दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 27.07.15

इटावा में अंतरजातीय प्रेम-प्रसंग के चक्कर में दबंगों ने की दलित पिता-पुत्र की हत्या – बिंइग दलित

http://www.beingdalit.com/2015/07/father-son-killed-for-honour-in-a-love-affair-case-in-etawh.html?spref=fb#.VbWho7Oqqko

नाबालिग के अपरहण व दुष्कर्म के आरोप में युवक को जेल – संजीवनी टुडे

http://www.sanjeevnitoday.com/newsdetail/Aprhn-and-youth-prison-on-charges-of-rape-of-a-minor/27-07-2015

युवती को सोते हुए किडनैप किया, रेप के बाद फेंका – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/other-news/kidnap-girl-was-asleep-thrown-after-rape/articleshow/48228361.cms

नोटों के मकड जाल में फंसे दर्जनों परिवार – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/haryana/rohtak-12654236.html

बुंदेलखंड: दलितों के गांव में 4 साल से है अंधेरा न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/dalits-are-divested-power-supply-in-jhansi-uttar-pradesh-499075.html

मानदेय से किया 30 परिवारों के घरों का अंधेरा दूरदैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-datia-news-021505-2334288-NOR.html

एकजुट रहे तो और बेहतर होंगे हालात – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/news/state-12654852.html

बाबा साहेब के रास्ते पर चलने की अपील – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/news/state-12654085.html

छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती मनाई गई – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/sonebhadra/chhatrapati-shahugi-maharaj-s-birth-anniversary-was-celebrated-hindi-news/

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति का जुलूस प्रदर्शन दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/saharanpur-12653803.html

संगठन मजबूती को लेकर दलित सेना की बैठक – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/munger-12652833.html

फिर से चलाई जाए गंगानगर एक्सप्रेस – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-12652062.html

पुस्तकायन : समन्वय का सेतु – जनसत्ता

http://www.jansatta.com/sunday-column/jansatta-sunday-edition-book-review-tulsi-aur-gandhi/33446/

Please Watch:

National Convention of Scavenger Community on Education- 02

https://www.youtube.com/watch?v=1uqIHPdsR9Q

बिंइग दलित

इटावा में अंतरजातीय प्रेम-प्रसंग के चक्कर में दबंगों ने की

दलित पिता-पुत्र की हत्या

http://www.beingdalit.com/2015/07/father-son-killed-for-honour-in-a-love-affair-case-in-etawh.html?spref=fb#.VbWho7Oqqko

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में कुछ दबंग लोगों ने एक दलित बाप−बेटे को ट्रैक्टर से कुचल कर मार डाला है। यह आरोप बरेली में तैनात सेल्स टैक्स के ज्वाइंट कमिश्नर कृष्ण प्रताप सिंह ने लगाया है। उनका कहना है कि उनके भाई तुलसी राम और भतीजे सुधीर कुमार जाटव को गांव के दबंग लोगों ने बस इसलिए मार डाला कि उसका किसी लड़की से प्रेम था। यह घटना 11 जुलाई को घटित हुई।

यह घटना उद्धनपुरा गांव की है। उल्लेखनीय है कि ग्राम निवासी तुलसी राम अपने पुत्र सुधीर कुमार के साथ खेत पर काम कर रहे थे। तभी गांव का एक दबंग परिवार (ठाकुर जाति) आया और उनसे मारपीट की। उसके बाद ट्रैक्टर लाकर दोनों को ट्रैक्टर के नीचे लिटाकर कुचल डाला। दबंगों ने उनके ऊपर कई बार ट्रैक्टर चढ़ाया। तुलसीराम की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी जबकि पुलिस सुधीर कुमार को सैफई अस्पताल ले गए जहां उसे बचाया नहीं जा सका। हालांकि घरवालों का आरोप यहां तक है कि पुलिस उसे अस्पताल ले ही नहीं गई।

इटावा मुलायम सिंह यादव का गृह जिला है और इस घटना ने फिर से उत्तर प्रदेश की कानून−व्ववस्था के हाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना पर कहा है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

घटना के पीछे प्रेम-प्रसंग का मामला बताया जा रहा है। ठाकुर जाति की लड़की और दलित जाति के लड़के बीच प्रेम प्रसंग होने से लड़की पक्ष के लोगों ने 24 घंटे पहले जान से मारने की धमकी दी थी। जिस लड़के से प्रेम-प्रसंग चल रहा था वह फरीदाबाद चला गया था। लड़की की शादी 5 माह पूर्व भिंड जिले में हुई थी। फिर भी उनका प्रेम प्रसंग जारी था।

संजीवनी टुडे

नाबालिग के अपरहण व दुष्कर्म के आरोप में युवक को जेल

http://www.sanjeevnitoday.com/newsdetail/Aprhn-and-youth-prison-on-charges-of-rape-of-a-minor/27-07-2015

