दलित मीडिया वाच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 14.06.15

दलित मीडिया वाच

हिंदी न्यूज़ अपडेट  14.06.15

हैंगिंग बताई किशोरी की मौत की वजह  दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/badaun-12473548.html

डीजे को लेकर हुआ विवाद, दूल्हे को एक दिन बाद लेने पड़े फेरे – न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/rajasthan/marriage-controversy-476547.html

युपी: दुल्हे के चौखट पर प्रेमिका का पहरा  पंजाब केसरी

http://www.punjabkesari.in/news/article-370249

जमीनों का मिले मालिकाना हक – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/other-news/39ownership-of-lands-met39/articleshow/47658305.cms

यहां बुलंदी पाती रही है दलित राजनीति – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/bihar/patna-city-lower-cast-politicians-did-not-became-powerful-in-bihar-12475192.html

इंसाफ की गुहार लेकर दलितों का प्रदर्शन – नवभारत टाइम्स

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/hisar/the-performance-of-the-dalits-seek-justice/articleshow/47658363.cms

भूख हड़ताल करने जा रहे गहरी को पुलिस ने रोका 

 दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/punjab/bhatinda-12473100.html

Please Watch :

A Farmer Gets Looted Three Times:

https://vimeo.com/128627091

दैनिक जागरण

हैंगिंग बताई किशोरी की मौत की वजह

http://www.jagran.com/uttar-pradesh/badaun-12473548.html

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इस्लामनगर (बदायूं) : थाना क्षेत्र में पेड़ पर लटकी मिली दलित की किशोरी की मौत की वजह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हैंगिंग बताई गई है, जबकि सिर पर लगी चोट के आधार पर हत्या की आशंकाओं से भी इंकार नहीं किया गया है। पुलिस की जांच अब हत्या और आत्महत्या के बीच चल रही है। एसएसपी ने घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना कर सबूतों को सहेजा है। पुलिस ने घटना की तह तक पहुंचने के लिए गांव के ही तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।

गुरुवार को शाम करीब छह बजे घास छीलने गई इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव चिचैटा निवासी रामोतार की 15 वर्षीय पुत्री लक्ष्मी का गांव के बाहर जंगल में मौजूद एक बबूल के पेड़ पर उसकी लाश लटकी मिली थी। सूचना पर मौजूद लोगों ने चेहरे पर चोट का निशान और घर में कोई वजह न होने की वजह से आत्महत्या नहीं दुष्कर्म के बाद हत्या करने की आशंकाएं जताई थीं।

पुलिस ने मृतका के पिता से कोई कार्रवाई न करने की तहरीर लेने के बाद शव पोस्टमार्टम को भेज दिया। दलित किशोरी की लाश फांसी के फंदे पर मिलने की सूचना से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। शुक्रवार सुबह एसएसपी सौमित्र यादव पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे, जहां घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने सीओ बिल्सी को निर्देश दिए कि घटना के बारे में गहनता से तफ्तीश करें, जो भी सच हो, सच के आधार पर कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही मुरादाबाद से पहुंची एफएसएल की टीम ने बबूल के पेड़ पर तकनीकी जांच करते हुए आसपास सबूतों को इकट्ठा किया। इसके बाद एसएसपी सौमित्र यादव सीओ सिटी राजेंद्र ¨सह धामा के साथ पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे, जहां मृतका के परिजनों से बात की। एसएसपी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जो भी घटना है उसके तहत हर संभव कार्रवाई की जाएगी। तीन डाक्टरों के पैनल से हुए पोस्टमार्टम में मौत की वजह हैं¨गग बताई गई। मृतका के सिर पर मौजूद चोट के निशान को देखते हुए डाक्टरों ने हत्या की संभावना से भी इंकार नहीं किया है।

मेडिकल पैनल का कहना है कि किशोरी के सिर पर चोट का निशान है, इसलिए हत्या की बात को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, मगर देर रात तक पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी। पोस्टमार्टम करने वाले पैनल ने दुष्कर्म की पुष्टि के लिए स्लाइड तैयार की है। इसकी फोरेंसिक लैब में जांच के बाद ही कोई बात कही जा सकती है।

न्यूज़ 18

डीजे को लेकर हुआ विवाद, दूल्हे को एक दिन बाद लेने पड़े फेरे

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भरतपुर जिले के गांव मूडिया जाट में गुरूवार देर रात दलित दूल्हे की बारात में डीजे बजाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया.

ग्रामीणों की डीजे को अश्लील बताते हुए डीजे को बंद करवाने के लिए बारातियों से कहासुनी हो गई. देखते-देखते विवाद बढ़ गया और बात पुलिस तक पहुंच गई. बात बिगड़ती देख पुलिस ने डीजे को बंद करवाया और हल्‍का बल प्रयोग करते हुए हुड़दंगिगयों को मौके से खदेड़ दिया.

