दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट  19.08.15  

यूपी के बागपत में खाप ने दिया बहन से रेप का फरमान, सुप्रीम कोर्ट ने दिया जांच के आदेश – सहारा समय लाइव

http://ftp.samaylive.com/regional-news-in-hindi/uttar-pradesh-news-in-hindi/324180/uttarpradesh-khap-panchayat-orders-to-rape-girl-for-brothers-love-affair.html

पति को शराब पिला कर पत्नी से रेप, विरोध किया तो लगाई आग – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-HMU-dalit-lady-gang-raped-and-set-afire-5087250-NOR.html

पीटकर व्यवसायी को मार डाला – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/gonda/gonda-crime-news/knockout-businessman-killed-hindi-news/

दलित बस्ती भजवाणी में गहराया पेजयल संकट – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/himachal-pradesh/bilaspur-hp-12750778.html

दलित बस्ती में नहीं कराया गया विद्युतीकरण – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/kaushambi/kaushambi-hindi-news/kaushambi-news-hindi-news-121/

रोटी खिलाई तो कुत्ता हुआ अछूत, लगा जुर्माना – आई बीएन खबर 7

http://khabar.ibnlive.com/blogs/javed/caste-system-madhya-pradesh-400877.html

सहारा समय लाइव

यूपी के बागपत में खाप ने दिया बहन से रेप का फरमान,

सुप्रीम कोर्ट ने दिया जांच के आदेश

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 उत्तर प्रदेश की एक खाप पंचायत ने एक दलित युवती का रेप किये जाने और गांव में नग्न घुमाये जाने का आदेश दिया है.

बागपत जिले में 30 जुलाई को हुई खाप पंचायत की बैठक ने कहा कि लड़की के भाई ने एक शादीशुदा लड़की को भगाकर अपराध किया है. इसके लिए लड़की को भी वैसी ही सजा मिलनी चाहिए.

पीड़िता ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा की मांग की है.

लड़की ने कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि उसके भाई और एक अन्य समुदाय की लड़की का तीन साल से प्रेम संबंध था. कुछ समय पहले लड़की की शादी उसकी मर्जी के बिना उसी के समुदाय के एक अन्य लड़के से कर दी गई.

शादी के एक महीने बाद ही वह लड़की अपनी ससुराल छोड़ कर उसके भाई के साथ भाग गई. इसके बाद लड़की के परिवार और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा लगातार परेशान किए जाने के बाद दोनों ने थाने में सरेंडर कर दिया था.

इसी दौरान लड़की गर्भवती हो गई. पुलिस ने लड़की को उसके परिवार के पास भेज दिया जबकि लड़के को फर्जी ड्रग्स केस में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

पीड़िता के वकील ने बताया कि 30 जुलाई को जाट समुदाय की ओर से एक खाप पंचायत बुलाई गई. उसी खाप पंचायत में याचिका दाखिल करने वाली पीड़िता से रेप और उसके चेहरे पर कालिख पोत कर उसे नंगा गांव में घुमाने का आदेश दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को नोटिस जारी किया. साथ ही कोर्ट ने पीड़िता द्वारा सीबीआई जांच की मांग को लेकर भी पुलिस को अपना पक्ष रखने का आदेश दिया.

दैनिक भास्कर

पति को शराब पिला कर पत्नी से रेप, विरोध किया तो लगाई आग

http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-HMU-dalit-lady-gang-raped-and-set-afire-5087250-NOR.html

मुरैना जिले के सबलगढ़ कस्बे में एक दलित युवती के साथ पड़ौस में रहने वाले युवक और उसके साथी ने पति को शराब पिला कर बलात्कार किया। युवती के विरोध करने पर उस पर पेट्रोल उड़ेल कर आग लगा दी। झुलसी हालत में युवती को इलाज के लिए मुरैना के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां युवती की हालत गंभीर बनी हुई है। गौरतलब है कि वारदात का खुलासा 48 घंटे बाद पीड़िता के मुरैना जिला अस्पताल में आने के बाद ही हो सका। जबकि पुलिस को इसकी सूचना 17 अगस्त की सुबह ही दे दी गई थी।

