दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 04.08.15

पंचायती फरमान : युवक व किशोरी को बाल मुड़वा गांव में घुमायादैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-panchayati-decree-youth-and-teenager-hairless-and-round-in-village-12688600.html?src=LN

ग्रामीणों ने की पुलिस के साथ मारपीट – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/haryana/faridabad-12687581.html

वितरण में गड़बड़ी पर प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/buxar-12687346.html

बड़े हो गए हों और खाना ज्यादा खाते होंकहकर छात्रावास से निकाल दिया – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/dabra-hostal-gate-out-440708

झाँसी में छुआछूत से पीड़ित दलितों की मदद को सामने आया NGO ‘केवट बिंईग दलित

http://www.beingdalit.com/2015/08/ngo-helping-dalits-in-jhansi.html#.VcAwxbOqqko

मनरेगा मजदूरी के लिए ग्रामीणों ने भरी हुंकार – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/bhadohi/bhadohi-hindi-news/nrega-wages-paid-to-the-villagers-shout-hindi-news/

एकलव्य की कहानी आज भी प्रासंगिक हर्ष मंदिर – राजस्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/eklavya-s-story-relevant-today-harsh-mandar-1272506.html

मॉनसून सत्र में रेवन्यू कोड पास कराने की तैयारी – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/politics/monsoon-season-to-prepare-for-the-revenue-code/articleshow/48334025.cms

न्यायतंत्र में बढ़ती खाई – हरिभूमि

http://www.haribhoomi.com/news/blog/growing-gap-in-indian-judiciary/28866.html

तार हटाने के लिए प्रदर्शन – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/chandauli/agitation-for-removal-0f-wire-hindi-news-1/

Please Watch:

Sikhs in India Untouched (in Punjab)

https://www.youtube.com/watch?v=PTv4JmeznnQ

दैनिक जागरण

पंचायती फरमान : युवक व किशोरी को बाल मुड़वा गांव में घुमाया

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लखनऊ। वाराणसी के बड़ागांव क्षेत्र में खाप पंचायत की तर्ज पर घर से भागे युवक व नाबालिग लड़की के बाल मुड़वाकर पूरे गांव में घुमाया गया। इस दौरान लोगों ने लड़की की पिटाई भी की। पुलिस ने युवक व लड़की के मामा समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अपहरण, दुराचार, मारपीट व पाक्सो की धाराओं के तहत स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज की है।

चार दिन पूर्व कोइराजपुर गांव की दलित बस्ती का युवक लालजी बस्ती की ही नाबालिग लड़की को भगा ले गया था। रविवार को दोनों घर पहुंचे तो लड़की के पिता व परिजन शिकायत लेकर युवक के घर पहुंचे। इस दौरान विवाद होने पर युवक के पक्ष के लोगो ने परिजनों को मारपीट कर भगा दिया।

विवाद गहराते देख बस्ती में बिरादरी की पंचायत बैठी, जहां पंचों ने फरमान जारी किया कि इस मामले में युवक व लड़की दोनों दोषी हैं। सजा मुकर्रर की गई कि दोनों को बाल मुड़वाकर बस्ती में घुमाया जाए ताकि फिर कोई ऐसी हरकत न कर सके। फरमान जारी होते बस्ती के लोगों ने नाई बुलाकर दोनो का बाल मुड़वाया और फिर उन्हें पूरी बस्ती में घुमाया गया।

फरमान जारी कराने वालों में लड़की का मामा भी शामिल रहा। इस बात से दुखी लड़की के पिता पुलिस चौकी पर कार्रवाई के लिए गए तो पुलिस ने भी उन्हें चौकी से भगा दिया। इसकी जानकारी होते ही बस्ती के कुछ लोग लड़की के पिता के पक्ष में लामबंद होकर स्थानीय थाने पहुंचे और घटना की बाबत तहरीर दी। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर भगाने वाले लालजी, उसके भाई रामजी, श्यामजी, उर्मिला व लड़की के मामा राजू को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बाल मुड़वाने की बात को स्वीकार किया, लेकिन उन्हें बस्ती में घुमाने से इनकार किया है।

