दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 15.07.15

24 साल से बंधुवा मजदूर, नहीं चुका 5 हजार कर्ज – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-12598098.html

सुनसान जंगल, चार दरिंदे और 4 दिन तक किया गैंगरेप – न्यूज़ ट्रैक

http://www.newstracklive.com/news/morena-dalit-teenager-was-held-hostage-for-four-days-gangrep-made-mms-1007862-1.html

मारपीट की घटना के बाद मड़गुला छोड़ने वाले दलित वापस लौटेंगे – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/assault-leaving-village-after-the-incident-mdgula-dalit-return-423096

यूपीएससी में बही आरक्षण की उल्टी गंगा, ओबीसी का कट ऑफ समान्य से ज्यादा – हरित खबर

http://haritkhabar.com/2015-07-reservation-policy-of-government-upsc-cut-of-14-02/

पुलिस पर एक शख्स को पीट-पीटकर मारने का केस – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/maharashtra/other-cities/police-accused-of-murder/articleshow/48067959.cms

नारकीय जीवन जी रहे हैं दलित बस्ती के लोग – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/haryana/palwal-12595875.html

सर! आरआई का रीडर मुझे अपनी प्रेमिका बताता है, ऑफिस में झाड़ू लगवाता – नईदुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/sheopur-ledis-constable-se-chedkhani-423709

13 साल पुराना केस 3 घंटे में निपटाया – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/faridabad/13-year-old-case-disposed-in-3-hours/articleshow/48071936.cms

तीन महीने से ग्रामीण अंधेरे में – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/chandauli-12593446.html

क्रांतिकारी ग्रामीण मजदूर यूनियन ने की रोष रैली – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/punjab/patiala-12595586.html

विभिन्‍न मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे दलित,CM के नाम सौंपा ज्ञापन न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/rajasthan/dalit-sitting-dharna-collect-orate-493518.html

दैनिक जागरण

24 साल से बंधुवा मजदूर, नहीं चुका 5 हजार कर्ज

http://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-12598098.html

संवाद सूत्र, त्यूणी: एक दलित पांच हजार का कर्ज चुकाने के लिए 24 साल से बंधुवा मजदूरी करने को मजबूर है इससे कड़वी सच्चाई आजाद भारत की नहीं हो सकती। इतना ही नहीं सालों बंधुवा मजदूरी करने के बाद भी पीड़ित का कर्ज बढ़कर 90 हजार कर दिया गया साथ ही साहूकार की दूसरी पीढ़ी भी पीड़ित का उत्पीड़न कर रही है। यह मामला जनजाति क्षेत्र जौनसार-बावर के खाटुवा पंचायत का है। बंधुवा मजदूरी कर रहे एक दलित ने इसकी शिकायत एक माह पूर्व जिला प्रशासन से की थी।

पीड़ित इतना डरा हुआ है कि वह एक माह से अपने गांव भी नहीं जा रहा है। मामले की गंभीरता देख जिलाधिकारी रविनाथ रमन ने एसडीएम चकराता को आरोपी साहूकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार ने मंगलवार को क्षेत्रीय राजस्व पुलिस अधिकारी को आरोपी के खिलाफ बंधुवा मजदूरी मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

चकराता ब्लॉक के सुदूरवर्ती खाटुवा पंचायत निवासी घेमाडूदास ने जिला प्रशासन को दी तहरीर में कहा 24 साल पहले उसने गांव के एक साहूकार से पांच हजार रुपए कर्ज लिया था। कर्ज चुकाने के लिए वह पिछले 24 साल से आरोपी साहूकार के पास बंधुवा मजदूरी कर रहा है। आरोप है साहूकार की मौत होने के बाद उसका पुत्र भी उससे लगातार बंधुवा मजदूरी करा रहा है। 24 साल से बंधुवा मजदूरी कर रहे दलित परिवार के पीड़ित ग्रामीण ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

