दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 26.07.15

महिला बीडीसी को पीटा, रिपोर्ट दर्ज दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/news/state-12649830.html

दलित महिला की निर्मम पिटाई, जातिसूचक गालियां दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/darbhanga-12650496.html

दलित दूल्हे की बारात में मुस्तैद रही पुलिस दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-AJM-OMC-MAT-latest-ajmer-news-043533-2330395-NOR.html

बस्ती बसाने को अन्न, जल त्यागा दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/agra-city-12650258.html

उत्पाती बंदरों ने एक दर्जन लोगों को काटा दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/chandauli-12649324.html

कहीं छत गायब तो कहीं भरे कंडे दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/unnao-12648530.html

भगाना कांड के पीड़ितों को कब मिलेगा न्याय? नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/hisar/when-will-shoo-justice-to-the-victims-of-the-scandal/articleshow/48217271.cms

छात्र करेंगे सीएम का विरोध नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/other-cities-of-punjab/haryana/students-opposed-to-cm/articleshow/48217199.cms

Please Watch:

National Convention Of Scavenger Community on Education – 01

https://www.youtube.com/watch?v=B8eujm8LV9A

दैनिक जागरण

महिला बीडीसी को पीटा, रिपोर्ट दर्ज

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शाहजहांपुर : शनिवार को क्षेत्र के एक गांव की दलित महिला बीडीसी को गांव के ही दबंगो ने शौच जाते समय पीटकर घायल कर दिया। बचाव में आए परिवार के लोगों को भी दबंगों के कहर का शिकार बनना पडा महिला की तहरीर पर पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई।

थाना क्षेत्र के पिलखना गांव की क्षेत्र पंचायत सदस्य मायादेवी ने पुलिस को बताया कि शनिवार की सुबह वह शौच के लिये गांव के बाहर खेतो की तरफ जा रहे थे तभी गांव के दबंग ने गाली गलौज देने लगे।

माया का आरोप है कि जब उसने गालीओं का विरोध किया तो उसे लाठी डंडो से पीटना शुरूकर दिया मारा इसी बीच श्याम बिहारी के परिवार के लाल ¨सह,गुमानी, सर्वेश, अनूप आ गये जिन्होंने उसे बेरहमी से मारा पीटा बचाव करने आयी उसके परिवार के अन्य लोगो को भी घर में घुस कर मारा पीटा। पीड़िता की तहरीर पर पांच लोगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे इलाज के लिये जिला अस्पताल भेजा गया हैं।

दैनिक जागरण

दलित महिला की निर्मम पिटाई, जातिसूचक गालियां

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दरभंगा। एक दलित विधवा महिला से उसकी जमीन जबरन लिखवाने में असफल होने पर दबंगों ने उसकी निर्मम तरीके से पिटाई कर डाली। इतना ही नहीं उसे जातिसूचक गालियां दी। सरेआम लात-घुसों से पीटा गया। लालशाहपुर बांधबस्ती इलाके की रहने वाली विधवा मीना देवी ने एससी/एसटी थाने में दबंगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

उसका कहना है कि सिमरा निहालपुर पंचायत के सरपंच पति उमाशंकर यादव उसकी जमीन जबरन लिखवाना चाहता है। दरअसल, उसके घर के बगल में ही विधवा की 3 कट्ठा जमीन है। मीना का कहना है कि उस जमीन को बेचने के लिए दो साल से वह दबाव बनाया हुआ है। बकौल, मीना उसका कहना है-‘वह जमीन मेरे हाथ बेच दो। नहीं तो जमीन पर फसल नहीं होने देंगे।

जब कोई फसल लगाती भी हूं तो वह मवेशियों से चरवा देता है।’जमीन की खातिर शनिवार सुबह उमाशंकर यादव ने विजय यादव, संतोष यादव, अशोक यादव, पवन यादव के साथ मिलकर उसे बेरहमी से मारा पीटा। जातिसूचक गालियां दी। सरेआम लात-घूसों से पिटाई कर उसके विधवा होने का मजाक उड़ाया गया।

दैनिक भास्कर

दलित दूल्हे की बारात में मुस्तैद रही पुलिस

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अजमेर| दातागांव में दलित युवक की बारात में बिंदौरी निकालने को लेकर कुछ लोगों की शिकायत पर पुलिस ने सुरक्षा के बंदोबस्त किए। पुलिस सुरक्षा के बीच दलित दूल्हे की बिंदौरी घोड़ी पर निकाली गई।