एसपी राहुल प्रकाश के अनुसार दोनों पक्ष डीजे को लेकर रात भर अड़े रहे. जहां ग्रामीण डीजे को नहीं बजाने को लेकर अड़े हुए थे और बाराती डीजे की धुनो पर ही बारात निकालने की जिद पर थे.

रातभर विवाद के चलते दूल्हे को बिना बारातियों के ही सुबह शुक्रवार को फेरे लेने पड़े. उधर, रात भर चले हंगामें के बाद सुबह पंचायत ने फैसला किया गया कि अब किसी भी बारात में डीजे नहीं बजाया जाएगा.

पंजाब केसरी

युपी: दुल्हे के चौखट पर प्रेमिका का पहरा

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बरेली: गुरुवार को पूरी रीति रिवाज के साथ बारात घर से रवाना ही होने वाली थी कि इसी बीच दूल्हे की प्रेमिका आ धमकी। प्रेमिका ने दूल्हे की शादी के खिलाफ घर पर धरना दे दिया। मौके से ही 100 नंबर पर फोन डायल कर दूल्हे पर गंभीर आरोप लगाए। कुछ ही देर में पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। देर शाम तक प्रेमिका दूल्हे के दरवाजे पर बैठी रही। पुलिस की मौजूदगी में जब बारात कैंसिल हो गई, तो प्रेमिका अपने घर गई। युवती अपनी शिकायत लेकर बाद में थाने भी पहुंची।

बरेली से व्यापारी के बेटे की बारात क्षेत्र के दूसरे गांव जा रही थी। बारात निकासी से कुछ देर पहले ही एक दलित युवती यहां पहुंच गई। उसने खुद को दूल्हे की प्रेमिका बताते हुए शादी का विरोध कर दिया। परिजनों से उसकी काफी बहस भी हो गई। मामला ज्यादा पेचीदा हुआ, तो युवती ने मौके से ही 100 नंबर पर फोन लगा दिया। युवती ने आरोप लगाया कि काफी समय से उसकी लड़के के साथ दोस्ती चल रही है और लड़के ने उसी से शादी का वायदा किया था। मगर अब वो वायदे से मुकर गया है। कुछ ही देर में थाने से एसआई संजय सिंह पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए।

युवती ने पुलिस से भी साफ कह दिया लड़के की शादी दूसरी जगह नहीं हो सकती, अगर ऐसा हुआ परिणाम घातक होगा। मोहल्ले और रिश्तेदारों के बीच फजीहत के बाद बात न बनती देख पुलिस की मौजूदगी में यह तय हुआ कि बारात नही जाएगी। पुलिस के काफी समझाने के बाद युवती अपनी कई डिमांड रखकर दूल्हे की चौखट से अपने घर की ओर रवाना हुई।

नवभारत टाइम्स

जमीनों का मिले मालिकाना हक

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जंतर मंतर : शनिवार को जंतर मंतर पर दलित समुदाय के लोगों के साथ नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के सांसद उदित राज ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 1970-1976 के दौरान 20 सूत्रीय कार्यक्रम में दिल्ली देहात के करीब 150गांवों के हजारों लोगों को आवासीय और कृषि योग्य जमीनें अलॉट की गई थी। सरकारी विभाग की लापरवाही की वजह से अलॉट हुई कुछ जमीनों को आजतक मालिकाना हक नहीं मिला है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले 40 सालों से भूमिहीन लोग जमीन के मालिकाना हक की लड़ाई लड़ रहे थे। दिल्ली सरकार ने 21 मई, 2012 को यह प्रस्ताव पास कर दिया था कि 1970-1976 में जिन लोगों को बाहरी दिल्ली में 20 सूत्रीय कार्यक्रम के तहत जमीनें अलॉट की गई थीं, उन्हें जमीन का मालिकाना हक दे दिया जाए। उस प्रस्ताव को उपराज्यपाल ने राष्ट्रपति को भेज दिया गया था। सांसद उदित राज ने कहा कि यह प्रस्ताव अब तक राष्ट्रपति के पास लंबित पड़ा है। लोगों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा।

दैनिक जागरण

यहां बुलंदी पाती रही है दलित राजनीति

http://www.jagran.com/bihar/patna-city-lower-cast-politicians-did-not-became-powerful-in-bihar-12475192.html

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पटना [दीनानाथ साहनी]। बिहार में दलित राजनीति खूब बुलंदी पाती रही है। इस सिलसिले में जगलाल चौधरी, महावीर चौधरी,जगजीवन राम, भोला पासवान शास्त्री, भोला राउत, चन्द्रिका राम, भोला मांझी, नयन तारा, महावीर दास, जगदेव प्रसाद, रामसुन्दर दास और जीतन राम मांझी सरीखे दलित नेताओं का उल्लेख किया जा सकता है।