पीड़ित का कहना है साहूकार का पुत्र 24 साल पहले कर्ज ली गई पांच हजार धनराशि का ब्याज जोड़कर उसे 90 हजार बकाया राशि होना बता कर भुगतान करने का दबाव बना रहा है। 24 साल से बंधुवा मजदूरी कराने का कोई हिसाब नहीं जोड़ रहा। आरोप है मजदूरी मांगने पर साहूकार के पुत्र ने पीड़ित को देख लेने की धमकी दी है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से मामले की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।

इस मामले में डीएम ने एसडीएम चकराता अशोक कुमार पांडेय को मामले में जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार चकराता कृष्णदत्त जोशी ने नायब तहसीलदार भाग¨सह वर्मा व क्षेत्रीय राजस्व उपनिरीक्षक लाखामंडल को खाटुवा निवासी आरोपी राजेंद्र सिंग पुत्र जवाहर ¨सह के खिलाफ जबरन बंधुवा मजदूरी कराने पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

न्यूज़ट्रैक

सुनसान जंगल, चार दरिंदे और 4 दिन तक किया गैंगरेप

http://www.newstracklive.com/news/morena-dalit-teenager-was-held-hostage-for-four-days-gangrep-made-mms-1007862-1.html

मुरैना। अंबाह कस्बे की दलित किशोरी को 4 बदमाश बंदूक की नोक पर अगवाह कर ले गए और 4 दिन जंगल में बंधक बनाकर रखा. इस दौरान आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और वीडियो क्लिप भी बनाया. इसके बाद उसे धमकी दी कि यदि उसने घटना शिकायत पुलिस से की और परिवार के लोगों को बताया तो उसके परिवार के लोगों को जान से मार देंगे. सामूहिक बलात्कार का मामला मंगलवार को जनसुनवाई में आया. जनसुनवाई के बाद SDOP हैडक्वार्टर अंजूलता पटले ने किशोरी के बयान लिए और अंबाह थाने में मामले की FIR दर्ज करने के निर्देश दिए !

किशोरी ने बताया कि आरोपियों के डर से वह व उसका परिवार अंबाह थाने में मामला दर्ज कराने नहीं गया. जनसुनवाई SDOP हैडक्वाटर अंजूलता पटले को 15 वर्षीय किशेारी ने बताया कि 23 जून की शाम को वह मोहल्ले में थोड़ी दूर रहने वाली दादी के पास जा रही थी तभी रास्ते में एक वाहन से विष्णु परमार व उसके 3 साथी उतरे. आरोपियों ने बंदूक अड़ाकर उसे गाड़ी में बैठा लिया और एक सुनसान जगह पर जंगल में ले गए !

जहां पर आरोपियों ने 4 दिन तक रखा और उसके साथ गैंगरेप किया. इस दौरान आरोपियों ने मोबाइल से वीडियो भी बनाया. 4 दिन बाद उन्होंने उसे छोड़ने से पहले धमकी दी कि घर में या पुलिस को घटना के बारे में बताया तो वीडियो उसके घर वालों को दिखा देंगे और घर के लोगों को जान से मार देंगे. शिकायत के बाद SDOP अंजूलता पटले ने शिकायत सुनने के बाद किशोरी के बयान दर्ज कराए साथ ही अंबाह थाना पुलिस को किशोरी की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने के भी निर्देश दिए !

नई दुनिया

मारपीट की घटना के बाद मड़गुला छोड़ने वाले दलित वापस लौटेंगे

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/assault-leaving-village-after-the-incident-mdgula-dalit-return-423096

 गाडरवारा। मड़गुला गांव में दबंगों द्वारा दलितों के साथ हुई मारपीट की घटना से घर छोड़कर नगर के मंगल भवन में रह रहे दलित कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक की समझाइश और मदद के आश्वासन उपरांत घर जाने राजी हुए। एक पखवाड़े बाद दलितों ने घर वापसी करने हामी भरी तो अधिकारियों ने यह भी बताया कि 15 जुलाई को गांव में विशेष शिविर भी लगेगा जिसमें सभी विभागों के अधिकारी आएंगे।

बीते 27 जून की रात को साईंखेड़ा थाने के अंर्तगत आने वाले मडगुला गांव हरिजनों के साथ हुइ बेरहमी से मारपीट व एक हत्या के बाद पीड़ित परिवारों के हरिजन गांव जाने को तैयार नहीं थे। शासन प्रशासन द्वारा लगातार उन्हें गांव वापिस जाने की समझाइश दी जा रही थी लेकिन वे गांव जाने तैयार नहीं थे।

