Dalits Media Watch-Hindi News Updates 25.05.15

Dalits Media Watch

Hindi News Updates 25.05.15

 

छठी कक्षा की छात्रा को बहला कर खेत ले गया और… – अमर उजाला

http://www.chandigarh.amarujala.com/feature/chandigarh-local/crime-bureau-chd/rape-with-minor-girl-student-hindi-news-1/

दलितों की बारात को बंधक बनाया  इनेक्स् लाइव

http://inextlive.jagran.com/young-men-made-particular-sect-procession-mortgage-77433

अलीराजपुर के गांव में दलित नहीं पी सकते हैंडपंप से पानी – दैनिक भास्कर

http://www.bhaskar.com/news/c-8-1159428-NOR.html

हिन्दू राष्ट्र के जाटलैंड में दलित जनसंहार – हस्त क्षेप

http://www.hastakshep.com/hindi-news/from-states/rajasthan/2015/05/25/

अमर उजाला

छठी कक्षा की छात्रा को बहला कर खेत ले गया और…

http://www.chandigarh.amarujala.com/feature/chandigarh-local/crime-bureau-chd/rape-with-minor-girl-student-hindi-news-1/

Hindi 25.05

दलित परिवार की एक नाबालिग लड़की से खेत में दुराचार करने का मामला सामने आया है। मामला पंजाब के सुनाम(संगरूर) का है। एसएचओ जतिंदरपाल सिंह ने बताया कि सुनाम थाना के तहत एक गांव में एक लड़की अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही है।

वह छठी की छात्रा है। उसके नाना ने शिकायत दर्ज कराई है कि शनिवार दोपहर रणजीत सिंह नाम का व्यक्ति उसको बहला फुसला कर पास के खेत में ले गया और उससे दुराचार किया।

बाद में लड़की को डरा धमका कर घर छोड गया। पीड़िता ने सारी घटना अपने नाना को बताई। नाना की शिकायत पर पुलिस ने रणजीत सिंह के खिलाफ दुराचार का मामला दर्ज किया है। आरोपी फरार है और गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापामारी कर रही है।

इनेक्स् लाइव

दलितों की बारात को बंधक बनाया

http://inextlive.jagran.com/young-men-made-particular-sect-procession-mortgage-77433

Hindi 25.05-2

उधलन गांव में दलित समाज की बारात चढ़त के दौरान रविवार दोपहर सांप्रदायकि बवाल होने से बच गया. संप्रदाय विशेष के दबंग युवकों ने चढ़त के दौरान महिलाओं से छेड़छाड़ करते हुए खींचने प्रयास किया. तमंचे व डंडों के बल पर बारात बंधक बना ली. उधर,दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाए पुलिस ने बारातियों पर ही लाठी फटकार कर दौड़ा दिया. आक्रोशित दलितों ने दोषियों पर कार्रवाई न होने की दशा में गांव से पलायन करने की धमकी दी.

संप्रदाय विशेष बाहुल गांव

उलधन गांव में दलित सतपाल का परिवार रहता है. रविवार दोपहर उसकी बेटी बबीता की बारात लिसाड़ी गेट मेरठ से तय शुदा समय पर पहुंच गई. चढ़त के दौरान दूल्हा ब्रहमपाल पुत्र जयसिंह बग्गी पर सवार हुआ तो बाराती डीजे पर नाचने लगे. संप्रदाय विशेष के दर्जन भर दबंग युवक वहां पहुंचे और नाच रही महिलाओं से छेड़छाड़ करते हुए खींचने का प्रयास किया.

बरात रही घंटों तक बंधक

उधर, समाज के लोगों ने विरोध किया तो आरोपी भारी पड़े और बारातियों से मारपीट करते हुए बंधक बना लिया. उधर, दहशत जुदा दलितों पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी. एसओ मनोज कुमार भारी भरकम पुलिस फोर्स के साथ वहां पहुंचे, लेकिन डंडा व तमंचा के बल पर बारात रोके खड़े आरोपियों पर कार्रवाई करने की बजाए पीडि़तों पर ही लाठी फटकार दौड़ा दिया.

