दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 16.07.15

सासाराम: भाई के सामने 2 नाबालिग बहनों से 15 लड़कों ने किया गैंगरेप – आज तक

http://aajtak.intoday.in/story/bihar-sasaram-15-boys-raped-two-sisters-in-front-of-her-brother-1-822956.html

नाबालिक कशोरी से सामूहिक दुष्कर्म बनाया MMS – पंजाब केसरी

http://www.punjabkesari.in/news/article-378618

दलित को खेत से गुजरने की मिली ये सजा! नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/other-states/other-cities/dalit-beaten-for-crossing-forbidden-land/articleshow/48086290.cms

दलित के साथ जीआरपी आरक्षकों ने की मारपीट, अजाक थाने का घेराव – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/damoh-grp-constables-of-the-assault-police-besieged-ajk-424817

दलितों की बरात को भवन में घुसने से रोका – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/bagpat-12602889.html

इस कुएं के पास दलितों का जाना है मना, ऊंची जाति के लोगों का है कब्जा – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news-hcf/UP-chamars-dalit-untouchability-in-jhansi-latest-news-5053625-PHO.html

दलित के प्लॉट पर किसान का कब्जा – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/punjab/patiala-12600371.html

साहब, हम जंगल में रह लेंगे, गांव में नहीं – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-damoh-news-030041-2265260-NOR.html

अमीर को राशन कार्ड, गरीब खाली हाथ – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/sitamarhi-12603691.html

दो युवकों की मौत के बाद गम में डूबा बहादरपुर – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/muzaffarnagar-12603271.html

हत्या के विरोध में दलित मोर्चा का प्रदर्शनदैनिक जागरण

http://www.jagran.com/haryana/panchkula-12602227.html?src=LN

राष्ट्रपति से कलक्टर तक गुहार फिर भी इंसाफ का इंतजार – राजेश्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/the-president-appealed-to-the-collector-still-await-justice-1242323.html

सरकारी आंकड़ों के समंदर में तैरती सच्‍चाई – आउट लुक

http://www.outlookhindi.com/view/neelabh-mishra-on-secc-3128

आज तक

सासाराम: भाई के सामने 2 नाबालिग बहनों से

१५ लड़कों ने किया गैंगरेप

http://aajtak.intoday.in/story/bihar-sasaram-15-boys-raped-two-sisters-in-front-of-her-brother-1-822956.html

बिहार के सासाराम में दो दलित बहनों से गैंगरेप का शर्मनाक मामला सामने आया है. सासाराम स्थित ताराचंडी मंदिर से घर लौटने के दौरान 15 युवकों ने दो बच्चियों से उनके भाई के सामने गैंगरेप किया. दोनों बच्चियां छठी और सातवीं क्लास में पढ़ती हैं.

घटना मुफस्सिल थाना के चांद तनपीर पहाड़ की है. तार चंडी मंदिर से पूजा कर के लौटने के दौरान ये घटना हुई. दोनों बच्चियां ममेरी और फुफेरी बहन हैं, जिसमें एक का घर बक्सर के मोहरिया और दूसरे करगहर के नीम डिहरा का रहने वाली है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की जानकारी देने के बावजूद लापरवाही बरतते हुए पुलिस दो घंटों बाद घटनास्थल पर पहुंची.

 अस्पताल में चल रहा है इलाज

पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद दोनों को सासाराम के सादर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ये लोग सासाराम के बौउलिआ में एक किराए के मकान में रह रहे थे. मामले में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं. हालांकि पुलिस दावा कर रही है कि अपराधिओं की पहचान कर ली गई है.

रस्सी से बांधकर पीटा 

पीड़ित बच्चियों के भाई ने कहा, ‘हमको पिस्टल के दम पर रस्सी से बांध कर पीटा और मेरी बहनों के साथ गैंगरेप किया.’ मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर कृष्णा प्रसाद मुफस्सिल ने कहा की दोनों बच्चियों के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आ रहा है. पुलिस जांच कर रही है. डॉक्टरों ने बताया कि बच्चियों की मेडिकल जांच की जा रही है.

पंजाब केसरी 

नाबालिक कशोरी से सामूहिक दुष्कर्म बनाया MMS

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मुरैना: मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक दलित नाबालिग किशोरी को अगवा कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके अश्लील एमएमएस बनाने का मामला सामने आया है। 

जानकारी के मुताबिक अम्बाह कस्बे निवासी 16 साल की एक दलित किशोरी को विष्णु परमार नामक युवक 23 जून को बहला-फुसलाकर ले गया था। आरोपी ने 3-4 दिन उसे अपने साथ रखने के बाद छोड़ दिया। किशोरी ने घर आकर परिजनों को बताया कि विष्णु और उसके दो साथियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, लेकिन परिजनों ने बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत नहीं की।

कुछ दिनों बाद पता चला कि आरोपी विष्णु ने किशोरी का अश्लील एमएमएस भी बनाया था और इसके आधार पर उसने किशोरी को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोपी की धमकियों से परेशान होकर परिजन किशोरी को लेकर मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान मुरैना के पुलिस अधीक्षक विनीत खन्ना से मिले और उन्हें सारी घटना बताई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अम्बाह थाना पुलिस ने विष्णु और उसके अन्य दो साथियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कृत्य का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने उस वाहन के चालक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है, जिसमें बिठाकर किशोरी को ले जाया गया था। 

नवभारत टाइम्स

दलित को खेत से गुजरने की मिली ये सजा!