दैनिक जागरण

ग्रामीणों ने की पुलिस के साथ मारपीट

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बल्लभगढ़ : गांव मुजैड़ी में एक शिकायत की जांच करने गई पुलिस टीम पर आठ-नौ लोगों ने हमला कर दिया और गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। घटना में आइएमटी चौकी इंचार्ज सहित तीन पुलिस कर्मी घायल हो गए। उनका सरकारी अस्पताल में उपचार किया गया है। पुलिस ने सरकारी काम-काज में बाधा पहुंचाने, मारपीट करने और हवा में गोली चलाने के आरोप में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

गांव मुजैड़ी निवासी श्यामवती दलित महिला ने रविवार की रात करीब आठ बजे थाना सदर की आइएमटी पुलिस चौकी में शिकायत की थी की गांव का निवासी सत्ते और उसके साथी उसे और उसके परिवार के साथ मारपीट कर रहे हैं। इस शिकायत के आधे घंटे बाद पुलिस टीम चौकी इंचार्ज रणधीर ¨सह के नेतृत्व में मौके पर जांच के लिए पहुंची। तब तक ग्रामीणों ने मामले को निबटा दिया था।

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इस खबर के बाद पुलिस वापस चौकी चली गई। पुलिस को आधे घंटे बाद इस महिला ने फिर से फोन पर बताया कि वे लोग दोबारा मारपीट कर रहे हैं। इस के बाद फिर मौके पर पुलिस पहुंची तो सत्ते और उसके सात-आठ साथियों ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। पुलिस की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए और डंडों से उन्हें चोट मारकर घायल कर दिया। इतना ही नहीं हमलावरों ने पुलिस टीम पर हवा में गोली भी चलाई। चौकी इंचार्ज के दोनों मोबाइल फोन गुम हो गए। पुलिस कर्मियों का घायल अवस्था में बल्लभगढ़ के सरकारी अस्पताल में उपचार कराया गया है।

पुलिस पर हमला करने वाले सत्ते सहित आठ-नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अभी सभी आरोपी फरार हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जल्दी ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दैनिक जागरण

वितरण में गड़बड़ी पर प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी

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बक्सर। स्थानीय प्रखंड कार्यालय पर सोमवार को कूपन वितरण में हुई भारी अनियमितता एवं राशन से वंचित करने का आरोप लगाते यहां पहुंचे सैकडों लोगों ने प्रखंड कार्यालय पर तालाबंदी कर हंगामा किया। इसको लेकर घंटों प्रखंड कार्यालय के बाहर अफरातफरी का माहौल कायम रहा। प्रखंड मे तालाबंदी का नेतृत्व प्रखंड प्रमुख अवनीश नारायण यादव ने किया।

इस दौरान प्रखंड कार्यालय में बैठे सभी कर्मियों को बाहर निकालकर तालाबंदी किया गया। हालांकि, इसकी सूचना पाकर कुछ ही देर बाद पहुंचे बीडीओ श्रीराम पासवान ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। जिसके बाद प्रखंड कार्यालय का ताला खुला और कर्मचारी व पदाधिकारी अपने कार्यों में लगे। यहां सैकडों की संख्या में पहुंचे दलित एवं महादलित समुदाय के लोगों का कहना था कि जो सक्षम लोग है। उसको राशन का लाभ दिया जा रहा है। जबकि सुबह खाने के बाद शाम को ¨चता करनेवाले लोगों को इससे वंचित किया गया है। आरोप है कुछ ऐसे लोग जिसे कूपन मिला भी है तो उन्हें चौगाई गांव के डीलरों द्वारा राशन नहीं दिया जा रहा है।

प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी करनेवाले लाभुकों का कहना है कि इसको लेकर पूर्व में कई बार बीडीओ एवं संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई। लेकिन, इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया गया। यहां पहुंची महिलाओं में लालती देवी, मनझारी देवी, जमुई देवी, चन्दामुनी देवी, कोशिला देवी, सरस्वती देवी, ललीता, जीरा, एवं मोनाकी देवी सहित कई लाभार्थियों का कहना है कि पूर्व में इनलोगों को लाल व पीला कार्ड विभाग द्वारा निर्गत किया गया है। इसके आधार पर इन परिजनों को राशन-किरासन भी मिलता था। शिकायत पर अधिकारियों द्वारा आश्वासन मिला कि वंचित सभी लोगों को राशन मिलेगा।

