दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 24.09.15

फावड़ा के विवाद में मार दी गोली – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/farrukhabad/farrukhabad-crime-news/gun-shot-in-shovel-dispute-hindi-news/

छात्रावास से बाहरी लड़कियों को खदेड़ने पर बवाल, पुलिस ने भांजी लाठी – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/bilaspur-batons-on-students-protesting-outside-the-hostel-485033

पूना पैक्ट दलित गुलामी का दस्तावेज़ – हस्तक्षेप

http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/issue/2015/09/23/poona-pact-document-of-slavery

दलितों को मंदिर का पुजारी बनाने के लिए वेद पढ़ाएगा यह मंदिर – अमर उजाला

http://m.amarujala.com/feature/samachar/national/tirumala-to-train-dalits-make-them-priests-hindi-news/

डीसी ने किया एसडीओ व सीओ को शो-कॉज – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/devgarh/story/543627.html

छात्रवृत्ति घोटाले में एसवीएन और एडिना इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम, जांच शुरू – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-SAG-MAT-latest-sagar-news-050047-2709021-NOR.html

उप्र में 8 लाख आरक्षण समर्थक मनाएंगे काला दिवस – करंट क्राइम

http://www.currentcrime.com/up-8-million-reserve-supporter-celebrate-black-day-utter-pradesh-hindi-news/

Please Watch :

Prof.U.R.Anathamurthy – Dalit Contribution to Indian Literature

https://www.youtube.com/watch?v=SajALSSbNKw

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !         

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

अमर उजाला

फावड़ा के विवाद में मार दी गोली

http://www.amarujala.com/news/city/farrukhabad/farrukhabad-crime-news/gun-shot-in-shovel-dispute-hindi-news/

मारपीट की शिकायत करने थाना जाते समय दलित मजदूर को मंगलवार की रात हमलावरों ने गोली मार कर घायल कर दिया। घायल को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजन बुधवार को मजदूर को लोहिया अस्पताल लेकर आए । हालत गंभीर होने पर यहां से कानपुर के लिए रेफर कर दिया गया। एसपी दिनेश कुमार पी ने अस्पताल पहुंच कर मामले की जानकारी ली।

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थाना मेरापुर इलाके के गांव खलवारा निवासी दलित रामविलास कठेरिया मजदूर है। मंगलवार को पास में ही रहने वाले प्रांजुल ने उससे फावड़ा मांगा था। शाम को वह फावड़ा वापस लेने के लिए प्रांजुल के यहां गया तो इनमें विवाद हो गया। कहासुनी पर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट कर दी। रामविलास जान बचाने के लिए भागकर घर पहुंचा तो पीछे-पीछे आरोपी भी पहुंच

गए। आरोपियों ने उसे घर में घुस कर पीट दिया। इसके बाद आरोपी जानमाल की धमकी देकर फरार हो गए। रात के समय रामविलास इसकी शिकायत करने थाने जा रहा था। गनेशपुर चौराहा के पास पहले से मौजूद बॉबी, प्रांजुल और इनके पिता जयचंद्र ने उसे घेर लिया। इस दौरान हमलावरों ने इन पर दो फायर कर दिए। इनमें से एक फायर मिस हो गया। दूसरी गोली

उसकी पीठ में लगी। चीख सुनकर रामविलास का भतीजा विवेक और परिवार के अन्य लोग मौके पर आ गए। इन्हें प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। बुधवार को हालत गंभीर होने पर परिजनों ने उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। यहां से डाक्टर ने कानपुर रेफर कर दिया। विवेक ने बताया कि फावड़ा मांगने पर विवाद हो गया था । इसी पर आरोपियों ने उसके चाचा को गोली मार कर घायल कर दिया। घटना की जानकारी पर एसपी ने अस्पताल पहुंचकर जानकारी ली।

नई दुनिया

छात्रावास से बाहरी लड़कियों को खदेड़ने पर बवाल,

पुलिस ने भांजी लाठी

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 बिलासपुर(निप्र)। जिला प्रशासन ने बुधवार को पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास में अनाधिकृत तरीके से रहने वाले 131 लड़कियों को खदेड़ दिया। इसे लेकर अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ ही कांग्रेसी भी सड़क पर उतर आए।