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कोयंबटूर भारत का संविधान भले ही समानता के अधिकार की बात करता है लेकिन इस अधिकार की धज्जियां उड़ाते हुए समाज में भेदभाव करने वाली मानसिकता सामने आती रहती है। 

तिरुपुर के उडुमालपेट में 40 साल के दलित के साथ हुई इस घटना में गैर-दलित समुदाय के एक व्यक्ति की जमीन से गुजरने पर उसे लोहे के एक खंभे से बांध दिया गया और उसे बेरहमी से पीटा गया। पलानी के हाथों को पीछे की तरफ मोड़कर बांध दिया गया, और उसने जो पैजामा पहना था उसी से उसके पैरों को बांध दिया गया। फिर उसे तब तक पीटा गया जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गया। दलित के साथ हुई यह घटना तब सामने आयी जब चार दिन पहले मानवाधिकार कार्यकर्ता ने इस मामले को उठाया। पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है लेकिन अभी तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

दलित पर यह हमला 9 जुलाई की शाम 5.30 के करीब हुआ। जब पलानी गैर-दलित समुदाय के थिरुमलाईसामी नाम के व्यक्ति के खेत से होकर गुजर रहा था तो उसे खेत के मालिक ने घेर लिया और उसे बुरी तरह पीट दिया। 

अस्पताल में भर्ती दलित ने फोन पर बातचीत में बताया, ‘जैसे ही थिरुमलाई ने मुझे अपने खेत से गुजरते देखा तो गुस्से में आग-बबूला हो गया और मुझे धमकियां देने लगा। यह रास्ता सड़क से नजदीक पड़ता है इसलिए मैं इधर से जा रहा था। बाकी सारे गांव वाले भी इसी रास्ते से होकर जाते है। थिरुमलाई ने मुझसे कहा कि मैं एक दलित होते हुए उसके खेत से कैसे गुजर सकता हूं?’ मैंने इसका जवाब देते हुए कहा कि एक दलित के खेत से गुजरने से क्या बिगड़ जाएगा जिसके तुरंत बाद ही थिरुमलाई और उसका बेटा मिलकर मुझे पीटने लगे।’ 

‘उन्होंने मेरे हाथों को पीछे बांध दिया और मुझे लोहे के एक खंभे से बांध दिया। उसके बाद वे लकड़ी के डंडों से मुझे पीटने लगे। उन्होंने मुझे इतना पीटा कि मेरे सिर पर बहुत चोटें आईं और मेरे दांत भी टूट गए।’ 

करीब आधे घंटे तक बाप-बेटे ने मिलकर दलित की पिटाई की जिसके बाद वह बेहोश हो गया। तब थिरुमलाई ने एंबुलेंस बुलाई और उसे अस्पताल भेजा।

अपने पति को पिटते देख जब पलानी की पत्नी पी. लक्ष्मी वहां पहुंची तो उसे वहां से भगा दिया गया। इसी बीच थाली पुलिस पहुंची और पलानी को अस्पताल में भर्ती करवाया। 

एसपी ए. कानागेश्वरी ने बताया, ‘आरोपियों पर एससी एसटी ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अभी आरोपी फरार हैं, उन्हें पकड़ने के लिए एक टीम बना दी गई है।’ 

गैर-दलित समुदाय के कुछ लोगों ने पलानी पर चोरी करने का आरोप लगाया था लेकिन पुलिस ने अपनी जांच में आरोप को फर्जी पाया।

नई दुनिया

दलित के साथ जीआरपी आरक्षकों ने की मारपीट, अजाक थाने का घेराव

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दमोह। पथरिया फाटक निवासी एक दलित को देररात रेलवे स्टेशन पर पदस्थ दो जीआरपी आरक्षकों ने रोका और मारपीट कर दी। जिसके विरोध में गुरूवार सुबह दलित अजाक थाना पहुंचे और घेराव कर दिया। यहां दलितों ने आरक्षकों पर कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार पथरिया फाटक निवासी राजा अहिरवार स्टेशन पर पल्लेदारी का कार्य करता है। बुधवार की रात्रि 11 बजे स्टेशन पर जीआरपी थाना के दो आरक्षक प्रदीप रघुवंशी और बसंत कौल ने चोरी के संदेह के चलते राजा के साथ मारपीट कर दी। सुबह दलित समाज के लोगों को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने अजाक्स थाने का घेराव करते हुए आरक्षकों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद मामला शांत हुआ।