परन्तु आज तक नहीं मिला। कूपन नहीं मिलने के कारण इन वंचित लोगों को डीलरों द्वारा राशन-किरासन से वंचित रखा जाता है। प्रखंड प्रमुख ने बताया कि अधिकतर ऐसे भी परिवार है जिनके घरों का चूल्हा इसी के भरोसे जलता है। इस संबंध में बीडीओ श्रीराम पासवान ने बताया कि लोगों की शिकायत पर दो दिनों पूर्व ही कई पीडीएस दुकानों की जांच की गई और डीलरों को सख्?त हिदायत भी दी गई है। इन्होंने बताया कि जिसे कूपन मिला है। उसे अनाज का लाभ मिलेगा और जिसे कूपन नहीं मिला है उसे प्रखंड कार्यालय में उपलब्ध कूपन मुहैया कराया जायेगा।

नई दुनिया

बड़े हो गए हों और खाना ज्यादा खाते होंकहकर छात्रावास से निकाल दिया

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भितरवार। ‘तुम लोग पिछले तीन साल से छात्रावास में रह रहे हों और बड़े हो गए हों। इसलिए खाना भी ज्यादा खाते हो। इस वजह से तुम चारों को छात्रावास से बाहर निकाला जाता है।’ यह कहकर चार दलित छात्रों को अधीक्षक ने छात्रावास से निकाल दिया। चारों छात्रों ने इस मामले की शिकायत एसडीएम विजयराज से की। एसडीएम ने सोमवार को दो सदस्यीय टीम छात्रावास भेजी, जहां न तो छात्रावास अधीक्षक मिले और न ही छात्रों से संबंधित कोई रिकार्ड। टीम ने बच्चों के बयान लिए और प्रतिवेदन तैयार कर एसडीएम को सौंप दिया है।

भितरवार में आदिम जाति पिछड़ा वर्ग की ओर से शासकीय उत्कृष्ट अनुसूचित बालक छात्रावास संचालित है। वहां वर्तमान में 25 बच्चे पढ़ते हैं। छात्र अभिषेक पुत्र सतराम जाटव कक्षा 10, राहुल पुत्र सतराम जाटव कक्षा 9, अजय पुत्र सुरेश कक्षा 10 और जय सिंह पुत्र रामसिंह कक्षा 9 ने छात्रावास अधीक्षक विजय शर्मा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अनर्गल बातें करके बाहर निकाल दिया।

नहीं मिले अधीक्षक

एसडीएम विजयराज के निर्देश पर जांच टीम के सदस्य बीएसी अनिल शर्मा और मदन मोहन नामदेव सोमवार को छात्रावास पहुंचे। यहां केवल चपरासी ही मौके पर मिला। जब अधीक्षक के संबंध में जानकारी ली तो वह वहां नहीं मिले। जांच टीम के सदस्यों ने बताया कि मौके पर छात्रावास में रहने वाले बच्चों से संबंधित कोई भी रिकार्ड नहीं मिला है। हालांकि एक बार फिर से छात्रावास अधीक्षक से पूछताछ की जाएगी।

नहीं मिलता भोजन

छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चों ने टीम के सदस्यों को बताया कि अधीक्षक की ओर से मीनू के अनुसार खाना नहीं दिया जाता है। कई बार भूखे पेट ही सोना पड़ता है। पूर्व में भी शिकायत की गई थी लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।

वर्जन

नवीनी करण नहीं किया इसलिए निकाला

छात्रावास में रहने वाले चार बच्चों ने दस्तावेजों का नवीनीकरण नहीं कराया। अंतिम तारीख 5 जुलाई थी। इस कारण उन्हें निकाला गया है। जो आरोप छात्रों की ओर से लगाए जा रहे है, वह झूठे हैं।   -विजय शर्मा, छात्रावास अधीक्षक।

बच्चों के लिए बयान

एसडीएम के निर्देश पर सोमवार को छात्रावास पहुंचे, लेकिन वहां अधीक्षक नहीं मिले। मौके पर केवल चपरासी मिला है। बच्चों के बयान लिए गए है, जबकि बच्चों से संबंधित रिकार्ड मांगे गए, तो अधीक्षक न होने के चलते रिकार्ड उपलब्ध नहीं हो पाए।

