दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 18.07.15

दबंगों ने दलित आदिवासी युवक से की मारपीट , मौत, मामला दर्ज – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/jhansi-murder-news-426860

सरकारी नल से पानी भरा तो मारा हंसिया – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/narsimhapur-ete-hnt-426857

पुलिस की पिटाई से दलित की मौत – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/gonda-12612831.html

दुष्कर्म की कोशिश, जमीन पर गिराकर मारी लात – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/haryana/rohtak-12613024.html

भीलवाड़ा : पांच युवकों ने दलित महिला की अस्मत लूटी – राजेश्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/dalit-woman-gangraped-by-five-youths-in-bhilwara-district-of-rajasthan-1247293.html

दलित परिवार के साथ मारपीट – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/nawada-12611534.html

गैर दलित को जमीन बेच सकेंगे यूपी के दलित, कानून में संशोधन की सिफारिश – हरित खबर

http://haritkhabar.com/2015-07-schedule-cast-and-schedule-tribe-is-free-to-sell-his-land-to-any-cast-person-in-uttar-pradesh-17-14/

तीन के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मामला – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/ghazipur-12610311.html

अब पुलिस संभालेगी आदिवासी क्षेत्रो में शिक्षा की कमान।न्यूज़ नेशन इंडिया

http://newsnationindia.com/?p=5815

ईश्वर सिंह: पूरे देश में दलितों पर बढे अत्याचार – प्रदेश टुडे

http://www.pradeshtoday.com/newsdetails.php?news=Ishwar-Singh:-Dalits-in-the-country-increased-persecution&nid=121070

यहां कानून का नहीं देवता का राज है – जनादेश 

http://www.janadesh.in/InnerPage.aspx?Story_ID=6830

भाई के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-MUR-MAT-latest-morena-news-031030-2278061-NOR.html

अजाक्स थाने का घेराव, अनिश्चितकालीन अनशन – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/damoh-nd-nd-425438

Please Watch:

Dynamics and Dimensions of Ambedkarite movement for Indian Youth Part 1

https://www.youtube.com/watch?v=6653decPgqo

नई दुनिया

दबंगों ने दलित आदिवासी युवक से की मारपीट , मौत, मामला दर्ज

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/jhansi-murder-news-426860

झांसी। थाना बबीना क्षेत्र में गुरुवार को एक युवक को लाठी, डंडों व सरियों से पीटकर मौत के घाट उतार दिया। उसके शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया।

बताया जाता है कि ग्राम पृथ्वीपुर नयाखेड़ा शिवदयाल आदिवासी पुत्र भगवानदास (45 )खम्भे से विद्युत तार काटे जाने की शिकायत लेकर पड़ोस में रहने वाले लक्ष्मी प्रसाद के घर गया था, लक्ष्मीदेवी के तीनों पुत्रों द्वारा शिवदयाल पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की नियत से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और कुछ देर तक हमलावरों से जूझता रहा, इस दौरान हमलावरों ने उसको घेरकर एक राय होकर लाठी, सरियों से ताबड़तोड़ वार किए जिससे एक सरिया उसके आंख के पास घुस गया और वह बुरी तरह जख्मी होकर गिर गया और कुछ ही क्षणों में उसने दम तोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार बिजली के तार काटने से होने वाली परेशानी को बताने के लिए उपरोक्त लोगों के पास पहुंचा था लेकिन उन्होंने उसको जान से मारने के इरादे से हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना की सूचना थाना बबीना पुलिस को दी गई पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर संक्षिप्त रिपोर्ट घटना के विवरण तैयार की और पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया। बताया जाता है कि उक्त घटना के बाद दलित समुदाय में गहरा रोष है और दहशत में रह रहे है। पुलिस प्रशासन ऐसे वर्ग के लोगों की समुचित सुरक्षा व्यवस्था करने में असफल साबित हो रहा है। शुक्रवार को पीड़ित पक्ष को पोस्टमार्टम उपरांत मृतक का शव सौंप दिया है तथा अंतिम संस्कार कर दिया।

नई दुनिया

सरकारी नल से पानी भरा तो मारा हंसिया

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नरसिंहपुर। ठेमी थाना के ग्राम शेढ़ मगरधा में सरकारी नल पर पानी भरने गई एक दलित महिला को नल पर कब्जा करने वाले दबंग ने पानी भरने से मना किया, गालियां दी जिसका महिला ने विरोध किया तो विवाद के कुछ घंटे बाद दबंग ने बकरी चराने गई महिला को हंसिया मारकर घायल कर दिया। घटना की शिकायत महिला एवं परिजन द्वारा थाने में करने के बाद पुलिस अधीक्षक से भी की है। घायल महिला को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया है।