 नरसिंहपुर। गोटेगांव थाना क्षेत्र की झोंतेश्वर चौकी अंतर्गत ग्राम श्रीनगर में एक नाबालिग किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया है। जानकारी के मुताबिक ग्राम श्रीनगर की उक्त 16 वर्षीय दलित समाज की बालिका का गांव के ही एक युवक विवेक पिता महेश चौधरी 20 वर्ष निवासी श्रीनगर के साथ कथित तौर पर प्रेम प्रसंग चल रहा था। जिसकी भनक लड़की के परिवार वालों को भी थी।

शनिवार को दोपहर लगभग 12 बजे बालिका अचानक अपने घर से गायब हो गयी, तो उसका पिता सीधे आरोपी विवेक चौधरी के घर पहुंच गया। उसे अपनी लड़की आरोपी के घर के आंगन में आरोपी के साथ मिल गयी। बताया गया है कि दोनों भागने की फिराक में थे। इसके बाद किशोरी ने अपने पिता के साथ झोंतेश्वर चौकी पहुंचकर आरोपी विवेक चौधरी के विरूद्ध अपहरण व दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया।

झोंतेश्ववर चौकी प्रभारी कु. आकांक्षा शर्मा ने बताया कि आरोपी विवेक चौधरी के विरूद्ध धारा 363, 366, 376 आईपीसी के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय में पेश किये जाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। किशोरी ने पुलिस को जानकारी दी थी कि आरोपी विवेक चौधरी से उसकी पिछले 10 माह से जान पहचान है। इस दौरान विवेक चौधरी ने उसका दैहिक शोषण भी किया।

नवभारत टाइम्स

युवती को सोते हुए किडनैप किया, रेप के बाद फेंका

http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/other-news/kidnap-girl-was-asleep-thrown-after-rape/articleshow/48228361.cms

कानपुर देहात जिले के भोगनीपुर में शनिवार देर रात दबंगों ने घर में सो रही दलित युवती को किडनैप कर लिया। किसी अनजान जगह पर ले जाकर गैंग रेप करने के बाद रविवार सुबह उसे खेत में फेंक दिया गया। गंभीर हालत में युवती को हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। पुलिस ने काफी आनाकानी के बाद रिपोर्ट लिखी। भोगनीपुर एसओ अंबरीश यादव के मुताबिक, दोनों आरोपितों की तलाश की जा रही है।

गुरगांव में रहने वाले दलित किसान के परिवार के सभी लोग शनिवार रात घर के बाहर सो रहे थे। बारिश होने पर सभी घर के अलग-अलग हिस्सो में सो गए। आरोप है कि इस बीच गांव का प्रवीण गौतम और रजनीश घर में घुसे और नशीली चीज सुंघाकर युवती (18) को अपने साथ ले गए। घर के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। रात भर उससे गैंगरेप करने के बाद सुबह खेत में फेंक दिया। तड़के नींद खुलने पर परिवार के लोगों ने उसे तलाशा तो वह नहीं मिली। खेत में दर्द से बेहाल युवती की चीखें सुनकर ग्रामीणों ने उसे हॉस्पिटल भेजा। परिवारीजनों की काफी कोशिशों के बावजूद भोगनीपुर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। इसके बाद मामला आईजी जोन तक पहुंचा। वहां से आदेश के बाद पुलिस ने प्रवीण गौतम और एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट लिखी।

दैनिक जागरण

नोटों के मकड जाल में फंसे दर्जनों परिवार

http://www.jagran.com/haryana/rohtak-12654236.html

रोहतक : सूदखोरों के जाल में फंसे जवाहर नगर के परिवार का यह कोई बिरला मामला नहीं है। शहर के दर्जनों परिवार नोटों के गोरखधंधे के मकड•ाल में फंसे हुए हैं। विडंबना यह है कि कई लोगों के शहर से पलायन करने और कुछ के परेशान होकर जान गंवाने की घटना के बाद भी पुलिस-प्रशासन गली मोहल्ले में दफ्तर खोलकर बैठे इन कथित फाइनेंसस पर लगाम नहीं कस पाया है। इसके चलते इनका आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

कर्ज लेता है एक, चंगुल में फंसता है परिवार

महंगाई, बेरोजगारी और आसानी से रुपये मिलने का जरिया। इन तीनों परिस्थितियों का तालमेल किसी भी व्यक्ति को सूदखोरी के जाल में फंसा देता है। महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और बेरोजगार के लिए इससे पार पाने के लिए किसी न किसी दिन कथित फाइनेंसर्स का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। अगर कोई परिस्थितियां वश कथित फाइनेंसर के चंगुल में फंस जाए, तो इनके चंगुल से निकलना आसान नहीं होता। अगर, कर्ज लेने वाला व्यक्ति सूद समेत रुपये वापस नहीं कर पाता, तो फाइनेंसर उसके परिवार के लोगों पर तकादा करने लगते हैं।

