दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 30.08.15

खाप पंचायत ने दलित लड़की का बलात्कार करने का सुनाया फरमान, सुप्रीम कोर्ट पहुंची पीड़ि‍त – एन डी टीवी इंडिया

http://khabar.ndtv.com/news/india/khap-panchayat-decrees-gave-the-girl-to-rape-the-supreme-court-made-a-complaint-1212260

मुखिया लौटे, परिवार को अब भी खतरा – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/karnal/karnal-hindi-news/head-of-the-family-returns-hindi-news/

मारपीट में घायल कैदी ने दम तोड़ा – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/kannauj/kannauj-hindi-news/wounded-prisoner-died-in-the-assault-hindi-news/

110 शिक्षकों की वेतन कटौती,होगा शिक्षक दिवस का बहिष्कार नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/ambikapur-110-sicghoko-ki-vetan-ktoti-462978

सोमवार को मुंह पर काली पट्टी बांधकर धरना देंगे कॉलेज के छात्र न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/monday-raj-collage-student-protest-644315.html

ग्लोबल कटुता से मुक्ति की जरूरत – लाइव हिन्दुस्तान

http://livehindustan.com/news/guestcolumn/article1-Important-event-young-nude-in-public-conversion-high-caste-public-banquet-492517.html

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !

Please sign petition by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

Please Watch:

Indian dalits convert to Islam TV News

https://www.youtube.com/watch?v=xaYBwtkOb5o

एन डी टीवी इंडिया

खाप पंचायत ने दलित लड़की का बलात्कार करने का सुनाया फरमान, सुप्रीम कोर्ट पहुंची पीड़ि‍त

http://khabar.ndtv.com/news/india/khap-panchayat-decrees-gave-the-girl-to-rape-the-supreme-court-made-a-complaint-1212260

बागपत जिले की एक दलित लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में फरियाद लगाई है कि गांव के जाटों की खाप पंचायत ने उसका बलात्कार करने का फरमान सुनाया है। लड़की के भाई की मित्रता इस जाट परिवार की लड़की से थी। इस पूरे मामले की जांच हो ही रही थी कि तभी एक नया मोड़ आ गया। दलित लड़के की कथित महिला मित्र ने पुलिस में उल्टे यह शिकायत दर्ज करा दी है कि नौकरी दिलाने के बहाने लड़का उसे दिल्ली ले गया था जहां उसके साथ बलात्कार भी किया गया।

मामला कुछ यूं है कि बागपत जिले के एक दलित लड़के को पिछले महीने के आखिरी दिनों में एक जाट लड़की के साथ दिल्ली में पकड़ा गया। लड़की शादीशुदा थी। उसके घर वालों ने दलित लड़के पर लड़की को बरगलाने का इल्जाम लगा दिया। चूंकी लड़की ने उस वक्त इस तरह का कोई बयान नहीं दिया था, इसलिए पुलिस ने लड़के पर अपहरण का मुकादमा दर्ज करने के बजाय उसे नारकोटिक्स एक्ट में जेल भेज दिया।

लड़के की बहन अब सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। उसका आरोप है कि बागपत में जाटों की एक खाप पंचायत ने इस घटना से नाराज होकर फरमान सुनाया है कि जाट परिवार के लोग बदला लेने के लिए लड़की (दलित की बहन) के साथ बलात्कार करेंगे। दलित लड़की ने अदालत से सुरक्षा मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को मामले की जांच करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मामले में एक पेंच यह है कि दलित लड़के के साथ दिल्ली में पकड़ी गई जाट लड़की ने इसे मोहब्बत का नहीं बल्कि धोखाधड़ी का मामला बताया है। बागपत जिले के एसपी से जाट लड़की ने शिकायत की है कि दलित लड़का उसे बहला-फुसलाकर दिल्ली ले गया था, जहां उसने उसके साथ बलात्कार किया।

एसपी ने मामले की जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है। दूसरी तरफ लड़के के घर के लोग कह रहे हैं कि लड़की झूठ बोल रही है और यह बयान उसने तब क्यों नहीं दिया जब पुलिस उसे दिल्ली से लेकर आई थी। लड़की का कहना है कि परिवार की इज्जत की खातिर उसने यह वजह पहले किसी को नहीं बताई।

