Dalits Media Watch-Hindi News Updates 02.06.15

Dalits Media Watch

Hindi News Updates 02.06.15

 

मध्य प्रदेश: बंधक बनाकर दलित महिला से दो दिन तक सामूहिक बलात्कार – समय लाइव

http://www.samaylive.com/regional-news-in-hindi/madhya-pradesh-news-in-hindi/316354/dalit-woman-gangraped-in-madhya-pradesh-village.html

पंजाब में 13 वर्षीय लड़की से सामूहिक बलात्कार – वेब दुनिया

http://hindi.webdunia.com/regional-hindi-news/gang-rape-115060100127_1.html

सिरफिरे की करतूत से टूट गई दलित लड़की की शादी – अमर उजाला

http://www.amarujala.com/news/city/allahabad/allahabad-hindi-news/allahabad-news-hindi-news-4/

दबंगों के सामने चारपाई पर बैठना दलितों को पड़ा भारी – न्यूज़ 18

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/dalits-beaten-by-blusterer-470537.html

दलितों पर दावेदारी – पत्रिका

http://www.patrika.com/news/opinion/dalits-claim-1044811/

योजना से बेखबर कैसे मिले लाभ – राजेश्थान पत्रिका

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/unaware-of-how-the-profit-plan-1085571.html

समय लाइव

मध्य प्रदेश: बंधक बनाकर दलित महिला से दो दिन तक सामूहिक बलात्कार

http://www.samaylive.com/regional-news-in-hindi/madhya-pradesh-news-in-hindi/316354/dalit-woman-gangraped-in-madhya-pradesh-village.html

01

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक दलित महिला को उसकी आठ साल की बच्ची के साथ बंधक बना कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है.

पूरा मामला जादू-टोने की शंका के आधार पर बताया जा रहा है. घटना के बाद सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस अधीक्षक यूसूफ कुरैशी ने बताया कि गोवर्धन थाना क्षेत्र के केमरारा गांव में अपनी बच्ची के साथ अकेली रहने वाली एक महिला को गांव के कुछ दलित लोगों ने उसके ही घर में बंधक बनाकर दो दिन तक उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के साथ ही गर्म सलाखों से उसे प्रताड़ित किया.

पुलिस ने रविवार रात महिला को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराने के बाद उसे गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया, वहां से उसे ग्वालियर रेफर किया गया है.

आरोपियों ने महिला को 29 से 31 मई तक बंधक बनाकर रखा. इसी बीच महिला की बच्ची आरोपियों को चकमा देकर वहां से भाग निकली और गांव के एक चौकीदार को इसकी जानकारी दी. चौकीदार ने इसकी जानकारी पुलिस को दी और मौके पर पहुंचकर पुलिस ने आरोपियों के चंगुल से महिला को मुक्त कराया.

पुलिस ने सभी आरोपियों ओमकार, जनवेद, पप्पू ,रामदयाल, सोवलिया और चौकीदार आदिवासी को गिरफ्तार कर लिया है.

वेब दुनिया

पंजाब में 13 वर्षीय लड़की से सामूहिक बलात्कार

http://hindi.webdunia.com/regional-hindi-news/gang-rape-115060100127_1.html

02

बटाला। तीन युवकों ने 13 वर्षीय एक दलित लड़की को पंजाब के बटाला के धिआनपुर में कथित तौर कर अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया।

पुलिस ने बताया कि एक आरोपी की पहचान हरजीत सिंह के तौर पर हुई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस ने बताया कि पीड़िता के पिता द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक, शनिवार रात लड़की को हरजीत, रोबिन मसीह और सब्बा मसीह ने उसके घर से अगवा किया था।

उन्होंने कहा कि उसे एक सुनसान इलाके में ले जाया गया, जहां रविवार सुबह उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। फिर आरोपी उसे बेहोशी की हालत में उसके घर के पास छोड़ गए।

पुलिस ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि वे दो फरार आरोपियों की तलाश कर रहे हैं।

अमर उजाला

सिरफिरे की करतूत से टूट गई दलित लड़की की शादी

http://www.amarujala.com/news/city/allahabad/allahabad-hindi-news/allahabad-news-hindi-news-4/

एक सिरफिरे युवक ने अपनी प्रेमिका की मांग में सिंदूर भरी फोटो उसकी भावी ससुराल भेजकर उसकी शादी का रिश्ता तोड़वा दिया। रविवार को उतरांव इलाके की इस दलित लड़की का ब्याह होना था। मगर उससे तीन रोज पहले ही वह लड़की की फोटो लेकर भदोही में उसकी ससुराल पहुंच गया। ससुरालियों ने लड़की और उसके पिता को भी बुला लिया।