रेप किया और आग लगा कर भाग गए

बुरी तरह झुलसी हुई 24 साल की युवती ने बताया कि 16 अगस्त की रात 10 बजे पड़ौसी पान सिंह अपने एक दोस्त राजेश के साथ उसके घर आया। दोस्ती की बातों में बहला कर युवती के पति को नशीला पदार्थ मिला कर देशी शराब पिला दी। थोड़ी देर में पति बेहोश हो गया। इसके बाद रात दो बजे आरोपी पान सिंह ने साथी राजेश के सहयोग के युवती के साथ बलात्कार किया। पीड़ित युवती के मुताबिक इसके बाद राजेश ने भी उसके साथ दुष्कर्म करना चाहा, तो वह पूरी ताकत लगा कर छूट भागी, और चीखी चिल्लाई, लेकिन कोई भी मदद के लिए नहीं आया। विरोध करने से गुस्साए पान सिंह ने घर के बाहर खड़ी बाइक से पेट्रोल निकालकर पीड़िता के ऊपर उड़ेला और आग लगा दी। पीड़िता को जलता छोड़ आरोपी मौके से फरार हो गए।

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इलाज के लिए भी भटकना पड़ा

लपटों में घिरी युवती ने खुद ही बमुश्किल आग बुझाई। उसकी चीखपुकार सुन कुछ देर बाद पड़ौसी भी आ गए। पड़ौसी जैसे-तैसे झुलसी हुई युवती के पति को होश में लाए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और युवती को इलाज के सबलगढ़ के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन उसकी हालत देख कर मुरैना व जिला अस्पताल रैफर किया गया। यहां से भी उसे तत्काल ग्वालियर रैफर किया गया। इलाज के लिए पैसे न जुटा पाने की वजह से परिजन उसे वापस सबलगढ़ वापस ले आए। यहा मंगलवार दोपहर तहसीलदार ने युवती का बयान दर्ज किया। तहसीलदार के निर्देश पर पीड़िका को एक बार फिर जिला अस्पताल मुरैना रैफर कर दिया गया। युवती का इलाज किया जा रहा है। हालांकि उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

 वारदात के 48 घंटे बाद भी आरोपियों का सुराग नहीं

17 अगस्त को वारदात का सूचना पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन प्रकरण 18 अगस्त को ही दर्ज किया जा सका। पुलिस ने पानसिंह जाटव व राजेश जाटव के खिलाफ धारा 376, 307 व 450 के तहत मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन 48 घंटे बाद भी आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा सकी है।

अमर उजाला

पीटकर व्यवसायी को मार डाला

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तरबगंज थाना क्षेत्र के किंधौरा गांव के मजरा पासी पुरवा में सोमवार शाम एक किराना व्यवसायी को बकाया रुपये मांगने पर तीन लोगों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया।

इस मामले में व्यवसायी के भतीजे ने तरबगंज थाने में तीन लोगों के खिलाफ मारपीट, एससी-एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पहले से दर्ज मुकदमे में गैर इरादतन हत्या की धारा तरमीम की जाएगी।

तरबगंज थाना क्षेत्र के किंधौरा गांव के मजरा पासी पुरवा के रहने वाले दलित राजाराम ने बताया कि उसके बड़े पिता जगमोहन (60) गांव में ही किराने की दुकान चलाते थे। राजाराम के मुताबिक गांव के ही रहने वाले राहुल, नकछेद व रामकुमार उसके बड़े पिता की दुकान से छह माह पहले किराने का सामान ले गए थे, जिसका ढाई सौ रुपये बकाया था।

उसके बड़े पिता ने कई बार तीनों लोगों से बकाया रुपये मांगे, मगर वह रुपये देने के लिए टाल-मटोल करते रहे। राजाराम ने बताया कि सोमवार को दोपहर बाद तीनों लोग उसके बड़े पिता की दुकान पर आए और सामान उधार मांगने लगे। 