रुपये न मिलने पर करते हैं बेइज्जत

अगर मोटे ब्याज और दिए गया कर्ज चुकाने पर में कर्जदार व उसका परिवार आनाकानी करता है, तो कथित फाइनेंसर उसकी बदनामी शुरू कर देते हैं। आए दिन घर व प्रतिष्ठान पर पहुंचकर अभद्रता और मारपीट करने लगते हैं। इससे तंग आकर कई युवक व उनका परिवार शहर से पलायन कर चुके हैं।

अपराध बढ़ोतरी का कारण बनी सूदखोरी

कथित फाइनेंसर का कर्ज मेहनत और ईमानदारी की कमाई से चुकाना बेहद मुश्किल है, क्योंकि यह दिए गए रुपयों पर मोटा ब्याज व पेनल्टी लगाते हैं। इसके चलते इनके चंगुल में फंसे लोग कई बार अपराध करने पर विवश हो जाते हैं। क्षेत्र में अपराध बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण भी सूदखोरी ही है।

व्यापारी उठा चुके हैं पाबंदी की मांग

एक वर्ष पूर्व सर्राफा बाजार में सहगल ज्वेलर्स में हुई लूट की वारदात के बाद पुलिस और व्यापारियों की अपराध पर लगाम के लिए बैठक हुई थी। सर्किट हाउस में हुई बैठक में पुलिस ने अपराध व अपराधियों पर लगाम के संबंध में व्यापारियों से सुझाव मांगे थे। इस दौरान व्यापारियों ने फाइनेंस के अवैध कारोबार पर पाबंदी लगाने की मांग की थी। तत्कालीन एसपी सौरभ ¨सह के आश्वासन के बाद भी पुलिस ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

ये हैं सूदखोरों के आतंक की चर्चित वारदातें

एक माह पहले खोखरा कोट के दलित युवक को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म। चार माह पहले गांधी कैंप निवासी युवक का नहर में मिला शव, छोटे भाई ने किया था पलायन, बड़े पर फाइनेंसर बना रहे थे दबाव

दस माह पहले सब्जी मंडी थाना क्षेत्र से सरेशाम युवक अगवा, कथित फाइनेंस कार्यालय ले जाकर मारपीट

एक वर्ष पूर्व लाखनमाजरा क्षेत्र में छोटे भाई का कर्ज वसूलने को बड़े भाई की हत्या

न्यूज़ 18

बुंदेलखंड: दलितों के गांव में 4 साल से है अंधेरा

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/dalits-are-divested-power-supply-in-jhansi-uttar-pradesh-499075.html

उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड के इलाके को लेकर विकास के बड़े-बड़े दावे हमेशा किए जाते रहे हैं. लेकिन हालत तो ये है बुंदेलखंड सिर्फ आर्थिक ही नहीं सामाजिक रूप में भी काफी पिछड़ा है.

हम आपको बता रहे हैं एक गांव की ऐसी कहनी जहां बिजली की सप्लाई नहीं है. इसके पीछे वहां के लोगों का कहना है कि ये गांव दलितों का है. आसपास के गांवों में ऊंची जाति के दबंग रहते हैं और वह नहीं चाहते हैं कि इस गांव में बिजली आए.

झांसी के महज 10 किमी दूर रक्सा के बाजना गांव पंचायत का रोतन गांव अपने दलित होने का पाप झेल रहा है. इस गांव के घरों मे आज भी रात में उजाला लालटेन और ढिबरी के सहारे होता है.

आपको बता दें कि रोतन गांव में ही लोकसभा चुनाव के बाद जंगीलाल नाम के दलित को दबंग घर से खींचकर मंदिर ले जाते हैं और वहां मूर्ति पर हाथ रखवाकर पूछते हैं कि किसे वोट दिया था? कोई जवाब न देने पर उसकी पीटकर हत्या कर दी जाती है.

पहाड़ों के बीच बसे इस गांव में कुदरत ने इसे खूबसूरत बनाने में कोई भेदभाव नहीं किया. लेकिन हमारी सदियों पुराने सामाजिक ताने-बाने का बोझ भी ये गांव धो रहा है.

 बाजना गांव में दबंगों ने काट बिजली

झांसी से ही 20 किमी दूर बाजना गांव में दलितों के सिर्फ दो घर हैं. उनके घर तीन-चार साल से बिजली नहीं आई है. जिसकी वजह है कि अगड़ी जाति के लोग इनके घर की बिजली का तार काट देते हैं. कई बार प्रशासन से शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई. गांव के प्रधान कहते हैं कि जब बिजली नहीं थी तब भी तो दलित ऐसी ही रहते थे.

