दलित मीडिया वाच-हिंदी न्यूज़ अपडेट 27.06.15

दलित मीडिया वाच

हिंदी न्यूज़ अपडेट 27.06.15

 

ऊंची जाति की लड़की से बात करने पर कर दी हत्या – पात्रिका

http://www.patrika.com/news/crime/boy-was-killed-because-her-talked-to-an-upper-cast-girl-1059260/

थाने में इंसाफ मांगने पहुंची दलित महिला से पुलिस कर्मियों ने मांगे पैसे, नहीं दिए तो डाला आबरू पर हाथ न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/bihar/police-personnel-tried-to-rape-attempt-a-dalit-woman-in-police-station-483811.html

स्वतंत्रता के 67 वर्ष बाद भी `भेदभाव का शिकार दलित भाईचारे के लोग ` – पंजाब केसरी

http://www.punjabkesari.in/news/article-373992

दलितों को दबंगों ने बेरहमी से पीटा, पुलिस के सामने 12 परिवारों ने छोड़ा गांव – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-BPL-HMU-dalit-family-beaten-brutally-in-madhya-pradesh-5034413-PHO.html

दलित उत्पीड़न मामलों में गोरखपुर पुलिस का रवैया सबसे खराब – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/gorakhpur-city-12525134.html

वजीफे के लिए भटक रहे दलित छात्र – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/kannauj/kannauj-hindi-news/thousands-of-students-scholarship-missed-hindi-news/

कंप्यूटर से ज्यादा तेज था चांदराम का दिमाग : भूपेंद्र हुड्डा – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/haryana/rohtak-12525769.html

बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा स्थापित दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-HMU-MAT-latest-gwalior-news-034523-2146083-NOR.html

पात्रिका

ऊंची जाति की लड़की से बात करने पर कर दी हत्या

http://www.patrika.com/news/crime/boy-was-killed-because-her-talked-to-an-upper-cast-girl-1059260/

03 A

नम्मकल। इंजीनिंग के एक छात्र की संदिग्ध मौत के मामले उसके परिजनों ने आरोप लगाया है कि उसकी हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उसने एक ऊंची जाति की लड़की से बात की थी। छात्र गोकुल राज का शव बुधवार को रेलवे ट्रैक पर मिला था।

दलित परिवार से ताल्लुक रखने वाले गोकुलराज को अपने गांव की ही एक उच्च जाति की लड़की से बात करते हुए देख लिया गया था। गोकुलराज के परिवार ने युवराज नाम के एक स्थानीय नेता पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस युवराज की तलाश कर रही है। युवराज \’धीरन चिन्नामलाई पेरावाई\’ नाम के एक छोटे से दल का नेता है। यह दल कोंगु वेल्लालर समुदाय की मान्यताओं का प्रचार करता है।

दूसरी तरफ, पुलिस को गोकुलराज की जेब से एक कागज मिला जिसमें उसके प्रेम में असफल होने की बातें लिखी थीं। पुलिस ने अपहरण और संदेहास्पद हालात में मृत्यु का केस दर्ज कर लिया है। वह मिले नोट की प्रमाणिकता की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

न्यूज़ 18

थाने में इंसाफ मांगने पहुंची दलित महिला से पुलिस कर्मियों ने मांगे पैसे, नहीं दिए तो डाला आबरू पर हाथ

http://hindi.news18.com/news/bihar/police-personnel-tried-to-rape-attempt-a-dalit-woman-in-police-station-483811.html

02

सिवाईपट्टी थाना में एफआईआर दर्ज कराने गई एक दलित महिला के साथ पुलिसकर्मियों ने ही दुष्‍कर्म का प्रयास किया.

महिला ने बताया कि उसके गांव के ही एक दबंग ने उससे जबर्दस्ती करने की कोशिश की थी. पीड़ित जब इस मामले की शिकायत लेकर थाने पहुंची तो पहले पुलिस ने पांच हजार रुपए की मांग कर डाली. पैसे नहीं देने पर थाना प्रभारी और दूसरे सहकर्मी ने थाना परिसर में ही पीड़िता की इज्जत लूटने की कोशिश की.