अमर उजाला

मुखिया लौटे, परिवार को अब भी खतरा

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गांव कुटेल में हुए दो पक्षों के विवाद में दो दलित परिवारों के मुखिया वापस गांव में लौट आए हैं। हालांकि परिवार के सदस्य व सामान अभी भी रिश्तेदारी में है। उधर, पुलिस का दावा है कि माहौल शांतिपूर्ण है और सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात कर रखी है। बता दें कि रामकिशन व बेनीराम के साथ एक अन्य समुदाय के लोगों का विवाद हो गया था। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार करके भेज दिया।

मामले को लेकर पीड़ितों को लगातार धमकियां मिल रही थी और उन पर दबाव बनाया जा रहा था। आखिरकार दो परिवार गांव छोड़कर चले गए। मधुबन थाना प्रभारी व गांव के मौजिज लोगों ने मिलकर दोनों पक्षों के लोगों की पंचायत कराई और गांव छोड़ चुके लोगों को वापस बुलाने पर सहमति बनी। अब तक दोनों परिवारों के मुखिया ही गांव लौटे हैं, जबकि उनके परिवार के सदस्य बाहर हैं। रामकिशन का कहना है कि पुलिस पूरी चौकसी बरत रही है, लेकिन उन्हें फिर भी जान का खतरा है। मधुबन थाना प्रभारी कमलदीप राणा का कहना है कि गांव में माहौल ठीक है और जल्द ही परिवार के लोगों को भी गांव में लाया जाएगा।

अमर उजाला

मारपीट में घायल कैदी ने दम तोड़ा

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जिला कारागार में चार दिन पहले मारपीट में घायल हुए कैदी ने कानपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं गैंगरेप के मामले में बंद एक कैदी की कैंसर से मौत हो गई। अचानक हुई दो मौत से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। दोनों कैदियों का कड़ी सुरक्षा के बीच कानपुर और कन्नौज में पोस्टमार्टम कराया गया।

मालूम हो कि 26 अगस्त को जिला जेल में इलाज करा रहे वृद्ध कैदी पातीराम (77) पुत्र मुरली निवासी भूड़पुरवा थाना ठठिया का कैदी शिवराज से विवाद हो गया था। मारपीट में शिवराज गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद जेल प्रशासन ने उसे राजकीय मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था।

बाद में उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान शनिवार सुबह पातीराम ने कानपुर हैलट अस्पताल में दम तोड़ दिया। जेलर गिरजा शंकर यादव ने बताया कि पातीराम 10 अक्तूबर 2013 को कन्नौज जेल आया था। वह हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। बीते दिनों वह बीमार हो गया था।

जून माह से जेल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। इससे पहले भी कई बार उसे हैलट, मेडिकल कालेज तिर्वा उपचार के लिए भेजा जा चुका था। जेल अधीक्षक यूपी मिश्रा ने 26 अगस्त को किसी भी प्रकार की मारपीट जेल में होने से इनकार किया था। हकीकत में कैदी की बीमारी के कारण हालत बिगड़ी थी। उन्होंने बताया कि मृत कैदी के शवों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा।

वहीं जिला जेल में गैंगरेप व दलित उत्पीड़न के मामले में बंद कैदी तिर्वा निवासी सुधीर शर्मा (56) की शनिवार को मौत हो गई। जेल सूत्रों के मुताबिक सुबह करीब आठ बजे सुधीर चाय पी रहा था। अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। उसे प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेलर गिरजा शंकर यादव ने बताया कि सुधीर कैंसर से पीड़ित था। उसका कई महीने से इलाज चल रहा था। बीमारी के कारण उसकी मौत हुई है। उन्होंने बताया कि वह 16 जनवरी 2012 से जेल में बंद था। रेप के मामले में उसे उम्रकैद मिली थी।

