दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट  20.09.15  

दलित बच्चों को कथित तौर पर गणेश पूजन से रोका गया, मामला दर्ज – एनडी टीवी इंडिया

http://khabar.ndtv.com/news/india/dalit-children-were-allegedly-prevented-from-worshiping-ganesha-lodged-1219463

क्या रेप छुपाना चाहती है पीलीभीत पुलिस – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/pilibhit/pilibhit-crime-news/what-rape-trying-to-hide-the-pilibhit-police-hindi-news/

ग्राम प्रधान समेत चार पर अपहरण का केस – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/unnao/unnao-hindi-news/four-cases-of-kidnapping-including-the-village-head-hindi-news/

मुस्लिम बहुल नहीं हैं सबसे गरीब जिले – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/national-districts-where-muslims-are-many-are-not-poor-districts-482109

सरपंच का निर्वाचन रद्द करने पर रोक – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/jabalpur-jabalpur-news-482495

जिले में बनेंगे 1723 लोहिया आवास – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/jhansi/jhansi-hindi-news/1723-lohia-will-be-accommodation-in-the-district-hindi-news/

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !

Please sign petition for EVALUATION of DF by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

Please Watch:

Documental Taldeka Dalit Anekal DEF INGLES 1

https://www.youtube.com/watch?v=wxqbQc-bSfQ

एनडी टीवी इंडिया

दलित बच्चों को कथित तौर पर गणेश पूजन से रोका गया,

मामला दर्ज

http://khabar.ndtv.com/news/india/dalit-children-were-allegedly-prevented-from-worshiping-ganesha-lodged-1219463

केंद्रपाड़ा जिले के एक सरकारी स्कूल में दलित विद्यार्थियों को कथित तौर पर भगवान गणेश की पूजा नहीं करने देने की शिकायत के बाद पुलिस ने अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 1973 के तहत एक मामला दर्ज किया है।

पट्टामुंडई थाने के तहत अंदारा उच्च प्राथमिक विद्यालय के करीब 25 दलित बच्चों को गुरुवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर कथित तौर पर नारियल फोड़ने और गणेश पूजन करने से रोक दिया गया, जबकि ऊंची जाति के बच्चों को पूजा करने दी गई। केंद्रपाड़ा के पुलिस अधीक्षक नितिनजीत सिंह ने कहा, ‘हमने एक मामला दर्ज कर लिया है। घटना की जांच की जा रही है। इसके अनुसार कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।’

अमर उजाला

क्या रेप छुपाना चाहती है पीलीभीत पुलिस

http://www.amarujala.com/news/city/pilibhit/pilibhit-crime-news/what-rape-trying-to-hide-the-pilibhit-police-hindi-news/

जिरौनिया में कथित रेप के बाद दलित छात्रा की हत्या के मामले में शुरू से ही गंभीर नहीं दिख रही पुलिस का एक-एक कर झूठ बोलना भी सामने आ रहा है। एसपी से लेकर एसओ ने पोस्टमार्टम के अगले दिन कहा था कि रेप की पुष्टि के लिए बनाई गई स्लाइड जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथालॉजी में भेज दी गई है, लेकिन जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो तीसरे दिन भी स्लाइड पैथालॉजी नहीं पहुंची। इससे साफ है कि पुलिस दलित छात्रा के साथ हुई दरिंदगी को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही है। उसकी यह कोशिश कामयाब होती भी दिख रही है। वजह यह है कि घटना के 24 से 48 घंटे बाद स्पर्म स्वत: समाप्त हो जाते हैं। 48 घंटे में जांच होने पर स्पर्म मिलने की नाममात्र की संभावना रहती है, लेकिन अब तो वह भी खत्म हो गई।

जिरौनिया गांव में दलित छात्रा रामकली की कथित रेप के बाद की गई हत्या मामले में पुलिस ने रेप की घटना को शुरू से ही छुपाने का प्रयास किया था। एसपी जवाहर से लेकर एसओ सुरेश कुमार सिंह तक घटना के तथ्यों को लेकर झूठ बोलते रहे। पहला झूठ छात्रा रामकली के निचले शरीर के कपड़े खुले होने की बात को नकार कर पुलिस ने बोला। प्राइवेट पार्ट पर खून, चोटों के निशान आदि न होने की बात कहकर पुलिस दूसरा झूठ बोली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी पुलिस के मुताबिक बोले गए झूठ से मेल खाती मिली। पोस्टमार्टम के बाद रेप की पुष्टि के लिए छात्रा की बनाई गई स्लाइड उसी दिन डॉक्टरों के पैनल ने बरखेड़ा पुलिस को सौंप दी थी, लेकिन पुलिस की मंशा ठीक नहीं थी, इसलिए स्लाइड जांच के लिए पैथालॉजी नहीं भेजी गई, जबकि एसपी और एसओ ने दावा किया था कि पोस्टमार्टम के अगले दिन ही स्लाइड जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथालॉजी भेज दी गई। पुलिस का यह झूठ अमर उजाला की तहकीकात में खुल गया।

