दलित मीडिया वाच-हिंदी न्यूज़ अपडेट 26.06.15

दलित मीडिया वाच

हिंदी न्यूज़ अपडेट 26.06.15

 

तमिलनाडु : ऊंची जाति की दोस्त से बात करने पर दलित इंजीनियर की हत्या? एनडीटीवी इंडिया

http://khabar.ndtv.com/news/india/murdered-for-talking-to-upper-caste-friend-engineer-found-dead-on-railway-track-775500

दो किशोरी रहस्यमय ढंग से गायब – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/etah-12516117.html

10 साल जिसे पढ़ाया, 11वीं में उसी दलित को एडमिशन नहीं दिया नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/court-399007

पेड़ के विवाद में मारपीट, फायरिंग में नौ लोग घायल – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/jaunpur/jaunpur-crime-news/tree-in-contention-assault-nine-injured-in-firing-hindi-news/

गरीबी की जाति – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/opinion/editorial/caste-of-poverty/articleshow/47817154.cms

दलितों ने धरना देकर मांगा हक – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/punjab/sangrur-12519276.html

प्रदेश के दलित बाहुल्य 200 गांव बनेंगे प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम – नई दुनिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/pm-gaw-399044

अब बनेंगे दलितों के लिए शौचालय – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/haryana/palwal-12519317.html?src=LN

 

 

एनडीटीवी इंडिया

तमिलनाडु : ऊंची जाति की दोस्त से बात करने पर दलित इंजीनियर की हत्या?

http://khabar.ndtv.com/news/india/murdered-for-talking-to-upper-caste-friend-engineer-found-dead-on-railway-track-775500

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तमिलनाडु के नमक्कल में गुरुवार शाम दलित समुदाय के एक इंजीनियर का शव संदेहास्पद स्थिति में रेलवे ट्रैक से बरामद किया गया है। 21 साल के गोकुलराज के घरवालों का आरोप है कि उसकी हत्या स्थानीय नेता युवराज ने की है। गोकुल के घरवालों का आरोप है कि युवराज ने गोकुल का गुरुवार सुबह उस वक्त़ अपहरण कर लिया था, जब वो ऊंची जाति की एक लड़की के साथ बातचीत कर रहा था। पुलिस आरोपी युवराज की तलाश कर रही है जो ‘धीरन चिन्नामलाई पेरावई’ नाम के एक छोटे से गुट का नेता है। ये गुट कोन्गु वेल्लार कम्यूनिटी की मान्यताओं का प्रचार करता है।

सुसाइड नोट

पुलिस को गोकुल की जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें एक असफल प्रेम संबंध का ज़िक्र किया गया है। पुलिस ने गोकुल के अपहरण और उसकी संदेहास्पद मौत का केस दर्ज किया है। आगे की कार्रवाई करने से पहले पुलिस सुसाइड नोट की प्रामाणकिता और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है। साल 2013 में इलावरासन नाम के एक और दलित युवक का शव धर्मापुरी ज़िले के रेलवे ट्रैक पर पाया गया था, जब ऊंची जाति के परिवार से आई उसकी पत्नी ने उसके पास लौटने से इनकार कर दिया था।

ऊंची जाति-बनाम नीची जाती

इलावरासन की पत्नी वानियार समुदाय से थीं, जो तमिलनाडु में ऊंची जाति मानी जाती है। इलावरासन से शादी के बाद उसकी पत्नी के पिता ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उस इलाके में दलित और ऊंची जातियों के बीच हिंसक संघर्ष शुरू हो गया था। उस दौरान करीब 250 दलितों के घर जला दिए गए थे और इलाके में कई दिनों तक तनाव का माहौल था। इस सबके बाद इलावरासन की पत्नी ने दोनों समुदायों के बीच उपजे हिंसक विवाद और अपने पिता की याद का हवाला देते हुए कहा था कि वो उसके पास वापस नहीं लौट सकती है। इसके कुछ ही दिनों के बाद इलावरासन का शव रेलवे ट्रैक पर पाया गया, जिसे पुलिस ने मर्डर का केस मानने से इनकार करते हुए आत्महत्या का मामला माना।

