दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 02.08.15

बुन्देललखंड के इस गांव में दो वक्त की रोटी के लिए किसान बेच रहे हैं अपना खून – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/UP-dalit-farmers-selling-blood-for-their-families-in-bundelkhand-5070701-PHO.html

दलित महिला को निर्वस्त्र कर नाले में खड़ा किया, जूते चप्पल की माला पहनाई – भोपाल समाचार

http://www.bhopalsamachar.com/2014/12/blog-post_22.html#more

गड्ढे में उतराता मिला मां-बेटे का शव – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/sultanpur/sultanpur-hindi-news/the-bodies-of-a-mother-and-son-got-flot-hindi-news/

दलित दंपती को दबंगों ने लाठियों से पीटा, पति की मौत, पत्‍नी गंभीर – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/raisen-dalit-couple-beaten-killed-husband-wife-critical-439861

रंजिश में युवक को गोली से उड़ाया – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/sultanpur/sultanpur-crime-news/the-young-man-s-murder-hindi-news-3/

मथुरा के एक गाँव में 20 दलित परिवार 4 दिन से अपने घर नहीं जा पा रहे हैं! – बिंइग दलित

http://www.beingdalit.com/2015/08/dalit-familes-are-not-able-to-go-their-homes-in-mathura.html#.Vb2-HLOqqko

2400 दलित विद्यार्थियों की छूट गई पढ़ाई – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/punjab/amritsar-12680626.html

दलित स्टूडेंट्स ने किया हंगामा – इनेक्स्ट लाइव

http://inextlive.jagran.com/dalit-student-create-disturbance-on-ashok-rajpath-87151

दलित महादलितों की राज्य सरकार कर रही है उपेक्षा – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/munger-12678898.html

Please Watch :

Subaltern Studies: No Dalit Movement so No Dalit Question Part 1-4

https://www.youtube.com/watch?v=67m-UuI9268

दैनिक भास्कर

बुंदेलखंड के इस गांव में दो वक्त की रोटी के लिए किसान बेच रहे हैं अपना खून

http://www.bhaskar.com/news/UP-dalit-farmers-selling-blood-for-their-families-in-bundelkhand-5070701-PHO.html

 झांसी. झांसी से 65 किमी. दूर मऊरानीपुर के गांव बडागांव की आबादी लगभग पांच हजार है। इसमें से 75 फीसदी दलित किसान हैं, जो घर चलाने के लिए अपना खून बेचने पर मजबूर हैं। युवा हो या बुजुर्ग सभी अपनों का पेट भरने के लिए खून बेचकर दो वक्त की रोटी के लिए पैसा जुटा रहे हैं। एक किसान अब तक कम से कम पांच पर खून बेच चुका है। गरीबी और भूखमरी ने उन्हें इस कगार पर पहुंचा दिया है कि अब वो अपने खून का एक-एक कतरा बेचने को तैयार हैं।

बडागांव के रहने वाले दलित लाखन अहिरवार की उम्र लगभग 70 साल है। उनके मुताबिक, गरीबी की वजह से वो अब तक तीन बार अपना खून बेच चुके हैं। परिवार में जब कोई बीमार पड़ता है या अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है तो मजबूरी में खून बेचना ही पड़ता है। उन्होंने बताया कि एक बार बच्चे की तबियत खराब हो गई। उसे झांसी के एक अस्पताल में एडमिट करवाना पड़ा। वहां का बिल चुकाने के उनके पास पैसे नहीं थे। बारिश की वजह से फसल भी खराब हो चुकी थी। पैसों का इंतजाम करने के लिए उन्होंने वहीं के एक अस्पताल में जाकर अपना खून बेच दिया। इसके के लिए उन्हें 1500 रुपए मिले, लेकिन अब शरीर में बेचने के लिए खून भई नहीं बचा है।