बिंईग दलित

झाँसी में छुआछूत से पीड़ित दलितों की मदद को

सामने आया NGO ‘केवट

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उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से लगभग 20 किलोमीटर दूर रक्सा इलाके के बाजना गांव में रहने वाले दलितों की मदद के लिए लोग आगे आने लगे हैं। रविवार को दलितों की मदद के लिए एक समाजसेवी संस्था गांव पहुंची। स्‍थानीय लोगों ने पानी की छुआछूत के कारण उपजी पानी की समस्या को खत्म करने की मांग की। वहीं, चमराय टोला के नाम से जानी जाने वाली दलित बस्ती का नाम बदलने की भी मांग की। दलितों का कहना है कि यह जाति सूचक शब्द है, इसे हर हाल में बदला जाना चाहिए। “`

बता दें कि यह वही गांव है, जहां लोग छुआछूत जैसी समस्या का शिकार हैं। यहां दलित गांव के कुएं से पानी नहीं भर सकते। इससे गांव के दलित गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। रविवार को गांव में समाजसेवी संस्था ‘केवट’ मदद के लिए पहुंची और संस्‍था की संचालिका कंचन आहूजा ने दलितों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने पानी की समस्या को खत्म करने के लिए हैंडपंप लगवाने और कुआं खुदवाने का आश्वासन दिया। आहूजा ने कहा कि उनकी संस्था इस पर विचार करेगी और गांव को गोद भी ले सकती है। छुआछूत जैसी सामाजिक बीमारी से निपटने के लिए केवट संस्था गांव में कैंप लगाएगी। संस्था द्वारा लगाए जाने वाले इस कैंप में गांव के उच्च जाति के उन लोगों को भी शामिल किया जाएगा जो दलितों को अछूत मानते हैं।

बाजना की दलित बस्ती को चमराय टोला के नाम से जाना जाता है। दलितों ने गांव के नाम को बदले जाने की भी मांग की है। स्‍थानीय निवासी गनपत का कहना है कि यह जाति सूचक शब्द है। जाति सूचक शब्द एक तरह से गाली है, इसके बाद भी दलितों के इलाकों को आधिकारिक रूप से चमराय टोला के नाम से जाना जाता है। संस्था ने गांव की इन समस्याओं को खत्म करने का आश्वासन दिया है।

अमर उजाला

मनरेगा मजदूरी के लिए ग्रामीणों ने भरी हुंकार

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जन सहयोग मंच के बैनर तले सुरियावां और भदोही ब्लाक के छह गांवों के ग्रामीणों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मनरेगा मजदूरी के लिए आवाज बुलंद की। आरोप लगाया कि दो साल काम कराने के बाद उन्हें मजदूरी नहीं दी गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दलित और मुसहर बस्तियों में विकास के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा है। जिलाधिकारी को पत्रक देकर अविलंब कार्रवाई की मांग की।

सुरियावां ब्लाक के पूरे खुशहाल गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जाबकार्ड होने के बाद भी दो साल से गांव में मनरेगा का काम बंद चल रहा है। इससे मनरेगा मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। 
प्रदर्शन में सूर्यबाला देवी, ममता, कस्तूरी, प्रभावती, उर्मिला, सोना, शिवधनी पाल, रामसजीवन सहित कई लोग रहे। कौवापुर के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मजदूरी के लिए ग्राम पंचायत अधिकारी और रोजगार सेवक के पास गए, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। प्रदर्शन करने वालों में शैला देवी, संतरा देवी, राजकुमारी, हरगेन गौतम सहित कई लोग मौजूद रहे।

महुआपुर मुसहर बस्ती के लोगों ने आवास, पेयजल की व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन किया।  कहा कि बस्ती में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। प्रदर्शन करने वालों में नन्हेंलाल सरोज, सुलेमा, सोनी, रन्नो, रेखा, प्रेमा हित कई लोग रहे। भदोही ब्लाक के पिपरिस, माधोरामपुर, भिखारीपुर के दलितों ने आवास, जाबकार्ड की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में प्रमोद कुमार, प्रेमा देवी, सावित्री, उञषा देवी, प्यारी देवी, कैलाश  वनवासी, कमलेश, प्रेम, अनिल कुमार सरोज सहित दर्जनों लोग शामिल रहे। 