 पेरुमल मुरुगन

हाल ही में नमक्कल ज़िले में ही कोन्गु वेल्लार समुदाय के लोग ये कहते हुए तमिल लेखक पेरुमल मुरुगन के पीछे पड़ गए कि उनकी किताब ‘माधोरुबगान’ में महिलाओं और धार्मिक उत्सव का मज़ाक उड़ाया गया है। काफ़ी परेशान किए जाने के बाद पेरुमल मुरुगन ने बाज़ार से न सिर्फ़ अपनी सभी किताबें और कृतियां हटवा लीं थी, बल्कि नमक्कल से चेन्नई भी शिफ्ट़ हो गए थे।

 

दैनिक जागरण

दो किशोरी रहस्यमय ढंग से गायब

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/etah-12516117.html

 जागरण संवाददाता, एटा : जैथरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा धुमरी से 20 जून 2015 की रात किशोरी रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। तलाश के बावजूद किशोरी का सुराग न लगने पर उसका पिता मंगलवार को थाने पहुंचा। पिता ने पुलिस को बताया कि उसकी बेटी को कस्बा का ही गौरव पुत्र अनिल अपने तीन अन्य साथियों की मदद से बहला-फुसलाकर ले गया है। जब उसने बेटी के बारे में आरोपी और उसके साथियों से पूछताछ की तो उन्होंने उसे जान से मारने की धमकी दी। एसओ जैथरा आर. के. अवस्थी ने बताया कि किशोरी के पिता की तहरीर पर मामले की रिपोर्ट गौरव और उसके तीन साथियों के खिलाफ दर्ज कर ली गई है। मामला दलित समाज से जुड़ा होने के कारण विवेचना सीओ अलीगंज द्वारा की जा रही है।

 दूसरी ओर कोतवाली देहात क्षेत्र के अंतर्गत गांव गदनपुर से 16 जून को दोपहर 16 वर्षीय किशोरी घर से निकल गई। रिश्तेदारी व शुभचिंतकों के यहां तलाश करने के बावजूद भी किशोरी का सुराग न लगने पर उसका पिता मंगलवार को थाने पहुंचा। एसओ कोतवाली देहात विनोद कुमार ने बताया कि किशोरी के पिता ने गांव कुठिला लायकपुर निवासी हरेंद्र पुत्र सुरेश सिंह समेत दो लोगों पर बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। किशोरी की बरामदगी के लिए पुलिस की टीम आरोपियों की तलाश में लगी हुई है।

 

नई दुनिया

10 साल जिसे पढ़ाया, 11वीं में उसी दलित को एडमिशन नहीं दिया

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/court-399007

 इंदौर। पहली से 10वीं तक दलित बेटी जिस स्कूल में पढ़ी, उसी ने 11वीं में उसे एडमिशन देने से मना कर दिया। स्कूल ने कलेक्टर के आदेश को भी तवज्जो नहीं दी। आखिर परेशान परिजन हाईकोर्ट पहुंचे और स्कूल और शासन के खिलाफ याचिका दायर की।

 मामला पल्लवी प्लाजा सुतार गली में रहने वाली दीपश्री चौहान का है। पहली से 10वीं कक्षा तक वह सेंट रेफियल्स स्कूल में पढ़ी। 10वीं में उसका सीजीपीए 6 रहा। इसके बावजूद स्कूल ने उसे 11वीं कक्षा में एडमिशन नहीं दिया। दीपश्री की मां पद्मिनी और पिता श्रीराम चौहान एडमिशन नहीं देने का कारण पूछने गए, लेकिन स्कूल से कोई जवाब नहीं मिला तो वे कलेक्टर के पास गए।

 आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर के निर्देशों को भी नहीं माना। इसके बाद वकील केके गुप्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में स्कूल संचालक और मप्र शासन के खिलाफ याचिका दायर की गई। वकील गुप्ता ने बताया कि अनुसूचित जनजाति की छात्रा को एडमिशन देने से मना कर स्कूल ने अनुच्छेद 14 में दिए मूल अधिकारों का हनन किया है। स्कूल ने दीपश्री को काउंसलिंग में भी शामिल नहीं किया।