 खून बेचकर कर रहे हैं जरूरतें पूरी

वहीं, गांव के ही किसान कन्ना राम ने बताया कि उन्होंने भी अस्पताल का बिल भरने के लिए अपना खून बेचा था। बच्चे के लिए इलाज में 1000 रुपए कम पड़ गए थे। वो काफी परेशान थे। तभी किसी ने खून बेचने का सुझाव दिया। उन्होंने फौरन अपना खून एक हजार रुपए में बेचकर बच्चे का इलाज पूरा करवाया। उन्होंने अपने बच्चे की जिंदगी की खातिर अब तक तीन बार खून बेचा है। वहीं कमलेश और गोपाल भी पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वो भी कई बार खून बेच चुके हैं।

भोपाल समाचार

दलित महिला को निर्वस्त्र कर नाले में खड़ा किया,

जूते चप्पल की माला पहनाई

http://www.bhopalsamachar.com/2014/12/blog-post_22.html#more

 भोपाल। बैतूल जिले के एक आदिवासी बाहुल्य गांव में इकलौते दलित परिवार की महिला को जादू-टोने के शक में निर्वस्त्रकर जूते-चप्पल की माला पहनाने का मामला सामने आया है। महिला को नाले में खड़ा रहने पर मजबूर किया गया। यह घटनाक्रम दो दिनों तक चला। इस जिले में 11 महीने के अंदर यह ऐसी चौथी घटना है।

betul rape peedit mahila

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के आमला ब्लाक के रायसेड़ा गांव की एक 45 वर्षीय दलित महिला को जादू-टोने के शक में निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का मामला सामने आया है। यह घटनाक्रम दो दिन चलता रहा। महिला को जूते-चप्पल की माला पहनाई और तीन घंटे तक नाले में भी खड़ा रखा गया।

महिला के यह अमानवीय बर्ताव करने के अलावा आधा दर्जन लोगों ने मारपीट भी की। बावजूद इसके यहां न तो पुलिस पहुंच सकी और न गांव का कोई व्यक्ति महिला के बचाव में आगे आया।

ऐसे आया मामला सामने…

शनिवार को महिला जैसे-तैसे एसपी ऑफिस पहुंची, तब उसे जिला अस्पताल में भर्ती करने के साथ पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। एसपी सुधीर वी लॉड ने दलित महिला की शिकायत पर आमला थाने के टीआई विक्रम रजक से मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। महिला जिला अस्पताल में भर्ती है।

पहले केवल छेड़छाड़ का मामला कायम किया

आमला टीआई विक्रम रजत ने महिला को प्रताडि़त करने के बावजूद केवल 354-बी यानि महिला के साथ छेड़छाड़ का मामला कायम किया है। हालांकि बाद में जब महिला को निर्वस्त्र कर जूते की माला पहनाकर घुमाने और नाले में खड़ा रखने की बात सामने आई, तब पुलिस ने सामूहिक रूप से योजना बनाकर प्रताडि़त करने की धारा 147 लगाई। हालांकि टीआई रजक का कहना है कि, मामला सामने आते ही पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी थी। एक आरोपी फरार है। उसे भी जल्द पकड़ लिया जाएगा।

जवान बेटी के साथ अकेली रहती है महिला

पीड़ित महिला ने बताया कि वह रायसेड़ा गांव में अपनी एक जवान बेटी के साथ अकेली रहती है। पति की मौत होने के बाद परिवार में वह और उसकी बेटी खेती-बाड़ी, जानवर सब संभालते हैं। वह कोई जादू-टोना नहीं जानती। पूरे आदिवासी गांव में उन्हीं का एक मात्र दलित परिवार है। गांव के लोग उसे परेशान करते हैं। गुरुवार की रात में गांव छह लोगों ने उसे घर में घुसकर धमकी दी और मारपीट की। इसके बाद शुक्रवार को घर से निकालकर शरीर के कपड़े उतार दिए। शरीर पर केवल अंडरवियर छोड़ा और गांव में घुमाया। बाद में मंदिर ले जाकर कसम भी खिलाई। इसके बाद तीन घंटे तक गांव के नाले के पानी में खड़ा रखा। इसके बाद उसे छोड़ा गया। महिला के मुताबिक, उसकी किसी से कोई पुरानी रंजिश भी नहीं है।