राजस्थान  पत्रिका

एकलव्य की कहानी आज भी प्रासंगिक हर्ष मंदर

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 श्रीगंगानगर. पूर्व आईएएस और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर का कहना है कि एकलव्य की कहानी प्राचीन तो है पर आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। वे सोमवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से श्रीआत्मवल्लभ जैन गल्र्स कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

हर्षमंदर ने कहा, द्रोणाचार्य ने एकलव्य का अंगूठा केवल इसी बात के लिए मांग लिया कि वह अर्जुन से अधिक निशानेबाज निकला। आज भी वही हाल है। दलित और गरीब के साथ आज भी वही व्यवहार किया जा रहा है। इन्हें आज भी छिपकर ही शिक्षा लेनी पड़ रही है। अपनी प्रतिभा से यदि कोई दलित शिक्षा ग्रहण कर लेता है तो संपन्न और उच्च जाति के लोगों को यह बात हजम नहीं होती।

आरटीई का इसलिए विरोध

हर्ष ने बताया कि जब आरटीई अधिनियम आया तो कुछ नामी निजी शिक्षण संस्थाओं ने सर्वोच्च न्यायालय में वकीलों की लंबी फेहरिस्त खड़ी कर दी। दलील ये दी कि अगर ये दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चे हमारे स्कूलों में दाखिल हो गए तो हमारे स्कूलों का शिक्षा का स्तर गिर जाएगा। वे आज भी एेसे बच्चों को उच्च वर्ग के साथ पढ़ाने को राजी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आधे-अधूरे अवसरों के बावजूद बेटियां हर परीक्षा में लड़कों से आगे हैं।

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में गैर बराबरी गहराई

कहा, वर्तमान शिक्षा व्यवस्था ने भेदभाव की खाई को पाटने का नहीं, गहराने का काम किया है। हालत ये कि आपका जन्म तय कर देगा कि आपकी शिक्षा कहां, कैसी और कितनी हो सकती है।

कॉलेज प्रशासन ने किया सम्मान

कार्यक्रम में श्रीआत्मवल्लभ जैन गल्र्स कॉलेज प्रबंध समिति अध्यक्ष कुंदनलाल बोरड़, सचिव नरेश जैन, प्रिंसिपल संजय अरोड़ा सहित अन्य स्टाफ ने हर्ष मंदर का स्वागत किया और कॉलेज की शैक्षणिक सहित सह शैक्षणिक गतिविधियों सहित छात्रवृत्ति की जानकारी भी दी।

और इधर, अनुपम धींगड़ा स्कूल को सराहा

इससे पहले पूर्व आईएएस हर्ष मंदर ने अनुपम धींगड़ा राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय का भी अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों के बीच दरी पर बैठकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस स्कूल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। हर्ष मंदर ने भामाशाह सुदर्शना के के हौसले की प्रशंसा करते हुए इस स्कूल को बचाने के लिए ‘पत्रिकाÓ की ओर से चलाई गई मुहिम पर भी प्रसन्नता जाहिर की। इस दौरान भामाशाह सुदर्शना धींगड़ा, प्रिंसिपल सहित समाजसेवी कालूराम मेघवाल, संयुक्त व्यापार मंडल के महामंत्री नरेश सेतिया आदि मौजूद थे।

बच्चों में बच्चे बन गए

हर्ष जब स्कूल की पहली कक्षा में पहुंचे तो बच्चों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। बच्चों की एेसी भावना देख वे अभिभूत हो गए और उनके साथ ही दरी पर बैठ गए। उन्होंने बच्चों से देर तक बातें की, पहाड़े भी सुने और मन लगाकर पढऩे की सीख दी।

नवभारत टाइम्स

मॉनसून सत्र में रेवन्यू कोड पास कराने की तैयारी

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कुछ ही महीनों में सूबे में नया रेवन्यू कोड लागू हो सकता है। इससे जमीन से जुड़े जमींदारी भू विनाश अधिनियम सहित 39 पुराने कानून खत्म हो जाएंगे। शासन की कोशिश है कि 14 अगस्त से प्रस्तावित विधानसभा के मॉनसून सत्र में ही इसे पास करा लिया जाए।