 दैनिक भास्कर

मानदेय से किया 30 परिवारों के घरों का अंधेरा दूर

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-datia-news-021505-2334288-NOR.html

नपा दतिया के वार्ड 31 के वार्ड पार्षद राकेश साहू ने पार्षद के रूप में मिलने वाले मानदेय को जनता के लिए खर्च कर एक मिसाल पेश की हैं। उन्होंने मानदेय के साथ कुछ सहायता राशि देकर वार्ड के टिक मोहल्ला निवासी 30 परिवारों के घरों को रोशन कर दिया। परिवार में तीन माह से अंधकार छाया था। 

टिक मोहल्ला के लिए रखी डीपी से लगभग 31 बिजली उपभोक्ता जुड़े थे। उपभोक्ता समय से बिलों का भुगतान नहीं कर सके। तीन माह पहले डीपी खराब हो गई। मोहल्ले में अंधकार छा गया। बकाया बिल के चक्कर में बिजली विभाग ने डीपी की मरम्मत कराने से इंकार कर दिया। पहले तो मोहल्ले के लोग स्वयं राशि एकत्रित कर बिल जमा करने का प्रयास करते रहे। लेकिन अधिकांश परिवार गरीब व दलित, पिछड़ा वर्ग के होने से बिलों की राशि एकत्रित नहीं कर सके। कुछ दिन पहले वार्ड के लोगों ने पार्षद राकेश साहू का दरवाजा खटखटाया। मोहल्लें की बिजली समस्या के समाधान की मांग रखी। पार्षद साहू ने बिजली विभाग के कर्मचारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि बकाया राशि जमा करनी होगी।

डीपी रखते ही मोहल्ला रोशन, चेहरे खिले बकाया राशि के लिए पार्षद साहू ने अपना 10 हजार रुपए मानदेय नपा से निकाला। 10 हजार रुपए की आर्थिक मदद अलग से की। 20 हजार रुपए देते हुए कुछ राशि उपभोक्ताओं से ली। बिजली विभाग की बकाया राशि को जमा कराया। इसके बाद शनिवार को मोहल्ले में नई डीपी रखवाई। डीपी रखते ही मोहल्ला रोशन हो गया। इसके साथ ही लोगों के चेहरे खिल गए। वार्ड के लोगों ने अपने जनप्रतिनिधि के प्रति आभार व्यक्त किया। मोहल्ले में डीपी लगने के बाद खुश रहवासी।

अध्यक्ष भी जनता पर खर्च करेंगे मानदेय 

अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल ने भी अब तक अपना मानदेय नहीं निकाला।a वह भी अपना मानदेय जनता या शहर के विकास कार्यो पर खर्च करेंगे। अध्यक्ष के अनुसार वह जन भागीदारी में अपना मानदेय लगाकर विकास कार्य कराएंगे। वहीं पार्षद साहू ने मिलने वाले मानदेय को जनता पर खर्च कर एक मिसाल पेश की। श्री साहू के अनुसार वह पूरे कार्यकाल मानदेय नहीं लेंगे। 

 दैनिक जागरण

एकजुट रहे तो और बेहतर होंगे हालात

http://www.jagran.com/news/state-12654852.html

गोरखपुर : अपने अधिकारों के लिए दलित समाज में हाल के वर्षों में चेतना बढ़ी है। हर क्षेत्र में दलित युवाओं ने अपनी मेधा का परचम लहराया है, पर अभी भी बहुत कुछ हासिल करना शेष है। इसके लिए जरूरी है कि दलित वर्ग एकजुट होकर योजनाबद्ध ढंग से प्रयास करे।

यह बात रविवार को अंबेडकरवादी छात्रसभा की मेजबानी में आयोजित राष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए बुद्धिजीवियों ने कही। सिविल लाइंस क्षेत्र में संपन्न इस गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी जय सिंह ने कहा कि समाज के युवाओं को अपनी प्रतिभा के साथ एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। तभी दलित वर्ग का भविष्य चमकदार हो सकेगा। वहीं दिल्ली से आए वैज्ञानिक विनोद मिलिंद ने कहा युवाओं से समाज के हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

हरियाणा से आए विजय बौद्ध ने पूर्वांचल में जाति के नाम पर हो रही राजनीति को समाप्त करने की जरूरत पर बल देते हुए बाबा साहब अंबेडकर के सिद्धांतों के अनुरूप समाज गढ़ने के लिए युवाओं से सहयोग मांगा। कार्यक्रम के मेजबान और अंबेडकरवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष अमर सिंह पासवान ने कहा कि गोरखपुर में पहली बार आयोजित हो रहे इस दलित विमर्श गोष्ठी का संदेश पूरे देश में जाएगा, और समाज के युवाओं में जागरुकता आएगी। सम्मेलन में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक डा.आलोक गोयल, डा.गोपाल प्रसाद,, दिल्ली से आए एसएन गौतम, इलाहाबाद से आए बच्चा पासी, मध्य प्रदेश से आए रवि कुमार जैसे बुद्धिजीवियों ने भी अपने विचार रखे।