एक आरोपी फरार, पांच गिरफ्तार

आमला थाना पुलिस ने इस घटनाक्रम से जुड़े पांच आरोपी लक्ष्मण, सरजेराव, प्रेम, मन्ना, विनोद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि एक आरोपी दया फरार है। आमला पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

जिले में महिला प्रताडऩा की चौथी घटना

जिले में महिलाओं को प्रताडि़त करने की 11 माह में  चाैथी घटना है। इसके बावजूद न तो पुलिस ने मामलों में कोई कदम उठाया और नहीं महिला बाल विकास विभाग की महिला संरक्षण समिति ने गांव में जागरूकता के लिए कोई कदम उठाया। महिला संरक्षा अभियान केवल कागजों में चल रहा है। इससे पहले रानीपुर में एक युवती को गले में चक्की पहनाकर घुमाने, दो युवतियों के बाल काटने समेत अन्य घटनाएं जिले में हो चुकी हैं।

अमर उजाला

गड्ढे में उतराता मिला मां-बेटे का शव

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बेदूपारा गांव के पास गड्ढे में शनिवार दोपहर एक महिला और बच्चे का शव पाया गया। शवों की शिनाख्त परिवारीजनों ने मां और बेटे के रूप में की है। एक दिन पूर्व ही रेल ट्रैक पर मृतका की मासूम बच्ची का भी शव पाया गया था। पुलिस प्रथम दृष्टया खुदकुशी का मामला मान रही है।

लंभुआ कोतवाली क्षेत्र के ढेलहा गांव निवासी दलित अमरनाथ की पत्नी पुष्पा (28) बेटे अनुज (8) और गौरी (5) के साथ ससुर मिठाईलाल व ननद के घर में रहती थी, जबकि पति अमरनाथ भाई अमरजीत, अमृतलाल व रोहित के साथ दिल्ली में मजदूरी करता है। शुक्रवार दोपहर पुष्पा दोनों बच्चों के साथ दवा कराने के बात कह घर से निकली थी। 

देर शाम तक तीनों जब घर नहीं पहुंचे तो परिवारीजनों ने खोजबीन शुरू की। देर शाम बेदूपारा गांव के पास सुल्तानपुर-जफराबाद रेलखंड पर एक मासूम बच्ची का क्षत-विक्षत शव पाया गया था। आशंका जताई जा रही थी कि मासूम की किसी ट्रेन से गिरकर मौत हुई है। पुलिस शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त में जुटी थी। 

शनिवार दोपहर बेदूपारा गांव के बाहर बरसात के पानी से भरे गड्ढे में ग्रामीणों ने एक महिला और बच्चे का शव उतराता देखा। पुलिस ने दोनों शवों को बाहर निकाला। लोगों की भीड़ में किसी व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार दोपहर से ढेलहा गांव से एक महिला दो बच्चों के साथ लापता है।

पुलिस ने ढेलहा गांव प्रधान को मिठाईलाल के घर वालों को सूचित करने के लिए भेजा। मिठाईलाल ने शव की शिनाख्त पुष्पा और अनुज के रूप में की। थाने जाकर मिठाईलाल ने शुक्रवार को रेल ट्रैक पर मिली बच्ची के शव की पहचान गौरी के रूप में किया। प्रभारी कोतवाल हरिशंकर तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या मामला खुदकुशी का प्रतीत हो रहा है।

खुदकुशी की आशंका

बेदूपारा गांव के बाहर पानी से भरे गड्ढे में मिला अनुज का गला पुष्पा के साड़ी के पल्लू से बंधा था। ग्रामीणों की मानें तो संभवत: पुष्पा ने बेटी को रेल ट्रैक पर ट्रेन के सामने फेंकने के बाद बेटे के गले में फंदा डालकर पानी में कूद गई जिससे दोनों की मौत हो गई।

नई दुनिया

दलित दंपती को दबंगों ने लाठियों से पीटा, पति की मौत, पत्‍नी गंभीर

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जिले के बाग पिपरिया में राजीनामा न करने से गुस्साए दबंगों ने एक दलित पति-पत्नी को पूरे गांव के सामने आंखों में मिर्च झोंककर एक घंटे तक लाठियों से पीटा। इसमें पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पत्नी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दबंगों ने पूरे गांव के सामने दलित दंपति को पीटा लेकिन कोई भी उन्हें बचाने आगे नहीं आया।

