दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 25.09.15

भीलवाड़ा में दलित किसान को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/rajasthan/dalit-farmer-murdered-in-bhilwara-786012.html

दलित महिला पर किया दबंगों ने हमला – भाषा

http://bhasha.ptinews.com/news/1312492_bhasha

आखिर ऐसा क्या हुआ कि उपद्रवियों ने माहौल बिगाड़ दिया – राजेश्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/what-happened-after-that-was-marred-by-miscreants-1330726.html

सबके सहयोग से संप होगा अपराध मुक्त – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/sahibgunj/story/544197.html

कर्मचारियों ने पदोन्नतियों में मांगा आरक्षण – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-MUR-MAT-latest-morena-news-033053-2713070-NOR.html

दलित सामाज ने पूना पैक्ट –डे को काले दिवस के रूप में मनाया – पंजाब केसरी

http://haryana.punjabkesari.in/yamunanagar/news/article-398210

हाँ, मैं आरक्षण के सामाजिक-शैक्षिक आधार का समर्थक हूँ – हस्तक्षेप

http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/ajkal-current-affairs/2015/09/24/yes-i-am-a-supporter-of-the-reservation-baseed-on-socio-educational

Please Watch:

Caste System And Dalit || Inequality In India

https://www.youtube.com/watch?v=mn9sFBlLG6U

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

न्यूज़ 18

भीलवाड़ा में दलित किसान को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट

http://hindi.news18.com/news/rajasthan/dalit-farmer-murdered-in-bhilwara-786012.html

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक दलित किसान को कुछ युवकों ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया.

दलित किसान की हत्या का यह मामला जिले के के बदनोर थानार्न्तगत ठुमिया ग्राम का है. मृतक दलित किसान उगमा राम के बेटे औंकार बागरिया ने पुलिस में मामला दर्ज करवाते हुए राजपूत समाज के कुछ युवकों ने उसके पिता को मार डाला. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

bhilwara-murder

यह था मामला:

मृतक किसान के बेटे के अनुसार उसके पिता को खेत में गाय घुसने का विरोध करने का खामियाजा अपनी जान गंवा कर चुकाना पड़ा. राजपुत समाज के कुछ युवकों ने उनकी पिटाई की और उसके बाद महात्मा गांधी चिकित्सालय में इलाज के दौरान किसान ने दम तोड़ दिया. पुलिस ने शुक्रवार को मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया. वहीं,

 मिल रही हैं जान से मारने की धमकियां:  

मृतक के बेटे औंकार ने कहा कि मोहब्बत सिंह व राजपुत समाज के लोगों ने खेत में गायों को छोड़ने का विरोध करने पर और लोगों को जान से मारने की धमकी दी थी. औंकार के अनुसार मोहब्बत सिंह अब उन्हें भी धमकी दे रहा है कि अभी तो एक मरा है बाकि तुम सबको भी खत्म कर दुंगा. बदनोर थाने के हैडकांस्टेबल कैलाश राम के अनुसार मामले की जांच शुरू हो गई है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

भाषा

दलित महिला पर किया दबंगों ने हमला

http://bhasha.ptinews.com/news/1312492_bhasha

 जिले के सावित्री नगर में आज एक दलित महिला पर हमला कर घायल करने, तोडफ़ोड़ करने पर शहर थाना पुलिस ने एक महिला सहित पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि घायल तारो देवी की शिकायत पर शहर थाना पुलिस ने राजेश, उसकी पत्नी निर्मला, बेटा अमन, नमन तथा बिजेंद्र उर्फ जोनी के खिलाफ घर में घुसकर हमला करने, तोडफ़ोड़ करने तथा जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को उनके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

राजेश्थान पत्रिका

आखिर ऐसा क्या हुआ कि उपद्रवियों ने माहौल बिगाड़ दिया

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/what-happened-after-that-was-marred-by-miscreants-1330726.html

 बड़ा महुआ गांव में माहौल गरमाने पर मौके  पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के सामने भीड़ बेकाबू हो गई। समझाइश के दौरान एक बार लोग जाने लगे, लेकिन इसी दौरान कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया।

इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। भीड़ को खदेडऩे के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। उग्र भीड़ को देखकर प्रशासनिक अधिकारियों को मौके से भागना पड़ा। लोग घरों में भागे। भगदड़ में कई एक-दूसरे पर भी गिर गए। पथराव में आधा दर्जन पुलिसकर्मी, गिरदावर शंकरलाल शर्मा और पटवारी मोहनसिंह को भी चोटें आई।

 इसलिए उपजा विवाद

ग्रामीणों और रेगर समाज की ओर से अलग-अलग बेवाण निकाला जाता है। ग्रामीणों का बेवाण शाम सात बजे तालाब पर पहुंचना था, लेकिन उनके बेवाण में देरी हो गई। इस बीच, रेगर समाज का बेवाण अपने समय से रवाना हो गया। इसका ग्रामीणों ने विरोध किया। दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। विवाद ने तूल पकड़ लिया।

 पहले पंचर किया, फिर वाहन फूंका

गुस्साए उपद्रवियों ने दलित का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए तहसीलदार मांगीलाल के वाहन को पंचर कर दिया। उनका चालक टायर बदलने लगा तो भीड़ ने वाहन में आग लगा दी। इससे वाहन पूरी तरह जल गया। वहां खड़े एक दुपहिया वाहन को भी फूंक दिया गया। माहौल को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्योतिस्वरूप शर्मा, उपखण्ड अधिकारी संजय शर्मा और शहर के सभी थानाप्रभारी को वहां भेजा गया। लाइन से आरएसी के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी पहुंच गए।

 गांव में सन्नाटा, उपद्रवी भागे

पुलिस के मोर्चा संभालते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। ग्रामीण घरों में दुबक गए और उपद्रवी फरार हो गए। सदर थाना पुलिस ने पथराव कर राजकार्य में बाधा पहुंचाने, सरकारी सम्पति को नुकसान और उपद्रव फैलाने का मामला दर्ज किया। पुलिस देर रात तक आरोपितों को नामजद करने में जुटी थी। घरों में दबिश देकर उपद्रवियों को धरदबोचा जा रहा था।

 पहले भी हुआ विवाद

दो साल पूर्व भी बेवाण के रास्ते व समय को लेकर बड़ा महुआ में माहौल गरमा चुका है। उस समय रातभर बेवाण तक नहीं उठे थे। कई दिन बाजार बंद रहे। काफी समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।

पथराव में घायल हुआ गिरदावर

प्रभात खबर

सबके सहयोग से संप होगा अपराध मुक्त

http://www.prabhatkhabar.com/news/sahibgunj/story/544197.html

साहिबगंज : पुलिस पदाधिकारी व आम लोगों के सहयोग से संताल परगना प्रमंडल अपराध मुक्त होगा. यह बातें संताल परगना प्रमंडल के पुलिस उप महानिरीक्षक देव बिहारी शर्मा ने गुरुवार को 11 बजे पुलिस लाइन स्थित एसपी कार्यालय कक्ष में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही. कहा : वर्तमान समय में प्रमंडल के छह जिलों के पुलिस कप्तान के कुशल नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारी व जवान अच्छे कार्य कर रहे हैं. रही बात पुलिस जवानों को बेहतर सुविधा प्रदान करने की तो झारखंड प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस बैरेक की व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है. 

पूर्व में देखने को मिलता था कि बैरेक में तीन चार मेस चलता था, लेकिन अब सेंट्रल मेस चलेगा और ब्रांस नंबर की व्यवस्था लागू होगी. ना कि एसटी, एससी व अन्य नामों से मेंस चलेगा.

साहिबगंज दियारा क्षेत्र में फसल कटाई के समय अपराधियों द्वारा फसल लूट की घटना पर रोक लगाने को लेकर दियारा में पुलिस पिकेट की स्थापना करने के सवालों का जवाब देते हुए डीआइजी श्री शर्मा ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखा जायेगा. उन्होंने एसपी सुनील भास्कर से कहा कि फसल कटाई के समय अस्थाई पुलिस पिकेट लगाने की व्यवस्था करें. मौके पर एसपी सुनील भास्कर, डीएसपी सीएम झा उपस्थित थे.

