दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 21.08.15

भाषण प्रतियोगिता में प्रथम न आने पर छात्रा ने उठाया खौफनाक कदम – पंजाब केसरी

http://www.punjabkesari.in/news/article-388150

दलित परिवार के घर पर 26 दिन से ताला – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/bagpat-12758188.html

राष्ट्रीय स्तर पर होगा आरक्षण बचाओ आंदोलननवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/politics/reservation-movement-will-held-on-national-level/articleshow/48562893.cms

सीपीएम ने क्रमिक अनशन को बनाया तल्ख – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/chandauli-12762392.html

पूरी बिरादरी से बदला लेने वाले – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/samachar/reflections/columns/the-whole-association-of-revenge-hindi/

ST-SC आयोग ने धर्मांतरण को बताया गलत – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/hisar/st-sc-commission-was-wrong-to-conversion/articleshow/48560674.cms

Please Watch:

Media Manthan – Dalit in Media

https://www.youtube.com/watch?v=wNT2lwW-5JE

Save Dalit Foundation:

Educate, agitate & organize! – Dr. Ambedkar.

Let us all educates to agitate & Organize to Save Dalit Foundation !

Please sign petition by click this link : https://t.co/WXxFdysoJK

पंजाब केसरी

भाषण प्रतियोगिता में प्रथम न आने पर

छात्रा ने उठाया खौफनाक कदम

http://www.punjabkesari.in/news/article-388150

 मंडी: खेलकूद प्रतियोगिता के दौरान भाषण में प्रथम पुरस्कार न मिलने से आहत एक दलित मेधावी छात्रा ने जहर निगल लिया। हालत बिगडऩे पर उसे 80 किलोमीटर दूर जोनल अस्पताल मंडी में उपचार के लिए पहुंचाया गया, वहां चिकित्सकों ने उपचार के बाद उसकी जान बचा ली। इस घटना के बाद खेलकूद प्रतियोगिता के आयोजकों व भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल पर मामला दर्ज कर लिया गया है।

औट के थाना प्रभारी लोकेंद्र नेगी ने बताया कि छात्रा व उसके परिजनों की शिकायत पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल थाची के प्रबंधन व सांस्कृतिक प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के 3 सदस्यों के  खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

छात्रा का आरोप है कि थाची स्कूल में 16 से 19 अगस्त तक छात्राओं की खंड स्तरीय खेलकूद एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें उसने भाषण स्पर्धा में भाग लिया। अध्यापकों ने स्पर्धा के लिए कोई तैयारी नहीं करवाई। अपने स्तर पर तैयारी कर उसने बेहतरीन प्रदर्शन किया। स्पर्धा के दौरान उसे प्रथम घोषित किया गया लेकिन पुरस्कार वितरण के दौरान द्वितीय पुरस्कार दिया गया। छात्रा इससे पहले भी भाषण व सांस्कृतिक स्पर्धा में कई दफा प्रथम स्थान हासिल कर चुकी है।

छात्रा के परिजनों का आरोप है कि भाषण स्पर्धा के लिए जो निर्णायक मंडल गठित किया गया था उसके तीनों सदस्य सामान्य वर्ग से संबंध रखते हैं और स्कूल प्रबंधन समिति के तहत हाल ही में नियुक्त हुए हैं। तीनों ने भेदभाव करते हुए बालीचौकी के एक निजी स्कूल की सामान्य वर्ग की एक छात्रा को प्रथम घोषित कर दिया। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि गत दिनों स्कूल में आयोजित एनएसएस कैंप मेंदोपहर के भोजन के दौरान दलित वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव किया गया। परिजनों का कहना है कि ऐसे मामलों की कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी है।

मामले बारे सुशील पुंडीर उपनिदेशक उच्च शिक्षा मंडी ने कहा कि इस मामले को लेकर थाची स्कूल के प्रधानाचार्य से रिपोर्ट मांगी गई है। अगर कोई दोषी पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं स्कूल के प्रिसीपल यादविंद्र सिंह कटोच ने बताया कि स्कूल में 420 विद्यार्थी हैं। इसमें 188 विद्यार्थी अनुसूचित जाति तथा अन्य सामान्य वर्ग से हैं। जातिगत आधार पर किसी भी बच्चे से कोई भेदभाव नहीं किया गया है। छात्रा ने घर में जहरीले पदार्थ का सेवन किया है। उसके बारे में अभिभावक बेहतर बता सकते हैं। आरोप निराधार हैं।