मारपीट करने वाले दबंग, दलित परिवार पर पुराने न्यायालयीन केस को वापस लेने का दबाव बना रहे थे। मालूम हो कि जब दलित परिवार पुराने मामले में राजीनामा के लिए तैयार नहीं हुआ तो दबंगों ने हत्या की घटना से एक दिन पहले उस परिवार के एक युवक को पीटा। इसकी रिपोर्ट भी दलित परिवार ने बरेली थाने में दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने उसे भी गंभीरता से नहीं लिया था।

ग्राम बाग पिपरिया निवासी 35 वर्षीय मुन्‍नालाल धोबी मजदूरी के लिए बरेली जा रहा था। तभी गांव के बस स्टापॅ पर गुड्डू एवं पप्पू धाकड़ पहुंच गए। उन्होंने मुन्‍नालाल की आंखों में मिर्ची डाली और उसे बाइक से घसीटते हुए गांव ले आए। जहां गांव के लोगों के सामने दबंगों ने उसे लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान बीच बचाव करने पहुंची उसकी पत्नी सुशील की आंख में भी दबंगों ने मिर्च झोंक दी। फिर भी वह नहीं मानी और अपने पति को बचाने दबंगों से उलझ गई। इस पर दबंगों ने उसे भी पीटना शुरू कर दिया। पति का तब तक पीटा, जब तक कि उसने दम नहीं तोड़ दिया।

दलित की पत्नी को भी मरणासन्न् कर दिया। घटना के बाद देरी से मौके पर पहुंचे बरेली टीआई मनोज सिंह ने बताया कि दंपति को पीटने वाले गुड्डू एवं पप्पू धाकड़ के खिलाफ धारा 302, 294, 506, 341 एवं 34 के तहत केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल दोनों फरार हैं, उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीण बने रहे तमाशबीन, दबंग बन गए हैवान: 

बाग पिपरिया में दबंगों ने खुलेआम गांव में एक घंटे आतंक मचाया। मारपीट करने वाले दोनों सगे भाई गुड्डु और पप्पू ने फिल्मी स्टाइल में बस स्टाप से मुन्‍नालाल को खींचा और बाइक से घसीटकर गांव लाए। यहां पीटना शुरू कर दिया। 8 बजे से शुरू हुई मारपीट करीब 1 घंटे तक चलती रही। इस दौरान गांव के लोग तमाशबीन बने रहे। लेकिन कोई भी दंपति को बचाने आगे नहीं आया। दबंगों का इस तरह खुलेआम आतंक मचाना पुलिस पर सवाल खड़े कर रहा है।

अमर उजाला

रंजिश में युवक को गोली से उड़ाया

http://www.amarujala.com/news/city/sultanpur/sultanpur-crime-news/the-young-man-s-murder-hindi-news-3/

छोटे भाई के साथ छप्पर के मकान में लेटे युवक की शुक्रवार देर रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। घटना के पीछे रंजिश बताई जा रही है। पुलिस दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। मामला गोसाईगंज थाना क्षेत्र के अंगनाकोल गांव से जुड़ा है।

गांव निवासी दलित गुड्डू (30) पुत्र स्व. रामबख्श और उसका छोटा भाई लालजी शुक्रवार की रात भोजन करने के बाद छप्पर के मकान में सो रहे थे। रात करीब 12 बजे अचानक गोली की आवाज सुनाई पड़ी तो लालजी तख्त से उठकर बड़े भाई गुड्डू के पास पहुंचा। लालजी ने कुछ लोगों को भागते हुए देखा। गुड्डू के सीने में गोली लगी थी और वह लहूलुहान हालत में मृत पड़ा था। लालजी ने सूचना पुलिस को दी। 

