Dalits Media Watch-Hindi News Updates 29.05.15

Dalits Media Watch

Hindi News Updates 29.05.15

IIT को पीएम की आलोचना बर्दाश्त नहींदलित छात्रों के ग्रुप को बैन किया – एबीपी न्यूज़

http://abpnews.abplive.in/ind/2015/05/29/article602226.ece/IIT-Madras-bans-student-group-for-criticising-PM-Modi-his-policies

डांगावास प्रकरण में एक और मौत – पत्रिका

http://www.patrika.com/news/ajmer/another-death-in-the-episode-dangavas-1042906/

दलित को पीटादी जातिसूचक गाली – प्रभात खबर

http://www.prabhatkhabar.com/news/champaran-east/story/455669.html

स्कूलों में दलित बच्चों के साथ सबसे अधिक उत्पीड़न – दैनिक जागरण

http://www.jagran.com/punjab/amritsar-12418846.html

सीबीआई जांच नहीं तो मेड़ता में जुटेंगे राज्यभर के दलित – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-AJM-OMC-MAT-latest-ajmer-news-042525-1967114-NOR.html

एबीपी न्यूज़

IIT को पीएम की आलोचना बर्दाश्त नहींदलित छात्रों के ग्रुप को बैन किया

http://abpnews.abplive.in/ind/2015/05/29/article602226.ece/IIT-Madras-bans-student-group-for-criticising-PM-Modi-his-policies

 

01

नई दिल्ली: आईआईटी मद्रास ने एक अजीबो गरीब फरमान सुनाते हुए कैंपस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले आंबेडकर पेरियार स्टूडेंट सर्किल ग्रुप पर बैन लगा दिया है. आईआईटी ने शिक्षा मंत्रालय के आदेश के बाद मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले इस ग्रुप को बैन किया है.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक इस ग्रुप के खिलाफ मिली एक शिकायत के बाद आईआईटी ने यह फैसला लिया है. इस ग्रुप पर हिंदी के इस्तेमाल और बीफ बैन से जुड़े विवादों पर चर्चा कर एससी-एसटी के छात्रों को भड़काने का आरोप है.

एचआरडी मिनिट्री को भेजी गई शिकायत में इस ग्रुप का एक पैंफलेट भी लगाया गया था जिसमें मोदी सरकार को उद्योपतियों की सरकार बताया था और केंद्र सरकार के कई बिलों की आलोचना की गई थी. इसमें ‘घर वापसी’ कार्यक्रम और गोमांस पर प्रतिबंध जैसे मसलों का भी जिक्र था.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय को एक लिखित शिकायत मिली थी,जिसके एचआरडी मंत्रालय ने छात्रों के एक समूह के खिलाफ पीएम के भाषण की आलोचना की पूछताछ करवाई थी.

एचआरडी मंत्रालय की जांच के बाद आईआईटी मद्रास ने आंबेडकर पेरियार स्टूडेंट सर्किल से जुड़े छात्रों को प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और भाषणों की आलोचना करने से रोक दिया है.

बैन किए गए ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि कैसे किसी ‘अज्ञात पत्र’ द्वारा की गई शिकायत के आधार पर छात्रों की आवाज को दबा सकता है. एक सदस्य का कहना है, “हम इस पर आपत्ति दर्ज कराते हैं कि हमें अपनी सफाई का मौका तक दिए बिना ही सर्कल को बैन कर दिया गया. डीन का कहना है कि ग्रुप विवादास्पद गतिविधियों में शामिल है !

हमारा पक्ष साक्ष है हमने इस संस्थान द्वारा दी गई किसी भी सुविधा का गलत इस्तेमाल नहीं किया है. ”

एचआरडी को जो पैंफलेट को भेजा गया था, वह ‘आंबेडकर की प्रासंगिकता’ विषय पर दिए गए भाषण का हिस्सा था जिसमें मोदी सरकार की आलोचना की गई थी

पत्रिका

डांगावास प्रकरण में एक और मौत

http://www.patrika.com/news/ajmer/another-death-in-the-episode-dangavas-1042906/

02

अजमेर।नागौर के बहुचर्चित डांगावास प्रकरण में घायल एक और युवक ने गुरूवार शाम जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस प्रशासन ने मृतक के पोस्टमार्टम की तैयारी की, लेकिन परिजन व डांगावास दलित हत्याकांड संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने इनकार कर दिया।

