दलित मीडिया वाच-हिंदी न्यूज़ अपडेट 19.06.15

दलित मीडिया वाच

हिंदी न्यूज़ अपडेट  19.06.15

 

दलित युवक को पीटने की पुलिस ऑफिस पर गूंज – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/meerut-city-12495486.html\

डीडी नगर में नलों से आ रहा है गंदा पानी दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-HMU-MAT-latest-gwalior-news-030021-2095695-NOR.html

MP में दलित अपमान का नया मामला, 6 महीने से राशन के लिए मोहताज दलित परिवार न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/mp-dalits-do-not-get-ration-from-government-ration-shop-479369.html

बकाया पैसा मांगने पहुंचे चालक व खलासी को पीटा – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/gopalganj-12494810.html

हरेवा की पीड़ित महिलाओं ने मांगें आवास, मुआवजा – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/shahjahanpur/shahjahanpur-hindi-news/women-victims-of-hrewa-the-demands-of-housing-compensation-hindi-news/

प्रियदर्शन की बात पते की : कब होते हैं इमरजेंसी जैसे हालात – एनडीटीवी इंडिया

http://khabar.ndtv.com/news/blogs/priyadarshans-blog-on-advanis-comment-on-emergency-773112

दैनिक जागरण

दलित युवक को पीटने की पुलिस ऑफिस पर गूंज

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/meerut-city-12495486.html\

मेरठ : परतापुर थाने की मोहिउद्दीनपुर पुलिस चौकी इंचार्ज द्वारा बुधवार रात में दलित युवक की पिटाई प्रकरण की गुरूवार को एसएसपी ऑफिस पर गूंज रही। बसपा जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव के नेतृत्व में पीड़ित परिवार ने ग्रामीणों के साथ पुलिस ऑफिस पर प्रदर्शन किया। एसएसपी ने आरोपी दारोगा के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद हंगामा शांत हुआ।

एसएसपी से की शिकायत

परतापुर थाना क्षेत्र के गांव कायस्थ गांवड़ी निवासी राहुल व महेश ने एसएसपी दिनेश चंद्र दूबे को बताया कि 17 जून की रात को ट्रेक्टर ट्रॉली से अपने गांव जा रहे थे। दोनों युवक मोहिउद्दीनपुर स्थित कैनरा बैंक के पास रूक गए। राहुल का आरोप है कि तभी मोहद्दीनपुर पुलिस चौकी इंचार्ज महेंद्र सिंह यादव आए और जाति पूछी। दलित बताने पर ही दारोगा ने लाठी से उसकी पिटाई की, जिसमें उसके दोनों हाथों की हड्डी टूट गई। जेब में रखे 10 हजार रुपये लूट लिए। शिकायत करने थाने गए वहां से भी टरका दिया गया।

सीओ की जांच में पीड़ित है आरोपी

सीओ ब्रह्मपुरी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि उनकी जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। कहा कि बुधवार रात एक बजे राहुल, महेश व एक अन्य युवक एक गाड़ी के साथ मोहद्दीनपुर बैंक के पास खड़े थे। उस क्षेत्र में हाइवे पर लूट की घटनाएं हो चुकी थी। दारोगा महेंद्र यादव अपने साथ चौकीदार मुकेश तोमर को लेकर गश्त कर रहे थे। पुलिस को अपनी ओर आता देख तीनों युवक भागे।

दो गाड़ी में बैठे और एक पैदल ही भाग निकला। चौकीदार ने डंडा भी फेंक कर मारा, लेकिन वह लगा नहीं। तीनों युवक कायस्थ गांवड़ी गांव के शराब माफिया सुनील जाटव के साथी हैं। दारोगा ने पीछा भी किया, लेकिन गांव में घुसने के बाद वह नहीं दिखे, तभी हाइवे पर एक्सीडेंट की सूचना पर दारोगा घटनास्थल पर पहुंच गया। मोहद्दीनपुर के डाक्टर सुभाष से राहुल के हाथों की एक्स-रे चेक कराए, जिसमें दोनों हाथ सलामत हैं।

इनका कहना है..