लगातार प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा गाडरवारा आकर पीड़ितों को समझाइश के अलावा शासन की योजनाओं के तहत मजदूरी, आवास योजनाओं का लाभ के अलावा घटना में एक युवक की हुई हत्या के परिजनों को साढ़े 7 लाख रुपए नगद व परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की घोषणा की थी।

इसके साथ ही मारपीट में प्रत्येक घायल व्यक्ति को एक लाख 80 हजार रुपए की राशि देने घोषणा की थी। रविवार को जिला प्रशासन पीड़ितों से मिलने पहुंचा और उन्हें समझाइश दी गई। इसके बाद वे वापस अपने गांव जाने राजी हो गए हैं। ग्राम मड़गुला में दलितों पर हुई घटना के बाद पलायन कर ये लोग कुछ दिनों तक सुनीता पटैल के निवास पर पड़े रहे। इसके बाद इन्हें प्रशासन ने आजाद वार्ड स्थित मंगल भवन में रहने का स्थान दिया था। प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा की जा रही थी।

 प्रशासन ने लगाया मरहम

कलेक्टर नरेश पाल, एसपी मुकेश श्रीवास्तव, एडीशनल एसपी घनश्याम मालवीय मंगल भवन में हरिजनों के पास पहुंचे और उनसे मुलाकात कर समझाइश दी कि ग्राम मड़गुला में रोजगार के अवसर मुहैया कराएंगे और पूरी तरह से सुरक्षा दी जाएगी। सभी घरों में शौचालय निर्माण व एक सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था की जा रही है। किसी एक व्यक्ति को लोन दिलवाकर आटा चक्की लगाई जाएगी।

पीड़ितों के लिए शासन द्वारा राहत राशि स्वीकृत हो चुकी है, शीघ्र ही उन्हें राहत राशि दी जाएगी। मृतक के परिवार के एक व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति व साढ़े सात लाख रु. स्वीकृत कर दिए गए हैं। प्रशासन मडगुला के दलितों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिलवाएगा।

 ये रहे मौजूद

इस मौके पर एसडीएम जेसी सैयाम, तहसीलदार संजय नागवंशी, टीआई डीव्हीएस नागर, सुरेन्द्र पटैल मझले भी मौजूद थे। 15 जुलाई को एक विशेष शिविर लगाया जाएगा। जिसमें सभी विभाग के प्रमुख अधिकारी मौजूद रहकर समस्याओं का निराकरण करेंगे।

हरित खबर

यूपीएससी में बही आरक्षण की उल्टी गंगा, ओबीसी का कट ऑफ समान्य से ज्यादा

http://haritkhabar.com/2015-07-reservation-policy-of-government-upsc-cut-of-14-02/

देश में आरक्षण को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। जति के आधार मिलने वाले आरक्षण पर भी कई तरह के सवाल उठते रहते हैं। क्या आरक्षण का जाति के आधार पर होना उचित है? तर्क दिया जाता है कि गरीबी तो हर एक जाति में होती है। क्या आरक्षण के जरिए सही में अक्षम लोग चुन लिए जाते हैं? तर्क दिया जाता है इससे गुणवत्ता प्रभावित होती है।

लेकिन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के द्वारा लिए जाने वाले एसिस्टेंट कमांडेंट के रिजल्ट में कुछ ऐसा देखने को मिला है जिससे आरक्षण की मूल अवधारणा ही प्रभावित हो रही है।

यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली सेन्ट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (एसिस्टेंट कमांडेंट) परीक्षा 2014 के फाइनल कट ऑफ मार्क्स में ओबीसी श्रेणी का कट ऑफ मार्क्स जेनरल से भी ज्यादा है। जेनरल की श्रेणी में चयन के लिए जहाँ 294 नंबर की जरूरत दिखाई गई है वहीं ओबीसी कोटे में चयन के लिए 296 नंबर की जरूरत बताई गई है। इस लिस्ट को देखकर समझ में नहीं आ रहा है कि यहां आरक्षण का कौन सा प्रावधान लागू किया गया है? आखिर पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के बाद भी उसकी मेरिट समान्य श्रेणी से 2 अंक ऊपर कैसे चली गई?