उन्होंने पहले से बकाया ढाई सौ रुपये की मांग की तो तीनों भड़क गए और जगमोहन को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया। घायल जगमोहन को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 

इस मामले में राजाराम ने तरबगंज थाने में राहुल, नकछेद व रामकुमार के खिलाफ मारपीट व एससी-एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। थानाध्यक्ष योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पहले से दर्ज मुकदमे में गैर इरादतन हत्या की धारा तरमीम की जाएगी।

दैनिक जागरण

दलित बस्ती भजवाणी में गहराया पेजयल संकट

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भगेड़ : ग्राम पंचायत औहर के गांव भजवाणी की दलित बस्ती में पेयजल संकट गहरा गया है। कई दिन से पेयजल आपूर्ति न होने से लोग बूंद-बूंद पानी को तरस गए हैं लेकिन आइपीएच विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

ग्रामीण धनीराम, सीता देवी, लौहकी देवी, कमला देवी, राम प्यारी, सपना देवी, रतनलाल, रोशनी, निर्मला, कमला, मीरा देवी, रीता देवी ने कहा कि रूकमणि-बड़ोआ पेयजल योजना से करीब दो दशक पहले पाइप लाइन बिछाई गई थी। इसका कुछ ही लोगों को लाभ मिल पाया। इसके बाद अन्य लोगों के लिए विभाग ने योजना बनाई लेकिन कुछ प्रभावशाली लोगों को ही इसका भी लाभ मिल पाया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले चोर पाइप लाइन की पाइपें ही चुराकर ले गए। इसके चलते लोगों को पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही विभाग ने समस्या का समाधान नहीं किया तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।

उधर, आइपीएच विभाग के अधिशासी अभियंता अर¨वद सूद ने कहा कि लोगों की समस्या का जल्द ही समाधान कर दिया जाएगा।

अमर उजाला

दलित बस्ती में नहीं कराया गया विद्युतीकरण

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सिराथू तहसील के बम्हरौली गांव की दलित बस्ती में अभी तक विद्युतीकरण नहीं कराया गया है। इससे लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ढिबरी और लालटेन की रोशनी में घरेलू कामकाज करने को लोग मजबूर हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों ने सिराथू विधायक को पत्र देकर विद्युतीकरण कराने की मांग की है।

बम्हरौली गांव की दलित बस्ती में रहने वाले उमेश कुमार, सुमित्रा देवी, राकेश कुमार, राजेन्द्र प्रसाद, कल्लू आदि ने बताया कि मोहल्ले में अभी तक बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसकी वजह से लोग अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई और खेती पर विपरीत असर पड़ रहा है। लोग देश दुनिया की खबरों से दूर हैं। लोगों ने बताया कि विद्युतीकरण कराने को लेकर कई बार जिलाधिकारी और एक्सईएन को पत्र दिया गया है। किसी ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों ने सिराथू विधायक वाचस्पति से बिजली दिलाने की मांग की। विधायक ने एक्सईएन विद्युत से स्टीमेट मांगा है। इनका कहना है कि स्टीमेट मिलते ही वह अपनी निधि से विद्युतीकरण करा देंगे।

आई बीएन खबर 7

रोटी खिलाई तो कुत्ता हुआ अछूत, लगा जुर्माना

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मध्य प्रदेश में दलित उत्पीड़न के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2010 का मामला तो सभी को याद होगा जब 2010 में मुरैना जिले के मलीकपुर गांव में एक दलित महिला ने स्वर्ण जाति के व्यक्ति के कुत्ते को रोटी खिला दी, जिस पर कुत्ते के मालिक ने पंचायत में कहा कि एक दलित द्वारा रोटी खिलाए जाने के कारण उसका कुत्ता अपवित्र हो गया है, गांव की पंचायत ने दलित महिला को उसके इस ‘‘जुर्म’’ के लिए 15000 रूपये के दण्ड़ का फरमान सुनाया।