शनिवार को रिपोर्टर ने जब पड़ताल की तो पैथालॉजी में एक 35 वर्षीय महिला रामकली के नाम की एक स्लाइड मिली, लेकिन छात्रा रामकली की स्लाइड पैथालॉजी में नहीं थी। पैथालॉजी प्रभारी डॉ. महावीर सिंह से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बरखेड़ा थाने से कोई स्लाइड जांच के लिए नहीं आई। जब एसओ से पूछा गया तो वह हक्के बक्के रह गए। बोले, मालूम पड़ता है कि आज जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक घटना से स्लाइड पर स्पर्म 48 घंटे तक मिलने की संभावना रहती है। इसके बाद वह स्वत: समाप्त हो जाते हैं। ऐसे में दलित छात्रा की पोस्टमार्टम के बाद बनाई गई स्लाइड को 48 घंटे के भीतर पैथालॉजी न भेजना पुलिस की कार्यप्रणाली पर स्वत: सवालिया निशान लगा रहा है। यदि अब पुलिस स्लाइड को जांच के लिए भेजती भी है तो वह 48 घंटे बाद ही पैथालॉजी पहुंचेगी और ऐसे में अगर उस पर स्पर्म रहे भी होंगे तो वह स्वत: नष्ट हो गए होंगे। इससे साफ होता है कि पुलिस का रेप छुपाने का जो मकसद था वह कामयाब हो जाएगा।

एसओ से मोबाइल से हुई वार्ता के कुछ अंश

रिपोर्टर- हैलो.. मैं अमर उजाला से बोल रहा हूं, जी.. जी बताइए। छात्रा रामकली के मामले में क्या स्लाइड जांच के लिए भेजी है। हां… हां कहने के बात एसओ सुरेश कुमार सिंह कहते हैं क्या जांच के लिए… , रिपोर्टर- जी…, एसओ- हम लोग तो भेज देते हैं।, रिपोर्टर: पैथालॉजी के डॉक्टर कह रहे हैं कि यहां तो नहीं आई है।, एसओ-नहीं… नहीं मालूम पड़ता है कि आज जा रही है।

जरूरी नहीं 24 घंटे बाद स्पर्म मिल ही जाए

जिला अस्पताल के डॉ. महावीर सिंह बताते हैं कि घटना के 24 घंटे तक स्पर्म जीवित रहते हैं। स्पर्म के मिलने की संभावना 48 घंटे तक रहती है। इसलिए स्लाइड बनाई जाती है, लेकिन कोई जरूरी नहीं है कि स्पर्म मिल ही जाएगा।

ये होती है जांच की प्रक्रिया

महिला डॉक्टर रेप की पुष्टि के लिए स्लाइड बनाकर पीड़िता को लाने वाली पुलिस को सौंप देती है। नियमानुसार यदि स्लाइड मिलने तक पैथालॉजी खुली हो तो संबंधित पुलिसकर्मी को जांच के लिए उसी समय स्लाइड पैथालॉजी में जमा करनी होती है। यदि पैथालॉजी बंद है तो उसे हर हालत में अगले दिन जमा कर जांच करानी चाहिए।

एसपी ने दी सफाई

एसपी जवाहर ने बताया कि यह महिला डॉक्टर की जिम्मेंदारी होती है कि वह स्लाइड जांच को लिए भेजे, लेकिन डॉक्टर ने एसपी के नाम से नाखून, सिर के बाल और स्लाइड का अलग अलग लिफाफा सील कर पुलिस को दे दिया। पुलिस को क्या पता कि किस लिफाफे में क्या है। वह सीएमओ से वार्ता करेंगे। यदि जरूरी हुआ तो स्लाइड को आज ही जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजेंगे।

अमर उजाला

ग्राम प्रधान समेत चार पर अपहरण का केस

http://www.amarujala.com/news/city/unnao/unnao-hindi-news/four-cases-of-kidnapping-including-the-village-head-hindi-news/

बीघापुर। ग्राम प्रधान ने गांव के ही एक दलित युवक को तीन महीने बंधक बनाकर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। युवक मौका पाकर भाग निकला और आईजी को आपबीती बताई। आईजी के निर्देश पर बारासगवर थाना पुलिस ने गढ़ेवा गांव के वर्तमान व पूर्व प्रधान समेत चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बीघापुर सीओ घटना की तफ्तीश कर रहे हैं।