दैनिक जागरण

बाबा साहेब के रास्ते पर चलने की अपील

http://www.jagran.com/news/state-12654085.html

मुजफ्फरनगर: समता सैनिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि दलित समाज अभी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। समाज को शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने उन्होंने समाज से बाबा साहेब के रास्ते पर चलने की अपील की । पुरकाजी जीटी रोड पर स्थित समता सैनिक दल के ब्लाक कार्यालय का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरूचरण ¨सह व क्षेत्रीय बसपा विधायक अनिल कुमार ने फीता काटकर बाबा साहेब की मूर्ति के समक्ष पुष्प अर्पित कर किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि कुछ लोग दलित व मुस्लिम समाज को आपस में लड़ाकर राज करना चाहते हैं। उनकी साजिश कभी पूरी नहीं होगी।

संगठन समाज में फैली बुराइया को दूर करने पर कार्य कर रहा है। संगठन का निर्माण भारत रत्न बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने सन 1924 ई में किया था। बसपा विधायक अनिल कुमार ने भी आपसी भाईचारा से रहने की अपील की। इससे पूर्व कार्यकर्ताओं ने कस्बे में रैली निकालकर लोगो को जागरूक किया । इस मौके पर प्रदेश सचिव आनन्द प्रकाश, जिलाध्यक्ष रणधीर ¨सह,अनिल कुमार, सुनिल कुमार गौतम, कुलदीप,सचिन तेजियान,अंकित, विनोद, पंकज,विकास, अर्जुन अमन आदि मौजूद रहे।

अमर उजाला

छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती मनाई गई

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सोनभद्र : युवा बहुजन समिति के तत्वावधान में रविवार को छत्रप्रति शाहू जी महाराज की जयंती के अवसर पर आनंदन पटेल दयालु के नेतृत्व में रैली निकाल कर शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।

समिति के कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों छात्र छात्राओं ने चूड़ीगली स्थित शीतला मंदिर के पास से रैली निकाल कर मलिन बस्ती, भलुआ टोला, चूड़ीगली में बच्चों को पढ़ाने के लिए जागरूक किया।

इस दौरान चलो स्कूल की ओर, एक भी बच्चा छूटा संकल्प हमारा टूटा आदि नारे भी लगाए गए। मौके पर समिति के प्रदेश अध्यक्ष दयालु ने कहा कि शाहू जी महराज के कारण ही आरक्षण लागू किया गया जिसके कारण आज गरीब, पिछड़े व दलित कुर्सी पर बैठ पाए हैं।

उन्होंने कहा कि पढ़ाई करने से एक भी बच्चा न छूटे यही समिति का लक्ष्य है। विशिष्ट अतिथि मनीष पटेल ने कहा कि हम सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए कि एक भी बच्चा स्कूल जाने से न छूटे तभी हमलोगों का जीवन सार्थक होगा।

उन्होंने मलिन बस्तियों के अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। रैली में मुख्य रूप से विजय सिंह, शशिकांत कुशवाहा, महताब आलम, मनोज पटेल, प्रिया कुमारी, कमला देवी, प्रिया देवी, संजय, राजेश्वर, राजू, दिनेश केशरी, अनुज वर्मा, मनोरमा वर्मा, ममता आदि उपस्थित रहे।

दैनिक जागरण

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति का जुलूस प्रदर्शन

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/saharanpur-12653803.html

सहारनपुर : आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के तत्वावधान में दलित समाज के कर्मचारियों ने जुलूस निकाल प्रदर्शन किया। बाद मे रैली जुलूस निकाल घंटाघर व कलक्ट्रेट तिराहा पर जाम लगा आरक्षण विरोधियों के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। बाद में प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा।

दलित कर्मचारियों को पदावनत करने व दलित समाज के उत्पीड़न को लेकर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के तत्वाधान में दलित कर्मचारियों ने जुलूस निकाल प्रदर्शन किया। इससे पूर्व देहरादून रोड़ स्थित रविदास छात्रावास में आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति के बैनर तले एससीएसटी, ओबीसी समाज के अधिकारीगणों व कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए समिति के जिलाध्यक्ष साधूराम ने कहा कि पूरे देश में जातिगत द्वेष व भेदभाव के चलते दलित समुदाय के साथ उत्पीड़न तथा अन्याय किया जा रहा है। भारतीय संविधान में दलित समुदाय को प्रदत्त अधिकारों को देने के बजाए काटा जा रहा है। आरोप लगाया कि सरकार असंवैधानिक तरीके से दलित समुदाय के कर्मचारियों को ¨सचाई, प्रोजक्ट कारपोरेशन व होमगा‌र्ड्स आदि विभागों में पदावनत किया जा रहा है और कई अन्य विभागों में समाज के लोगो को पदावनत करने की गुपचुप तैयारी चल रही है। इसे किसी भी सूरत में बर्दास्त नही किया जाएगा।

