दलित मीडिया वांच – हिंदी न्यूज़ अपडेट 09.06.15

दलित मीडिया वांच
हिंदी न्यूज़ अपडेट 09.06.15

DJ बजाने पर दबंगों ने दलित होमगार्ड के परिवार को पीटा, पिता के तोड़े हाथ-पैर – दैनिक भास्कर
http://www.bhaskar.com/news/UP-dalit-family-attacked-in-jhansi-over-dj-5016489-PHO.html
दलित मां-बेटी से छेड़छाड़, मारपीट – दैनिक जागरण
http://www.jagran.com/uttar-pradesh/badaun-12455878.html
लेखपाल ने की दलित युवती से अश्लील हरकत – दैनिक जागरण
http://www.jagran.com/uttar-pradesh/bareilly-city-12459812.html
रुपए वापस नहीं दिए तो कर दी जमकर मारपीट – दैनिक भास्कर
http://www.bhaskar.com/news/MP-CHHT-MAT-latest-chhatarpur-news-021505-2029366-NOR.html
हिरण के शिकार की अफवाह उड़ी, लोगों ने गांव घेरकर जला दिए दलितों के घर – दैनिक भास्कर
http://www.bhaskar.com/news/RAJ-JOD-HMU-people-burns-houses-of-dalits-in-rajasthan-5016962-PHO.html
बढ़ रहे हैं दलितों और अल्पसंख्यकों पर जुल्म – प्रभात खबर
http://www.prabhatkhabar.com/news/bas-u-hi/story/468648.html

दैनिक भास्कर
DJ बजाने पर दबंगों ने दलित होमगार्ड के परिवार को पीटा, पिता के तोड़े हाथ-पैर
http://www.bhaskar.com/news/UP-dalit-family-attacked-in-jhansi-over-dj-5016489-PHO.html

H 09.06.15- 1

झांसी. रक्सा थानाक्षेत्र में एक दलित होमगार्ड जवान के घर बर्थ-डे पार्टी में डीजे बजना दबंगों को रास नहीं आया। दबंगों ने घर में घुसकर पहले महिलाओं से छेड़छाड़ की और फिर लाठी-डंडों से सबको बुरी तरह पीटा। इससे जवान के पिता के हाथ-पैर में फ्रैक्चर हो गया। पिटाई से परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हैं। वारदात उसी खैरा गांव की है, जहां पिछले साल एक दलित युवक को मल-मूत्र खिला दिया गया था।

पुलिस ने दलितों को लाठी-डंडों से पीटने वाले चार दबंगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। रक्सा थाना एसओ सुरेश बाबू यादव ने बताया कि खैरा गांव निवासी संदीप लोधी, सुरेश, हरगोविंद और बलबीर पुत्र पूरन के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित कई धाराओं में दर्ज किया गया है।

झांसी से करीब 45 किलोमीटर दूर खैरा गांव है। यहां अगड़ी जाति के दबंग, दलितों को बार-बार निशाना बनाते हैं। रविवार को होमगार्ड के जवान राजेश सिंह के बच्चे का जन्मदिन था। परिवार के लोग डीजे बजाकर नाच-गा रहे थे। उसी वक्त करीब दर्जनभर दबंग घर में घुस आए। महिलाओं से छेड़छाड़ के बाद लोगों की पिटाई करने लगे। दबंग कह रहे थे कि डीजे बजाना था तो उनसे मंजूरी क्यों नहीं ली गई। मारपीट से राजेश, उनके पिता किशनलाल, संदीप और भगवती को काफी देर तक पीटा। इन सभी को मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया है।

पुलिस ने दर्ज नहीं की रिपोर्ट
पीड़ितों का आरोप है कि गांव में दबंगों के डर से कोई कार्यक्रम नहीं करता। अरसे बाद उन्होंने घर में खुशी मनाने की कोशिश की थी। आरोप ये भी है कि दबंगों और पुलिसवालों में साठ-गांठ है। इस वजह से तमाम घटनाओं के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। राजेश के पिता के हाथ-पैर तोड़ दिए गए, लेकिन रक्सा थाने की पुलिस ने अब तक कार्रवाई नहीं की।

वहीं, ट्रेनी आईपीएस अंशुल गुप्ता पीड़ितों का बयान लेने जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने dainikbhaskar.com से कहा कि मामले की अधिक जानकारी नहीं है। जांच की जा रही है।