गौरतलब है कि सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों से सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। केंद्र द्वारा 22.5% सीटें अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के लिए आरक्षित हैं (अनुसूचित जातियों के लिए 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5%) वहीं ओबीसी के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान है।

नवभारत टाइम्स

पुलिस पर एक शख्स को पीट-पीटकर मारने का केस

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/maharashtra/other-cities/police-accused-of-murder/articleshow/48067959.cms

एक निरीक्षक समेत छह निलंबित पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर हिरासत में लिए एक 28 वर्षीय दलित व्यक्ति को तहकीकात के दौरान पीट-पीटकर मारने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। सीआईडी के पुलिस उपाधीक्षक सुहास जगताप ने बताया कि नितिन बालू सात्थये को चोरी के मामले में तहकीकात करने के लिए यहां से 40 किलोमीटर दूर पारने तहसील के जावले गांव की कोतवाली पुलिस ने 27 मई को गिरफ्तार किया था। 

उन्होंने बताया कि पुलिस ने कथित तौर पर उचित कानून प्रक्रिया का पालन किए बिना नितिन को निर्वस्त्र हालत में हिरासत में रखा था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि नितिन ने निर्वस्त्र हालत में पुलिस स्टेशन से भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और वापस ले आए और कथित रूप से हिरासत में उसकी बुरी तरह पिटाई की। 

साथ ही, उन्होंने बताया कि नितिन को पुलिस द्वारा बाद में एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। जगताप ने बताया कि मामले को बाद में सीआईडी को स्थानांतरित कर दिया, जिसने जांच के बाद, हत्या सहित, एससी-एसटी अधिनियम और भादंवि के विभिन्न प्रावधानों के तहत निरीक्षक दनयानेश्वर ढोकाले, उप निरीक्षक विश्वनाथ निमासे और कांस्टेबल संजय दलिम्बकर, हेमंत खंडागले, सादिक जे शेख और संदीप एम शिंडे के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

इस घटना के बाद पिछले महीने ही छह आरोपी पुलिसवालों को निलंबित कर दिया गया था। इसी बीच, आवासीय डिप्टी कलेक्टर राजेंद्र पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री कोष की सहायता से जल्द ही एक लाख रुपए मृतक के परिवार को सौंपे जाएंगे।

दैनिक जागरण

नारकीय जीवन जी रहे हैं दलित बस्ती के लोग

http://www.jagran.com/haryana/palwal-12595875.html

गांव की दलित बस्ती के लोग इन दिनों नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। पोखर से गंदे पानी निकासी के लिए बनाया गया नाला महीनों से अवरुद्ध पड़ा है और गंदा पानी ओवरफ्लो होकर लोगों के घरों में घुस रहा है। नाले की सफाई के लिए बस्ती के लोग दर्जनों बार पंचायत व अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, परंतु को समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

गांव की दशरथ पट्टी के पीछे पोखर के साथ-साथ दलितों के करीब 50 परिवार रहते हैं। बस्ती की गलियां कच्ची व संकरी हैं। पानी निकासी के लिए भी पक्की नालियां नहीं हैं। पोखर में पूरे गांव का गंदा पानी जाता है। अक्सर पोखर ओवरफ्लो हो जाती है। इसी समस्या से निदान के लिए नाला खुदवाया गया था, जिससे गंदे पानी को गांव के बाहर नाले में डाल दिया जाता है, परंतु नाला महीनों से अवरुद्ध हुआ पड़ा है और पोखर का पानी ओवरफ्लो होकर बस्ती के लोगों की परेशानी का सबब बना है।

पोखर का गंदा पानी हमारे घरों में घुस रहा है। घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है। मकान भी ढहने की कगार पर हैं। कई मकानों में तो दरारें भी आ चुकी हैं, परंतु किसी को हमारी परवाह नहीं है।

