शिकायत सामने आ चुकी है। हैरत करने वाली बात ये है कि महिलाओं के साथ अत्याचार करने वाले आरोपी महज इसलिए कानून की शिकंजे से छूट जाते हैं, क्योंकि ऐन वक्त पर उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिलता। यही वजह है कि इन पांच सालों में तेजी से बढ़ते अपराध में केवल दो लोग ही जेल की सलाखों के पीछे गये हैं। वहीं अन्य अपराधियों पर किसी किस्म के मामले लंबित नहीं हैं।

सजा के अभाव में बढ़ रहे अपराध

पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऐसे अपराधों में वृद्घि हुई है। अधिकतर मामलों में महिलाएं शोषण की शिकार हुई हैं। ये मामले न्यायालय तो पहुंच जाते हैं। मगर कुछ कारणों से महिलाओं को उचित न्याय नहीं मिल पाता। ये बात अलग है कि दोषियों को महिलाओं के साथ अत्याचार करने के आरोप में मोटी रकम चुकानी पड़ती है। वहीं रकम चुकाने के बाद आरोपी पूरी तरह से दोषमुक्त हो जाते हैं।

2014 में 60 लाख से अधिक की पेनाल्टी

महिलाओं पर अत्याचार करने के आरोप में आदिवासी विकास शाखा के पास आरोपियों द्वारा महिलाओं को राहत एवं पुनर्वास राशि जमा की जाती है। आंकड़ों की मानें तो साल 2014 में विभाग के पास कुला 52 मामले आए थे, जिनमें अजा एवं अजजा के अलग अलग 52 प्रकरण सामने आए थे। ऐसे में पीड़ित महिलाओं को साल 2014 में 60 लाख से अधिक की राशि दी जा चुकी है।

पुलिस की पूरी कोशिश रहती है कि अपराधी को सजा मिले, फैसला के मामले में पुलिस कुछ नहीं कर सकती।

दैनिक भास्कर

गैंगरेप के आरोपियों को अरेस्ट करने की मांग, सड़क पर उतरे दस हजार आदिवासी

http://www.bhaskar.com/news-ht/c-268-535354-pt0171-NOR.html

पटना. बिहार के कटिहार में गैंगरेप के आरोपियों को अरेस्ट करने की मांग को लेकर शनिवार को आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया। दावा किया जा रहा है कि 10 हजार आदिवासियों के प्रदर्शन के कारण शहर में जगह-जगह ट्रैफिक जाम लग गया। विरोध जताने के लिए भारी संख्या में आदिवासी कलेक्टर के ऑफिस के बाहर जुटे। कुछ आदिवासियों ने सड़क पर ही डुगडुगी बजा कर प्रदर्शन किया। बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा से आए आदिवासी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।

 क्या है मामला?

गैंगरेप की घटना 22 सितंबर की है। बंगाल के उत्तरी बिलासपुर की एक आदिवासी लड़की कटिहार के हफला के सिरनिया में अपने रिश्तेदार के यहां आई थी। घटना वाली शाम को वह साइकिल से गांव लौट रही थी। रास्ते में उसकी साइकिल की चेन टूट गई। इस दौरान कुछ लड़के आए और उसे जबरन अपने साथ ले गए। एक झोपड़ी में 9 लड़कों ने उसके साथ गैंगरेप किया। डर के मारे लड़की ने घरवालों को इसके बारे में नहीं बताया।

 क्या कर रही है पुलिस?

24 सितंबर को लड़की ने गांव में एक लड़के को देखा। वह भी उसके साथ हुए गैंगरेप में शामिल था। लड़के को देख लड़की ने शोर मचाया। गांव के लोगों ने लड़के को पकड़ना चाहा, लेकिन वह बाइक छोड़कर भाग गया। इसके बाद लड़की की फैमिली ने केस दर्ज कराया। पुलिस अभी तक एक भी आरोपी को अरेस्ट नहीं कर पाई है।

अमर उजाला

विचारकों ने की अंतर्जातीय विवाह की वकालत

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बांदा। बड़ोखर खुर्द गांव के ह्यूमन एग्रेरियन सेंटर हाल में चल रही लेखक और विचारकों की राष्ट्रीय कार्यशाला में शनिवार को दूसरे दिन जाति उन्मूलन और दलित महिलाओं के मुद्दे छाए रहे।

ज्यादातर रचनाकारों और विचारकों ने अंतर्जातीय विवाह की वकालत की। कहा कि अंबेडकर के नाम पर राजनीति तो होती है लेकिन न तो कहीं अंबेडकर की सोच है और न ही उनके आदर्श अपनाए जाते हैं। जातिवादी सोच रखने वालों को मानसिक रोगी बताया गया। 

आंकड़े पेश हुए कि देश में आठ करोड़ दलित महिलाएं कृषि कार्य कर रही हैं। देश मेें 98 फीसदी संपत्ति पुरुषों के नाम हैं। आज भी गरीब परिवार साथ में बैठकर भोजन-भजन नहीं कर सकते। गोष्ठी का आयोजन जनवादी लेखक संघ ने किया है। चार अक्तूबर को इसका समापन होगा। 