पीड़िता तुलसाबाई पति धाकनसिंह चौधरी की ओर से पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में बताया गया है कि शेढ़ मगरधा निवासी कमलू पिता मोहन लोधी ने गांव के सरकारी नल पर कब्जा कर रखा है। गत 16 जुलाई को जब वह नल पर पानी भरने गई तो कमलू ने जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसे पानी भरने से रोका, गालियां देते हुए मारपीट की। इस घटना के बाद जब वह ग्राम निवासी सुक्खीबाई, विमलाबाई के साथ बकरी चराने नहर के पास गई थी उसी दौरान गन्ने के खेत से निकलकर आए कमलू लोधी ने हंसिया मारकर घायल कर दिया।

पीड़िता का कहना है कि उक्त घटना की शिकायत करने जब साथ गईं महिलाएं ठेमी थाने जाने लगी तो उन्हें भी धमकी दी गई कि पुलिस से रिपोर्ट की गई तो मार दिया जाएगा। महिला का कहना है कि मामले की शिकायत ठेमी थाना में करने में रिपोर्ट की पावती नहीं दी गई है। इस मामले में ठेमी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 294, 232, 506 के तहत मामला दर्ज किया है।

दैनिक जागरण

पुलिस की पिटाई से दलित की मौत

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गोंडा : थाना क्षेत्र के सुकरौलिया गांव में पुलिस की पिटाई से एक दलित युवक की मौत का मामला प्रकाश में आया है। घटना की खबर फैलने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश भड़क गया। चार घंटे तक रोड जाम रहा। यही नहीं, भाजपा व सपा समर्थकों में नोकझोक भी हुई। इस मामले में एक दारोगा व दो सिपाहियों के खिलाफ हत्या, लूट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

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सुकरौलिया निवासी केवला देवी का कहना है कि 15 जुलाई को उसका पति रामवचन सोनकर (32) पुत्र हरीराम रेहारी गांव में अपने खेत पर गया था। वापस आते वक्त धानेपुर थाने के दारोगा रवींद्र यादव, सिपाही रामरोशन कनौजिया व राममिलन यादव ने उसे रास्ते में रोक लिया। पुलिस कर्मियों ने अवैध शराब का कारोबार करने की बात कह महीना (घूस) मांगा। इसे न देने पर तीनों ने रामवचन को जाति सूचक गालियां देते हुए बुरी तरह पीटा। यही नहीं, जेब में रखे 1500 रुपये लूटने का भी आरोप है। घायलावस्था में रामवचन घर पहुंचा और पूरी दास्तान बताई। परिजनों ने उसे इलाज के लिए धानेपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। गुरुवार देर रात उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना ग्रामीणों को मिली तो पुलिस के खिलाफ आक्रोश भड़क गया। इसके बाद ग्रामीणों ने इंदिरानगर तिराहे के पास गोंडा-उतरौला रोड पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। रोड करीब चार घंटे तक जाम रही। इस दौरान भाजपा और सपा के कार्यकर्ताओं में भी नोकझोक व नारेबाजी हुई। घटना के बाद एएसपी आरके ¨सह, एसडीएम सदर नरेंद्र ¨सह, सीओ नगर अखंड प्रताप ¨सह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, उसके बाद जाम खुला।

पुलिस कर्मी लाइन हाजिर : एसपी आरपीएस यादव ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। यही नहीं, आरोपित पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। उनके निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, धारा 144 लागू होने के बावजूद जाम लगाने वालों पर भी हमारी नजर है।

दैनिक जागरण

दुष्कर्म की कोशिश, जमीन पर गिराकर मारी लात

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जागरण संवाददाता, रोहतक : गांव घरौंठी में चारा लेकर लौट रही महिला को गांव के ही दबंग ने रास्ते में रोक लिया। आरोपी ने महिला से दुष्कर्म की कोशिश की और विरोध करने पर बेरहमी से लात मारकर पिटाई की। थाने में शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण एकत्रित होकर एसपी कार्यालय पहुंच गए। डीएसपी ने शिकायत पर थाना पुलिस को निर्देश देकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

एसपी कार्यालय पहुंचे घरौंठी के ग्रामीणों ने बताया कि 15 जुलाई को गांव एक दलित महिला खेत से चारा लेकर लौट रही थी। रास्ते में गांव के एक दबंग ने महिला को दबोच लिया और खेत में लेकर जाकर दुष्कर्म की कोशिश की। महिला के विरोध करने पर आरोपी ने जमीन पर गिराकर उसे बेरहमी से लातों से पीटा। महिला के पीछे चारा लेकर आ रहीं महिलाओं ने उसे आरोपी से बचाया और पुलिस से शिकायत की।