चकबंदी लेखपाल व रोडवेज की भर्ती में आरक्षण कोटा काटकर सामान्य वर्ग को दे दिया गया है, जिसके विरोध में समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरपी पिछले चार साल से हक वंचित समाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बैठक के बाद संघर्ष समिति के कार्यकर्ता हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए घंटाघर चौक पहुंचे और सांकेतिक जाम लगाया। इसके बाद जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे और गुस्साए कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली तथा मांगों को लेकर जाम लगाया। अधिकारियों के देवबंद में होने के कारण मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर सदर बाजार को मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के नाम संबोधित 15 सूत्रीय ज्ञापन दिया। चेतावनी दी कि यदि मांगो पर ध्यान नही दिया गया तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। रणधीर ¨सह, देशराज, संजय जोशी, सुमेरचंद, अनिल, भूपेन्द्र, सूरज, रामपाल, कस्तूरी गौतम, राजकुमार, गुड्डी, आरती, कुंता, चन्द्रवती, विधा, एसडी गौतम व सतीश भारती आदि शामिल रहें।

जुलूस में शामिल कार्यकर्ता बेहोश

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से दलित समाज के कर्मचारियों को पदावनत करने व दलित समाज के उत्पीड़न को लेकर निकाली गई रैली व जाम के दौरान कड़कड़ाती धूप में गर्मी के कारण नारेबाजी करते हुए एक सदस्य बेहोश होकर गिर पड़ा। अन्य सदस्यों ने बेहोश साथी को संभाला और एक साइड में लेटाकर उसे पानी पिलवाया। काफी देर बाद सदस्य को होश आया और वह फिर से दलितों के हक के लिए नारेबाजी करने लगा।

दैनिक जागरण

संगठन मजबूती को लेकर दलित सेना की बैठक

http://www.jagran.com/bihar/munger-12652833.html

मुंगेर। दलित सेना के संगठन सचिव अमरनाथ राउत के आवास पर रविवार को दलित सेना के कार्यकर्ताओं की बैठक जिला उपाध्यक्ष प्रमोद पासवान की अध्यक्षता में हुई।

अध्यक्षीय संबोधन में श्री पासवान ने कहा की राज्य की नीतीश सरकार जात-पात की राजनीति कर रही है। दलित, महादलित, अनुसूचित, जनजाति को दिग्भ्रमित कर ठगने का काम किया है। इसलिए दलित एवं महादलित भाई गोलबंद होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पक्ष में मतदान करेंगे। वरीय नेता कृष्णानंद राउत ने कहा नीतीश कुमार सिर्फ विकास की बात करते है। परंतु दलित महादलित परिवार आज भी स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, शुद्ध पेयजल एवं अपनी सुरक्षा को लेकर ¨चतित हैं। मौके पर रामोवतार पासवान, मुसो, नोखेलाल राउत, शंकर बेसरा, संजय राउत, वासुकी पासवान, कारू राउत, राजीव राउत, संतोष रजक, सहित अन्य लोग थे।

दैनिक जागरण

फिर से चलाई जाए गंगानगर एक्सप्रेस

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ऋषिकेश: राष्ट्रीय दलित जागरण मंच कार्यकर्ताओं ने श्री गंगानगर एक्सप्रेस को ऋषिकेश से दोबारा संचालित करने व स्टेशन के विस्तारीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने स्टेशन अधीक्षक के माध्यम से रेल प्रबंधक मुरादाबाद मंडल को ज्ञापन भी भेजा।

राष्ट्रीय दलित जागरण मंच कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केएस बलियान के नेतृत्व में रविवार को रेलवे स्टेशन परिसर में छह सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया। मंच कार्यकर्ता हरिद्वार स्टेशन तक आकर ठहराव करने वाली सभी ट्रेनों को ऋषिकेश से चलाने, बंद की गई गंगानगर एक्सप्रेस का ऋषिकेश से दोबारा संचालन, राप्तीगंगा एक्सप्रेस का रायवाला स्टेशन पर स्टॉपेज करने, लक्सर से देहरादून व ऋषिकेश लाईन का दोहरीकरण, ऋषिकेश-दिल्ली पैसेंजर ट्रेन को पुन: चालू करने, रेलवे स्टेशन पर खानपान कैंटीन व बुक स्टॉल खोलने की मांग कर रहे हैं।

इस मौके पर डॉ. बलियान ने कहा कि ऋषिकेश चारधाम यात्रा का मुख्य द्वारा होने के साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है लेकिन रेल मंत्रालय लगातार इस स्टेशन की उपेक्षा कर रहा है। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रेल अधीक्षक आरपी मीना के माध्यम से मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक को ज्ञापन भेज मांगों पर जल्द कार्रवाई की मांग की। इस मौके पर मंच के गढ़वाल प्रभारी सुभाष जाटव, अजय जाटव, गीता रानी, राजकुमार जाटव, संजय ठाकुर, स्वर्ण सिंह, अनिल जाटव, सोहन सिंह, शुभम जाटव, बलराम, बबीता रानी, आशा देवी, तेजपाल सिंह फौजी, संदीप जाटव समेत अन्य मौजूद थे।