दैनिक जागरण

दलितों की बरात को भवन में घुसने से रोका

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जागरण संवाददाता, बागपत : बावली गांव में दबंगों ने ऊंच-नीच की दीवार खड़ी करके दलित समाज की बारात को सामुदायिक भवन में जाने से रोक दिया। बारात काफी देर तक बाहर ही खड़ी रही। बसपा के बड़ौत विधायक के दखल के बाद पुलिस ने गांव में पहुंचकर ताला खुलवाया। इसके बाद बरात अंदर जा सकी।

बावली गांव की मोलू पट्टी में बुधवार को जगबीरा की बेटी रचना की शादी थी। बारात बैंडबाजे के साथ डा. अंबेडकर सामुदायिक भवन में पहुंची। भवन का ताला खोला जाने लगा तभी गांव के ही कुछ दबंग पहुंचे और लोगों को ताला खोलने से रोक दिया। अपमान का घूंट पीकर दलित समाज के लोग न्याय की आस में क्षेत्रीय विधायक लोकेश दीक्षित के पास पहुंच गए। विधायक, बारात रुकी होने का समाचार सुनकर फौरन परिजनों व दलित समाज के कुछ लोगों को लेकर कलक्ट्रेट पहुंच गए। उन्होंने पूरा वाकया एसडीएम व ओसी कलक्ट्रेट राकेश कुमार ¨सह को सुनाया।

ओसी ने फौरन पुलिस को मौके पर भेजा व प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति नियंत्रित रखने को निर्देशित किया।

विधायक लोकेश दीक्षित ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ताला खुलवाया और बारात को अंदर जाने दिया।

दैनिक भास्कर

इस कुएं के पास दलितों का जाना है मना, ऊंची जाति के लोगों का है कब्जा

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झांसी. देश की आजादी के करीब सात दशक बाद भी लोग छुआछूत की भावना से बाहर नहीं निकल पाए हैं। आज भी दलित समाज संविधान में दिए गए अधिकारों से वंचित है। उन्हें अपमान और अधीनता का भी सामना करना पड़ता है। इसका ताजा उदाहरण बुंदेलखंड में देखने को मिला है। यहां के दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां सवर्ण जाति के लोगों ने कुओं पर कब्जा कर रखा है। यही नहीं, दलित इसका इस्तेमाल करना तो दूर पानी को छू भी नहीं सकते हैं। ऐसे में उन्हें गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।

झांसी के रक्सा इलाके का गांव बाजना हर तरह से समृद्ध नजर आता है। पहाड़ों के आसपास बसा ये गांव विकास के लिए अंबेडकर ग्राम के तहत चयनित हुआ है, लेकिन छुआछूत से लड़ने को समर्पित रहे भीमराव अंबेडकर के नाम से चयनित हुए इस गांव में ही दलितों के साथ अस्पृश्यता का व्यवहार किया जा रहा है। झांसी से महज 20 किमी दूर बाजना गांव की आबादी करीब 2500 है। यहां 10 से ज्यादा मोहल्ले हैं, जो एक-एक किमी की दूरी पर बसे हैं। इनमें से दो में सिर्फ दलित रहते हैं।

 सवर्ण जाति के लोगों ने किया कब्जा

बताया जा रहा है कि रोतन और चमराय टोला के लोग सालों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। दोनों जगहों पर बने कुओं पर सवर्ण जाति के कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। दलितों को यहां से पानी भरने की इजाजत नहीं है। ऐसे में दलित गांव से काफी दूरी पर स्थित एक गंदे कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं, इन दोनों दलित बस्तियों में करीब 500 की आबादी के बीच सिर्फ दो हैंडपंप हैं, वो भी गांव से बिल्‍कुल बाहर। अक्सर ये हैंडपंप खराब हो जाते हैं। इस वजह से दलितों को काफी परेशानी होती है।

 बीमार पड़ जाते हैं ग्रामीण

चमराय गांव की शोभा बताती हैं कि पानी के कारण वह कई बार खुद को शापित महसूस करते हैं। गांव में हैंडपंप खराब रहता है। एक साफ-सुथरा कुआं है, लेकिन दलित इस कुएं से पानी भरने के लिए बाल्टी तक नहीं डाल सकते। सवर्ण जाति (ठाकुर) के लोग कहते हैं कि पानी छूत हो जाएगा। इसलिए उन्हें कुएं के पास तक जाने की इजाजत नहीं है। वृद्ध ग्यासी ने बताया कि यह क्रम कई सालों से चला आ रहा है। लोग गांव से बाहर बने एक कुएं का पानी पीते हैं। गंदे पानी की वजह से ग्रामीण कई बार बीमार भी पड़ जाते हैं।

दैनिक जागरण

दलित के प्लॉट पर किसान का कब्जा

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समाना (पटियाला) उपमंडल के गाव कोटला नसरू निवासी रूलदा सिंह ने एसडीएम आमरेशवर सिंह को एक शिकायत दी, जिसमें उसने गांव कोटला नसरू के जमीन की निशानदेही कराने की मांग की। रूलदा सिंह ने एसडीएम को दिए गए माग पत्र में कहा कि पंजाब सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले दलित लोगों को चार मरले के प्लॉट दिए जाने के तहत उसे भी इसी खसरा नंबर से चार मरले का प्लाट अलाट किया गया था, लेकिन उक्त जमीन पर गांव के ही एक किसान ने अपना कब्जा जमा रखा है।