पुलिस के खिलाफ आक्रोश

वहीं, दलित समाज के लोगों में पुलिस को लेकर आक्रोश फैल गया और तनाव व्याप्त हो गया. सीओ किठौर रितेश सिंह भी वहां पहुंचे और उक्त मामले की जानकारी ली. एसओ मनोज ने आरोपियों का पक्ष रखते हुए कहा कि बाराती ही शराब पीकर उत्पात मचा रहे थे. बंधक बनाने के आरोप निराधार है.

एसओ की टिप्पणी से बिफरी महिलाएं

संप्रदाय विशेष के आरोपी दबंगों पर कार्रवाई करने की बजाए एसओ मनोज कुमार आरोपियों द्वारा परोसी जा रही कोल्ड ड्रिंक पीने लगे. महिलाओं ने दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की तो आरोप है समाज के प्रति अभद्र टिप्पणी करते हुए शराबी बता दिया.

पहले भी हुई हैं घटनाएं

दलित समाज के लोगों में पुलिस व आरोपियों का इतना भय व्याप्त था कि पूर्व में हुई घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने थाने नहीं पहुंचे. सुरेंद्र ने बताया कि उसकी बेटी की बारात गत दस मई को रिठानी से आई थी उसमें भी संप्रदाय विशेष के लोगों ने जमकर बवाल करते हुए बारातियों से मारपीट की और डीजे तोड़ दिए थे.

दैनिक भास्कर

अलीराजपुर के गांव में दलित नहीं पी सकते हैंडपंप से पानी

http://www.bhaskar.com/news/c-8-1159428-NOR.html

Hindi 25.05-3

(मध्य प्रदेश). अलीराजपुर ज़िला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर घटवानी गांव के बाहुबलियों ने दलितों को हैंडपंप के आसपास आने पर रोक लगा रखी है। ज्यादती का आलम यह है कि जानवर तो हैंडपंप से निकला पानी पी सकते हैं, लेकिन दलित नहीं। इसके चलते दलित समाज के 200 से भी ज़्यादा परिवार गंदे कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं।

हैरानी की बात यह है कि दलितों को कुएं का गंदा पानी पीने के मजबूर करने वालों पर कार्रवाई करने की जगह प्रशासन दलितों की बस्ती में एक अलग हैंडपंप लगाने की बात कर रहा है।

नहीं भरने देते हैं पानी : घटवानी गांव में दलितों की एक अलग बस्ती है। इसमें लगभग 200 घर हैं। गांव का मुख्य मोहल्ला बस्ती से ही लगा हुआ है। इसमें एक हैंडपंप है, लेकिन दलित बस्ती के लोगों को पंप से पानी भरने की इजाजत नहीं है। बस्ती में रहने वाली पिंकी नामक महिला ने बताया कि यदि बस्ती का कोई व्यक्ति पंप के आसपास भी चला जाए तो गांव के दबंग उसे फटकार कर भगा देते हैं।

प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई, कहा-बस्ती में खुदवाएंगे पंप सालों से पानी के लिए पीड़ा झेल रहे बस्ती के लोगों ने तंग आकर जिला प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन वहां भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। कलेक्टर शेखर वर्मा गांव के दबंगों की ज्यादती की बात स्वीकार करते हैं। वे कहते हैं कि दलितों की बस्ती में एक नया पंप लगाने के निर्देश दे दिए गए हैं। वर्मा का कहना है कि दलितों को हैंडपंप से पानी पीने से रोकने वालों पर कार्रवाई के लिए पंचायत बुलाई जाएगी।

हस्त क्षेप

हिन्दू राष्ट्र के जाटलैंड में दलित जनसंहार

http://www.hastakshep.com/hindi-news/from-states/rajasthan/2015/05/25/

Hindi 25.05-4

जयपुर। राजस्थान का जाट बाहुल्य नागौर जिला जिसे जाटलैंड कह कर गर्व किया जाता है, आधिकारिक रूप से अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए एक‘अत्याचारपरक जिला‘ है। यहाँ के दलित आज भी दोयम दर्जे के नागरिक की हैसियत से ही जीवन जीने को मजबूर हैं।