उन्होंने मामले में सीबीआई जांच की मांग को दोहराते हुए मृतक को अस्पताल में उचित उपचार नहीं मिलने का आरोप जड़ा। संघर्ष समिति के बैनर तले समाज के लोग अस्पताल में मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए।

जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की सर्जिकल आईसीयू में दस दिन से भर्ती मेड़तासिटी, डांगावास निवासी गणेश (22) पुत्र खेमाराम ने गुरूवार शाम उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। गणेश की मृत्यु की सूचना मिलते ही डांगावास दलित हत्याकांड संघर्ष समिति सहित दलित संगठन के पदाधिकारी अस्पताल पहुंच गए। नागौर से आए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने शव के पोस्टमार्टम की तैयारी कराई।

अस्पताल अधीक्षक डा. पी.सी वर्मा, मेडिकल ज्युरिस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डा. आर. के. माथुर ने मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया लेकिन देर रात तक लिखित रिपोर्ट नहीं मिली। इधर संघर्ष समिति ने परिजन की सहमति के बगैर पोस्टमार्टम कराने ले जाने पर आक्रोश जाहिर किया। उनके आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने पोस्टमार्टम टाल दिया। मोर्चरी के बाहर डॉ. अशोक मेघवाल, समिति प्रदेश संयोजक धर्मपाल कटारिया, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष खुशबू सिरोया, दलित अधिकार केन्द्र के पीएल. मीमरोठ, छीतरमल टेपण, देशराज मेहरा आदि धरने पर बैठ गए।

घायलों का हो पुनर्वास

डा. मेघवाल ने बताया कि घायलों को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जबकि उनके पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं है। राज्य सरकार को धारा 145 को हटाकर जमीन दलित समाज को लौटनी चाहिए, ताकि पीडित परिवार अपना गुजर-बसर कर सके।

 

मोर्चरी बनी पुलिस छावनी

शाम को गणेश के मृत घोषित करते ही पुलिस प्रशासन ने ऎतिहात बरतते हुए पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक(शहर) प्रवीन जैन,उप अधीक्षक राजेश मीणा, विक्रम सिंह भाटी, रामेश्वरलाल, कोतवाली एसएचओ जितेन्द्र गंगवानी सहित आरएसी का पुलिस जाप्ता तैनात कर दिया।

उचित उपचार नहीं मिला

डा. मेघवाल ने गणेश को उचित उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गणेश की हालत 18 मई को बिगड़ी। प्रशासन से हुई वार्ता में संभागीय आयुक्त धर्मेन्द्र भटनागर ने उसको जयपुर रैफर कराने की बात कही लेकिन इसके बावजूद उसे जेएलएनएच में रखा गया। उचित इलाज नहीं मिलने से गणेश की मृत्यु हुई है।

बयान दर्ज किए बगैर लौटे

गुरूवार शाम जयपुर से पुलिस महानिरीक्षक (अपराध) गिरीराज मीणा जेएलएन अस्पताल में डांगावास प्रकरण में घायल के बयान दर्ज करने पहुंचे। घायलों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू होते एक महिला उलझ गई। महिला ने पीडित परिवार पर दबाव बनाने का आरोप जड़ा। महिला का आरोप सुन मीणा बिना बयान दर्ज किए लौट गए।

प्रभात खबर

दलित को पीटादी जातिसूचक गाली

http://www.prabhatkhabar.com/news/champaran-east/story/455669.html

मोतिहारी : मुफस्सिल थाना अंतर्गत डीएवी पब्लिक स्कूल के पास सुरेंद्र राम को कुछ लोगों ने घेर कर बेरहमी से पीटा़ उसे जातिसूचक गाली देते हुए शरीर पर पेशाब भी कर दिया़  थाना में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी गयी़

सुरेंद्र कोटवा के बड़हरवा कला पूर्वी गांव का रहने वाला है़ कोटवा से मोतिहारी आने के दौरान घटना को अंजाम दिया गया़ उसका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है़