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बारासगवर थानाक्षेत्र के गढ़ेवा गांव निवासी राधेश्याम कुरील का आरोप है कि ग्राम प्रधान संतोष ने तीन महीने पहले बहाने से बुलाया और पूर्व प्रधान योगेंद्र सिंह, पप्पू सिंह व मुन्ना सिंह की मदद से उसे मारापीटा और गांव के बाहर बने एक पशु बाड़े़ की कोठरी में बंधक बना लिया। पूर्व व वर्तमान प्रधान ने अपने राजनीतिक विरोधी राधेश्याम के खिलाफ अपहरण समेत कई मामले दर्ज करा दिए।

राधेश्याम के मुताबिक गुरुवार की रात वह मौका पाकर भाग निकला और अपने एक रिश्तेदार के यहां लखनऊ पहुंच गया। उसने पुलिस महानिरीक्षक से गुहार लगाई। आईजी के निर्देश पर बीघापुर पुलिस ने अपहरण और मारपीट का मामला दर्ज किया है। घटना की तफ्तीश कर रहे बीघापुर सीओ माजिद अब्सार ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश की जा रही है। वहीं पूर्व प्रधान योगेंद्र सिंह का कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते उनके खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

नई दुनिया

मुस्लिम बहुल नहीं हैं सबसे गरीब जिले

http://naidunia.jagran.com/national-districts-where-muslims-are-many-are-not-poor-districts-482109

तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली पार्टियां भले ही मुस्लिम बहुल इलाकों को सबसे ज्यादा वंचित बताएं लेकिन हकीकत यह है कि देश के सबसे निर्धन 20 जिलों में एक भी मुस्लिम बहुल नहीं है। देश के सर्वाधिक गरीब जिले आदिवासी बहुल हैं। ये जिले ऐसे हैं जहां आधे से अधिक परिवारों के पास कुछ भी संपत्ति नहीं है। यह खुलासा जनगणना-2011 के धार्मिक आंकड़ों के विश्लेषण से हुआ है। सरकार ने हाल ही में ये आंकड़े जारी किए हैं।

जनगणना-2011 के अनुसार देश के 640 में से 20 जिले ऐसे हैं, जहां 50 फीसद से अधिक परिवारों के पास कुछ भी संपत्ति नहीं है। कहने का मतलब कि उनके पास रेडियो या ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, कंप्यूटर या लैपटॉप, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, कार, जीप, वैन, मोबाइल और टेलीफोन जैसी कोई चीज नहीं है। साथ ही वे कच्चे मकान या घासफूस की झोपड़ी में रहते हैं। पीने के शुद्ध पानी की सुविधा भी नहीं है।

कुल मिलाकर 20 निर्धन जिलों में 1.53 करोड़ आबादी है, जिनमें से 83.23 फीसद हिंदू हैं, जबकि मुस्लिम मात्र 4.45 फीसद हैं। उल्लेखनीय है कि देश की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 14.23 फीसद है। हालांकि निर्धन जिलों में ईसाइयों की आबादी 9.32 प्रतिशत है। इसकी वजह है कि नगालैंड के मोन, लोंगलेंग, त्यूनसांग और किपरे, मेघायल का वेस्ट खासी हिल्स और अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट कामेंट और कुरुंग कुमेय जिले ईसाई बहुल हैं।

“डिस्ट्रिक्ट लेवल डिप्राइवेशन इन न्यू मिलेनियम” के सह लेखक और अर्थशास्त्री लवीश भंडारी का कहना है कि इसमें कोई दोराय नहीं कि देश के सबसे गरीब इलाके आदिवासी बहुल हैं। इसके बाद अनुसूचित जातियों और फिर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों का नंबर आता है। लेकिन मुस्लिम समुदाय में जहां कुछ लोग बहुत गरीब और कुछ बहुत अमीर हैं वही आदिवासी समुदाय में सभी बहुत गरीब हैं।

आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं पहुंची हैं। इसलिए विकास कार्यक्रमों के केंद्र में आदिवासी होने चाहिए।

 डिंडोरी सबसे निर्धन जिला

देश का सबसे निर्धन जिला मध्य प्रदेश का डिंडोरी है। यहां 64.9 फीसद परिवारों के पास कुछ भी संपत्ति नहीं है। आदिवासी बहुल डिंडोरी में 86 फीसद हिंदू हैं, जबकि मुस्लिम मात्र 0.96 फीसद और ईसाई सिर्फ 0.60 फीसद हैं। 

दूसरा निर्धन जिला राजस्थान का बांसवाड़ा है। यहां 61 फीसद परिवारों के पास कोई संपत्ति नहीं है। यहां हिंदुओं की तादाद 94.65 फीसद है, जबकि मुस्लिम सिर्फ 2.72 फीसद और ईसाई मात्र 1.24 फीसद हैं।