इंस्पेक्टर आरपी शाही पुलिस टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने मृतक के भाई श्याम बहादुर की तहरीर पर गांव के ही कल्लू पुत्र सुखदेव के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी है। घटना के पीछे रंजिश बताई जा रही है।

अंगनाकोल निवासी गुड्डू का गांव के ही कल्लू से तीन-चार दिन पूर्व किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। गुड्डू ने कल्लू को तीन-चार थप्पड़ मार दिया था। इसे लेकर कल्लू आग बबूला था। मौका पाकर कल्लू ने गुड्डू की गोली मारकर हत्या कर दी।

गुड्डू के पिता राम बक्स की पांच माह पूर्व मौत हो गई थी। गुड्डू परिवार में सबसे बड़ा था, लिहाजा उस पर मां जगरानी, पत्नी कंचन, चार वर्षीय बेटी रोशनी, एक वर्षीय बेटे अर्जुन के साथ ही भाइयों की जिम्मेदारी थी। वह मजदूरी कर परिवार पालता था। शुक्रवार रात परिवार के मुखिया की हत्या से मासूम बच्चों के साथ ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

बिंइग दलित

मथुरा के एक गाँव में 20 दलित परिवार

4 दिन से अपने घर नहीं जा पा रहे हैं!

http://www.beingdalit.com/2015/08/dalit-familes-are-not-able-to-go-their-homes-in-mathura.html#.Vb2-HLOqqko

28 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के एक गाँव परखम में 12 साल की लड़की की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतक लड़की के गांववालों ने आरोपी दो दलित युवको ललुआ एवं सोनू वाल्मीकि के घर पर धावा बोल उन्हें बुरी तरह पीटा जिससे ललुआ की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि सोनू को आगरा के एक हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया हैं। घटना के बाद से परखम गांव की दलित बस्ती में सन्नाटा पसरा है।

एक अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस घटना के बाद गांव के अन्य दलित परिवारों में डर का आलम इस कदर था कि तब से करीब 20 दलित परिवार गांव छोड़ चुके हैं। वहीं परखम रेलवे स्टेशन जहां पर आखिरी बार ललुआ को मृत लड़की लाली के साथ देखा गया था अब सुरक्षा के मद्देनजर छावनी में तब्दील हो चुका है। 

बीती 28 जुलाई को मृत लड़की के गांववालों (ठाकुर जाति) ने आरोपी दलित युवक ललुआ उर्फ श्याम के घर पर धावा बोल दिया। आरोप है कि ललुआ ने कुछ दिनों पहले एक ऊंची जाति की लड़की की रेप करने के बाद हत्या कर शव को रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया था। परखम रेलवे स्टेशन गांव को दो हिस्सों में बांटता है जिसके एक छोर पर ठाकुर रहते हैं तो वहीं दूसरे छोर पर दलित परिवार रहते हैं। लेकिन इस घटना के बाद से दलित बस्ती में रहस्यमयी सन्नाटा पसरा है।

दलित बस्ती के लोग घटना के 4 दिन बाद भी अपने घरो को वापस आने से डर रहे हैं। ठाकुर जाती की लोगो का कहना हैं की सोनू वाल्मीकि गाँव  में वापस चाहिए, बाकी लोगो के वापस आने से उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं हैं। 

दैनिक जागरण

2400 दलित विद्यार्थियों की छूट गई पढ़ाई

http://www.jagran.com/punjab/amritsar-12680626.html

अमृतसर : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर राजकुमार वेरका ने पंजाब व केंद्र सरकार पर दलित छात्रों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब के विश्वविद्यालयों व कालेजों में दलित छात्रों से जबरन फीस वसूले जा रहे हैं। इसके कारण पंजाब में करीब 2400 विद्यार्थियों की पढ़ाई छूट गई है। उन्होंने इस मामले में पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर सात दिनों में जबरन फीस वसूली बंद कराने के निर्देश जारी किये हैं, वहीं फीस वसूलने वाले विश्वविद्यालय व कालेजों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करवाने का निर्देश भी दिया है।