इसी तरह 10 मई को रतलाम जिले के नेगरुन गांव की घटना ने तो पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा वहां दबंगों ने दलितों की एक बारात पर इसलिए पथराव किया क्योंकि दूल्हा घोड़ी पर सवार था। इसके बाद बारात को पुलिस सुरक्षा में निकलना पड़ा और दूल्हे को हेल्मैट पहनवाना पड़ा तब जाकर बारात निकल पाई। इसी तरह मई में संपन्न हुए पंचायत चुनाव के दौरान शिवपुरी जिले के कुंअरपुर गांव में एक दलित महिला अपने गांव की उप सरपंच चुनी गई थीं, जिन्हें गांव के पूर्व सरपंच और कुछ दबंगों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की और उनके मुंह में गोबर भर दिया। 13 जून को छतरपुर जिले के गणेशपुरा में दलित समुदाय कि एक 11 वर्षीय लड़की हैंडपंप से पानी भरने जा रही थी, इसी दौरान दबंग समुदाय के व्यक्ति ने लड़की की इसलिए पिटाई कर दी क्योंकि उसके खाने पर लड़की की परछाई पड़ गई थी।

जाहिर है ऐसी घटनाएं धीरे-धीरे सरकार के लिए अतीत का हिस्‍सा हो रही हों, लेकिन सभ्‍य समाज और आर्थिक महाशक्ति का सपना देख रहे भारत के लिए कलंक से कम नहीं है। सोचने वाली बात यह है कि सरकार का इन घटनाओं की ओर कितना ध्यान है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऐसी घटनाएं और भी बेहद शर्मिंदगी के साथ लगातार बढ़ती ही जा रही है।

बीते 26 जून की रात मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर जिले के गांव मड़गुला के दलित समुदाय पर गांव के दबंग राजपूतों ने लाठी, बल्लम, तलवार और हॉकी से हमला कर दिया, इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि करीब 17 लोग घायल हो गए। पूरा मामला खेतों में कम मजदूरी पर काम करने से इनकार कर देने का है, जिसके बाद सबक सिखाने के लिए यह हमला अंजाम दिया गया। इस गांव में इससे पहले भी इसी तरह की घटनाएं होती रही हैं।

2009 में वहां इसी तरह की एक बड़ी वारदात हुई थी, जब मड़गुला और आसपास के गांवों के अहिरवार समुदाय के लोगों ने यह कहते हुए मृत मवेषी उठाने से मन कर दिया था कि इससे उनके साथ छुआछूत व भेदभाव का बर्ताव किया जाता है। इसके जवाब में मड़गुला गांव के दबंगों ने पूरे अहिरवार समुदाय पर सामाजिक और आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया था और कोटवार के माध्यम से यह ऐलान करा दिया गया कि अहिरवार समुदाय के जो लोग सवर्णों के यहां बटाईदारी करते हैं, उन्हें उतना ही हिस्सा मिलेगा जितना वे तय करेंगें। इसी तरह से मजदूरी भी आधी कर दी गई।

इसके अलावा उनके सार्वजनिक स्थलों के उपयोग जैसे सार्वजनिक नल, किराना की दुकान से सामान खरीदने, आटा चक्की से अनाज पिसाने, शौचालय जाने के रास्ते और अन्य दूसरी सुविधाओं के उपयोग पर जबर्दस्ती रोक लगा दी गई थी। उस समय भी कई सारे परिवार गांव छोड़ कर पलायन कर गए थे और प्रशासन द्वारा बहुत बाद में इनकी सुध ली गई थी। साल 2012 में में भी आसपास के गांवों में इसी तरह की घटनाएं हुई थीं।