 सबसे निर्धन 20 जिले

मध्य प्रदेश : डिंडोरी, अलीराजपुर, झाबुआ, बरबानी और मंडला 

राजस्थान : बांसवाड़ा और डूंगरपुर 

उड़ीसा : राजगढ़ और गजपति

गुजरात : डांग

छत्तीसगढ़ : दंतेवाड़ा

महाराष्ट्र : नंदूरवार

कर्नाटक : बीजापुर

अरुणाचल प्रदेश : ईस्ट कामेंग और कुरुंग कुमेय

मेघायल : वेस्ट खासी हिल्स 

नगालैंड : किफिरे, त्युनसांग, लोंगलेंग और मोन

नई दुनिया

सरपंच का निर्वाचन रद्द करने पर रोक

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/jabalpur-jabalpur-news-482495

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिए रीवा जिला अंतर्गत सिमरिया तहसील के ग्राम खारा की सरपंच गुलाबकली दाहिया का निर्वाचन रद्द किए जाने पर रोक लगा दी। इसके साथ ही कलेक्टर रीवा व पराजित प्रत्याशी रश्मि साकेत सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया गया।

न्यायमूर्ति एसके गंगेले की एकलपीठ में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता सुधा गौतम ने रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता अनुसूचित जनजाति की सदस्य है। इसी हैसियत से उसने ग्राम पंचायत चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल किया और निर्वाचित हुई। इसके बाद पराजित प्रत्याशी रश्मि साकेत ने शिकायत कर दी। उसका आरोप था कि सरपंच निर्वाचित हुई गुलाबकली दाहिया अनुसूचित जाति नहीं बल्कि अन्य पिछड़ा वर्ग की है। उसने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली। लिहाजा, उसका निर्वाचन रद्द कर दिया जाए। एसडीएम ने विधिवत जांच कराए बगैर निर्वाचन शून्य करने का आदेश सुना दिया। यही नहीं सरपंच के रिक्त पद पर अन्य उम्मीदवार की नियुक्ति की व्यवस्था दे दी गई। जिसके खिलाफ गुलाबकली दाहिया को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

अमर उजाला

जिले में बनेंगे 1723 लोहिया आवास

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झांसी। वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिले में 1723 लोहिया आवास बनाए जाएंगे। आवासों में से 1112 अनुसूचित जाति, 218 अनुसूचित जनजाति, 134 अल्पसंख्यक व 249 अन्य लाभार्थियों को दिए जाएंगे। लाभार्थियों का चयन वर्ष 2002 की बीपीएल सूची से किया जा रहा है।

परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण ने बताया वर्ष 2002 की बीपीएल सूची की प्रतीक्षा सूची में शामिल लाभार्थियों को सबसे पहले मौका दिया गया है। प्रतीक्षा सूची से चयन न होने पर बीपीएल सूची से चयन होगा। जहां इन दोनों सूची से चयन नहीं हो पा रहा है, वहां पूर्व में चयनित लाभार्थियों के बालिग बच्चों को चुना जाएगा। आवास निर्माण के लिए प्रति लाभार्थी 70 हजार रुपये दो किश्तों में दिए जाएंगे। पंजाब नेशनल बैंक लखनऊ से धन का लेनदेन सीधा लाभार्थियों के खातों में किया जाएगा, इसके लिए बीडीओ एवं एकाउंटेंट का डोंगल बनाया गया है।

ऑनलाइन आवेदन के बाद लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन ही होगा। आवेदन के लिए लाभार्थियों के एकाउंट को रजिस्टर्ड कराया जा रहा है। यह इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है, जिसको लेकर जिले के सभी ब्लाक मुख्यालय लापरवाह बने हुए हैं। बबीना ब्लाक में 196 के सापेक्ष 7 खातों को रजिस्टर्ड किया गया है। बड़ागांव में 115 के सापेक्ष 57, बामौर में 208 के सापेक्ष 175, बंगरा में 333 के सापेक्ष 73, चिरगांव में 243 के सापेक्ष 1, गुरसरांय में 188 के सापेक्ष 57, मऊरानीपुर में 219 के सापेक्ष 114 व मोंठ ब्लाक में 221 के सापेक्ष 3 खातों को रजिस्टर्ड किया गया है। एकाउंट को फ्रीज करने के मामले में सभी ब्लाकों में कार्य लगभग शून्य है। बड़ागांव ब्लाक में दस, बामौर व चिरगांव ब्लाक में एक-एक खातेे को फ्रीज किया गया है, जबकि अन्य ब्लाकों में एक भी खाता फ्रीज नहीं हुआ है।

परियोजना निदेश ने सभी बीडीओ को चेतावनी दी है कि यदि रविवार रात तक शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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