हद तो यह है कि इस मामले में इसांफ पाने के लिए पिछले दो साल से भटक रही पीड़ित महिला एसएसपी से लेकर आईजी कार्यालय तक के चक्कर लगा चुकी है, लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

इस तरह से पुलिस का चरित्र उजागर होने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है.

पीड़िता ने इज्जत लूटने का प्रयास करने वाले आरोपी पुलिसकर्मियों के साथ ही दबंगों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करने की मांग की है.

पंजाब केसरी

स्वतंत्रता के 67 वर्ष बाद भी `भेदभाव का शिकार दलित भाईचारे के लोग `

http://www.punjabkesari.in/news/article-373992

04

स्वतंत्रता के 67 वर्ष बाद भी देश में ऊंच-नीच व जात-पात आधारित भेदभाव के प्रमाण अक्सर मिलते रहते हैं। हाल ही में दलितों पर हमलों तथा उनसे भेदभाव व ईष्र्या के निम्र चंद और मामले सामने आए हैं : 

28 अप्रैल को महाराष्ट में उस्मानाबाद के अंसुरदा गांव में दलित समुदाय से संबंधित सभी महिलाओं से छेड़छाड़ को लेकर हुए विवाद के बाद उच्च जातीय लोगों ने गांवों की समूची दलित बिरादरी का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा भी कर दी। 

उन्होंने कुछ स्थानों पर एक विशेष रंग के झंडे लहरा दिए जिसका मतलब था कि उन स्थानों से दलित दूर ही रहें। सवर्ण दुकानदारों ने न सिर्फ उन्हें जीवनोपयोगी वस्तुएं बेचनी बंद कर दीं बल्कि उन्हें सामुदायिक नलों से पानी भरने से भी रोक दिया और अब उन्हें पानी लेने रोज 20 कि.मी. जाना पड़ता है। 

11 जून को राजस्थान के सीकर जिले के दातारामगढ़ गांव के ‘गंडकिया की ढाणी’ में सवर्ण जाति के 50-60 लोगों ने भूमि के एक टुकड़े पर विवाद को लेकर अनेक दलित परिवारों पर हमला करके उनकी झोंपडिय़ों को आग लगा दी। इसके परिणामस्वरूप 9 लोग घायल हो गए।

13 जून को मध्यप्रदेश में छतरपुर जिले के गणेशपुरा गांव में हैंडपम्प से पानी भर रही एक दलित युवती की छाया वहां से गुजर रहे पप्पू यादव नामक एक दबंग पर पड़ गई। इस पर दबंग और उसके परिवार के सदस्यों ने मिल कर किशोरी को बुरी तरह पीट डाला। दबंग के पारिवारिक सदस्यों ने दलित परिवार को यह धमकी भी दी कि यदि उनकी बेटी दोबारा हैंडपंप के निकट नजर भी आ गई तो उसकी जान की खैर नहीं। 

18 जून को आई.आई.टी. का परिणाम घोषित हुआ तो उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के निकटवर्ती गांव ‘रेहुआ लालगंज’ के अत्यंत निर्धन दलित परिवार से संबंध रखने वाले दिहाड़ीदार मजदूर धर्मराज के 2 बेटों ब्रजेश तथा राजू ने इसमें 167वां और 410वां स्थान प्राप्त करके इलाके में धूम मचा दी। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 21 जून को लखनऊ में उन्हें सम्मानित भी किया परंतु भारी संघर्ष करके इतनी बड़ी सफलता प्राप्त करने वाले दोनों भाइयों को तब भारी दुख पहुंचा जब अपने ही गांव पहुंचने पर उनकी खुशी में शामिल होने की बजाय गांव के कुछ दबंगों ने उनके परिवार के सदस्यों पर पथराव कर दिया जिससे उनके परिवार के कुछ सदस्यों को चोटें भी पहुंचीं और उनकी सुरक्षा के लिए अधिकारियों को पुलिस तैनात करनी पड़ी।