दैनिक भास्कर

कर्मचारियों ने पदोन्नतियों में मांगा आरक्षण

http://www.bhaskar.com/news/MP-MUR-MAT-latest-morena-news-033053-2713070-NOR.html

अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण जारी रखने सहित उच्च न्यायिक सेवाओं में आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर अजाक्स संगठन से जुड़े कर्मचारियों ने कलेक्टोरेट पर धरना देकर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

धरना आंदोलन को संबोधित करते हुए अजाक्स के जिला अध्यक्ष राजवीर अग्निहोत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए भू-अधिग्रहण बिल लागू करने पर तो जोर दे रही है लेकिन संसद में लंबित पदोन्नति में आरक्षण बिल को पास नहीं कराना चाहती है। इसका असर देशभर के अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों के हितों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण को गलत बताकर इसका विरोध करने वाले तत्वों के खिलाफ संवैधानिक सजा का प्रावधान होना चाहिए। अजाक्स के जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं को रा’य शासन से मिलने वाली स्कॉलरशिप के लिए तय आय सीमा को एक लाख 80 हजार रु से बढ़ाकर छह लाख रु किया जाए। उन्होंने दलित छात्राओं के लिए कराटे का प्रशिक्षण अनिवार्य किए जाने का मुद्दा भी उठाया। वक्ता लोकेन्द्र सिंह ने आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने की बात कही। 

 पंजाब केसरी

दलित सामाज ने पूना पैक्ट –डे को काले दिवस के रूप में मनाया

http://haryana.punjabkesari.in/yamunanagar/news/article-398210

पूना पैक्ट-डे को काले दिवस के रूप में मनाते हुए हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ द्वारा जमकर प्रदर्शन किया गया व जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा गया। काला दिवस मनाने के लिए संघ के जिला अध्यक्ष सतपाल के नेतृत्व में डा. अंबेडकर भवन में संघ के सदस्य एकत्रित हुए और वहां से प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात अवरुद्ध करते हुए लघु सचिवालय तक पहुंचे जहां उन्होंने तहसीलदार को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा।

सदस्यों को संबोधित करते हुए संघ कार्यालय सचिव विनोद ने बताया कि पूना समझौता महात्मा गांधी और अंबेडकर के बीच यरवदा जेल में हुआ था। यह वह समझौता था जिसके लिए डा. को खून आंसू रोने पड़े थे। इस समझौते को मनवाने के लिए महात्मा गांधी और अन्य संगठनों ने अंबेडकर को विवश किया था क्योंकि डा. अंबेडकर पूना पैक्ट नहीं चाहते थे। उन्होंने तो दलितों, सिखों, मुसलमानों के लिए क युनल अवार्ड की मांग की थी और अंग्रेज सरकार ने इसे मान भी लिया था, लेकिन गांधी इसके लिए तैयार नही हुए। उन्होंने इसके विरोध में पूना की यरवादा जेल में आमरण आमरण अनशन शुरू कर दिया। गांधी जान बचाने और दलित समाज पर किसी प्रकार की कोई आफत न आए इसके लिए अंबेडकर ने यह समझौता माना था। गांधी जी ने जिस लिए पूना समझौता किया था वह दलितों की समस्या का हल नही था। दलितों की समस्या का हल तो क युनल अवार्ड ही था। आज जो आरक्षण है वह पूना समझौता की देन है, जिसे हुए 83 वर्ष बीत गए लेकिन दलितों के हालात नही सुधरे। 

फेडरेशन के सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि पूना समझौता एक धोखा है जिसके चलते यह काला दिवस मनाया जा रहा है। आज हमें आरक्षण की नही बल्कि कन्युनल अवार्ड की जरूरत है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुसूचित जाति को समान की दृष्टि से नही देखा जाता। इस मौके पर बनारसी दास, सुरेन्द्र कुमार, रवि कांत, संजीव कुमार, चांद राम, जय किशन, अनिल कुमार, राजेश, काका, संदीप, प्रवीन, विनोद, हंसराज, सोहन लाल, मीना कुमारी, भारती रानी, हरजीत कौर आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