सर्किट हाउस में दलित विद्यार्थियों की मुश्किलें सुनने के बाद डा. वेरका ने कहा कि कानूनन पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के तहत दलित छात्रों से फीस वसूल नहीं की जा सकती। इस स्कीम के तहत केंद्र सरकार सौ फीसद फीस देती है। पंजाब केमुख्यमंत्री कह रहे हैं कि केंद्र उन्हें स्कालरशिप का पैसा नहीं दे रही, जबकि केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि पंजाब सरकार को 70 फीसद राशि जारी की जा चुकी है। केंद्र व राज्य के बीच दलित छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नर को सर्कुलर जारी किया गया है कि कोई भी कॉलेज और यूनिवर्सिटी किसी दलित से फीस वसूल न करे। अगर फीस वसूल की गयी है तो उसे वापस किया जाये। उन्होंने नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि अगर सात दिनों में फीस वसूली बंद न हुई और वापस न की गई तो कालेजों व विश्वविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि आयोग के पास पूरे पंजाब से दलित छात्रों की शिकायतें आ रही हैं कि उनके कॉलेज या यूनिवर्सिटी से फीस की एडवास माग जबरन की जा रही है, ये सिर्फ इसलिए है कि पंजाब सरकार कॉलेज या यूनिवर्सिटी को कोई आश्वासन नहीं दे रही है, जबकि नियम यह है कि राज्य सरकार पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के तहत कॉलेज व यूनिवर्सिटी को अपनी तरफ से फीस अदा करेगी या फिर इसकी जिम्मेवारी लेगी। बाद में राज्य सरकार केंद्र से फीस क्लेम करती है।

छात्र लाचार, केंद्र व राज्य के बीच हो रहा पत्राचार

डॉक्टर वेरका ने कहा कि दलित छात्र लाचार हैं, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व केंद्रीय सामाजिक सुरक्षा मंत्री थावर चंद गहलोत के बीच पत्राचार ही हो रहा है। इससे साफ है कि केंद्र और राज्य सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं। बादल ने अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री को लिख कर 2014-15 में पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप स्कीम के 245 करोड़ की बकाया राशि की माग की है और अलग से 2015-16 के लिए 527. 68 करोड़ की माग की है। केंद्रीय मंत्री गहलोत ने बादल को पत्र लिख कर स्पष्ट कहा है कि पंजाब को पहले ही उनके हिस्से का 376 करोड़ जारी कर दिया गया है। 2015-16 के लिए पहली किश्त के तौर पर केंद्र सरकार ने पंजाब को 49.03 करोड़ जारी कर दिए गए हैं। पंजाब द्वारा जो अधिक फंड की माग की जा रही है इस मुद्दे को वित्त मंत्रालय के सामने रखकर बात की जाएगी।

इनेक्स्ट लाइव

दलित स्टूडेंट्स ने किया हंगामा

http://inextlive.jagran.com/dalit-student-create-disturbance-on-ashok-rajpath-87151

इंडियन स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले दलित स्टूडेंट्स ने शनिवार को अशोक राजपथ पर जमकर हंगामा किया. महेंद्रू में करीब दो बजे अशोक राजपथ को जाम कर दिया. इसके बाद टायर जलाकर आगजनी की. महेन्द्रू स्थित गवर्नमेंट वेलफेयर हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स शामिल थे. हंगामा व प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट्स ने स्टेट गवर्नमेंट और पुलिस-एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ जमकर आग उगले. गवर्नमेंट के विरोध में नारेबाजी की. प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स बिहार में दलितों पर हो रहे अत्याचार का विरोध कर रहे थे.

लीड कर रहे इसवा के नेशनल प्रेसिडेंट अमर आजाद के अनुसार खगडि़या के शिरोमणि गांव में दलितों की बेरहमी से पिटाई की गई. साथ ही मजदूरी मांगने पर नवादा में दलितों का हुक्का-पानी गांव में बंद कर दिया गया. दो महीने पहले सीतामढ़ी के वेलफेयर हॉस्टल में दो दलित स्टूडेंट्स को गोली मार दी गई थी. इन सभी घटनाओं का विरोध किया गया. स्टूडेंट्स पिछले सात महीने में दलितों पर अत्याचार करने वालों को गिरफ्तार कर कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे.