हालांकि युवक को दबोचकर पीटने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया गया था, मगर साथ ही लड़के के परिजनों ने शादी भी करने से मना कर दिया। अब लड़की के पिता ने उतरांव थाने में युवक के खिलाफ अर्जी दी है।

लड़की दलित है जबकि युवक ठाकुर परिवार से है। उन दोनों के बीच कुछ समय पहले तक दोस्ती थी।

युवक लड़की के पीछे ही पड़ गया। ऐसे में लड़की ने उससे मिलना बंद कर दिया। साथ ही लड़की के घरवालों ने औराई (भदोही) में उसकी शादी तय कर दी। 31 मई यानी रविवार को बारात आनी थी। ब्याह की तैयारी भी तकरीबन पूरी कर ली गई थी। मगर इसी बीच लड़की के पुराने दोस्त ने ऐसी करतूत कर डाली कि सब सन्न रह गए।

उसने पहले तो लड़की को होने वाली ससुराल में कई बार फोनकर कहा कि वह पहले ही लड़की से ब्याह कर चुका है इसलिए वे यह रिश्ता तोड़ दें। फिर वह चार रोज पहले लड़की की ससुराल ही पहुंच गया। उसने लड़के के घरवालों से कहा कि वह लड़की से शादी कर चुका है। उसके पास सुबूत के तौर पर लड़की की मांग में सिंदूर भरने वाला फोटो भी है।

लड़के के घरवालों ने फोटो मांगा तो युवक ने दूसरे दिन आने को कहा। 28 मई को वह फोटो लेकर पहुंचा। उससे पहले लड़की को भी उसके पिता के साथ बुला लिया गया था। लड़की ने कहा कि युवक ने जबरन मिलकर उसकी मांग में सिंदूर डाल फोटो खींच ली थी। तब वह उसका इरादा नहीं समझ सकी थी। लड़के के घरवालों ने फोटो देखने के बाद युवक को पीटा और औराई थाने की पुलिस को सौंप दिया।

मगर साथ ही उन्होंने शादी से भी इनकार कर दिया। उधर, पुलिस ने युवक को छोड़ दिया। उसकी करतूत ने लड़की और उसके घरवालों को परेशान कर दिया। शादी की पूरी तैयारी के बाद रिश्ता टूटने से गरीब परिवार को नुकसान भी हुआ। सोमवार को लड़की को लेकर उसका पिता उतरांव थाने पहुंचा और आरोपी युवक के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही है। दोषी पर कार्रवाई होगी।

न्यूज़ 18

दबंगों के सामने चारपाई पर बैठना दलितों को पड़ा भारी

http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/dalits-beaten-by-blusterer-470537.html

03

शासन के तमाम प्रयासों के बाद भी बुन्देलखण्ड के ललितपुर जिले में दंबगों के हौसले इतने बुलंद है कि उनके सामने दलित वर्ग के लोग चारपाई पर भी नहीं बैठ सकते हैं. ताजा मामला जिले के सौजना थाना अंतर्गत ग्राम कुसमाड का है, जहां दलितों को दंबगों के सामने चारपाई पर बैठना महंगा पड़ गया.

आरोप है कि बौखलाए दंबगों ने दलित के साथ घर में घुसकर मारपीट की. भुक्तभोगियों ने घटना के बाद संबंधित थाने की पुलिस को भी सूचना दी,लेकिन इसके बाद भी पुलिस के हाथ आरोपियों के गिरेबां तक नहीं पहुंच पाए हैं.

बताया गया है कि ग्राम कुसमाड निवासी गनेश अहिरवार का परिवार बीते शुक्रवार को घर में आए रिश्तेदारों के साथ चारपाई पर बैठा था. उसी समय गांव के दंबग वहां से निकले. रिश्तेदारों की आवभगत में जुटा यह दलित परिवार दंबगों का चारपाई से उठकर अभिवादन नहीं कर सका तो दंबगों का कहर दलित के परिवार समेत रिश्तेदारों पर टूट पड़ा.

दबंगों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए सभी की जमकर पिटाई की. सभी लोग जब अपनी जान बचाते हुए घर के अंदर भागे तो उन्होंने घर के अंदर घुसकर भी दलित के परिजनों को पीटा.