1937 में पहली बिहार विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए 15 सीटें आरक्षित की गईं। इसमें से 14 सीटों पर कांग्रेस के दलित प्रत्याशी जीते। उनमें जगलाल चौधरी, जगजीवन राम, डॉ.रघुनंदन प्रसाद, राम प्रसाद, सुखारी राम, राम बसावन राम, जीतू राम, कारू राम, शिवनंदन राम, रामबरस दास और बाल गोविंद भगत प्रमुख थे।

22 जुलाई 1937 में जब श्रीकृष्ण सिंह मंत्रिमंडल ने शपथ ली तो पहले दलित नेता जगलाल चौधरी एवं दूसरे दलित नेता जगजीवन राम को संसदीय सचिव बनाया गया। इस समय दलितों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व पिछड़ों की तुलना में बेहतर था।

जगलाल चौधरी और जगजीवन राम बड़े दलित नेता के रूप में उभरे। इन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम भी किया। जगजीवन राम बिहार में ताउम्र दलित वर्ग के मुख्य संगठक और सर्वमान्य नेता बने रहे। 1936 में वे विधान परिषद और फिर 1937 व 1946 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने।

फिर स्वतंत्र भारत के नेहरू मंत्रिमंडल में वे सबसे कम उम्र (38 वर्ष) के मंत्री बने। वे लंबे समय तक केंद्र में मंत्री रहे। जनता सरकार में उपप्रधानमंत्री रहे राम ने दलितों की राजनीति एवं सामाजिक हैसियत स्थापित की।

1967 से अभी तक बिहार में भोला पासवान शास्त्री, राम सुन्दर दास और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला लेकिन ये लोग दलित मुख्यमंत्री के रूप में अपनी विशिष्ट छाप नहीं छोड़ सके। वहीं रामविलास पासवान केन्द्र में कई बार मंत्री बने और अभी भी केन्द्रीय मंत्री हैं। वे भी खुद को दलित नेता के रूप में स्थापित करने का लगातार प्रयास करते रहे हैं।

उधर बिहार विधानसभा चुनाव की आहट होते ही दलित वोटों को लेकर विभिन्न दलों में खींचतान शुरू हो गयी है। जीतन राम मांझी नये दलित नेता के रूप में प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं।

1915 में नवगठित बिहार और उड़ीसा प्रदेश की पहली विधान परिषद में खान बहादुर सैयद फखरुद्दीन ने दलितों की समस्या को सुधारने का मसला उठाया था। इसे दलित वर्ग को राजनीति व समाज की मुख्यधारा से जोडऩे का शुरुआती प्रयास माना जाता है।

नवम्बर,1920 में द्वितीय विधान परिषद में विश्वनाथ कर दलित वर्ग के प्रतिनिधि के तौर पर नामांकित हुए। उन्होंने बिहार और उड़ीसा में दलित वर्गों की स्थिति में सुधार का मुद्दा उठाया। प्रदेश सरकार की ओर से जवाब देते हुए तत्कालीन सचिव मि. हैमंड ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इस मुद्दे से पल्ला झाड़ लिया। (संदर्भ-बिहार एंड उड़ीसा लेजिस्लेटिव काउंसिल, क्वेश्चन्स एंड आन्सर्स, नवम्बर 1921)

 दलित मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल

* 1968, 1969 एवं 1971 में क्रमश: तीन महीने, बारह दिन तथा सात महीने के लिए भोला पासवान शास्त्री मुख्यमंत्री रहे।

* 22 अप्रैल 1979 से 17 फरवरी 1980 तक राम सुन्दर दास ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

* 20 मई 2014 से 22 फरवरी 2015 तक जीतन राम मांझी सीएम रहे।

 कुछ ऐतिहासिक तथ्य-

* बिहार एवं उड़ीसा विधान परिषद के आम चुनाव में चंपारण से एक दलित उम्मीदवार रामलाल राम खड़े हुए थे। विधान परिषद का चुनाव लडऩे वाले वे पहले दलित थे। चुनाव में उन्होंने कुल ग्यारह रुपये चार आने खर्च किये थे। वे चुनाव जीत नहीं सके। तब एक दलित का चुनाव लडऩा ही बड़ी बात थी। (संदर्भ-बिहार एंड उड़ीसा लेजिस्लेटिव काउंसिल,18 मार्च 1924)

* 1930 में विधान परिषद में पहली बार बबुए लाल को मनोनीत किया गया। वे पासी जाति से थे और स्नातक थे।

* 10 अप्रैल 1937 को हरिजन सेवक संघ की मीटिंग सदाकत आश्रम में हुई थी। इसकी अध्यक्षता राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह ने की थी। सम्मेलन में डॉ.राजेन्द्र प्रसाद सिंह, जगलाल चौधरी, जगजीवन राम, ब्रजकिशोर प्रसाद, जगत नारायण लाल आदि नेता शामिल हुए थे।