दबंग खिला देते हैं मल-मूत्र
खैरा गांव में पिछले साल एक दलित युवक को मलमूत्र खिला दिया गया था। इतना ही नहीं युवक के प्राइवेट पार्ट पर कपड़ा बांधकर आग लगा दी थी। वहीं, सीपरी बाजार इलाके में दलित युवक के मजदूरी मांगने पर उसे जानवरों के इंजेक्शन लगा दिए गए थे। जालौन में एक बारात में अगड़ी जाति के लोगों के साथ खाने पर बैठे दलित की नाक काट दी गई थी। जबकि, हमीरपुर में बिना जाति बताए शेविंग कराने पहुंचे दलित को आधी शेव कर भगा दिया गया था। एससी/एसटी आयोग ने इन घटनाओं के कारण बुंदेलखंड को दलितों के लिए संवेदनशील घोषित किया है।

दैनिक जागरण
दलित मां-बेटी से छेड़छाड़, मारपीट
http://www.jagran.com/uttar-pradesh/badaun-12455878.html

बदायूं : सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में दलित मां-बेटी के साथ तीन लोगों ने छेड़छाड़ और मारपीट की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बीती दस मई को सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के एक मुहल्ला निवासी मां-बेटी घर के बाहर फर्स की धुलाई कर रही थीं। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले संजीव, अभिषेक और बंटी आ गए। उन्होंने दोनों पर फब्तियां कसना शुरू कर दीं। इस बात का मां-बेटी ने विरोध किया तो आरोप है कि तीनों लोगों ने उनके कपड़े फाड़ते हुए घर में घुसकर मारपीट की। काफी देर तक वह अश्लीलता करते रहे। काफी शोर-शराबा होने पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। लोगों ने जैसे-तैसे उन्हें बचाया। पुलिस ने शनिवार को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दैनिक जागरण
लेखपाल ने की दलित युवती से अश्लील हरकत
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बरेली: सदर तहसील के एक लेखपाल पर जाति प्रमाणपत्र देने के नाम पर दलित युवती ने अश्लील हरकत और दु‌र्व्यवहार का आरोप लगाया है। मामले पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जिला प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की है। डीएम व एसएसपी को 25 जून तक मामले में जांच कराकर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

रिठौरा नगर पंचायत के जाटवपुरा मोहल्ले की युवती की शिकायत के मुताबिक उसने चार अप्रैल को जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। जब प्रमाणपत्र नहीं मिला तो वह बीती आठ मई को तहसील परिसर स्थित कमरा नंबर दस में बैठने वाले क्षेत्रीय लेखपाल के पास गई।

इस दौरान लेखपाल ने अश्लील हरकत शुरू कर दी। विरोध करने पर दु‌र्व्यवहार किया और डांटकर कमरे से निकल जाने को कहा। युवती की ओर से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को शिकायत भेजी गई। जिस पर आयोग के सहायक निदेशक तरुण खन्ना ने डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर युवती के मामले में जांच व प्रस्तावित कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट 25 जून तक देने को कहा है।

यह शिकायत हमारे संज्ञान में नहीं है। हमे शिकायत मिली होती तो अब तक कार्रवाई कर निस्तारित हो गई होती। हो सकता है पीड़िता ने आयोग को सीधे शिकायत भेजी हो। मंगलवार को इस मामले की जानकारी लूंगा।

दैनिक भास्कर
रुपए वापस नहीं दिए तो कर दी जमकर मारपीट
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छतरपुर|जिले के नौगांव थाना क्षेत्र के पुरवा गांव में एक दलित के साथ जमकर मारपीट करने मामला सामने आया है। उसके पैरों में गंभीर चोट लग गई है। पुलिस ने मामले में आधा दर्जन लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। नौगांव थाना प्रभारी ओएस चंदेल ने बताया कि पुरवा गांव के रमेश अहिरवार ने राघवेंद्र यादव आदि से एक हजार रुपए उधार लिए थे।

यह राशि वापस देने से रमेश ने इनकार किया तो गांव के राघवेंद्र ने अन्य परिवारजनों के साथ मिलकर रमेश की मारपीट कर दी। इससे उसके पैरों में गंभीर चोट आ गई। उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। इस मामले की शिकायत पर पुलिस ने राघवेंद्र सिंह, मुरयाब सिंह, बाबू यादव, गुलाटा, पुष्पेंद्र यादव, बालकिशन यादव के खिलाफ मारपीट और हरिजन एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया है। पुलिस अब मामले के आरोपियों की तलाश कर रही है।