 दलित का मामला नहीं है, आचरण खराब है, आत्महत्या की धमकी देती है

दलित का मामला नहीं है। बच्ची का आचरण बहुत खराब है। उसने कई बार दूसरी बच्चियों की वस्तुएं चुराईं। हमने उसके माता-पिता को भी बुलाया, लेकिन वे हमें ही धमकाने लगे। बच्ची की मां ने धमकी दी कि हमने ज्यादा समझाने की कोशिश की तो बच्ची आत्महत्या कर लेगी। अन्य अभिभावकों के दबाव के चलते हमें बच्ची को स्कूल से निकालना पड़ा।

सिस्टर प्रीति, प्रिंसिपल सेंट रेफयल्स स्कूल

 

अमर उजाला

पेड़ के विवाद में मारपीट, फायरिंग में नौ लोग घायल

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03 

सुजानगंज के राई गांव में गुरुवार की सुबह पेड़ काटने को लेकर दो पक्षों में कहासुनी के बाद न सिर्फ जमकर मारपीट हुई बल्कि पथराव भी हुआ।

 इस दौरान एक पक्ष से की गई फायरिंग में सात लोग घायल हो गए। मारपीट में दूसरे पक्ष के भी दो लोगों को गंभीर चोटें आईं हैं। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल दो लोगों को वाराणसी रेफर किया गया है।

इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। तनाव को देखते हुए मौके पर डेढ़ सेक्शन पीएसी तैनात कर दी गई है। 

साथ ही एसडीएम बदलापुर ममता मालवीय को इस मुद्दे का निबटारा करने को कहा गया है।राईपुर गांव में सई नदी के किनारे महुआ का एक पेड़ है।

इसे दलित बिरादरी के लोग अपने पट्टे की जमीन में और दूसरे पक्ष के लोग अपनी जमीन में होने का दावा करते रहे हैं। डेढ़ साल पहले भी दोनों पक्षों में इसे लेकर विवाद हुआ था।

इसके बाद भी किसी पक्ष ने न तो पैमाइश कराई और न ही पुलिस और राजस्व विभाग ने तत्परता दिखाई। इस बीच गुरुवार की सुबह अमित सिंह, किशन सिंह, चंदन सिंह आदि लोग ठेकेदार को लेकर पहुंचे और पेड़ की कटाई कराने 

लगे। जब दलित बस्ती के लोगों को पता चला तो वे भी मौके पर पहुंचे और पेड़ काटने से मना करने लगे। इसे लेकर दोनों तरफ से कहासुनी के बाद मारपीट होने लगी। इस दौरान दलित बस्ती के लोगों ने किशन और चंदन की पिटाई कर दी। इससे नाराज अमित सिंह और उनके समर्थकों ने फायरिंग शुरू कर दी।

 इसमें दलित पक्ष के उमाशंकर (47), फतेह बहादुर (50), मोहन (32), कृष्ण कुमार (27) अवनीश (15), सिरताजी देवी (52) और कंचन (17) को गोली लग गई। उमाशंकर को पैर, पीठ और गर्दन में तीन व फतेह बहादुर को दो गोली लगी। रेफर किए गए उमाशंकर और फतेह बहादुर को वाराणसी के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। शेष घायलों का इलाज जिलाचिकित्सालय और अन्य निजी चिकित्सालयों में चल रहा है। सूचना मिलने पर एसपी भारत सिंह यादव, एसपी देहात चिरंजी नाथ सिंह, सीओ बदलापुर एवं एसओ केके मिश्रा मौके पर पहुंचे।

 दलितों की तरफ से शुभकरन ने अमित, शुभम और चंदन आदि के खिलाफ जानलेवा हमला करने और दलित उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है, जबकि नरेंद्र सिंह की पत्नी अमरावती ने भी कई दलितों के खिलाफ एकजुट होकर हमला करने, मारने-पीटने की तहरीर पुलिस को दी है।

 