नौ माह पहले हुई थी वर्चस्व की जंग

अनौगी जिला जेल में पहले भी कैदियों की मौत के मामले हुए हैं। विगत 17 जुलाई को बैरक वन डी का कैदी सुधीर यादव की कैदी मोंटी से मारपीट हुई थी। मारपीट में दोनों ही कैदी घायल हो गए थे। जेल अधीक्षक ने इस मामले में भी मारपीट होने से इनकार किया था। नौ माह पहले हुई मारपीट में एक कैदी की मौत हो गई थी। तब झांसी निवासी कैदी यूनुस का विवाद जेल में बंद कन्नौज के कैदी व उसके साथियों से हो गया था। इसी तरह गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के निवासी कैदियों के दो गुटों में बीते साल मारपीट हुई थी। तब आधा दर्जन कैदी घायल हुए थे। जेल के अंदर दो कैदियों की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। एक कैदी की मौत के बाद तो दो दिन तक जेल के अंदर जमकर हंगामा हुआ था।

स्टिंग आपरेशन में खुली थी पोल 

वर्ष 2014 में जेल के अंदर नशीले पदार्थ बिकने का स्टिंग आपरेशन एक निजी चैनल ने किया था। तब शासन के दखल से यह मामला गरमाया था। बाद में अधीक्षक को बदल दिया गया था। इसके अलावा जेल के अंदर आधा दर्जन बार विभिन्न अव्यवस्थाओं को लेकर कैदी हंगामा भी कर चुके हैं। दो बार तो छतों पर चढ़कर कैदी बवाल कर चुके हैं। जेल सूत्रों की मानें तो जेल के अंदर ज्यादा से ज्यादा सुख सुविधाएं पाने के लिए कैदियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी रहती है।

नई दुनिया

110 शिक्षकों की वेतन कटौती,होगा शिक्षक दिवस का बहिष्कार

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अंबिकापुर(निप्र)। बलरामपुर जिला प्रशासन के खिलाफ रामानुजगंज विधायक वृहस्पति सिंह एवं सामरी विधायक डा.प्रीतम राम व राजपुर के समस्त कर्मचारियों के साथ अब अनुसूचित जाति, जनजाति, अधिकारी-कर्मचारी संघ अजाक्स ने भी मोर्चा खोल दिया है। राजपुर विकासखंड में घटिया बायोमैट्रिक्स के कारण 110 शिक्षकों का वेतन कट गया। इसके विरोध में शिक्षक दिवस के बहिष्कार का ऐलान किया गया है।

अजाक्स ने बलरामपुर जिला प्रशासन पर आरोप लगाया है कि व्यवस्था के नाम पर कु-व्यवस्था व प्रशासन के नाम पर कु-प्रशासन बलरामपुर जिले की पहचान बन गई है। ऐसे अधिकारियों को प्रोत्साहन व संरक्षण मिलने के कारण इस क्षेत्र के दलित आदिवासी कमजोर वर्ग के लोग तरह-तरह से प्रताड़ित व पीडित हैं। अजाक्स के उपप्रांताध्यक्ष जेआर ठाकुर ने बताया है कि बलरामपुर जिले के 110 शिक्षकों का वेतन घटिया बायोमैट्रिक मशीन के सहारे राजपुर के खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा दो हजार से लेकर 25 हजार रुपए तक वेतन की कटौती कर ली गई है जो छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश के विरूद्घ है।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश में जिला एवं संभाग स्तर पर कार्यरत अधिकारियों को आगाह भी किया है किंतु नीति-निर्देश की उपेक्षा करते हुए बायोमैट्रिक मशीन से उपस्थिति लेकर कर्मचारी व शिक्षकों को आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। अजाक्स के उपप्रांताध्यक्ष जेआर ठाकुर ने बताया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में किस प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए स्पष्ट किया गया है किंतु इसका कोई महत्व बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखण्ड में नहीं है। उन्होंने बताया है कि अजाक्स का एक प्रतिनिधिमंडल 28 अगस्त को संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपकर राजपुर में लगे घटिया बायोमैट्रिक मशीन के जांच कराने की मांग कर चुका है। उन्होंने बताया कि उपस्थित कर्मचारियों को अनुपस्थित एवं अनुपस्थित कर्मचारियों को उपस्थित करने वाली यह मशीन गलत जानकारी दे रही है।