दैनिक जागरण

दलित परिवार के घर पर 26 दिन से ताला

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खेकड़ा (बागपत) : सांकरौद गांव में दलित बिरादरी के युवक और जाट बिरादरी की युवती के बीच प्रेम-प्रसंग को लेकर खाप पंचायत के सुनाए गए कथित फरमान के बाद दलित परिवार दहशत में है। 26 दिन से परिवार के लोगों ने घर छोड़कर दिल्ली में शरण ले रखी है। प्रेमी के भाई का आरोप है कि पंचायत के फरमान के बाद उसकी दोनों बहनों की इज्जत खतरे में है और परिवार को भी खतरा है। पुलिस भी उनके साथ ज्यादती कर रही है।

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युवक रवि के भाई सुमित ने दिल्ली से फोन कर बताया कि युवती के परिजनों ने गांव में खाप पंचायत बुलाई थी। इसमें उसकी दोनों बहनों के साथ दुष्कर्म कर गांव में नग्न परेड कराने का फरमान सुनाया था। इस बात की जानकारी उन्हें गांव के ही एक व्यक्ति ने दी थी। इसके बाद 24 जुलाई-15 को घर छोड़कर परिवार के सभी सदस्य दिल्ली में आ गए थे। उसने बताया कि मजबूरन उन्हें न्याय और सुरक्षा की खातिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सुमित ने बताया कि उसकी भाई की जमानत हो चुकी है, लेकिन डर के मारे वह अभी उसे जेल से बाहर लाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उसका यह भी आरोप है कि खेकड़ा पुलिस भी आरोपियों का साथ दे रही है।

गांव में कुछ लोगों का यह भी कहना है कि देर शाम दलित परिवार का मुखिया अपने मकान पर आता है और सुबह जल्दी चला जाता है। उसके अपने घर पर आने-जाने की जानकारी बहुत कम लोगों को है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में गांव में कभी पंचायत नहीं हुई। पंचायत में फरमान का झूठा आरोप किसी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

इन्होंने कहा..

दलित परिवार का मुखिया रिटायर्ड फौजी है और कहीं पर गार्ड की नौकरी करता है। रोजाना शाम को आता है और सुबह चला जाता है। परिवार के सदस्यों की पलायन जैसी कोई बात नहीं है और गांव में पंचायत के फरमान की बात भी निराधार है।

-सुबोध यादव, थानाध्यक्ष खेकड़ा

 नवभारत टाइम्स

राष्ट्रीय स्तर पर होगा आरक्षण बचाओ आंदोलन

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संयोजक अवधेश वर्मा ने कहा कि जानबूझकर लोकसभा में प्रमोशन में आरक्षण बिल पास नहीं किया जा रहा है। यह देश के 35 लाख कर्मचारियों के लिए करो या मरो का सवाल है। इसको लेकर उप्र से अलावा बाकी राज्यों के दलित कर्मचारी संगठनों से बात की जा रही है।

जल्द ही दलित कर्मचारी राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करेंगे। संघर्ष समिति के सदस्यों ने गुरुवार को बैठक की और 21 अगस्त को आंदोलन की घोषणा की। समिति के नेताओं का कहना है कि सपा सरकार लोकसभा में बिल पास न होने का सहारा लेकर हाई कोर्ट से डिमोशन पर लगी रोक हटवाती है, वहीं, दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में दलित कार्मिकों का पक्ष सही से नहीं रखा जा रहा है।

बैठक में केबी राम, डॉ. राम शब्द जैसवारा, आर.पी. केन, अनिल कुमार, श्याम लाल, अंजनी कुमार, लेखराम समेत कई लोग शामिल थे।

दैनिक जागरण

सीपीएम ने क्रमिक अनशन को बनाया तल्ख

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/chandauli-12762392.html

चकिया (चंदौली) : बैराठ फार्म, मोकरम बंधी की भूमि सहित एसडीएम को हटाने की मांग पर अड़े सीपीएम कार्यकर्ताओं का क्रमिक अनशन कार्यक्रम गुरूवार को तल्ख हो गया। अनशन स्थल पर किसी समक्ष अधिकारी के अब तक नहीं पहुंच पाने से कार्यकर्ता अनशन कार्यक्रम को धारदार बनाने की रणनीति तैयार की। साथ ही सभा के माध्यम से शासन प्रशासन को चेताया।

वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1998 में बैराठ फार्म की भूमि को लेकर समझौता हुआ। बावजूद इसके तहसील प्रशासन गरीब दलितों की रोजी रोटी पर डाका डालने का काम कर रहा है। एसडीएम को गरीब व दलित विरोधी करार देते हुए वक्ताओं ने कहा कि अभी तो जन तांत्रिक ढंग से पार्टी गरीबों, दलितों की आवाज बुलंद कर रही है। लेकिन प्रशासन का यही रवैया बना रहा तो आंदोलन को धारदार बनाकर ईंट से ईंट बजाने से पार्टी पीछे नहीं हटेगी। चेतावनी दिया कि प्रशासन की यही स्थिति रही तो क्रमिक अनशन को अनिश्चित कालीन अनशन में परिवर्तित करने को बाध्य हो जायेगी।

सभा के पूर्व पार्टी के जिला मंत्री लालचंद ¨सह ने मुन्ना, मुंशी, राजकुमार, लालमनी, रामलाल, सुरेश, मुखई, सुराहू, पूजा देवी, जीरा देवी समेत 20 लोगों को माल्यार्पण कर अनशन पर बैठाया। सभा को शंभू नाथ, लालमनी विश्वकर्मा, नरोत्तम चौहान, मदन राजभर, सुरेश, रामलाल, मुन्ना प्रसाद ने संबोधित किया। संचालन अंतु राम वनवासी ने किया।

 अमर उजाला

पूरी बिरादरी से बदला लेने वाले

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हफ्ता भर पहले की बात है। 15 अगस्त से दो दिन पहले बिहार के खगड़िया जिले की परबत्ता तहसील में अत्यंत गरीब लोगों की बड़ी जमघट हुई, जिसने तमाम लेखों, पुस्तकों, बुद्धिजीवियों की टिप्पणियों से ज्यादा प्रभावी ढंग से इसका खुलासा किया कि इस आजादी का बेसहारा और कमजोर लोगों के लिए क्या अर्थ है।

वहां तहसील के ग्राम नयागांव शिरोमणि टोले के दो सौ दलित परिवार थे, जो पिछले कई दिनों से अपने गांव के पास, सड़क के किनारे अपनी जान बचाने के लिए रहने को मजबूर किए गए थे। 27 जुलाई को उनके टोले के करीब तीन सौ दलित परिवारों पर गांव की जमीन पर काबिज ऊंची जाति के लोगों ने जबर्दस्त और बर्बर हमला किया था। उनकी झोपड़ी में आग लगा दी गई, मर्दों को बुरी तरह पीटा गया, महिलाओं के साथ इतनी बदसलूकी की गई कि एक गर्भवती महिला का गर्भ गिर गया। इन लोगों की आंखों के सामने उनके घरों में बड़े जतन से रखा अनाज का हर दाना बर्बाद कर दिया गया।

आखिर यह हमला क्यों हुआ? बताया जाता है कि टोले के एक बुनकर (दलित) पुरुष का संबंध भूमिहार जाति की एक लड़की से था। सारे गांव को इसकी जानकारी थी। बुनकर पुरुष शादीशुदा था, लड़की कुंवारी। लड़की के मां-बाप ने जल्दी से जल्दी उसकी शादी खगड़िया शहर में कर दी। लेकिन दोनों के रिश्ते में कोई फर्क नहीं आया। मोबाइल फोन पर बात होती थी। एक दिन लड़की का फोन आया कि वह अकेली है। वह बुनकर पुरुष वहां पहुंचा और दोनों वहां से भाग निकले।

लड़की वालों ने पुरुष के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करवा दिया। कई हफ्तों बाद दोनों पकड़े गए। लड़के को जेल भेजकर पुलिस ने लड़की को अदालत में पेश किया। लड़की के मां-बाप के साथ ही सहजाति प्रधान और टोले के तमाम खौफजदा लोग कचहरी पहुंचे थे। लड़की ने प्रधान से कहा, तुम्हारे भाई ने मुस्लिम महिला से शादी की, तो तुमको बुरा नहीं लगा। फिर अपने मां-बाप की ओर मुखातिब होकर कहा, चाचा बुनकर लड़की को ब्याह कर लाए, तो तुम कुछ नहीं बोले। और अंत में मजिस्ट्रेट से कहा, ‘मेरा इन लोगों से कोई संबंध नहीं है। मैं उसे पति मानती हूं, जो जेल में बंद है और उसके साथ ही मैं रहूंगी।’