हंगामे को शांत कराने के लिए पुलिस को छात्रावास के सामने, कलेक्टोरेट और कोनी थाने के सामने प्रदर्शनकारियों पर लाठी भांजनी पड़ी। यही नहीं सड़क जाम करने के आरोप में पुलिस ने आंदोलनकारी कांग्रेसी नेताओं व गैर छात्राओं को कलेक्टोरेट के सामने से पुलिस वाहन में भरकर कोनी थाना ले गई।

कलेक्टर के निर्देश पर बुधवार की सुबह 11 बजे जिला व पुलिस प्रशासन के आला अफसर सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित पोस्ट मैट्रिक छात्रावास पहुंचे । यहां पहुंचते ही गैर महाविद्यालयीन छात्राओं में हड़कंप मच गया। हॉस्टल से खदेड़े जाने के खिलाफ हॉस्टल में अवैध रूप से रह रही छात्राएं लामबंद हो गईं। लामबंद होने के साथ ही कार्रवाई के विरोध में जिला व पुलिस प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतर आईं व जमकर नारेबाजी करने लगी। इस बीच अन्य छात्रावास में रहने वाले छात्र-छात्राओं को इस बात की जानकारी लग गई।

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जरहाभाठा छात्रावास से लामबंद होकर छात्र सीधे कन्या छात्रावास पहुंच गए। छात्रों को समूह में आते देख आंदोलनकारी छात्राओं का हौसला बढ़ गया और वे दोगुने उत्साह के साथ प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करने लगीं। छात्राओं के साथ छात्र भी सड़क पर बैठ गए। प्रशासन की कार्रवाई में लगातार अड़ंगा लगाने वाले आंदोलनकारियों को पुलिस के आला अफसरों ने समझाइश भी दी । समझाइश के बाद भी सड़क जाम कर कार्रवाई में लगातार अवरोध खड़ा करते रहे।

आला अफसरों के इशारे पर पुलिस ने यहां जमकर लाठी भांजी। गुस्साए पुलिस ने आंदोलनकारी छात्रों पर लात घुसों के साथ ही लाठी भी बरसाई। पुलिस की इस कार्रवाई से छात्रावास के सामने अफरा-तफरी का माहौल बन गया । यहां से आंदोलनकारी छात्र-छात्राएं कलेक्टर कार्यालय की ओर कूच किया।

जिला व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते आंदोलनकारी कलेक्टोरेट की रवाना हुए । आईजी तिराहा के पास कांग्रेसियों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए सड़क जाम करने की कोशिश करने लगे। इस बीच पुलिस ने कांग्रेसियों को खदेड़ने लाठी चलाई। पुलिस के लाठी भांजते ही कांग्रेसी भाग खड़े हुए ।

 कलेक्टोरेट में जमकर बवाल

आंदोलनकारियों ने कलेक्टोरेट में करीब एक घंटे जमकर बवाल मचाया। मुख्य मार्ग के सामने खड़े होकर नारेबाजी करते रहे। इस बीच डिप्टी कलेक्टर एसपी वैद्य, एडिशनल एसपी प्रशांत कतलम व ट्रैफिक डीएसपी मधुलिका सिंह आंदोलनकारियों को समझाइश देते रहे। लगातार समझाइश के बाद भी विरोध पर उतास्र् छात्र-छात्राओं को तितर-बितर करने पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस की लाठी चलते ही आंदोलनकारी जहां सुरक्षित जगह देखा वहां भागने लगे। 

अजाजजा छात्र-छात्राओं पर लाठी चलाना गलत : अमित

मरवाही विधायक अमित जोगी का कहना है कि अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ कांग्रेसियों पर लाठी बरसाना गलत है। प्रशासन को छात्रावास में रहने वाले बाहरी लड़कियों को निवास की व्यवस्था के लिए कुछ और समय देना चाहिए था। इस दौरान बिल्हा विधायक सियाराम कौशिक और मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया भी मौजूद थे।

पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में काफी समय से गैर महाविद्यालयीन छात्राएं रह रहीं हैं। इस तरह की शिकायत विभाग से मिली थी। इनके बीच आए दिन विवाद भी होते रहता था। सिविल लाइन थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। हॉस्टल छोड़ने 15 दिन पहले नोटिस जारी किया गया था। इनके अवैध स्र्प से रहने के कारण पढ़ने वाली छात्राओं को जगह नहीं मिल पा रही थी। लिहाजा हॉस्टल खाली कराने अभियान चलाया गया है। 

 अन्बलगन पी-कलेक्टर

कलेक्टर के आदेश पर बुधवार को गैर महाविद्यालयीन 131 छात्राओं को हॉस्टल से खदेड़ने की कार्रवाई की गई है। प्रशासनिक कामकाज में इनके द्वारा लगातार अड़ंगा लगाया जा रहा था। लिहाजा सख्ती बरतनी पड़ी । यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। 

एसपी वैद्य-डिप्टी कलेक्टर व सिटी मजिस्ट्रेट

जिला प्रशासन ने हॉस्टल खाली कराने पुलिस की मदद मांगी थी। प्रशासनिक कार्रवाई में अड़ंगा लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रशांत कतलम-एडिशनल एसपी सिटी

हस्तक्षेप

पूना पैक्ट दलित गुलामी का दस्तावेज़

http://www.hastakshep.com/intervention-hastakshep/issue/2015/09/23/poona-pact-document-of-slavery

भारतीय हिन्दू समाज में जाति को आधारशिला माना गया है. इस में श्रेणीबद्ध असमानता के ढांचे में अछूत सबसे निचले स्तर पर हैं, जिन्हें 1935 तक सरकारी तौर पर ‘ डिप्रेस्ड क्लासेज’ कहा जाता था. गांधी जी ने उन्हें ‘हरिजन’ के नाम से पुरस्कृत किया था, जिसे अधिकतर अछूतों ने स्वीकार नहीं किया था. अब उन्होंने अपने लिए ‘दलित’ नाम स्वयम्   चुना है जो उनकी पददलित स्थिति का परिचायक है. वर्तमान  में वे भारत की कुल आबादी का लगभग छठा भाग (16.20 %) तथा  कुल हिन्दू आबादी का पांचवा भाग (20.13 %) हैं. अछूत सदियों से हिन्दू समाज में सभी प्रकार के सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक व शैक्षिक अधिकारों से वंचित रहे हैं और काफी हद तक आज भी हैं.

दलित कई प्रकार की वंचनाओं एवं निर्योग्यताओं को झेलते रहे हैं.  उनका हिन्दू समाज एवं राजनीति में बराबरी का दर्जा पाने के संघर्ष का एक लम्बा इतिहास रहा है. जब श्री. ई.एस. मान्तेग्यु, सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट फॉर इंडिया,  ने  पार्लियामेंट में 1917 में यह महत्वपूर्ण घोषणा की कि “अंग्रेजी सरकार का अंतिम लक्ष्य भारत को डोमिनियन स्टेट्स देना है तो दलितों ने बम्बई में दो मीटिंगें करके अपना मांग पत्र वाइसराय तथा भारत भ्रमण पर भारत आये सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट फॉर इंडिया को दिया. परिणामस्वरूप निम्न जातियों को विभिन्न प्रान्तों में अपनी समस्यायों को 1919 के भारतीय संवैधानिक सुधारों के पूर्व भ्रमण कर रहे कमिशन को पेश करने का मौका मिला.