नवभारत टाइम्स

गरीबी की जाति

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04 

राष्ट्रीय सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इनसे पता चल रहा है कि गांवों में हर तीसरा परिवार घोर गरीबी की हालत में रह रहा है और ऐसा हर पांचवां परिवार अनुसूचित जाति/जनजाति का है। यानी मोटा हिसाब लगाया जाए तो औसतन किसी भी गांव के 15 परिवारों में से पांच परिवार कमोबेश भुखमरी की हालत में जी रहे हैं। इन पांच परिवारों में तीन दलित हैं और दो गैरदलित।

 1931 के बाद यह पहला मौका है जब जनगणना में जाति को भी ध्यान में रखा गया है, हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट सामने नहीं आई है। कुछेक जिलों के आंकड़े भी अभी आने बाकी हैं। लेकिन जानकारों के मुताबिक तस्वीर करीब-करीब साफ हो गई है और आने वाले आंकड़ों से उस पर खास फर्क नहीं पड़ना। घर-घर जाकर किए गए इस सर्वे में 17.91 करोड़ परिवारों को कवर किया गया। इनमें से 31.26 फीसदी परिवार एक कमरे के कच्चे मकान में रह रहे थे और इनके मुख्य कमाऊ सदस्य के पास आमदनी का कोई स्थायी जरिया नहीं था।

गौरतलब है कि इस सर्वे में गरीबी के कुछ ठोस पैमाने तय किए गए थे। जिन परिवारों का कोई एक सदस्य सरकारी नौकरी में हो, जिनका कोई एक सदस्य 10 हजार रुपये महीने या उससे ज्यादा कमाता हो, जिनके पास खेती से जुड़ी कोई मशीन हो- इस तरह के तमाम परिवारों को पहले ही गरीबों की कैटिगरी से बाहर कर दिया गया था। गरीब की श्रेणी में सिर्फ उन्हीं परिवारों को शामिल किया गया है जिनके पास एक कमरे वाला कच्चा घर है और आय का कोई निश्चित स्रोत नहीं है।

जाहिर है, ऐसे परिवारों को साल भर काम नहीं मिलता और उन्हें अक्सर आधे पेट सोना पड़ता है। खास बात इस सर्वे की यह है कि इसने गरीबी को जाति के संदर्भ में देखा है। यह एक ऐसा सच है जिसे आजादी के बाद लगातार अनदेखा किया गया। यहां तक कि इन जातियों की राजनीति करने वाले, इन्हीं से निकले नेतृत्व ने भी गरीबी वाले पहलू को नजरअंदाज ही किया है। वे दलित प्रतिनिधित्व का सवाल तो उठाते हैं, पर अपने समुदाय के दुख को मुद्दा नहीं बनाते। यानी राजनीति चाहे किसी के भी नाम पर की जाए, चलती वह निजी हितों के हिसाब से ही है।

 

दैनिक जागरण

दलितों ने धरना देकर मांगा हक

http://www.jagran.com/punjab/sangrur-12519276.html

 जागरण संवाददाता, संगरूर

जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी द्वारा पंचायती जमीन में आरक्षित दलित हिस्से की जमीन प्राप्त करने की मांग को लेकर वीरवार को गांव खेड़ी कलां, धंदीवाल, कंधारगढ़ छन्ना व कुलार खुर्द के लोगों ने जिला प्रबंधकीय परिसर समक्ष धरना दिया। धरने को संबोधित करते हुए कमेटी के जिला नेता गुरप्रीत खेड़ी, कुल¨वदर सेखां व सुरजन झनेड़ी ने कहा कि पंचायती जमीन में संविधानिक तौर पर तीसरे हिस्से की जमीन में दलितों का कानूनी हक है, ¨कतु किसी भी जगह दलितों को उनका हक नहीं दिया जा रहा व दलित लोग इन जमीनों से वंचित होकर हरे चारे के लिए दूसरों के खेतों में हरा चारा लगाने को मजबूर हैं।