इस संबंध में संबंधित पटवारी और तहसीलदार समाना को कई बार निशानदेही कराने के लिए आवेदन किया जा चुका है, लेकिन हर बार निशानदेही करने से टाल मटोल किया जाता रहा है। रूलदा सिंह ने माग पत्र में यह भी कहा है कि जिस किसान ने उसकी चार मरले जमीन पर कब्जा जमा रखा है। संबंधित पटवारी उस किसान का रिश्तेदार है। इसके चलते हर बार निशानदेही कराने में टाल मटोल किया जाता है। इस संबंधी एसडीएम आमरेशवर सिंह ने कहा कि रूलदा सिंह की तरफ से एक शिकायत उनके पास पहुंची है। इस संबंधी जल्द तहसीलदार को निशानदेही कराने के लिए कहा गया है।

दैनिक भास्कर

साहब, हम जंगल में रह लेंगे,गांव में नहीं

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गैसाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम अचलपुरा में 23 एवं 24 जून रात दो गुटों में हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को गांव के दलितों ने एसपी आफिस पहुंचकर एक आवेदन देते हुए सुरक्षा प्रदान किए जाने एवं गांव से बाहर रहने की अनुमति प्रदान करने की मांग की है। संत रविदास भीमराव युवा सेवा समिति के नेतृत्व में करीब डेढ़ दर्जन दलित एसपी आफिस पहुंचे और एएसपी अरविंद कुमार दुबे को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया है कि हक्कू, कृपाल, राजा, कल्लू ने दलितों के साथ मारपीट कर घरों में तोड़फोड़ की और लूटपाट की इसकी शिकायत पुलिस थाना में दर्ज कराई गई थी।

लेकिन रिपोर्ट के अनुसार शिकायत दर्ज नहीं की गई। दसोदाबाई ने बताया कि घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल हैं आरोपियों ने उनके घर में रखी सामग्री भी लूट ली है कुछ आराेपी जेल में चले गए हैं लेकिन अभी भी उन्हें गांव में रहने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उनके बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह जंगल में रह लेंगे लेकिन गांव में रहना नहीं चाहते है इसके लिए उन्हें गांव से बाहर जाने की अनुमति दी जाए।

संत रविवाद भीमराव युवा समाज सेवा समिति के अध्यक्ष जुगेंद्र कुमार का कहना है कि यदि दलितों को न्याय नहीं मिला तो जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। एएसपी ने कहा ने गांव में पुसिल तैनात हैं। आवेदन आया है जांच के लिए एसडीओपी हटा एवं अजाक्स थाना के उपनिरीक्षक को भेजकर जांच करा लेते हैं। 

गैसाबाद थाना क्षेत्र के अचलपुरा के दलितों ने बुधवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। 

 दैनिक जागरण

अमीर को राशन कार्ड, गरीब खाली हाथ

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सीतामढ़ी। सरकार द्वारा गरीबों की सुविधा के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन सिस्टम में व्याप्त खामियां योजनाओं को धरातल पर उतारने में बाधक बनी हुई है। पदाधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही से आज भी बड़ी संख्या में गरीब सरकरी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। यह विडंबना है कि अमीर व रसूक वाले लोग गरीबों के हित में जारी राशन-केरोसिन कूपन से लाभांवित हो रहे हैं और गरीब खाली हाथ इस सुविधा के लिए टकटकी लगाएं हैं।

कूपन के लिए सड़क किनारे फूट-फूट कर रो रही थी गरीब महिला ऐसा ही नजारा प्रखंड कार्यालय के निकट सोनबरसा पंचायत के पश्चिमी मोहल्ला वार्ड सात में देखने को मिला। जहां राशन कार्ड से वंचित एक गरीब महिला सड़क किनारे फुट-फूट कर रो रही थी। पूछने पर पता चला कि महिला राजदेव मंडल की चालिस वर्षीया पत्नी जगतारण देवी है। वह एक छोटी सी झोपड़ी में गुजर बसर करती है। पति बेरोजगार है। दो जून की रोटी मुश्किल से जुटाने वाली इस महिला को पहले भी कूपन से वंचित कर दिया गया था। जबकि कई धनवान लोगों को केरोसिन कार्ड उपलब्ध कराया गया था। इस वार्ड के दर्जनों गरीब राशन-केरोसिन कार्ड से वंचित हैं।

क्या कहते हैं वितरण में लगे शिक्षक कार्ड वितरण में लगे पटेल नगर मध्य विद्यालय के शिक्षक विजय कुमार ने बताया कि कार्ड से वंचित लोगों का आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। बताया कि वार्ड बारह के दलित व अल्पसंख्यक मोहल्ले में बड़ी संख्या में लोग कूपन से वंचित हैं। जिसके कारण अन्य लोगों के बीच कार्ड वितरण करने में परेशानी हो रही है।