तदोपरांत विभिन्न कमिशनों, कांफ्रेंसों एवं कौंसिलों  का एक लम्बा एवं जटिल  सिलसिला चला. सन 1918 में मान्तेग्यु चैमस्फोर्ड रिपोर्ट के बाद 1924 में मद्दीमान कमेटी रिपोर्ट आई जिसमें कौंसिलों मेंडिप्रेस्ड क्लासेज के अति अल्प प्रतिनिधित्व और उसे बढ़ाने के उपायों के बारे में बात कही गयी. साईमन कमीशन (1928) ने स्वीकार  किया कि डिप्रेस्ड क्लासेज को पर्याप्त प्रातिनिधित्व दिया जाना चाहिए. सन् 1930 से 1932 एक लन्दन में तीन गोलमेज़ कान्फ्रेंस हुयीं, जिन में अन्य अल्पसंख्यकों के साथ-साथ दलितों के  भी भारत के भावी संविधान के निर्माण में अपना मत देने के अधिकार को   मान्यता मिली. यह एक ऐतिहासिक  एवं निर्णयकारी परिघटना थी. इन गोलमेज़  कांफ्रेंसों में डॉ. बी. आर. आंबेडकर तथा राव बहादुर आर. श्रीनिवासन द्वारा  दलितों के प्रभावकारी प्रतिनिधित्व एवं ज़ोरदार प्रस्तुति के कारण 17 अगस्त, 1932 को ब्रिटिश सरकार द्वारा घोषित ‘कम्युनल अवार्ड’  में दलितों को  पृथक निर्वाचन का स्वतन्त्र राजनीतिक अधिकार मिला. इस अवार्ड से दलितों को आरक्षित सीटों पर पृथक् निर्वाचन द्वारा अपने प्रतिनिधि स्वयं  चुनने  तथा साथ ही सामान्य जाति के निर्वाचन क्षेत्रों में सवर्णों को चुनने हेतु दो वोट का अधिकार भी प्राप्त हुआ. इस प्रकार भारत के इतिहास में अछूतों को  पहली वार  राजनैतिक स्वतंत्रता का अधिकार  प्राप्त हुआ, जो  उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर  सकता था.

अमर उजाला

दलितों को मंदिर का पुजारी बनाने के लिए वेद पढ़ाएगा यह मंदिर

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मंदिरों में अब जल्द ही गैर ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम्स (टीटीडी) ने एक पायलट प्रोजेक्ट चलाने का फैसला किया है जिसमें करीब 200 दलितों को तीन महीनों तक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

ऐसा पहली बार हो रहा है जब दुनिया के सबसे धनी मंदिर प्रशासन की तरफ से इस तरह का सर्टिफिकेट प्रोग्राम चलाया जाएगा। इसके लिए चित्तूर और पश्चिमी गोदावरी जिलों से दलितों का चुनाव किया जाएगा और उन्हें वैदिक पूजा पाठ का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

हालांकि, टीटीडी अनुसुचित जनजातियों को प्रशिक्षण देने के लिए पहले भी ऐसे छोटे छोटे कार्यक्रमों का आयोजन कर चुका है लेकिन इस बार इसे बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा सर्टिफिकेट भी जारी किए जाएंगे।

प्रभात खबर

डीसी ने किया एसडीओ व सीओ को शो-कॉज

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देवघर: गलत ढंग से पिछड़ी जाति के आवेदक को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत करने के मामले में डीसी अरवा राजकमल ने मारगोमुंडा सीओ और मधुपुर एसडीओ से शो कॉज पूछा है. डीसी ने जारी पत्र में कहा है कि दोनों ही पदाधिकारियों ने गलत तरीके से आवेदन पत्र को जिला स्तर पर जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए अग्रसारित कर दिया. जो अति गंभीर मामला बनता है.

डीसी ने माना गंभीर लापरवाही

उपरोक्त परिस्थित को देखते हुए डीसी ने इसे गंभीर लापरवाही माना है. डीसी ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए आवेदन पत्र को बिना किसी प्रकार का अवलोकन या जांच किये बिना अंचल अनुमंडल से आवेदन पत्र अग्रसारित किया जा रहा है, जिसमें किसी भी समय किसी आवेदक को गलत तरीके से जिला स्तर से जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो सकता है जिसकी सारी जवाबदेही दोनों अधिकारियों की होगी.

मारगोमुंडा के देवाशीष को बनाया एसटी

आवेदक देवाशीष कुमार पिता राजेंद्र राम ग्राम महजोरी पो मारगोमुंडा पत्र संख्या जेएचसीसी/2015/31541 जिला स्तर से अॉन लाइन जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए अग्रसारित किया गया. आवेदन पत्र में जाति कहार दर्ज किया गया है लेकिन केटेगरी में एसटी दर्ज किया गया है जो एक गंभीर मामला है. कहार जाति का केटेगरी किसी भी परिस्थिति में एसटी नहीं हो सकता है.