आरोप है कि इस घटना के बाद जब दलित परिवार ने पुलिस थाने पहुंच कर पुलिस को सूचना दी तो पुलिस ने भी उनकी एक नहीं सुनी.

पत्रिका

दलितों पर दावेदारी

http://www.patrika.com/news/opinion/dalits-claim-1044811/

05

आजादी के इतने साल बाद भी हमारी सरकारों और राजनीतिक दलों के लिए दलित समुदाय वोट बैंक से ऊपर क्यों नहीं उठ पाया? मौका दलितों के लिए शुरू की जाने वाली सरकारी योजनाओं का हो या अम्बेडकर जयंती मनाने का, बात इस समुदाय में अपनी पैठ बनाने से ऊपर कभी उठती ही नहीं। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की 125वीं जयंती मनाने का मामला भी राजनीतिक दांवपेंच से अलग नहीं दिख रहा। केन्द्र में अब भाजपा सरकार है लिहाजा वह अम्बेडकर जयंती धूमधाम से मनाकर यह संदेश देना चाहती है कि वह भी उनकी पैरोकार है।

किसी भी सरकार को अपने महापुरूषों की जयंती मनाने का अधिकार है लेकिन क्या इसे वोट बैंक की राजनीति से अलग नहीं देखा जा सकता?अम्बेडकर हों या महात्मा गांधी अथवा उनके समक्ष दूसरे महापुरूष, उनकी जयंती अलग-अलग क्यों मनाई जाए? क्या सरकार और राजनीतिक दल मिलकर ऎसा आयोजन नहीं कर सकते जिसमें राजनीति बिल्कुल नहीं हो। इस देश ने अम्बेडकर के अलावा के.आर. नारायणन के रूप में दलित राष्ट्रपति को देखा है तो के.जी. बालकृष्णन ने मुख्य न्यायाधीश पद को गौरवान्वित किया।

बाबू जगजीवन राम के रूप में उप प्रधानमंत्री को देखा तो कांसीराम, मायावती, सुशील कुमार शिंदे, जी.एम.सी.बालयोगी और बंगारू लक्ष्मण सरीखे नेताओं के योगदान को भी सराहा। देश में 21 करोड़ से अधिक दलितों की संख्या दुनिया के पांचवें बड़े राष्ट्र की आबादी से अधिक है। लेकिन जमीनी हकीकत से हम मुंह नहीं मोड़ सकते। अनेक हिस्सों में आज भी उन पर इसलिए अत्याचार होते हैं क्योंकि वे दलित हैं।

कहीं वे घोड़ी पर बैठकर बारात नहीं निकाल सकते तो कहीं कुए या तालाब से पानी नहीं भर सकते। देश कांग्रेस, भाजपा और अनेक उन मिली-जुली सरकारों को देख चुका है जो दलित उत्थान के नारे लगाते नहीं थकती थी लेकिन चंद लोगों के उत्थान को दरकिनार कर दिया जाए तो आम दलित आज भी विकास की राह ताक रहा है। केन्द्र सरकार अम्बेडकर की 125वीं जयंती व्यापक पैमाने पर मनाने जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय केन्द्र और अंतरराष्ट्रीय स्मारक बनाने पर करोड़ों रूपए खर्च करने वाली है। लंदन में उनका घर खरीदकर स्मारक बनाने की भी योजना है। लेकिन डॉ. अम्बेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मानी जाएगी, जब गांव की झोंपड़ी में रहने वाले आम दलित के मन में आत्मविश्वास जग सके। हर क्षेत्र में उसे बराबरी का हक मिले।

आरक्षण की बैसाखियों के सहारे विकास की उम्मीद छोड़कर दलित युवा भी योग्यता के आधार पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हों। दलित वोटों की राजनीति खूब कर ली। मिल-जुलकर उनके उत्थान के लिए भी शुरूआत करने की जरूरत है। इस काम के लिए अम्बेडकर की 125वीं जयंती से शुभ अवसर भला और क्या हो सकता है?