कहते हैं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी

इस संबंध में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी महेश ठाकुर ने बताया कि बीपीएल-एपीएल सूची के आधार पर कार्ड का वितरण होता है। अगर बीपीएल सूची वाले कूपन से वंचित हैं, तो उन्हें एमओ द्वारा कार्ड दिया जाएगा।

कहते है बीडीओ सह सीओ प्रभारी बीडीओ सह सीओ सत्येन्द्र कुमार दत्त ने बताया कि पूर्व में किए गए सर्वे के आधार पर कार्ड का वितरण किया जा रहा है। यह उनके स्तर का काम नहीं है। बहरहाल सरकारी योजनाओं में गरीबों की उपेक्षा से यही कहा जा सकता है कि लाचार गरीबों को सिस्टम की खामियां बेदम कर रही है।

 दैनिक जागरण

दो युवकों की मौत के बाद गम में डूबा बहादरपुर

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सिखेड़ा (मुजफ्फरनगर): क्षेत्र के बहादरपुर गांव में जहरीली शराब पीने से दो युवकों की मौत के बाद पूरा गांव शोक में डूब गया है। वहीं दो युवक अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। परिजनों ने किसी कार्रवाई से इन्कार किया है।

गत मंगलवार की रात बहादरपुर गांव निवासी दलित अजय व नीरज की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी, जबकि मुकेश व संजीव को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतकों के परिजनों ने बिना किसी कार्रवाई के रात में ही दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया था।

एक साथ दो मौत होने के बाद जहां मृतकों के परिवार में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं पूरा गांव भी गमजदा है। बुधवार को मृतक नीरज के भाई मोनू ने बताया कि नीरज, अजय, संजीव व मुकेश चारों दोस्त थे। सोमवार की शाम ही चारों ने एक साथ बैठकर शराब पी थी। उसी रात उन्हें बेचैनी शुरू हो गई। मंगलवार की सुबह हालात और खराब हुई तो परिजन ने पहले गांव में ही उपचार दिलाया। हालत में सुधार नहीं होने पर शाम को मुजफ्फरनगर अस्पताल ले जाने लगे। नीरज ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था, जबकि अजय ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। मामले में कोई कार्रवाई न चाहते हुए मृतकों के परिजनों ने पुलिस को सूचना नहीं दी। अस्पताल में भर्ती मुकेश व संजीव की हालत गंभीर बताई जा रही है। उधर एसओ सर्वेश कुमार ¨सह का कहना है कि बिना सूचना के वह मामले में कार्रवाई कैसे करते?

भरा पूरा परिवार छोड़ गए नीरज व अजय

मृतक नीरज मुजफ्फरनगर में दुकान करके इन्वर्टर व बैटरी आदि बनाकर बेचने का काम करता है और उसके परिवार में चार बच्चों के अलावा, मां-बाप व भाई-बहन भी हैं, जबकि अजय मजदूरी करता था और उसके परिवार में एक पुत्री, मां-बाप और भाई-बहन हैं। कुछ दिन पूर्व बिहार निवासी उसकी पत्नी छोड़कर चली गई थी। अस्पताल में भर्ती मुकेश व संजीव भी मजदूरी करते हैं।

शोक में डूबा गांव

एक साथ दो जवान मौत होने व दो युवकों की गंभीर हालत होने के कारण पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। बुधवार को जहां कई घरों में चूल्हे नहीं जले, वहीं गांव की महिलाएं और पुरुषों का मृतकों के घर दिनभर जमावड़ा लगा रहा। मृतकों के छोटे-छोटे बच्चों को देखकर हर किसी की आंख नम हो रही थी।

 दैनिक जागरण

हत्या के विरोध में दलित मोर्चा का प्रदर्शन

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पंचकूला राजीव कालोनी के एक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है। इस व्यक्ति की मंगलवार को किसी के साथ जबरदस्त लड़ाई हो गई थी। इसके बाद यह घर आया तो आधे घटे बाद ही इसकी मौत हो गई। इसकी मौत के विरोध में बुधवार को हरियाणा दलित मोर्चा ने सामान्य अस्पताल की मॉर्चरी के बाहर और मौली जागरा पुलिस चौकी के बाहर इक्ट्ठे होकर आरोपियों को तुरत गिरफ्तार करने की माग की। साथ ही इन लोगों ने शव को मौली जागरा की चौकी के आगे रखकर प्रदर्शन किया। देर शाम तक इन लोगों का प्रदर्शन जारी रहा।