परेशान रहे पटनाइट्स

दो घंटे बाद शाम चार बजे वेलफेयर हॉस्टल के स्टूडेंट्स अशोक राजपथ पर हंगामा व विरोध प्रदर्शन खत्म किया. दो घंटे तक जाम में पटनाइट्स परेशान रहे. गांधी मैदान से गाय घाट की ओर जाने वाली ऑटो की लंबी लाइन लग गई. दूसरी ओर गाय घाट से गांधी मैदान जाने वाली गाडि़यां खड़ी रही.

फंसे रहे स्कूली बच्चे

जाम में स्कूली बच्चे भी फंसे रहे. स्कूल बसों में बच्चे भूखे-प्यासे घर पहुंचने का इंतजार करते रहे. हंगामा-प्रदर्शन करने वाले दलित स्टूडेंट्स अपने में व्यस्त थे. जाम में फंसे स्कूली बच्चों पर जरा भी तरस नहीं आया. अपनी पॉलिटिकल गोटी खेलने के चक्कर में दो घंटे तक मासूमों को भूखे-प्यासे छटपटाने के लिए छोड़ दिया.

लेट से पहुंची पुलिस

प्रदर्शन स्थल से चंद कदम दूर सुलतानगंज थाना है. खास बात ये है कि पुलिस को पहुंचने में काफी समय लग गया. परेशान पटनाइट्स से पुलिस को कोई सरोकार नहीं दिखा. कोरम पूरा करने के लिए पुलिस अंत समय में पहुंची और कार्रवाई करने की जगह समझा-बुझाकर सभी को हटाया.

दैनिक जागरण

दलित महादलितों की राज्य सरकार कर रही है उपेक्षा

http://www.jagran.com/bihar/munger-12678898.html

मुंगेर। अरगड़ा रोड इंदिरा आवास के पास रविश कुमार मल्लिक के नेतृत्व में दलित सेना की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता दिलीप राउत ने की। इस बैठक के मुख्य अतिथि दलित सेना के जिला उपाध्यक्ष प्रमोद पासवान थे। प्रमोद पासवान ने कहा कि विधान सभा चुनाव को देखते हुए दलित, महादलित, अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोग एकजुट हो जाएं और विकास का झूठा ढोल पीटने वाले वर्तमान राज्य सरकार के मुखिया नीतीश कुमार को सरकार से हटाएं। प्रमोद पासवान ने वर्तमान सरकार का विरोध करते हुए कहा कि बेटवन बजार अरगड़ा रोड में जो कॉलोनी है उसकी स्थिति जर्जर और नरकीय है।

यहां जो नगर निगम के क्वाटर हैं उनकी हालत जर्जर हो चुकी है। स्थिति यह है कि कभी भी मकान गिर सकती है। लोग भयभीत होकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अभी भी इस बस्ती के बहुतायत लोगो के वोटर आईकार्ड, बीपीएल कार्ड आदि नहीं बना है। जिला सचिव कृष्णा नंद राउत ने कहा कि इस महादलित बस्ती में एक मैदान है। इसमें कचरों का अंबार लगा रहता है। अगर इसे साफ कराकर पार्क बना दिया जाए तो महादलित परिवार के बच्चों को खेलने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

जिला प्रशासन के कोई भी अधिकारी इस ओर देखना भी ठीन नहीं समझते हैं। वहीं संगठन सचिव दिलीप राउत एवं राजीव राउत ने कहा कि दलित व महादलित के मान सम्मान की रक्षा के लिए संगठन की मजबूती के लिए ज्याद से ज्यादा लोगों को जोड़ना होगा। बैठक में भरत राउत, तारा राउत, अशोक मांझी, पंकज राउत, विनय राउत, ज्वाला राउत, सुनील कुमार मल्लिक, कारू राउत, भिखारी मांझी, उमेश मांझी ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की। वहीं शशि राउत, रतन राउत, अमर राउत, संगठन सचिव अमरनाथ राउत आदि ने बैठक को संबोधित किया।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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