2006 में पास किए गए रेवन्यू कोड को खामियों का हवाला देकर अब तक लागू नहीं किया जा सका है। सरकार ने इसमें संशोधन के लिए एक कमिटी बनाई थी जिसने संशोधित एक्ट का ड्राफ्ट राजस्व परिषद को सौंप दिया है। यूपी राजस्व संहिता संशोधन एक्ट 2015 के जरिए रेवन्यू कोर्ड 2006 की पूरी सूरत बदल जाएगी। संशोधन विधेयक में आसामी किसानों और बंटाईदारों को मुआवजा देने के रास्ते तलाश गए हैं। इसके लिए बंटाईदारी को कानूनी जामा पहनाने का भी सुझाव है।

नायब तहसीलदार, कानूनगो के अधिकार, फैसलों के रिवीजन के अधिकार सहित कई प्रक्रिया बदली गई है। कमिटी ने 16 जुलाई को अपना ड्राफ्ट राजस्व परिषद को सौंपा था। इस सप्ताह राजस्व परिषद इसका परीक्षण करके शासन को भेज देगा। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ड्राफ्ट मिलते ही इसका परीक्षण कर कैबिनेट के लिए भेज दिया जाएगा जिससे मॉनसून सत्र में ही इसे सदन के पटल पर रख दिया जाए। संशोधन एक्ट के जरिए 50 से अधिक विवादित मसलों को सुलझाने की विधिक प्रक्रिया तैयार की गई है।

दलित बेच सकेंगे जमीन!

संशोधन एक्ट के जरिए सरकार दलितों की जमीन गैर दलितों को बेचने की प्रक्रिया को और आसान बनाने की तैयारी में है। कमिटी ने जो ड्राफ्ट सौंपा है उसमें इसकी सशर्त व्यवस्था की गई है। दलित के पास अगर सवा तीन एकड़ से कम जमीन है तो मौजूदा व्यवस्था में वह किसी गैर दलित को अपनी जमीन नहीं बेच सकता। संशोधित एक्ट में यह प्रस्ताव किया गया है कि तीन शर्तों के अधीन वह अपनी जमीन बेच सकेगा। अगर दलित का कोई वारिस नहीं बचा है, वह दूसरे राज्य में जाकर बस गया हो या परिवार का कोई सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो। इन तीनों ही स्थिति में डीएम की स्थिति से दलित को गैर दलित को जमीन बेचने की अनुमति दी जा सकती हैं। हालांकि अभी प्रस्ताव पर कैबिनेट और विधानसभा की मुहर लगनी है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि इस व्यवस्था से दलित को अपनी जमीन का बेहतर मूल्य मिलने में आसानी होगी। हालांकि दुरुपयोग की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।

हरिभूमि

न्यायतंत्र में बढ़ती खाई

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 देश में मृत्युदंड पर चल रही बहस के दौरान लॉ कमीशन के सहयोग से नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन का जिक्र करना जरूरी है। अपने किस्म के इस पहले अध्ययन से पता चलता है कि गंभीर अपराध के आरोपी अमीर लोग पैसे के बल पर नामी वकीलों की फौज खड़ी कर अक्सर बच जाते हैं जबकि निर्धन व्यक्ति को फांसी के फंदे पर झुला दिया जाता है।

उक्त अध्ययन से गत 15 साल में मौत की सजा प्राप्त करीब पौने चार हजार कैदियों के साक्षत्कार से प्राप्त आंकड़ों की जांच कर उनकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को खंगाला गया जिससे पता चला कि सजा-ए-मौत पाने वाले तीन चौथाई कैदी पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते हैं और 75 फीसदी आर्थिक तौर पर कमजोर हैं। आतंकवाद के आरोप में मृत्युदंड पाने वाले अपराधियों में 93.5 प्रतिशत दलित और अल्पसंख्यक हैं।

यहां याद दिलाना जरूरी है कि हमारे देश में आतंकवाद से ग्रस्त इलाकों को मोटे तौर पर तीन र्शेणी में बांटा जा सकता है। पहली कश्मीर घाटी से जुड़ी है, दूसरी उत्तर पूर्व के सूबों से संबंधित है और तीसरी का ताल्लुक माओवादी आन्दोलन की चपेट में आए सूबों से है। मृत्युदंड पाने वाले कैदियों की यह हकीकत जानकर तो लगता है कि हमारे देश में आतंकवाद के तार कहीं न कहीं सामाजिक-आर्थिक असमानता से भी जुड़े हैं।  