मिली जानकारी के अनुसार राजीव कालोनी निवासी रोहताश (40) विजय सिंगला के पास गाड़ी चलाने का काम करता है। मंगलवार को वह अपने मालिक के साथ निरकारी भवन मौली जागरा के पास गाड़ी में खड़ा था। जहा पर अचानक एक सफारी गाड़ी वाले से उनकी मामूली टक्कर हो गई। इसके बाद सफारी चालक और रोहताश के बीच जमकर हाथापाई हुई। इसके बाद मामला मौली पुलिस चौकी पहुचा यहा पर पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच समझौता करवा दिया। समझौते के बाद जब रोहताश घर आया, तो शरीर में दर्द होने लगा और उसके परिजन उसे सामान्य अस्पताल सेक्टर 6 लेकर आए, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री के सामान्य अस्पताल के दौरे के चलते उसका पोस्टमार्टम नहीं हो सका। बुधवार को पूरी खबर आग की तरह कॉलोनी में फैल गई और दलित मोर्चा के प्रधान दलबीर सिंह के नेतृत्व में लोग सामान्य अस्पताल में पहुंच गए। दलबीर सिंह ने बताया कि रोहताश की मौत गुम चोटों के कारण हुई है और इसमें पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं करेगी, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं पुलिस ने लोगों के आक्रोश को पहले जो धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया था, उसमें धारा 302 में बदल दिया है।

 राजेश्थान पत्रिका

राष्ट्रपति से कलक्टर तक गुहार फिर भी इंसाफ का इंतजार

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 बीकानेर पिछले चार दशक से भूमिहीन एक दलित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला कलक्टर तक गुहार लगा चुका है, लेकिन उसे आज भी आशियाने का इंतजार है।

हैरानी की बात यह है कि उसके पास राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय से स्थानीय जिला प्रशासन को उसकी समस्या का समाधान करने के लिए कई बार पत्राचार भी हुआ, लेकिन किसी की कान पर जंू तक नहीं रेंगी। हालात यह है कि जवानी के दिनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने वाला यह व्यक्ति अब बुढ़ापे की दहलीज पर पहुंच गया है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई है।

गंगाशहर में अस्थाई रूप से रह रहा मांगीलाल राणा पूरी तरह से भूमिहीन है। उसने आशियाने के लिए तीन दशक पूर्व यूआईटी और जिला प्रशासन को आवेदन किया था। राणा का कहना है कि यूआईटी ने कुछ पैसे भी लिए, लेकिन बाद में उसे लौटा दिए। यही नहीं, गंगाशहर में 40 साल से कब्जाशुदा भूखण्ड का पट्टा बनवाने के लिए भी वह सालों से आवेदन कर रहा है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। राणा का कहना है कि उसे न्याय तो नहीं मिला, उलटे भूमाफिया ने उसके भूखण्ड का कुछ हिस्सा हड़प लिया। उसे परिवार के जान-माल की सुरक्षा की चिंता भी सता रही है।

इनका कहना है

मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं आज ही उसे बुलाकर मामले का पता करवाता हूं। हमारी कोशिश रहेगी कि उसे जल्द न्याय मिले।

हरिप्रसाद पिपरालिया,

अतिरिक्त जिला कलक्टर

आउटलुक

सरकारी आंकड़ों के समंदर में तैरती सच्‍चाई

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“इसी महीने जारी सामाजिक-आर्थिक-जाति जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़े देखकर हम दिल्ली में समुंदर खोजने लग गए। इन आंकड़ों के नुसार दिल्ली में मछली पकड़ने की मशीनी नौकाएं 14,468 परिवारों के पास हैं-बड़े समुद्र तटीय क्षेत्र वाले तमिलनाडु के 13,760 परिवारों के पास ऐसी नौकाओं से कहीं ज्यादा। और तमिलनाडु के बड़े तटीय भूभाग को पखारता विशाल समुंदर और उसमें दूर-दूर तक डूबती-उतराती, मछली मारने के लिए जाल फैलाती अनगिनत मशीनी और मानव चालित नौकाएं हमने आंखों देखी हैं।”

इस संदर्भ में झारखंड का आंकड़ा तो किसी का दिमाग फेर देने के लिए काफी है। उस पठारी वन्य प्रदेश में 36,160 परिवारों के पास मशीनी नौकाएं बताई गई हैं जो समुद्र तटीय गुजरात के आंकड़े 16,493 के मुकाबले लगभग सवा दो गुणा और तमिलनाडु के मुकाबले लगभग पौने तीन गुणा से ज्यादा हैं। कई बार आंकड़े इच्छित से अलग भी कोई तथ्य बयान कर देते हैं। मसलन, दिल्ली और झारखंड में समुंदर हो न हो, मशीनी नौका संबंधी आंकड़े साफ-साफ दिखा रहे हैं कि झारखंड और दिल्ली में भ्रष्टाचार अथवा अक्षमता का एक समुंदर जरूर है।

इसी तरह अन्य कई आंकड़ों के अलावा बिना सिर्फ अपने शारीरिक अंगों से मैला साफ कर ढोने वाले श्रमिकों के आंकड़े भी आपको चौंकाएंगे। आम जानकारी है कि सारे देश में खास दलित जातियों के लोग ही परंपरा से ऐसे काम में लिप्त हैं। लेकिन सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश के ऐसे कुल श्रमिकों में 50 प्रतिशत गैर दलित हैं। जबकि राज्यवार आंकड़ों के अनुसार गुजरात जैसे राज्य के आंकड़े तो अपने राज्य में ऐसी प्रथा के प्रचलन, जिसकी पुष्टि अन्य शोध और दस्तावेज करते हैं, को ही झुठलाते हैं।