दातां गांव निवासी जसराज गोधा ने पिछले दिनों एसपी विकास कुमार के समक्ष पेश होकर बताया था कि उसके छोटे भाई राकेश गोधा की शादी है, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने धमकी दी है कि दूल्हे की बिंदौरी घोड़ी पर बैठकर नहीं निकलने देंगे। एसपी ने श्रीनगर थाना प्रभारी को सुरक्षा इंतजाम के लिए निर्देश जारी किए थे। पुलिस अधिकारियों ने श्रीनगर थाने के सीएलजी सदस्यों तथा गांव के सभी समाज के प्रमुख व्यक्तियों के साथ वार्ता की। इसके बाद गांव के सभी समाज के लोगों ने बिंदौरी घोड़ी पर निकाले जाने पर सहमति जाहिर की। एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस जाप्ता तैनात किया गया तथा तहसीलदार भी साथ रहे। दलित अधिकार केंद्र के जिला समन्वयक रमेश चंद्र ने बताया कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बिंदौरी निकाली जा सकी।

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गांव दाता में पुलिस की मौजूदगी मंे निकाली गई दलित दूल्हे की बिंदौरी

दैनिक जागरण

बस्ती बसाने को अन्न, जल त्यागा

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जागरण संवाददाता, आगरा: संत रविदास नगर की दलित बस्ती को बसाने के लिए क्षेत्रीय नागरिकों ने अन्न-जल त्याग कर शहीद स्मारक पर शनिवार को आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके साथ बस्ती के 132 लोग भी आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं।

अनशन का नेतृत्व कर रहे ¨हदूवादी नेता लव पंडित ने बताया कि बिजली घर चौराहे के समीप इस बस्ती को सेना ने चार जुलाई को उजाड़ दिया था। जिससे करीब 500 लोग बेघर हो गए हैं। वे इधर-उधर भटक रहे हैं। उनकी इस समस्या को लेकर वे पिछले दिनों दिल्ली भी गए थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री व केंद्रीय रक्षा मंत्री कार्यालयों पर जाकर ज्ञापन दिया था, जहां उन्हें न्याय का आश्वासन दिया गया। लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिससे शनिवार से उन्होंने अन्न जल त्याग दिया।

दैनिक जागरण

उत्पाती बंदरों ने एक दर्जन लोगों को काटा

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बबुरी(चंदौली): बनारस से चकिया के जंगलों में छोड़े गए बंदरों ने अब गांवों का रुख कर लिया है। उत्पाती बंदर जहां कपड़े फाड़ दे रहे हैं वहीं छत पर रखे किसी भी सामान को नष्ट कर दे रहे हैं।

शनिवार को सुबह बबुरी स्थित दलित बस्ती में बंदरों ने गोकुल के पुत्र हर्षवर्धन 13 वर्ष, मिश्री की पुत्री रागिनी 12 वर्ष, महेंद्र 32 वर्ष, महेंद्र के पुत्र अंकित 3 वर्ष, प्यारे के पुत्र मनीष 9 वर्ष, प्रेम की पत्नी देवी 25 वर्ष, दुलारे के पुत्र अजय 5 वर्ष, प्रेम के पुत्र बिट्टू 4 वर्ष, दुलारे के पुत्र रामबली 10 वर्ष, प्यारे के पुत्र विपिन 8 वर्ष को काटकर जख्मी कर दिया। सभी घायलों का इलाज निजी चिकित्सालय में कराया गया। ग्रामीण बंदर के आतंक से इतने भयभीत हैं कि वे रात में छतों पर सोना भी बंद कर दिए हैं। ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से बंदरों को अन्यत्र छोड़े जाने की मांग की है।

दैनिक जागरण

कहीं छत गायब तो कहीं भरे कंडे

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पुरवा, संवाद सहयोगी: देश को स्वच्छ और सुंदर बनाने की कवायद एक अर्से से चल रही है लेकिन आज तक यह साकार रूप नहीं ले सकी। एक तरफ जहां सोच वहां शौचालय का नारा दिया जा रहा है। तो दूसरी तरफ आज भी गांव की कौन कहे शहर क्षेत्र के लोग भी खुले में ही शौचालय जाते हैं। सरकार की मदद से शौचालय बनाने की योजना के नाम पर केवल और केवल खेल ही हो रहा है। एक तो सरकार से मिलने वाली अपर्याप्त रकम रही सही कसर इस रकम के नाम पर गोल माल करने वाले पूरी कर रहे हैं।