अध्ययन से निकले निष्कर्षों से यह भी पता चलता है कि मृत्युदंड पाने वाले 23 फीसदी अपराधी ऐसे हैं जिन्होंने कभी किसी स्कूल में कदम तक नहीं रखा जबकि शेष की शिक्षा भी सेकेंडरी से कम है। एक और दर्दनाक सच सामने आया है। कमजोर और गरीब तबके से जुड़े इन कैदियों को न तो अपने मुकदमे की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जाती है और न ही अपने वकील से मुलाकात का पर्याप्त अवसर मिलता है।

उन्हें अलग बैरक में रखा जाता है और किसी से मिलने की इजाजत नहीं दी जाती। इस कारण उनकी मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह भी पता चला है कि मात्र एक फीसदी कैदी ऐसे हैं जिनकी माली हालत योग्य वकील रखने की है। शेष 99 प्रतिशत तो अपना केस ‘राम भरोसे’ लड़ते हैं। इसी वजह से मृत्युदंड समाप्त करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। आज निचली अदालत में मामूली केस लड़ने में भी बहुत मोटा पैसा खर्च होता है।

न्याय पाना निरंतर महंगा होता जा रहा है। यदि केस खिंचकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाए तब तो लाखों- करोड़ों रुपये लगना तय है। नामी वकील एक दिन की पेशी की फीस लाखों रुपये लेते हैं। यह खर्च वहन करने की हैसियत मुट्ठी भर लोगों की ही है। जिस देश में करीब एक चौथाई आबादी कंगाली की रेखा से नीचे रहती हो और करोड़ों लोग दो जून की रोटी के जुगाड़ में दिन-रात खटते हों, वहां एक मुकदमा लड़ने पर लाखों रुपए व्यय करने की कल्पना कैसे की जा सकती है ?

यदि इस समस्या का तोड़ नहीं निकाला गया तो न्याय पाना केवल कुछ लोगों के बस में रह जाएगा। आज जिस आदमी की हैसियत मोल चुकाने की है वह कानून के शिकंजे से साफ बच जाता है और जो गरीब है वह मारा जाता है। पिछले 25 बरस में देश में जिस अनुपात में गरीब और अमीर वर्ग के बीच की खाई चौड़ी हुई है उसी अनुपात में कमजोर तबके की शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय व्यवस्था पर पकड़ कमजोर पड़ती गई है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के ताजा अध्ययन ने इस तथ्य की गंभीरता से तस्दीक की है।

अमर उजाला

तार हटाने के लिए प्रदर्शन

http://www.amarujala.com/news/city/chandauli/agitation-for-removal-0f-wire-hindi-news-1/

रैथा गांव की दलित बस्ती के निवासियों ने बस्ती के ऊपर से गए हाईटेंशन तार हटाने की मांग करते हुए सोमवार को  गांव में प्रदर्शन किया।

रविवार की रात एक तार टूट कर गिर गया था संयोग कि कोई घटना नहीं घटी। बिजली कर्मियों ने टूटे तार को ठीक किया और हाइटेंशन तार को हटवाने की बात अधिकारियों तक पहुंचवाने के आश्वासन के बाद बस्ती निवासी शांत हुए।

दलित बस्ती के उपर से हाईटेंशन तार गया है। रविवार की रात दशमी राम के घर  बाहर अजय अपने तीन भाइयों के साथ सोया हुआ था।रात में अचानक तेज हवा चलने पर हाईटेंशन तार टूट कर गिर गया।

संयोग था कि अजय और उसके भाई तार की चपेट में नहीं आए। इससे बस्ती में हड़कंप मच गया। सोमवार की सुबह बस्ती से ऊपर से गए तार को हटाने की मांग को लेकर बस्ती के लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दी। बाद मे बिजली विभाग के कर्मियों ने तार हटाया और उनकी मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया।

इस पर ग्रामीण शांत हुए। प्रदर्शन करने वालों में रमेश राम, दिलशेर, सोहन, बद्री, राधेश्याम, अजय, मुन्नी आदि रहे। 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra 

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