* 12 जुलाई 1937 को गोपालगंज में बिहार डिप्रेस्ड क्लासेस का प्रथम सम्मेलन हुआ था। इसकी अध्यक्षता जगजीवन राम ने की थी। तब सम्मेलन में डॉ.राजेन्द्र प्रसाद, श्रीकृष्ण सिंह एवं अनुग्रह नारायण सिंह ने दलितों के लिए अलग संगठन की आवश्यकता पर बल दिया था।

नवभारत टाइम्स

इंसाफ की गुहार लेकर दलितों का प्रदर्शन

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/hisar/the-performance-of-the-dalits-seek-justice/articleshow/47658363.cms

गांव कैमरी में बीते 14 अप्रैल को दलित महिला के अपहरण, दबंगों की उच्च पहुंच व पुलिस कार्रवाई से क्षुब्ध दलित सुखवीर द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में पीडि़त परिवार ने शनिवार को डीसी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मृतक सुखवीर की बेटियों पुष्पा व रीतिका और लड़के विक्की सहित मृतक के भाई ने प्रशासन को जमकर खरी खोटी सुनाई।

परिवार का कहना है कि वह न्याय के लिए जिला समाज कल्याण विभाग, पुलिस अधीक्षक कार्यालय व उपायुक्त कार्यालय के बीच बार बार चक्कर लगाता रहा है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे गुस्साए पीडि़त परिवार के लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष ही हंगामा खड़ा कर दिया। मृतक के भाई रमेश ने एससी-एसटी मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न होने और आर्थिक सहायता न मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया और नारेबाजी शुरू कर दी। रमेश ने आरोप लगाया कि मृतक सुखवीर ने मरने से पूर्व पुलिस को दिए बयान व अपने स्यूसाइड नोट में बकायदा दबंगों के नाम लिए थे, लेकिन पुलिस ने अपहरण के मामले को गुमशुदगी का मामला बना दिया।

मामले की नजाकत को देखते हुए उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे ने एसडीएम अशोक कुमार बंसल व जिला समाज कल्याण अधिकारी सीमा देवी को पीडि़तों से बातचीत करने के लिए भेजा। हालांकि, इससे पीडि़त परिवार संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद उपायुक्त ने पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को बुलाकर पीडि़तों से अपने कार्यालय में मुलाकात की। पीडि़तों ने आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई करने, मृतक के परिवार के लिए रोजगार का प्रबंध करने, मामले को खराब करने में संलिप्त पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने व बच्चों की पढ़ाई व पोषण का प्रबंध करने की मांग रखी।

दलित के घर के सामने लगाया गंदगी का ढेर

एनबीटी न्यूज, हिसार : आर्यनगर में दलित के घर के आगे दबंगों ने रंजिश के चलते कथित तौर पर कूड़े और गोबर का ढेर लगा दिया है। इसे लेकर पीडि़त परिवार शनिवार को उपायुक्त चंद्रशेखर खरे व डीडीपीओ से मिला और अपनी व्यथा सुनाई। पीडि़ता निहाली देवी ने दबंगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले चार महीने से गांव के ही उच्च जाति के निहाल सिंह व उसके परिवार जबरदस्ती उनके घर के आगे गोबर व कचरे का ढेर लगा रहे हैं। उन्होंने जब उनको रोकना चाहा तो वे गालियां देने और झगड़े पर उतारू हो गए। इस मामले में गांव के पंच से लेकर सरपंच को बताया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होने उपायुक्त को शिकायत देते हुए इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की गुहार लगाई।

दैनिक जागरण

भूख हड़ताल करने जा रहे गहरी को पुलिस ने रोका

http://www.jagran.com/punjab/bhatinda-12473100.html

गांव हमीरगढ़ के दलित भाईचारे पर हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और लाल लकीर खत्म कर लोग को घर की मालकी दिलाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री बादल के गांव बादल में भूख हड़ताल करने जा रहे लोक जनशक्ति पार्टी के प्रधान किरणजीत ¨सह गहरी को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। इसके बाद वे अपने समर्थकों के साथ धरना पर बैठ गए।

इस मौके पर गहरी ने कहा पंजाब के अंदर दलित वर्ग के लोगों पर अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहा है। इसके बावजूद पंजाब सरकार आंख मूंदे बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करने वालों की आवाज को डंडों से दबाया जा रहा है। मौके पर पहुंचे डीएसपी गुरमीत ¨सह ने मुख्यमंत्री बादल के साथ 21 जून को मीटिंग करवाने का भरोसा दिया,जिसके बाद उन्होंने धरना उठा लिया। साथ ही उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने उनकी मांगों के प्रति ध्यान नहीं दिया तो दोबारा संघर्ष करने को मजबूर हो जाएंगे।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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