ब्रजेश का कहना है कि बचपन से ही वे उच्च जातीय लोगों की ईष्र्या का शिकार हो रहे हैं। सवर्ण लोगों ने तो इनके शौच जाने का रास्ता भी बंद कर दिया था क्योंकि वे पढ़ाई में उच्च जातीय बच्चों से आगे रहते थे। 

दोनों भाई अन्य विषयों के साथ-साथ अंग्रेजी और संस्कृत में भी अत्यधिक तेज हैं। इनके दादा शिवनाथ के अनुसार 2005 में जब ब्रजेश 5वीं कक्षा में पढ़ता था तो उसने संस्कृत के अध्यापक को किसी वाक्य का गलत अनुवाद बताने पर टोक दिया था जिस पर अध्यापक ने उसे बुरी तरह पीटा था। 

18 जून को तमिलनाडु छुआछूत निवारण मोर्चा ने नागरकोइल जिले के पुलिस अधीक्षक को दिए एक ज्ञापन में आरोप लगाया है कि जिले के पद्मनाभपुरम स्थित राजेंद्र प्रसाद नामक एक दलित जब मंदिर में माथा टेकने जा रहा था तो उच्च जाति के लोगों ने उसे रोक दिया व गालियां निकालीं।

राजेंद्र प्रसाद को अपमानित करने के बाद दबंगों ने उसके घर जाकर उसकी पत्नी और बच्चों को भी गालियां निकालीं, घर का सामान तोडफ़ोड़ दिया और राजेंद्र प्रसाद तथा उसके परिवार के सदस्यों को पीटा। 

दलितों से सवर्ण लोगों द्वारा भेदभाव के ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं जो संकेत  देते हैं कि आज भी देश में छुआछूत का महारोग फैला हुआ है व तथाकथित उच्च जातियों के हाथों दलित, सर्वहारा वर्ग को लांछित, अपमानित व पीड़ित होना पड़ रहा है और कितनी ही प्रतिभाएं खिलने से पहले ही मसली जा रही हैं। 

हमारे देश की कानून-व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे इस रोग को दूर करने के लिए यदि कठोर हाथों से कार्रवाई न की गई तो देश में विद्वेष बढ़ेगा और सामाजिक ताना-बाना बिगड़ जाएगा।  

दैनिक भास्कर

दलितों को दबंगों ने बेरहमी से पीटा, पुलिस के सामने 12 परिवारों ने छोड़ा गांव

http://www.bhaskar.com/news/MP-BPL-HMU-dalit-family-beaten-brutally-in-madhya-pradesh-5034413-PHO.html

01

मध्यप्रदेश के दमोह जिले में एक गुट के कहर से दलित परिवारों ने गांव छोड़ दिया। गांव पहुंचे अफसर और उनका अमला पीड़ितों को सुरक्षा का भरोसा दिलाने में नाकाम रहे। 24 घंटे से ज्यादा समय से मौत के साए में रहे करीब 12 परिवार शुक्रवार को अफसरों के सामने ही गांव छोड़कर चले गए। दरअसल बुधवार और गुरुवार की रात गांव के दलित परिवारों के साथ मारपीट की। घरों में तोड़फोड़ की। सामान फेंक दिया।

ट्रैक्टर में बैठी फूलन अहिरवार, रत्तू, प्रेमा, गोरेलाल, भैयालाल आदि ने बताया कि गांव के करन सिंह, संतोष सिंह, वीरन सिंह, पप्पू सिंह आदि ने हम लोगों को घर से बाहर निकाल कर मारपीट की। जिन घरों में ताला लगा था उन घरों के भी ताले तोड़कर सामान फेंका। कुछ घरों के तो छप्पर भी तोड़कर सामान फेंका गया। गांव छोड़कर बिनती गांव में डेरा डाले गांव के कोमल अहिरवार ने सीएम आॅनलाइन पर मोबाइल से गांव के हालत की जानकारी दी तब प्रशासन सक्रिय हुआ। तीसरे दिन हटा एसडीएम एसके अहिरवार, एसडीओपी आरके सिंह, एजेके एसडीओपी एचपी सिंघई, तहसीलदार एलके खरे भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे।