शहीद राकी के परिवार को मिले सम्मानीय सहायता

डाक्टर भीम राव अंबेडकर संघर्ष समिति द्वारा जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पिछले दिनों आतंकवादियों से सीमा सुरक्षा बल के 44 जवानों की जान बचाते हुए शहीद रॉकी के परिवार के को सम्मानीय सहायता मुहैया करवाने बारे ज्ञापन सौंपा। उन्होंने जिला उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री से मांग की है कि दिल्ली की तर्ज पर शहीद के परिवार को परमवीर चक्र से नवाजा जाए। शहीद के परिवार में उसके भाई को तहसीलदार व एस.डी.एम. भर्ती किया जाए, बिलासपुर साढौरा मार्ग पर शहीद के नाम का स्मारक बनाया जाए तथा शहीद के परिवार को गैस एजेंसी आदि का लाइसेंस मुहैया करवाया जाए।

हस्तक्षेप

हाँ, मैं आरक्षण के सामाजिक-शैक्षिक आधार का समर्थक हूँ

http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/ajkal-current-affairs/2015/09/24/yes-i-am-a-supporter-of-the-reservation-baseed-on-socio-educational

मैं आरक्षण के सामाजिक- शैक्षिक आधार का समर्थक हूँ, क्योंकि समाज से सामाजिक विषमता अभी समाप्त नहीं हुई है, बल्कि अगड़ी जातियां आरक्षण के विरोध में निरन्तर मुखर होती जा रही हैं।

अगड़ी जातियों के नेता येन केन प्रकारेण आरक्षण की व्यवस्था को ही समाप्त करना चाहते हैं और इनके पीछे कौन सी शक्तियां सक्रिय हैं, यह सूर्य के प्रकाश की तरह उजागर हो चुका है।

मेरी सोच यह है कि सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन में अब आर्थिक आधार जोड़ना भी जरूरी हो गया है। ताकि जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं, उनमें आर्थिक रूप से विपन्न (वास्तविक वंचित) आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकें।

अभी अन्य पिछड़ा वर्ग के नाम पर दबंग, खेतिहर जातियां आरक्षण का सारा लाभ प्राप्त कर रही हैं। यही स्थिति दलित और आदिवासियों (SC-ST) में भी हो गयी है। आरक्षण के नाम पर सभी एलीट नौकरियों पर पीढ़ियों से कुछ ही परिवारों का अधिकार हो गया है। यह स्थिति जगजीवनराम के समय से चली आ रही है, जिनकी पुत्री को UPSC में आरक्षण का लाभ मिला था और वे भारतीय विदेश सेवा में चुनी गयी थीं। डॉ.लोहिया ने जगजीवनराम जी को दलितों में द्विज की संज्ञा दी थी।

आज हर राज्य और केंद्र में एलीट पदों पर उन्ही दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग के परिवारों का कब्ज़ा है, जिन्हें वास्तव में आरक्षण की जरूरत ही नहीं है। इसलिये अब समय आ गया है कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े दलित, आदिवासी और अति पिछड़ा वर्ग के उन्हीं लोगों और समुदायों को आरक्षण का लाभ मिले, जो अभी तक इस लाभ से वंचित हैं। इसलिए आरक्षण की नीति में आर्थिक आधार भी जोड़ना पड़ेगा, जिससे ‘क्रीमी लेयर’ आरक्षण की परिधि से पूर्णतः बाहर हो जाये। अन्यथा पिछड़ा वर्ग के नाम पर यादव, जाट, गुर्जर, कुर्मी, मराठा, पटेल-पाटीदार, कम्मा, रेड्डी किस-किस को आरक्षण देंगे ?

यह आरक्षण की नीति को समूल नष्ट करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है कि हमें भी आरक्षण दो या फिर आरक्षण समाप्त करो। मुख्य धारा के राजनीतिक दल कभी भी यह नहीं चाहेंगे कि आरक्षण की नीति का युक्तियुक्तकरण हो, क्योंकि इन पार्टियों में जो पिछड़ा वर्ग का नेतृत्व है वह इन्ही दबंग जातियों का प्रतिनिधित्व करता है।

इसलिए आरक्षण की नीति की पुनर्समीक्षा अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए एक नए आयोग का गठन होना चाहिए जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत अपनी रिपोर्ट निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करे और इस आयोग की समयसीमा किसी भी स्थिति में बड़ाई न जाये। आशा है सभी निष्पक्ष और समतामूलक समाज के समर्थक इस विचार के प्रति अपनी सहमति व्यक्त करेंगे।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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