व्यक्तिगत शौचालय की असली तस्वीर देखने के लिए पुरवा विकास खंड के अंबेडकर ग्राम टीकरखुर्द में बने शौचालयों पर नजर डाली गई तो चौकाने वाले परिणाम सामने आए। जो शौचालय दिखे उनमें किसी में छत नहीं तो किसी में दरवाजा गायब मिला। इतना ही नहीं हास्यापद ²श्य तो तब सामने आया जब एक शौचालय के अंदर गोबर के कंडे भरे मिले। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय बनाते वक्त इतने कम गहराई के गड्ढे खोदे गए कि छह माह मे ही सब टैंक भर गये। वहीं सीमेंट की टीन मामूली आंधी में उड़ गयी। कुछ की टूटकर गिर गयी और हल्के दरवाजे का भी अता पता नहीं है। गावं के दीपू कहते है कि टैंक भर जाने पर सफाई कैसे करें। गांव के सफाई कर्मी आते नहीं है। इसलिए उन्होने शौचालय का प्रयोग कंडे भरने के लिए कर लिया है। ऐसे ही गनेश, गुरूप्रसाद और रामसजीवन ने बताया कि नाम के शौचालयो का प्रयोग संभव नहीं है। इससे अच्छा तो जब पैसे होंगे तो दूसरा शौचालय बनवा लेंगे।

कम कीमत पर ठेकेदार का मुनाफा

नाम के शौचालयो के जरिए स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत का सपना देखने वाली सरकारें भी व्यवस्था देने के नाम पर कंजूसी बरतती हैं। पूर्व में शौचालयों के निर्माण मे 10हजार 900 रुपए की धनराशि स्वीकृति की गयी थी जो अब 12 हजार कर दी गई है। उसमें भी ठेकेदारों का निर्माण कराकर बचत करना भी टेढ़ी खीर है।

आज तक नहीं हुई बढ़ोत्तरी

ग्रामीण क्षेत्रों में 5 करोड़ो का बजट शौचालयों के लिए दिया गया। लेकिन शहरी क्षेत्रो के लिए इस सुविधा में अब तक कंजूसी ही बरती गयी है। नगर पंचायत पुरवा में अब तक डूडा योजना के अंर्तगत लगभग दो सैकड़ा शौचालय बनाये गये है। जो वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से नगर के कुल 3904 परिवारों एवं 24504 जनसंख्या है। इसमें आज तक 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी भी हो चुकी है। इसके लिए वह काफी नहीं है। इसके चलते लगभग 25 फीसद आबादी आज भी खुले आसमान के नीचे शौच करने के लिए मजबूर है।

जिन लाभार्थियों का आवेदन आयेगा। उनके लिए उच्चाधिकारियों से नगर पंचायत शौचालयों की मांग कर समस्या का समाधान करायेगी। वहीं दलित बस्तियों में बायोगैस योजना से भी समस्या का निस्तारण कराया जायेगा।

उमेश कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत

नवभारत टाइम्स

भगाना कांड के पीड़ितों को कब मिलेगा न्याय?

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/hisar/when-will-shoo-justice-to-the-victims-of-the-scandal/articleshow/48217271.cms

 हिसार गांव भगाना के दलितों और पिछड़ों की संघर्ष समिति ने सरकार और प्रशासन पर भगाना कांड के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का आरोप लगाया है। घटना के 3 साल बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया जा रहा है।

क्या है भगाना कांड

21 मई 2012 को भगाना में सवर्ण जाति के लोगों से विवाद के बाद दलितों के 52 से ज्यादा परिवारों ने पलायन किया। इनमें कई परिवार अब भी लघु सचिवालय में पड़ाव डाले बैठे हैं। विवाद की शुरूआत शामलात जमीन पर कब्जा हटवाने को लेकर हुई थी। ग्रामीणों ने उनका हुक्का पानी बंद किया, तब उन्हें गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