उसने पुलिस कैंप में आवेदन देकर मुफस्सिल थाना के नंदपुर गांव के अमर सहनी, ब्यास सहनी, मिंटू सहनी, मंशी सहनी, कोटवा जागीर कररिया के संतोष यादव को आरोपित किया है़  उसने आरोपियों पर 640 रुपये नकद छीनने का भी आरोप लगाया है़  पुलिस कैंप के पदाधिकारी मेहीलाल यादव ने बताया कि आवेदन को मुफस्सिल थाना भेजा जायेगा़

दैनिक जागरण

स्कूलों में दलित बच्चों के साथ सबसे अधिक उत्पीड़न

http://www.jagran.com/punjab/amritsar-12418846.html

03

अमृतसर: स्कूलों में दलित बच्चों के साथ सबसे अधिक उत्पीड़न किये जाते हैं, इसका खुलासा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष डा. राजकुमार वेरका ने किया। बतौर मुख्य मेहमान वह दिल्ली में आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। सेमिनार में50 से अधिक ऐसे दलित बच्चों ने हिस्सा लिया जिनकी उम्र 18 साल से कम थी और उनके साथ उत्पीड़न की घटनाएं घट चुकी थी।

दिल्ली में यह सेमिनार सेंटर फॉर सोशल इक्विटी एंड इंक्लुसिओन, चिल्ड्रेन्स मूवमेंट फॉर क्लाइमेट जस्टिस, नेशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस तथा राइट एजुकेशन फोरम की ओर से आयोजित किया गया। इस सेमिनार में मुख्य रूप से जन जागरण मंच छत्तीसगढ़,कला रत्‍‌न सोशल एजुकेशन सोसाइटी मध्य प्रदेश, मल्टी आर्ट एसोसिएशन झारखण्ड, नेशनल अलायन्स ग्रुप पंजाब, उड़ीसा रीजनल आर्गेनाइजेशन, राइट एजुकेशन एंड डेवलपमेंट तमिलनाडु तथा राइट्स केरल ने हिस्सा लिया। सब अपने साथ ऐसे ऐसे बच्चों के मुद्दे लेकर आये थे जो उत्पीड़न के शिकार हुए थे। इसके समाधान को लेकर आयोग के समक्ष एक रिपोर्ट भी पेश की गयी।

आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर वेरका ने बताया कि इस सेमिनार से सामने आया कि क्यों दलित बच्चों के साथ उत्पीड़न के मामले अधिक होते हैं और क्यों वह बीच में ही पढ़ाई छोड़ जाते हैं। डॉक्टर वेरका ने बताया कि अधिकतर केस ऐसे थे जिसमें नाबालिग दलित लड़कियों के साथ जबरन बलात्कार किया गया था।

50 से अधिक ऐसे बच्चे तो सेमिनार में ही आये थे। इसके अलावा दलित बच्चों के पढ़ाई छोड़ने के कई ऐसे मामले सामने आए जिसमें स्कूल का बच्चों पर ध्यान न रखना या फिर स्कूल या कॉलेज मैनेजमेंट द्वारा मनमानी फीस वसूलना था। आयोग ने इस सेमिनार में दलित बच्चों की समस्याओं को लेकर आई सभी संस्थाओं के साथ संपर्क साधा हुआ है और भविष्य में ऐसे उत्पीड़न को रोकने के लिए आयोग सख्ती से कार्य करेगा।

दैनिक भास्कर

सीबीआई जांच नहीं तो मेड़ता में जुटेंगे राज्यभर के दलित

http://www.bhaskar.com/news/RAJ-AJM-OMC-MAT-latest-ajmer-news-042525-1967114-NOR.html

04

तीन घायलों के डिस्चार्ज पर फैसला नहीं, मेडिकल बोर्ड से मांगी राय  जवाहरलाल नेहरु अस्पताल में भर्ती डांगावास प्रकरण के घायलों के डिस्चार्ज को लेकर गुरुवार को कोई फैसला नहीं हो सका। अस्थिरोग विभाग ने तीन घायलों की हालात में सुधार को देखते हुए मेडिकल बोर्ड से डिस्चार्ज के लिए राय मांगी। अस्पताल प्रशासन ने संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक से एक एंबुलेंस भी मंगवा ली थी।

दूसरी ओर सर्व मेघवंश महासभा इंडिया और दलित अधिकार केंद्र की आपत्ति के बाद डिस्चार्ज प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। वहीं कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक,एसपी महेंद्र सिंह चौधरी और आईजी क्राइम गिर्राज मीणा ने अस्पताल पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