 धनाढ्य व्यक्ति इस आरक्षित कानून को दरकिनार कर लंबे समय से दलितों के हिस्से की जमीनें उपयोग कर रहे हैं। इन जमीनों के दाम को इतना बढ़ा दिया गया है कि दलित लोग इसे लेने के सक्षम नहीं है। उन्होंने कंधारगढ़ छन्ना गांव में हुई फर्जी बोली को रद्द करके जमीन दलितों को देने, धंदीवाल, कुलार खुर्द व खेड़ी कलां की पंचायती जमीन का दाम कम करने, ताकि दलित लोग यह जमीनें ठेके पर लेकर हरा चारा उगा सकें व अपना गुजारा कर सकें, धंदीवाल गांव में उपजाऊ जमीन में अनाज मंडी के प्रस्ताव को रद्द करने, गांव की 42 बीघे बंजर जमीन पर ही अनाज मंडी बनाने की मांग की।

 उन्होंने चेतावनी देते कहा कि यदि पंचायती जमीनों में रिजर्व कोटे की तीसरे हिस्से की जमीन का दाम कम करके दलितों को नहीं दी गई तो दलित लोग अपने हिस्से की जमीन में दाखिल होकर खेती शुरू कर देंगे, जिसकी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी।

 इस मौके पर सुरजीत खेड़ी, हरभजन धंदीवाल, म¨हदर ¨सह धंदीवाल, गुरप्रीत कौर कंधारगढ़ आदि उपस्थित थे।

 

नई दुनिया

प्रदेश के दलित बाहुल्य 200 गांव बनेंगे प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम

http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/pm-gaw-399044

 रायसेन(ब्यूरो)। प्रदेश के दलित बाहुल्य 200 गांवो को सर्वसुविधा युक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल किया गया है। इनमें रायसेन जिले के 5 गांव शामिल हैं। योजना में 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति बाहुल्य 200 गांवों का जनगणना 2011 के आधार पर चयन किया गया है।

 अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के कमिश्नर ने चयनित गांवो बेसलाईन सर्वे शुरू करवाने और विलेज डवलपमेंट प्लान भेजने के लिए जिला कलेक्टरों को पत्र भेजा है। सीईओ जिला पंचायत अनुराग चौधरी ने बताया कि इसमें केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर आधाभूत सुविधाओं के लिए राशि देगें। इन ग्रामों में समाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए कैम्प लगाए जाएंगे।

 सर्वे में सामने आएगी गांव की स्थिति

बेस लाईन सर्वे में गांव की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। गांव की मौजूदा जनसंख्या के अलावा साक्षर लोगों की संख्या दर्ज की जाएगी। गांव में स्कूल,सड़क,आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केन्द्र सहित नलजल योजना की क्या स्थिति है यह भी रिपोर्ट में लिया जाएगा।

 प्लान में रहेगा क्या होना चाहिए

सर्वसुविधा युक्त आदर्श गांव बनाने विलेज डवलपमेंट प्लान शासन द्वारा जिलों से मांगे गए है। जिले से यह जिम्मेदारी जनपदों को दी गई है। गांव में क्या आधारभूत आवश्यकताएं है इसकी जानकारी के साथ बेहतर योजना बनाकर राज्य सरकार को भेजी जाएगी। प्लान के आधार पर भारत सरकार द्वारा गांव के समुचित विकास के लिए राशि मुहैया कराई जाएगी। योजना को आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा अमलीजामा पहनाया जाएगा।

 इनका कहना है

सांची ब्लाक के उचेर, व्यावरा, शाहपुर सहित बाड़ी ब्लाक के पोसनी एवं बेगमगंज के घोघरी गांव को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल किया गया है। सर्वे उपरांत डवलपमेंट प्लान तैयार कर जल्दी ही शासन को भेजा जाएगा।

 

दैनिक जागरण

अब बनेंगे दलितों के लिए शौचालय

http://www.jagran.com/haryana/palwal-12519317.html?src=LN

 05

जिले के दलित वर्ग के लिए एक अच्छी खबर है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत पलवल जिले को सरकार को नौ लाख, 35 हजार रुपये का अनुदान शौचालय बनाने हेतु आया है। यह अनुदान ग्राम विकास व पंचायत विभाग के माध्यम से आया है। इस अनुदान से करीब 80 व्यक्तिगत शौचालय ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। एक शौचालय पर करीब 12 हजार रुपये की लागत आएगी। जिसमें से 10 हजार रुपये शौचालय के निर्माण पर तथा दो हजार रुपये वाशवेशन आदि व्यवस्था पर खर्च किए जाएंगे। यह अनुदान वर्ष 2013-14 में मिलना था, जो अब प्रशासन को मिला है।