रामकिशन

गंदे जलभराव के कारण बस्ती में रहना मुश्किल हो गया है। गंदे पानी से उठने वाली बदबू के कारण घर में खाना भी नहीं खा सकते। बस्ती में मक्खी-मच्छरों के प्रकोप के कारण बीमारियां भी फैलने लगी हैं।

 रमन

समस्या के समाधान के लिए दर्जनों बार गांव सरपंच व प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, परंतु आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। अब तो बारिश के कारण बस्ती के हालात बदतर होते जा रहे हैं।

बिजन

पोखर से पानी निकासी का कोई पुख्ता विकल्प नहीं है। हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण यह समस्या पैदा हुई है। अब पानी कम होने लगा है। पोखर से पानी निकासी के लिए मैंने ¨सचाई विभाग अधिकारियों को पोखर में पंप सेट लगाने के लिए कहा है, परंतु उन्होंने एसडीएम की मंजूरी मांगी हैं। एसडीएम के यहां भी मैंने मंजूरी के लिए पत्र भेजा है। जल्द ही पोखर में पंपसेट लगवाकर पानी निकलवा दिया जाएगा।

हरदीप ¨सह, निर्वतमान सरपंच, ग्राम पंचायत औरंगाबाद

नई दुनिया

सर! आरआई का रीडर मुझे अपनी प्रेमिका बताता है,

ऑफिस में झाड़ू लगवाता

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/sheopur-ledis-constable-se-chedkhani-423709

श्योपुर। सर ! पुलिस लाइन में आरआई साहब का रीडर भूपेन्द्र सिंह मुझे परेशान करता है। पुलिस लाइन में पदस्थ सभी आरक्षक व अन्य स्टाफ में प्रचारित कर दिया है कि मैं उसकी प्रेमिका हूं, इस कारण मुझसे कोई बात नहीं करता। मैं दलित और बेहद गरीब परिवार से हूं। जब ऐसी बातों पर आपत्ति जताई तो मुझसे ऑफिस का झाड़ू-पोंछा करवाना शुरू कर दिया।

एसपी एसके पांडे के सामने रोते हुए यह बातें पुलिस लाइन में नव पदस्थ महिला आरक्षक ने बताईं। आरक्षक का कहना है कि उसने यह शिकायत आरआई भारत सिंह यादव से भी की लेकिन, उन्होंने अनसुना कर दिया। महिला आरक्षक की शिकायत को एसपी ने गंभीरता से लिया और तत्काल की आरआई के रीडर को जंगल क्षेत्र के मगरधा थाने में भेज दिया। रीडर के अलावा महिला आरक्षक को परेशान करने वाले एक अन्य आरक्षक को भी सजा के तौर पर चिलवानी थाने भेज दिया। एक महीने पहले ही श्योपुर पुलिस लाइन में ज्वाइन हुई महिला आरक्षक रश्मि (परिवर्तित नाम) ने एसपी को बताया कि आरआई रीडर भूपेन्द्र सिंह उसके मोबाइल पर अश्लील मैसेज करता है।

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इसके अलावा अन्य स्टाफ से कहता है कि रश्मि और उसका चक्कर है, इसलिए कोई भी रश्मि से बात नहीं करेगा। बकौल रश्मि ऐसी भ्रामक बातों के कारण पुलिस लाइन में कोई उससे बात नहीं करता। रश्मि ने एसपी को बताया कि वह दलित है और जब उसने विरोध करना शुरू किया तो रीडर भूपेन्द्र सिंह ने ऑफिस के सफाईकर्मचारियों को हटा दिया और मुझसे ऑफिस का झाडू-पोंछा करने का दबाव बनाता है।

नवभारत टाइम्स

13 साल पुराना केस 3 घंटे में निपटाया

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/faridabad/13-year-old-case-disposed-in-3-hours/articleshow/48071936.cms

13 साल से अदालत में चल रहे एक मामले को पंचायत ने 3 घंटे में निपटा दिया। पंचों ने पंचायत में प्यार और अमन का पैगाम दिया। दोनों पक्षों ने पंचायत के फैसले को स्वीकारते हुए पंचायत में न केवल हाथ मिलाएं बल्कि एक-दूसरे से गले भी मिले।