दलित अत्याचार के निरंतर बढ़ते मामलों के लिए कुख्यात इस जाटलैंड का एक गाँव है  डांगावास, जहाँ पर तकरीबन 16 सौ जाट परिवार रहते हैं। इस गाँव को जाटलैंड की राजधानी कहा जाता रहा है। यहाँ पर सन् 1984 तक तो दलितों को वोट डालने का अधिकार तक प्राप्त नहीं था, हालाँकि उनके वोट पड़ते थे, मगर नाम उनका और मतदान कोई और ही करता था। यह सिर्फ वोटों तक सीमित नहीं था, जमीन के मामलों में भी कमोबेश यही हालात हैं। जमीन दलितों के नाम पर और कब्ज़ा दबंग जाटों का।

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 42 (बी ) भले ही यह कहती हो कि किसी भी दलित की जमीन को कोई भी गैर दलित न तो खरीद सकता है और न ही गिरवी रख सकता है, मगर नागौर सहित पूरे राजस्थान में दलितों की लाखों एकड़ जमीन पर सवर्ण काबिज़ हैं, डांगावास में ही ऐसी सैंकड़ों बीघा जमीन है, जो रिकॉर्ड में तो दलित के नाम पर दर्ज है, लेकिन उस पर अनाधिकृत रूप से जाट काबिज़ हैं।

डांगावास के एक दलित दौलाराम मेघवाल के बेटे बस्तीराम की 23 बीघा 5 बिस्वा जमीन पर चिमनाराम नामक दबंग जाट ने 1964 से कब्ज़ा कर रखा था, उसका शुरू-शुरू में तो यह कहना था कि यह ज़मीन हमारे 1500 रुपये में गिरवी है, बाद में दलित बस्ती राम के दत्तक पुत्र रतना राम ने न्यायालय की मदद ले कर अपनी जमीन से चिमनाराम जाट का कब्ज़ा हटाने की गुहार करते हुए एक लम्बी लडाई लड़ी और अभी हाल ही में नतीजा उसके पक्ष में आया।

दो माह पहले मिली इस जीत के बाद दलित रतना राम मेघवाल ने अपनी जमीन पर एक छोटा सा घर बना लिया और वहीँ परिवार सहित रहना प्रारम्भ कर दिया। यह बात चिमनाराम जाट के बेटों ओमाराम तथा कानाराम जाट को बहुत बुरी लगी, उसने जेसीबी मशीन ला कर उक्त भूमि पर तालाब बनाना शुरू कर दिया और खेजड़ी के हरे पेड़ काट डाले।

इस बात की लिखित शिकायत रतना राम मेघवाल की ओर से 21 अप्रैल 2015 को मेड़ता थाने में की गयी, लेकिन नागौर जिले के पुलिस महकमे में जाट समुदाय का प्रभाव ऐसा है कि उनके विरुद्ध कोई भी अधिकारी कार्यवाही करना तो दूर की बात है, सोच भी नहीं सकता है, इसलिए कोई कार्यवाही नहीं की गयी।

इसके बाद दलितों को जान से खत्म कर दने की धमकियाँ मिलने लगी और यह भी पता चला कि जाट शीघ्र ही गाँव में एक पंचायत बुला कर दलितों से जबरन यह जमीन खाली करवाएंगे अथवा मारपीट कर सकते है, तो इसकी भी लिखित में शिकायत 11 मई को रतना राम मेघवाल ने मेड़ता थाने को देकर अपनी जान माल की सुरक्षा की गुहार की, फिर भी पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की।

14 मई 2015 की सुबह 9 बजे के आस-पास डांगावास गाँव में जाट समुदाय के लोगों ने अवैध पंचायत बुलाई, जिसमे ज्यादातर वे लोग बुलाये गए, जिन्होंने दलितों के नाम वाली जमीनों पर गैरकानूनी कब्ज़े कर रखे हैं, इस हितसमूह ने तय किया कि अगर रतना राम मेघवाल इस तरह अपनी ज़मीन वापस ले लेगा, तो ऐसे तो सैकड़ों बीघा जमीन और भी है जो हमें छोडनी पड़ेगी, अतः हर हाल में दलितों का मुंह बंद करने का सर्वसम्मत फैसला करके सब लोग हमसलाह हो कर हथियारों–लाठियों, बंदूकों, लोहे के सरियों इत्यादि से लैस होकर तकरीबन 500 लोगों की भीड़ डांगावास गाँव से 2 किमी दूरी पर स्थित उस जमीन पर पहुंची, जहाँ पर रतना राम मेघवाल और उसके परिजन रह रहे थे।