शिक्षक व कर्मचारियों के मुताबिक कई स्कूलों के मशीन की स्थिति यह है कि जब स्वयं अंगूठा लगाते हैं तो दूसरे की तस्वीर दिखाई पड़ती है। इसमें अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों को उपस्थिति बिना अंगूठा लगाए अंकित हो जाता है। इस प्रकार के गंभीर त्रुटियों के कारण माह जून व जुलाई में सैकड़ों शिक्षकों को हजारों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। जिला प्रशासन अपने लाभ के लिए बायोमैट्रिक मशीनों का जाल फैला रखा है। उन्होंने कहा है कि राजपुर विकासखण्ड की भौगोलिक स्थिति मशीनीकरण के सहारे विद्यालय चलाने के लिए कदापि उपर्युक्त नहीं है। नदी-नाले, घाट-पहाड़, निरंतर विद्युत सप्लाई न रहना एवं आवागमन में बाधा उत्पन्न रहने के कारण यदि कर्मचारी एक मिनट विलंब से पहुंचा तो उसकी अनुपस्थिति दर्ज हो जाती है।

पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम शिक्षा समिति सरपंचों के माध्यम से शिक्षकों के वेतन पत्रक व उपस्थिति पत्र प्रमाणीकरण करने का निर्देश राज्य शासन ने जारी किया है किंतु इस जिले में पंचायतीराज व्यवस्था का स्थान एक एनजीओ ने ले लिया है। अजाक्स के उपप्रांताध्यक्ष श्री ठाकुर ने कहा है कि एक सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौपकर इस कु-व्यवस्था व कु-प्रशासन से निजात दिलाने की मांग की जाएगी व वेतन कटौती के विरोध में शिक्षक दिवस का बहिष्कार किया जाएगा।

बिना नोटिस दिए काटा वेतन-अजाक्स ने कहा है कि अवकाश नियम में उल्लेख है कि शासकीय कर्मचारी यदि आकस्मिक पर है तो उसे कर्तव्य अवधि माना जाएगा,किंतु राजपुर के विकासखण्ड अधिकारी द्वारा वेतन कटौती के पूर्व किसी भी कर्मचारी या शिक्षकों को स्पष्टीकरण देने या कारण बताओ सूचना जारी नहीं किया गया। बगैर पूर्व सूचना के वेतन की कटौती कर दी गई है। अजाक्स के उपप्रांताध्यक्ष श्री ठाकुर ने कहा कि इस पूरे मामले से स्पष्ट है कि शिक्षकों और कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाने, भयभीत करने, आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की मंशा से ऐसा किया जा रहा है।

न्यूज़ 18

सोमवार को मुंह पर काली पट्टी बांधकर धरना देंगे कॉलेज के छात्र

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/monday-raj-collage-student-protest-644315.html

जौनपुर के राज कॉलेज छात्र संघ अध्यक्ष दिलीप प्रजापति के कॉलेज प्राचार्य और अन्य अध्यापकों द्वारा र्दुव्‍यवहार व निष्कासित किए जाने से छात्र लामबंद हो गए हैं.

छात्रनेताओं ने बैठक कर सोमवार को मुख्य द्वार पर मुंह पर काली पट्टी बांधकर धरना देने का निर्णय लिया. छात्र नेताओं का आरोप है कि एक समुदाय के शिक्षक महाविद्यालय परिसर में तानाशाही करते हैं.

पिछड़ी और दलित जाति के साथ आए दिन र्दुव्‍यवहार किया जाता है. मनमाने ढंग से फीस वसूला जाता है. विरोध करने पर छात्रों की आवाज को दबाया जाता है.

छात्र नेताओं ने चेतवानी दी कि अब छात्रों की आवाज को दबाने वालों की तानाशाही खत्म करने का समय आ गया है. बैठक में छात्रसंघ अध्यक्ष दिलीप प्रजापति, उपाध्यक्ष रोहित कुमार मौर्य, महामंत्री राजेश कुमार मौर्य, देवेश उपाध्याय रहे.