राजेश्थान पत्रिका

योजना से बेखबर कैसे मिले लाभ

http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/rajasthan/unaware-of-how-the-profit-plan-1085571.html

04

नरेगा के तहत गरीब तबके का उत्थान करने के प्रयास कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। व्यक्तिगत कार्य योजना के प्रचार प्रसार के अभाव में पांच साल में न तो आशानुरुप लोगों के प्रस्ताव आए हैं और न ही उतने कार्य हो पाए। पंचायतों की उदासीनता के चलते अब तक दो हजार कार्य ही हो पाए हैं, जबकि ढाई हजार कार्य अधूरे पड़े हैं। इसके अलावा पौने पांच हजार कार्य तो अब तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं।

जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, बीपीएल, अन्त्योदय वर्ग के गरीब तबके के परिवारों के लिए नरेगा में व्यक्तिगत कार्य योजना शुरू की गई। योजना के तहत खेत समतलीकरण, पक्के धोरे का निर्माण, पत्थरगड़ी सरीखे कार्य शामिल हैं, मगर प्रचार प्रसार के अभाव में न तो ग्रामीणों को योजना की जानकारी है और न ही उसका लाभ मिल पा रहा है।

व्यक्तिगत कार्य योजना में अत्यधिक कम उपलब्धि के बावजूद न तो जिला परिषद द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है और न ही पंचायत समितियां व ग्राम पंचायतें गंभीर है। इस कारण योजना की सार्थकता ही सिद्ध नहीं हो पा रही है।

सरकार ने चेताया, फिर भी नहीं गंभीर

व्यक्तिगत कार्य योजना में कार्यों की प्रगति कम रहने पर पंचायतीराज निदेशालय जयपुर ने जिला कलक्टर एवं जिला परिषद सीईओ को पत्र लिखकर चेताया। फिर भी व्यक्तिगत कार्य के प्रस्ताव बढ़ाने, अधूरे पड़े ढाई हजार कार्यों को जल्द पूर्ण करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

कार्यों की धीमी चाल के लिए खास तौर से ग्राम पंचायतों की उदासीनता सामने आ रही है। पिछले पखवाड़े में समीक्षा बैठक में पंचायतीराज मंत्री राजेन्द्र गोयल ने समस्त विकास अधिकारियों को फटकार लगाते हुए नरेगा में श्रमिक संख्या कम होने पर नाराजगी जताई थी।

रेलमगरा में एक भी कार्य नहीं 

योजना शुरू होने से अब तक रेलमगरा पंचायत समिति क्षेत्र में एक भी कार्य नहीं हो पाया। राजसमंद में गत वर्ष एक भी कार्य नहीं हुआ और देवगढ़ पंचायत समिति में 6 4 कार्य ही हो पाए हैं। भीम पंचायत समिति में सर्वाधिक 6 54 व्यक्तिगत योजना में कार्य हुए हैं।

प्रचार प्रसार न होने की शिकायत 

व्यक्तिगत कार्य योजना सरकार की प्रथम प्राथमिकता होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रचार प्रसार नहीं करने पर दलित आदिवासी एवं घुमंतू अधिकार अभियान संयोजक एसएल भाटी ने केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्री को ज्ञापन भेजकर शिकायत दर्ज कराई। अभियान द्वारा किए गए सर्वे में पता चला कि लोग योजना से ही वाकिफ नहीं है। इस कारण लोग चाहते भी इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

शौचालय बनाने में सब बेपरवाह 

व्यक्तिगत कार्य योजना के तहत गत वर्ष सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की श्रेणी जोड़ी गई। पिुर भी गत वर्ष केवल रेलमगरा में 7 कार्य हुए हैं, जबकि अब तक आमेट, भीम, खमनोर, कुंभलगढ़ व राजसमंद पंचायत समिति क्षेत्र में एक भी शौचालय का कार्य नहीं हो सका। देवगढ़ में 10 व रेलमगरा में सबसे ज्यादा 92 शौचालय निर्माण के कार्य हुए हैं।

ये है व्यक्तिगत कार्यों की स्थिति 

पंचायत समिति—         स्वीकृत —       अधूरे— पूर्ण कार्य

आमेट —                     1066    —       113—  56 2

भीम —                              1512    —        388 — 6 54

देवगढ़—                       969      —        115—  6 4

खमनोर —                   2295    —        735—  305

कुंभलगढ़     —        1611    —        6 44— 141

रेलमगरा —                  674      —        158 — 0

राजसमंद—                   1360    —        379—  352

(नोट : आंकड़े 20 अपे्रल 15 तक के हैं।)

 

इनका कहना है….

नरेगा में व्यक्तिगत कार्य करवाना मुख्य प्राथमिकता है। इसके लिए सभी बीडीओ व ग्रामसेवक पाबंद भी है। जिन जिन पंचायत समिति व ग्राम पंचायतों की प्रगति कम रही है, उन्हें दुबारा निर्देश जारी कर पाबंद करेंगे।

रघुवीरसिंह सुमन, अधिशासी अभियंता नरेगा जिला परिषद राजसमंद

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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