जनसत्ता

पुस्तकायन : समन्वय का सेतु

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 अमरनाथ तुलसी और गांधी अपने-अपने क्षेत्र के महान व्यक्तित्व हैं। इन दोनों पर अनेक ग्रंथ लिखे गए हैं, तरह-तरह से उनका मूल्यांकन किया गया है। श्रीभगवान सिंह की पुस्तक तुलसी और गांधी उसी की एक कड़ी है। अब तक गांधी के व्यक्तित्व निर्माण में रस्किन और टॉलस्टॉय का विशेष योगदान माना जाता रहा है, पर इस पुस्तक को पढ़ने के बाद स्वीकार करना पड़ेगा कि गांधी के वैचारिक निर्माण में सर्वाधिक असर तुलसी का है।

यह पुस्तक आठ अध्यायों में विभक्त है, जिनके शीर्षक हैं- ‘लोक संबद्धता’, ‘प्रजा वत्सलता’, ‘दलित पक्षधरता’, ‘नर-नारी पूरकता’, ‘वर्णाश्रम और सामाजिक समरसता’, ‘धर्म की सर्वोपरिता’, ‘समन्वय की अपरिहार्यता’, ‘रामराज्य और स्वराज्य में सादृश्यता’। इन अध्यायों में प्रतिपादित विषयों के माध्यम से लेखक ने एक ओर आज के वामपंथियों, दलित-विमर्शकारों और नारीवादियों द्वारा तुलसी पर लगाए गए विभिन्न आरोपों का तर्कों और भरपूर प्रमाणों के जरिए जवाब दिया है, तो दूसरी ओर यह भी प्रमाणित किया है कि किस तरह उक्त सभी मुद्दों पर गांधी ने तुलसी का उदारतापूर्वक प्रभाव ग्रहण किया है।

पुस्तक की ‘झरोखा’ शीर्षक भूमिका में उन्होंने अपनी स्थापनाओं का संकेत दिया है। ‘काल की दृष्टि से दोनों (तुलसी और गांधी) में एक लंबा अंतराल है, पर जहां धर्म प्रधान मध्यकाल में तुलसी राजनीति को अपने लोक सरोकारों का एक महत्त्वपूर्ण अभिन्न अंग बनाते हैं, तो आधुनिक काल में गांधी अपने तमाम राजनीतिक-सामाजिक सरोकारों में धर्म की अपरिहार्यता को स्वीकृति देते हैं। इस दृष्टि से तुलसी, गांधी की प्रभावशाली पूर्वपीठिका के रूप में सामने आते हैं, तो गांधी उनका आधुनिक राजनीतिक संस्करण बन कर।’

प्रजा प्रतिबद्धता, वर्णाश्रम और सामाजिक समरसता, धर्म की सर्वोपरिता, रामराज्य और स्वराज्य में सादृश्यता को लेकर लेखक की स्थापनाओं पर विवाद की गुंजाइश बहुत कम है। पर दलित पक्षधरता, नर-नारी पूरकता और समन्वय की अपरिहार्यता आदि अध्यायों में तुलसी और गांधी में साम्य दिखाने के लिए लेखक ने कहीं-कहीं तर्क और प्रमाण को गौण बना दिया है, विषय के प्रति श्रद्धा के कारण अपनी अवधारणाओं को थोपने का प्रयास किया है।

लोक संबद्धता वाले अध्याय में गांधी का जिक्र बहुत कम आया है। इस दृष्टि से यह अध्याय पुस्तक के विषय से अलग-थलग-सा है। दरअसल, लोक और शास्त्र के बीच अंतर्विरोध एक सामान्य और स्वीकृत अवधारणा है। इसी आधार पर हिंदी के कुछ आलोचकों ने तुलसी को शास्त्रवादी और कबीर को लोकवादी सिद्ध करने का प्रयास किया है।

श्रीभगवान सिंह ने इस मिथ को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने बताया है कि वास्तव में लोक और शास्त्र में कोई अंतर्विरोध नहीं रहा, बल्कि लोक और शास्त्र दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। लेखक ने इस बात पर बिल्कुल सही आक्रोश व्यक्त किया है कि ‘कितनी बड़ी विडंबना है कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने जिस लोकमंगल के निकष पर तुलसी के काव्य को सर्वोपरि महत्त्व दिया, दूसरी परंपरा की खोज के नाम पर उसी लोक से तुलसी का रिश्ता छत्तीस का बताया जाने लगा और उसे शास्त्र सापेक्ष मनुष्य का कवि बताते हुए लोक-विरोधी सिद्ध करने की बौद्धिक कवायद की जाने लगी।’

लेखक का यह आक्षेप और उनकी स्थापना भी सही है कि तुलसी शास्त्रवादी नहीं, लोकवादी हैं, पर अपनी मान्यता की पुष्टि के संदर्भ में लेखक का यह कहना कि ‘शास्त्र बनाम लोक का विवाद पश्चिम से आई (उस) वैचारिकी का परिणाम है।’ या, ‘हमारे यहां शिष्ट या नागर साहित्य और लोक साहित्य जैसे वर्गीकरण की परंपरा नहीं रही।’ सत्य नहीं है।