आरोप है कि थाना पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि पुलिस इस मामले में फैसले का दबाव बना रही है। एसपी कार्यालय पहुंचने के बाद भी एक पुलिसकर्मी ने फैसला कराने के लिए मोबाइल पर कॉल की। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया और वह एकत्रित होकर शुक्रवार को एसपी कार्यालय पहुंच गईं। डीएसपी ने इस मामले में ग्रामीणों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया और थाना पुलिस को निर्देश देकर रिपोर्ट दर्ज करा दी है।

राजेश्थान पत्रिका

भीलवाड़ा : पांच युवकों ने दलित महिला की अस्मत लूटी

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/dalit-woman-gangraped-by-five-youths-in-bhilwara-district-of-rajasthan-1247293.html

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में गुरुवार रात अज्ञात पांच युवकों ने एक दलित महिला के साथ बलात्कार किया। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि यह घटना शाहपुरा तहसील के कानेछा गांव में गुरुवार रात हुई। पीडि़ता के पिता ने सुबह फूलिया कालान पुलिस क्षेत्र में रिपोर्ट दर्ज कराई।

सूत्रों ने बताया कि इस महिला का विवाह पांच साल पहले वाल्मीकि समुदाय के एक युवक के साथ हुआ था और कुछ समय बाद वह अपने पति का घर छोड़कर वापस आ गई थी तथा पिछले चार साल से शाहपुरा शहर में अपने पिता और बहन के साथ रह रही थी।

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पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार पीडि़ता के मित्रों ने उसे गुरुवार रात ग्यारह बजे फोन करके बुलाया और यह तीनों परिवार को कोई सूचना दिए बगैर शाहपुरा से बीस किलोमीटर दूर कानेछा गांव में चले गए। वापस लौटते समय तीन बाईक सवार पांच युवकों ने इन्हें रोक कर युवती के दोस्तों की पिटाई की और इस युवती को पास में खेत में ले गए।

उन्होंने इस महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया और जाने से पहले महिला को इस बारे में बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। आधी रात को होश आने पर यह महिला मुख्य सड़क पर पहुंची और रोड़वेज की बस पकड़ कर शाहपुरा थाना गई।

पुलिस ने इस मामले में उसका बयान दर्ज कर मेडिकल जांच कराई जिसमें उसके साथ बलात्कार होने की पुष्टि हुई है। पुलिस उपाक्षीक्षक अजय भार्गव शाहपुरा इस मामले की जांच करेंगे।

दैनिक जागरण

दलित परिवार के साथ मारपीट

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नवादा। थाना क्षेत्र के कुंज गांव में शुक्रवार की सुबह दो पक्षों के बीच मारपीट हुई। मारपीट में दलित परिवार के तीन महिला समेत चार लोग जख्मी हुए। इस बाबत दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

बताया जाता है कि अम्बेदकर नगर निवासी दीपक पासवान की पत्‍‌नी रेखा देवी गांव के ही दुकान से कुछ सामान खरीदने निकली थी। रास्ते में कुछ युवकों ने फब्तिया कसी। जिसका उक्त महिला ने विरोध किया। इस दौरान उसका पुत्र भी वहां आ गया। तब हाथापाई शुरू हो गयी। स्थानीय लोगों के समझाने-बुझाने के बाद मामला शांत हुआ। परन्तु बदमाशों का मन नहीं माना और दीपक के घर पर जाकर मारपीट किया। लाठी-डंडे से हुई मारपीट में दीपक के पुत्र गौतम कुमार का सर फट गया। वहीं पत्‍‌नी रेखा देवी का दाहिना हाथ टूट गया।

इसके अलावा पुत्री टूसी कुमारी व माता पारो देवी को भी चोटें आई। सभी का ईलाज सदर अस्पताल में किया जा रहा है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार इस दौरान मोबाइल व गले में रहे सोने का हार को भी बदमाशों ने छिन लिया। इस मामले में दीपक के जख्मी पुत्र गौतम कुमार ने नागो सिंह, विजो सिंह, रातो सिंह, रंजीत सिंह व अजीत सिंह को नामजद अभियुक्त बनाया है। वहीं रंजीत व अजीत सिंह ने भी दीपक पासवान व उसके परिजनों पर रोह थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

हरित खबर

गैर दलित को जमीन बेच सकेंगे यूपी के दलित,

कानून में संशोधन की सिफारिश

http://haritkhabar.com/2015-07-schedule-cast-and-schedule-tribe-is-free-to-sell-his-land-to-any-cast-person-in-uttar-pradesh-17-14/