 प्रदेश में इस मिशन के तहत सरकार ने दो करोड़, 39 लाख रुपये का अनुदान जारी किया है। इसमें से पलवल जिले को नौ लाख 35 हजार रुपये व पड़ोसी फरीदाबाद जिले को पौने 10 लाख रुपये तथा मेवात जिले को तीन लाख रुपये का अनुदान जारी किया गया है। पंचायतों ने इस संदर्भ में प्रस्ताव पहले ही प्रशासन के पास भिजवाए हुए हैं। उन लोगों का भी चयन किया हुआ है, जिन्हें शौचालय हेतु अनुदान दिया जाना है। इस अनुदान का इंतजार जिला प्रशासन को काफी समय से था।

 हालांकि जिले में शौचालयों के लिए अनुदान मांगने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। उस हिसाब से देखा जाए तो यह अनुदान राशि ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। प्रशासन को उम्मीद है कि मिशन के तहत जिला प्रशासन को और अनुदान प्राप्त होगा।

 स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में स्वच्छता अभियान में तेजी लाते हुए शौचालय बनाने का कार्य प्रगति पर है। सरकार से जो अनुदान आया है, उसका पूरा उपयोग किया जाएगा। लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान में प्रशासन को सहयोग करें।

 

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

 

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One response to “दलित मीडिया वाच-हिंदी न्यूज़ अपडेट 26.06.15

  1. ट्विटर पर दलित प्रोफेसर मांग रहा है राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से बैठने के लिए कुर्सी : http://khabar.ndtv.com/news/blogs/dalit-professor-demands-justice-from-pm
    आज सुबह इस ट्वीट पर नज़र गई तो यकीन नहीं हुआ कि इस देश में किसी को जाति के नाम पर बैठने के लिए कुर्सी-टेबल नहीं दी जा रही है। जब कुएं से पानी नहीं पीने दिया जा रहा है, बारात में घोड़ी पर चढ़ने नहीं दिया जा रहा है तो इसमें क्या हैरत कि कोई असिस्टेंट प्रोफेसर को बैठने की जगह नहीं दे रहा होगा।
    मैं @ChoudhriAk नाम से बने हैंडल को स्क्रोल करते हुए हर ट्वीट को ध्यान से पढ़ने लगा। पता चला कि अरुण कुमार चौधरी ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, पंजाब के मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और तमाम अख़बारों और चैनलों को ट्वीट किया है। अपने ट्वीट के साथ अनुसूचित जाति आयोग से लेकर मानवाधिकार आयोग तक की गई शिकायतों की चिट्ठी जोड़ी है। एक अदद कुर्सी के लिए किसी को इस अपमान से गुज़रना पड़े तो इंडिया इंडिया चिल्लाने वालों को एक बार सोचना चाहिए कि जब तक इस तरह के भेदभाव रहेंगे तब तक क्यों न इंडिया इंडिया चीखना बंद कर दिया जाए।

    आख़िर अरुण ने चांद-तारे तो नहीं मांगे हैं। मैंने भी अरुण के ट्वीट को री-ट्वीट कर दिया। लिहाज़ा प्रतिक्रिया में कई नागरिकों का जवाब आया है कि ऐसा भी हो सकता है उन्हें यकीन नहीं हो रहा है। वे भी अरुण की इस पीड़ा के साझीदार बन गए। कुछ लोग ऐसी भी थे जो तुरंत आरक्षण के विरोध की बात करने लगे। ये वो लोग हैं जो अरुण कुमार चौधरी के साथ हो रहे बर्ताव को सही ठहरा रहे थे।

    भटिंडा के अरुण कुमार से फोन पर बातचीत हुई और उनके अनुसार जो कहानी है वो इस तरह से है।

    पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला का भटिंडा में एक रीजनल सेंटर है। वहां की लौ फैकल्टी में 6 पद हैं। सहायक प्रोफेसर का एक पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2011 में पहली बार कांट्रेक्ट पर हुआ। जब भी इंटरव्यू हुआ अरुण के अलावा कोई पहुंचा ही नहीं लिहाज़ा विश्वविद्यालय को उन्हें 2012 में भी बहाल करना पड़ा। स्थायी पद की वैकेंसी होने के बावजूद अरुण कुमार चौधरी कांट्रेक्ट पर रखे जाते रहे। अरुण कुमार ने इसी रीजनल सेंटर से पढ़ाई भी की है। जब अरुण कुमार चौधरी ने आवाज़ उठानी शुरू कि तो उन्हें लेकर विभाग के पुराने शिक्षकों को परेशानी होने लगी। ”टीचरों के काम के बंटवारे के लिए होने वाली बैठक में मुझे नहीं बुलाया जाता था। मुझे टीचिंग से अलग काम दिया जाता था कि आप दोपहर दो बजे क्लास ख़त्म होने के बाद शाम पांच बजे तक कॉलेज में रुको। जबकि सारे टीचर घर चले जाते थे। मुझे छुट्टी के दिन भी सेंटर में बुलाया जाता था”, फोन पर बात करते हुए अरुण कुमार न तो भावुक थे न उत्तेजित। बेहद संयमित और तार्किक तरीके से अपनी बात बता रहे थे।
    उन्होंने कहा कि मेरे ख़िलाफ़ उनकी नाराज़गी तब और बढ़ गई जब पंजाब विश्वविद्यालय ने रीजनल सेंटर से राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार कराने के लिए कहा। विभाग के प्रोफसरान नहीं चाहते थे इसलिए टालने के लिए यह जिम्मा मुझे दे दिया। मैंने उस सेमिनार को कामयाब बना दिया। तब से उन्हें लगा कि अरुण तो दबने वाला नहीं है। मैं छात्रों को लगन से पढ़ा भी रहा था। तभी अचानक मुझे पता चलता है कि सेंटर के 35 लोगों ने मेरे ख़िलाफ़ लिखित शिकायत की है। दो महीने के कार्यकाल में मैंने इनमें से कई लोगों का चेहरा तक नहीं देखा था। मेरे विभाग की एक महिला टीचर ने आरोप लगाया कि मैंने उन्हें फोन कर अपशब्दों का प्रयोग किया। बाद में चपरासी से लेकर क्लर्क तक ने उस मेमोरेंडम पर दस्तख़त किये कि मैं अनुशासन तोड़ता हूं और व्यवहार ठीक नहीं है। विश्वविद्यालय ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई जिसके सभी सदस्य रीजनल सेंटर के ही थे और उनमें से एक तो शिकायतकर्ता भी था। मेरा सामाजिक बहिष्कार भी किया गया।

    कमेटी की रिपोर्ट के बाद मुझे भटिंडा से ढाई सौ किलोमीटर दूर मांसा ज़िले के जुनीर कस्बे में भेज दिया गया। वहां कानून का कोई विभाग ही नहीं है। मुझे अंग्रेज़ी पढ़ाने के लिए बाध्य किया गया। ढाई साल तक मैंने वहां अंग्रेज़ी पढ़ाई जबकि मैं एलएलबी, एलएलएम हूं। मेरा तबादला नहीं हुआ, डेपुडेशन के नाम पर भेजा गया ताकि सवाल न उठे कि सौ लोग कांट्रेक्ट पर लिये गए हैं, उनमें से एक का तबादला क्यों हो रहा है। मैंने 20 मई 2015 को अप्रैल को वाइस चांसलर को ई-मेल किया कि मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है और मैं तनाव में आकर आत्महत्या कर सकता हूं। आप इसके ज़िम्मेदार होंगे। उस समय मोगा बस कांड को लेकर हंगामा हो रहा था, वाइस चांसलर को लगा कि इसे लेकर कोई और बवाल न हो जाए इसलिए मेरा तबादला वापस रीजनल सेंटर में कर दिया गया। मुझ पर दबाव डाला जाने लगा कि मैं अनुसूचित जाति आयोग से अपनी शिकायतें वापस ले लूं।

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