पूरे प्रकरण की जांच सीओ ब्रह्मापुरी को सौंप दी है, रिपोर्ट आने पर कार्रवाई निश्चित है। गलत काम नहीं होने दिया जाएगा।

दैनिक भास्कर

डीडी नगर में नलों से आ रहा है गंदा पानी

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ग्वालियर| दीनदयाल नगर सेक्टर-ए और सेक्टर-बी में नलों से हो रही गंदे पानी की सप्लाई से लाेग परेशान हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिन से नलों में सीवर का दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। यहां रहने वाले रिटायर्ड प्रिंसिपल वीके जैन और स्थानी लोगों ने बताया किया उन्होंने नलों में गंदा पानी आने की शिकायत पार्षद और निगम के अधिकारियों से लिखित में की है। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

दलित विरोधी है प्रदेश सरकार: बनौरिया

ग्वालियर| प्रदेश में हो रहे दलितों पर अत्याचार के विरोध में गुरुवार को सर्वदलित एकता मंच ने थाटीपुर स्थित कुम्हरपुरा में प्रदेश की भाजपा सरकार का पुतला जलाकर प्रदर्शन किया। इस दौरान दलित नेता पुरुषोत्तम बनौरिया ने बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने एसएसएसएम आईडीए बैंक खातों फेमिली आईडी के नाम पर शासकीय योजनाओं से दलितों को वंचित रखा है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकारी योजनाओं का लाभ दलितों को नहीं दिया गया तो जन चेतना यात्रा से सरकार की दलित विरोधी नीतियों को उजागर किया जाएगा। इस अवसर पर लाखन सिंह राजे, कमलेश रोजिया, रमेश शाक्य, सुरेश सोलंकी, शोभाराम ठेकेदार, राय सिंह आदि मौजूद थे।

न्यूज़ 18

MP में दलित अपमान का नया मामला, 6 महीने से राशन के लिए मोहताज दलित परिवार

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Dalit-Food

भिंड के एक गांव में गरीब ग्रामीणों को सरकारी राशन की दुकान से इसलिए राशन नहीं दिया जाता क्योंकि वो दलित हैं. भिंड के मुरलीपुरा में दलित गरीबों को छह माह से राशन नहीं मिला. कभी-कभार खुलने वाली राशन की दुकान से इन्हें राशन देने के बजाए दबंग अपमानित कर भगा देते हैं. पीड़ितों ने कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

मध्यप्रदेश सरकार भले ही गरीबों को राशन मुहैया कराने के लिये तमाम योजनायें बनाये और लाख दावे करे, हकीकत इससे कोसों दूर है. भिंड में सरकारी राशन की दुकानें गरीबों का पेट भरने की बजाय दबंगों और कालाबाजारियों की जेब भरने में ज्यादा काम आ रही हैं. दबंगई भी ऐसी कि किसी को भी हैरान कर दे.

दरअसल, यहां के मुरलीपुरा क्षेत्र मेंं स्थित राशन की दुकान से गांव के दलितों को राशन नहीं दिया जाता. कारण है इन गरीब ग्रामीणों का दलित होना. ग्रामीणों की मानें तो उन्हें पिछले छह माह से सरकारी राशन नहीं मिला. राशन न मिलने से परिवार भूखे रहने तक को मजबूर हैं.

इन ग्रामीणों ने दबंगों और छुआछूत के खिलाफ कई बार आला अधिकारियों से शिकायत की. कलेक्टर से लेकर कमिश्नर और मुख्यमंत्री तक शिकायत करने के बाद भी इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई.

ऐसा नहीं है कि खाद्य विभाग की जानकारी में यह मामला नहीं है, लेकिन इस भेदभाव को दूर करने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है. प्रभारी खाद्य अधिकारी आरबी शर्मा से जब भेदभाव को लेकर सवाल पूछे गए तो कार्रवाई करना तो दूर वह सवाल पर ही भड़क गए और फिर उन्होंने कोई बात नहीं की.