यूपी के दलित समुदाय के लोग अब किसी भी जाति के लोगों को अपनी जमीन बेच सकेगे। इससे पहले उत्तर प्रदेश के वही दलित समुदाय अपनी जमीन दूसरी जाति के लोगों को बेच सकते थे, जिनके पास 3.125 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है। लेकिन सरकार के द्वारा पेश राजस्व कानून प्रस्ताव में संशोधन किए जाने की खबर है। जिसके मुताबिक 3.125 हेक्टेयर से कम जमीन वाले दलित भी अपनी जमीन गैर दलित को बेच सकते हैं। इसके लिए सरकार ने तीन शर्त रखी है।

पहली शर्त यह होगी कि जमीन बेचने वाले दलित का कोई वारिस न बचा हो। दूसरी, अनुसूचित जाति का व्यक्ति किसी दूसरे प्रदेश में या कहीं और बस गया हो। तीसरी शर्त कि परिवार के किसी सदस्य के जानलेवा बीमारी से ग्रस्त होने पर विपदा की स्थिति में इलाज के लिए जमीन बेचना उसके लिए अपरिहार्य हो जाए।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश जमींदार विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 के तहत अनुसूचित जाति के किसी भी व्यक्ति को अपनी खेती की जमीन किसी गैर अनुसूचित जाति के व्यक्ति को बेचने के लिए जिलाधिकारी से मंजूरी लेना अनिवार्य है।

दैनिक जागरण

तीन के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मामला

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भांवरकोल (गाजीपुर) : पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर थाना क्षेत्र के सुखडेहरी कलां के मिथिलेश यादव, अवधेश यादव और भृगुनाथ यादव के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मामला शुक्रवार को पंजीकृत किया। सुखडेहरी कलां के राजकुमार पासवान की पत्नी टुन्नी देवी ने आरोप लगाया है कि उनके पति भृगुनाथ यादव के डेढ़-दो माह तक मजदूरी किए। मजदूरी का 15 हजार रुपये बकाया मांगने पर टरकाते रहे। तीन जनवरी 2015 को जब वह बकाया पैसा मांगने गई तो जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारने को दौड़ा लिए। उसे घर में घुसकर मारे पीटे। थानाध्यक्ष केपी सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

न्यूज़ नेशन इंडिया

अब पुलिस संभालेगी आदिवासी क्षेत्रो में शिक्षा की कमान।

http://newsnationindia.com/?p=5815

बालाघाट (मुकेश भटट) जंगलो में बसे नक्सल प्रभावित गांवो में पुलिस नक्सली गतिविधियों पर नही बल्कि अब लापरवाह शिक्षकों पर भी अंकुश लगाएगी। इसके लिए पुलिस विभाग ने एक योजना प्रारंभ की है जिसे ‘‘बच्चे हमारा भविष्य’’ योजना नाम दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत आदिवासी क्षेत्रों में संचालित हो रही प्राथमिक एवं माध्यमिक पाठशालाओं में अब पुलिस विभाग के द्वारा मानिटरिंग की जायेगी। बल्कि समय समय पर इन क्षेत्रों के थाना एवं चैकियो पर पदस्थ पुलिस अधिकारी भी पाठशालाओं में जाकर बच्चों को पढ़ायेंगे बल्कि कांपटिशन परीक्षाओं में केसे तैयारियां की जाती है इसकी भी जानकारी बच्चों को देगें। इस पहल के पीछे पुलिस विभाग की यह सोच है कि अगर इन क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा तो क्षेत्र में पनम रहा नक्सवाद भी खत्म होगा।

बालाघाट जिला मध्यप्रदेश का नक्सल प्रभावित जिला है लेकिन नक्सलवाद और पर्याप्त साधन उपलब्ध न होने की वजह से बैहतर एवं लांजी क्षेत्र के पाठशालाओं में शिक्षक अधिकांश समय अनुपस्थित रहते है जिस वजह से स्कुलो में ताले लगे रहते है और यही कारण है कि बच्चो का भविश्य अंधेरे में है। पुलिस विभाग के अधिकारियों की समय समय पर माॅनिटरिग होने से इन क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर तो सुधरेगा ही बल्कि शिक्षक भी समय पर स्कुलों में पहॅुचाना प्रांरभ कर देगें। इन सब दिक्कतों को खत्म करने के लिये पुलिस विभाग ने यह पहल प्रारंभ की है। गौरव तिवारी पुलिस अधीक्षक बालाघाट। ने बताया कि पुलिस विभाग ने प्रारंभ में 130 स्कुलों को इस योजना में शामिल किया है।