उपरोक्त दोनों तरह के आंकड़ों के अपनी-अपनी तरह के अंतर्विरोधों का जिक्र हमने खास मकसद से किया है। ये आंकड़े सामाजिक -आर्थिक-जाति जनगणना के उन आंकड़ों में शामिल हैं जिनके आधार पर निर्धारित मानकों ने तय किया है कि कोई परिवार वंचित की श्रेणी में आएगा या नहीं। वंचित की श्रेणी में आने पर ही सरकारी सामाजिक-आर्थिक कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए किसी भी परिवार की हितग्राहिता तय होगी। यानी यह तय होगा कि किसी भी कार्यक्रम से कैसा परिवार लाभ लेने के योग्य है। ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र सिंह के साथ सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़े जारी करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बार-बार कल्याण कार्यक्रमों की सही टारगेटिंग यानी लाभार्थियों या हितग्राहितयों की सही निशानदेही की बात कही। लेकिन सोचिए, अगर निशानदेही गलत आंकड़ों या जानकारी पर होगी तो सही नहीं होगी, और अगर निशानदेही गलत हुई तो सही लोगों को लाभ नहीं मिलेगा। यानी जिन्हें लाभ मिलना चाहिए उन्हें शायद न मिले और जिन्हें नहीं मिलना चाहिए, उन्हें शायद मिल जाए।

इस आलोक के उपरोक्त दोनों आंकड़ों को देखें। मशीनी नौकाएं, अपनी श्रेणी में दो, तीन और चार पहिया वाहनों की मिल्कियत के साथ उन 14 मानकों का हिस्सा है। जिनमें से कोई एक भी पूरा करने पर कोई भी परिवार वंचित की श्रेणी से स्वत: बाहर हो जाएगा। ये 14 मानक हैं: (1) मशीनी दो/तीन/चार पहिया वाहनों/ मछली पकड़ने की नौकाओं की मिल्कियत, (2) मशीनी तीन/ चार पहिया कृषि उपकरण की मिल्कियत, (3) रु. 50,000/- की ऋण सीमा वाले किसान क्रेडिट कार्ड का होना, (4) परिवार के किसी सदस्य का सरकारी सेवा में होना, (5) सरकार में पंजीकृत गैर कृषि उद्यम वाले परिवार, (6) परिवार के किसी भी सदस्य की 10,000 रु. प्रतिमाह से अधिक होना, (7) परिवार के किसी सदस्य का आयकार दाता होना, (8) पेशा कर दाता होना, (9) तीन या ज्यादा पक्के कमरों और पक्की छत वाले घर में रहने वाले परिवार, (10) फ्रिज मिल्कियत, (11) अपना लैंडलाइन फोन होना, (12) ढाई एकड़ से ज्यादा सिंचित भूमि के साथ कम से कम एक सिंचाई उपकरण का स्वामित्व, (13) दो फसलों वाले 5 एकड़ या ज्यादा सिंचित भूमि का स्वामित्व और (14) साढ़े सात एकड़ या ज्यादा कृषि भूमि और एक सिंचाई उपकरण का स्वामित्व।

उसी तरह मैला ढोने वाले सफाई कर्मचारियों से संबंधित आंकड़े उन पांच मानकों का हिस्सा है जिनमें से कोई एक भी पूरा करने पर कोई परिवार स्वत: वंचित में शामिल हो जाएगा। ये पांच मानक हैं: (1) बेघर परिवार, (2) कंगाल और भीख पर निर्भर परिवार, (3) शरीर से मैला ढोने वाले सफाई मजदूर, (4) आदिम जनजाति समूह और (5) कानून के जरिये मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूर।

उपरोक्त दोनों श्रेणियों के मानकों की प्रामाणिकता क लिए जरूरी है कि संबंधित जानकारी और आंकड़े आसानी से पुष्टि योग्य हों। पहली श्रेणी के आंकड़े चूंकि लोगों को वंचित से वर्ग से बाहर रखने वाले हैं, इसलिए तर्कसम्मत है कि उन्हें संभावित लाभार्थी झूठमूठ खुद को उन्हें पूरा करने वाला नहीं बताएगा। यानी यदि गड़बड़ी हो तो जानकारी लेने या दर्ज करने वाले व्यक्ति से होगी।