 

दैनिक जागरण

बकाया पैसा मांगने पहुंचे चालक व खलासी को पीटा

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गोपालगंज : जादोपुर थाना क्षेत्र के बाबू विशनुपुर गांव स्थित बस के मालिक के दरवाजे पर बकाया पैसा मांगने पहुंचे चालक व खलासी की कुछ लोगों ने जमकर पिटाई कर दी। घायल चालक व खलासी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना को लेकर बस के मालिक सहित पांच लोगों के विरुद्ध दलित उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है।

जानकारी के अनुसार यादोपुर थाना क्षेत्र के बाबू विशुनपुर गांव के रवीन्द्र राम अपने ही गांव के राकेश कुमार गुप्ता की बस चलाते हैं। बुधवार को वे अपना18 हजार बकाया मांगने खलासी अशोक पटेल के साथ पहुंचे। इसी बीच बस के मालिक सहित अन्य लोगों ने उनपर लाठी डंडा से हमला कर दिया। इस हमले में चालक व खलासी घायल हो गये। घटना को लेकर थाने में राकेश कुमार गुप्ता तथा राजन गुप्ता सहित पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

अमर उजाला

हरेवा की पीड़ित महिलाओं ने मांगें आवास, मुआवजा

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जलालाबाद क्षेत्र के गांव बड़ा हरेवा में निर्वस्त्र करके गांव में घुमाई गईं दलित महिलाओं और उनके घरवालों ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय आकर डीएम शुभ्रा सक्सेना से भेंट की और उनसे शासन से स्वीकृत आर्थिक सहायता के साथ आवास दिलाने की गुहार की। डीएम ने पीड़िताओं को मुआवजा की धनराशि के चेक जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

शासन ने हरेवा कांड में पीड़ित सभी पांचों महिलाओं को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। दो दिन पहले सपा के निवर्तमान सांसद मिथिलेश कुमार ने बताया था कि लखनऊ में मुख्यमंत्री से भेंट करके उन्होंने एक-एक लाख रुपये के चेक जारी करा दिए हैं और यह धनराशि शासन स्तर से डीएम को प्राप्त कराई जा चुकी है। पूर्व सांसद की इसी सूचना के आधार पर पीड़ित पक्ष की गजरानी, मुन्नी देवी, मुनीशा, रामू, पोखे लाल आदि डीएम से मिले।

पीड़िताओं ने डीएम को ज्ञापन देकर बताया कि उन्हें निर्वस्त्र करके गांव में घुमाए जाने के मामले की जांच के दौरान अफसरों से सुरक्षा मजबूत करने के साथ आर्थिक सहायता और आवास दिए जाने का अनुरोध किया गया, लेकिन अभी तक इस विषय में कोई कार्यवाही नहीं हुई। डीएम ने कहा कि संबंधित पटल लिपिक के आज उपस्थित नहीं होने के कारण अन्य किसी कार्य दिवस में उन्हें चेक दिला दिए जाएंगे।

डीएम ने यह भी कहा कि प्रशासन का प्रयास रहेगा कि उन्हें चेक उनके घरों पर ही पहुंचा दिए जाएं जिससे कि उन्हें चेक लेने के लिए दोबारा मुख्यालय पर नहीं आना पड़े। डीएम ने आवास, सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस, जमीन के पट्टों का आवंटन संबंधी मांगों पर आश्वस्त किया कि अधिाकारियों से जांच कराकर इस संबंध में जल्द उचित निर्णय किया जाएगा।