जिसमें पुलिस अधिकारी लगातार नजर रखेगें। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत इस योजना में स्कुली बच्चों को कापी पुस्तक, ड्रेस से लेकर थाना एवं चैकियो में लाईब्रेरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जायेगी। जिससे बच्चे अपना भविष्य निखार सकें। इसके लिये बकायदा पुलिस विभाग के एसपी, टीआई गांव गांव में जाकर स्वयं चैपाल लगाकर इसकी जानकारी ग्रामीणों एवं उनके बच्चों को दे रहे है। उन्होंने बताया कि पुलिस संभालेगी आदिवासी क्षेत्रो में शिक्षा की कमान। जंगलो में बसे नक्सल प्रभावित गांवो में पुलिस नक्सली गतिविधियों पर नही बल्कि अब लापरवा शिक्षको पर भी अंकुश लगाएगी !

प्रदेश टुडे

ईश्वर सिंह: पूरे देश में दलितों पर बढे अत्याचार

http://www.pradeshtoday.com/newsdetails.php?news=Ishwar-Singh:-Dalits-in-the-country-increased-persecution&nid=121070

 जींद : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने आज यहां कहा कि संविधान में मजबूत कानून तो बने, लेकिन वे पूरी तरह से लागू नहीं हो पाये। आज हालत यह हैं कि पूरे देश में दलितों पर अत्याचार बढे हैं। यहां संवाददाताओं से सिंह ने कहा, देश के कई हिस्सों में तो आज भी देवदासी की प्रथा है, इसे खत्म करने के लिए सरकार द्वारा कानून बनाया जाना चाहिए। मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने के लिए सरकार ने कानून तो बना दिया, लेकिन अभी तक उस पर पूरी तरह से काम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य कुमारी शैलजा से संसद में दासी प्रथा खत्म करने की मांग उठाने के लिए कहा है। संभवत: आगामी सत्र के दौरान यह मांग संसद में जरूर उठाई जाएगी। उन्होंने कहा, संविधान में दलितों के उत्थान के लिए बहुत सारे कानून हैं, लेकिन लोगों को उनकी पूरी जानकारी नहीं है।

इसके चलते आज भी विशेषकर ग्रामीण भारत में जातिवाद बडा मुद्दा है। दलित समाज के लोगों के मरने के बाद भी जातिवाद पीछा नहीं छोड रहा, क्योंकि अधिकतर गांव में दलितों के शमशान घाट भी अलग से हैं, जबकि शमशान घाट गांवों में भी शहरों की तर्ज पर सर्वजातीय होने चाहिए। उन्होंने बताया कि इसको लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा पहली बार जिला स्तर पर समीक्षा बैठकों का आयोजन करने जा रहा है, ताकि दलित समाज के लोगों को यह अहसास हो कि उनका उत्पीडन जरूर रोका जाएगा। ईश्वर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में जो भी लिखित रूप से शिकायत आती है। उस पर जरूर कार्रवाई होती है तथा पीडित को हर हाल में न्याय मुहैया करवाया जाता है। संविधान में आयोग को काफी शक्तियां दी गई हैं।