क्या था मामला

8 नवंबर 2003 में सल्लागढ़ निवासी एक दलित महिला का निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार करने के लिए उनके पार्थिव शरीर को कृष्णा कॉलोनी स्थित मोक्षधाम ले जाया गया। उसी दौरान कृष्णा कॉलोनी निवासियों ने महिला का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। इस बात को लेकर दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया। झगड़े पर काबू पाने के लिए तत्कालीन सरकार ने बड़े पैमाने पर पुलिस तैनात की। भारी पुलिस बल के साये में मौत के 3 दिन बाद महिला का अंतिम संस्कार किया गया। एक्स एमएलए रामरतन के बयान पर पुलिस ने 10 नवंबर 2003 को 12 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की। जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई उनमें 3 महिला भी शामिल थीं। एफआईआर में नामजद 12 लोगों में से दो की मौत हो चुकी है।

इस मामले को निपटाने के लिए पहले भी अनेक बार पंचायत हो चुकी है लेकिन फैसला सिरे नहीं चढ़ पाया। पंचायती फैसले करवाने को लेकर एक समाज के लोग एक्स मिनिस्टर और बीजेपी लीडर हर्षकुमार से मिले थे। हर्षकुमार ने पंचायती तरीके से मामला निपटाने की अपील की। उनकी अपील को ध्यान में रखते हुए एक पक्ष की तरफ से पंजाबी धर्मशाला में पंचायत का आयोजन किया गया।

पंचायत में नहीं बोला झूठ

पंचायत में कहा गया कि कोई भी पक्ष झूठ नहीं बोलेगा। जिसकी गलती है वह अपनी गलती खुद बताएगा। पंचायत में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात कही। दोनों तरफ से सच्चाई पर चर्चा की गई। एक पक्ष के लोगों ने अपनी गलती मानी और उसका अहसास किया। किसी भी पक्ष ने पंचायत में झूठ नहीं बोला।

 ये हुआ फैसला

करीब 3 घंटे तक चली पंचायत के बाद पूर्वमंत्री हर्षकुमार ने फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि इससे पहले जो पंचायत हुई थी, उसी के फैसले को सम्मान दिया जाएगा। हमें अपने पूर्वजों और पुराने पंचों की कद्र करनी चाहिए। फैसले में कहा गया कि एक पक्ष के लोग मोक्षधाम की चारदीवारी करवाएंगे जबकि दूसरा पक्ष उसमें शेड, पानी और पेड़ लगाकर सुंदर और स्वच्छ बनाएंगे। एक दूसरे के खिलाफ जो भी मामले चल रहे हैं उन्हें वापस लिया जाएगा। मुकद्दमे वापस लेने की पहल एक पक्ष पहले करेगा। दूसरा पक्ष बाद में मुकद्दमा वापस लेगा। पिछले 13 साल के दौरान अदालत का जो खर्चा हुआ है, उसे वहन किया जाएगा।

पंचायत में मौजूद पंच

पंजाबी धर्मशाला के हाल में हुई पंचायत में एक्स मिनिस्टर हर्षकुमार, एक्स एमएलए सुभाष चौधरी, एक्स एमएलए रामरतन, चांदहट गांव के पूर्व सरपंच बिजेंद्र सिंह, पंचायत समिति के पूर्व चेयरमैन समुंद्र सिंह भाखर, ब्राह्मण समाज के प्रधान शंभूदयाल पहलवान, पंडित किशनचंद दीक्षित, इंद्रपाल शर्मा, भूरा, हरस्वरूप, किशन सिंह, बामनीखेड़ा गांव

दैनिक जागरण

तीन महीने से ग्रामीण अंधेरे में

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/chandauli-12593446.html

चकिया (चंदौली): क्षेत्र का एक ऐसा गांव जहां के वा¨शदे बीते तीन महीने से बिजली के अभाव में जीवन बसर कर रहे हैं। कई बार विद्युत विभाग की अभियंताओं से गुहार लगाने के बाद भी कोई निदान नहीं निकल सका है। मामला महादेवपुर कला गांव का है।