दैनिक भास्कर
हिरण के शिकार की अफवाह उड़ी, लोगों ने गांव घेरकर जला दिए दलितों के घर
http://www.bhaskar.com/news/RAJ-JOD-HMU-people-burns-houses-of-dalits-in-rajasthan-5016962-PHO.html

H 09.06.15 -2

राजस्थान के जोधपुर के समीप स्थित सांवरीज गांव के लोग पूरी रात दहशत में रहे। यहां हिरण के शिकार की अफवाह उड़ी तो गुस्साए लोगों ने गांव घेरकर कई दलितों के घर फूंक दिए। रात करीब 9 बजे फलौदी पुलिस घटना को सूचना मिली, तो थानाधिकारी सुरेंद्र कुमार व अन्य की टीम मौके पर पहुंची। तब तक मौके पर तकरीबन 400 लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी।

पुलिस ने पीड़ित परिवार के लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया, तो भीड़ ने पुलिस पर भी पथराव किया। इससे थानाधिकारी सहित तीन पुलिस कर्मचारियों को चोटें आईं। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से पीड़ित परिवार के सभी 27 सदस्यों को वहां से बाहर निकाला। मामले की जानकारी मिलने पर एसपी (ग्रामीण) हरेंद्र कुमार महावर, एएसपी (फलौदी) सत्येंद्र पाल सिंह, डीएसपी सायर सिंह व अन्य अधिकारी देर रात मौके पर पहुंचे। जबकि, कलेक्टर प्रीतम बी यशवंत सोमवार सुबह घटना स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे।

तत्पश्चात उन्होंने एडीएम आरडी बारठ के साथ फलौदी के राइका बाग इलाके में स्थित भील समाज के न्याति नोहरे में पीड़ित परिवार के लोगों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। घटना के संबंध में सांवरीज निवासी भोजाराम की रिपोर्ट पर फलौदी पुलिस ने महिपाल भादू, प्रकाश विश्नोई, बक्सीराम विश्नोई, प्रकाश विश्नोई, हड़मान राम, महिपाल उदाणी सहित 43 लोगों को नामजद किया है।

मामले की जांच ओसियां उप अधीक्षक को सौंपी गई है। इस संबंध में कलेक्टर ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा देकर उनका पुनर्वास किया जाएगा। इस प्रकरण में किसी भी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हिरण शिकार की अफवाह, उजाड़ दिया दलित का आशियाना
पुलिस के अनुसार रविवार को सांवरीज के पास एक हिरण मिला, जिसके पैर में कुड़की लगी थी। वन्यजीव प्रेमियों ने इसे फलौदी स्थित रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया। इसके बाद किसी ने हिरण के शिकार होने की अफवाह उड़ा दी और लोग आक्रोशित हो गए। जहां हिरण मिला था, उससे करीब दो-ढाई किमी दूर भोजाराम भील के परिवार पर शिकार का शक करते हुए भीड़ ने ढाणी को घेर लिया। कुछ ही देर में झोपडिय़ों को आग लगा दी।

कार्रवाई की मांग
भील समाज के सचिव जीवनराम भील, पूर्व सरपंच फूलाराम भील, दलित अधिकार अभियान के सचिव अशोक कुमार, गोरधन जयपाल, पंस सदस्य उम्मेदाराम भील, बलाराम भील, जयगोपाल मेघवाल ने कलेक्टर व एसपी (ग्रामीण) से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही और पीड़ित परिवार को राहत दिलाने की मांग की है। वहीं, दलित आदिवासी मानवाधिकार मंच के संयोजक जीवनराम भील ने 10 जून को भील समाज के न्याति नोहरा में महापड़ाव की घोषणा की है।

यह हुए घायल
ढाणी पर हमले में पुरखाराम (35) पुत्र पाबूराम, कानाराम (50) पुत्र मूलाराम, रामाराम (55) पुत्र भोजाराम, नारायणराम (35) वर्ष पुत्र रुघाराम व जेठाराम (30) पुत्र नारायणराम गंभीर रूप से घायल हो गए। इन्हें फलौदी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर रेफर कर दिया गया।