उस समय खेत पर स्थित इस घर में 16 दलित महिला पुरुष मौजूद थे, जिनमें पुरोहितवासनी पादुकला के पोखर राम तथा गणपत राम मेघवाल भी शामिल थे। ये दोनों रतना राम की पुत्रवधू के सगे भाई हैं, अपनी बहन से मिलने आये हुए थे। दलितों को तो गाँव में हो रही पंचायत की खबर भी नहीं थी कि अचानक सैंकड़ों लोग ट्रेक्टरों और मोटर साईकलों पर सवार हो कर आ धमके और वहां मौजूद लोगों पर धावा बोल दिया।

उन्होंने औरतों को एक तरफ भेज दिया, जहाँ पर उनके साथ ज्यादती की गयी तथा विरोध करने पर उनके हाथ पांव तोड़ दिए गए, दो महिलाओं के गुप्तांगों में लकड़ियाँ घुसेड़ दी गयीं, वहीँ दूसरी ओर दलित पुरुषों पर आततायी भीड़ का कहर टूट गया। उन्हें ट्रेक्टरों से कुचल-कुचल कर मारा जाने लगा, लाठियों और लोहे के सरियों से हाथ पांव तोड़ दिए गए, रतना राम के पुत्र मुन्ना राम पर गोली चलायी गयी, लेकिन उसी समय किसी ने उसके सिर पर सरिये से वार कर दिया जिससे वह गिर पड़ा और गोली भीड़ के साथ आये रामपाल गोस्वामी को लग गई, जिसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

जाटों की उग्र भीड़ ने मजदूर नेता पोखर राम के ऊपर ट्रेक्टर चढ़ाया तथा उनकी आँखों में जलती हुयी लकड़ियाँ डाल दी, लिंग नोंच लिया। उनके भाई गणपत राम की आँखों में आक वृक्ष का दूध डाल कर आंखें फोड़ दी गयीं। इस तरह एक पूर्व नियोजित जनसंहार के तहत पोखर राम, रतना राम तथा पांचाराम मेघवाल की मौके पर ट्रेक्टर से कुचल कर हत्या कर दी गयी तथा गणपत राम एवं गणेश राम सहित 11 अन्य लोगों को अधमरा कर दिया गया।

मौत का यह तांडव दो घंटे तक जारी रहा, जबकि घटनास्थल से पुलिस थाना महज़ साढ़े तीन किमी दूरी पर स्थित है। लेकिन दुर्भाग्य से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक तथा मेड़ता थाने का थानेदार तीनों ही जाट होने के कारण उन्होंने सब कुछ जानते हुए भी इस तांडव के लिए पूरा समय दिया और जब सब ख़त्म हो गया, तब मौके पर पंहुच कर सबूत मिटाने और घायलों को हटाने के काम में लगे।

मनुवादी गुंडों की दादागिरी इस स्तर तक थी कि जब उन्हें लगा कि कुछ घायल जिंदा बच कर उनके विरुद्ध कभी भी सिर उठा सकते है तो उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में मेड़ता अस्पताल पर हमला करके वहां भी घायलों की जान लेने की कोशिश की। अंततः घायलों को अजमेर उपचार के लिए भेज दिया गया और मृतकों का पोस्टमार्टम करवा कर उनके अंतिम संस्कार कर दिए गए।

पीड़ित दलितों के मौका बयान के आधार पर पुलिस ने बहुत ही कमजोर लचर सी एफआईआर दर्ज की तथा दूसरी ओर रामपाल गोस्वामी की गोली लगाने से हुयी मौत का पूरा इलज़ाम दलितों पर डालते हुए गंभीर रूप से घायल दलितों सहित 19 लोगों के खिलाफ हत्या का बेहद मज़बूत जवाबी मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