गांव लौटकर प्रधान ने बिरादरी की बैठक बुलाई। वह पहले से ही शिरोमणि टोले के लोगों से खार खाया हुआ था। उस पर दलित बच्चों के वजीफे के पैसे हड़पने से लेकर कई तरह के आरोप लगे थे, जिनकी जांच हो रही है। उसने इसे दलितों को सबक सिखाने के मौके की तरह लिया। बैठक में उकसाने वाले भाषण दिए गए और आनन-फानन में शिरोमणि टोले पर हमला कर दिया गया।

मतलब एक व्यक्ति की गलती की सजा उसकी पूरी बिरादरी को दी गई। यह घटना जाति और धार्मिक गोलबंदी के अलावा भी कुछ सवाल प्रस्तुत करती है। आखिर ऐसा क्यों कि एक लड़की के उससे निचली समझे जाने वाली जाति के पुरुष के साथ संबंध के खिलाफ होने वाले हिंसात्मक हमले पर समाज का बड़ा हिस्सा अपनी मुहर लगाता है? एक दलित गर्भवती महिला के शिशु की हत्या के प्रति उदासीन क्यों रहता है? पुरुषप्रधानता और जाति भेदभाव का यह कैसा गठजोड़ है, जिसने हमारी मानसिकता को इतना जकड़ कर रख दिया है?

नवभारत टाइम्स

ST-SC आयोग ने धर्मांतरण को बताया गलत

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/hisar/st-sc-commission-was-wrong-to-conversion/articleshow/48560674.cms

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग ने भगाना गांव के दलितों के धर्म परिवर्तन के कदम को गलत बताया है। आयोग का कहना है कि इस्लाम धर्म अपना लेने से ग्रामीणों की समस्या हल नहीं होगी। साथ ही गांव से दूर दूसरी जगह बसाए जाने की मांग को भी उचित नहीं ठहराया है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने गुरुवार को फतेहाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि भगाना के दलितों की ओर से धर्म परिवर्तन करके इस्लाम धर्म कबूलने से उनकी समस्याएं हल नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि भगाना के मामले में वह खुद तीन बार गांव भगाना जा चुके हैं। सरकार ने उनको अलग से जगह व मुआवजा भी दे दिया है, लेकिन भगाना के दलित गांव से 3 किलोमीटर दूर अलग बस्ती की मांग कर रहे हैं, जो कि उचित नहीं लगती। अगर उन्हें कोई तकलीफ है तो वे धर्म बदलने की बजाय आयोग के पास आएं, आयोग उनकी समस्या हल करेगा।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने गुरुवार को फतेहाबाद के पंचायत भवन में दलितों की समस्याओं को सुना व अधिकारियों से बैठक की। टोहाना के केएम सरस्वती स्कूल में 134-ए के तहत दाखिला पाने वाले 2 बच्चों को स्कूल से निकालने के मामले में उन्होंने स्कूल प्रिंसीपल व डिप्टी डीईओ संतलाल को दिल्ली तलब कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। 100-100 गज प्लॉट के मामले में जिला फतेहाबाद में अभी तक 1786 पात्रों को प्लाट न मिल पाने के मामले पर भी आयोग ने सख्त रुख रखा। ईश्वर सिंह ने कहा कि हैरानी की बात है कि 28 गांव ऐसे हैं जिनमें अभी तक एक भी प्लॉट दलित को नहीं दिया गया है। इस मामले में भी उन्होंने फतेहाबाद के डीसी से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगकर पूछा है कि अब तक इन गांवों में प्लॉट क्यों नहीं काटे गए।

हरियाणा में बढ़ा क्राइम

ढाणी गोपाल में शराब का ठेका फूंकने के मामले में 8 दलितों पर बने केस पर भी उन्होंने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि सिर्फ दलित ही इस मामले में शामिल हों। उन्होंने एसपी से रिपोर्ट मांगी। राजकुमार नहला सुसाईड मामले की जांच उन्होंने डीएसपी सिरसा को सौंपने के आदेश दिए।

इस अवसर पर एडीसी राजेश जोगपाल ने जानकारी दी कि फतेहाबाद जिले में कुल 41765 बीपीएल परिवार हैं जिसमें 26195 दलित हैं। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए ईश्वर सिंह ने कहा कि हरियाणा में पंजाब के मुकाबले दलितों के प्रति क्राइम बढ़ा है। सामाजिक सोच बदलने की जरूरत है। चंडीगढ़ एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां पिछले दो वर्षों में एससी-एसटी एक्ट में कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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