एनडीटीवी इंडिया

प्रियदर्शन की बात पते की : कब होते हैं इमरजेंसी जैसे हालात

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नई दिल्ली: वे कोई और दिन थे जब न जीवन में आज जैसी रफ़्तार थी, न पत्रकारिता में। राजनीति और दुनिया की कुछ हलचलों के बीच सोया-सोया सा समाज चलता था, मंथर गति से ख़बरें चलती थीं। वह हिंदुस्तान के धीरे-धीरे चलने और बनने के दिन थे। लेकिन वह सोई-सोई सी दुनिया फिर भी आज के मुक़ाबले ज़्यादा जागी हुई थी। वह अपने नेताओं को पहचानती भी थी, पूजती भी थी, लेकिन नाराज़ होने पर बदल डालने का हौसला भी रखती थी।
यह सच है कि इमरजेंसी की पहली चोट के साथ वह सहम कर चुप हो गई। लेकिन इमरजेंसी के पहले और बाद इसी सोई-सोई दुनिया ने ऐसी अंगड़ाई ली थी, जिससे सत्ताएं थरथरा गई थीं। जैसे 1975 के देश को यक़ीन नहीं था कि इंदिरा गांधी इमरजेंसी लगा देंगी वैसे ही 1971 की इंदिरा गांधी ने सोचा नहीं होगा कि ये देश एक दिन उनका ताज उछाल देगा उनका तख़्त गिरा देगा।

1977 की जो ख़ामोश क्रांति हुई, उससे दुनिया के लोकतांत्रिक इतिहास का एक बेहतरीन दृश्य बना। ये अलग बात है कि महज तीन साल के भीतर उस जनक्रांति के साथ उसके नेताओं ने धोखा किया। उस धोखाधड़ी के सबसे बड़े जिम्मेदार लोगों में एक को आज इमरजेंसी का वह ख़तरा फिर से अगर याद आ रहा है तो इसके पीछे भले उसकी अपनी राजनीतिक मायूसी हो, लेकिन यह ज़माने का भी सच है।
इस बात के बावजूद कि इन चालीस बरसों में हिंदुस्तान कछुए से खरगोश बन चुका है और मीडिया अपनी दैनिक या साप्ताहिक लय को पीछे छोड़कर बिल्कुल चौबीस घंटे चलने वाली ऐसी चक्की बन चुका है, जिसमें दुनिया पिसती रहती है और ख़बरें निकलती रहती हैं, हम एक ज़्यादा बेख़बर और असुरक्षित मुल्क हैं। सबकी फिक्र करने वाला, पास-पड़ोस का ख़याल रखने वाला, और देश और दुनिया को अपना फ़र्ज़ समझने वाला मध्यवर्ग ख़त्म हो चुका है और उसकी जगह एक ऐसा आक्रामक उपभोक्ता वर्ग पैदा हो चुका है जो सिर्फ अपने खाने-पीने, ओढ़ने-पहनने की सोचता है और किसी भी तरह की हिंसा, गैरबराबरी और नाइंसाफ़ी की धूल अपनी त्वचा पर पड़ने नहीं देता।
इसी दौर में मीडिया पर पूंजी का कब्ज़ा पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है और समांतर आवाज़ें पहले से ज़्यादा दबी हुई हैं। ऐसे समय में देशभक्ति का मतलब दुनिया में ताकतवर होने की हसरत भर है, विकास का मतलब कुछ लोगों के लिए समृद्धि भर है और नेतृत्व का मतलब आक्रामक तेवर में की गई बयानबाज़ी भर है।
विचारहीनता के इस दौर में फिर ऐसी व्यक्तिपूजा शुरू हो रही है जिसमें न उचित आलोचना की जगह है और न असहमति की। लोकतांत्रिक संस्थाएं या तो ख़त्म की जा रही हैं या बेमानी बनाई जा रही हैं। दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यक लगातार किनारे किए जा रहे हैं और खुदकुशी और गरीबी के विकराल आंकड़े देखने को कोई भी तैयार नहीं है।
यही वह हालात होते हैं जिसमें कोई नेता ख़ुद को लोकतंत्र का पर्याय समझने लगता है। पहले वह उम्मीद जगाता है, फिर अपनी नाकामियां लोकतंत्र पर थोपता है और फिर अंत में इमरजेंसी लगाता है- ये अलग बात है कि अंत में वो भी मारा ही जाता है। लेकिन इतिहास की इस गलती को हम न दोहराएं- इसके लिए ज़रूरी है कि अपने लोकतंत्र पर लगातार नज़र रखें, अपने नेताओं के हमेशा इम्तिहान लेते रहें।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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