हमें किसी पर भरोसा नहीं

एक ओर सारा प्रशासन जहां गांव के लोगों को बैठाकर समझाइश दे रहा था, वहीं गांव के लोग अपना गृहस्थी का सामान ट्रैक्टर पर रखकर गांव को छोड़कर जा रहे थे। गांव की दसोदा, फूलन, धन्नू, कोमल, गट्टी अहिरवार ने बताया कि तीन हत्याएं हो चुकी हैं। ऐसे में अब हम कोई भी गांव में रहने तैयार नहीं है। न ही हमारा किसी पर भरोसा कि वह हमारी सुरक्षा कर पाएगा और न्याय दिला पाएगा।

दैनिक जागरण

दलित उत्पीड़न मामलों में गोरखपुर पुलिस का रवैया सबसे खराब

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/gorakhpur-city-12525134.html

05

गोरखपुर : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने कहा कि प्रदेश में दलित उत्पीड़न मामलों में गोरखपुर पुलिस का रवैया सबसे खराब है। उन्होंने कहा कि यहां पुलिस दलित उत्पीड़न का मुकदमा ही दर्ज नहीं करना चाहती है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर मंडल में आयोग के समक्ष आए 40 मामलों की समीक्षा मैंने की है जिसमें तीन मामलों में तहरीर के हिसाब से मुकदमा दर्ज नहीं है इसे लेकर आयोग संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई करेगा। इन तीन मामलों के बारे में पूछने पर जानकारी देने से इन्कार कर दिया।

श्री पुनिया शुक्रवार को यहां कलेक्ट्रेट सभागार में संवाददाताओं से मुखातिब थे। इसके पूर्व उन्हों गुरुको महराजगंज व शुक्रवार को यहां कलेक्ट्रेट में पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के साथ दलित उत्पीड़न मामलों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग चेयरमैन की हैसियत से आयोग को जो शिकायत मिलती है उसकी तिथि निर्धारित कर मैं मंडल व जिले स्तर पर पहुंच कर अधिकारियों के साथ समीक्षा किया हूं। यहां पर शांति व्यवस्था की स्थिति प्रदेश में अन्य स्थानों से भिन्न है, यहां तो पुलिस एफआइआर ही नहीं दर्ज करती है।

आयोग अब मन बना रहा है कि एफआइआर दर्ज न करने वालों पर ही मुकदमा दर्ज कराया जाय। उन्होंने कहा कि जिसकी शिकायत है उसका मुकदमा तो दर्ज किया जाय। विवेचना में वह कुछ भी करें। उन्होंने कहा कि एफआइआर दर्ज नहीं किया जाना मानवाधिकार का हनन है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश के भगोड़े का बचाने वाले सत्ता में बैठे लोगों को केंद्र सरकार बचा रही है।

उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज, स्मृति इरानी, वसुंधरा राजे व पंकजा मुंडे सभी से इस्तीफा लिया जाना चाहिए। निषाद आंदोलन पर कहा कि इसमे साफ तौर पर प्रदेश सरकार दोषी है इसका निस्तारण होना चाहिए।

अमर उजाला

वजीफे के लिए भटक रहे दलित छात्र

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पूर्व दशम और दशमोत्तर में अनुसूचित जाति व सामान्य जाति के छात्र-छात्राओं को वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि शासन स्तर से ही धनराशि नहीं भेजी गई है। वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति कब तक खाते में पहुंचेगी, इसका स्पष्ट जवाब विभागीय अधिकारी व कर्मचारी नहीं दे पा रहे हैं।