महादेवपुर कला गांव की आबादी करीब 1500 है। गांव में अधिकांश दलित वर्ग के लोग निवास करते हैं। इनके लिए बिजली विभाग द्वारा एक ट्रांसफार्मर लगाया गया है। उक्त ट्रांसफार्मर से दलितों के घरों में रोशनी की व्यवस्था ही रही थी। लेकिन ट्रांसफार्मर के रखरखाव के प्रति लापरवाही के चलते यह मार्च माह में जल गया। तब से गांव में बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है। ट्रांसफार्मर जलने के बाद ग्रामीणों ने दर्जनों बार तहसील दिवस व विद्युत अभियंता से नया ट्रांसफार्मर लगवाने की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीण अंधेरे में रहने को विवश है।

के पूर्व सरपंच प्रेम शर्मा, महेंद्र सिंह भड़ाना, ओमप्रकाश ठेकेदार, महेंद्र सिंह चौहान, सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे।

दैनिक जागरण

क्रांतिकारी ग्रामीण मजदूर यूनियन ने की रोष रैली

http://www.jagran.com/punjab/patiala-12595586.html

गांव सदरपुर में किसानों द्वारा गांव के एक दलित परिवार पर तेजधार हथियारों से हमला करने के विरोध में क्रांतिकारी ग्रामीण मजदूर यूनियन सदस्यों ने बस स्टैंड से एक रोष रैली निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी। बस स्टैंड से शुरू यह रोष रैली डीएसपी समाना सुखदेव सिंह विर्क के कार्यालय पहुंची और वहा पर धरना लगाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

यूनियन के प्रदेश प्रधान संजीव मिंटू, मिस्त्री मजदूर दल प्रधान जगदीप सिंह, नौजवान भारत सभा के नेता प्रगट सिंह, गाव सदरपुर के क्रांतिकारी ग्रामीण मजदूर यूनियन प्रधान जरनैल सिंह ने बताया कि गत 9 जून को गाव सदरपुर में कुछ किसानों ने दलित परिवार पर हमला बोल कर एक महिला सहित दो लोगों को घायल कर दिया था और उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।

जिसके बाद दलित परिवार द्वारा उन किसानों के खिलाफ पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ दलित परिवार के लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस ने किसानों पर मामूली धाराओं के तहत ही केस दर्ज किया। इससे यह बात साफ जाहिर है कि पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है। उन्होंने माग की कि इस मामले की निष्पक्ष जाच कर इसमें शामिल लोगों के खिलाफ जातिसूचक शब्दों प्रयोग करने का मामला दर्ज किया जाए।

न्यूज़ 18

विभिन्‍न मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे दलित,CM के नाम सौंपा ज्ञापन

http://hindi.news18.com/news/rajasthan/dalit-sitting-dharna-collect-orate-493518.html

बाड़मेर जिला में दलितों पर हो रहे अत्‍याचारों के खिलाफ मंगलवार को कलेक्‍ट्रेट के बाहर अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरु किया. और कलेक्‍टर को सीएम के नाम का ज्ञापन सौंपा लगभग दर्जन भर प्रकरणो को लेकर दिए जा रहे इस धरना प्रदर्शन में दलितों ने आरोप लगाए कि जिले दलितों पर आए दिन अत्‍याचार हो रहे है पर जिला पुलिस किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं करती. जिसको लेकर लोगों में रोष व्‍याप्‍त है.

आंदोलन कारियों ने पुलिस प्रशासन पर अपराधियों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए. आंदोलनकारियों का कहना है कि जिले में इन दिन दलित महिलाओं का अपमान ,बलात्कार, अपहरण एवं जानलेवा हमलों जैसे घटनाओं में बढोत्‍तरी हुई है .लेकिन उदासीन प्रशासन और पुलिस की अपराधियों के साथ मिली भगत के चलते किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जाती स्थिति यह है कि थानों में दलितों के मामले तक नहीं दर्ज किए जाते.

ऐसे में हमें यह कदम उठाना पड़ा. और जब तक दलितों के साथ हुए अत्‍याचारों के इन मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती तब वह इसी तरह धरने पर जमे रहेंगे.

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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