दरअसल, यह केवल गाडरवारा तहसील का मसला नहीं है, मध्य प्रदेश में जातिगत भेदभाव की जड़ें बेहद गहरी हैं। यहां दलित उत्पीड़न के कई रूप हैं, जैसे नाई द्वारा बाल काटने को मना कर देना, चाय की दुकानदार द्वारा चाय देने से पहले जाति पूछना और खुद को दलित बताने पर चाय देने से मना कर देना या अलग गिलास में चाय देना, पंच/सरपंच को मारने पीटने, शादी में घोड़े पर बैठने पर रास्ता रोकना और मारपीट करना, मरे हुए मवेशियों को जबरदस्ती उठाने को मजबूर करना, मना करने पर सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार कर देना, सावर्जनिक नल से पानी भरने पर रोक लगा देना जैसी घटनाऐं कुछ उदाहरण मात्र है जो अभी भी यहां अनुसूचित जाति के लोगों के आम दिनचर्या का हिस्सा हैं।

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरिलैंड की तरफ से इसी साल आई एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 27 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में छुआछूत को मानते हैं और इस मामले में मध्य प्रदेश तिरपन प्रतिशत के साथ देश में पहले नंबर पर है। इसी तरह से स्थानीय दलित अधिकार अभियान द्वारा 2014 में जारी रिपोर्ट “जीने के अधिकार पर काबिज छुआछूत” के अनुसार मध्य प्रदेश के 10 जिलों के 30 गांवों में किए गये सर्वेक्षण के दौरान निकल कर आया है कि इन सभी गांवों में लगभग 70 प्रकार के छुआछूत का प्रचलन है इसी तरह से भेदभाव के कारण लगभग 31 प्रतिशत दलित बच्चे स्कूल में अनुपस्थित रहते हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 15.6 फीसदी है, पिछले पांच साल के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2009 से 2012 के बीच दलित उत्पीड़न के दर्ज किए गए मामलों में मध्य प्रदेश का स्थान पांचवां बना रहा, 2013 में यह एक पायदान ऊपर चढ़ कर चौथे स्थान पर पहुच गया है।

इस साल की प्रमुख घटनाएं ही उत्पीड़न के इस दंश को बयान करने के लिए काफी हैं जनवरी माह में दमोह जिले के अचलपुरा गांव में दबंगों द्वारा दलित समुदाय के लोगों को पीटा गया, इसके बाद प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के मौजूदगी में 12 दलित परिवार गांव छोड़कर चले गये, क्योंकि उन्हें पुलिस और प्रशासन से अपनी सुरक्षा का भरोसा नहीं था। मई की गर्मियों में अलीराजपुर जिले के घटवानी गांव की घटना सामने आई जहां 200 दलित एक गंदे कुंए से पानी पीने को इसलिए मजबूर हुए क्योंकि छुआछूत की वजह से उन्हें गांव के इकलौते सार्वजनिक हैंडपंप से पानी नहीं लेने दिया जाता था।

आखिर क्या वजह है कि प्रदेश में लगातार इतने बड़े पैमाने पर दलितों के साथ अत्याचार के मामले सामने आ रहे हैं?

इसके बावजूद मध्य प्रदेश की राजनीति में दलित उत्पीड़न कोई राजनैतिक मुददा नही बन पा रहा हैं? शायद इसका जवाब यही है कि प्रदेश के ज्यादातर प्रमुख राजनैतिक दलों के एजेन्ड़े में दलितों के सवाल सिरे से ही गायब हैं। तभी तो मड़गुला की घटना पर बयान देते हुए गाडरवारा से भाजपा विधायक गोविन्द पटेल कहते हैं कि, “ऐसे झगड़े तो होते रहते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, पाकिस्तान का भी भारत से झगड़ा चल रहा है, जो घटना हुई है वह किसी भी तरह से जातिवाद की लड़ाई नहीं है”। इतना सब होने के बावजूद मध्य प्रदेश में दलितों को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर संवेदनहीनता व्याप्त है और यह लोग दलितों की समस्या को समस्या ही नहीं मानते हैं।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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