इस तरह जालिमों ने एक सोची समझी साज़िश के तहत कर्ताधर्ता दलितों को तो जान से ही ख़त्म कर दिया, बचे हुओं के हाथ पांव तोड़ कर सदा के लिए अपाहिज बना दिया और जो लोग उनके हाथ नहीं लगे या जिनके जिंदा बच जाने की सम्भावना है, उनके खिलाफ हत्या जैसी संगीन धाराओं का मुकदमा लाद दिया गया। इस तरह डांगावास में दबंग जाटों के सामने सिर उठा कर जीने की हिमाकत करने वाले दलितों को पूरा सबक सिखा दिया गया।

राज्य की वसुंधराराजे की सरकार ने इस निर्मम नरसंहार को जमीनी विवाद बता कर इसे दो परिवारों की आपसी लडाई घोषित कर ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। हालाँकि पुलिस, प्रशासन और राज्य सरकार के नुमाईंदों के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि दो पक्षों के खूनी संघर्ष में सिर्फ एक ही पक्ष के लोग क्यों मारे गए तथा घायल हुए हैं।

दूसरे पक्ष को किसी भी प्रकार की चौट क्यों नहीं पंहुची है और जब दलितों के पास आत्मरक्षा के लिए लाठी तक नहीं थी, तो रामपाल को गोली मारने के लिए उनके पास बन्दूक कहाँ से आ गयी और फिर सभी दलित या तो घायल हो गए अथवा मार डाले गए तब वह बन्दूक कौन ले गया, जिससे गोली चलायी गयी थी। मगर सच यह है कि दलितों की स्थिति गोली चलाना तो दूर की बात, वो थप्पड़ मारने का साहस भी अब तक नहीं जुटा पाए हैं। 23 मई को एक और घायल गणपत राम ने भी दम तोड़ दिया है, जिसकी लाश को लावारिस बता कर गुप-चुप पोस्टमार्टम कर दिया गया।

नागौर जिला दलित समुदाय के लोगों की कब्रगाह बन गया है, यहाँ पर विगत एक साल में अब तक दर्जनोंदलितों की हत्यायें हो चुकी हैं, इसी डांगावास गाँव में जून 2014 में जाटों द्वारा मदन मेघवाल के पांव तोड़ दिए गए है, जनवरी 2015 में मोहन मेघवाल के बेटे चेनाराम की हत्या कर दी गयी, बसवानी गाँव की दलित महिला जड़ाव को जिंदा जला दिया गया, उसका बेटा भी बुरी तरह से झुलस गया। मुंडासर की एक दलित महिला को ज्यादती के बाद ट्रेक्टर के गर्म सायलेंसर से दाग दिया गया, लंगोड़ में एक दलित को जिंदा ही दफना दिया गया, हिरड़ोदा में दलित दुल्हे को घोड़ी से नीचे पटक कर जान से मारने का प्रयास किया गया।

इस तरह नागौर की जाटलैंड में दलितों पर कहर जारी है और राजस्थान का दलित लोकतंत्र की नई नीरों, चमचों की महारानी, प्रचंड बहुमत से जीत कर सरकार चला रही वसुंधराराजे के राज में अपनी जान के लिए भी तरस गया है। राज्य भर में दलितों पर अमानवीय अत्याचार की घटनाएँ बढ़ती जा रही है और राज्य के आला अफसर और सूबे के वजीर विदेशों में ‘रिसर्जेंट राजस्थान‘ के नाम पर रोड शौ करते फिर रहे है।

कोई भी सुनने वाला नहीं है, राज्य के गृह मंत्री तो साफ कह चुके है कि उनके पास कोई ज़ादू की छड़ी तो है नहीं जिससे अपराधियों पर अंकुश लगा सकें। पुलिस ‘अपराधियों में भय और आम जन में विश्वास’ के अपने ध्येय वाक्य के ठीक विपरीत ‘ आम जन में भय और अपराधियों में विश्वास ‘ कायम करने में सफल होती दिखलाई पड़ रही है। जाटलैंड का यह निर्मम दलितसंहार संघ के कथित हिन्दू राष्ट्र में दलितों की स्थिति पर सवाल खड़ा कर रहा है।

News Monitored by Kuldeep Chandan & Kalpana Bhadra

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