दिल्ली या झारखंड में यदि इतनी मशीनी नौकाएं दर्ज की गईं तो मतलब यह कि दर्ज करने वाले व्यक्ति ने मौके पर गए बिना मेज पर ही अनाप-शनाप आंकड़े गढ़ लिए या फिर समझ नहीं पाया कि क्या जानकारी लेनी है अथवा जिससे जानकारी लेनी थी उसे समझा नहीं पाया कि उसे क्या जानकारी देनी है। ये तीनों ही बातें संभव हैं। आंकड़े इकट्ठा करने के लिए टैबलेट इस्तेमाल कर सकने लायक युवा ठेके पर नियुक्त किए गए थे। हो सकता है, भ्रष्ट सरकारी तंत्र में कुछ लोगों ने ठेके पर फर्जी नियुक्तियां दिखला कर मेज पर फर्जी आंकड़े गढ़ टैबलेट में दर्ज कर लिए हों।

हालांकि अन्य दो बातों की संभावना इससे भी ज्यादा है। चूंकि सारी जानकारियां जनगणना प्रक्रिया में अप्रशिक्षित और अंग्रेजी भाषा में अनिपुण युवाओं को एकत्र करनी थीं, इसलिए संभव है कि उन्होंने न तो सही जानकारी लेना भी समझा न अंग्रेजी की गैर जानकार आबादी को सही जानकारी देना समझा पाए। इसके अलावा पहली श्रेणी के मानकों में कुछ और भी झोल हैं। मसलन, मशीनी मछली-पकड़ नौकाएं या तीन पहिया/ चार पहिया वाहन टैक्सी के रूप में कमाई का भी जरिया हो सकते हैं न कि निजी आरामदेह सैर सपाटे की मिल्कियत। अगर इनसे जीवन यापन या इनके लिए लिया कर्ज चुकता करने के लिए कमाई कम हुई तो भी परिवार दरअसल वंचित ही कहलाना चाहिए। इसी तरह पथरीले इलाके, जैसे राजस्थान के रेगिस्तान या पहाड़, में गरीब के घर भी पक्के होंगे और बारिश-भूकंप के इलाके में खाते-पीते लोगों के घर भी कच्चे यानी मिट्टी, बांस या लकड़ी के हो सकते हैं।

दूसरी तरफ, दूसरी श्रेणी के आंकड़े चूंकि वंचित समूह में स्वत: शामिल करने वाले हैं इसलिए उनके बारे में लाभ प्रार्थी झूठ बोल सकता है। मसलन, मैला न ढोने सवर्ण भी कह सकते हैं कि वे मैला ढोने और सफाई के काम में लगे हैं क्योंकि इससे उन्हें अति वंचित समूह का लाभ मिले की आशा होगी। वैसे, पहली और दूसरी श्रेणी के मानों के प्रसंग में वे आंकड़े ज्यादा प्रामाणिक हैं जिनकी भौतिक या दस्तावेजी पुष्टि आसान है। जैसे किसी का घर आसानी से देखा जा सकता है, उसके भू-स्वामित्व के दस्तावेजों से दी गई जानकारी का मिलान किया जा सकता है, उसके कर भुगतान या आदिम अनुसूचित जनजाति होने के दस्तावेजी प्रमाण देखे जा सकते हैं, आदि।

उपरोक्त दो मानक समूहों के अलावा सात ऐसे मानकों का भी एक समूह है जो वंचितों का श्रेणीकरण करता है। यदि कोई परिवार इनमें से एक भी पूरा करता है तो अपने समूह के लिए तय कल्याण कार्यक्रमों की पात्रता प्राप्त कर लेगा। ये मानक हैं: (1) सिर्फ एक कमरे, कच्ची दीवारों और कच्ची छत वाले परिवार, (2) वे परिवार जिनका कोई भी सदस्य 18 से 59 वर्ष की उम्र का व्यस्क व्यक्ति न हो, (3) महिला मुखिया वाले परविार जिनमें 16 से 59 वर्ष का कोई पुरुष सदस्य न हो, (4) विकलांग मुखिया वाले परिवार जिनमें पूर्ण सक्षम शरीर वयस्क सदस्य कोई न हो, (5) अनुसूचित जाति/ जनजाति परिवार, (6) जिन परिवारों में 25 वर्ष से ऊपर का कोई सदस्य साक्षर न हो और (7) शारीरिक श्रम से कमाने वाले भूमिहीन परिवार।

इस तीसरे मानक समूह से संबंधित आंकड़ाें की प्रामाणिकता के बारे में जानकारी एकत्र करने वालों की क्षमता और जानकारी की पुष्टि योग्यता की वही बातें लागू होती हैं जो अन्य दो मानक समूहों के बारे में हमने देखीं। जनगणना शुरू होते वक्त 2011 में ही संभावित गड़बड़ियों के बारे में जमीनी वास्तविकता से वाकिफ विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने सरकार को आगाह किया था। कल्याण कार्यक्रमों की टारगेटिंग यानी हितग्राहियों की जमीनी स्तर पर निशानदेही के लिए सरकार पद्धतिगत गड़बड़ियों के सुधार का रास्ता निकाले तो बेहतर। हां, यहां हम यह जरूर कहेंगे कि इस तरह की पहली जनगणना से कई उपयोगी आंकड़े एकत्र हुए हैं और भविष्य में तुलना के लिए एक बेंच मार्क बना है।

 News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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