लाइव हिन्दुस्तान

ग्लोबल कटुता से मुक्ति की जरूरत

http://livehindustan.com/news/guestcolumn/article1-Important-event-young-nude-in-public-conversion-high-caste-public-banquet-492517.html

दो महत्वपूर्ण घटनाओं से बात शुरू करना चाहूंगा। इन्होंने मुझे झकझोर कर रख दिया है। पहला हादसा मंगलुरु का है। वहां एक युवक को इसलिए सरेआम निर्वस्त्र कर दिया गया, क्योंकि वह दूसरे धर्म की महिला के साथ था। उसके साथ यह सुलूक करने वाले लोगों का आरोप था कि वह नौजवान इस महिला की मदद नहीं कर रहा था, बल्कि उसकी मंशा उसके धर्मांतरण की थी।

कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश में एक दलित युवक की नाक इसलिए काट ली गई थी, क्योंकि उसने ऊंची जाति के लोगों के साथ सार्वजनिक भोज में बैठने की जुर्रत की थी। हमने इसी महीने स्वतंत्रता की 68वीं सालगिरह मनाई है और इसीलिए ‘आजादी श्रृंखला’ का यह पांचवां आलेख मैं उन कटुताओं पर केंद्रित करना चाहूंगा, जिन्होंने पूरी दुनिया को अपनी लपेट में ले लिया है। इन्हीं कड़वाहटों से आतंक और अलगाव के भस्मासुर पैदा हो रहे हैं। एक के बाद एक, तमाम देश इन आसुरी शक्तियों की जिद और जद में आते जा रहे हैं।

यह खतरनाक प्रवृत्ति है।

‘सोशल मीडिया’ से उम्मीद थी कि वह 21वीं शताब्दी को मानवीय इतिहास का सबसे रचनात्मक कालखंड बनाने में योगदान करेगा। हो इसका उल्टा रहा है। आतंक और अलगाव के बाजीगर इसके जरिए लोगों को अपने से जोड़ रहे हैं। भरोसा न हो, तो यू-ट्यूब पर उन वीडियो लिंक्स पर क्लिक कर देखिए, जिनमें लोगों के सिर कलम किए जा रहे हैं अथवा खंजर लहराता हुआ कोई शख्स कुछ खास देशों में कत्लेआम की धमकियां दे रहा है। इनके हिट्स करोड़ों में हैं, उन साइट्स और वीडियो से कहीं ज्यादा, जो मानवता को जोड़ने की बात करते हैं। इस नई टेक्नोलॉजी का कमाल है कि अब हत्यारों और दहशतगर्दों की पहुंच देशों की भौगोलिक सीमाओं से परे हो गई है। 

एक उदाहरण देना चाहूंगा।

बोधगया के मंदिर में जब विस्फोट हुए, तो उससे हम जैसे लोग यह सोचने पर विवश हो गए कि गौतम को बोध देने वाली यह पवित्र भूमि आतंकवादियों के निशाने पर क्यों आई? सुरक्षा एजेंसियों की छानबीन से जो निष्कर्ष निकले, उनमें से एक बेहद चौंकाने वाला था। इस हमले के तार पड़ोसी देश म्यांमार से जुड़े हुए थे। वहां बौद्धों का एक वर्ग लगातार रोहिंग्या मुसलमानों पर हमले कर रहा है। उन्हें लगता है कि ये लोग म्यांमार में बौद्ध धर्म के लिए खतरा हैं। इन हमलों से बेजार रोहिंग्या लगातार वहां से पलायन कर रहे हैं। भारत, इंडोनेशिया, मलयेशिया और थाईलैंड इनमें से ज्यादातर के ठिकाने हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक आकलन के मुताबिक, पिछले साल 63,500 और इस वर्ष के शुरुआती तीन महीनों में 25,700 रोहिंग्या जलावतनी को अपना चुके थे। ये आंकडे़ गवाह हैं कि कुछ वर्ष पहले शुरू हुआ यह दर्दनाक सिलसिला साल दर साल गंभीर रूप लेता जा रहा है।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि म्यांमार में मार खाए हुए रोहिंग्या जनों के एक गुट ने यह सोचा कि क्यों न बौद्धों की आस्था के सबसे बड़े केंद्र को ही ध्वस्त कर दिया जाए? बोधगया का हमला इसी का नतीजा था। ऐसा नहीं है कि सिर्फ बौद्ध या हिंदू धार्मिक स्थल निशाने पर हैं। हम गुरुद्वारों, मस्जिदों और चर्चों पर भी आत्मघाती हमले देख चुके हैं। पूरी दुनिया में अब तक लाखों लोग प्रार्थना के दौरान मारे जा चुके हैं। क्या विरोधाभास है? शांति और सद्भाव के स्थल भी अशांति फैलाने वालों के शिकार बन रहे हैं।