नहीं हो रही सुनवाई

इस मामले से जुड़ी संघर्ष समिति के प्रधान वीरेंद्र सिंह बागौरिया व अन्य पदाधिकारियों ने एक बयान जारी कर कहा है कि भगाना कांड के पीड़ित परिवार 3 साल से भी ज्यादा समय से न्याय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। भगाना कांड के पीड़ित हिसार लघु सचिवालय परिसर में 21 मई 2012 से शरण लिए हुए हैं। उनका यह धरना 1163वें दिन में प्रवेश कर गया है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के दौरान भगाना के पीड़ितों पर दर्जनों झूठे मुकदमे दर्ज करके उन्हें जेल भेजा गया। पूर्व सरकार के इस ढुलमुल रवैये से दबंगों को और हौसला मिला, जिससे उन्होंने उन पर अत्याचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रशासन झूठ पर झूठ बोलता रहा कि गांव में भाईचारा है, शांति है, लेकिन प्रशासन की पोल तब खुली जब घटना के 2 साल बाद 23 मार्च 2014 को 4 नाबालिग लड़कियों का अपहरण व गैंगरेप हुआ। उसके बाद भी प्रशासन की आंखें नहीं खुली। 25 अगस्त 2014 को गोलीकांड हुआ। इसी प्रकार प्रशासन हर बार व हर जगह दबंगों पर नकेल कसने में नाकाम रहा।

 पीड़ितों पर झूठे मुकदमें का आरोप

इसके बाद भी अत्याचार कम नहीं हुए। इस प्रकार प्रशासन के अनेक अधिकारी आए और चले गए, लेकिन आज तक दबंगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी तरह सरकार बदली, अधिकारी बदले, लेकिन नई सरकार ने भी आज तक इस संबंध में दलितों के हक में कोई कदम नहीं उठाया। इस तरह से वर्तमान सरकार ने भी पीड़ित परिवारों की जख्मों पर मरहम की जगह नमक छिड़कना शुरू कर दिया है। वर्तमान सरकार के दौरान भी 8 मार्च 2015 को गांव के दलित नाबालिग छात्रा से अपहरण, रेप का मामला आया, उसके बाद 18 मार्च 2015 को दलित राशन डिपो में चोरी व तोड़फोड़ की घटना हुई लेकिन प्रशासन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न करके उन्हें बचा रहा है। 17 अप्रैल को धरने पर बैठे दलित-पिछड़ों पर चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया।

 फिर से न्याय की गुहार

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के मुख्यमंत्री से न्याय के लिए भगाणा के पीड़ित लगभग 4 बार मिल चुके हैं, प्रशासन से भी बार-बार मिल चुके हैं। सीएम विंडों पर शिकायत दर्ज करवाई गई लेकिन हिसार प्रशासन मौन बना हुआ है। वीरेंद्र सिंह बागौरिया ने वर्तमान सरकार से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के मान-सम्मान को बहाल किया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भगाणा के दलित-पिछड़ों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो मुख्यमंत्री को पूरे हरियाणा में विरोध का सामना करना पड़ेगा और उन्हें जनसभाओं में काले झंडे दिखाए जाएंगे।

नवभारत टाइम्स

छात्र करेंगे सीएम का विरोध

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/other-cities-of-punjab/haryana/students-opposed-to-cm/articleshow/48217199.cms

हिसार : डॉ. आंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (डीएएसएफआई) ने दलित पिछड़ा वर्ग के छात्रों के अधिकारों के हनन के विरोध में शनिवार को धरना शुरू करते हुए लघु सचिवालय पर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का धरनास्थल पर ही पुतला फूंका। छात्र अपने आंदोलन के अगले चरण में अपनी मांगों को मनवाने के लिए रविवार को हिसार आ रहे मुख्यमंत्री का विरोध करेंगे। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के चेयरमैन प्रदीप आंबेडकर व प्रदेशाध्यक्ष राजपाल आंबेडकर ने कहा कि डीएएसएफआई छात्रों की सभी समस्याओं का तत्काल समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्य सचिव ने पिछले वर्ष 16 जुलाई को पत्र जारी कर प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय 7084/2011 की व्याख्या भ्रामक तरीके से प्रस्तुत की, जिस कारण हजारों दलित छात्रों को दाखिले में पूर्ण रूप से पांच प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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