जनादेश 

यहां कानून का नहीं देवता का राज है

http://www.janadesh.in/InnerPage.aspx?Story_ID=6830

 
जबरसिंह वर्मा
करीब सात हजार फुट से अधिक की ऊंचाई पर बसा उत्तराखंड का जौनसार बाबर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है लेकिन साथ-साथ यह सामाजिक भेदभाव और शोषण आधारित व्यवस्था के लिए बदनाम भी है. यहां आज भी देश का नहीं बल्कि ‘मंदिर’ का कानून चलता है, विभिन्न मान्यताओं, परंपराओं, नीतियों और रीति-रिवाज के नाम पर दलितों का शोषण होता है. हिमालय के अंचल में बसे इस क्षेत्र की भौगोलिक विशेषता के कारण यहां के सवर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) भी जनजाति घोषित हैं इसलिए यहां अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम (एससीएसटी एक्ट) भी लागू नहीं है. यह क्षेत्र सन 1967 से ही जनजाति घोषित है और यहां के सवर्णों को जनजातीय आरक्षण का लाभ मिलता है, नतीजा तकरीबन हर घर में सरकारी अधिकारी मिलते हैं. आश्चर्य नहीं कि जौनसार बाबर को उत्तराखंड के सबसे संपन्न क्षेत्रों में से एक माना जाता है. बहरहाल यह संपन्नता पूरी तरह आर्थिक प्रतीत होती है क्योंकि अगर समृद्धि का एक कतरा भी मानसिक स्तर पर पहुंचा होता तो रीति रिवाज के नाम पर दलितों का जो शोषण हमें देखने को मिल रहा है, वह न होता.
दरअसल जौनसारियों के अराध्य देव महासू हैं. उनके कई भव्य मंदिर भी वहां हैं. माना जाता है कि महासू देवता के रहते कानून, पुलिस, प्रशासन की यहां कोई जरूरत नहीं है. नतीजतन, देवता के नाम पर कायदे कानून बनाने और दंड आदि देने का अधिकार इन मंदिरों के पुजारियों और संरक्षकों आदि ने हथिया रखा है. यह व्यवस्था दलितों के शोषण की बुनियाद बनती है. यह पूरा क्षेत्र आज भी डायन और दासी प्रथा जैसी रुढिय़ों को ढो रहा है. यही वजह है कि हनोल स्थित महासू देवता के मंदिर में क्षेत्र के प्रसिद्ध लोक गायक नंदलाल भारती ने अलबम की शूटिंग के दौरान मंदिर के दरवाजे के भीतर सर क्या डाला, तमाशा ही खड़ा हो गया.मंदिर के पुजारी नाराज हो गये और न केवल मंदिर परिसर में गंगा जल छिडक़ कर उसे पवित्र किया बल्कि खुद भी स्नान को चले गये. मानो इतना ही काफी नहीं था, उन्होंने भारती को भरपूर भला बुरा कहने के बाद जुर्माना चुकाने का आदेश भी सुना दिया. विडंबना देखिये कि भारती खुद महासू देवता की स्तुति में गीत गाने के लिये प्रसिद्ध हैं. इस घटना के साल भर बाद जब राखी नामक दलित युवती ने मंदिर में जाने की जुर्रत की तो पुजारियों ने उसे अर्द्धनग्न करके लोगों के सामने बाहर खदेड़ दिया. इसी तरह लखवाड़ स्थिति महासू मंदिर में जौनसार से दुल्हन को लेकर लौटी गढ़वाल क्षेत्र के कांडी गांव की एक बारात को ग्रामीणों ने इसलिए दो घंटे तक घेर कर रखा, क्योंकि दूल्हा दुल्हन मंदिर के आंगन के उस हिस्से तक चले गये थे जहां सवर्ण जाति के लोग अपने जूते रखते हैं.
इस ‘अपराध’ के लिये दोनों पक्षों को न केवल सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी बल्कि एक बकरा और 501 रुपये तुरंत देने के अलावा यह आश्वासन देना पड़ा कि मंदिर में चांदी के सिक्के चढ़ायेंगे. दलित सामाजिक कार्यकर्ता ध्वजवीरसिंह इस विडंबना की ओर संकेत करते हुए कहते हैं कि देवता के मंदिर बनाने, धार्मिक अनुष्ठान करने के लिये दलितों से चंदा आदि वसूला जाता है, मंदिर निर्माण में भी उनका योगदान लिया जाता है, राजमिस्त्री, मिस्त्री, मजदूर से लेकर मूर्तिकार तक सब उनके होते हैं लेकिन मंदिर तैयार होते ही उनको अछूत ठहराकर प्रवेश तक से वंचित कर दिया जाता है.
मंदिरों में पुजारी- पुरोहित दलितों का चढ़ावा सीधे हाथ में लेने की बजाय पहले जमीन पर रखवाते हैं, फिर वहां से उठाते हैं. तर्क है कि दलित के हाथ के नीचे सवर्ण (पुजारी) का हाथ नहीं रहना चाहिए. मंदिर में चढ़ावा जमीन पर रखकर नहीं देने पर कई बार दलितों संग मारपीट हो चुकी है. पेयजल के स्रोतों पर दलितों को यह कह कर नहीं जाने दिया जाता है कि वह अपवित्र हो जायेगा. नतीजतन दलित गंदा पानी पीकर बीमार होने को अभिशप्त हैं. महासू के किसी भी मंदिर में आप यदि गये तो पुजारी ‘आप किस जाति के हो’ ये पूछने की बजाय सीधे कहेगा ‘आप राजपूत हो या ब्राहमण’ ? वजह साफ है, यहां इन जातियों के सिवाय किसी को प्रवेश की इजाजत ही नहीं. चकराता तहसील मुख्यालय से सटे बाडो गांव में दलितों की स्थिति की असली तस्वीर दिखती है. जो दलित महिला या पुरुष गांव में सवर्णों के