दैनिक भास्कर

छात्रवृत्ति घोटाले में एसवीएन और एडिना इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम, जांच शुरू

http://www.bhaskar.com/news/MP-SAG-MAT-latest-sagar-news-050047-2709021-NOR.html

छात्र- छात्राओं के दस्तावेज और उनकी भूमिका पर संदेह है। छात्रों की सहमति से तो यह सब नहीं किया गया है। इस आधार पर छात्र भी आरोपी बन सकते हैं। हालांकि अब तक छात्रों की मिलीभगत सामने नहीं आई है। 

कॉलेज प्रबंधन- संबंधित कॉलेज प्रबंधन, प्रिंसिपल, अकाउंट ऑफिसर-मैनेजर की भूमिका संदिग्ध है। प्रथम दृष्टया इनकी सीधी भूमिका मानी जा रही है।

नोडल एजेंसी- कॉलेज स्तर से स्क्रूटनी- फॉर्म-प्रस्ताव भरकर नोडल सेंटर-एजेंसी तक पहुंचाया जाता है। इसमें अफसरों की भूमिका संदिग्ध है। 

जिलों में पदस्थ आदिवासी विभाग के अफसरों की मिलीभगत के बिना गड़बड़ी संभव नहीं है। बिना इनकी अनुमति के छात्रवृत्ति निकालना नामुमकिन है।

 अभी जांच चल रही है, गड़बड़ी मिली तो मामला दर्ज होगा 

सागर के दो कॉलेजों को जांच के दायरे में लिए गया है। फिलहाल इनके शासकीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे है। यदि इसमें गड़बड़ी पाई जाती है तो हम इन पर मामला दर्ज कर कॉलेजों के रिकॉर्डों की जांच करेंगे। – सतेन्द्र शर्मा, एसपी ईओडब्लू जबलपुर हमें तो कोई नोटिस नहीं आया, इसका मतलब कोई जांच नहीं हमें इस मामले की जानकारी नहीं है और न ही हमारे पास कोई नोटिस आया है। यदि ईओडब्ल्यू में ऐसी कोई जांच चल रही होती तो हमें जरूर पता होता। -अनिल तिवारी, संस्थापक कुलपति स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, सागर सारे काम नियमानुसार हुए हैं तो गड़बड़ी का सवाल ही नहीं हमारी संस्था की जांच चल रही है, यह बात मेरी जानकारी में नहीं है। वैसे भी संस्था में स्कॉलरशिप का काम नियमानुसार ही हुआ है। इसमें कोई भी गड़बड़ी नहीं है। -सुनील जैन, डायरेक्टर एडिना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, सागर सागर. भोपाल रोड स्थित एडिना इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी। 

प्रदेश के 34 कॉलेजों पर मामला दर्ज

प्रदेश के लगभग 495 इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में 2008-09 से 2014-15 के बीच करीब 1200 करोड़ रुपए का पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति घोटाला हुआ है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने अब तक प्रदेश के 34 कॉलेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें जबलपुर, मुरैना, ग्वालियर और भोपाल, इंदौर, देवास, रीवा, शहडोल, सतना और उज्जैन के इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं।

पैरामेडिकल कॉलेज भी घोटाले में शामिल 

छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेज भी पीछे नहीं हैं। इनकी जांच लोकायुक्त पुलिस कर रही है। प्रदेश में मौजूद लगभग 400 पैरामेडिकल कॉलेजों में से 190 कॉलेज लोकायुक्त जांच के दायरे में आ गए हैं। इसमें सागर संभाग से 5 कॉलेजों के नाम शामिल हैं। छात्रवृत्ति और शिक्षण शुल्क में गड़बड़ी करने वाले कॉलेजों के खिलाफ अनेक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। लेकिन अब तक गिरफ्तारी किसी की नहीं हुई है।