प्रशासन आैर पुलिस के आला अधिकारी सुबह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों से मुलाकात की। अधिकारियों ने डिस्चार्ज होने योग्य घायलों को विश्वास दिलाया कि यदि वह घर लौटना चाहते हैं तो उन्हें पूरी सुरक्षा के बीच पहुंचाया जाएगा। वहां पर भी उपचार व्यवस्था की गई है। तीन घायल मुन्नाराम,अर्जुनराम और किशनाराम की हालत में सुधार को देखते हुए मेडिकल बोर्ड से राय भी मांग ली गई। सर्व मेघवंश महासभा इंडिया के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक मेघवाल ने प्रशासन के आला अधिकारियों एवं अस्पताल प्रशासन के समक्ष मांग रखी कि तीनों को फिलहाल डिस्चार्ज करना सही नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों के मकान तोड़ दिए गए हैं। उनके पास रहने के लिए मकान ही नहीं है। वहीं दलित अधिकार केंद्र ने भी आपत्ति दर्ज कराते हुए घायलों के लिए सुरक्षा की मांग की। बच सकती थी गणेशराम की जान  बीपीएलपार्टी के अध्यक्ष बाबूलाल साहू ने आरोप लगाया है कि घायलों को पर्याप्त इलाज मुहैया नहीं कराया जा रहा है।

गणपत राम और गणेश राम की हालत गंभीर थी, दोनों को आईसीयू में रखा था। शुरुआत में ही अधिकारियों ने दोनों मरीजों को जयपुर रेफर करने की जरूरत बताई थी, लेकिन इसपर अमल नहीं किया गया। घायल महिलाओं की मेडिकल बोर्ड जांच  सामाजिकसंगठनों ने घायल महिलाओं की मेडिकल बोर्ड से जांच की मांग की। उनका आरोप था कि हमलावरों ने महिलाओं के साथ दुराचार किया है। प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी सांवरिया और मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. बीडी बिजावत का बोर्ड गठित कर जांच की गई। बोर्ड ने 6 महिलाओं की जांच की।

दलित अधिकार केंद्र के पीएल मीमरोट, जिला समन्वयक रमेश चंद्र बंसल, चंदालाल बैरवा, हेमंत कुमार एडवोकेट और अन्य प्रतिनिधियों ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में डांगावास प्रकरण में पीड़ितों की समस्याओं के बारे में जानकारी दी। पीएल मीमरोट ने कहा कि मामले में स्वतंत्र जांच एजेंसी सीबीआई से जांच होनी चाहिए। घटना में घायलों को पर्याप्त पुलिस संरक्षण, सहायता, मुआवजा राशि, पर्याप्त चिकित्सा सुविधा और एससीएसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत पीड़ितों को सरकारी योजनाओं के लाभ दिलाने की भी मांग संस्था ने की है।

संस्था ने प्रकरण की जांच रिपोर्ट भी सरकार को भेजकर वस्तुस्थिति की जानकारी दी है। जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे लोग। पुलिस सुरक्षा में गणेश के शव को मोर्चरी ले जाते परिजन। डांगावास खूनी संघर्ष मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दलित समाज के लोग आंदोलित हैं।

गुरुवार को डांगावास दलित हत्याकांड संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल कटारिया और कानाराम कांटीवाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि इस प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए। सरकार इस बारे में टालमटोल का रवैया अपना रही है। संभागीय आयुक्त और आईजी को इस बारे में ज्ञापन दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि चौबीस घंटे में सीबीआई जांच के आदेश जारी नहीं हुए तो राज्यभर के दलित बड़ी संख्या में 16जून को मेड़ता में एकत्रित होंगे।

कटारिया ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पीड़ित पक्ष के लोगों को गुमराह कर रहे हैं। आईजीक्राइम मीणा ने घायलों से की पूछताछ : पुलिसमुख्यालय के आदेश से आईजी क्राइम डाॅ. गिरिराज मीणा ने जेएलएन अस्पताल पहुंचकर घायलों से बातचीत की और घटना की जानकारी ली। मीणा ने बताया कि नए सिरे से बयान लिए जा रहे हैं। घायलों को उन्होंने सुरक्षा का विश्वास दिलाया है।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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