साथ काम पर (पशु चराने, घास काटने, खेतों में काम करने) जाता है, उसके लिए टूटे-फूटे बर्तन अलग स्थान पर रखे होते हैं। खाना खाते समय दलित खुद इन बर्तनों को निकालेगा और खाने के बाद धोकर वहीं रखेगा. बमुश्किल 100 मीटर के दायरे में बसे करीब 40 परिवारों के बाडो गांव में 14 दलित परिवारों का 10 फुट की संकरी गली में बना एक खंडहरनुमा सामुदायिक भवन है, वहां से 50 फुट की दूरी पर 25 सवर्ण परिवारों का दो मंजिला आलीशान भवन है. त्रासदी तो यह है कि यहां दलित अपने सामुदायिक भवन में भी प्रवेश नहीं कर सकते. जबकि सामुदायिक भवन तथा वहां मौजूद तमाम चीजें सरकारी पैसे से लोगों के उपयोग के लिये खरीदी गयी हैं. कुछ गांवों में दलित मंदिर के सामने से और गांव के सार्वजनिक रास्ते से गुजरते समय जूते उतारकर गुजरते हैं. कालसी गांव में दलित प्रधान ध्यानचंद के वकील बेटे ने प्रेम प्रसंग के चलते सर्वण युवती संग विवाह रचा लिया, तो पूरे क्षेत्र के सवर्ण उन पर टूट पड़े. बुजुर्ग, महिला से लेकर बच्चे तक की पिटाई की, हड्यिां तक तोड़ दीं. बुलडोजर की मदद से नया घर ध्वस्त कर दिया गया. सवर्णों की इस भीड़ का नेतृत्व भाजपा के एक विधायक कर रहे थे. एक विवाह समारोह में सवर्णों की पंक्ति में बैठकर खाना खा रहे दलित युवक की न केवल पिटायी की गयी बल्कि उससे भारी जुर्माना भी लिया गया. ये घटनायें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं. इन पर न मीडिया कान देता है न प्रशासन. सरकारी स्कूलों में दलित बच्चे जरूर पढ़ रहे हैं लेकिन मध्याह्न भोजन बनाने वाली कोई स्त्री दलित नहीं है. दलित जनप्रतिनिधियों के साथ प्रताडऩा, मारपीट, छेडख़ानी और बलात्कार की घटनाएं आये दिन होती रहती हैं. उनकी सुनवाई न आकाश में बैठे देवता कर रहे हैं न ही जमीन पर लोकतंत्र के ‘मंदिर’ में बैठे नये देवता. कानून बना मजाक जौनसार के सवर्ण अनुसूचित जनजाति में आते हैं यही वजह है कि यहां यदि कोई सवर्ण किसी दलित के साथ ज्यादती करता है तो वह एससीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई भी नहीं कर पाता क्योंकि सवर्ण खुद एसटी घोषित है. दलितों पर हो रहे अत्याचार को रोकने की राह में यह सबसे बड़ा अड़ंगा है.
‘मान्यता, संस्कृति, आस्था और परंपरा के नाम पर दलितों के मंदिर प्रवेश पर रोक को जायज नहीं ठहराया जा सकता. पार्टियों और सरकारों को यह सुनिचित करना चाहिए कि दलित समुदाय को उनके संवैधानिक अधिकार प्राप्त हों.’ – डा. सुनीलम, राष्ट्रीय संयोजक, समाजवादी समागम —— ‘ जौनसारी कोई समुदाय नहीं, बल्कि जाति आधारित समाज है. जौनसार-बाबर में कोई जनजाति निवास नहीं करती. यहां समूचे उत्तराखंड की ही तरह जाति व्यवस्था विद्यमान है और दलितों के साथ छुआछूत होता है, बल्कि जौनसार में जातिगत भेदभाव ज्यादा ही है. क्षेत्र के आधार पर जनजाति घोषित होने से यहां के सवर्णों को आरक्षण मिल रहा है, जो खत्म होना चाहिए. संसद की एक समिति ने जौनसार क्षेत्र का दौरा करके अपनी रिपोर्ट में जौनसार-बाबर को जाति आधारित समाज बताते हुए इसे जनजाति क्षेत्र से बाहर करने की सिफारिश की है। एलबीएसएनएए मसूरी के प्रशिक्षु अधिकारियों की रिसर्च रिपोर्ट में भी जौनसार को जनजाति क्षेत्र से बाहर करने की सिफारिश की गई है. यह गंभीर मामला है, जिस पर भारत सरकार को त्वरित कार्यवाही करनी चाहिए.’ – प्रदीप टम्टा, पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता उत्तराखंड —- ‘जौनसार की कुल आबादी में कोल्टा जाति करीब 40 फीसदी है, जो पूरे उत्तराखंड में अनुसूचित जाति में शामिल है लेकिन, जौनसार में इसे राजनैतिक लाभ देने के लिए साजिशन अनुसूचित जनजाति घोषित कर दिया गया. इससे वहां की विधानसभा सीट जनजाति के लिए आरक्षित हो गई है, जबकि पंचायत चुनावों में भी जनजाति को ज्यादा सीटें मिलती हैं. एक तरफ जहां कोल्टा जनजाति में होने से अल्पसंख्यक हैं और राजनीति में पूरी तरह निष्प्रभावी, वहीं शेष दलितों का भी यही हाल है. उत्तराखंड विधानसभा को कोल्टा समुदाय को एससी में शामिल करने के लिए संकल्प प्रस्ताव पारित कर जल्द से जल्द केंद्र को भेजना चाहिए. रहा मंदिर प्रवेश का सवाल तो दलितों को मंदिरों में जाने की जरूरत ही क्या है? इससे दलितों को कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि हताशा ही हाथ लगेगी. मंदिर में चले भी गए तो पुजारी नहीं बनने दिया जाएगा.’ चंद्रसिंह, पूर्व आईएएस-कमिश्नर, उत्तराखंड (शुक्रवार )