यही वजह है कि एक के बाद एक, तमाम देश असफल साबित होते जा रहे हैं। पिछले 10 साल में असफल और असफल होने के कगार पर खड़े मुल्कों का आंकड़ा सात से बढ़कर 16 पहुंच चुका है। अराजकता के मारे इन देशों से निरीह और अमन पसंद लोगों को भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र का आंकड़ा बताता है कि साल 2014 के पहले छह महीनों में करीब 55 लाख लोगों को दर-बदर होना पड़ा। इनमें से 14 लाख को तो दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी। हालात कितने खतरनाक हैं, इसका अंदाजा सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि सीरिया से अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। यह इस अभागे मुल्क के तमाम पड़ोसियों की जनसंख्या से कई गुना ज्यादा है।

मसलन, पड़ोसी लेबनान की आबादी महज 40 लाख है। कहने की जरूरत नहीं कि ये शरणार्थी जब किसी दूसरे देश में जाते हैं, तो वहां के लोगों में बेचैनी पैदा हो जाती है। 1971 में जब बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग शरणार्थी बनकर भारत आए थे, तो दिल्ली की सरकार तक व्याकुल हो उठी थी। भारत-पाक के बीच उसी साल हुई ऐतिहासिक जंग का एक कारण यह भी था। आज भी बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग चोरी-छिपे सीमा पार करके हमारे इलाकों में आ बसते हैं। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि इनमें सिर्फ निरीह लोग नहीं होते। कुछ भेदिए और आतंकवादी भी उनकी आड़ में हमारी सीमा में घुस आते हैं। गया का विस्फोट ऐसे ही लोगों की सहायता से किया गया था।

आपको याद होगा कि जब प्रभाकरन की अगुवाई में तथाकथित तमिल चीते कोलंबो की सरकार को ललकार रहे थे, तब सागर का सीना चीरकर बहुत से तमिल शरणार्थी हमारे दक्षिणी इलाकों में दस्तक देते रहते थे। इनमें से कुछ प्रभाकरन के लोग भी थे। राजीव गांधी के हत्यारों ने हमारी सरजमीं पर इसी तौर-तरीके से ठिकाना बनाया था। यहां एक बात और साफ कर दूं। ‘ग्लोबल टेररिज्म’ के नाम पर पश्चिमी बुद्धिजीवियों का एक धड़ा खास समुदाय को निशाना बनाता रहा है, पर आतंकवाद पर किसी धर्म विशेष से जुड़े लोगों का एकाधिकार नहीं है। हम अपने पड़ोसी देशों की दुर्भावनाओं और असफलताओं के जरिए अब तक हिंदू, सिख और मुस्लिम आतंकवादियों को भारत में मार-काट करते देख चुके हैं।

भूलिए मत, राजीव गांधी के हत्यारे हिंदू थे। इसे कैसे रोका जाए? इसके लिए जरूरी है कि सरकारें अपने दुराग्रहों पर काबू पाएं। उन्हें सीख लेने के लिए दूर इतिहास की अंधी गलियों में भी नहीं भटकना है। कुछ दिनों पहले तक एक ऐसा महामानव हमारे बीच था, जिसने सत्ता में आने के बाद सबसे पहले कटुताओं पर काबू पाने की कोशिश की थी। मैं नेल्सन मंडेला की बात कर रहा हूं। मंडेला ने सत्ता संभालते ही अपने सहयोगियों से कहा था कि श्वेत अधिकारियों, कारोबारियों और नागरिकों के साथ कोई प्रतिशोधात्मक व्यवहार न किया जाए। दक्षिण अफ्रीका पर उनका भी हक है और हमें उनकी प्रतिभा की जरूरत है। इसीलिए उनके आने के बाद आशंका के मुताबिक नस्लीय दंगे नहीं हुए और इस खूबसूरत देश ने एक नई रीति-नीति विकसित की। मंडेला अवतार नहीं थे, मगर अपने सद्कर्मों से जीते जी उन्होंने महामानव का दर्जा हासिल किया था। धरती के मौजूदा सत्तानायक उनका अनुसरण क्यों नहीं करते?

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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