छात्रों के दस्तावेजों से हुई छेड़खानी

ईओडब्ल्यू ने अब तक जिन काॅलेजों पर मामला दर्ज किया है उनकी प्राथमिक पड़ताल में पाया है कि कॉलेज स्तर से छात्रवृत्ति के नाम पर हुए इस घोटाला को अंजाम देने के लिए कॉलेज प्रबंधकों ने एससी-एसटी और ओबीसी के हजारों छात्रों के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया है। स्कॉलरशिप हथियाने के लिए ही छात्रों के दस्तावेजों के आधार पर एडमिशन दिखाया गया है। जिस छात्र के नाम पर कॉलेज ने स्कॉलरशिप निकाली उसका संस्थान में एडमिशन ही नहीं है। वहीं एक छात्र के नाम पर दो बार स्कॉलरशिप निकाली गई।

सागर. सिरौंजा स्थित स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी।

घोटाले में अब सागर के इंजीनियरिंग कॉलेजों पर ईओडब्ल्यू की नजर

करीब 1200 करोड़ रुपए का पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति घोटाला।

वर्ष 2008-2015 तक टेक्नीकल कॉलेजों द्वारा निकाली गई छात्रवृत्ति की हो रही है जांच।

श्रीकांत त्रिपाठी | सागर 9713333078 छात्रवृत्ति घोटाले में शहर के दो बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के नाम उजागर हुए है। इनमें एक नाम स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और दूसरा एडिना इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज का है। घोटाले की जांच कर रही राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग (ईओडब्ल्यू) ने इन दोनों कॉलेजों को जांच के दायरे में लेकर शासकीय रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिए हैं। हालांकि अभी तक किसी भी कॉलेज पर मामला दर्ज नहीं किया गया है। वहीं, इसके अलावा ईओडब्ल्यू ने शहर के अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।

2012-13 घोटाले की जांच

छात्रवृत्ति घोटाले में 2008 से लेकर 2015 तक की जांच की जा रही है, लेकिन ईओडब्ल्यू द्वारा सागर के कॉलेजों की जांच करते हुए पहले चरण में 2012-13 के शासकीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। यदि इनमें गड़बड़ी पाई जाती है तो पहले इन कॉलेजों के खिलाफ मामला दर्ज होगा और फिर बाद में प्रबंधन से पूछताछ की जाएगी।

करंट क्राइम

उप्र में 8 लाख आरक्षण समर्थक मनाएंगे काला दिवस

http://www.currentcrime.com/up-8-million-reserve-supporter-celebrate-black-day-utter-pradesh-hindi-news/

लखनऊ। प्रदेशभर में आठ लाख आरक्षण समर्थक गुरुवार को पूना पैक्ट की 83वीं वर्षगांठ पर काला दिवस मनाएंगे।

इसी क्रम में लखनऊ स्थित फील्ड हॉस्टल कार्यालय के पार्क में शाम चार बजे यह कार्यक्रम आयोजित जाएगा, जिसमें सभी विभागों के आरक्षण समर्थक कार्मिक पदोन्नतियों में आरक्षण संबंधी लंबित विधेयक लोकसभा से पारित कराने व उप्र सरकार द्वारा दलित उत्पीड़न के विरोध में आवाज बुलंद करेंगे। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, राम शब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, श्यामलाल, राम बरन, रीना रजक, अन्जनी कुमार, लेखराम, दिनेश कुमार, अशोक सोनकर, बनी सिंह, विजय कुमार, जितेन्द्र कुमार, डा. प्रियंका सिंह रावत व सुशील कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह प्रदेश सरकार द्वारा दलित कार्मिकों का उत्पीड़न सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आड़ में किया जा रहा है, वह अब दलित कार्मिकों की सहनशीलता से ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में सभी को ‘करो या मरो’ की तर्ज पर आरक्षण पर होने वाले सभी कार्यक्रमों को सफल बनाना है।

समिति के नेताओं ने कहा कि लखनऊ में गुरुवार को ‘काला दिवस’ कार्यक्रम में आरक्षण पर चलाए जा रहे आंदोलन की समीक्षा होगी और आंदोलन को आगे अधिक व्यापक रूप देने का ऐलान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में आठ लाख आरक्षण समर्थक अपने-अपने जिलों में काला दिवस मनाकर उप्र सरकार को अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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