‘जाति उन्मूलन में दलित साहित्य की भूमिका’ पर दिल्ली से आए दलित साहित्य वार्षिकी के संपादक जय प्रकाश कर्दम ने कहा कि जाति उन्मूलन जटिल विषय है। जाति का मतभेद खत्म करने के लिए ईश्वरवाद से मुक्ति जरूरी है। वर्ण व्यवस्था और वर्चस्ववाद खत्म हुए बगैर जाति भेद खत्म नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि गांवों में शहरों से दलितों की स्थिति भिन्न हैं। गांवों में जाति का भेद तो रहता है, पर दलितों का दबदबा भी रहता है, लेकिन शहरों मेें जाति का असर होता है, पर दबदबा नहीं होता। उन्होंने कहा कि सोच बदलनी होगी। सिर्फ साथ रहने, उठने, बैठने से ही जाति भेद खत्म नहीं होगा।

खूनी रिश्ते बनना जरूरी है। वे अंतर्जातीय विवाह के पक्षधर हैं। उनकी दो बेटियां हैं। दोनों से कह रखा है कि वे अपनी पसंद से शादी कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि दलितों का एक वर्ग ऐसा भी उभर रहा है जो पूंजीवादी है। दलित साहित्य ने कभी दलित राजनीति का समर्थन नहीं किया। 

दलित स्त्री की समस्याओं को लेकर कई आंदोलन चला चुकी दिल्ली की विचारक और मुक्ति संगठन की संयोजक अनिता भारती ने दलित उत्थान के नाम पर एनजीओ चलाने वालों को आड़े हाथों लिया। कहा कि कुछ दिन इस मुद्दे पर काम करने के बाद एनजीओ फंड मिलने वाले मुद्दे उठाने लगे। 

उन्होंने ने कहा कि जातिवादी सोच रखने वाला व्यक्ति मानसिक रोगी होता है। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाना चाहिए। इस पर भी हैरत जताई कि महिला उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों में ही महिलाओं की भूमिका कम है। कहा कि गरीब और दलित महिला आज भी पीड़ित है। 

कोई मालकिन के डर से तो कोई पति की पिटाई से। दलित महिलाओं के प्रति लोगों का नजरिया बदला होता है। पुरुष प्रधान समाज में अभी भी महिलाएं दबी हैं। उन्होंने कहा कि पवित्र शब्द को डंडे से पीटकर खत्म करना होगा। 

साहित्यकार और विचारक पूर्व प्रो. रेखा अवस्थी (दिल्ली) का कहना है कि सवर्ण महिलाओं की स्थिति भी दलितों जैसी है। लड़कियों को शिक्षित बनाने में आज भी लोग कतराते हैं। पत्नियों को मारने की प्रथा भी खत्म नहीं हुई। 

देश मेें 98 फीसदी संपत्ति पुरुषों के नाम है। गरीब परिवार साथ बैठकर भोजन और भजन नहीं कर सकता। प्रो. अवस्थी ने कहा कि सिंदूर भरने मात्र से पुरुष महिला पर पूरा अधिकार हासिल कर लेता है। संतान उत्पत्ति, पति और परिवार की सेवा ही स्त्री का धर्म बनकर रह जाता है।

उन्होंने हैरत जताई की अब कोख की बिक्री हो रही है। स्त्री उत्पीड़न का यह नया तकनीकी हथकंडा है। यह सब आर्थिक और पुरुष सत्ता करा रही है। इसे रोका जाना जरूरी है। श्रम से लेकर जातिगत उत्पीड़न रोकने तक के लिए आंदोलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मात्र दो फीसदी संपत्ति की मालकिन महिलाएं हैं, लेकिन उसमें भी पुरुषों का दखल रहता है।

पंजाब केसरी

आरक्षण विरोधियों को लताड़,दलित का हक़ आरक्षण

http://punjab.punjabkesari.in/hoshiarpur/news/article-401296

होशियारपुर (जैन): आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ बेगमपुरा टाइगर फोर्स ने रोष रैली निकाल कर प्रदर्शन किया। संगठन के चेयरमैन तरसेम दीवाना, उप-चेयरमैन बिल्ला दिओवाल, वरिष्ठ नेता नरिन्द्र नेहरू आदि के नेतृत्व में संगठन केे कार्यसदस्यों ने आरक्षण विरोधियों के खिलाफ नारेबाजी कर उन्हें लताड़ा।

चेयरमैन तरसेम दीवाना ने कहा कि आरक्षण दलित समाज का संवैधानिक हक है। सदियों से दलित कौम स्वर्ण जाति की गुलामी व धक्केशाही का बोझ ढोह रही है जोकि देश की आजादी के पश्चात अब भी जारी है।

उन्होंने रोषपूर्वक कहा कि दलित जाति का भले ही कोई व्यक्ति मंत्री क्यों न हो वह नीच ही समझा जाता है। राष्ट्रीय एस.सी./एस.टी. आयोग के चेयरमैन पी.एस. पूनिया को ओडिशा के एक  मंदिर में दाखिल होने से रोकना इसका ठोस उदाहरण है। 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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