दैनिक भास्कर

भाई के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग

http://www.bhaskar.com/news/MP-MUR-MAT-latest-morena-news-031030-2278061-NOR.html

मुरैना | दलित जागरण मंच के महामंत्री राजाराम सोलंकी ने भाई के हत्यारों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है। बागचीनी थाना क्षेत्र के कुम्हेरी में निवास करने वाले राजाराम ने बताया कि 1 जून को कुछ आरोपियों ने उसके भाई वासुदेव की हत्या कर लाश जिरेना निबरी तिराहे पर फेंक दी थी। इस संबंध में बागचीनी पुलिस ने मर्ग कायम किया है। मृतक के शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। राजाराम ने बताया कि पुलिस को आरोपियों के नाम भी बताए हैं लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही। 

नई दुनिया

अजाक्स थाने का घेराव, अनिश्चितकालीन अनशन

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/damoh-nd-nd-425438

दमोह। जिले में इन दिनों दलितों पर अत्याचार के मामलों में इजाफा हो रहा है। गुरुवार की सुबह जहां जीआरपी के दो आरक्षकों द्वारा दलित युवक के साथ मारपीट करने पर दलित समाज के लोगों ने अजाक्स थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग की। वहीं, दोपहर में गैसाबाद के अंचलपुरा गांव के पीड़ितों ने मामले में दोषियों पर डकैती की धारा बढ़ाने की मांग को लेकर आम्बेडकर चौराहा पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया।

दलित की पिटाई

शहर के पथरिया फाटक के समीप रहने वाले राजा अहिरवाल के साथ बुधवार की रात जीआरपी के दो पुलिसकर्मियों ने पिटाई कर दी। इस पिटाई के बाद गुरुवार की दोपहर करीब 11 बजे पार्षद प्रतिनिधि पप्पू कसोटिया के नेतृत्व में आधा सैकड़ा से अधिक दलित युवक अजाक्स थाने पहुंचे और उन्होंने दोनों पुलिसकर्मियों पर अनावश्यक मारपीट करने का आरोप लगाया। इन युवकों ने पिटाई के मामले में पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज करने की मांग की है।

अजाक्स डीएसपी हेमपाल सिंघई ने पूरे मामले की निष्पक्ष विवेचना करने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस मामले में जीआरपी पुलिसकर्मी बसंत कौल ने बताया कि रात्री गश्त के दौरान कुछ युवक रेलवे की गोदाम के समीप तीन बोरी अनाज फेंककर भागे थे। हमें तो आरोपी मिले भी नहीं। अगर मिल जाते तो हम उन्हें क्यों छोड़ते।

डकैती की धारा जोड़ने की मांग अंचलपुरा गांव के करीब आधा दर्जन दलित परिवार के लोगों समेत संत रविदास भीमराव युवा समाज सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बीते दिवस एसपी व कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिए थे। ज्ञापन में उल्लेख किया गया था कि अगर उनके साथ पिटाई करने वाले और उनके घरों में तोड़फोड़ करने वाले लोगों के खिलाफ डकैती की धारा बढ़ाई जाए। डकैती की धारा इसलिए क्योंकि तोड़फोड़ के दौरान आरोपी उनके घरों से सामग्री भी चुरा ले गए थे। इस मांग को लेकर ही अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया गया। इस मौकेपर बलराम, खिलइया, माखन, नन्नाई, कोमल, धन्नू, परमू समेत संत रविदास भीमराव युवा समाज सेवा समिति के जुगेंद्र सिंह मौजूद हैं।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

 

 

 

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