जिला समाज कल्याण विभाग के कार्यालय के अनुसार कक्षा 9 व 10 में वजीफा के लिए अनुसूचित जाति के 3745 छात्रों को पात्र पाया गया था। इनमें से अब तक मात्र तीन छात्रों के खाते में ही वजीफा की धनराशि पहुंची है। इसी तरह सामान्य जाति में 565 छात्रों को वजीफा के लिए पात्र पाया गया था। इनमें से 185 को ही वजीफा का रुपया मिल सका है। शेष छात्र कभी कालेज, कभी बैंक तो कभी विकास भवन स्थित जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।

इसी तरह दशमोत्तर (कक्षा 10 व आगे की कक्षाओं) में अनुसूचित जाति में 6417 विद्यार्थियों को वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए चयनित किया गया था। इनमें से 6031 छात्रों के खाते में वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम पहुंच गई है। जबकि 386 छात्र-छात्राओं को फूटी कौड़ी तक नहीं मिल सकी है। 

वहीं सामान्य वर्ग में 5096 छात्र-छात्राओं में से 3323 को ही शुल्क प्रतिपूर्ति व वजीफा मिल सका है। शेष 1773 विद्यार्थी वजीफे व शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को रुपयों की जरूरत है। इसके बावजूद शुल्क प्रतिपूर्ति व वजीफा न मिलने से इनके परिवार को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेद्र कुमार गौतम का कहना है कि जल्द ही बजट आवंटन की उम्मीद है। इसके बाद अवशेष छात्रों को वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि प्राप्त हो जाएगी।

दैनिक जागरण

कंप्यूटर से ज्यादा तेज था चांदराम का दिमाग : भूपेंद्र हुड्डा

http://www.jagran.com/haryana/rohtak-12525769.html

रोहतक : आर्य नगर स्थित गुरु रविदास छात्रावास में शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चांदराम की शोक सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा स्व. चांदराम को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जो आया है उसे एक दिन अवश्य जाना पड़ता है यह विधि का विधान है। चांदराम के पास कंप्यूटर से भी ज्याद बुद्धिमान माने जाते थे। इतनी उम्र होने के बावजूद वे बिना चश्मा लगाए समाचार पत्र पढ़ते थे। चांदराम हरियाणा की राजनीति के सबसे वृद्ध नेता थे। उन्होंने बताया कि उनके स्व. चांदराम के साथ पारिवारिक संबंध थे। वो विभिन्न सदनों व विभिन्न राजनैतिक दलों में रहे लेकिन हर जगह अपना स्थान बना कर रहे।

भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि स्व. चांदराम स्वयं तो नेता थे ही उन्होंने दलित समाज से बहुत ज्यादा नेता बनवाएं, अधिकारी व अच्छे इंसान बनाए। दलित समाज निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय रहेगा। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा, पूर्व विधायक भारत भूषण बत्तरा, पूर्व विधायक संत कुमार, पूर्व चेयरमैन चक्रवर्ती शर्मा, पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा, कांग्रेस प्रवक्ता ललित मोहन सैनी, व्यापारी नेता सूरज रसवंत, शोरी मार्किट के प्रधान गुलशन ईश्पुनियानी, रघुबीर सैनी, संजय परमार, इनेलो के जिलाध्यक्ष सतीश नांदल, राजेश सैनी, गोहाना से उमेश शर्मा, सरदार हरभजन खेड़ा, बार के प्रधान लोकेंद्र फौगाट, नगर पार्षद गुलशन इश्पुनियानी, ताराचंद बागड़ी आदि ने शोक व्यक्त किया।

दैनिक भास्कर

बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा स्थापित

http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-HMU-MAT-latest-gwalior-news-034523-2146083-NOR.html

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ग्वालियर| बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा शुक्रवार को फूलबाग चौराहे पर बने पार्क पर स्थापित की गई। दलित नेता लंबे समय से बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा की स्थापना की मांग कर रहे थे। बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा स्थापित होने पर खुशी व्यक्त करने वालों में भारतीय दलित वर्ग संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बारेलाल मंडेलिया, मप्र सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य अशोक वाल्मीकि, प्रदेश अध्यक्ष सुधीर मंडेलिया समेत अनेक लोग शामिल हैं। 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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