दरअसल, लोक और शास्त्र, लोक साहित्य और शिष्ट साहित्य की अलग-अलग परंपराएं होती हैं और सारी दुनिया में रही हैं। जाहिर है, हमारे यहां भी रही हैं। उसे कहीं से आयातित नहीं किया गया है। एक वर्ग विभाजित समाज में ऐसा होना अनिवार्य है। हमारे यहां ब्राह्मण धर्म की प्रतिक्रिया में आया बौद्ध धर्म लोक धर्म ही था। चार्वाक सहित लोकायत परंपरा का हमारे यहां बड़ा समृद्ध इतिहास रहा है। हां, यह सही है कि लोकायत परंपरा का बहुत कम साहित्य बच पाया है, क्योंकि लोक सदा साधन विहीन होता है और व्यवस्था के प्रतिरोध में होने के कारण, शासन या शिष्ट समाज का संरक्षण भी उसे नहीं मिलता।

‘दलित पक्षधरता’ में लेखक ने दलित-विमर्श की सीमाओं का अच्छा विश्लेषण किया है। उन्होंने ‘दलित’ शब्द की ऐतिहासिक पड़ताल करते हुए बखूबी प्रमाणित किया है कि तुलसी ने बचपन में जैसा दुख झेला, भीख मांग कर पेट भरा, दर-दर की ठोकरें खार्इं, वह एक दलित का नहीं तो किसका दुख था? आज के दलित चिंतकों की समझ पर सवाल करते हुए कहते हैं कि ‘दलित चेतना के दोहरे मानदंडों तले तुलसी की पीड़ा एक दलित की नहीं, एक ब्राह्मण की हो जाती है, यह हमारी दलित समझ का दिवालियापन नहीं तो क्या है?’

आमतौर पर तुलसी के ऊपर नारी-विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है। ‘नर-नारी पूरकता’ शीर्षक अध्याय में लेखक ने आधुनिक नारीवादियों के तमाम ऐसे सवालों का जवाब दिया है, जिसमें नारी को पुरुष के प्रतिपक्ष में खड़ा कर दिया जाता है। इस विषय पर लेखक ने विस्तार से लिखा और निष्कर्ष दिया है कि ‘स्त्री-पुरुष या पति-पत्नी के संबंधों में एक-दूसरे के प्रति निष्ठा, त्याग, ईमानदारी, सेवा, सम्मान की भावना का होना दांपत्य जीवन की सफलता के लिए आवश्यक है और सफल दांपत्य जीवन की बुनियाद पर ही सफल, स्वस्थ सामाजिक जीवन का स्थापत्य खड़ा हो सकता है। तुलसी और गांधी, नर-नारी की परस्पर पूरकता का विमर्श रचते हुए हमें यही सीख देते हैं।’

श्रीभगवान सिंह ने विभिन्न अवसरों पर गांधीजी द्वारा उद्धृत तुलसी की विभिन्न काव्य पंक्तियों का बार-बार जिक्र किया है। गांधीजी, तुलसी साहित्य के संपर्क में तेरह साल की उम्र में ही आ गए थे। अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ के आरंभ में ही उन्होंने इसका जिक्र किया है। जब पोरबंदर में रामजी के मंदिर में भक्त बीलेश्वर के लाधा महाराज रामायण सुनाया करते थे और गांधीजी उनसे रामकथा रस लेकर सुनते थे। गांधीजी ने लिखा है कि ‘तुलसीदास की रामायण को भक्तिमार्ग का सर्वोत्तम ग्रंथ मानता हूं।’

लेखक ने सचेत रूप से या अनजाने में कुछ ऐसे विषयों को छोड़ दिया है, जिनको लेकर तुलसी और गांधी की दृष्टि भिन्न-भिन्न है। यह सही है कि तुलसी के रामराज्य और गांधी के स्वराज में बहुत समानता है और लेखक ने अनेक उदाहरणों से यह प्रमाणित भी कर दिया है कि गांधी के स्वराज की निर्मिति में तुलसी के रामराज्य से विशेष सहयोग मिला है, पर स्वराज पाने के लिए गांधी ने जो अहिंसा का मार्ग चुना वही मार्ग तुलसी का नहीं है। तुलसी के राम धनुष-बाण उठाते और असुरों का संहार करते हैं। हृदय परिवर्तन की प्रतीक्षा नहीं करते। उनका सारा अभियान धर्म की रक्षा के लिए युद्ध का अभियान है। तुलसी और गांधी की इस वैचारिक भिन्नता की ओर लेखक ने कोई संकेत नहीं किया है।

कोई भी रचनाकार हर तरह से परिपूर्ण नहीं होता। सब में कमजोरियां होती हैं, अंतर्विरोध होते हैं। पर श्रीभगवान सिंह ने तुलसी और गांधी का अध्ययन इतनी निष्ठा से किया है कि इन कमजोरियों पर ध्यान ही नहीं जाता।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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