व्यापार संघ ने की आर्थिक मदद
गरीब परिवार का आशियाना उजड़ा, तो एसडीएम राकेश कुमार ने स्थानीय व्यापार संघ के अध्यक्ष राधाकिशन थानवी सहित अन्य से बातचीत की। व्यापार संघ ने दलित परिवार को तात्कालिक राहत पहुंचाने के लिए 21 हजार रुपए पीड़ित परिवार को दिए।

प्रभात खबर
बढ़ रहे हैं दलितों और अल्पसंख्यकों पर जुल्म
http://www.prabhatkhabar.com/news/bas-u-hi/story/468648.html

सुभाष चंद्र कुशवाहा साहित्यकार :
यूं तो भारतीय कबीलाई और सामंती सामाजिक व्यवस्था में, जातिवादी घृणा और हिंसा की संस्कृति पहले से रही हैं, लेकिन साठ के दशक में महाराष्ट्र में दलित चेतनाके विकास और प्रतिकार की लड़ाइयों ने केवल दलितों को ही नहीं, अल्पसंख्यकों के प्रति अत्याचार को भी कम किया.

नस्लीय और जातीय अत्याचारों के विरुद्ध आवाज मुखर किया. दलित चेतना के उभार की धमक राजनीति में भी देखी गयी. तमाम वर्णवादी दलों में भी दलितों और अल्पसंख्यक नेताओं को एक हद तक महत्व मिलना प्रारंभ हुआ.

दलित चेतना की दूसरी बड़ी अंगड़ाई अस्सी के दशक में उत्तर प्रदेश में दिखायी दी. यहां तमाम परंपरागत रूढ़ियों और अमानवीय परंपराओं के विरुद्ध दलितों ने मुखर होकर आवाज उठायी.

कांशीराम का उदय हरियाणा जैसी सामंती मनोवृत्ति की जमीन के बजाय, उत्तर प्रदेश के वर्णवादी जमीन पर हुआ. यानी दलित महानायकों से लेकर उनके आत्मबलिदानों को सम्मान से देखनेवाले वर्ग ने अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज की. इससे सामंतों में बेचैनी भी पैदा हुई.

दलित चेतना को उभरने से रोकने के लिए दलित कुलीनतावादी नेताओं को सत्ता सुख दे, अपने पाले में डाल लिया गया है. कुछ को अपरोक्ष रूप से नियंत्रित किया गया है. हालात यहां तक पैदा कर दिये गये हैं कि दलित जुल्मों के विरुद्ध संघर्ष करने में, दलित नेताओं की घिग्घी बंध गयी है.

यह दलितों और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध जुल्म ढाने का नया दौर है. सामंतों ने पिछड़ों के नये कुलकों को भी अपने पाले में करने का खेल रचा है और यह अकारण नहीं है कि पिछड़ों के नये कुलकों ने भी दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है. इधर जाटों और निषादों के आरक्षण मांग संबंधी उभार को भी इसी संदर्भ में देखा जा सकता है.

छोटी-छोटी सामान्य घटनाओं को उभार कर आग सुलगा देना, सामंती और कुलीनतावादी सोच का पुराना औजार है. आंबेडकर संबंधी गीत बजाने पर एक मराठा युवक, दलित युवक की हत्या कर देता है.

यह अकारण नहीं है कि जिस भिंडरवाला या खालिस्तान समर्थकों के साथ पंजाब का कोई युवक नहीं था, उसे उभारने का काम शुरू हो गया है. यह दलितों-अल्पसंख्यकों की अक्ल ठिकाने लगाने का दौर है और उन्हें दासत्व को स्वीकारने को मजबूर करनेवाली अतीत की संस्कृति का उभार है. यह संस्कृति अपने स्वर्णिमकाल की ओर लौटने को बेचैन दिख रही है और उसे लगता है कि वर्तमान शासन व्यवस्था, उसकी सोच और समझ को हवा देने के अनुकूल है.

हमें इस उभार को जितनी जल्द हो सके दबाने और अराजकता खत्म करने की दिशा में सोचना चाहिए. दलित और अल्पसंख्यकों के प्रगतिशील तत्वों को अपनी चेतना के विकास के साथ-साथ पाखंडी मूल्यों को तिलांजलि देने की ओर बढ़ना चाहिए.

दोनों को एकाकार कर, बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों के खिलाफ आंदोलन विकसित करनी चाहिए. भारतीय समाज में हाशिये के समाज को अपनी सुरक्षा और विकास के लिए इसके अलावा अन्य कोई रास्ता भी नहीं है.

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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